बुध का कर्क राशि में गोचर: शुभ या अशुभ?

शत्रु की राशि में होगा बुध का गोचर, किन राशियों पर टूट सकता है मुसीबत का पहाड़? जानें!

बुध का कर्क राशि में गोचर: वैदिक ज्योतिष में प्रत्येक ग्रह को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है और इन्हीं में से एक है ग्रहों के राजकुमार या युवराज के नाम से प्रसिद्ध बुध हैं। बुद्धि, वाणी, संचार और वाणी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को नियंत्रित करने वाले बुध ग्रह का गोचर बहुत अहम माना जाता है क्योंकि इनकी चाल, स्थिति और राशि में परिवर्तन का सीधा असर मनुष्य जीवन पर पड़ता है। साथ ही, इनका शुभ-अशुभ प्रभाव व्यक्ति के जीवन को गहराई से प्रभावित करने की अपार क्षमता है। सामान्य शब्दों में कहें, तो जब बुध किसी जातक की कुंडली में कमज़ोर या मज़बूत स्थिति में बैठे होते हैं, तो इसका असर आपके जीवन पर प्रत्यक्ष रूप से पड़ता है। इसी क्रम में, अब बुध महाराज जल्द ही कर्क राशि में गोचर करने जा रहे हैं जिसके बारे में हम आगे बात करेंगे। 

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ज्योतिष की दुनिया में होने वाले हर घटना से एस्ट्रोसेज एआई आपको सबसे पहले अवगत करवाता रहा है। ऐसे में, हमारा यह विशेष ब्लॉग आपको “बुध का कर्क राशि में गोचर” से जुड़ी समस्त जानकारी प्राप्त होगी। बुध देव का कर्क राशि में गोचर न सिर्फ़ सभी 12 राशियों को प्रभावित करेगा, बल्कि देश-दुनिया के साथ-साथ शेयर मार्केट पर भी अपना प्रभाव डाल सकता है। इसके  परिणामस्वरूप, कुछ राशियों को शुभ फल प्राप्त होंगे जबकि कुछ राशियों को सावधान रहना होगा। वहीं, बुध ग्रह के दुष्प्रभावों से बचने के लिए आप किन उपायों को अपना सकते हैं। तो आइए बिना देर किए अब हम आगे बढ़ते हैं और जानते हैं कि कौन सी हैं वह राशियां? लेकिन उससे नज़र ड़ालते हैं बुध का कर्क राशि में गोचर के समय पर। 

बुध का कर्क राशि में गोचर: कब और क्या रहेगा समय

वैदिक ज्योतिष में हर ग्रह अपनी-अपनी गति से चलते हैं जहां शनि देव को सबसे मंद गति से चलने वाला ग्रह माना जाता है। वहीं, बुध देव तेज़ रफ़्तार से चलते हैं इसलिए इनका गोचर और स्थिति में बदलाव जल्दी-जल्दी देखने को मिलता है। बुध ग्रह का प्रत्येक गोचर 23 से 27 दिनों में होता है और अब यह 22 जून 2026 की दोपहर 03 बजकर 09 मिनट पर वृषभ राशि से निकलकर कर्क राशि में गोचर करने जा रहे हैं। बता दें कि बुध ग्रह के लिए कर्क राशि, शत्रु राशि मानी जाती है क्योंकि इस राशि के स्वामी चंद्र देव हैं, जो इनके शत्रु माने गए हैं। ऐसे में, कर्क राशि में बुध का गोचर ज्यादा शुभं नहीं कहा जा सकता है और यह जातकों को सकारात्मक परिणाम देने में पीछे रह सकता है। चलिए अब हम आपको अवगत करवाते हैं बुध की कर्क राशि में विशेषताओं से। 22 June Mercury Transit In Cancer 15:09  

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बुध ग्रह कर्क राशि में कैसा फल देता है?

बुध महाराज का कर्क राशि में बैठे होना आपको अच्छे और बुरे दोनों तरह के परिणाम दे सकता है। हालांकि। यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति अपनी ऊर्जा और विचारों का उपयोग किस दिशा में करता है। यदि जातक अपना ध्यान स्वयं पर केंद्रित करता है, तो वह अपनी भावनाओं को बेहतर ढंग से समझ सकता है और साथ ही, उन्हें दूसरों के सामने स्पष्ट रूप से व्यक्त कर सकता है। 

