राहु के चाल बदलने से इन राशियों को रहना होगा अलर्ट, 62 दिनों तक लटकी रहेगी खतरे की तलवार

ज्‍योतिष में कुल नौ ग्रहों का वर्णन किया गया है जिसमें से राहु और केतु दोनों छाया ग्रह हैं। अन्‍य ग्रहों की तरह इन दो ग्रहों का किसी राशि या भाव पर आधिपत्‍य नहीं है। हालांकि, ये दोनों ही ग्रह राशि परिवर्तन कर सभी राशियों के जातकों के जीवन को प्रभावित जरूर करते हैं। 

राशि परिवर्तन के साथ ही ये दोनों नक्षत्र परिवर्तन भी करते हैं। राहु 30 अक्‍टूबर 2023 से मीन राशि में बैठे हैं और इसी दिन राहु ने रेवती नक्षत्र में प्रवेश किया था। अब 06 मई को राहु रेवती नक्षत्र के पहले पद में आ चुके हैं और यहां पर 08 जुलाई, 2024 तक रहेंगे। राहु के इस नक्षत्र में आने का असर सभी राशियों के लोगों पर देखने को मिलेगा लेकिन कुछ राशियां ऐसी हैं जिन्‍हें राहु की वजह से अपने जीवन में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

राहु के रेवती नक्षत्र के पहले पद में आने पर नकारात्‍मक रूप से प्रभावित होने वाली राशियों के बारे में जानने से पहले आप ज्‍योतिष में राहु के महत्‍व के बारे में जान लें।

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ज्‍योतिष में राहु का महत्‍व

ज्‍योतिष में राहु को मायावी ग्रह बताया गया है। ये ग्रह भ्रम की स्थिति पैदा करता है और व्‍यक्‍ति के मन में सांसारिक सुखों को पाने की इच्‍छा पैदा करता है। राहु के प्रभाव से जातक की लोकप्रियता में वृद्धि होती है और यह ग्रह आईटी सेक्‍टर को दर्शाता है।

ये ग्रह व्‍यक्‍ति को दुनिया के हर भौतिक सुख को पाने की इच्‍छा रखने के लिए प्रेरित करता है। इसकी वजह से जातक अपने जीवन से कभी संतुष्‍ट नहीं हो पाता है। राहु एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करने में 18 महीने का समय लेता है और राहु की महादशा भी 18 वर्ष की होती है।

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रेवती नक्षत्र का पहला पद

रेवती नक्षत्र के पहले पद पर देवताओं के गुरु बृहस्‍पति के प्रभाव से ज्ञान, सुख, सौभाग्‍य और बुद्धि में वृद्धि होती है। इसके प्रभाव से जातक के जीवन में कई तरह के अच्‍छे बदलाव होते हैं। इनकी आध्‍यात्मिक कार्यों में रुचि बढ़ती है और इनके व्‍यक्‍तित्‍व में पहले से ज्‍यादा निखार आता है। लोगों को भौतिक सुखों का आनंद उठाने का मौका मिलता है।

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राहु के रेवती नक्षत्र में आने पर राशियों पर प्रभाव

राहु के प्रभाव से जातक के अंदर ऊर्जा और आत्‍मविश्‍वास में वृद्धि होगी। इससे लोगों की इच्‍छा शक्‍ति भी जागृत होती है। राहु रेवती नक्षत्र में होने पर जातक का आध्‍यात्मिक कार्यों में अधिक ध्‍यान रहता है। उसका मन नई-नई चीज़ों को जानने और समझने का करता है। समाज में उसका मान-सम्‍मान और प्रतिष्‍ठा बढ़ती है। यह समय व्‍यापारियों के लिए भी अनुकूल होता है। उन्‍हें अपने व्‍यावसायिक क्षेत्र में खूब मुनाफा कमाने का मौका मिलता है। हालांकि, इस दौरान कुछ जातकों के काम में अड़चनें आने की आशंका भी रहती है। जातक भावनात्‍मक रूप से मज़बूत होता है।

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राहु का इन राशियों पर पड़ेगा अशुभ प्रभाव

राहु के रेवती नक्षत्र के प्रथम पद में आने पर मेष, कर्क, तुला और मकर राशि के लोगों को सावधान रहने की सलाह दी जाती है। इस समय आपके जीवन में कई तरह के बदलाव आने के संकेत हैं। आपको इस दौरान अपनी वाणी पर संयम रखने की सलाह दी जाती है।

आपके जीवन में चुनौतियां और रुकावटें बढ़ सकती हैं। आप अपने जीवन में संतुलन को बनाए रखने का प्रयास करें। आपको अपने सपनों को साकार करने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी। आप अपने मन में नकारात्‍मक विचारों को हावी न होने दें वरना आपके लिए आगे बढ़ना या सकारात्‍मक रह पाना मुश्किल हो जाएगा।

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राहु का इन राशियों पर पड़ेगा शुभ प्रभाव

राहु के रेवती नक्षत्र के प्रथम पद में आने पर कुछ राशियों को अनुकूल परिणाम मिलने वाले हैं। मिथुन, कन्‍या, मीन और धनु राशि के लोगों का अच्‍छा समय शुरू हो जाएगा। आपको इस दौरान जबरदस्‍त लाभ होने की संभावना है। आप अपने लक्ष्‍यों को प्राप्‍त करने के लिए जीतोड़ मेहनत करेंगे। आपका धार्मिक कार्यों में अधिक मन लगेगा। समाज में आपकी प्रशंसा होगी और आपका मान-सम्‍मान भी बढ़ेगा। आप चुनौतियों को आसानी से पार कर अपने कार्य में सफल होंगे। इस समय आपको हर क्षेत्र में सफलता प्राप्‍त होगी।

सिंह, वृषभ और कुंभ राशि के जातक अपने करियर को लेकर गंभीर नज़र आएंगे। आपकी आर्थिक स्थिति भी मज़बूत होगी और आपकी आय के नए स्रोत बनेंगे। आपके भौतिक सुख में बढ़ोत्तरी देखने को मिलेगी।

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FAQ

प्रश्‍न. राहु को खुश करने के लिए क्‍या करना चाहिए?

उत्तर. भगवान शिव की आराधना से राहु को शांत किया जा सकता है।

प्रश्‍न. राहु खराब होने से क्‍या होता है?

उत्तर. नींद न आना, बुरे सपने आना, नींद में डर लगना और कमज़ोरी महसूस होना।

प्रश्‍न. क्‍या रेवती एक अच्‍छा नक्षत्र है?

उत्तर. रेवती शुभ नक्षत्रों की श्रेणी में आता है

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