गंगा सप्‍तमी पर क्‍यों होती है मां गंगा की पूजा? जानें महत्‍व और पूजन विधि!

गंगा सप्‍तमी 2026: यह सबसे पवित्र हिंदू त्‍योहारों में से एक है और यह पर्व मां गंगा को समर्पित है। इस शुभ दिन पर मां गंगा की पूजा की जाती है। गंगा सप्‍तमी को गंगा जयंती के रूप में भी जाना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख मास में शुक्‍ल पक्ष की सप्‍तमी तिथि को गंगा सप्‍तमी आती है।

गंगा सप्‍तमी के दिन गंगा के पवित्र जल में स्‍नान करने से लोगों के सभी पाप धुल जाते हैं और उनके जीवन में सुख-शांति आती हैं एवं उनके मान-सम्‍मान में वृद्धि होती है। इसके साथ ही गंगा सप्‍तमी पर गंगा नदी में स्‍नान करने से मोक्ष की प्राप्ति भी होती है।

माना जाता है कि इस दिन मां गंगा की उपासना करने से अशुभ ग्रह के प्रभाव को कम किया जा सकता है। एस्‍ट्रोसेज एआई के इस ब्‍लॉग में आगे बताया गया है कि गंगा सप्‍तमी 2026 की तिथि, पूजन मुहुर्त और महत्‍व क्‍या है।

यह भी पढ़ें: राशिफल 2026

दुनियाभर के विद्वान ज्योतिषियों से करें कॉल/चैट पर बात और जानें अपने संतान के भविष्य से जुड़ी हर जानकारी

कब है गंगा सप्‍तमी 2026

इस बार 23 अप्रैल, 2026 को बृहस्‍पतिवार के दिन गंगा सप्‍तमी पड़ रही है। 22 अप्रैल, 2026 को रात को 10 बजकर 52 मिनट पर सप्‍तमी तिथि शुरू होगी और यह 23 अप्रैल, 2026 को रात को 08 बजकर 52 मिनट पर खत्‍म होगी। 23 अप्रैल, 2026 को सुबह 06 बजकर 07 मिनट से धृति योग शुरू हो रहा है। इस प्रकार गंगा सप्‍तमी पर पूरा दिन धृति योग रहेगा।

AstroSage AI पॉडकास्ट सुनें – यहां आपको मिलेंगे ज्योतिष, जीवन के रहस्य, किस्मत के संकेत और AI द्वारा बताए गए सटीक ज्योतिषीय समाधान। अपनी ज़िंदगी के अहम सवालों के जवाब अब आवाज़ में, आसान भाषा में।

गंगा सप्‍तमी 2026 पर बन रहा है शुभ योग

ज्‍योतिष की दुनिया में धृति योग को अत्‍यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। यह नित्‍य 27 योगों में से एक है। इस योग में जन्‍म लेने वाले जातक ज्ञानी और गुणवान होते हैं। इनका जीवन संपन्‍न और भौतिक सुखों से परिपूर्ण होता है। ये समाज में उच्‍च स्‍थान एवं सम्‍मान प्राप्‍त करते हैं।

किसी भी नए कार्य की शुरुआत के लिए धृति योग बहुत शुभ रहता है। इस योग के दौरान किए गए कार्यों के सफल होने की संभावना बढ़ जाती है। आप भी इस बार गंगा सप्‍तमी 2026 पर कोई शुभ कार्य जैसे कि गृह प्रवेश, व्‍यवसाय की शुरुआत आदि कर सकते हैं।

गंगा सप्‍तमी का धार्मिक महत्‍व

वैदिक ज्‍योतिष के अनुसार गंगा सप्‍तमी के अवसर पर मां गंगा की पूजा करना अत्‍यंत लाभकारी रहता है। अगर किसी व्‍यक्‍ति की कुंडली में मंगल दोष है, तो उसे गंगा सप्‍तमी 2026 पर गंगा पूजन करने से मंगल के दुष्‍प्रभावों से मुक्‍ति मिल सकती है। यहां तक कि इस दिन पवित्र गंगा नदी में स्‍नान करने से भी सभी पाप कर्मों से छुटकारा मिल जाता है।

