अधिक मास 2026: धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से साल 2026 बेहद ख़ास रहेगा क्योंकि जहां सामान्य वर्ष में 365 दिन होते हैं। वहीं, लीप वर्ष में 366 दिन होते हैं, लेकिन हिंदू कैलेंडर में एक ऐसा वर्ष भी आता है जिसमें 12 नहीं 13 महीने होते हैं। बता दें कि हिंदू वर्ष में यह महीना 03 सालों में एक बार आता है और साल 2026 भी एक ऐसा ही वर्ष रहने वाला है। सरल शब्दों में कहें, तो विक्रम संवत 2083 में एक चंद्र मास बढ़ जाएगा जिससे इस साल ज्येष्ठ माह में अधिकमास लग जाएगा जो लगातार 60 दिनों तक चलेगा। इस प्रकार, इस वर्ष 13 महीने होंगे और ऐसे में, इस साल का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।

अधिकमास को धार्मिक, ज्योतिषीय और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष माना गया है। इसे अधिकमास या पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है। बता दें कि अधिकमास एक दुर्लभ और ख़ास खगोलोय घटना होती है जो इस साल में आपको देखने को मिलेगी। हालांकि, ज्योतिष शास्त्र में अधिक मास को अत्यंत पवित्र माना जाता है। साथ ही, इस मास में पूजा-पाठ, जप-तप, दान, और भगवान विष्णु की उपासना को बहुत शुभ माना जाता है। हिंदू धर्म में अधिकमास के स्वामी जगत के पालनहार भगवान विष्णु को माना गया है।
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“अधिक मास 2026” को लेकर आपके मन में भी उत्सुकता होगी और आप भी इस महीने के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने के लिए इच्छुक होंगे। इसी क्रम में, एस्ट्रोसेज एआई ने “अधिक मास 2026” का यह ब्लॉग विशेष रूप से अपने पाठकों के लिए तैयार किया गया है जिसके अंतर्गत आपको अधिक मास शुरू और समाप्त होने की तिथि, अधिकमास का धार्मिक महत्व आदि के बारे में जानकारी प्राप्त होगी। साथ ही जानेंगे, इस माह में किन सावधानियों को बरतना होगा, इससे भी हम आपको अवगत करवाएंगे। तो आइए बिना देर किए अब हम आगे बढ़ते हैं और जानते हैं अधिकमास 2026 के बारे में सब कुछ।
कब से कब तक रहेगा अधिक मास 2026 में?
जैसे कि हम भली-भांति जानते हैं कि हिन्दू वर्ष में कुल 12 महीने होते हैं और इसका का आरंभ चैत्र माह से होता है। बात करें साल 2026 की, तो इस बार हिंदू वर्ष के अनुसार, विक्रम संवत 2083 में 13 महीने पड़ने वाले हैं क्योंकि इस बार अधिकमास लगने जा रहा है। हिंदू नववर्ष में ज्येष्ठ मास 2 महीने का रहेगा जिसकी वजह अधिकमास का ज्येष्ठ मास में पड़ना होगा इसलिए ज्येष्ठ का महीना 30 की बजाय 60 दिन का होगा। अधिकमास में भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करना फलदायी माना जाता है और इस दौरान किए गए धार्मिक अनुष्ठान कल्याणकारी साबित होते है।
अधिक मास 2026 का आरंभ: 17 मई 2026, रविवार
अधिक मास समाप्त: 15 जून 2026, सोमवार
सूर्योदय का समय: सुबह 05 बजकर 48 मिनट पर ,
सूर्यास्त का समय: शाम 06 बजकर 57 मिनट पर
शायद ही आप जानते होंगे कि अधिक मास 3 साल में एक बार आने वाला एक अतिरिक्त महीना होता है, जो चंद्र मास और सौर मास के बीच के दिनों के अंतर को पूरा करने के लिए जोड़ा जाता है। अधिकमास को पुरुषोत्तम मास और मलमास के नाम से भी जाना जाता है।
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साल 2026 में दो माह का होगा ज्येष्ठ मास
हिंदू पंचांग के अनुसार, विक्रम संवत 2083 में अधिक मास ज्येष्ठ महीने में पड़ेगा। अधिक ज्येष्ठ मास की शुरुआत 17 मई 2026 से होगी जबकि इसका समापन 15 जून 2026 को हो जाएगा। वहीं, इस साल सामान्य ज्येष्ठ माह का आरंभ 02 मई 2026 को होगा और इसकी समाप्ति 16 मई 2026 को होगी। इसके अलगे दिन ही अधिक ज्येष्ठ माह लग जाएगा और ऐसे में, इस साल अधिक मास के कारण ज्येष्ठ मास के बाद आने वाले सभी व्रत और त्योहारों की तिथियां लगभग 15 से 20 दिन आगे बढ़ जाएंगी। आमतौर पर 15 अगस्त के आसपास पड़ने वाला रक्षाबंधन साल 2026 में 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा, तो वहीं दिवाली भी 08 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी।
अधिकमास 2026 में पड़ेंगे कौन-कौन से व्रत एवं त्योहार?
