अगस्त में लगेगा साल 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण!

पूर्ण सूर्य ग्रहण 2026: जानें तिथि, समय और ज्योतिषीय प्रभाव!

सूर्य ग्रहण 2026: संसार में कई बार ऐसी घटनाएं देखने को मिलती हैं जो हमें अक्सर भगवान का चमत्कार लगती है, और सूर्य ग्रहण उन्हीं दुर्लभ घटनाओं में से एक माना जाता है। यह एक ऐसी खगोलीय घटना होती है जब दिन के समय आसमान में भी अंधेरा छा जाता है। बता दें कि हिंदू धर्म के साथ-साथ वैदिक ज्योतिष में भी सूर्य ग्रहण को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है जिसे अशुभ माना जाता है। इसका शुभ-अशुभ प्रभाव संसार सहित मनुष्य जीवन को भी प्रभावित करेगा।

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वर्ष 2026 के अगस्त माह में पूर्ण सूर्य ग्रहण जैसी दुर्लभ खगोलीय घटना देखने को मिलेगी। एस्ट्रोसेज एआई का यह विशेष ब्लॉग आपको इस साल में लगने वाले दूसरे सूर्य ग्रहण 2026 की समस्त जानकारी प्रदान करेगा। साथ ही, यह ग्रहण कब और किस समय लगेगा, क्या रहेगा इसका ज्योतिषीय महत्व आदि के बारे में भी हम बात करेंगे। इस दौरान आपको किन सावधानियों का पालन करना होगा, इस बारे में भी बिस्तर से चर्चा करेंगे। तो आइए बिना देर किए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं पूर्ण सूर्यग्रहण 2026 के बारे में सब कुछ।

सूर्य ग्रहण 2026: जानें इसका अर्थ और प्रकार

जैसे कि हम जानते हैं कि सूर्य ग्रहण उस समय घटित होता है, जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच में आ जाता है और इस वजह से सूर्य की किरणें पूरी तरह या आंशिक रूप से पृथ्वी तक नहीं पहुंच पातीं। हालांकि, सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से चार प्रकार के होते हैं जिनके बारे में हम आपको नीचे बताएंगे।

पूर्ण सूर्य ग्रहण: पूर्ण सूर्य ग्रहण के अंतर्गत चंद्रमा पूरी तरह सूर्य को ढक लेता है। जब चंद्रमा सूर्य को ढकता है, तब कुछ समय के लिए दिन में ही अंधेरा छा जाता है। ऐसा लगता है जैसे दिन में रात हो गई हो। पूर्ण सूर्य ग्रहण को सबसे दुर्लभ और सबसे अद्भुत माना जाता है। 

आंशिक सूर्य ग्रहण: आंशिक सूर्य ग्रहण में चंद्रमा सूर्य के केवल एक हिस्से की ढकता है जिसकी वजह से सूर्य का प्रकाश कुछ समय के लिये कम हो जाता है, लेकिन आसमान में पूरी तरह से अंधेरा नहीं होता है। यह सूर्य ग्रहण का सबसे सामान्य और सबसे अधिक लगने वाला सूर्य ग्रहण है।

वलयाकार सूर्य ग्रहण: वलयाकार सूर्य ग्रहण वह घटना होती है जब चंद्रमा की दूरी पृथ्वी से काफी अधिक होती है, तो वह आकार में थोड़ा छोटा दिखाई देता है। इसके परिणामस्वरूप, चंद्रमा सूर्य के बीच वाले भाग को ढक लेता है, लेकिन सूर्य के किनारे एक रिंग की भांति चमकते हुए दिखाई देते हैं। पृथ्वी से देखने पर यह सूर्य ग्रहण अंगूठी के आकार की तरह दिखने के कारण इसे ‘रिंग ऑफ फायर’ भी कहा जाता है। 

हाइब्रिड सूर्य ग्रहण: हाइब्रिड सूर्य ग्रहण को सभी सूर्य ग्रहण के प्रकारों में सबसे दुर्लभ माना जाता है। दुनिया में होने वाले सूर्य ग्रहण में से मात्र 5% हाइब्रिड सूर्य ग्रहण होते है। इस सूर्य ग्रहण की सबसे ख़ास बात यह है कि यह शुरुआत में वलयाकार सूर्य ग्रहण की तरह दिखाई देता है और फिर बीच में पूर्ण सूर्य ग्रहण में परिवर्तित हो जाता है और अंत में दोबारा वलयाकार सूर्य ग्रहण का रूप ले लेता है। 

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हिंदू धर्म और ज्योतिषीय दृष्टि से सूर्य ग्रहण का महत्व 