जिन-जिन स्‍थानों पर गंगा नदी बहती है, वहां पर विशेष अनुष्‍ठान एवं पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन मोक्ष की प्राप्‍ति के लिए गंगा नदी में डुबकी लगाने का भी बहुत महत्‍व है। पूर्वजों का तर्पण करने के लि गंगा नदी के घाट सबसे अनुकूल स्‍थान हैं। इससे आत्‍मा को शांति मिलती है।

  बृहत् कुंडली में छिपा है, आपके जीवन का सारा राज, जानें ग्रहों की चाल का पूरा लेखा-जोखा  

गंगा सप्‍तमी की पूजन विधि

गंगा सप्‍तमी के दिन आप‍ निम्‍न विधि से पूजन कर सकते हैं:

  • आप गंगा सप्‍तमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगा नदी में स्‍नान करें। यदि आप नदी में स्‍नान करने नहीं जा सकते हैं, तो अपने घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल डालकर स्‍नान कर लें।
  • अब आप अपने घर के पूजन स्‍थल में आकर मां गंगा को फूल, सिंदूर, अक्षत, गुलाल, लाल रंग के पुष्‍प और लाल चंदन के साथ प्रसाद अर्पित करें।
  • आप भोग में गुड़ या अन्‍य कोई सफेद रंग की मिठाई अ‍र्पित करें।
  • इसके बाद मां गंगा का आशीर्वाद लेने के लिए गंगा आरती करें।
  • इसके पश्‍चात् धूप और दीपक जलाएं एवं श्री गंगा सहस्‍त्रनाम स्‍तोत्र का पाठ करें।
  • इसके साथ ही आप गंगा मंत्र ‘ॐ नमो भगवती हिलि हिलि मिलि मिलि गंगे मां पावय पावय स्‍वाहा:’ मंत्र का जाप करें।

गंगा सप्‍तमी की पौराणिक कथा

गंगा सप्‍तमी कथा धरती पर मां गंगा के अवतरण से जुड़ी हुई है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार गंगा स्‍वर्ग में वास करती थी लेकिन राजा भागीरथ ने अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए घोर तपस्‍या कर गंगा मां को धरती पर लाने का प्रयास किया। राजा भागीरथ की घोर तपस्‍या से प्रसन्‍न होकर भगवान शिव उनकी सहायता करने के लिए तैयार हो गए। किंतु धरती गंगा के तेज वेग को संभालने में असमर्थ थी इसलिए भगवान शिव ने मां गंगा को अपनी जटाओं में धारण किया और तब शिव जी की जटाओं से गंगा मां धरती पर प्रवाहित हुईं। मान्‍यता है कि यह दिव्‍य घटना वैशाख मास की सप्‍तमी तिथि पर हुई थी इसलिए इस दिन को गंगा सप्‍तमी के रूप में मनाया जाता है।

कहा जाता है कि जब मां गंगा धरती पर अवतरित हुईं, तब उनके पवित्र जल में मनुष्‍य के सभी पापों को धोने की शक्‍ति थी। धरती पर आते ही वह पवित्रता और दया का प्रतीक बन गईं। मां गंगा ने मनुष्‍यों का जो उद्धार किया है, उसके सम्‍मान में गंगा सप्‍तमी 2026 का पर्व मनाया जाता है। गंगा सप्‍तमी की कथा का संबंध ऋषि जाह्नु से भी है। धरती पर आने के बाद मां गंगा कई क्षेत्रों से होकर गुज़रीं और इस दौरान उनसे जाह्नु का ध्‍यान भंग कर दिया जिससे वे क्रोधिक हो उठे और मां गंगा को निगल गए। तब देवताओं ने ऋषि जाह्नु से मां गंगा को मुक्‍त करने का अनुरोध किया। इसके बाद मां गंगा को ‘जह्नु’ नाम दिया गया।

