श्रावण अधिकमास में आने वाली विभुवन संकष्टी चतुर्थी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि एक दुर्लभ आध्यात्मिक अवसर है, जो लगभग हर तीन वर्षों में एक बार ही प्राप्त होता है। यह दिव्य संयोग भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इस दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश की उपासना करने से जीवन के गहरे से गहरे कष्ट भी दूर होने लगते हैं। मान्यता है कि इस पवित्र चतुर्थी पर सच्चे मन, श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत रखने वाले भक्तों पर गणपति बप्पा की विशेष कृपा बरसती है, जिससे उनके जीवन में चल रही बाधाएं, परेशानियां और नकारात्मक परिस्थितियां धीरे-धीरे समाप्त हो जाती हैं।

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इस व्रत का महत्व केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से भी अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। कहा जाता है कि विभुवन संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने से व्यक्ति को मानसिक शांति, आत्मबल और सही निर्णय लेने की बुद्धि प्राप्त होती है। इसके साथ ही यह व्रत राहु-केतु जैसे अशुभ ग्रहों के प्रभाव को कम करने में सहायक होता है, जिससे जीवन में आ रही अनचाही रुकावटें दूर होती हैं और सफलता के नए मार्ग खुलते हैं।
जो साधक इस दिन नियम, संयम और पूर्ण आस्था के साथ उपवास करते हैं, वे न केवल भौतिक सुख-सुविधाओं की प्राप्ति करते हैं, बल्कि उनके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह व्रत हमें धैर्य, विश्वास और समर्पण का महत्व भी सिखाता है, और यही कारण है कि विभुवन संकष्टी चतुर्थी को अत्यंत शुभ, फलदायी और जीवन में परिवर्तन लाने वाला व्रत माना जाता है।
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विभुवन संकष्टी चतुर्थी: तिथि व मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल विभुवन संकष्टी चतुर्थी का व्रत 03 जून, 2026 बुधवार को रखा जाएगा।
प्रारम्भ : 03 जून 2026 की रात 09 बजकर 21 मिनट से
समाप्त : 04 जून, 2026 की रात 11 बजकर 30 मिनट तक।
संकष्टी के दिन चंद्रोदय – 04 जून रात 10 बजकर 04 मिनट से 10 बजकर 43 मिनट तक
अवधि – 24 घंटे 39 मिनट
विभुवन संकष्टी चतुर्थी का महत्व
इस दिन का महत्व अत्यंत विशेष और दिव्य माना जाता है, क्योंकि इस दिन भगवान गणपति के विभुवन गणेश स्वरूप की आराधना की जाती है। विभुवन शब्द का अर्थ है, तीनों लोकों (स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल) में विद्यमान रहने वाले अथवा उन्हें प्रकाशित करने वाले। इसलिए इस दिन पूजे जाने वाले गणेश जी को ऐसा सर्वव्यापी देव माना जाता है, जो समस्त लोकों में व्याप्त होकर अपने भक्तों के कष्टों का निवारण करते हैं और उन्हें सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
यद्यपि इस व्रत की पूजा-विधि अन्य संकष्टी चतुर्थी के समान ही होती है, फिर भी विभुवन संकष्टी का आध्यात्मिक प्रभाव कहीं अधिक व्यापक माना गया है। इस दिन भगवान गणेश को विशेष रूप से नारियल के लड्डुओं का भोग लगाया जाता है, जो समर्पण और शुद्ध भाव का प्रतीक है। श्रद्धा के साथ किया गया यह छोटा-सा अर्पण भी भक्त के जीवन में बड़े परिवर्तन लाने की क्षमता रखता है। अधिक मास में पड़ने के कारण इस व्रत का महत्व और भी बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किया गया जप, तप, व्रत और पूजन सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक फलदायी होता है।
यही कारण है कि इस अवसर को साधना, आत्मशुद्धि और ईश्वर कृपा प्राप्त करने का अत्यंत उत्तम समय माना गया है। विभुवन संकष्टी चतुर्थी का व्रत सभी प्रकार के कष्टों को दूर करने वाला और मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला माना जाता है। जो व्यक्ति सच्चे मन से इस व्रत को करता है, उसके जीवन में आ रही बाधाएं धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं, और सफलता, शांति तथा संतोष का मार्ग प्रशस्त होता है। यह व्रत न केवल भौतिक सुख प्रदान करता है, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा का भी संचार करता है, जिससे जीवन में संतुलन और स्थिरता बनी रहती है।
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विभुवन संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि
इस दिन भगवान गणेश की पूजा विशेष श्रद्धा और नियमों के साथ की जाती है। यह व्रत न केवल कष्टों को दूर करने वाला माना गया है, बल्कि जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति भी प्रदान करता है। इस दिन की पूजा विधि इस प्रकार है-
- सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। व्रत का संकल्प लें और भगवान गणेश का ध्यान करें कि आप पूरे दिन नियमपूर्वक उपवास रखेंगे।
- घर के मंदिर या किसी पवित्र स्थान को साफ करें। एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। विशेष रूप से विभुवन गणेश स्वरूप का ध्यान करें।