इस साल अधिक मास 17 मई 2026 से लेकर 15 जून 2026 तक रहेगा और ऐसे में, हम आपको उन व्रतों और पर्वों की सूची दे रहे हैं जो इस महीने में मनाए जाएंगे।
| तिथि | पर्व का नाम |
| 27 मई 2026, बुधवार | पद्मिनी एकादशी |
| 28 मई 2026, गुरुवार | प्रदोष व्रत (शुक्ल) |
| 31 मई 2026, रविवार | पूर्णिमा व्रत |
| 03 जून 2026, बुधवार | संकष्टी चतुर्थी |
| 11 जून 2026, गुरुवार | परम एकादशी |
| 12 जून 2026, शुक्रवार | प्रदोष व्रत (कृष्ण) |
| 13 जून 2026, शनिवार | मासिक शिवरात्रि |
| 15 जून 2026, सोमवार | अमावस्या, मिथुन संक्रांति |
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अधिक मास का धार्मिक महत्व
सनातन धर्म में तीन वर्षों में एक बार आने वाले अधिक मास को मलमास, मलिम्मचा और पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि कि मलमास का व्रत करने से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। यह बात हम जानते हैं कि चंद्र वर्ष में 12 महीने होते हैं और इन्हें सौर कैलेंडर के दिनों और ऋतुओं के साथ मिलाने के लिए ऋषि-मुनियों द्वारा गणना करके एक अतिरिक्त महीना यानी कि अधिक मास जोड़ा गया था।
हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हिंदू वर्ष के प्रत्येक माह का संबंध किसी न किसी देवता से था, लेकिन अधिक मास का कोई देवता नहीं था, इसलिए इसे मलमास या मलिम्मचा कहकर सबसे अलग अलग रखा गया था। उस समय मलमास या अधिकमास ने अपनी पीड़ा और दर्द को जगत के पालनहार भगवान विष्णु को बताया और उनकी शरण ली। भगवान विष्णु को उस पर दया आई और उन्होंने स्वयं को इस महीने का स्वामी घोषित किया इसलिए इस महीने का नाम पुरुषोत्तम मास पड़ा।
साथ ही, भगवान विष्णु ने यह भी कहा कि अन्य महीनों में जो पुण्य जप, तप और अच्छे कर्मों का फल मिलता है, वह इस एक महीने में किए गए जप तप और अच्छे कर्मों से भी प्राप्त किया जा सकता है, तब से ही इस महीने का महत्व बाकी महीनों से भी अधिक माना जाने लगा। प्राचीन समय में राजा नहुष ने मलमास का व्रत करके सभी बंधनों से मुक्ति पाई थी और उन्हें देवताओं का पद प्राप्त हुआ था।
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अधिक मास 2026 में संतान का जन्म, शुभ या अशुभ?
अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि अधिक मास के दौरान जन्म लेने वाले शिशु शुभ होते हैं या अशुभ। हालांकि, हिंदू शास्त्रों में अधिक मास में जन्मे बच्चे को अशुभ नहीं माना जाता है। इस अवधारणा का संबंध सामान्य तौर पर पारंपरिक गलतफहमियों से हो सकता है, लेकिन धर्म से बिल्कुल नहीं है।
इसके विपरीत, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु का प्रिय और अत्यंत पवित्र महीना माना जाता है। ऐसे में, अधिक मास में जन्मे बच्चे को भगवान विष्णु का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता हैं। इस बच्चे में श्रीहरि की कृपा से आध्यात्मिक गुण विकसित हो सकते हैं।
अधिक मास से जुड़ी पौराणिक कथा
धार्मिक ग्रंथों में अधिकमास से जुड़ी एक कथा का वर्णन मिलता है और उस कथा के अनुसार, माता लक्ष्मी ने भगवान श्रीहरि से पूछा कि अधिक मास में पूजा कैसे करनी चाहिए? तब श्रीहरि ने बताया कि इस महीने के स्वामी वे स्वयं हैं इसलिए इसका नाम पुरुषोत्तम मास है। उन्होंने कहा कि इस महीने में जप, तप, हवन जैसे धार्मिक कार्य करने से अक्षय फल (कभी न खत्म होने वाला फल) मिलता है।
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भगवान विष्णु ने यह भी बताया कि जो लोग इस महीने में पुण्य कार्य नहीं करते हैं, उन्हें दरिद्रता, पुत्र शोक आदि कष्ट झेलने पड़ते हैं। श्रीहरि ने आगे माता लक्ष्मी को बताया कि जो लोग पूरे महीने पुण्य कार्य नहीं कर पाते, वे कम से कम कुछ विशेष तिथियों जैसे कृष्ण पक्ष की अष्टमी, नवमी, द्वादशी, चतुर्दशी और पूर्णिमा तिथि आदि पर ये कार्य कर सकते हैं ।
क्यों पड़ता है अधिक मास?
मलमास या पुरुषोत्तम मास के नाम से प्रसिद्ध अधिकमास हिंदू चंद्र कैलेंडर में लगभग हर 3 साल में एक बार आता है। यह अतिरिक्त महीना चंद्र और सौर चक्र के बीच के अंतर को संतुलित करने के लिए जोड़ा गया है। सरल शब्दों में कहें, तो चंद्र वर्ष सौर वर्ष की तुलना में थोड़ा छोटा है इसलिए इस अंतर् को पूरा करने के लिए एक अतिरिक्त महीना अधिक मॉस के रूप में रखा जाता है।
जहाँ सौर वर्ष में कुल 365 दिन होते हैं, तो वहीं चंद्र वर्ष में करीब 354–355 दिन आते हैं। इस प्रकार, हर साल दोनों में लगभग 11 दिनों का अंतर हो जाता है जो 3 साल में बढ़कर 32–33 दिनों का हो जाता है। इसी अंतर को संतुलित करने के लिए एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है और इसे ही अधिक मास कहा जाता है।
कब-कब और किस वर्ष पड़ेगा अधिकमास?
