पद्मिनी एकादशी हिंदू धर्म में अत्यंत दुर्लभ और पुण्यदायी व्रत मानी जाती है, जो हर तीन वर्ष में एक बार अधिक मास (मलमास) के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को आती है। इस विशेष एकादशी को पद्मिनी एकादशी, पुरुषोत्तम एकादशी और मलमास एकादशी जैसे विभिन्न नामों से जाना जाता है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है, जिन्हें इस काल में पुरुषोत्तम रूप में पूजा जाता है।

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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अधिक मास को भगवान विष्णु ने स्वयं को समर्पित किया था, इसलिए इस महीने की एकादशी का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। पद्मिनी एकादशी का व्रत अत्यंत फलदायी माना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखने से व्यक्ति के समस्त पापों का नाश होता है, मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। विशेष रूप से संतान प्राप्ति, वैवाहिक सुख और आध्यात्मिक उन्नति के लिए यह व्रत अत्यंत शुभ माना गया है। साथ ही, इस दिन किए गए व्रत और पूजा से मोक्ष की प्राप्ति होती है और बैकुंठ धाम में स्थान मिलने का भी आशीर्वाद मिलता है। इस प्रकार, पद्मिनी एकादशी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, भक्ति और ईश्वर कृपा प्राप्त करने का एक दिव्य अवसर है।
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पद्मिनी एकादशी 2026 तिथि व मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल पद्मिनी एकादशी का व्रत 27 मई 2026 बुधवार के दिन रखा जाएगा।
एकादशी तिथि प्रारम्भ: मई 26, 2026 की सुबह 05 बजकर 13 मिनट से
एकादशी तिथि समाप्त: मई 27, 2026 की सुबह 06 बजकर 24 मिनट तक
पद्मिनी एकादशी पारण मुहूर्त : 28 मई की सुबह 05 बजकर 41 मिनट से 08 बजकर 18 मिनट तक।
अवधि : 2 घंटे 36 मिनट
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पद्मिनी एकादशी का महत्व
पद्मिनी एकादशी हिंदू धर्म में अत्यंत विशेष और दुर्लभ माना जाता है, क्योंकि यह हर तीन वर्ष में एक बार अधिक मास में आती है। यह एकादशी भगवान विष्णु के पुरुषोत्तम रूप को समर्पित होती है, इसलिए इसका आध्यात्मिक प्रभाव अन्य एकादशियों की तुलना में अधिक माना गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत और पूजा करने से व्यक्ति के जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख तथा समृद्धि का आगमन होता है। पद्मिनी एकादशी विशेष रूप से मनोकामना पूर्ति, संतान सुख, वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और आर्थिक उन्नति के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है। इस दिन श्रद्धा से भगवान विष्णु की पूजा करने और व्रत रखने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है और बैकुंठ धाम में स्थान मिलने का आशीर्वाद मिलता है।
साथ ही, यह व्रत व्यक्ति के मन को शुद्ध करता है, नकारात्मकता को दूर करता है और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। इसलिए पद्मिनी एकादशी को केवल एक व्रत नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और ईश्वर कृपा प्राप्त करने का एक दिव्य अवसर माना जाता है।
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पद्मिनी एकादशी की पूजा विधि
- पद्मिनी एकादशी के दिन प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- इसके बाद भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें।
- यदि संभव हो तो स्नान के जल में गंगाजल मिलाना शुभ माना जाता है।
- पूजा के लिए घर के मंदिर या पूजा स्थान पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर उस पर भगवान की मूर्ति रखें और पास में जल से भरा कलश स्थापित करें।
- इसके बाद भगवान विष्णु को अक्षत (चावल), पीले फूल, तुलसी दल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
- पूजन के दौरान “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें और विष्णु सहस्रनाम या पद्मिनी एकादशी व्रत कथा का पाठ करना विशेष फलदायी माना जाता है।
- भगवान को फल, मिष्ठान या पंचामृत का भोग लगाएं और अंत में आरती करें।
- इस दिन व्रत रखने वाले व्यक्ति दिनभर फलाहार करें और संभव हो तो जल तक सीमित रहकर उपवास करें।
- रात्रि में भगवान विष्णु का भजन-कीर्तन करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
- अगले दिन द्वादशी तिथि पर ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन और दान देने के बाद व्रत का पारण (समापन) करें।
- इस विधि से की गई पूजा से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
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पद्मिनी एकादशी कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में कृतवीर्य नामक एक महान और प्रतापी राजा थे। उनके राज्य में धन-धान्य की कोई कमी नहीं थी, लेकिन उन्हें संतान सुख की प्राप्ति नहीं हो रही थी। राजा और उनकी रानी इस बात से अत्यंत दुखी रहते थे। संतान प्राप्ति के लिए उन्होंने कई यज्ञ, दान और तपस्या की, लेकिन कोई फल नहीं मिला। एक दिन वे महर्षि अत्रि के़ृआश्रम पहुंचे और उनसे अपनी समस्या का समाधान पूछा। तब महर्षि अत्रि की पत्नी, देवी अनसूया ने रानी को पद्मिनी एकादशी व्रत करने की सलाह दी।