कर्क राशि में बुध के अंतर्गत जन्मे लोग आमतौर पर मानसिक रूप से मज़बूत होने के साथ-साथ अत्यंत भावुक भी होते हैं। इनका इंट्यूशन शक्ति बहुत मज़बूत होती है जो इन्हें परिस्थितियों को गहराई से समझने में सहायता करता है। जैसे कि हम जानते हैं कि बुध देव एकाग्रता, तर्क और बुद्धि के कारक माने जाते हैं, लेकिन जब यह कर्क राशि में प्रवेश करते हैं, तब आपको अत्यधिक भावुक बनाने का काम करते हैं। ऐसे में, आप भावनाओं के भवर में फंस सकते हैं जिससे बाहर निकलना आपको कठिन लग सकता है। इसके परिणामस्वरूप, आपको चिंता, तनाव और हताशा जैसी मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। 

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हालांकि, अगर कुंडली में बुध की स्थिति मजबूत और अनुकूल हो, तो जातक इन सभी चुनौतियों से उबरने की क्षमता रखता है और जीवन की समस्याओं का समाधान आसानी से ढूंढ लेता है। बुध कर्क राशि के तहत जन्मे जातकों का प्रदर्शन ज्योतिष, चिकित्सा, अध्यात्म, आयुर्वेद, जनसंचार और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से अच्छा होता है। इन क्षेत्रों में संवेदनशीलता और समझदारी दोनों की आवश्यकता होती है। अब हम आपको बताने जा रहे हैं बुध ग्रह के बारे में। 

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आख़िर कौन हैं बुध ग्रह?

ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को सभी नौ ग्रहों में महत्वपूर्ण दर्जा दिया गया है जो सूर्य देव के बहुत निकट स्थित हैं। बता दें कि बुध देव को “ग्रहों के युवराज” का पद भी प्राप्त है जिन्हें एक शुभ ग्रह माना गया है। हालांकि, इन्हें द्विस्वभाव ग्रह माना जाता है यानी कि कुंडली में बुध महाराज जिस ग्रह के साथ बैठे होते है, जातक को उसके अनुसार ही फल प्रदान करते हैं। 

अगर बुध महाराज आपकी कुंडली में शुभ ग्रहों जैसे गुरु, शुक्र और चंद्रमा के साथ स्थित होते हैं, तो आपको कार्यों में सकारात्मक परिणाम देंगे। अगर यह कुंडली में किसी अशुभ या पापी ग्रह के साथ बैठ जाते हैं, तो आपको अशुभ फल प्रदान करते हैं। अगर बुध देव आपकी कुंडली में गुरु, शुक्र और चंद्रमा जैसे शुभ ग्रहों के साथ स्थित हों, तो यह आपके कार्यों में सकारात्मक परिणाम प्रदान करते हैं। वहीं, जब बुध किसी अशुभ या पापी ग्रह के साथ युति में आते हैं, तो इनके प्रभाव से नकारात्मक फल मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

बात करें राशियों की, तो बुध ग्रह सभी राशियों में मिथुन और कन्या राशि के स्वामी माने जाते हैं। इनमें से कन्या राशि में ये उच्च अवस्था में होते हैं, जबकि मीन राशि में इनकी नीच अवस्था होती है। 27 नक्षत्रों में बुध अश्लेषा, ज्येष्ठा और रेवती नक्षत्र के अधिपति हैं। इनके मित्र ग्रहों में सूर्य और शुक्र शामिल हैं, जबकि चंद्रमा और मंगल को इनके शत्रु माना जाता है। 

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बुध ग्रह से बनने वाले अशुभ योग 

नवग्रहों के युवराज के नाम से विख्यात बुध ग्रह द्विस्वभाव ग्रह है जिनकी ग्रहों के साथ शुभ-अशुभ स्थिति कुंडली में अनेर्क तरह के शुभ-अशुभ योगों का निर्माण करती है। यह योग जातक को अच्छे और बुरे दोनों तरह के परिणाम देने में सक्षम होते हैं। आइए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं कौन से हैं वह योग। 

बुध-शनि योग

बुध ग्रह से बनने वाला पहला अशुभ योग है बुध-शनि योग। अगर किसी जातक की कुंडली में जब बुध और शनि देव एक साथ विराजमान होते हैं, उस समय बुध-शनि योग निर्मित होता है। इन अशुभ योग के प्रभाव से जातक हद से ज्यादा विश्लेषणात्मक और दूसरों की आलोचना करने वाला बन सकता है या फिर आप तनाव या डिप्रेशन में जा सकते हैं।                                                      

बुध दोष 

कुंडली में बुध दोष का निर्माण उस समय होता है जब कुंडली में बुध महाराज शनि, राहु या मंगल जैसे पापी ग्रहों के साथ स्थित होते हैं या इन ग्रहों की दृष्टि बुध पर पड़ती है। इस प्रकार का अशुभ योग जातक के जीवन में विशेष रूप से संचार, शिक्षा और व्यापार से जुड़ी समस्याओं को जन्म देता है। 

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बुध का कर्क राशि में गोचर: कमज़ोर बुध के लक्षण

