शनि कुंभ राशि में उदय: जानें कैसे करेगा 12 राशियों को प्रभावित?

शनि का कुंभ राशि में उदय:  शनि 12 फरवरी 2024 को कुंभ राशि में अस्त हो गए थे जो अब यानी 18 मार्च 2024 को उदय हो गए हैं। पंचांगों के अनुसार शनि 17 तारीख को उदय हुए हैं।  हालांकि यह सिर्फ एक दिन के अंतर की अवधि है अतः हम इस पर कोई बड़ा विमर्श नहीं करेंगे बल्कि उदय और अस्त की बात करेंगे। अस्त होने का मतलब होता है बुझ जाना, डूब जाना या प्रभावहीन हो जाना। अर्थात शनि के प्रभाव में कुछ कमियां आ गई थीं, जो अब अर्थात 17 या 18 मार्च 2024 के बाद की समय अवधि में दूर हो जाएंगी। अर्थात शनि अब पहले के जैसे प्रभावशाली हो जाएंगे।

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शनि के उदय का भारत पर प्रभाव

शनि ग्रह के उदय हो जाने से भारतवर्ष की सरकार, चाहे वह केंद्र की सरकार हो, चाहे प्रदेश की सरकार हों, उनके मार्ग में आ रही कठिनाइयों में अब तुलनात्मक रूप से कमी आ सकती हैं। उनके पास अपने अधूरे वादों को पूरा न कर अपने के सार्थक तर्क देखने को मिल सकते हैं। जनता के मन में चल रहे असंतोष को दूर करने के लिए सरकारें, यत्न प्रयत्न करके जनता के मन के आक्रोश को शांत करवाने में काफी हद तक सफल हो सकती हैं। सरकार के विरुद्ध चल रहे प्रदर्शन इत्यादि में भी राहत देखने को मिल सकती है। यद्यपि यातायात संबंधी व्यवधान व दुर्घटनाएं अभी भी देखने को मिल सकती है। आइए अब जान लिया जाय कि शनि ग्रह के उदय होने से आपकी राशि पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

शनि कुंभ राशि में उदय: 12 राशियों पर प्रभाव और उपाय  

मेष राशि

शनि ग्रह आपकी कुंडली में दशम तथा लाभ भाव के स्वामी होते हैं तथा यह आपके लाभ भाव में रहते हुए उदित हो रहे हैं। फलस्वरूप आपके कामों में आ रही अड़चनें दूर होंगी और आपके लाभ के रास्ते और मजबूत होंगे। आप अपने इच्छित कार्यों को समय पर पूर्ण करने में भी अब सफल हो सकेंगे। 

उपाय:- प्रत्येक शनिवार सुंदरकांड का पाठ करना और भी अनुकूलता देने का काम करेगा। 

वृषभ राशि

शनि आपकी कुंडली में आपके भाग्य भाव तथा कर्म भाव के स्वामी होते हैं और वर्तमान में यह आपके कर्म स्थान पर रहते रहते उदित हो रहे हैं। यद्यपि कर्म स्थान पर शनि का गोचर सामान्य स्थिति में अच्छा नहीं माना जाता लेकिन शनि अपनी राशि में है। ऐसे में, उनका उदय होना तुलनात्मक रूप से बेहतर परिणाम दिलाने में मददगार बनेगा। अब कामों को पूरा करने में पहले की तुलना में कम मेहनत लग सकती है। यदि कोई वरिष्ठ किसी बात पर नाराज चल रहा था, या चल रहे थे तो उनकी नाराजगी दूर हो सकती है। पिता तुल्य व्यक्तियों का अच्छा सहयोग आपको मिल सकता है। यात्राएं तुलनात्मक रूप से बेहतर परिणाम भी दे सकेंगी। 

