रामानुज जयंती 2026: जगतगुरु रामानुजाचार्य की जयंती भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का अत्यंत पावन अवसर है। वर्ष 2026 में यह महान वैष्णव आचार्य और समाज सुधारक की 1009 वीं या 1010 वीं जयंती (1017 ईस्वी में जन्म के आधार पर) के रूप में मनाई जाएगी। श्री रामानुजाचार्य ने विशिष्टाद्वैत वेदांत के माध्यम से भक्ति को जन-जन तक पहुंचाया और सामाजिक समानता का सशक्त संदेश दिया। यह पर्व मुख्य रूप से तमिल और कैलेंडर के चित्रई महीने में तिरुवथिरई (आर्द्रा) नक्षत्र के दौरान मनाया जाता है।

नये साल में करियर की कोई भी दुविधा कॉग्निएस्ट्रो रिपोर्ट से करें दूर
दक्षिण भारत के मंदिरों में विशेष पूजा, अभिषेक, वेद-पाठ और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है। श्री रामानुजाचार्य जयंती केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि समाज में समरसता, समान अधिकार और ईश्वर भक्ति के प्रचार का प्रतीक भी है। उन्होंने यह सिद्ध किया कि भक्ति का मार्ग सभी के लिए समान रूप से खुला है, चाहे जाति, वर्ग या पृष्ठभूमि कोई भी हो। यही कारण है कि यह दिन आज भी श्रद्धा, कृतज्ञता और आध्यात्मिक प्रेरणा के साथ मनाया जाता है। आइए जानते हैं इस साल रामानुज जयंती 2026 कब मनाई जाएगी और इस दिन किए जाने वाले उपाय।
यह भी पढ़ें: राशिफल 2026
दुनियाभर के विद्वान ज्योतिषियों से करें कॉल/चैट पर बात और जानें अपने संतान के भविष्य से जुड़ी हर जानकारी
रामानुज जयंती 2026: तिथि व मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, श्री रामानुजाचार्य की 1009 वां जन्म वर्षगांठ रामानुज जयंती बुधवार को अप्रैल 22, 2026 को मनाया जाएगा।
आर्द्रा नक्षत्र प्रारंभ : अप्रैल 21, 2026 की रात 11 बजकर 58 से
आर्द्रा नक्षत्र समाप्त : अप्रैल 22, 2026 की रात 10 बजकर 13 मिनट तक।
रामानुज जयंती 2026 का महत्व
रामानुज जयंती भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक पर्व है। यह दिन वैष्णव आचार्य रामानुजाचार्य की स्मृति में मनाया जाता है, जिन्होंने विशिष्टाद्वैत वेदांत के माध्यम से भक्ति को दार्शनिक आधार प्रदान किया और ईश्वर के प्रति प्रेम व समर्पण को जीवन का सर्वोच्च मार्ग बताया। उनका मानना था कि जीव और परमात्मा का संबंध अटूट है और सच्ची भक्ति ही मोक्ष का सरल साधना है।
इस जयंती का महत्व केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत विशेष है। रामानुजाचार्य ने समाज में व्याप्त ऊँच-नीच और भेदभाव का विरोध किया तथा मंदिरों और आध्यात्मिक ज्ञान को सभी वर्गों के लिए सुलभ बनाने का प्रयास किया। उन्होंने यह संदेश दिया कि ईश्वर की भक्ति पर सभी का समान अधिकार है। इसलिए यह दिन सामाजिक समानता, समरसता और मानवता के मूल्यों को याद करने का अवसर भी है।
रामानुज जयंती हमें यह प्रेरणा देती है कि भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित न रहकर सेवा, करुणा और सदाचार के रूप में जीवन में उतरे। उनके आदर्श आज भी लाखों भक्तों के लिए मार्गदर्शक हैं और यही कारण है कि यह पर्व श्रद्धा, कृतज्ञता और आध्यात्मिक उत्साह के साथ मनाया जाता है।
फ्री ऑनलाइन जन्म कुंडली सॉफ्टवेयर से जानें अपनी कुंडली का पूरा लेखा-जोखा
रामानुज जयंती 2026 की कथा
