जानें अक्टूबर माह में कब रखा जाएगा रमा एकादशी का व्रत, शास्त्रों में हैं विशेष महत्व!
हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक वर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि के अगले दिन रमा एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस एकादशी को लक्ष्मी जी के नाम पर रमा एकादशी कहा जाता है। इस एकादशी पर महालक्ष्मी के रमा स्वरूप के साथ-साथ भगवान विष्णु के पूर्णावतार केशव स्वरूप की पूजा करने का विधान है। इस शुभ तिथि पर लक्ष्मी नारायण जी की पूजा की जाती है और व्रत रखा जाता है। धार्मिक मत के अनुसार, एकादशी व्रत करने से साधक को मृत्यु लोक में सभी सुखों की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही, भगवान विष्णु की कृपा से सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है।
ख़ास बात यह है कि इस दिन बेहद शुभ योग का निर्माण हो रहा है, जिस वजह से इस एकादशी का महत्व और अधिक बढ़ जाएगा। तो आइए बिना देरी किए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं रमा एकादशी 2024 की तिथि, पूजा मुहूर्त, महत्व, प्रचलित पौराणिक कथा और आसान ज्योतिषीय उपाय के बारे में।
एकादशी तिथि प्रारम्भ : अक्टूबर 27, 2024 की सुबह 05 बजकर 26 मिनट से
एकादशी तिथि समाप्त : अक्टूबर 28, 2024 की सुबह 07 बजकर 53 मिनट तक।
रमा एकादशी पारण मुहूर्त : 29 अक्टूबर 2024 की सुबह 06 बजकर 31 मिनट से 08 बजकर 44 मिनट
अवधि : 2 घंटे 13 मिनट
रमा एकादशी के दिन शुभ योग
इस दिन बेहद शुभ योग ब्रह्म योग का निर्माण हो रहा है। इसे विशेष रूप से शुभ और लाभकारी माना जाता है, क्योंकि यह व्यक्ति के जीवन में समृद्धि, ज्ञान, आध्यात्मिक उन्नति, और जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता प्रदान करता है। इस योग के प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में धन, समृद्धि और भौतिक सुख-सुविधाओं की प्राप्ति होती है। इसके अलावा, ब्रह्म योग के कारण व्यक्ति के अंदर अध्यात्मिकता बढ़ती है और वह अपने जीवन में सच्चाई और धर्म के मार्ग पर चलता है।
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष में आती है यानी रमा एकादशी का सनातन धर्म में बहुत अधिक महत्व है। इसे रंभा या रमा एकादशी भी कहा जाता है। यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है। इस दिन व्रत रखने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस व्रत को रखने से व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है। ऐसा माना जाता है कि जो भक्त सच्चे मन और पूर्ण श्रद्धा से रमा एकादशी का व्रत करते हैं, वे अपने पूर्व और वर्तमान जन्म के पापों से मुक्त हो जाते हैं। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से भक्तों को पापों से मुक्ति मिलती है और उनके जीवन में शांति आती है।
रमा एकादशी पूजा विधि
रमा एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर को एक साफ स्थान पर स्थापित करें।
पूजा स्थल को गंगाजल या शुद्ध जल से शुद्ध करें और वहां दीपक जलाएं।
भगवान विष्णु को चंदन, पुष्प, धूप, दीप, फल, और तुलसी के पत्ते अर्पित करें। याद रखें कि तुलसी इस दिन बिल्कुल न तोड़ें। पूजा के लिए तुलसी का पत्ता एक दिन पहले तोड़ लें।
इसके बाद विष्णु सहस्रनाम या भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें, जैसे: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”।
रमा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की कथा सुनना और पढ़ना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। कथा सुनने से व्रत का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।
संध्या के समय एक बार फिर भगवान विष्णु की पूजा करें। दीप जलाकर, भगवान विष्णु को भोग अर्पित करें और आरती करें।
रमा एकादशी की रात को जागरण करना उत्तम माना गया है। भगवान विष्णु के भजन, कीर्तन, और मंत्रों का जाप करें।
इस दिन रात्रि में जागरण करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
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रमा एकादशी व्रत कथा