उपाय: भगवान भोलेनाथ के मंदिर में काले तिल के लड्डू चढ़ाना शुभ रहेगा। 

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मिथुन राशि

शनि आपकी कुंडली में आठवें भाव के स्वामी होने के साथ-साथ आपके भाग्य भाव के भी स्वामी होते हैं और शनि अब आपके भाग्य भाव में ही रहते हुए उदित हो रहे हैं। इस कारण से आपको आपके भाग्य का सपोर्ट अब तुनात्मक रूप से बेहतर मिल सकेगा। समस्याएं धीरे-धीरे करके कम होने लग जाएंगी। आपका धैर्य आपको अच्छे परिणाम देने में, दिलाने में सहायक बनेगा। आप आडंबर विहीन धार्मिक क्रियाकलापों से जुड़ाव रखेंगे। स्वास्थ्य का ख्याल रखने की स्थिति में स्वास्थ्य अब अनुकूल बना रहेगा।

उपाय:- संध्या के समय पीपल के वृक्ष के नीचे तिल के तेल का दीपक जलाना शुभ रहेगा। 

कर्क राशि

शनि देव आपकी कुंडली में सातवें तथा आठवें भाव के स्वामी होते हैं और आठवें भाव में रहते हुए ही यह उदित हो रहे हैं। वैसे सामान्य तौर पर चंद्र कुंडली के अनुसार आठवें भाव में शनि के गोचर को अच्छा नहीं माना जाता। यह शनि की ढैया की स्थिति मानी गई है। हालांकि हमने आपको शुरू में ही कहा है कि इस राशिफल को लग्न के अनुसार देखेंगे तो ज्यादा अच्छा रहेगा। अतः लग्न के अनुसार यह ज्यादा परेशानी की स्थिति नहीं होगी लेकिन फिर भी शनि का उदय होना, आपके लिए फायदेमंद रहेगा इस बात में संदेह है। अतः आपको अपने स्वास्थ्य का अब तुलनात्मक रूप से अधिक ख्याल रखने की जरूरत रहेगी। अपने आराध्य देवी देवताओं का स्मरण करते हुए विधिवत प्लानिंग करने के बाद कामों को करें, परिणाम तुलनात्मक रूप से बेहतर मिल सकेंगे।

उपाय:- महामृत्युंजय मंत्र का एक निश्चित संख्या में जब करते रहें, यह आपके लिए हितकारी सिद्ध होगा। 

सिंह राशि

शनि आपकी कुंडली में छठे तथा सातवें भाव के स्वामी होते हैं और वर्तमान में यह सातवें भाव में गोचर करते हुए ही उदित हो रहे हैं। वैसे तो सातवें भाव में शनि के गोचर को अच्छा नहीं माना जाता लेकिन अपनी राशि में उदित होने के कारण यह आपको जो भी परेशानियां या कठिनाइयां देंगे; उसमें कहीं न कहीं आपका हित छिपा हुआ रह सकता है। अर्थात शनि आपको कोई बहुत बड़ी नकारात्मकता नहीं देंगे, सिर्फ सीख देने के लिए या सही मार्ग पर लाने के लिए आपको कुछ परेशानियां बीच-बीच में देखने को मिल सकती है। यदि व्यापार व्यवसाय से जुड़े किसी प्रपोजन में आप नए सिरे से जुड़ने जा रहे हैं तो उसमें बहुत ही सावधानीपूर्वक आगे बढ़ाना उचित रहेगा। विवाह आदि के इच्छुक लोगों के लिए शनि का उदित होना फायदेमंद रह सकता है। 

उपाय:- काली उड़द के पकोड़े बनाकर गरीबों में बांटना शुभ रहेगा। 

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कन्या राशि

शनि ग्रह आपकी कुंडली में पांचवें तथा छठे भाव के स्वामी होते हैं और वर्तमान में यह आपके छठे भाव में ही गोचर करते हुए उदित हो रहे हैं। सामान्य तौर पर शनि के उदय होने से आपको मिलने वाले परिणाम के ग्राफ में और मजबूती देखने को मिल सकती है। अर्थात शनि आपको विभिन्न मामलों से फायदा दिलाने की कोशिश करेंगे। आपका स्वास्थ्य तुलनात्मक रूप से बेहतर होगा। आप प्रतिस्पर्धात्मक कार्यों में ज्यादा अच्छा कर सकेंगे। संतान पक्ष को लेकर चल रही चिंताएं दूर हो सकती हैं। कमर या पेट के आसपास यदि कोई परेशानियां पिछले दिनों आई थी तो अब आप उन परेशानियों को उचित आहार विहार व औषधी के सहयोग से दूर कर सकेंगे। 