सनातन धर्म में सूर्य की सिर्फ़ प्रकाश देने वाला नहीं माना जाता है, बल्कि इन्हें जीवन,  आत्मा, शक्ति, ऊर्जा, नेतृत्व क्षमता और आत्म चेतना का प्रतीक माना गया है। वहीं, किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में सूर्य देव पिता, अधिकार, आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति का भी प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में, जब सूर्य ग्रहण 2026 के दौरान चंद्रमा सूर्य के प्रकाश को पूरी तरह ढक लेता है, तो इसे ज्योतिष में एक अत्यंत दुर्लभ और महत्वपूर्ण खगोलीय घटना कहा जाता है।

सूर्य ग्रहण की अवधि में वातावरण में उपस्थित ऊर्जा को नकारात्मक माना जाता है जिसका प्रभाव प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से व्यक्ति के मन और शरीर को प्रभावित कर सकता है। इसी वजह से परंपरागत रूप से सूर्य ग्रहण के समय में शुभ और मांगलिक कार्य से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, सूर्य ग्रहण को सदैव सभी लोगों के लिए अशुभ नहीं कहा जा सकता है। किसी व्यक्ति के जीवन को ग्रहण का प्रभाव किस तरह प्रभावित करेगा यह पूरी तरह से आपकी राशि, नक्षत्र और कुंडली में ग्रहों की स्थिति के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। 

पूर्ण सूर्य ग्रहण 2026 का ज्योतिषीय प्रभाव मुख्य रूप से इस बात पर निर्भर करता है कि 12 अगस्त 2026 को लगने वाला सूर्य ग्रहण कर्क राशि और आश्लेषा नक्षत्र में होने जा रहा है। साथ ही, आपकी जन्म कुंडली के किस भाव को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रहा है।

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पूर्ण सूर्य ग्रहण 2026: तिथि, समय और दृश्यता

यह ह्यूम आपको ऊपर बता चुके हैं कि साल 2026 का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण को लगने जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह सूर्य ग्रहण कर्क राशि और आश्लेषा नक्षत्र में श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर लगेगा। भारतीय समय के अनुसार, इस सूर्य ग्रहण का आरंभ 12 अगस्त 2026 की रात 9 बजकर 04 मिनट पर होगा जबकि इसकी सम्पति 13 अगस्त 2026 की सुबह 4 बजकर 25 मिनट पर हो जाएगी। 

पौराणिक धार्मिक ग्रंथों और वैदिक ज्योतिष के अनुसार, सूर्य ग्रहण तब होता है, जब सूर्य छाया ग्रह राहु के प्रभाव में आ जाता है। राहु को एक छाया ग्रह का दर्ज़ा दिया गया है और इन्हें ही धर्म ग्रंथों में  ग्रहण लगने का प्रमुख कारण बताया गया है। 

साल 2026 का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण यूरोप के अधिकांश देशों, कनाडा, रूस के उत्तर-पूर्वी भाग, उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका के देशों, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, आर्कटिक क्षेत्र, उत्तरी स्पेन, अटलांटिक महासागर और पुर्तगाल के उत्तर-पूर्वी हिस्सों में नज़र आएगा। 

अगर हम बात करें भारत की, तो यह पूर्ण सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। ऐसे में, हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल भी मान्य नहीं होगा और न ही सूर्य ग्रहण से जुड़े नियमों एवं सावधानियों का पालन किया जाएगा। 

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सूर्य ग्रहण 2026 के दौरान सूतक काल का अर्थ एवं महत्व 

हिंदू धर्म में सूतक काल एक ऐसी अवधि होती है जो ग्रहण के शुरू होने से पहले आरंभ होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय ग्रहण का प्रभाव तन, मन, और वातावरण पर नकारात्मक रूप से पड़ना शुरू हो जाता है। बता दें कि सूर्य ग्रहण के लिए सूतक काल का आरंभ ग्रहण के शुरू होने से लगभग 12 घंटे पहले हो जाता है। 

सावन माह अर्थात 12 अगस्त 2026 को लगने वाला पूर्ण सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। सभी तरह के धार्मिक कार्य, पूजा-पाठ और मंदिर दर्शन आदि सामान्य रूप से जारी रहेंगे। 

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पूर्ण सूर्य ग्रहण 2026: सूतक काल के दौरान क्या करें और क्या न करें?

