आषाढ़ माह 2026: हिंदू पंचांग में आषाढ़ साल का चौथा महीना है। उत्तर भारत में आषाढ़ का महीना 30 जून 2026 से लेकर 29 जुलाई, 2026 तक रहेगा। उत्तर भारत, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, हरियाणा, बिहार, छत्तीसगढ़ और उत्तरी भारत के अन्य राज्यों में इस कैलेंडर को ज्यादा देखा जाता है। हिंदू पंचांग में एक महीने की गणना पूर्णिमा के अगले दिन से लेकर अगली पूर्णिमा तक की जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह वर्ष ‘शक 2083’ है।

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आषाढ़ माह 2026 में कृष्ण एवं शुक्ल पक्ष
इस बार 30 जून से 14 जुलाई, 2026 तक आषाढ़ मास का कृष्ण पक्ष चलेगा और इसके बाद 15 जुलाई से लेकर 29 जुलाई, 2026 तक आषाढ़ मास का शुक्ल पक्ष चलेगा। इस प्रकार आषाढ़ का पूरा रहने वाला है।
आषाढ़ माह में आने वाली एकादशी
आषाढ़ मास में तीन एकादशियां आएंगी जिसमें 10 जुलाई, 2026 को योगिनी एकादशी, 11 जुलाई, 2026 को योगिनी एकादशी (वैष्णव) और 25 जुलाई, 2026 को देवशयनी एकादशी है।
योगिनी एकादशी: इस एकादशी पर भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है। इस बार यह एकादशी 10 जुलाई को पड़ रही है। इस एकादशी पर व्रत रखने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और पीपल के वृक्ष को काटने जैसे पाप तक से मुक्ति मिल सकती है। योगिनी एकादशी का व्रत सभी एकादशी में विशेष महत्व रखता है। माना जाता है कि इस व्रत को करने से जीवन में समृद्धि और आनंद की प्राप्ति होती है और साधक सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
देवशयनी एकादशी: देवशयनी एकादशी वर्ष का वह दिन होता है जब भगवान विष्णु चार महीने के लिए योग निद्रा अवस्था में चले जाते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी पर जागते हैं। मान्यता के अनुसार इस दौरान धरती का संचालन भगवान शिव करते हैं। देवशयनी एकादशी से चातुर्मास भी प्रारंभ होता है।
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आषाढ़ माह 2026 में प्रदोष व्रत
प्रदोष व्रत भगवान शिव की उपासना के लिए बहुत खास माना जाता है। 12 जुलाई, 2026 और 26 जुलाई, 2026 को प्रदोष व्रत किया जाएगा। सनातन धर्म में प्रदोष व्रत को महित्वपूर्ण स्थान दिया गया है जो भगवान शिव की कृपा पाने और उन्हें प्रसन्न करने के लिए श्रेष्ठ होता है। इस व्रत को प्रत्येक चंद्र पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है। बता दें कि सामान्य रूप से सूर्यास्त के बाद और रात्रि के आरंभ से पहले के समय को प्रदोष काल कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना पूरे विधि-विधान से की जाती है।
इस दिन जो भक्त पूरी श्रद्धा और निष्ठा से भगवान शिव की आराधना करता है, तो उसके जीवन से सभी कष्टों का निवारण हो जाता है। साथ ही, मृत्यु के बाद जातक को मोक्ष की भी प्राप्ति होती है। धार्मिक ग्रंथों में प्रदोष व्रत का वर्णन मिलता है और इस व्रत को करने से दो गायों के दान के समान पुण्य प्राप्त होता है।
आषाढ़ माह में आने वाले व्रत-त्योहार
योगिनी एकादशी: पूर्णिमांत हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास के कृष्ण पा में और अमान्त हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास में कृष्ण पक्ष की एकादशी पर योगिनी एकादशी पड़ती है। इस दिन व्रत रखने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