उपाय:- मजदूरों को अपनी सामर्थ्य के अनुसार भोजन करवाना शुभ रहेगा। 

तुला राशि

शनि ग्रह आपकी कुंडली में चौथे तथा पांचवें भाव के स्वामी होते हैं और वर्तमान में यह आपके पांचवें भाव में रहते हुए उदित हो रहे हैं। पंचम भाव में शनि के गोचर को सामान्य तौर पर अच्छा नहीं माना गया है। अतः उदित होने के बाद शनि और मजबूत होंगे और पंचम भाव से जुड़ी कुछ परेशानियां देने का काम कर सकते हैं। हालांकि ये परेशानियां बड़ी मात्रा में नहीं होंगी, क्योंकि शनि अपनी ही राशि में है। अर्थात पढ़ाई लिखाई, संतान और प्रेम आदि से संबंधित मामलों में कुछ कठिनाइयां रह सकती हैं लेकिन लगातार निष्ठा पूर्वक प्रयत्न करने की स्थिति में आप इन मामलों में अच्छे परिणाम भी प्राप्त कर सकेंगे। 

उपाय:- शिवलिंग पर काले और सफेद तिल मिलाकर चढ़ाना शुभ रहेगा। 

वृश्चिक राशि

शनि ग्रह आपकी कुंडली में तीसरे तथा चौथे भाव के स्वामी होते हैं और वर्तमान में यह चौथे भाव में गोचर करते हुए ही उदित हो रहे हैं। चंद्र कुंडली के अनुसार चतुर्थ भाव में शनि का गोचर शनि की ढैया का निर्माण करता है। जिसे नकारात्मक माना गया है लेकिन लग्न कुंडली के अनुसार देखें तो शनि चतुर्थ भाव में अपनी ही राशि में रहेंगे। अतः बड़ी मात्रा में नकारात्मकता नहीं देंगे बल्कि यदि कोई परेशानी या कठिनाई आती है तो उसमें आपके लिए कोई न कोई सीख छिपी हुई रह सकती है। अर्थात धैर्य, अनुभव और ईमानदारी के साथ प्रयत्न करने की स्थिति में शनि अधिक नकारात्मकता नहीं देंगे। फिर भी घर गृहस्ती के मामलों में तथा बड़े बुजुर्गों के साथ संबंधों में जागरूकता जरूरी रहेगी। 

उपाय:- नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करना शुभ रहेगा। 

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धनु राशि

शनि आपकी कुंडली में दूसरे तथा तीसरे भाव के स्वामी होते हैं और वर्तमान में यह आपके तीसरे भाव में गोचर करते हुए उदित हो रहे हैं। ऐसे में शनि के परिणामों की अच्छाई का ग्राफ और भी बेहतर होगा और भी मजबूत होगा। यात्राएं तुलनात्मक रूप से और बेहतर परिणाम दे सकेंगी। यात्राओं के दौरान आने वाली कठिनाइयां कम रहेगी। भाई बंधु और पड़ोसी आपका बेहतर सहयोग करेंगे। आपकी आत्मनिर्भरता का लेवल और भी बेहतर होगा। दूरसंचार से संबंधित मामलों में आ रही कठिनाइयों या परेशानियां दूर होंगी। आर्थिक मामले में भी आप पहले की तुलना में अधिक सकारात्मकता का अनुभव कर सकेंगे। 

