चैत्र नवरात्रि 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से लेकर नवमी तिथि तक चैत्र नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। यह नवरात्रि नए वर्ष और नव ऊर्जा की शुरुआत का प्रतीक होती है। यह समय साहस, नए कार्यों और कर्म के लिए बहुत शुभ माना जाता है।

सनातन धर्म में चैत्र नवरात्रि बस एक पर्व नहीं बल्कि यह शक्ति, साधना और नई शुरुआत के लिए एक पवित्र समय होता है। धार्मिक, ज्योतिषीय और आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण और शुभ माना जाता है। नए काम की शुरुआत, व्यापार, विवाह और गृह प्रवेश के लिए मांगलिक होता है। ग्रह दोषों की शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
नवरात्रि का अर्थ है नौ रात्रियां और चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के विभिन्न नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस दौरान भक्त 9 दिनों तक उपवास भी रखते हैं। शारदीय नवरात्रि शरद ऋतु में आते हैं जबकि चैत्र नवरात्रि वसंत ऋतु में आते हैं। हिंदू पंचांग के चैत्र के महीने यानी मार्च या अप्रैल में चैत्र नवरात्रि मनाई जाती है। एस्ट्रोसेज एआई के इस विशेष ब्लॉग में आगे बताया गया है कि चैत्र नवरात्रि 2026 कब हैं, इसका महत्व एवं पूजन विधि आदि क्या हैं।
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चैत्र नवरात्रि 2026 कब है
चैत्र नवरात्रि का आरंभ 19 मार्च, 2026 होगा और इसका समापन 27 मार्च, 2026 का होगा। चैत्र नवरात्रि की शुरुआत उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में होगी। मां दुर्गा की उपासना के लिए चैत्र नवरात्रि बहुत शुभ माने जाते हैं।
चैत्र नवरात्रि 2026 का पहला दिन
चैत्र नवरात्रि का पहला दिन बहुत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इससे पूरे नौ दिनों के लिए आध्यात्मिक माहौल तैयार होता है। नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री को समर्पित होता है जो कि मां दुर्गा का पहला स्वरूप है। इन दिनों में श्रद्धालु समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और सफलता के लिए अनुष्ठान और विशेष पूजा करते हैं एवं मां दुर्गा का आशीर्वाद लेते हैं।
एस्ट्रोसेज एआई के इस विशेष ब्लॉग में नौ दिनों तक चलने वाले चैत्र नवरात्रि 2026 के पहले दिन की तिथि के बारे में बताया गया है। साथ ही घट स्थापना की विधि, महत्व आदि की जानकारी भी दी गई है। तो चलिए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन के बारे में।
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घट स्थापना के लिए समय और तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र नवरात्रि की शुरुआत चैत्र के महीने की प्रतिपदा तिथि से यानी 19 मार्च, 2026 से होगी। घट स्थापना के लिए शुभ समय है:
घट स्थापना मुहूर्त
घट स्थापना मुहूर्त: सुबह 06 बजकर 55 मिनट से लेकर 10 बजकर 28 मिनट तक
समयावधि: 3 घंटे 32 मिनट
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चैत्र नवरात्रि 2026 पर बन रहा अनोखा संयोग
इस बार धार्मिक पंचांग में दो अनोखे संयोग देखने को मिलेंगे। साल के आरंभ में माघ और चैत्र नवरात्रि की शुरुआत जनवरी और मार्च की 19 तारीख को ही हो रही है। इस साल के उत्तरार्ध में आषाढ़ और शारदीय नवरात्रि की शुरुआत पिछले साल की तुलना में 18 दिन देर से शुरू होंगे। इस बार माघ मास के गुप्त नवरात्रि 19 जनवरी को शुरू हुए थे और चैत्र नवरात्रि भी 19 तारीख से ही शुरू हो रहे हैं।
चैत्र नवरात्रि: प्रथम दिन दो शुभ योग हैं