जगन्नाथ यात्रा: 16 जुलाई, 2026 को जगन्नाथ रथ यात्रा निकाली जाएगी। आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को जगन्नाथ यात्रा शुरू की जाती है। हर साल जगन्नाथ मंदिर के इष्ट देवता श्री जगन्नाथ वार्षिक भ्रमण पर निकलते हैं। इस दौरान कुछ दिनों तक भगवान जगन्नाथ रानी गुंडिवा द्वारा बनाए गए गुंडिचा मंदिर में वास करते हैं।
देवशयनी एकादशी: देवशयनी एकादशी का सनातन धर्म में बहुत अधिक महत्व है। मान्यता है कि इस दिन से चार महीने तक सूर्य, चंद्रमा और प्रकृति का तेजस तत्व कम हो जाता है इसलिए कहा जाता है कि देवशयन हो गया है। शुभ और सकारात्मक शक्तियों के कमज़ोर होने के चलते सभी शुभ कार्यों को करने की मनाही हो जाती है। चातुर्मास के दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।
गुरु पूर्णिमा: 29 जुलाई, 2026 को गुरु पूर्णिमा मनाई जाएगी। इस दिन शिष्य अपने गुरु का सम्मान करते हैं।
गौरी व्रत: आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर गौरी व्रत किया जाता है। इसके पांच दिन के बाद गुरु पूर्णिमा होती है जिस पर इस व्रत का समापन किया जाता है। इस व्रत को मोरकट व्रत के नाम से भी जाना जाता है।
व्यास पूजा: आषाढ़ माह 2026 की पूर्णिमा तिथि पर व्यास पूजा की जाता है। इसे व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू महाकाव्य महाभारत वेदव्यास जी द्वारा ही लिखा गया था। इसके साथ ही उन्होंने अनेक धर्मग्रंथों की रचना की थी।
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जगन्नाथ यात्रा का आयोजन
आषाढ़ मास तीर्थ यात्रा के लिए सबसे शानदार महीना माना जाता है। इस मास में पूजा पाठ करने का भी विशेष महत्व है और इसे साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। भगवान जगन्नाथ की भव्य यात्रा निकाली जाती है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। बता दें कि जब तक चातुर्मास रहता है तब शुभ और मांगलिक कार्य करने की मनाही होती है इसलिए इस माह पूजा पाठ पर अधिक ध्यान लगाना चाहिए।
चातुर्मास की होती है शुरुआत
आषाढ़ महीने से ही चातुर्मास की शुरुआत हो जाती है और यह पूरे चार महीने तक रहता है। इस अवधि के दौरान किसी भी तरह का शुभ और मांगलिक कार्य करना वर्जित होता है। सनातन धर्म में चातुर्मास का विशेष महत्व है। इसमें आने वाले चार महीने जिसमें सावन, भादौ, आश्विन और कार्तिक का महीना है। इस दौरान तीर्थ यात्रा करने का विशेष महत्व है। आषाढ़ मास में देवशयनी एकादशी पड़ती है और इस दिन से भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं इसलिए इस समय किसी प्रकार के मांगलिक कार्य नहीं किये जाते हैं। मांगलिक कार्यों की फिर शुरुआत कार्तिक मास की देवउत्थान एकादशी के दिन से होती है।
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आषाढ़ माह 2026 में चातुर्मास
हिंदू महीने आषाढ़ में देवशयनी एकादशी से चातुर्मास की शुरुआत होती है। चातुर्मास का अर्थ है चार महीने जो कि आध्यात्मिक कार्यों, व्रत और ईश्वर की उपासना करने का प्रतीक है। चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और इस अवधि को ध्यान, दान-पुण्य एवं आत्म-नियंत्रण के लिए बहुत अनुकूल माना जाता है जबकि इस दौरान कोई भी शुभ कार्य जैसे कि विवाह या गृह प्रवेश आदि करना वर्जित है।
चातुर्मास कार्तिक महीने में यानी अक्टूबर या नवंबर में खत्म होता है और यहीं से शुभ कार्य फिर से आरंभ होने शुरू हो जाते हैं। कार्तिक मास में आने वाली देवउत्थान एकादशी पर भगवान विष्णु अपनी योगनिद्रा से जागते हैं और संसार की बागडोर फिर से संभालते हैं।