उपाय:- दशरथ कृत शनि स्त्रोत का पाठ करना शुभ रहेगा। 

मकर राशि

मकर राशि वालों शनि ग्रह आपकी लग्न या राशि के स्वामी होने के साथ-साथ आपके दूसरे भाव के भी स्वामी होते हैं और वर्तमान में दूसरे भाव में ही गोचर करते हुए उदित हो रहे हैं। वैसे तो चंद्र कुंडली के अनुसार दूसरे भाव में शनि के गोचर को साढ़ेसाती माना जाता है लेकिन लग्न कुंडली के अनुसार दूसरे भाव का स्वामी दूसरे भाव में रहकर आर्थिक और पारिवारिक मामले में कुछ अच्छा भी करवाना चाहेगा लेकिन जन सामान्य की समझने के लिए मैं यह कह सकता हूं कि शनि का दूसरे भाव में उदय होना आपके लिए बहुत अधिक फायदेमंद नहीं रहेगा। यद्यपि गोचर शास्त्रों में यहां पर शनि के गोचर को खराब परिणाम देने वाला कहा गया है लेकिन मेरे अनुसार अपनी राशि का शनि आपको अधिक नुकसान नहीं देगा। वहीं यदि आप पूरे निष्ठा और ईमानदारी के साथ कोई भी काम करते हैं तो आपको आपकी मेहनत के परिणाम भी पूरी तरह से मिल जाएंगे। वहीं लापरवाही की स्थिति में कुछ परेशानियां देखने को मिल सकती हैं। अर्थात शनि का उदय होना आपके लिए मिश्रित परिणाम देने का काम कर सकता है। 

उपाय:- शनिवार के दिन सुंदरकांड का पाठ करना शुभ रहेगा। 

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कुंभ राशि

शनि आपकी कुंडली में आपकी लग्न या राशि के स्वामी होने के साथ-साथ आपके द्वादश भाव के भी स्वामी होते हैं और वर्तमान में शनि आपके प्रथम भाव में गोचर करते हुए उदित हो रहे हैं। वैसे तो शनि का पहले भाव में गोचर अच्छा नहीं माना जाता लेकिन राशि लग्न के स्वामी का उदित होना आपके व्यक्तित्व और आपके स्वास्थ्य के लिए अनुकूल माना जाएगा। ऐसी स्थिति में यदि आपको पिछले दिनों से कोई स्वास्थ्य समस्या रही है तो उसके दूर होने के योग संयोग बनेंगे। धैर्य के साथ आप आगे बढ़ते हुए अपने कामों को बेहतर ढंग से अंजाम दे सकेंगे। शनि के उदय होने से आपके सलाहकार आपको उचित और बेहतर सलाह दे पाएंगे। दूर के स्थान से संबंधित कठिनाइयां अब तुलनात्मक रूप से कम हो सकती हैं। 

उपाय:- गजेंद्र मोक्ष स्तोत्र का पाठ करना शुभ रहेगा। 

मीन राशि

शनि ग्रह आपके लाभ तथा व्यय दोनों भागों के स्वामी होते हैं और वर्तमान में यह आपके द्वादश भाव अर्थात व्यय भाव में गोचर करते हुए उदित हो रहे हैं। यद्यपि शनि के गोचर को चंद्र कुंडली के अनुसार यहां पर साढ़ेसाती का निर्माण करने वाला कहा गया है। अर्थात सामान्य तौर पर यहां पर शनि की गोचर को अच्छा नहीं माना जाता। लग्न कुंडली के अनुसार भी शनि की द्वादश भाव में स्थिति अच्छी नहीं मानी जाएगी। अतः शनि के उदय होने से कुछ खर्च अचानक से बढ़ सकते हैं। हालांकि आमदनी का ग्राफ भी बढ़ेगा लेकिन आमदनी की तुलना में खर्च थोड़े से ज्यादा रह सकते हैं। यद्यपि शनि का द्वादश भाव में होना स्वास्थ्य के मामले में कमजोर परिणाम देने वाला कहा गया है लेकिन उदित होने के कारण जल्द ही अच्छी चिकित्सा मिल जानी चाहिए। फलस्वरुप आप अपने स्वास्थ्य को बेहतर रख सकेंगे। कर्ज आदि के लेनदेन से संबंधित मामलों में भी अब शनि तुलनात्मक रूप से बेहतर परिणाम दे सकेंगे लेकिन इन सबके बावजूद भी इन्हीं मामलों में किसी भी प्रकार का रिस्क बिल्कुल नहीं लेना है। 

उपाय:- नियमित रूप से हनुमत साठिका का पाठ करना शुभ रहेगा।

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