चैत्र नवरात्रि के आरंभ से ही प्रथम दिन पर दो शुभ योग बन रहे हैं। 19 मार्च, 2026 को सुबह 04 बजे तक शुभ योग है और इसके बाद शुक्ल योग लग जाएगा।
जैसे कि नाम से ही पता चलता है कि शुभ योग अत्यंत फलदायी और मांगलिक योग है। वहीं शुक्ल योग की बात करें, तो यह शुद्धता, प्रकाश और सकारात्मक स्पष्टता को दर्शाता है। शुक्ल का अर्थ शुद्ध, सफेद या चमकदार होता है। इससे स्पष्टता और सकारात्मकता आती है।
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चैत्र नवरात्रि 2026: मां दुर्गा का वाहन
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा किसी विशेष वाहन पर बैठकर पृथ्वी पर आती हैं और हर एक वाहन का अलग अर्थ एवं महत्व होता है। इस साल चैत्र नवरात्रि का पर्व गुरुवार से शुरू हो रहा है इसलिए इस बार मां दुर्गा पालकी पर सवार होकर आ रही हैं।
चैत्र नवरात्रि 2026 पर प्रतिपदा का शुभ रंग
इस बार चैत्र नवरात्रि की शुरुआत गुरुवार पर हो रही है। प्रत्येक दिन के लिए एक शुभ रंग है और प्रतिपदा तिथि के लिए पीला रंग शुभ है। इस दिन पूजन के दौरान पीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ रहेगा।
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चैत्र नवरात्रि 2026 के प्रथम दिन का महत्व
नवरात्रि का अर्थ नौ रात्रियां या दिन होता है जो कि मां दुर्गा के नौ स्वरूपों को समर्पित होते हैं। नवरात्रि के प्रत्येक दिन मां दुर्गा के एक अलग अवतार की पूजा की जाती है जो दिव्य स्त्री के विभिन्न गुणों एवं शक्तियों को दर्शाते हैं। चैत्र नवरात्रि से हिंदुओं के नववर्ष की शुरुआत होती है इसलिए यह पर्व अत्यधिक महत्व रखता है। नए कार्यों की शुरुआत और शुभ कार्य करने के लिए चैत्र नवरात्रि बहुत मांगलिक समय होता है।
चैत्र नवरात्रि 2026: मां दुर्गा के नौ स्वरूप
जैसा कि हमने पहले भी बताया कि नवरात्रि में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। मां दुर्गा के नव स्वरूपों का आगे विस्तार से वर्णन किया गया है।
- शैलपुत्री: प्रतिपदा तिथि पर मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। शैलपुत्री पर्वत की बेटी हैं और ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश की शक्ति का प्रतीक हैं।
- ब्रह्मचारिणी: मां दुर्गा का दूसरा रूप मां ब्रह्मचारिणी के नाम से जाना जाता है। वह तपस्या और कठोर साधना का प्रतीक हैं। मां का यह रूप आध्यात्मिक ज्ञान का प्रतिनिधित्व करता हैं।
- चंद्रघंटा: चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा होती है जो साहस और दृढ़ता का प्रतीक हैं।
- कूष्मांडा: पौराणिक कथाओं के अनुसार मां कूष्मांडा की दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना हुई थी और उनका यह स्वरूप रचनात्मकता और ऊर्जा को दर्शाता है। चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा होती है।
- स्कंदमाता: पांचवे दिन मां स्कंदमाता की पूजा होती है जो कि भगवान कार्तिकेय यानी स्कंद की मां हैं।
- कात्यायनी: नवरात्रि का छठा दिन मां कात्यायनी के लिए है। इस रूप में मां दुर्गा योद्धा के रूप में दिखाई देती हैं एवं वह साहस का प्रतीक है।
- कालरात्रि: चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा होती है। देवी कालरात्रि अंधकार और अज्ञानता का नाश करने के लिए उग्र एवं विनाशकारी रूप रखती हैं।
- महागौरी: आठवें दिन मां गौरी की उपासना होती है जो कि पवित्रता और शांति का प्रतीक हैं।
- सिद्धिदात्री: नौवां स्वरूप अलौकिक शक्तियां प्रदान करने के साथ-साथ सभी इच्छाओं की पूर्ति करता है। नवरात्रि के अंतिम और नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है।
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चैत्र नवरात्रि: घट स्थापना कैसे करें
