वक्री बुध का मिथुन राशि में गोचर, किन राशियों पर टूटेगा मुसीबत का पहाड़? जानें

वक्री बुध का मिथुन राशि में गोचर: वैदिक ज्योतिष में बुध ग्रह को नवग्रहों में युवराज का दर्जा प्राप्त है। इन्हें बुद्धि, वाणी, व्यापार और तर्क के कारक ग्रह माना जाता है और ऐसे में, बुध ग्रह की स्थिति नवग्रहों में महत्वपूर्ण मानी जाती है। अब यह जल्द ही अपनी राशि में परिवर्तन करने जा रहे हैं। हालांकि, बुध का मिथुन राशि में गोचर बेहद ख़ास रहने वाला है क्योंकि यह अपनी वक्री अवस्था में मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। इसके परिणामस्वरूप, बुध का यह गोचर कुछ राशियों के लिए शुभ और कुछ के लिए अशुभ रह सकता है। साथ ही, इनकी राशि में होने वाले इस बदलाव का असर मनुष्य जीवन के साथ-साथ संसार सहित देश-दुनिया पर भी नज़र आ सकता है। चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और जानते हैं बुध गोचर के बारे में।   

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इसी क्रम में, एस्ट्रोसेज एआई “वक्री बुध का मिथुन राशि में गोचर” का यह विशेष ब्लॉग अपने पाठकों के लिए लेकर आया है जिसके अंतर्गत आपको बुध गोचर से जुड़ी समस्त जानकारी प्राप्त होगी। साथ ही, अगर आपके मन भी उत्सुक है यह जानने के लिए कि मिथुन राशि में वक्री बुध आपके जीवन में शुभ या अशुभ कैसे परिणाम लेकर आएगा? किन राशियों की यह मुसीबतें बढ़ाने का काम करेगा? किन राशियों पर होगी धन-दौलत की वर्षा और किन्हें करना होगा आर्थिक समस्याओं का सामना? इस तरह की महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी। इसके अलावा, बुध गोचर के नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए आपको अनुभवी ज्योतिषियों द्वारा सरल उपाय भी प्रदान किए जाएंगे। आइए अब हम बिना देर किए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं बुध गोचर के बारे में सब कुछ। 

वक्री बुध का मिथुन राशि में गोचर: समय व तिथि

बुध सौरमंडल के सबसे छोटे ग्रह हैं जिन्हें तर्क-वितर्क, संवाद और बुद्धि के कारक माना जाता है। सभी ग्रहों में बुध सबसे तेज़ गति से चलने वाले ग्रह हैं इसलिए इनकी इनका गोचर हर 23 से 27 दिन में होता है। साथ ही, यह जल्दी-जल्दी अस्त, वक्री और मार्गी भी होते हैं। ऐसे में, बुध देव अब 07 जुलाई 2026 की सुबह 11 बजकर 23 मिनट पर मिथुन राशि में गोचर करने जा रहे हैं। बता दें कि बुध का यह गोचर अपनी स्वयं की राशि में होगा जो अच्छी बात है। लेकिन, बुध अपनी वक्री अवस्था में कर्क राशि से निकलकर पुनः मिथुन राशि में प्रवेश कर जाएंगे। ऐसे में, बुध महाराज से मिलने वाले परिणाम मिलेजुले रह सकते हैं। अगर आप भी वक्री अवस्था के बारे में नहीं जानते हैं, तो सबसे पहले आपको अवगत करवाते हैं वक्री चाल से।\

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किसे कहते हैं ग्रह का वक्री होना? 