याददाश्त का कमज़ोर होना: कुंडली में बुध का प्रभाव नकारात्मक होने पर व्यक्ति की याददाश्त कमज़ोर होने लगती है। वह बातों को याद नहीं रख पाता है और न ही उसका ध्यान काम में लगता है। 

तनाव या चिंता बने रहना: कमज़ोर बुध के प्रभाव से जातक किसी न किसी बात को लेकर ज्यादातर तनाव या चिंता में नज़र आता है।     

सही निर्णय न लेना: अशुभ बुध का सीधा प्रभाव जातक की निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करता है। ऐसे मे, व्यक्ति सही निर्णय लेने में असमर्थ होता है और लगातार सोच-विचरने के बाद भी वह गलत निर्णय ले सकता है।

व्यापार में नुकसान: बुध ग्रह को व्यापार का कारक ग्रह माना जाता है, इसलिए जब कुंडली में इसकी स्थिति कमज़ोर होती है, तो इसका सीधा प्रभाव व्यवसाय पर पड़ता है। ऐसे में व्यक्ति को व्यापार में बार-बार नुकसान उठाना पड़ सकता है और आर्थिक स्थिरता बनाए रखना मुश्किल हो जाता है। 

वाणी और संचार कौशल की समस्या: जब कुंडली में बुध दुर्बल अवस्था में होता है, तो यह आपकी वाणी और संचार कौशल को भी प्रभावित करता है। ऐसे में जातक को बोलने में कठिनाई, अभिव्यक्ति में कमी या बात को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।  

त्वचा और नस से जुड़े रोग: बुध ग्रह की अशुभता का प्रभाव आपके स्वास्थ्य पर भी देखने को मिलता है। ऐसे में, जातक को त्वचा से जुड़ी रोग जैसे एलर्जी, खुजली आदि समस्याएं हो सकती हैं। साथ ही, आपको हाथ-पैरों में सुन्नपन या नसों से संबंधित रोग भी परेशान कर सकते हैं। 

बातचीत में परेशानी: बुध संचार कौशल को नियंत्रित करते हैं और इसके परिणामस्वरूप, इनका नकारात्मक प्रभाव की वजह से जातक अपनी बात स्पष्ट रूप से व्यक्त करने में कठिनाई महसूस करता है। ऐसे में वह अपनी भावनाओं और विचारों को सही तरीके से दूसरों के सामने नहीं रख पाता है जिसकी वजह गलतफहमियां जन्म लेती हैं। 

पढ़ाई में समस्या: जिन जातकों का बुध कमज़ोर अवस्था में होता है, उन्हें एकाग्रता और समझने की क्षमता कमज़ोर हो जाती है जिसके चलते आपका मन पढ़ाई में नहीं लगता, विषयों को समझने में कठिनाई होती है और साथ ही, शिक्षा में आपको समस्याओं का सामना करना पड़ता है। 

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बुध का कर्क राशि में गोचर: सरल एवं अचूक उपाय 

  • बुध ग्रह को कुंडली में बलवान करने के लिए बुधवार के दिन भगवान गणेश को दूर्वा (हरी घास), पान आदि चीज़ें अर्पित करें। 
  • बुध देव से शुभ परिणाम पाने के लिए बुधवार को मूंग दाल और कांसे के बर्तन का दान करें। 
  • बुधवार के दिन हरे रंग के कपड़े, हरी चूड़ियां और हरी सब्जियां आदि का दान करें। इस उपाय से बुध ग्रह मज़बूत होते हैं। 
  • बुध ग्रह के नकारात्मक प्रभाव से राहत पाने के लिए पंचमुखी रुद्राक्ष को धारण करना फलदायी साबित होता है। 
  • बुध ग्रह का प्रिय रंग हरा है इसलिए इनकी कृपा प्राप्ति के लिए घर की महिलाओं को हरे रंग के कपड़े और चूड़ियां भेंट करें।
  • बुधवार के दिन बुध ग्रह के बीज मंत्र “ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः” का या “ॐ गण गणपतये नमो नमः” मंत्र का 108 बार जाप करना शुभ रहेगा। 
  • कुंडली में बुध ग्रह को शांत करने के लिए चांदी का कड़ा या अंगूठी धारण करें। 

बुध ग्रह की जन्म कथा 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बृहस्पति देव की धर्मपत्नी तारा बेहद खूबसूरत थी। एक बार देवी तारा की मुलाकात चंद्रदेव से हुई और उनकी खूबसूरती को देखकर चंद्रदेव मोहित हो गए। उन्होंने मन ही मन देवी तारा को पाने का निश्चय किया। हालांकि, देवी तारा पहले से विवाहित थी और बृहस्पति देव की अर्धागिनी थी। ऐसी परिस्थिति में तारा किसी अन्य के लिए आरक्षित नहीं थी। 

