कब है विश्वकर्मा पूजा 2026 में? जानें तिथि एवं मुहूर्त!

सितंबर 2026 में कब है विश्वकर्मा पूजा? जानें तिथि, मुहूर्त एवं धार्मिक महत्व!

विश्वकर्मा पूजा 2026: सनातन धर्म में विश्वकर्मा पूजा को विशेष स्थान दिया गया है जो चंद्र कैलेंडर के आधार पर मनाया जाता है। जब सूर्य देव कन्या राशि में प्रवेश करते हैं. तब विश्वकर्मा पूजा की जाती है, जिसे कन्या संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व ब्रह्मांड के वास्तुकार और देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा को समर्पित होता है। मान्यता के अनुसार, विश्वकर्मा जी ने ही द्वारका, लंका और हस्तिनापुर का निर्माण किया था और इंद्र देव का वज्र अस्त्र का श्रेय भी इनको जाता है।

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विश्वकर्मा पूजा 2026 को मुख्य रूप से फैक्ट्रियों, वर्कशॉप, इंडस्ट्रियल एरिया और कार्यक्षेत्र पर मनाई जाती है। इस पर्व को विशेषतौर पर पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार, झारखंड और असम में मनाया जाता है। इस दिन श्रमिक और कारीगर अपने औज़ारों की पूजा करते हैं और भगवान विश्वकर्मा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। एस्ट्रोसेज एआई का यह विशेष ब्लॉग आपको “विश्वकर्मा पूजा 2026” से जुड महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी जैसे तिथि एवं मुहूर्त। साथ ही, विश्वकर्मा पूजा का महत्व, पूजा विधि और इस दिन किए जाने वाले उपाय भी बताएंगे। 

विश्वकर्मा पूजा 2026: तिथि एवं पूजा मुहूर्त 

हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल विश्वकर्मा पूजा को 17 सितंबर 2026, गुरुवार को किया जाएगा। चलिए जानते हैं इस दिन का शुभ मुहूर्त। 

विश्वकर्मा पूजा 2026 तिथि: 17 सितंबर 2026, गुरुवार

कन्या संक्रांति की तिथि एवं मुहूर्त: 17 सितंबर 2026, शाम 07 बजकर 12 मिनट से,

पुण्य काल मुहूर्त: 17 सितंबर 2026, दोपहर 01: 00 बजे से शाम 07 बजकर 12 मिनट तक

महापुण्य काल मुहूर्त: 17 सितंबर 2026 की शाम 05 बजकर 08 मिनट से शाम 07 बजकर 12 मिनट तक

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विश्वकर्मा पूजा का महत्व 

रोज़गार मनुध्य के दैनिक जीवन का अभिन्न अंग है। इसी क्रम में, हिंदू धर्म में रोज़गार और व्यापार में सफलता पाने के लिए भगवान का आशीर्वाद पाना बहुत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से काम में प्रगति, वृद्धि और सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं।

इस पूजा का संबंध सुरक्षा और कार्यक्षमता से भी है। विश्वकर्मा पूजा द्वारा जातक दुर्घटनाओं, तकनीकी समस्याओं और काम में आने वाली अचानक समस्याओं से सुरक्षा के लिए प्रार्थना करते हैं इसलिए मशीनों, उपकरणों और तकनीकी कार्यों से जुड़े लोगों के लिए इसका विशेष महत्व है।

इसके अलावा, विश्वकर्मा पूजा से भक्त एकाग्रता, रचनात्मकता, तकनीकी ज्ञान और अपने कार्य में निपुणता के लिए भगवान विश्वकर्मा का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। साथ ही, आपको कार्यों में सफलता के साथ-साथ आपकी क्षमताएं मज़बूत होती हैं। 

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विश्वकर्मा पूजा 2026: व्रत नियम और उपाय 

