सावन सोमवार व्रत 2026: भगवान शिव के भक्तों को साल भर बेसब्री से सावन का इंतज़ार रहता है क्योंकि इस मास में भक्तजन महादेव की कृपा आसानी से प्राप्त कर लेते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन का माह भगवान शिव की कृपा के लिए श्रेष्ठ होता है और इस मास में पड़ने वाले सोमवार भी शुभ और पुण्यदायी माने जाते हैं। इस दिन व्रत एवं पूजन करने से भक्तों के सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं।

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जैसे कि हम जानते हैं कि 29 जुलाई 2026 से सावन महीने का आगाज़ हो गया है और 03 अगस्त 2026 को पहला सावन सोमवार व्रत रखा जा चुका है। ऐसे में, हम आज आपको एस्ट्रोसेज एआई के इस ब्लॉग के माध्यम से “दूसरे सावन सोमवार व्रत 2026” के बारे में समस्त जानकारी प्रदान करेंगे। साथ ही, कब किया जाएगा दूसरे सावन सोमवार व्रत को और कौन सी पूजा विधि से पूजा करना रहेगा शुभ, इसके बारे में भी हम बात करेंगे। इसके अलावा, महादेव की कृपा पाने के लिए आप किन उपायों को दूसरे सावन सोमवार व्रत के दिन कर सकते हैं? यह भी हम आपको बताएंगे। तो आइए बिना देर किए शुरू करते हैं यह सावन सोमवार व्रत स्पेशल ब्लॉग की।
सावन 2026: कब रखा जाएगा सावन सोमवार व्रत?
सावन का यह महीना साल 2026 में पूरे अगस्त माह चलेगा और 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन एवं श्रावण पूर्णिमा के साथ समाप्त हो जाएगा। इस बार सावन मास के दौरान 4 सावन सोमवार पड़ रहे हैं और इसी क्रम में, पहला सोमवार व्रत भक्तों द्वारा श्रद्धाभाव से किया गया। अगर हम बात करें सावन के दूसरे सोमवार व्रत की, तो दूसरा सोमवार व्रत 10 अगस्त 2026 को रखा जाएगा। इस शुभ दिन भक्त भगवान शिव के लिए सच्चे मन से पूजा-अर्चना करते हैं। आइए जानते हैं उत्तर भारत में दूसरा सावन सोमवार व्रत कब किया जाएगा।
दूसरा सोमवार: 10 अगस्त 2026, सोमवार
अभिजीत मुहूर्त: 11:59 से 12:52 तक
पश्चिम और दक्षिण भारत के लिए दूसरे सावन सोमवार व्रत की तिथि नीचे दी गई है।
दूसरा सोमवार: 24 अगस्त 2026, सोमवार
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सावन सोमवार व्रत 2026: धार्मिक महत्व
सावन माह हिन्दुओं के लिए धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से विशेष महत्व रखता है। इस दौरान की गई पूजा-पाठ कल्याणकारी साबित होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि इस पावन माह में भक्तिभाव से सोमवार व्रत और शिव पूजा करने विशेष फल की प्राप्ति होती है।
सावन सोमवार व्रत के शुभ अवसर पर भक्त शिवलिंग पर गंगाजल, बेलपत्र, दूध, भांग, सफेद पुष्प और धतूरा अर्पित करते हैं। इस दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते रहें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव को माता पार्वती ने पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। माता की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया था।
इसी क्रम में, ऐसे जातक जिनका विवाह नहीं हुआ है, वह मनचाहे जीवनसाथी का आशीर्वाद पाने के लिए सावन सोमवार का व्रत करते हैं। वहीं, विवाहित महिलाएं सावन सोमवार व्रत को सुखी-शांति पूर्ण वैवाहिक जीवन की कामना के लिए करती हैं। साथ ही, यह व्रत पति की लंबी आयु के लिए भी किया जाता है। ज्योतिष के अनुसार, सावन सोमवार व्रत और शिव मंत्रों का जाप करने से कुंडली में कमज़ोर चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है। इसके अलावा, सावन सोमवार पर शिव पूजा से राहु-केतु के नकारात्मक प्रभाव भी शांत होते हैं।
