वरदा चतुर्थी 2026: हिंदू धर्म में वरदा चतुर्थी का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। यह पावन दिन भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र भगवान गणेश को समर्पित होता है। बता दें कि चतुर्थी तिथि पर गणेश जी की पूजा करना कल्याणकारी माना जाता है। इसी क्रम में, जब यह चतुर्थी अधिकमास में पड़ती है, तब इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। अधिकमास में पड़ने वाली इस चतुर्थी को वरदा चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधिपूर्वक भगवान गणेश की पूजा और व्रत करने से भक्तों के जीवन से बाधाएं दूर होती हैं। साथ ही, उन्हें सुख-समृद्धि, संतान सुख, यश और लंबी आयु का आशीर्वाद देते हैं।

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एस्ट्रोसेज एआई का यह विशेष ब्लॉग आपको “वरदा चतुर्थी 2026” से जुड़ी समस्त जानकारी प्रदान करेगा जैसे तिथि, मुहूर्त आदि। साथ ही, इस दिन किन कार्यों को करना चाहिए और किन उपायों को अपना सकते हैं, इसके बारे में भी हम आपको अवगत करवाएंगे। तो आइए बिना देर किए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं वरदा चतुर्थी के बारे में सब कुछ।
वरदा चतुर्थी 2026: तिथि और मुहूर्त
यह बात हम भली-भांति जानते हैं कि हिंदू धर्म में अधिक मास तीन साल में एक बार आता है इसलिए इसे बेहद ख़ास माना जाता है। ऐसे में, इस माह में पड़ने वाले हर व्रत एवं पर्व का महत्व बढ़ जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर वरदा चतुर्थी मनाई जाती है। यह दिन भगवान गणेश जी की उपासना के लिए विशेष माना गया है। हालांकि, इस साल वरदा चतुर्थी की तिथि को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। विभिन्न पंचांगों में वरदा चतुर्थी की तिथि भिन्न-भिन्न बता रहा है और ऐसे में, अगर आप यह जानना चाहते हैं कि 19 या 20 कब है वरदा चतुर्थी। तो नीचे आपको सही तिथि प्रदान की जा रही है।
वरदा चतुर्थी 2026 की तिथि: 20 मई 2026, बुधवार
चतुर्थी मध्याह्न मुहूर्त: सुबह 10 बजकर 56 मिनट से,
सुबह 11 बजकर 06 मिनट तक
वर्जित चंद्रदर्शन का समय: सुबह 8 बजकर 43 मिनट से रात 11 बजकर 08 मिनट तक
चतुर्थी तिथि का आरंभ: 19 मई 2026 की दोपहर 02 बजकर 21 मिनट तक
चतुर्थी तिथि समाप्त: 20 मई 2026 की सुबह 11 बजकर 10 मिनट तक
नोट: हिंदू मान्यताओं के अनुसार, चतुर्थी तिथि और सूर्योदय के आधार पर व्रत की सही तिथि निर्धारित की जाती है। जैसे कि हमने आपको ऊपर बताया कि पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि 19 मई की दोपहर शुरू से होकर 20 मई तक रहेगी। ऐसे में, उदया तिथि के आधार पर वरदा विनायक चतुर्थी का व्रत 20 मई को रखा जाएगा। बता दें कि अलग-अलग क्षेत्रों में पंचांग के अनुसार तिथि में थोड़ा अंतर देखने को मिल सकता है।
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वरदा चतुर्थी 2026 का शुभ योग
वरदा चतुर्थी 2026 पर भगवान गणेश की पूजा के लिए प्रातःकाल का समय सबसे शुभ माना गया है। भक्त स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और इस अवसर पर भगवान गणेश को दूर्वा, मोदक, लाल पुष्प तथा सिंदूर आदि सामग्री श्रद्धाभाव से अर्पित करते हैं।
हिंदू धर्म में गणेश पूजा के लिए सुबह का समय सबसे शुभ माना जाता है। भक्त स्नान के बाद साफ वस्त्र पहनकर भगवान गणेश को दूर्वा, मोदक, लाल फूल और सिंदूर अर्पित करते हैं। मध्यान्ह काल में पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है।
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क्यों ख़ास होती है वरदा विनायक चतुर्थी?