  • विश्वकर्मा पूजा के शुभ अवसर की सुबह कार्यस्थल, फैक्ट्री, ऑफिस, वर्कशॉप, औजार, वाहन और मशीनों की अच्छी तरह सफाई करें। स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा का संकल्प लें। 
  • पूजास्थान पर लकड़ी की चौकी रखें और उस पर पीला या लाल रंग का वस्त्र बिछाएं। केले के पत्ते पर भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति या चित्र की स्थापना करें। इस पर जल से भरा कलश रखें और उसके ऊपर लाल कपड़े में लिपटा नारियल लें। 
  • पूजा स्थल पर औजार, उपकरण, वाहन की चाबी, लैपटॉप/कंप्यूटर के जरूरी सामान और मशीनों के उपकरण रखें। औजारों, वाहनों और मशीनों पर चंदन-सिंदूर का तिलक लगाएं और मशीनों/वाहनों पर कलावा बांधें।
  • भगवान विश्वकर्मा के सामने घी का दीपक लगाएं और धूप दिखाएं। 
  • भगवान को पीले या लाल रंग के फूल, माला, चंदन, अक्षत, फल, लड्डू-हलवा, पान और सुपारी अर्पित करें। 
  • षोडशोपचार पूजा करें और विश्वकर्मा सूक्त या मंत्र जैसे “ॐ आधार शक्तये नमः” और “ॐ कुमाराय नमः” का जाप करें।
  • विश्वकर्मा पूजा व्रत कथा पढ़ें और सुनें। भगवान विश्वकर्मा की कथाओं में परिवार के सदस्य, कर्मचारी और सहकर्मियों को भी शामिल करें।
  • इसके पश्चात, भगवान विश्वकर्मा की आरती करें, तथा करियर और व्यापार की सफलता के लिए प्रार्थना करें। 
  • विश्वकर्मा जी को प्रसाद और मिठाई का भोग लगाएं। इस बाद, परिवार के सदस्यों और सहकर्मियों को प्रसाद वितरित करें। 
  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा में उपयोग किए जाने वाले औजार, मशीन और वाहन का इस्तेमाल अगले दिन तक न करें। 

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विश्वकर्मा पूजा 2026: करियर एवं व्यापार में सफलता के लिए करें ये उपाय

मेष राशि: विश्वकर्मा पूजा के दिन काम में उपयोग होने वाले औजार या वाहन की चाबी पर सिंदूर का तिलक करें और रोज़गार में वृद्धि करें। 

वृषभ राशि: वृषभ राशि के जातक इस अवसर पर कर्मचारियों या श्रमिकों की सफेद मिठाई या चावल दान करें। साथ ही, आर्थिक स्थिरता के लिए प्रार्थना करें। 

मिथुन राशि: मिथुन राशि के जातक हरे फल या हरा चारा दान करें। इसके बाद मज़बूत संचार कौशल और तकनीकी ज्ञान के लिए विश्वकर्मा जी का आशीर्वाद लें।

कर्क राशि: कर्क राशि वाले विश्वकर्मा पूजा 2026 के दिन पूजा में कच्चा दूध और सफेद फूल चढ़ाएं और कार्यक्षेत्र में शांति एवं वृद्धि के लिए प्रार्थना करें। 

सिंह राशि: इस राशि के जातक सूर्य देव को लाल चंदन मिलाकर जल अर्पित करें और आत्मविश्वास एवं करियर में सफलता के लिए प्रार्थना करें। 

कन्या राशि: कन्या राशि के जातक विश्वकर्मा पूजा के दिन छात्रों को स्टेशनरी, किताबें या जरूरी सामान दान करें और उनसे करियर में वृद्धि के लिए प्रार्थना करें। 

 तुला राशि: विश्वकर्मा पूजा 2026 पर सहकर्मियों में पीली मिठाई बांटें और कार्यस्थल पर आपसी सामंजस्य की प्रार्थना करें। 

वृश्चिक राशि: भगवान विश्वकर्मा को गुड़ और लाल फूल अर्पित करें। काम से जुड़े उपकरण और मशीनों के सही काम करने की प्रार्थना करें। 

धनु राशि: श्रमिकों या जरूरतमंदों को पीले कपड़े या चने की दाल का दान करें। साथ ही, करियर में प्रगति की प्रार्थना करें। 

मकर राशि: विश्वकर्मा पूजा 2026 के दिन मशीनों पर सरसों का तेल लगाएं और काम में स्थिरता के लिए प्रार्थना करें। 

कुंभ राशि: कुंभ राशि के जातक इस दिन जरूरतमंदों  लोहे के बर्तन या औजार दान करें। साथ ही, आर्थिक और पेशेवर जीवन में प्रगति की प्रार्थना करें।

मीन राशि: मीन राशि वाले पूजा के दौरान पीले फूल और केले भगवान को अर्पित करें। 

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. विश्वकर्मा पूजा 2026 में कब है?

इस साल 17 सितंबर 2026 को विश्वकर्मा पूजा की जाएगी। 

2. विश्वकर्मा पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?

महापुण्य काल मुहूर्त 17 सितंबर 2026 की शाम 05 बजकर 08 मिनट से शाम 07 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। 

3.विश्वकर्मा पूजा पर किसकी पूजा करें?

विश्वकर्मा पूजा के दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है।