हम यह आपको ऊपर बता चुके हैं कि अधिकमास हर साल नहीं आता है। ऐसे में, हम आपको नीचे आने वाले वर्षों में अधिकमास कब-कब पड़ेगा, इसकी पूरी सूची प्रदान करने जा रहे हैं।
| वर्ष | अधिक मास का नाम |
| 2026 | ज्येष्ठ अधिक मास |
| 2029 | भाद्रपद अधिक मास |
| 2031 | चैत्र अधिक मास |
| 2034 | आषाढ़ अधिक मास |
| 2037 | ज्येष्ठ अधिक मास |
| 2039 | आश्विन अधिक मास |
| 2042 | श्रावण अधिक मास |
इस प्रकार, भविष्य में भी अधिक मास समय-समय पर अलग-अलग महीनों में पड़ेगा जिससे चंद्र और सौर कैलेंडर के बीच संतुलन बना रहे।
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शुभ कार्यों पर लग जाएगी रोक
साल 2026 के हिंदू वर्ष के ज्येष्ठ माह में अधिक मास लगने जा रहा है जिससे वह लगातार 60 दिनों तक चलेगा। लेकिन, जब 17 मई 2026 को अधिक मास लगेगा, उसके साथ ही अगले 30 दिनों यानी कि एक महीने के लिए शुभ कार्यों पर रोक लग जाएगी। बता दें कि अधिक मास और खरमास के दौरान शुभ एवं मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं।
हिंदू धर्म में अधिक मास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण, भूमि पूजन या नए व्यापार की शुरुआत जैसे शुभ कार्यों को नहीं किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दौरान ग्रहों की स्थिति अनुकूल नहीं होती है इसलिए अधिक मास में किए गए मांगलिक कार्यों का मन मुताबिक फल नहीं मिलता है। इस वजह अधिक मास में बड़े और मांगलिक कार्यों को नहीं करने की सलाह दी जाती है।
अधिक मास में क्या करें और क्या न करें?
क्या करें?
पुरुषोत्तम माह का नाम भगवान विष्णु के नाम पर पड़ा है क्योंकि इस महीने के स्वामी श्रीहरि हैं, इसलिए इस दौरान कुछ विशेष कार्यों को करना बहुत शुभ माना जाता है जो कि इस प्रकार हैं:
- अधिक मास के दौरान प्रार्थना, व्रत, दान और मंत्र जाप करना अत्यंत शुभ होता है।
- धार्मिक ग्रंथों का पाठ, विशेष रूप से गीता का पाठ बेहद फलदायी माना जाता है।
- अधिक मास में दान-पुण्य को बहुत महत्व दिया गया है, खासकर गरीबों को अन्न दान करने का।
- संभव हो, तो जरूरतमंद लोगों की सहायता करें जिससे पुण्यदायी माना जाता है।
- भगवान विष्णु के नाम का जाप और हवन करने से भी लाभ की प्राप्ति होती है।
- इसी पवित्रता और धार्मिक लाभ के कारण अधिक मास को पुरुषोत्तम माह कहा जाता है।
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क्या न करें?
अधिक मास के दौरान कुछ कार्यों को करने की मनाही होती है इसलिए उन कार्यों को करने से आपको बचना चाहिए, जिससे आप पर भगवान विष्णु की कृपा सदा बनी रहें।
- मलमास या अधिकमास के दौरान शुभ कार्य जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, भूमि पूजन, नए व्यापार की शुरुआत या फिर नामकरण आदि को नहीं करना चाहिए।
- अधिकमास की अवधि में आपको मांस-मदिरा के सेवन से परहेज़ करना चाहिए। ऐसा करने से आपको दोष लग सकता है और गरीबी, दुर्भाग्य और बीमारी जैसी समस्याएं घेरती हैं।
- इस दौरान गलती से भी असहाय, गरीबों या जरूरतमंदों का अपमान करने से बचें। साथ ही, न तो उन्हें परेशान करें और न ही उन्हें कष्ट पहुंचाएं।
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अधिक मास 2026 में पूजा और धार्मिक कार्यों के लाभ
- अधिक मास में व्रत रखना सौ यज्ञ करने के बराबर माना जाता है और इससे आपको जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