प्राचीन काल में मुचुकुंद नाम का एक पराक्रमी और धर्मनिष्ठ राजा था। राजा मुचुकुंद भगवान विष्णु के परम भक्त थे और वे अपने राज्य में धार्मिक कार्य और यज्ञ कराते रहते थे। उनके राज्य में प्रजा बहुत सुखी और समृद्ध थी। राजा की एक सुंदर और पवित्र स्वभाव वाली रानी थी जिसका नाम चंपा था। राजा और रानी का एक पुत्र था, जिसका नाम शंखधार था। शंखधार बचपन से ही अधर्मी और पापी स्वभाव का था। वह सदैव बुरे कर्म करता और दूसरों को कष्ट पहुंचाता था। उसके पाप कर्मों से राजा और रानी बहुत चिंतित रहते थे, लेकिन शंखधार पर किसी भी प्रकार का उपदेश या सलाह का कोई असर नहीं होता था।
एक दिन, शंखधार ने राज्य के खजाने को लूट लिया और वहां से भाग गया। उसने सभी धन का दुरुपयोग किया और अंततः कंगाल हो गया। जब उसे अपने पापों का फल भुगतना पड़ा, तब वह बहुत दुखी हुआ और जंगल की ओर चला गया। वहां उसने एक ऋषि को तपस्या करते देखा। ऋषि का नाम लोमश ऋषि था, जो भगवान विष्णु के अनन्य भक्त और ज्ञानी थे।
शंखधार ने ऋषि लोमश से अपने कष्टों और पापों का वर्णन किया और प्रायश्चित के लिए मार्गदर्शन मांगा। ऋषि ने उसकी बात सुनी और कहा, “हे राजकुमार, तुमने अपने जीवन में बहुत पाप किए हैं, लेकिन यदि तुम भगवान विष्णु की शरण में आ ओगे और कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की रमा एकादशी का व्रत रखोगे, तो तुम्हें पापों से मुक्ति मिलेगी और तुम्हारे सारे कष्ट दूर होंगे।”
शंखधार ने ऋषि के निर्देशानुसार रमा एकादशी का व्रत किया। उसने पूरे नियम और विधि से भगवान विष्णु की पूजा की, व्रत रखा और पूरी श्रद्धा से रमा एकादशी व्रत कथा सुनी। इस व्रत के प्रभाव से उसके सारे पाप नष्ट हो गए और वह पवित्र हो गया। व्रत के पुण्य फल से उसे नया जीवन मिला और भगवान विष्णु की कृपा से उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई। वह अपने पिता के राज्य में वापस लौट आया और एक धार्मिक व सच्चे राजा के रूप में अपने राज्य को संभाला।
रमा एकादशी का व्रत और पूजा करने से भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। इस दिन कुछ विशेष उपाय करने से व्यक्ति के जीवन में समृद्धि, सुख-शांति, और पापों से मुक्ति मिलती है। आइए जानते हैं इन उपायों के बारे में:
कष्टों को दूर करने के लिए
रमा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करें। उन्हें ताजे फूल, तुलसी के पत्ते, चंदन, धूप, दीप, और नैवेद्य अर्पित करें। इसके साथ ही, व्रत का पालन करें और भगवान विष्णु के इस मंत्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जाप करें या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। इससे मन को शांति मिलती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं।
नकारात्मक ऊर्जा दूर करने के लिए
इस दिन सुबह स्नान में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्नान के बाद घर के मुख्य स्थानों पर गंगाजल का छिड़काव करें। यह घर की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और पवित्रता लाता है।
सुख-समृद्धि के लिए
तुलसी को भगवान विष्णु की प्रिय मानी जाती है। रमा एकादशी के दिन तुलसी के पौधे की पूजा करें और उसमें दीपक जलाएं। तुलसी के पत्तों को भगवान विष्णु को अर्पित करें। इससे देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है।
पापों से मुक्ति पाने के लिए
रमा एकादशी के दिन ब्राह्मणों, साधु-संतों और जरूरतमंदों व गरीबों को दान दें। अन्न, वस्त्र, और धन का दान विशेष फलदायी होता है। इसके अलावा, इस दिन गायों को हरा चारा खिलाना, पक्षियों को दाना डालना और जरूरतमंदों को भोजन कराना भी बहुत शुभ माना जाता है। इससे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और पापों से मुक्ति मिलती है।
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भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए
रमा एकादशी की रात्रि को जागरण करना अत्यंत फलदायी होता है। भगवान विष्णु के भजन-कीर्तन करें और उनकी आराधना में समय बिताएं। इससे भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है और हर इच्छाओं की पूर्ति होती है।
नौकरी में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए
रमा एकादशी के दिन एक का सिक्का लेकर उसकी पूजा करें। उसपर रोली, अक्षत और पुष्प अर्पित करें। इसके बाद उस सिक्के को लाल कपड़े में लपेट कर अपने ऑफिस की दराज में या ऑफिस से जुड़ी किसी वस्तु में रख दें। ऐसा करने से नौकरी में आ रही बाधाएं दूर होंगी और तरक्की के मार्ग खुलेंगे।
इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1- रमा एकादशी का क्या महत्व है?