प्राचीन समय में तमिलनाडु के श्रीपेरुंबुदूर नामक स्थान पर 1017 ईस्वी में एक दिव्य बालक का जन्म हुआ। यह बालक आगे चलकर जगतगुरु रामानुजाचार्य के नाम से विख्यात हुआ। बचपन से ही वे अत्यंत तेजस्वी, मेधावी और आध्यात्मिक प्रवृत्ति के थे। कहा जाता है कि बाल्यकाल में ही उन्होंने वेद-शास्त्रों का गहन अध्ययन कर लिया था और ईश्वर भक्ति में विशेष रुचि रखते थे। युवावस्था में उन्होंने अद्वैत वेदांत के विद्वान आचार्य यदवप्रकाश से शिक्षा ग्रहण की, किंतु उनके विचारों से संतुष्ट नहीं हुए।
उनका हृदय भक्ति और सगुण ईश्वर की उपासना की ओर झुका हुआ था। आगे चलकर उनकी भेंट महान संत महापूर्ण (पेरिया नंबि) से हुई, जिन्होंने उन्हें श्रीवैष्णव परंपरा में दीक्षित किया। इसके बाद रामानुजाचार्य ने विशिष्टाद्वैत वैदांत का प्रचार-प्रसार प्रारंभ किया और भगवान विष्णु की भक्ति को जन-जन तक पहुंचाया। एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, उनके गुरु ने उन्हें एक पवित्र मंत्र दिया और चेतावनी दी कि इसे किसी अयोग्य व्यक्ति को न बताएं, अन्यथा उन्हें नरक का भय होगा।
किंतु रामानुजाचार्य ने समाज के कल्याण के लिए उस मंत्र को मंदिर की ऊँची दीवार पर चढ़कर सबको सुना दिया। जब गुरु ने उनसे इसका कारण पूछा, तो उन्होंने विनम्रता से कहा, “यदि इस मंत्र से अनेक लोगों का कल्याण होता है और मुझे अकेले नरक जाना पड़े, तो भी मैं यह त्याग स्वीकार करता हूँ।” उनकी इस करुणा और त्याग से गुरु भी भावविभोर हो उठे।
रामानुजाचार्य ने जीवन भर समाज में व्याप्त भेदभाव का विरोध किया और सभी वर्गों को ईश्वर भक्ति का समान अधिकार दिलाने का प्रयास किया। उन्होंने मंदिरों के द्वार आम जन के लिए खोले और भक्ति को सरल भाषा में समझाया। यही कारण है कि उनकी जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, समानता और समर्पण का संदेश देने वाला पावन अवसर है।
बृहत् कुंडली में छिपा है, आपके जीवन का सारा राज, जानें ग्रहों की चाल का पूरा लेखा-जोखा
रामानुज जयंती 2026 की पूजा विधि
- सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और व्रत/पूजा का संकल्प लें।
- चौकी पर पीला या सफेद कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और रामानुजाचार्य की तस्वीर स्थापित करें।
- घी का दीपक जलाएं और धूप-अगरबत्ती अर्पित करें।
- चंदन, अक्षत और पीले/सफेद पुष्प अर्पित करें।
- “ॐ नमो नारायणाय” मंत्र की कम से कम 108 बार माला करें।
- विष्णु सहस्रनाम या श्रीवैष्णव स्तोत्रों का पाठ करें।
- फल, पंचामृत, खीर या दूध का भोग अर्पित करें।
- भगवान विष्णु और रामानुजाचार्य की आरती करें।
- अन्न, वस्त्र या दक्षिणा का दान करें।
- उनकी शिक्षाओं के अनुसार प्रेम, समानता और सेवा का संकल्प लें।
AstroSage AI पॉडकास्ट सुनें – यहां आपको मिलेंगे ज्योतिष, जीवन के रहस्य, किस्मत के संकेत और AI द्वारा बताए गए सटीक ज्योतिषीय समाधान। अपनी ज़िंदगी के अहम सवालों के जवाब अब आवाज़ में, आसान भाषा में।
रामानुज जयंती 2026 के दिन क्या करें क्या न करें
क्या करें
- सुबह स्नान करके स्वच्छ और सादे वस्त्र धारण करें।
- भगवान विष्णु का पूजन करें और “ॐ नमो नारायणाय” मंत्र का जप करें।
- रामानुजाचार्य के उपदेशों का पाठ या श्रवण करें।