- जो लोग इस माह अच्छे कर्म करते हैं और अपनी इन्द्रियों पर नियंत्रण रखते हैं, उन्हें दुखों से मुक्ति मिलती है।
- अधिक मास के दौरान विष्णु पूजन से व्यक्ति को पुनर्जन्म अर्थात जन्म-मरण के चक्र से भी छुटकारा मिलता है।
- इस माह में अपने पापों के लिए पश्चाताप करने से भी आध्यात्मिक लाभ में वृद्धि होती है।
- कुंडली में मौजूद दोषों को दूर करने के लिए अधिक मास में विशेष पूजा या दोष निवारण पूजा करना लाभकारी माना जाता है।
- इस माह में साधक पुराणों और धार्मिक ग्रंथों जैसे श्रीमद्भागवत पुराण, भविष्योत्तर पुराण, देवी भागवत और विष्णु पुराण का पाठ करते हैं।
- अधिक मास का संबंध भगवान पुरुषोत्तम यानी कि विष्णु जी से है इसलिए इनके श्लोक विष्णु सहस्रनाम और सूक्तों का जाप करना फलदायी होता है।
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अधिक मास 2026 में अवश्य करें ये 5 काम
- भगवान श्रीकृष्ण की पूजा: अधिक मास के स्वामी भगवान विष्णु हैं इसलिए इस महीने में भगवान विष्णु के अवतार नरसिंह जी और श्रीकृष्ण की पूजा शुभ मानी जाती है। इस मास में इन दोनों का पूजन आपके जीवन से सभी संकटों का नाश करता है। जो जातक अधिक मास में भगवान कृष्ण की पूजा, व्रत और उपासना करता है, उसको पापों से मुक्ति मिलती है और बैकुंठ प्राप्त होता है।
- स्नान और सेवा: पुरुषोत्तम मास जिसे अधिकमास भी कहते हैं। बता दें कि भगवान जगन्नाथ पुरी के क्षेत्र को पुरुषोत्तम क्षेत्र कहा जाता है और पुराणों में इस स्थान को धरती का बैकुंठ माना गया है। पुरुषोत्तम मास के दौरान जगन्नाथ की यात्रा को अत्यंत शुभ और कल्याणकारी माना जाता है। अगर ऐसा करना आपके लिए संभव न हो, तो आप गंगा या पवित्र नदियों के जल में स्नान करें।
- व्रत: अधिक मास 2026 के दौरान व्रत करना फलदायी रहेगा अर्थात इस माह आप केवल एक समय भोजन करें। साथ ही, भोजन में चावल, गेहूं, मूंग, जौ, बथुआ, तिल, चौलाई, मटर, केला, ककड़ी, दूध, आंवला, घी, दही, पीपल, सोंठ, जीरा, इमली, मेथी, सेंधा नमक, शहतूत, पान-सुपारी आदि का सेवन करें। वहीं, मलमास में मांस, चावल का मांड, शहद, राई, उड़द, मूली, मसूर, लहसुन, प्याज, नशीले पदार्थ, बासी अन्न आदि को खाने से बचना चाहिए।
- अखंड दीपक जलाएं: अधिक मास के दौरान शालिग्राम की मूर्ति के सामने घर के मंदिर में घी का अखंड दीपक पूरे महीने जलाकर रखें। शालिग्राम न होने की स्थिति में श्रीहरि विष्णु की मूर्ति या चित्र के समक्ष दीपक जलाएं। अधिकमास में इस उपाय को करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं और जातक का जीवन सुख-शांति एवं समृद्धि से भर जाता है।
- धार्मिक ग्रंथों का पाठ: अधिकमास के दौरान पुरुषोत्तम-माहात्म्य का पाठ लाभकारी सिद्ध होता है। अगर आप इसका पाठ न कर सकें, तप आप इस महीने में श्रीमद्भागवत की कथा अवश्य पढ़ें या फिर गीता के पुरुषोत्तम नाम के 14वें अध्याय का नियमित रूप से अर्थ सहित पाठ करें। मलमास में विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी आप कर सकते हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस साल हिंदू वर्ष 12 नहीं 13 महीने का होगा क्योंकि इस साल अधिक मास लगने जा रहा है।
इस साल अधिक मास 17 मई 2026 से लगेगा जो ज्येष्ठ माह में लगने जा रहा है।
हिंदू धर्म में अधिक मास के स्वामी भगवान विष्णु को बताया गया है इसलिए इस माह इनका पूजन फलदायी सिद्ध होता है।