उन्होंने बताया कि यह व्रत अत्यंत दुर्लभ और प्रभावशाली है, जिसे अधिक मास के शुक्ल पक्ष में किया जाता है, और इससे भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न होते हैं। रानी ने पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से पद्मिनी एकादशी का व्रत रखा, भगवान विष्णु की पूजा की और नियमों का पालन किया। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें आशीर्वाद दिया।
कुछ समय बाद रानी को एक तेजस्वी और पराक्रमी पुत्र की प्राप्ति हुई, जिसका नाम कार्तवीर्य अर्जुन रखा गया। यह कथा दर्शाती है कि सच्ची श्रद्धा, नियम और विश्वास के साथ किया गया पद्मिनी एकादशी व्रत न केवल संतान सुख प्रदान करता है, बल्कि जीवन की सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने में भी सहायक होता है। यह व्रत भगवान विष्णु की कृपा पाने और जीवन में सुख-समृद्धि लाने का एक दिव्य माध्यम माना जाता है।
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पद्मिनी एकादशी पर क्या करें क्या न करें
क्या करें
- पद्मिनी एकादशी के दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें।
- इस दिन पीले वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है और भगवान विष्णु को तुलसी दल, पीले फूल, फल और मिठाई अर्पित करनी चाहिए।
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें तथा विष्णु सहस्रनाम या एकादशी व्रत कथा का पाठ करें।
- दिनभर व्रत रखकर फलाहार करें और रात्रि में भजन-कीर्तन करना अत्यंत पुण्यदायी होता है। अगले दिन द्वादशी पर दान-पुण्य करके व्रत का पारण करें।
क्या न करें
- इस दिन चावल, गेहूं और तामसिक भोजन (मांस, शराब आदि) का सेवन नहीं करना चाहिए।
- झूठ बोलना, क्रोध करना, किसी का अपमान करना या नकारात्मक विचार रखना भी वर्जित माना जाता है।
- व्रत के दौरान लहसुन-प्याज का सेवन न करें और अनावश्यक विवादों से दूर रहें।
- साथ ही, इस दिन किसी को कष्ट पहुंचाने या अपशब्द बोलने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे व्रत का पुण्य प्रभाव कम हो सकता है।
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पद्मिनी एकादशी के इस दिन करें ये आसान उपाय
धन वृद्धि के लिए
पद्मिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु को पीले पुष्प, हल्दी, केसर और चंदन अर्पित करें तथा घी का दीपक जलाएं। इसके बाद “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। यदि संभव हो तो विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी करें। मान्यता है कि इस उपाय को करने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और धन के नए स्रोत बनने लगते हैं।
आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए
एक पीले कपड़े में चने की दाल, गुड़ और एक सिक्का बांधकर भगवान विष्णु के चरणों में अर्पित करें। पूजा के बाद इस पोटली को किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को दान कर दें। यह उपाय रुकी हुई आर्थिक प्रगति को गति देता है और जीवन में स्थिरता लाता है। साथ ही, इस दिन अन्न और जल का दान करना भी विशेष लाभकारी माना जाता है।
अच्छे स्वास्थ्य के लिए
इस दिन तुलसी के पौधे में जल अर्पित करें और उसकी 11 या 21 बार परिक्रमा करें। साथ ही, “ॐ नमो नारायणाय” मंत्र का जाप करें। यदि संभव हो तो दिन भर सात्विक आङार लें या व्रत रखें। इससे शरीर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मानसिक शांति व अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
आर्थिक स्थिति सुधार के लिए
एक पीले कपड़े में चने की दाल, गुड़ और एक सिक्का बांधकर भगवान विष्णु के चरणों में अर्पित करें। पूजा के बाद इस पोटली को किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को दान कर दें। यह उपाय रुकी हुई आर्थिक प्रगति को गति देता है और जीवन में स्थिरता लाता है। साथ ही, इस दिन अन्न और जल का दान करना भी विशेष लाभकारी माना जाता है।
अच्छे स्वास्थ्य के लिए
इस दिन तुलसी के पौधे में जल अर्पित करें और उसकी 11 या 21 बार परिक्रमा करें। साथ ही “ॐ नमो नारायणाय” मंत्र का जाप करें। यदि संभव हो तो दिनभर सात्विक आहार लें या व्रत रखें। इससे शरीर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मानसिक शांति व अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
कर्ज मुक्ति के लिए
पद्मिनी एकादशी की शाम को पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और भगवान विष्णु से कर्ज मुक्ति की प्रार्थना करें। इसके अलावा, एक नारियल पर हल्दी का तिलक लगाकर उसे मंदिर में अर्पित करें। यह उपाय धीरे-धीरे कर्ज के बोझ को कम करने और आर्थिक संतुलन बनाने में सहायक माना जाता है।
पापों से मुक्ति के लिए
इस दिन पूर्ण श्रद्धा के साथ व्रत रखें, भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें और गीता या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। साथ ही 11 या 21 जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र या फल का दान करें। मान्यता है कि इससे जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश होता है और व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति व मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वर्ष 2026 में पद्मिनी एकादशी का व्रत 27 मई, बुधवार को रखा जाएगा।
यह एक दुर्लभ एकादशी है, जो लगभग हर 3 साल में अधिक मास (मलमास) के दौरान आती है।
इसे पद्मिनी एकादशी, पुरुषोत्तम एकादशी और मलमास एकादशी के नाम से जाना जाता है।