- मंदिर में दर्शन करें या घर पर भजन-कीर्तन करें।
- जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या दक्षिणा दान करें।
- सभी के प्रति समान भाव और मधुर वाणी रखें।
- सेवा कार्य करें, जैसे भोजन वितरण या धार्मिक सेवा।
क्या न करें
- किसी भी प्रकार का भेदभाव या ऊँच-नीच का व्यवहार न करें।
- क्रोध, कटु वचन और विवाद से दूर रहें।
- तामसिक भोजन (मांस, मदिरा आदि) से परहेज करें।
- दिखावे या अहंकार के साथ पूजा न करें।
- दूसरों की आस्था या परंपरा का अनादर न करें।
नए वर्ष की भविष्यवाणी प्राप्त करें वार्षिक कुंडली 2026 से
रामानुज जयंती के दिन करें ये आसान उपाय
ज्ञान और आध्यात्मिक उन्नति के लिए
रामानुजाचार्य की ज्ञान और भक्ति के प्रतीक माने जाते हैं। जयंती के दिन सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु के समक्ष घी का दीपक जलाकर “ॐ नमो नारायणाय” मंत्र की 108 बार माला करें। इसके बाद पीली मिठाई का भोग लगाकर प्रसाद बांटें। मान्यता है कि इससे बुद्धि में स्पष्टता और आध्यात्मिक प्रगति होती है।
घर में सुख-शांति के लिए
इस दिन परिवार के साथ मिलकर विष्णु सहस्रनाम या भजन-कीर्तन करें। घर में गंगाजल का छिड़काव करें और तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाएं। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में प्रेम व शांति बनी रहती है।
रत्न, रुद्राक्ष और अन्य ज्योतिषीय उत्पादों की खरीद के लिए क्लिक करें: एस्ट्रोसेज एआई शॉप
आर्थिक समृद्धि के लिए
गुरुवार या जयंती के दिन किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को पीली वस्तु जैसे चना दाल, हल्दी या पीला वस्त्र दान करें। साथ ही, “ॐ नमो नारायणाय” मंत्र का जप करें। यह उपाय आर्थिक बाधाओं को कम करने में सहायक माना जाता है।
संतान सुख के लिए
बच्चों को भगवान विष्णु और रामानुजाचार्य की कथा सुनाएं। माखन या खीर का भोग लगाकार बच्चों में बांटें। मान्यता है कि इससे संतान पर ईश्वर की कृपा बनी रहती है और उनका मन पढ़ाई व संस्कारों में लगता है।
मनोकामना पूर्ति के लिए
लगातार 11 दिनों तक एक निश्चित समय पर भगवान का ध्यान करें और अपनी इच्छा मन में रखते हुए मंत्र जप करें। सच्चे मन और समर्पण के साथ किया गया यह उपाय विशेष फलदायी माना जाता है।
सभी ज्योतिषीय समाधानों के लिए क्लिक करें: एस्ट्रोसेज ऑनलाइन शॉपिंग स्टोर
हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारा यह लेख ज़रूर पसंद आया होगा। अगर ऐसा है तो आप इसे अपने अन्य शुभचिंतकों के साथ ज़रूर साझा करें। धन्यवाद!
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
रामानुज जयंती तमिल सौर कैलेंडर के चित्रई महीने में तिरुवथिरई (आर्द्रा) नक्षत्र के दौरान मनाई जाती है। वर्ष 2026 में यह पर्व उसी नक्षत्र के अनुसार श्रद्धा से मनाया जाएगा।
रामानुजाचार्य महान वैष्णव दार्शनिक, समाज सुधारक और विशिष्टाद्वैत वेदांत के प्रवर्तक थे। उनका जन्म 1017 ईस्वी में हुआ था और उन्होंने भक्ति को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया।
यह जयंती उनके जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। इस दिन भक्त उनके उपदेशों, भक्ति मार्ग और सामाजिक समानता के संदेश को स्मरण करते हैं।