नवरात्रि का प्रथम दिन यानी प्रतिपदा तिथि बहुत महत्वपूर्ण होती है क्योंकि यहीं से चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की शुरुआत होती है। पहले दिन पर्व की शुरुआत के लिए कलश स्थापना की जाती है। ऐसा माना जाता है कि कलश स्थापना करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि का आगमन होता है। तो चलिए अब आगे बढ़ते हैं और जानते हैं चैत्र नवरात्रि के पहले दिन की कलश स्थापना या घट स्थापना करने की पूजन विधि क्या है:
- नवरात्रि के प्रथम दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर लें। इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और अपने घर के पूजन स्थल में आसन लगाकर बैठ जाएं।
- अब एक पात्र में मिट्टी डालें। यह प्रजनन और विकास का प्रतीक है। इस मिट्टी में जौ के बीज बोएं। ये जौ और पात्र घर के अंदर समृद्धि और संपन्नता को दर्शाते हैं।
- इसके बाद मिट्टी के पात्र के ऊपर एक मिट्टी का कलश रखें। यह कलश संपन्नता और दिव्य ऊर्जा का प्रतीक है।
- कलश के अंदर सुपारी, सिक्का और पुष्प डाल दें। ये चीज़ें संपन्नता, समृद्धि और भक्ति का प्रतीक हैं।
- फिर कलश को मिट्टी के ढक्कन से ढक दें। इसके ऊपर अक्षत रखें। अब पाटे पर लाल रंग का वस्त्र बिछाएं और कलश के सामने मां दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर कलश के सामने मां दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
- इसके बाद आप पूजन एवं पवित्र मंत्रों का जाप करें।
- मां दुर्गा को धूप-दीप, पुष्प, फल एवं मिठाई अर्पित करें एवं आरती करें।
मां शैलपुत्री के लिए मंत्र
बीज मंत्र: ‘या देवी सर्वभूतेषु मां शैलपुत्री रूपेण समस्थितल नमस्तस्यै नमतस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं विच्चै ॐ शैलपुत्री देवै नम:।।
चैत्र नवरात्रि 2026 : देवी के नौ रूपों से संबंधित ग्रह
| नवरात्रि का दिन | देवी का रूप | संबंधित ग्रह |
| पहला दिन : प्रतिपदा | मां शैलपुत्री | चंद्रमा |
| दूसरा दिन : द्वितीया | मां ब्रह्माचारिणी | मंगल |
| तीसरा दिन : तृतीया | मां चंद्रघंटा | शुक्र |
| चौथा दिन : चतुर्थी | मां कूष्मांडा | सूर्य |
| पांचवां दिन : पंचमी | मां स्कंदमाता | बुध |
| छठा दिन: षष्ठी | मां कात्यायनी | बृहस्पति |
| सातवां दिन : सप्तमी | मां कालरात्रि | शनि |
| आठवां दिन : अष्टमी | मां महागौरी | राहु |
| नौवां दिन : नवमी | मां सिद्धिदात्री | केतु |
चैत्र नवरात्रि के लिए ज्योतिषीय उपाय
- नवरात्रि के प्रथम दिन पर आप अपने घर के बाहर स्वास्तिक बनाएं। स्वास्तिक बनाने से नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और घर के अंदर सकारात्मकता आती है।
- मां दुर्गा को लाल रंग के पुष्प और लाल रंग की चुनरी अर्पित करें। इस उपाय को करने से घर में सुख-शांति का आगमन होता है।
- नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा की सप्तशती का पाठ करें। इससे जीवन में आ रही सभी अड़चनें दूर हो जाती हैं।
- मां दुर्गा की कृपा पाने और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए उन्हें कमल के पुष्प अर्पित करें।
- नवरात्रि के पूरे नौ दिनों तक अखंड ज्योत जलाएं। यह दिव्य ऊर्जा का प्रतीक है और इससे सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है।
- छोटी कन्याओं की अष्टमी या नवमी के दिन पूजा करें। इससे घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस साल 19 मार्च, 2026 को चैत्र नवरात्रि शुरू होंगे।
नवरात्रि का समापन 27 मार्च, 2026 को होगा।
इस साल मां दुर्गा घोड़े पर सवार होकर आ रही हैं।