विश्व के जिन क्षेत्रों में पूर्ण सूर्य ग्रहण 2026 दिखाई देगा, वहां पर सूतक काल मान्य होगा। ऐसे में, आपको पारंपरिक रूप से कुछ विशेष बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। 

  • सूर्य ग्रहण 2026 की अवधि में विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे मांगलिक कार्य या फिर किसी नए काम की शुरुआत करने से बचना चाहिए।
  • ग्रहण के दौरान भोजन बनाने और खाने का सेवन करने से बचें। अगर भोजन पहले से बना हुआ रखा है, तो आपको उसमें तुलसी की पत्ती का सेवन करना चाहिए।
  • इस समय आपको बाल कटवाने, दाढ़ी बनवाने और तेल मालिश करवाने से परहेज़ करना चाहिए। 
  • सूतक काल में मंदिर जाने और देवी-देवताओं की मूर्तियों को स्पर्श करने से बचना चाहिए।
  • ग्रहण काल में बेकार की यात्रा करने और अत्यधिक शारीरिक मेहनत से बचें।
  • सूर्य ग्रहण के समय दिन में सोने से बचना चाहिए, क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे आपके भीतर आलस और नकारात्मकता बढ़ सकती है। 
  • गुस्सा, विवाद और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए। साथ ही, इस दौरान मदिरा और मांसाहार का सेवन करने से बचें। 

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पूर्ण सूर्य ग्रहण 2026: गर्भवती महिलाएं जरूर बरतें ये सावधानियां 

हिंदू धर्म के अनुसार, सूर्य ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को विशेष रूप से सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। ऐसा माना जाता है कि ग्रहण का प्रभाव गर्भ में पल रहे शिशु के मानसिक और शारीरिक विकास पर पड़ सकता है। ऐसे में, आपको पारंपरिक रूप से नीचे दी गई सावधानियां अपनाने की सलाह दी जाती है:     

  • सूर्य ग्रहण के दौरान घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए। 
  • कैंची, चाकू या किसी भी नुकीली और धारदार वस्तु का इस्तेमाल करने से बचें। 
  • ग्रहण के समय भोजन करने से बचें। 
  • सूर्य ग्रहण को टीवी या अन्य माध्यमों से भी देखने से बचना चाहिए। 
  • पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान भारी सामान उठाने, ज्यादा झुकने या भारी शारीरिक श्रम करने से बचना चाहिए। 
  • ग्रहण के समय शांत मन से मंत्र जाप करें या धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें।
  • सूतक काल के समाप्त होने के बाद स्नान करें और फिर सात्विक भोजन करने से बचें। 

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पूर्ण सूर्य ग्रहण 2026 के दौरान क्या करें?

वैदिक ज्योतिष और हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, सूर्य ग्रहण 2026 के दौरान आप नीचे दिए गए उपायों को अपनाना फलदायी हो सकता है जो कि इस प्रकार हैं:

  • सूर्य ग्रहण के समय महामृत्युंजय मंत्र, आदित्य हृदय स्तोत्र या अपने इष्ट देव के मंत्र का जाप करें, विशेष रूप से गायत्री मंत्र का जाप करना बेहद शुभ माना जाता है “”ॐ आदित्याय विद्महे दिवाकराय धीमहि। तन्नः सूर्यः प्रचोदयात्॥”   
  • ग्रहण काल के समय ध्यान और प्राणायाम करें या फिर संभव हो, तो मौन व्रत का पालन करें।
  • भगवद्गीता, विष्णु सहस्रनाम, रामचरितमानस या अन्य धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें या सुनें। ऐसा करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है।
  • सूर्य ग्रहण 2026 के समाप्त होने के बाद स्नान करें और घर में गंगाजल का छिड़कर करें। साथ ही, पूजा स्थल की सफाई करें और दीपक जलाकर भगवान की पूजा-अर्चना करें। कई भक्तजन ग्रहण के बाद भगवान सूर्य को अर्घ्य भी देते हैं। 
  • इसके पश्चात, आप अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र, अनाज, तिल या धन का दान करें। साथ ही, गरीबों, गाय, पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं को भोजन कराना भी शुभ माना जाता है। 

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इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. पूर्ण सूर्य ग्रहण 2026 में कब लगेगा?

इस साल पूर्ण सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026, बुधवार को लगेगा। भारतीय समय के अनुसार, यह सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 की रात 9 बजकर 04 मिनट से 13 अगस्त 2026 की सुबह 4 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। 

2. पूर्ण सूर्य ग्रहण 2026 किस राशि और नक्षत्र में लगेगा?

यह सूर्य ग्रहण कर्क राशि और अश्लेषा नक्षत्र में लगने जा रहा है। 

3. वर्ष 2026 में कितने सूर्य ग्रहण लगेंगे?

इस साल कुल 2 सूर्य ग्रहण लगेंगे, पहला 17 फरवरी 2026 को वलयाकार सूर्य ग्रहण लगा था और दूसरा 12 अगस्त 2026 को पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा। यह दोनों ही सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देंगे।