- अधिक मास को “अतिशय पुण्यप्रद मास” के नाम से भी जाना जाता है, इसलिए इस माह में किया गया गणपति व्रत जातक को सहस्र गुणा फल दिलाने का काम करता है।
- यह व्रत भक्त के जीवन से सभी तरह की समस्याओं का अंत करता है और उन्हें सुख, शांति एवं समृद्धि का आशीर्वाद देता है।
- धर्मग्रंथों के अनुसार, मलमास या अधिक मास की चतुर्थी व्रत को भक्तिभाव और नियम पूर्वक करने से जातक के पूर्वजन्म के दोष और वर्तमान जीवन की समस्याओं का नाश हो जाता है।
- वरदा चतुर्थी 2026 व्रत से जातक का लौकिक और पारलौकिक दोनों तरह से कल्याण होता है। साथ ही, इस व्रत के शुभ प्रभाव से पितरों और देवताओं की तृप्ति भी हो जाती है।
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वरदा चतुर्थी का धार्मिक महत्व
सनातन धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य का दर्जा दिया गया है इसलिए किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत उनके पूजन के बिना अधूरी मानी जाती है। हर माह आने वाली विनायक चतुर्थी गणेश पूजा की आराधना के लिए अत्यंत शुभ होती है। इनमें वरदा विनायक चतुर्थी का खास महत्व माना गया है। अगर हम बात करें वरदा चतुर्दशी के अर्थ की, तो सामान्य रूप से ‘वरदा’ शब्द का अर्थ वरदान देने वाला से होता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वरदा चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति के जीवन से समस्याओं का अंत होता हैं। साथ ही, जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है। कुछ भक्त इस पावन अवसर पर व्रत करते हैं और गणेश जी के मंत्रों का जाप भी करते हैं।
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शास्त्रों में ऐसा कहा गया है कि वरदा चतुर्थी का व्रत रखने से बुद्धि, सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस शुभ दिन को नए कार्यों के आरंभ के लिए भी बेहद मंगलकारी माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि भगवान गणेश की कृपा पाने के लिए सच्चे मन से पूजा करना फलदायी होता है।
आइए अब हम बिना देर किए आगे बढ़ते हैं और आपको रूबरू करवाते हैं वरदा चतुर्थीक की पूजा विधि से।
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वरदा चतुर्थी 2026: पूजा विधि
- वरदा चतुर्थी के दिन भक्तजन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। ‘
- इसके बाद लाल या पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- अब पूजा स्थान को गंगा जल का छिड़काव करके शुद्ध करें और चौकी पर भगवान गणेश की प्रतिमा या मूर्ति की स्थापना करें।
- पूजा के दौरान भगवान गणेश को सिंदूर का तिलक करें क्योंकि यह उन्हें अत्यंत प्रिय माना गया है।
- गणपति बप्पा की पूजा में दूर्वा को विशेष स्थान दिया गया है, इसलिए वरदा चतुर्हति की पूजा करते समय “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करते रहें और बप्पा को 21 दूर्वा दल चढ़ाएं।
- इसके पश्चात, भगवान गणेश को मोदक या फिर उनकी प्रिय मिठाई का भोग अर्पित करें। विघ्नहर्ता गणेश की विधि-विधान से उपासना करें, फिर अंत में आरती करें।
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वरदा चतुर्थी का व्रत करने से घर-परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास रहता है।
- वरदा चतुर्थी 2026 के दिन गणेश पूजा के उपरांत ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन अवश्य कराएं। साथ ही, आप अपनी क्षमता के अनुसार दान करना बहुत शुभ होता है।
- धर्मग्रंथों के अनुसार “ॐ गणेशाय नमः” मंत्र का जाप करने से जीवन में उत्पन्न धन समस्याओं का अंत होता हैं। साथ ही, स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों से राहत मिलती है।
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वरदा चतुर्थी पर इस मंत्र से करें सिंदूर अर्पित
॥ सिन्दूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम् । शुभदं कामदं चैव सिन्दूरं प्रतिगृह्यताम् ॥
सिंदूर अर्पित का लाभ: हिंदू धर्म में सिंदूर को ऊर्जा और शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में, वरदा चतुर्थी के शुभ दिन भगवान गणेश जी को सिंदूर चढ़ाने से मानसिक शक्ति और आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होती है।
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वरदा चतुर्थी 2026 के दिन भूल से भी न करें ये काम
काले रंग के वस्त्र धारण न करें: हिन्दू धर्म में शुभ कार्य को करते समय काले रंग के कपड़े धारण करना अशुभ माना जाता है। ऐसे में, वरदा चतुर्थी 2026 के शुभ अवसर पर काले रंग के कपड़े पहनने नहीं चाहिए। ऐसा करने से जीवन में नकारात्मकता आती है और भक्त से गणेश जी रुष्ट हो सकते हैं।
तुलसी का न करें प्रयोग: हिंदू ग्रंथों के अनुसार, तुलसी को भगवान विष्णु का प्रिय माना जाता है, लेकिन गणेश जी की पूजा में तुलसी दल का इस्तेमाल वर्जित होता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान गणेश द्वारा तुलसी को श्राप दिया गया था इसलिए गणेश जी की पूजा-अर्चना में तुलसी के पत्ते को स्थान नहीं देना चाहिए।
बड़े बुजुर्गों का अपमान: वरदा चतुर्थी के दिन माता-पिता या घर के बुजुर्गों का अपमान करने से बचना चाहिए और न ही उन्हें ऐसे शब्द बोलने चाहिए जिससे उनके दिल को ठेस पहुंचें।
तामसिक भोजन के सेवन से बचें: वरदा चतुर्थी के दिन तामसिक भोजन का सेवन करने से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सात्विक आहार ग्रहण करना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से गणेश जी अप्रसन्न हो सकते हैं।
मतभेद और विवादों से बचें: वरदा चतुर्थी के शुभ अवसर पर किसी भी प्रकार के वाद-विवाद और कलह से दूर रहना चाहिए। साथ ही, किसी के प्रति मन में गलत विचार भी न करें। मान्यता है कि ऐसा करने से पूजा का पुण्य फल प्राप्त नहीं होता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस साल वरदा चतुर्थी 20 मई 2026, बुधवार को मनाई जाएगी।
हिंदू पंचांग के अनुसार, तीन साल में एक बार आने वाले अधिक मास की चतुर्थी तिथि को वरदा चतुर्थी कहते हैं।
वरदा चतुर्थी के दिन भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र गणेश जी की पूजा-अर्चना की जाती है।