जैसे कि हम आपको ऊपर बता चुके हैं कि बुध वक्री अवस्था में कर्क राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। ऐसे में, आपके मन में सवाल उठ सकते हैं कि आख़िर वक्री चाल क्या होती है? बता दें कि जब कोई ग्रह अपने परिक्रमा पथ पर चलते हुए उल्टा चलने लगता है यानी कि वह ग्रह आगे के बजाय पीछे की तरफ चलते हुए प्रतीत होता है, इसे ही ग्रह का वक्री होना कहते हैं। ज्योतिष में ग्रह की वक्री चाल को अशुभ माना जाता है जो ज्यादातर नकारात्मक परिणाम प्रदान करता है। हालांकि, कभी-कभी यह आपको शुभ फल भी दे सकता है।

वक्री ग्रह का प्रभाव 

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, जब कोई ग्रह वक्री होता है, तो उनसे मिलने वाले परिणामों में भी परिवर्तन देखने को मिल सकता है। वक्री ग्रहों के प्रभाव को लेकर विद्वानों के अलग-अलग मत हैं। कुछ ज्योतिषियों का मानना है कि वक्री अवस्था में उच्च राशि में होने पर भी नीच का फल प्रदान करते हैं। वहीं, यह नीच राशि में उच्च फल देते हैं जबकि कुछ विद्वान मानते हैं कि वक्री ग्रह सामान्य रूप से समस्याएं या नकारात्मक प्रभाव दे सकता है। इसके विपरीत, गोचर के संबंध में माना जाता है कि ग्रह उच्च राशि में शुभ फल प्रदान करते हैं और नीच राशि में अशुभ परिणाम देते हैं। 

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ज्योतिष में बुध ग्रह का महत्व 

ग्रहों के राजकुमार के नाम से विख्यात बुध ग्रह की स्थिति मनुष्य जीवन के लिए विशेष मायने रखती है। सौरमंडल में यह सबसे छोटे ग्रह माने गए हैं जो सूर्य देव के सबसे निकट स्थित है। बुद्धि, वाणी के ग्रह के रूप में बुध देव एक द्विस्वभाव ग्रह है। काल पुरुष कुंडली में बुध महाराज को मिथुन और कन्या राशि पर आधिपत्य प्राप्त है। 

इनकी उच्च कन्या राशि है जबकि यह मीन राशि में नीच अवस्था में होते हैं। बुध देव लगभग 15 अंश पर अपनी उच्च और नीच स्थिति में होते हैं। बुध ग्रह को उत्तर दिशा के स्वामी माना जाता है। वहीं, सूर्य और शुक्र को इनके मित्र माना जाता है, परंतु मंगल और चंद्रमा को यह अपना शत्रु मानते हैं। वहीं, बृहस्पति और शनि के साथ बुध ग्रह तटस्थ संबंध रखते हैं। बात करें महादशा की, तो बुध की महादशा 17 वर्ष तक रहती है।

आइए अब हम आपको रूबरू करवाते हैं बुध ग्रह कुंडली के बारह भावों में कैसे परिणाम देते हैं और इन्हें कैसे प्रभावित करते हैं।   

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वक्री बुध का मिथुन राशि में गोचर: कुंडली के 12 भावों पर बुध ग्रह का प्रभाव 

बुध का पहले भाव में प्रभाव 

प्रथम भाव में बुध महाराज की उपस्थिति को अत्यंत शुभ माना जाता है। इस भाव में बुध के प्रभाव से जातक को समाज में मान-सम्मान, प्रतिष्ठा और अलग पहचान की प्राप्ति होती है। ऐसे जातक प्रभावशाली वक्ता होते हैं और लोग उनकी बातों को ध्यान से सुनना पसंद करते हैं। यदि प्रथम भाव में बुध ग्रह के साथ सूर्य ग्रह बैठे होते हैं, तो बुधादित्य योग का निर्माण करते हैं जो व्यक्ति को बुद्धिमत्ता, सफलता और जीवन में विशेष उपलब्धियों का आशीर्वाद देते हैं। 

बुध का दूसरे भाव में प्रभाव 

कुंडली के दूसरे भाव में बुध महाराज के बैठे होने पर जातक बुद्धिमान, प्रभावशाली वक्ता और अपनी योजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा करने वाला बनता है। ऐसे लोगों को अक्सर खोया हुआ धन मिलने के योग बनते हैं और साथ ही, इन्हें अपने जीवन में अचानक धन की प्राप्ति होती है। दूसरे भाव में बुध के प्रभाव से जातक न्याय में विश्वास रखने वाला, दूसरों की सहायता करने वाला और दयालु स्वभाव का होता है। 

