शनि कृपा के लिए अवश्य करें शनिवार व्रत!

शनि साढ़े साती और ढैय्या से परेशान हैं? शनि कृपा के लिए अवश्य करें शनिवार व्रत!

शनिवार व्रत 2026: शनि देव यह एक ऐसा नाम है जिसे सुनते ही लोग भयभीत हो जाते हैं। इन्हें कर्मफल दाता और न्याय के देवता कहा जाता है जो लोगों को उनके अच्छे और बुरे कर्मों का फल देते हैं। जब यह कुपित हो जाते हैं, तब आपके काम बनते-बनते बिगड़ने लगते हैं और योजनाएं असफल होने लगती हैं। शनि ग्रह का प्रभाव किसी व्यक्ति को राजा से रंक और रंक से राजा बनाने का सामर्थ्य रखता है।       

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इसी क्रम में, कुंडली में शनि देव की स्थिति अशुभ होना या फिर साढ़े साती या ढैय्या का नकारात्मक प्रभाव मनुष्य जीवन को प्रभावित कर सकता है। बता दें कि शनि देव का संबंध कर्म और न्याय से माना जाता है और सनातन धर्म में इनसे अनेक प्राचीन मान्यताएं जुड़ी हैं। इसी क्रम में, शनि देव को प्रसन्न करने के लिए शनिवार व्रत 2026 शुभ माना जाता है जो भगवान शनि को समर्पित होता है। इस व्रत को भय की वजह से नहीं, बल्कि शनि देव की कृपा प्राप्ति के उद्देश्य से किया जाता है। अगर आपके जीवन में शनि देव का प्रभाव अत्यधिक हो रहा है, तो आपके लिए शनिवार व्रत 2026 करना फलदायी रहेगा। 

शनिवार व्रत 2026: महत्व 

शनिवार व्रत 2026 भगवान शनि को समर्पित एक साप्ताहिक हिंदू व्रत है। शनिवार के स्वामी शनि देव को माना जाता है। बता दें कि इस व्रत को हिंदू धर्म में बड़े स्तर पर किया जाता है और शनिवार व्रत 2026 को महिलाओं और पुरुषों दोनों द्वारा किया जाता है। 

शनिवार के दिन सेवा भाव से शनि ग्रह के मंत्रों का जाप और पीपल के वृक्ष के नीचे जलाया गया सरसों के तेल का दीपक का विशेष महत्व होता है, क्योंकि यह दिन शनि महाराज को समर्पित होता है। जातकों द्वारा मुख्य रूप से जीवन में शनि से जुड़े दोषों को शांत करने, कुंडली में साढ़े साती के प्रभाव को कम करने और कर्म संबंधी क़र्ज़ के बोझ को हल्का करने के लिए इस व्रत को किया जाता है।

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सावन माह में पड़ने वाले शनिवार व्रत 2026 

अगस्त माह में पवित्र सावन का महीना लगेगा और इस दौरान पांच शनिवार पड़ रहे हैं, इसलिए इस समय को भगवान शनि देव की पूजा और शनि से संबंधित समस्याओं से राहत पाने के लिए सबसे शुभ और अनुकूल माना जाता है। आइए जानते हैं अगस्त में शनिवार व्रत कब-कब पड़ेंगे और क्या रहेगा समय। 

तिथि सूर्योदय का समयपूजा का शुभ मुहूर्त 
1 अगस्त 2026शाम 7:12 बजेशाम 5:40 बजे से 7:12 बजे तक
8 अगस्त 2026शाम 7:07 बजेशाम 5:35 बजे से 7:07 बजे तक
15 अगस्त 2026शाम 7:00 बजेशाम 5:30 बजे से 7:00 बजे तक
22 अगस्त 2026शाम 6:53 बजेशाम 5:23 बजे से 6:53 बजे तक
29 अगस्त 2026शाम 6:46 बजेशाम 5:16 बजे से 6:46 बजे तक

ध्यान देने योग्य बात: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शनिवार व्रत 2026 को जातकों द्वारा लगातार 19 शनिवारों तक किया जाता है। यह संख्या का संबंध शनि देव की 19 वर्षीय विम्शोत्तरी महादशा से माना गया है। कुछ भक्तों द्वारा भगवान शनि की कृपा पाने और कुंडली में नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए 51 शनिवार किया जाता है।

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शनिवार व्रत 2026: कौन हैं भगवान शनि?