- दुर्वा (घास), लाल फूल, चंदन, अक्षत, धूप, दीप, मोदक या विशेष रूप से नारियल के लड्डू, फल आदि पूजा में रखें।
- सबसे पहले गणेश जी को जल अर्पित करें, फिर चंदन, अक्षत और फूल चढ़ाएं। उन्हें दुर्वा अत्यंत प्रिय होती है, इसलिए 21 दुर्वा अवश्य अर्पित करें। इसके बाद धूप-दीप जलाकर आरती करें।
- पूजा के दौरान “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें। संभव हो तो गणेश जी के स्तोत्र या संकष्टी व्रत कथा का पाठ भी करें।
- इस दिन भगवान गणेश को विशेष रूप से नारियल के लड्डुओं का भोग लगाया जाता है। इसके साथ मोदक या अन्य मिठाइयां भी अर्पित की जा सकती हैं।
- दिनभर निर्जल या फलाहार व्रत रखें (अपनी क्षमता अनुसार)। पूरे दिन मन, वचन और कर्म से पवित्रता बनाए रखें।
- संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्रमा के दर्शन के बाद ही खोला जाता है। चंद्रमा को अर्घ्य देकर गणेश जी की पुनः आरती करें और फिर व्रत का पारण करें।
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विभुवन संकष्टी चतुर्थी कथा
विभुवन संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित एक अत्यंत पवित्र व्रत है, जिसे श्रद्धा और नियम से करने पर सभी कष्ट दूर होते हैं। प्राचीन समय में एक राजा के राज्य में अचानक अकाल, रोग और अशांति फैल गई। राजा ने चिंतित होकर ऋषियों से पूछा, तब उन्हें गणेश जी की आराधना और संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने की सलाह दी गई। ऋषियों ने बताया कि यह व्रत विशेष रूप से विभुवन रूप में तीनों लोकों में शुभ फल देने वाला है और सभी संकटों का नाश करता है। राजा ने पूरे विधि-विधान से व्रत रखा, दिनभर उपवास किया और रात में चंद्रमा के दर्शन के बाद भगवान गणेश की पूजा कर कथा सुनी।
उनकी श्रद्धा से प्रसन्न होकर गणेश जी ने राज्य के सभी संकट दूर कर दिए और पुनः सुख-समृद्धि लौटा दी। इस प्रकार यह व्रत जीवन की बाधाओं को समाप्त कर मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाला माना जाता है।
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इन मंत्रों का करें जाप
गणेश मूल मंत्र
ॐ गं गणपतये नमः
यह सबसे सरल और प्रभावशाली मंत्र है। कम से कम 108 बार जाप करें।
वक्रतुंड महाकाय मंत्र
वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
किसी भी कार्य में बाधा दूर करने के लिए यह मंत्र बहुत फलदायी है।
गणेश गायत्री मंत्र
एकदंताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि।
तन्नो दंति प्रचोदयात्॥
बुद्धि, ज्ञान और सफलता के लिए इसका जाप करें।
संकटनाशन गणेश स्तोत्र (संक्षेप मंत्र)
प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम्।
यह स्तोत्र कष्टों के नाश के लिए विशेष माना जाता है।
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विभुवन संकष्टी के दिन करें ये आसान उपाय
शिक्षा के लिए
गणेश जी को पीले फूल और दूर्वा अर्पित करें और रोज 108 बार “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें। साथ ही, पढ़ाई शुरू करने से पहले गणेश जी का स्मरण करें। इससे बुद्धि तेज होती है और एकाग्रता बढ़ती है।
धन प्राप्ति के लिए
इस दिन गणेश जी को मोदक या लड्डू का भोग लगाएं और “ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें। पूजा के बाद प्रसाद घर के सभी सदस्यों में बांटें इससे धन और समृद्धि में वृद्धि होती है।
कर्ज मुक्ति के लिए
संकष्टी चतुर्थी की रात चंद्र दर्शन के बाद गणेश जी को गुड़ और चना अर्पित करें और “ॐ गणेश ऋणं छिन्दि वरेण्यं नमः” मंत्र का जाप करें। लगातार कुछ महीनों तक यह उपाय करने से कर्ज से मुक्ति मिलने लगती है।
अच्छे स्वास्थ्य के लिए
गणेश जी को सिंदूर अर्पित करें और “ॐ वक्रतुंडाय नमः” मंत्र का जाप करें। साथ ही जरूरतमंदों को फल दान करें। इससे रोगों से राहत और स्वास्थ्य में सुधार होता है।
सुखमय दांपत्य जीवन के लिए
पति-पत्नी साथ में गणेश जी की पूजा करें और उन्हें लाल फूल व मिठाई अर्पित करें। “ॐ उमा पुत्राय नमः” मंत्र का जाप करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम और समझ बढ़ती है।
पुत्र रत्न (संतान सुख) के लिए
गणेश जी को दूर्वा, मोदक और नारियल अर्पित करें और “ॐ एकदंताय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें। श्रद्धा से यह उपाय करने पर संतान प्राप्ति के योग मजबूत होते हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
यह भगवान गणेश को समर्पित विशेष व्रत है, जो अधिकमास में आता है और लगभग हर 3 साल में एक बार पड़ता है। इस दिन गणेश जी के विभुवन स्वरूप की पूजा की जाती है, जो तीनों लोकों में व्याप्त माने जाते हैं।
नहीं, यह आपकी क्षमता पर निर्भर करता है। आप निर्जल, फलाहार या साधारण उपवास रख सकते हैं।
हाँ, मान्यता है कि श्रद्धा और नियम से किया गया यह व्रत मनोकामनाओं की पूर्ति करता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है।