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बुध का तीसरे भाव में प्रभाव 

जब बुध महाराज आपकी जन्म कुंडली के तीसरे भाव में स्थित होते हैं, तो आपको अपने परिवार और मित्रों का सहयोग एवं उनका प्यार हर कदम पर प्राप्त होता है। आपके द्वारा लिए गए निर्णयों और किए गए कार्यों को लोगों से सराहना मिलती है जिससे आपके भीतर आत्मविश्वास बढ़ता है। हालांकि, कभी-कभी ऐसे लोग रूढ़िवादी सोच से भी प्रभावित हो सकते हैं। इनकी धर्म और  अध्यात्म में बहुत गहरी रुचि होती है। साथ ही, ये घूमने-फिरने और विदेश यात्रा करना भी पसंद करते हैं। 

बुध का चौथे भाव में प्रभाव 

बुध ग्रह जब कुंडली के चौथे भाव में विराजमान होते हैं, तब यह व्यक्ति को स्वाभिमानी, कुशल वक्ता, मेहनती और एक सफल व्यापारी बनाते हैं। ऐसे जातक अपने प्रयासों के बल पर मकान और वाहन जैसे सुख जीवन में प्राप्त करते हैं। हालांकि, इनके मित्र बहुत कम होते हैं। यदि बुध देव पापी ग्रहों के साथ बैठे होते हैं, तो व्यक्ति को भोग-विलास या गलत इच्छाओं के लिए प्रोत्साहित करते हैं। ऐसे लोगों को लेखन, टीचिंग और प्रशासनिक कार्यों में सफलता मिलने की संभावना होती है। इनकी नेतृत्व क्षमता भी मज़बूत होती है। 

बुध का पांचवें भाव में प्रभाव 

कुंडली के पांचवें भाव में बुध ग्रह की स्थिति को बेहद शुभ और लाभकारी माना जाता है। अगर बुध अपने भाव में मज़बूत अवस्था में होते हैं, तो व्यक्ति गायक, संगीत प्रेमी या ललित कलाओं में रुचि रखने वाला होता है। साधारण परिवार में जन्म लेने के बावजूद ऐसे लोग अपनी बुद्धि और योग्यता के दम पर समाज में अच्छी पहचान और सम्मान प्राप्त करते हैं। ये स्वभाव से बेहद प्यारे, ज्ञान देने वाले और दूसरों को प्रेरणा देने वाले बनते हैं जिससे इन्हें जीवन में सफलता प्राप्त होती है। 

बुध का छठे भाव में प्रभाव 

बुध देव जन्म कुंडली के छठे भाव में मौजूद होने से जातक को जीवन के भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में मिले-जुले परिणामों की प्राप्ति होती है। ऐसे व्यक्ति के गुप्त शत्रु अधिक हो सकते हैं और कई बार वे उन पर हावी भी हो सकते हैं जिससे जीवन में आगे बढ़ने में इन्हें समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही, इन लोगों के कोर्ट-कचहरी से जुड़े मामलों में भी उलझने की संभावना बनी रहती है। करियर के क्षेत्र में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है और ऐसे में, स्थिरता बनाए रखना इनके लिए कठिन होता है। 

बुध का सातवें भाव में प्रभाव 

कुंडली के सातवें भाव में बुध ग्रह की उपस्थिति जातक को बहुत शुभ फल प्रदान करती है। ऐसे जातक व्यापार में अच्छी सफलता हासिल करता है और दांपत्य जीवन भी सुख-शांति से पूर्ण रहता है। हालांकि, यदि इस भाव में बुध शनि ग्रह के साथ होते हैं, तो इनसे मिलने वाले फल ज्यादा शुभ नहीं होते हैं। बुध देव अपनी राशि में विराजमान होते हैं, तो जातक को अपने ससुराल पक्ष से सहयोग मिलता है और धन लाभ के भी योग बनते हैं। ऐसा व्यक्ति दीर्घायु, यशस्वी, प्रसिद्ध और प्रशासनिक क्षमता से पूर्ण होता है। हालांकि, कई बार अहंकार की वजह से इन्हें हानि उठानी पड़ती है। 