हिंदू धर्म में भगवान शनि के पिता सूर्य देव और माता देवी छाया को माना गया है। इनकी माता छाया ने शनि देव के जन्म से पूर्व कठोर तप किया था और इसकी तपस्या का प्रभाव इनके स्वभाव में दिखाई देता है। इसी वजह से शनि देव को गंभीर, निष्पक्ष, न्यायप्रिय और चापलूसी से अप्रभावित माना जाता है। कुंडली में शनि की शुभ स्थिति व्यक्ति को भरोसेमंद, ईमानदार और जमीन से जुड़ा हुआ बनाती है। जीवन की जिन समस्याओं और कठिनाइयों को अक्सर शनि देव से जोड़कर देखा जाता है, वह क्रूरता का परिणाम नहीं, बल्कि लंबे समय से टाले गए कर्मों का फल माना जाता है।

धर्मग्रंथों में वर्णित कथा के अनुसार, जब शनि देव ने जन्म के बाद पहली बार अपनी आंखें खोलीं और उनकी दृष्टि अपने पिता सूर्य देव पर पड़ी, तब सूर्य ग्रहण घटित हुआ। यह कथा वैदिक ज्योतिष में शनि देव के प्रभाव की शक्ति को दर्शाती है। यह हमें बताती है कि शनि का प्रभाव व्यक्ति के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव, सीख और प्रगति लेकर आता है। 

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शनिवार व्रत 2026: पूजा विधि 

शनिवार व्रत 2026 की सबसे विशेष बात इस व्रत की सरलता है, इसलिए इनकी पूजा सही विधि से करना जरूरी होता है।

  • शनिवार के दिन जातक सूर्योदय से पूर्व ब्रह्म मुहूर्त में उठें। 
  • स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। शनि ग्रह से जुड़े रंग जैसे काला, गहरा नीला या गहरा बैंगनी पहनना शुभ माना जाता है।
  • श्रद्धाभाव से व्रत का संकल्प लें। 
  • पूजा की तैयारी करें और शनि देव की प्रतिमा या चित्र को साफ काले कपड़े पर स्थापित करें। उन्हें काले तिल, सरसों का तेल और लोहे की वस्तु भक्तिभाव से अर्पित करें। साथ ही, सरसों के तेल का दीपक जलाएं। 
  • पूरी एकाग्रता से शनि बीज मंत्र “ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः” का 108 बार जाप करें। साथ ही, शनि चालीसा का पाठ करें।
  • इसके बाद, आप अपने सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों या गरीबों को भोजन कराएं। 
  • शाम के समय पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और उसकी सात बार परिक्रमा करें। 
  • सूर्यास्त के बाद सात्विक भोजन, काले तिल के लड्डू, काली दाल या फलों से व्रत का पारण करें।
  • शनिवार के दिन बाल और नाख़ून नहीं काटने चाहिए। साथ ही, इस दिन तेल लगाने से बचना चाहिए।

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शनिवार व्रत 2026: किन्हें व्रत करना चाहिए?

  • जिन जातकों की शनि साढ़े साती चल रही हैं, उनके लिए यह समय जीवन के लिए बेहद कठिन माना जाता है। ऐसे लोगों के लिए शनिवार व्रत 2026 को करना बहुत फलदायी होता है।
  • यह व्रत उन लोगों के लिए भी लाभकारी माना जाता है जो शनि ढैया से प्रभावित हैं। शनि ढैय्या के कारण करियर में देरी, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां और पारिवारिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है।
  • जिन जातकों की कुंडली में शनि कमज़ोर या पीड़ित अवस्था में होते हैं जैसे कि शनि का मेष राशि में नीच का होना, सूर्य के कारण अस्त होना या पाप ग्रहों की दृष्टि से प्रभावित होना आदि के लिए नियमित रूप से शनिवार का व्रत करना शुभ माना जाता है। इससे शनि के सकारात्मक गुणों को मज़बूत करने में सहायता मिलती है। 
  • मकर और कुंभ राशि के जातकों को शनि ग्रह से विशेष संबंध माना जाता है, क्योंकि इन दोनों राशियों के स्वामी शनि देव हैं। ऐसे में, शनिवार व्रत 2026 का पालन करना इन राशियों के लिए विशेष महत्व रखता है। 

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शनिवार व्रत 2026 से जुड़ी पौराणिक कथा

हिंदू धर्म में हर व्रत से जुड़ी कथा का वर्णन मिलता है और इसी क्रम में, शनिवार व्रत से जुड़ी कथा का संबंध राजा विक्रमादित्य से है।

राजा विक्रमादित्य हिंदू धर्म के सबसे प्रसिद्ध और न्यायप्रिय राजाओं में से एक माने जाते थे। एक बार उनके दरबार में सभी नवग्रहों को आमंत्रित किया गया। जब राजा ने सभी ग्रहों के लिए आसन निर्धारित किए, तो शनि देव को लोहे का आसन दिया गया था जिसे सबसे अंत में रखा गया था। अनजाने में शनि देव का स्थान अन्य ग्रहों से नीचे हो गया। 