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सावन सोमवार व्रत: पूजा विधि
प्रातःकाल: दूसरे सावन सोमवार व्रत के दिन भक्तजन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। संभव हो, तो हल्के रंग या श्वेत वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान की साफ-सफ़ाई करके शिवलिंग या फिर भगवान शिव जी का चित्र या प्रतिमा पूर्व अथवा उत्तर दिशा में स्थापित करें।
संकल्प करें: अब भगवान शिव के सामने बैठें और अपने दाहिने हाथ में थोड़ा जल और अक्षत (चावल) लेकर संकल्प लें। व्रत का संकल्प लेते समय अपना नाम, व्रत का उद्देश्य और निर्विघ्न व्रत पूर्ण के लिए मन में प्रार्थना करें। आपका संकल्प ही सामान्य दिन को व्रत बनाता है।
जलाभिषेक करें: संकल्प लेने के पश्चात शिवलिंग पर एक पतली धार में जल अर्पित करें। साथ ही, जल चढ़ाते समय “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते रहें। शिव जी को प्रसन्न करने के लिए शुद्ध जल ही पर्याप्त है। भक्त अपने दाहिने हाथ से जल अर्पित करें और शिव भक्ति में अपना मन लगाएं।
पंचामृत से अभिषेक करें: जल से अभिषेक के बाद शिवलिंग पर पंचामृत (दही, दूध, शहद, और शक्कर) चढ़ाएं। इसके बाद, शिवलिंग का पुनः जल से अभिषेक करें। बता दें कि शिवलिंग पर अर्पित करने के लिए कच्चे दूध का ही इस्तेमाल करें।
बेलपत्र एवं फूल चढ़ाएं: पंचामृत से अभिषेक के बाद शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करें और फिर, सफेद पुष्प, चंदन, अक्षत, धतूरा और भांग आदि सामग्री चढ़ाएं। इसके पश्चात, शिवलिंग पर चंदन का त्रिपुंड लगाएं और दीप एवं धूप दिखाएं।
मंत्र, जाप एवं आरती करें: पूजन सामग्री शिवलिंग पर अर्पित करने के बाद “ॐ नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। साथ ही, सावन सोमवार व्रत की कथा पढ़ें या सुनें, और अंत में शिव जी की आरती करें। इसके बाद, प्रसाद के रूप में फल या खीर का भोग लगाएं और प्रसाद दूसरों को भी दें और खुद भी भोग लगाएं।
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सावन सोमवार व्रत कथा
धर्मग्रंथों में वर्णित सावन सोमवार व्रत की पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में एक नगर में एक साहूकार निवास करता था। उसके पास धन-दौलत की कमी नहीं थी, परंतु फिर भी वह दुखी रहता था जिसकी वजह थी कि उसके कोई संतान नहीं थी। संतान की प्राप्ति के लिए साहूकार नियमपूर्वक सोमवार व्रत किया करता था। वह भगवान शिव और माता पार्वती की सच्चे मन से उपासना किया करता था।
एक दिन माता पार्वती ने भगवान शिव को उस साहूकार की मनोकामना पूर्ण करने के लिए कहा। तब भगवान शिव ने कहा, इस संसार में मनुष्य को उसके कर्मों के अनुसार ही फल मिलता है, जिसके भाग्य में जो लिखा है उसे वही मिलता है। लेकिन, इसके बाद भी पार्वती जी नहीं मानी और उन्होंने भगवान शिव से उस साहूकार की इच्छा पूरी करने के लिए पुनः अनुरोध किया। माता के कहने पर भगवान शिव ने साहूकार को पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद दे दिया, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि यह बालक अल्पायु होगा और सिर्फ 12 साल तक ही जीवित रहेगा।