जब चंद्रदेव को देवी तारा को पाने का कोई भी उपाय न सुझा, तो उन्होंने उंनका अपहरण कर दिया। जब बृहस्पति देव को इस बात के बारे में पता चला, तो वह अत्यंत क्रोधित हो गए। जब बृहस्पति देव ने चंद्रदेव से देवी तारा को सकुशल स्वर्ग भेजने के लिए कहा, तब चंद्रदेव ने उनकी मांग को ठुकरा दिया और उन्हें युद्ध के लिए ललकारा। इसमें देवी तारा की भी सहमति प्रतीत होती है क्योंकि उन्होंने आगे चलकर एक पुत्र को जन्म दिया जो संसार में बुध के नाम से जाना गया। 

मान्यताओं के अनुसार, चंद्रदेव और बृहस्पति देव के बीच भयंकर युद्ध हुआ। इस युद्ध की वजह से पृथ्वी लोक पर हाहाकार मच गया। उस समय देवी-देवताओं ने ब्रह्माजी से युद्ध रोकने के लिए आग्रह किया, तब ब्रह्मा जी की मध्यस्थता के कारण युद्ध रोक दिया गया। इसके पश्चात, ब्रह्माजी ने देवी तारा को बृहस्पति जी को सौंप दिया। लेकिन, जब तारा ने पुत्र बुध को जन्म दिया, तो पुत्र को लेकर पुनः चंद्र देव और बृहस्पति के बीच मौखिक युद्ध छिड़ गया, तब  देवी तारा ने ब्रह्माजी को बताया कि बुध के पिता चंद्रदेव हैं।

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बुध का कर्क राशि में गोचर: राशि अनुसार प्रभाव और उपाय 

मेष राशि

बुध का यह गोचर मेष राशि से चौथे भाव में होगा, जो मुख्य रूप से घर, परिवार, माता-पिता, सुख… (विस्तार से पढ़ें)) 

वृषभ राशि

वृषभ राशि के लिए बुध का यह गोचर तीसरे भाव में होगा, जो साहस, संचार कौशल, प्रयास… (विस्तार से पढ़ें)

मिथुन राशि

मिथुन राशि के लिए बुध का यह गोचर दूसरे भाव में होगा, जो धन, वाणी, परिवार और… (विस्तार से पढ़ें)

कर्क राशि

जब बुध आपकी ही राशि में गोचर करता है, तो यह आपके व्यक्तित्व, स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और… (विस्तार से पढ़ें)

सिंह राशि

सिंह राशि के लिए बुध का यह गोचर बारहवें भाव में होगा, जो खर्च, विदेश, एकांत, शोध… (विस्तार से पढ़ें) 

कन्या राशि

कन्या राशि के लिए बुध का यह गोचर ग्यारहवें भाव में होगा, जो आय, इच्छाओं की पूर्ति, मित्रता… (विस्तार से पढ़ें)

तुला राशि

बुध का यह गोचर तुला राशि से दसवें भाव में होगा, जो करियर, प्रतिष्ठा, सामाजिक पहचान और… (विस्तार से पढ़ें) 

वृश्चिक राशि 

वृश्चिक राशि के लिए बुध का यह गोचर नौवें भाव में होगा, जो भाग्य, धर्म, यात्रा, उच्च शिक्षा… (विस्तार से पढ़ें) 

धनु राशि 

धनु राशि के लिए बुध का यह गोचर आठवें भाव में होगा, जो अचानक घटनाओं, गुप्त ज्ञान, शोध… (विस्तार से पढ़ें)

मकर राशि

मकर राशि के लिए बुध का यह गोचर सातवें भाव में होगा, जो विवाह, साझेदारी, व्यापारिक संबंध… (विस्तार से पढ़ें)

कुंभ राशि

कुंभ राशि के लिए बुध का यहगोचर छठे भाव में होगा, जो ऋण, शत्रु, स्वास्थ्य, प्रतियोगिता और… (विस्तार से पढ़ें)

मीन राशि

मीन राशि के लिए बुध का यह गोचर पांचवें भाव में होगा, जो शिक्षा, प्रेम, बुद्धि, रचनात्मकता… (विस्तार से पढ़ें)

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. बुध का कर्क राशि में गोचर कब होगा?

वाणी और संचार के ग्रह बुध 22 जून 2026 को कर्क राशि में गोचर कर जाएंगे। 

2. कर्क राशि का स्वामी कौन है?

राशि चक्र की चौथी राशि कर्क के स्वामी चंद्र देव हैं। 

3. क्या चंद्र देव और बुध ग्रह मित्र हैं?

नहीं, ज्योतिष में चंद्र ग्रह के प्रति बुध ग्रह शत्रुवत संबंध रखते हैं।