वेदों में बताया गया है कि जो भी व्यक्ति चातुर्मास का व्रत रखता है, उसे असीम सुख-शांति की प्राप्ति होती है। इस व्रत को करने से मन और आत्मा दोनों पवित्र हो जाते हैं। आमतौर पर सन्यासी धर्म के प्रचार के लिए एक जगह से दूसरी जगह घूमते रहते हैं लेकिन भारत में वर्षा ऋतु के चार महीनों यानी जुलाई से लेकर अक्टूबर तक वे यात्रा नहीं करते हैं और किसी एक जगह पर आश्रय लेकर बिना हिले-डुले ध्यान करते हैं। सन्यासी के एक स्थान पर रुकने को चातुर्मास व्रत कहते हैं।
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इनके लिए अशुभ माना जाता है आषाढ़ माह
हिंदू धर्म के अनुसार ऐसा माना जाता है कि आषाढ़ के महीने में नवविवाहित जातकों को अपने साथी के साथ नहीं रहना चाहिए यानी शादी के शुरुआती वर्षों में जोड़े को आषाढ़ महीने के दौरान अलग हो जाना चाहिए।
इस मान्यता के पीछे कई अलग-अलग वजह बताई जाती हैं। हालांकि, सच यह है कि पुराने जमाने में लोग मानते थे कि यदि आषाढ़ के महीने में नवविवाहित जोड़े एक साथ रहते हैं और अगर महिला गर्भवती होती है तो वह चैत्र महीने में बच्चे को जन्म दे सकती है।
सनातन धर्म में आषाढ़ गर्मी का महीना है। माना जाता था कि गर्मी के दिनों में नवजात शिशु और मां को कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है इसलिए, यह सुझाव दिया गया कि नवविवाहित जोड़ों को पूरे आषाढ़ महीने के लिए अलग रहना चाहिए।
यह भी माना जाता है कि आषाढ़ के महीने में नवविवाहित महिला को अपनी सास के साथ नहीं रहना चाहिए इसलिए उन्हें आषाढ़ के महीने तक मायके भेज दिया जाता था ताकि दोनों के बीच कोई मतभेद न हो और रिश्ता प्यार से चलता रहे।
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आषाढ़ माह 2026 में क्या करें, क्या न करें
सनातन धर्म में आषाढ़ के महीने को लेकर कुछ नियम बनाए गए हैं जिनका पालन करने से अनुकूल परिणाम मिलते हैं।
- इस महीने में ऐसे फल खाएं जिनमें जल की मात्रा अधिक हो जैसे- तरबूज, खरबूजा आदि। तेल व ज्यादा भुनी चीजों का सेवन करने से बचें।
- आषाढ़ के महीने में विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना बेहद शुभ माना जाता है।
- यदि आप चाहें तो इस महीने में एकादशी, अमावस्या, और पूर्णिमा तिथि पर छाता, खड़ाऊ, आंवले, आम, खरबूजे, फल, व मिठाई, दक्षिणा, आदि चीज़ों को जरूरतमंद व गरीब लोगों को दान कर सकते हैं।
- इस महीने भगवान विष्णु निद्रा अवस्था में चले जाते हैं इसलिए इस माह से लेकर पूरे चार माह तक शादी-विवाह जैसे मांगलिक कार्य करने से बचना चाहिए अन्यथा इसके अशुभ प्रभाव झेलने पड़ सकते हैं।
- इस माह जितना हो सके भगवान विष्णु की पूजा करें और उनके मंत्रों का रोजाना जाप करें।
- इस महीने में बासी खाना खाने से परहेज करें अन्यथा बीमार पड़ने का खतरा बना रहता है। ये महीना वर्षा ऋतु के आगमन का होता है इसलिए जल का अपमान भूलकर भी न करें और न ही पानी की बर्बादी करें।
- इस महीने में स्नान दान का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसे में पवित्र नदियों में जाकर स्नान कर सकते हैं।
- इस माह भगवान सूर्य की उपासना करें और उन्हें जल अर्पित करें।
- इस महीने में तामसिक चीजें जैसे,मसूर की दाल, बैंगन शराब और मास मदिरा आदि से दूरी बना लें। हरे पत्तेदार सब्जियों का सेवन न करें क्योंकि उनमें कीड़े लगने की संभावना अधिक होती है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आषाढ़ का महीना 30 जून 2026 से लेकर 29 जुलाई, 2026 तक रहेगा।
10 जुलाई, 2026 को योगिनी एकादशी है।
16 जुलाई, 2026 को जगन्नाथ रथ यात्रा निकाली जाएगी।