बुध का आठवें भाव में प्रभाव 

बुध महाराज की आठवें भाव में उपस्थिति आपको मिश्रित परिणाम प्रदान करती है। ऐसे जातक को स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं जैसे हड्डी, एलर्जी, चर्म रोग और पेट से जुड़े रोग आदि का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, बुध देव जब अपने भाव में बैठे होते हैं, तब वह जातक को स्वास्थ्य, सामाजिक मान-प्रतिष्ठा और सुख-सुविधाएं भी प्रदान करते हैं। ऐसे इंसान को अपने जीवन में सभी तरह के भौतिक सुख की प्राप्ति होती है। 

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बुध का नौवें भाव में प्रभाव 

कुंडली के इस भाव में बुध ग्रह की स्थिति जातक को अपार सफलता प्रदान करती है। ऐसा व्यक्ति  धार्मिक कार्यों में रुचि रखने वाला, धार्मिक ग्रंथों का संपादन करने वाला, प्रकाशक और कुशल वक्ता होता है। कभी-कभी सामाजिक जिम्मेदारियों का दबाव भी इन पर साफतौर पर नज़र आता है। अगर बुध देव अपने भाव में उपस्थित होते हैं, तो फल दोगुना हो जाता है। ऐसा जातक जीवन में खूब प्रसिद्धि हासिल करता है और इन्हें देश-विदेश में भी घूमने का अवसर मिलता है

बुध का दसवें भाव में प्रभाव 

बुध ग्रह जब कुंडली के दसवें भाव में उपस्थित होते हैं, तब इनके प्रभाव से व्यक्ति मिलनसार, न्यायप्रिय, प्रशासक और समाजसेवी बनता है। साधारण परिवार में जन्म लेने के बावजूद ऐसा व्यक्ति अपनी योग्यता और मेहनत के दम पर जीवन में बुलंदियां हासिल करता है। यह जातक निर्णय लेने में सक्षम होते औहैं र साहसिक स्वभाव के होते हैं। ऐसे में, यह एक सफल जीवन जीते हैं। 

बुध का ग्यारहवें भाव में प्रभाव 

जन्म कुंडली के ग्यारहवें भाव में बुध महाराज की मौजूदगी जातक को बहुमुखी प्रतिभा का धनी बनाती है। ऐसा जातक चाहे नौकरी करें या फिर व्यापार, दोनों में ही सफलता के शिखर पर पहुंचता है। साथ ही, यह लोग ज्योतिषी, कुशल गणितज्ञ, न्यायिक प्रक्रिया में रुचि रखने वाले, लेखन तथा प्रकाशन के क्षेत्र में प्रसिद्धि हासिल करते हैं। इन लोगों को चाहने वालों की संख्या काफ़ी ज्यादा होती है और यह संगीत प्रेमी होती है।

बुध का बारहवें भाव में प्रभाव 

बुध देव की बारहवें भाव में स्थिति व्यक्ति को नकारात्मक परिणाम प्रदान करती है। ऐसे व्यक्ति के जीवन में उतार-चढ़ाव बने रह सकते हैं। हालांकि, इन्हें यात्रा करना पसंद होता है और धार्मिक कार्यों में भी इनकी अच्छी रुचि होती है। ऐसा जातक समाज में सम्मान भी प्राप्त करते है। यदि बुध अपने ही भाव में मजबूत स्थिति में होता है, तो विदेशी कंपनियों में उच्च पद पर काम करने का अवसर आपको देता है।

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वक्री बुध का मिथुन राशि में गोचर: सरल एवं प्रभावी उपाय 

बुधवार का व्रत: बुध देव को प्रसन्न करने के लिए 21 बुधवार का व्रत करें। व्रत के दिन हरे रंग के वस्त्र धारण करें। साथ ही, बुध के बीज मंत्र “ॐ बुं बुधाय नमः” का जाप करें। 