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भगवान शिव से आशीर्वाद पाकर एक तरफ जहाँ साहूकार अति प्रसन्न हुआ, तो वहीं पुत्र की आयु 12 वर्ष जानकर उसे दुख भी हुआ। लेकिन, तब भी उसने पहले की तरह ही भगवान शिव की पूजा करन जारी रखा। कुछ समय के बाद साहूकार को एक सुंदर कन्या की प्राप्ति हुई। वह बालक जब ग्यारह साल का हुआ तो साहूकार ने उसे उसके मामा के साथ पढ़ाई के लिए काशी भेज दिया। साहूकार ने पुत्र के मामा को बहुत सारा धन देते हुए कहा कि तुम लोग रास्ते में यज्ञ और ब्राह्मणों को भोजन करवाते हुए काशी जाना।
वह दोनों काशी पहुंचने से पूर्व एक राज्य में पहुंचे, जहां पर नगर के राजा की कन्या के विवाह का स्वयंवर हो रहा था। लेकिन जिस व्यक्ति से उस कन्या का विवाह होने वाला था वह एक आंख से काना था। ऐसे में, राजकुमार के पिता की नज़र साहूकार के बेटे पर पड़ी और उसने सोचा की क्यों न साहूकार के बेटे को दूल्हा बनाकर राजकुमारी के साथ विवाह करा दिया जाए। विवाह के बाद वर को धन देकर जाने को कह दूंगा और कन्या को पुनः अपने घर ले आऊंगा। राजकुमार के पिता ने साहूकार के बेटे से ये बात मनवा ली।
लेकिन साहूकार का पुत्र बहुत ईमानदार था और उसने विवाह के बाद जाते-जाते राजकुमारी के दुपट्टे पर लिखा कि तुम्हारा विवाह मेरे साथ हुआ है, परंतु अब जिस राजकुमार के साथ तुम्हें भेजा जा रहा है वह एक आंख से काना है। जब राजकुमारी ने इस बात को पढ़ा, तो उसने राजकुमार के साथ जाने से मना कर दिया। जब तक मामा और भांजा वहां से जा चुके थे और काशी जाकर उन्होंने यज्ञ किया।
जब लड़का 12 साल का हुआ और इस अवसर पर एक विशेष यज्ञ का आयोजन किया गया। लेकिन उसी दिन लड़के ने अपने प्राण त्याग दिए। मृत भांजे को देखकर मामा विलाप करने लगा और तब माता पार्वती और भगवान शिव वहां से गुज़र रहे थे। पार्वती माता ने भगवान शिव से कहा कि “स्वामी मुझ से उस व्यक्ति के रोने के स्वर सहन नहीं हो रहे, कृप्या करके आप इस व्यक्ति के कष्ट को हर लें।
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तब भगवान शिव ने माता पार्वती से कहा कि यह व्यक्ति साहूकार के पुत्र की मृत्यु पर विलाप कर रहा है और उसकी आयु पूरी हो चुकी है। लेकिन माता पार्वती इस बात को नहीं मानी और कहने लगीं कि इस बालक की आयु आपको बढ़ानी होगी, वरना इसके माता पिता पुत्र के दुख में अपने प्राण त्याग देंगे। भगवान शिव ने माता पार्वती की बात मानी और लड़के को जीवनदान दे दिया, जिसके बाद बालक ने अपनी शिक्षा पूरी की और वह अपने माता पिता के पास वापस चला गया।
वहीं, साहूकार और उसकी पत्नी ने यह फैसला ले लिया था कि अगर उनका पुत्र जीवित नहीं आया, तो वह दोनों भी अपने प्राण त्याग देंगे। लेकिन, जब उन्होंने अपने बेटे के वापस आने का समाचार सुना, तो उन दोनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। भगवान शिव ने साहूकार को सपने में दर्शन दिए और कहा कि “श्रेष्ठी, मैंने तेरे सोमवार के व्रत करने और व्रत कथा सुनने से प्रसन्न होकर तेरे पुत्र को लंबी आयु का वरदान दिया है।” ऐसा कहा जाता है कि जो व्यक्ति सावन सोमवार व्रत को सच्चे मन से करता है या कथा सुनता है, उसके जीवन से सभी दुख दूर होते हैं और सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
इस माह में दूसरा सावन सोमवार व्रत 10 अगस्त 2026 को किया जाएगा।
सावन सोमवार व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है।
इस बार सावन 2026 में कुल 4 सावन सोमार व्रत पड़ेंगे।