यह देखकर शनि देव जाने से पहले कहते हैं कि “तुम मेरी शक्ति को नहीं जानते। सूर्य एक राशि में एक माह रहते हैं, चंद्रमा लगभग ढाई दिन, मंगल डेढ़ माह और बृहस्पति तेरह माह तक रहते हैं। लेकिन मैं एक राशि में ढाई वर्ष या साढ़े सात वर्ष तक रहता हूं। मेरी साढ़ेसाती के दौरान भगवान राम को भी वनवास का कष्ट सहना पड़ा था। अब तुम्हारे समय की शुरुआत होने वाली है।“

कुछ समय बाद शनि देव ने एक घोड़े के व्यापारी का रूप धारण किया और उनके पास अत्यंत सुंदर घोड़े थे। राजा विक्रमादित्य सबसे अच्छे घोड़े पर सवार हुए, परंतु वह घोड़ा बहुत तेज़ गति से दौड़ पड़ा और उन्हें दूर जंगल में ले गया। राजा अपने राज्य से बहुत दूर, अकेले और अनजान स्थान पर चले गए थे। 

इसके बाद, साढ़े साती के सात वर्षों में राजा विक्रमादित्य को अनेक कठिनाइयों और समस्याओं का सामना करना पड़ा। इस दौरान उनका राज्य, पहचान, सम्मान और स्वतंत्रता सब उनसे छिन गए, और उन पर चोरी के आरोप लगाए गए। उनके हाथ और पैर भी काट दिए गए। उन्हें एक तेल निकालने वाले के यहां सेवक के रूप में काम करना पड़ा। लेकिन, इन सबके बावजूद उन्होने धर्म का मार्ग नहीं छोड़ा और सदाचार बनाए रखा। 

अंत में शनि देव राजा विक्रमादित्य के सपने में प्रकट हुए। उन्होंने कहा कि यह सब क्रूरता नहीं थी, बल्कि मेरी शक्ति को कम आंकने का परिणाम था। राजा विक्रमादित्य ने शनि देव के सामने पूर्ण समर्पण किया और उनसे क्षमा मांगी। शनि देव राजा की सच्ची पश्चाताप की भावना देखकर प्रसन्न हुए और उन्हें उनकी पहचान, राज्य, हाथ-पैर और सम्मान सब वापस लौटा दिया। 

ऐसा कहा जाता है कि राजा विक्रमादित्य ने जीवन भर हर शनिवार को शनि देव के लिए व्रत किया।

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शनिवार व्रत 2026 में शनि देव और हनुमान जी की पूजा का महत्ब 

शनिवार व्रत से जुड़ी एक अन्य कथा भी प्रचलित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब हनुमान जी माता सीता की तलाश में लंका पहुंचें, तब उन्होंने रावण के महल के एक अंधेरे कक्ष में भगवान शनि को बंदी पाया। ऐसा कहा जाता है कि रावण ने शनि देव को अपने महल में कैद कर रखा था, ताकि उनकी दृष्टि लंका पर न पड़ें और न ही विनाश हो। 

हनुमान जी ने शनि देव को इस अवस्था में देखते ही उन्हें कैद से आज़ाद कर दिया। लेकिन जैसे ही शनि देव बाहर आए, तो उनकी दृष्टि अनजाने में हनुमान जी पर पड़ गई। इसकी वजह से कुछ समय के लिए हनुमान जी को भी शनि की दृष्टि का प्रभाव सहन पड़ा था। भगवान हनुमान जी की निःस्वार्थ सहायता और करुणा से शनि देव अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने वरदान देते हुए कहा, “जो भी तुम्हारा भक्त होगा और मेरे प्रभाव से कष्ट पाएगा, उसको कभी भी मेरे द्वारा कष्टों का सामना नहीं करना पड़ेगा। 

इसी वजह से शनिवार के दिन हनुमान जी की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। शनिवार के दिन हनुमान मंदिर जाना, हनुमान चालीसा का पाठ करना, हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाना और सरसों के तेल अर्पित करना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से जातक पर शनि देव और हनुमान जी की कृपा बनी रहती है। 

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. सावन 2026 में कितने शनिवार पड़ेंगे?

सावन माह यानी कि अगस्त के महीने में कुल 5 शनिवार पड़ेंगे।

2. शनिवार व्रत कितने शनिवार तक किया जाता है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शनिवार व्रत को लगातार 19 शनिवार किया जाता है। 

3. शनिवार के दिन किस देवता की पूजा करनी चाहिए?

शनिवार के दिन भगवान शनि और हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए।