भाद्रपद अमावस्या 2026: जानें सही पूजा विधि!

कब है भाद्रपद अमावस्या 2026 में? जानें तिथि, महत्व एवं पूजा मुहूर्त

भाद्रपद अमावस्या 2026: सनातन धर्म में अमावस्या तिथि को महत्वपूर्ण माना जाता है और इस दिन दान-पुण्य और पितरों का श्राद्ध एवं तर्पण करने के लिए शुभ मानी जाती है। सभी अमावस्या तिथियों में से भाद्रपद अमावस्या 2026 विशेष रूप से पितरों से जुड़े अनुष्ठानों और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विशेष होती है। 

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इसी क्रम में, एस्ट्रोसेज एआई का यह विशेष ब्लॉग आपको “भाद्रपद अमावस्या 2026” से जुड़ी विस्तृत जानकारी प्रदान करेगा जैसे तिथि, महत्व आदि। साथ ही, आपको इस अमावस्या के धार्मिक एवं ज्योतषीय महत्व से भी अवगत करवाएंगे। तो आइए बिना देर किए शुरू करते हैं “भाद्रपद अमावस्या 2026” का यह ब्लॉग।

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भाद्रपद अमावस्या 2026: तिथि एवं पूजा मुहर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल भाद्रपद अमावस्या  11 सितंबर 2026, शुक्रवार को पड़ेगी। इस अमावस्या तिथि का आरंभ 10 सितंबर 2026 की सुबह 10 बजकर 34 मिनट पर होगा जबकि इस तिथि का समापन 11 सितंबर 2026 की रात 08 बजकर 58 मिनट पर हो जाएगा। जैसे कि 11 सितंबर 2026 को सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि रहेगी, इसलिए भाद्रपद अमावस्या के दिन पितृ तर्पण, श्राद्ध, दान और अन्य  धार्मिक अनुष्ठान शुक्रवार को ही किए जाएंगे।

नोट: भाद्रपद अमावस्या 2026 की शुभ तिथि पर पितरों से जुड़े अनुष्ठान जातक अपने पारिवारिक रीति-रिवाज़ों के अनुसार विधि से करें। पितृ दोष या कुंडली में उपस्थित समस्याओं के उपाय के निवारण के लिए आप किसी अनुभवी एवं विद्वान ज्योतिषी से सलाह ले सकते हैं। 

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भाद्रपद अमावस्या 2026 का महत्व

भाद्रपद अमावस्या 2026 साल भर में आने वाली 12 अमावस्या तिथियों में से एक है जो हर साल भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की अमावस्या  तिथि पर आती है। भाद्रपद अमावस्या को भारत  के भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में भादो अमावस्या या भादी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है।

इस अमावस्या को कुशाग्रहणी अमावस्या और कुशोत्पाटिनी अमावस्या भी कहा जाता है। बता दें कि भाद्रपद अमावस्या के इन नामों का संबंध  कुशा घास से है, जिसका उपयोग धार्मिक अनुष्ठानों, श्राद्ध, तर्पण आदि कार्य किए जाते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद अमावस्या के शुभ अवसर पर कुशा घास इकट्ठा करना शुभ माना जाता है। हिंदू शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि अगर भाद्रपद अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है, तो इस दिन एकत्रित की गई कुशा लंबे समय तक धार्मिक कार्यों में उपयोग की जा सकती है। 

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भाद्रपद अमावस्या 2026 का ज्योतिषीय महत्व

वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को मन, भावनाओं और मानसिक शांति के कारक ग्रह माना जाता है। अमावस्या की रात चंद्रमा आसमान में दिखाई नहीं देता है, इसलिए इस रात को सबसे अंधकारमय रातों में से एक माना जाता है। ऐसे में, भाद्रपद अमावस्या को आध्यात्मिक साधना, आत्मचिंतन और पितरों से जुड़े कार्यों के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। 

भाद्रपद अमावस्या 2026 इस बार शुक्रवार के दिन पड़ेगी, जिसके स्वामी ग्रह शुक्र देव हैं। वैदिक ज्योतिष में शुक्र ग्रह को प्रेम, रिश्ते, सुख-सुविधाओं, सामंजस्य और भौतिक सुख का कारक माना जाता है, इसलिए इस दिन परिवार की सुख-समृद्धि, प्रेम और शांति के लिए भी पूजन करना शुभ माना जाता है। 

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क्षेत्रीय दृष्टि से भाद्रपद अमावस्या 2026 

हमारे देश के भिन्न-भिन्न हिस्सों में भाद्रपद अमावस्या 2026 को पिठौरी अमावस्या के रूप में मनाया जाता है। इस तिथि पर ख़ासतौर पर महिलाएं माता दुर्गा और उनके विभिन्न रूपों की पूजा-अर्चना करती हैं। इस पूजा को महिलाओं द्वारा अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और लंबी उम्र की कामना के लिए किया जाता है। 

क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार, भाद्रपद अमावस्या के तिथि पर माता और अन्य देवी-देवताओं की मिट्टी से प्रतिमाएं बनाई जाती हैं और उनका पूजन किया जाता है।  हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और संस्कृति के आधार पर रीति-रिवाज और पूजा विधि में भिन्नता देखने को मिल सकती है।

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भाद्रपद अमावस्या 2026: पूजा विधि

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। संभव हो, तो किसी पवित्र नदी या तीर्थस्थल के जल को नहाने के पानी में मिलाकर स्नान करें। 
  • सूर्य देव को जल में काले तिल मिलाकर अर्घ्य दें।
  • अब विधि-विधान से जल, काले तिल और कुशा से पितरों का तर्पण करें। 
  • परिवार की परंपराओं और रीति-रिवाज़ों के अनुसार पूर्वजों का श्राद्ध करें। 
  • पूर्वजों की स्मृति में कौओं को भोजन और गाय को चारा खिलाएं।
  • आप अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या जरूरी सामान दान करें। 
  • भाद्रपद अमावस्या पर महामृत्युंजय मंत्र या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। सतब ही, कुछ समय प्रार्थना या ध्यान करें। 
  • इस तिथि पर भगवान शिव या विष्णु जी के मंदिर जाएं और घर-परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।
  • इस दिन शांत रहें और बेवजह के विवाद से बचें ,

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इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. भाद्रपद अमावस्या 2026 में कब है?

इस साल भाद्रपद अमावस्या 11 सितंबर 2026, शुक्रवार को पड़ेगी। 

2. भाद्रपद अमावस्या 2026 तिथि का समय रहेगा?

अमावस्या तिथि की शुरुआत 10 सितंबर को और 11 सितंबर 2026 को समाप्त होगी। 

3.  भाद्रपद अमावस्या 2026 पर क्या करें?

भाद्रपद अमावस्या की तिथि पर तर्पण, श्राद्ध, दान और पूजा आदि करनी चाहिए।