ये पौराणिक कथाएं न सिर्फ मां गंगा की शक्‍ति और महत्‍व को दर्शाती हैं बल्कि हिंदुओं में उनके लिए गहरी आस्‍था को भी चरित्रार्थ करती हैं।

फ्री ऑनलाइन जन्म कुंडली सॉफ्टवेयर से जानें अपनी कुंडली का पूरा लेखा-जोखा

गंगा सप्‍तमी पर दीप दान और तर्पण

इस दिन दीपक जलाकर उसे बहते हुए जल में प्रवाहित करने का भी रिवाज़ है। यदि आप बहते हुए जल में दीपक जलाकर प्रवाहित नहीं कर सकते हें, तो आप गंगा सप्‍तमी के दिन अपने घर के अंदर दीपक जला सकते हैं। इसके बाद आप गायत्री मंत्र और सहस्‍त्रनाम स्‍तोत्र का पाठ करें।

गंगा सप्‍तमी 2026 के दिन मां गंगा की पूजा करने और पितरों के नाम से पिंडदान, तर्पण और दान करने से पितर प्रसन्‍न होते हैं और आपको पितृ दोष से मुक्‍ति मिलती है। इस उपाय से अश्‍वमेघ यज्ञ जितना फल प्राप्‍त होता है।

गंगा सप्‍तमी 2026 पर राशि अनुसार करें दान

अगर आपकी अग्नि तत्‍व की राशि है जैसे कि मेष, सिंह या धनु राशि है, तो आपको गंगा सप्‍तमी पर गेहूं, गुड़ या तांबे के बर्तन दान करने चाहिए। वहीं वृषभ, कन्‍या या मकर राशि वाले लोग जाे कि पृथ्‍वी तत्‍व की राशियां हैं, उन्‍हें वस्‍त्रों, हरी मूंग दाल का दान करना चाहिए या फिर गायों को चारा खिलाना चाहिए। अन्‍य जल तत्‍व की राशियां हैं इसलिए उन्‍हें गंगा सप्‍तमी 2026 पर चावल, दूध, चीनी या सफेद रंग के पुष्‍पों का दान करना चाहिए।

रत्न, रुद्राक्ष और अन्य ज्योतिषीय उत्पादों की खरीद के लिए क्लिक करें: एस्ट्रोसेज एआई शॉप

गंगा सप्‍तमी 2026 कैसे मनाते हैं

गंगा नदी के किनारे या मां गंगा के मंदिरों में पुष्‍प अर्पित किए जाते हैं, धूप-दीप जलाए जाते हैं। भक्‍त मंत्रों का जाप करते हैं और मां गंगा को प्रसन्‍न करने के लिए भजन-कीर्तन करते हैं। इस पर्व का प्रमुख हिस्‍सा गंगा आरती है। शाम को गंगा नदी के कई घाटों पर गंगा आरती का आयोजन किया जाता है। इस दौरान सभी भक्‍त मां गंगा की आरती करते हैं और उनसे उत्तम स्‍वास्‍थ्‍य, संपन्‍नता एवं आध्‍यात्मिक विकास की कामना करते हैं।

गंगा सप्‍तमी एक आध्‍यात्मिक अवसर है और इस पर्व को आप घर पर या फिर गंगा नदी के किनारे मना सकते हैं। इस दिन मां गंगा की पूजा करना प्रमुख है। इससे शुत्रता और दिव्‍य कृपा मिलती है। गंगा सप्‍तमी पर सुबह जल्‍दी उठने के बाद गंगा नदी में स्‍नान किया जाता है जिससे मन और आत्‍मा दोनों शुद्ध हो जाते हैं। कई लोग गंगा नदी के किनारे स्थित मंदिरों या घाटों पर भी जाते हैं और वहां पर मां गंगा के सम्‍मान में विशेष प्रार्थना और अनुष्‍ठान करते हैं।