बुधवार को करें दान: कुंडली में बुध ग्रह को मज़बूत करने के लिए बुधवार के दिन हरे रंग के वस्त्र, घृत, कांस्य, कपूर, पुष्प, हाथी मिस्री, सुवर्ण, दांत, दक्षिणा, पन्ना आदि का अपनी क्षमता के अनुसार दान करें। 

गाय को चारा खिलाएं: बुध देव से शुभ फल पाने के लिए बुधवार के दिन गाय को हरा चारा खिलाएं। ऐसा करने से बुध की स्थिति कुंडली में मज़बूत होती है। 

तुलसी का पौधा लगाएं: बुध के आशीर्वाद के लिए बुधवार के दिन घर में तुलसी का पौधा लगाएं और इसकी नियमित रूप से पूजा करें। साथ ही, रविवार के अलावा सभी दिन तुलसी को जल अर्पित करें। 

वक्री बुध का मिथुन राशि में गोचर: राशि अनुसार प्रभाव और उपाय 

मेष राशि

मेष राशि वालों के लिए बुध आपकी कुंडली में तीसरे और छठे भाव के स्वामी… (विस्तार से पढ़ें) 

वृषभ राशि

वृषभ राशि वालों के लिए बुध आपकी कुंडली में दूसरे तथा पांचवें भाव के स्वामी… (विस्तार से पढ़ें)

मिथुन राशि

मिथुन राशि वालों के लिए बुध आपकी लग्न या राशि स्वामी होने के साथ-साथ… (विस्तार से पढ़ें)

कर्क राशि

कर्क राशि वालों के लिए बुध ग्रह आपकी कुंडली में तीसरे तथा द्वादश भाव के स्वामी… (विस्तार से पढ़ें)

सिंह राशि

सिंह राशि वालों के लिए बुध आपकी कुंडली में दूसरे तथा लाभ भाव के स्वामी होते हैं और…(विस्तार से पढ़ें) 

कन्या राशि

कन्या राशि वालों के लिए बुध आपकी कुंडली में आपके लग्न या राशि के स्वामी होने के…(विस्तार से पढ़ें)

तुला राशि

तुला राशि वालों के लिए बुध आपकी कुंडली में भाग्य तथा द्वादश भाव के स्वामी होते हैं और … (विस्तार से पढ़ें)

वृश्चिक राशि 

वृश्चिक राशि वालों के लिए बुध आपकी कुंडली में आठवें तथा लाभ भाव के स्वामी होते हैं और…(विस्तार से पढ़ें)

धनु राशि 

धनु राशि वालों के लिए बुध आपकी कुंडली में सातवें तथा दशम भाव के स्वामी होते हैं और …(विस्तार से पढ़ें)

मकर राशि

मकर राशि वालों के लिए बुध आपकी कुंडली में छठे तथा भाग्य भाव के स्वामी होते… (विस्तार से पढ़ें)

कुंभ राशि

कुंभ राशि वालों के लिए बुध आपकी कुंडली में पांचवें तथा आठवें भाव के स्वामी ग्रह होते हैं…(विस्तार से पढ़ें)

मीन राशि

मीन राशि वालों के लिए बुध आपकी कुंडली में चौथे तथा सातवें भाव के स्वामी होते हैं और … (विस्तार से पढ़ें)

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. वक्री बुध का मिथुन राशि में गोचर कब होगा?

बुध देव 07 जुलाई 2026 को वक्री अवस्था में मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। 

2. क्या बुध ग्रह व्यापार में सफलता दिलाते हैं? 

हाँ, बुध व्यापार के कारक ग्रह हैं इसलिए इनकी कुंडली में मज़बूत स्थिति आपको व्यापार में अपार सफलता दिलाती है। 

3. मिथुन राशि का स्वामी कौन है?

राशि चक्र की तीसरी राशि मिथुन के स्वामी बुध ग्रह हैं।