अगर आप घर पर ही गंगा सप्‍तमी मना रहे हैं, तो अपने घर के पूजन स्‍थल में मां गंगा की मूर्ति या तस्‍वीर स्‍थापित करें। पूजा करने से पहले स्‍नान कर शुद्ध हो जाएं। पूजा के दौरान मां गंगा को फल, मिठाई और पुष्‍प अर्पित करें। अब पवित्र ग्रंथों जैसे कि गंगा स्‍तोत्र या गंगा अष्‍टाक्षर मंत्र का पाठ करें। मां गंगा को सम्‍मान देने के लिए कुछ भक्‍त इस दिन व्रत या विशेष आहार पर भी रहते हैं।

इतना ही नहीं, गंगा सप्‍तमी 2026 पर्यावरण के महत्‍व पर सोचने का एक अवसर भी है। कई लोग इस दिन मां गंगा की रक्षा का संकल्‍प लेते हैं।

नए वर्ष की भविष्यवाणी प्राप्त करें वार्षिक कुंडली 2026 से

गंगा सप्‍तमी 2026 की व्रत विधि

गंगा सप्‍तमी पर कई भक्‍त मां गंगा के सम्‍मान में व्रत रखते हैं और उनसे शुद्धता एवं संपन्‍नता का आशीर्वाद मांगते हैं। गंगा सप्‍तमी का व्रत करना अत्‍यंत सरल है। इसे कोई भी व्‍यक्‍ति अपनी आत्‍मा और शरीर को शुद्ध करने एवं मां गंगा से आध्‍यात्मिक संबंध बनाने के लिए कर सकता है।

सुबह गंगा सप्‍तमी पर जल्‍दी उठकर गंगा नदी में स्‍नान कर लें। अगर ऐसा संभव नहीं है, तो आप घर पर ही अपने नहाने के पानी में गंगाजल डालकर स्‍नान कर सकते हैं। स्‍नान करने के बाद घर के पूजन स्‍थल को साफ करें और वहां पर मां गंगा की मूर्ति या तस्‍वीर लगाएं। इसके बाद उनके आगे घी का एक दीपक जलाएं।

आप चाहें तो निर्जल व्रत रख सकते हैं या फिल फलाहार कर सकते हैं। पूरा दिन आप भजन-कीर्तन करें। व्रत वाले दिन आपको दिनभर शांत और एकाग्र रहना चाहिए।

अब शाम के समय गंगा आरती करने के बाद आप पूजा में अर्पित किए गए प्रसाद को ग्रहण कर व्रत खोल सकते हैं। इस समय आप सात्विक भोजन करें जिसमें फल, मिठाई या खिचड़ी आदि शामिल हो।

गंगा सप्‍तमी 2026 का व्रत रखने पर आपको पूरा दिन प्रार्थना एवं ध्‍यान करना है जिससे मन और आत्‍मा दोनों शुद्ध रहें। यह व्रत केवल भोजन का सेवन न करने के लिए नहीं है बल्कि यह अपने विचारों को शुद्ध करने एवं मां गंगा की दिव्‍य कृपा प्राप्‍त करने का भी प्रतीक है।

सभी ज्योतिषीय समाधानों के लिए क्लिक करें: एस्ट्रोसेज ऑनलाइन शॉपिंग स्टोर

हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारा यह ब्लॉग ज़रूर पसंद आया होगा। अगर ऐसा है तो आप इसे अपने अन्य शुभचिंतकों के साथ ज़रूर साझा करें। धन्यवाद!

अक्‍सर पूछे जाने वाले प्रश्‍न

1. गंगा सप्‍तमी 2026 पर कौन सा योग बन रहा है?

धृति योग।

2. गंगा सप्‍तमी पर किसकी पूजा होती है?

इस दिन मां गंगा की उपासना होती है।

3. गंगा सप्‍तमी पर क्‍या हुआ था?

मान्‍यता है कि इस दिन गंगा मां धरती पर अवतरित हुई थीं।