इस व्रत को करने से पाप और कष्ट से मुक्ति मिलती है। भगवान विष्णु के आशीर्वाद से जीवन के अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है।
2- रमा एकादशी को क्या दान करना चाहिए?
रमा एकादशी के दिन जरूरतमंदों को अन्न दान करना चाहिए। इससे माता लक्ष्मी (मां लक्ष्मी मंत्र)बेहद प्रसन्न होती हैं और सुख-समृद्धि की भी प्राप्ति होती है।
3- रमा एकादशी में क्या खाना चाहिए?
रमा एकादशी के व्रत में फलों का सेवन करना चाहिए।
4- साल 2024 में कब है रमा एकादशी का व्रत?
साल 2024 में रमा एकादशी का व्रत 28 अक्टूबर को रखा जाएगा।
त्योहारों से सजा यह सप्ताह पांच राशियों के लिए साबित होगा बेहद शुभ- धन दौलत की भी होगी वर्षा!
अक्टूबर का आखिरी सप्ताह जाते-जाते आपको कौन सी बड़ी खुशियां या परेशानी देकर जाने वाला है अगर आप भी इस बारे में जानकारी हासिल करना चाहते हैं तो आप एकदम सही जगह पर आए हैं क्योंकि हमारे इस विशेष ब्लॉग में हम आपको आने वाले 7 दोनों का पूरा विस्तृत लेखा-जोखा प्रदान करने जा रहे हैं।
सिर्फ इतना ही नहीं अपने साप्ताहिक राशिफल ब्लॉग में हम आपको आने वाले 7 दिनों में पड़ने वाले सभी महत्वपूर्ण व्रत और त्योहारों की जानकारी के साथ-साथ ग्रहण और गोचर की जानकारी, बैंक अवकाशों की जानकारी, विवाह मुहूर्त की जानकारी भी प्रदान करते हैं। तो चलिए बिना देरी के शुरू करते हैं 28 अक्टूबर से 3 नवंबर 2024 के इस सप्ताह से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातों की जानकारी हासिल करना।
अक्टूबर का यह खास और आखिरी सप्ताह 28 अक्टूबर से प्रारंभ हो जाएगा और यह 3 नवंबर को समाप्त होगा। बात करें इस सप्ताह के हिंदू पंचांग की तो,
28 अक्टूबर 2024 सोमवार, तिथि एकादशी, पक्ष कृष्ण, नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी, योग ब्रह्मा, अभिजीत मुहूर्त 11:42:25 से 12:26:58 तक
29 अक्टूबर 2024 मंगलवार, तिथि द्वादशी, पक्ष कृष्ण, नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी, योग एन्द्र, अभिजीत मुहूर्त 11:42:25 से 12:26:51 तक
30 अक्टूबर 2024 बुधवार, तिथि त्रयोदशी, पक्ष कृष्ण, नक्षत्र हस्त, योग वैधृति, अभिजीत मुहूर्त कोई नहीं है
31 अक्टूबर 2024 गुरुवार, तिथि चतुर्दशी, पक्ष कृष्ण, नक्षत्र चित्रा, योग विश्व कुंभ, अभिजीत मुहूर्त 11:42:26 से 12:26:40 तक
1 नवंबर 2024 शुक्रवार, तिथि अमावस्या, पक्ष कृष्ण, नक्षत्र स्वाति, योग प्रीति, अभिजीत मुहूर्त 11:42:27 से 12:26:36 तक
2 नवंबर 2024 शनिवार, तिथि प्रतिपदा, पक्ष शुक्ल, नक्षत्र विशाखा, योग आयुष्मान, अभिजीत मुहूर्त 11:42:29 से 12:26:32 तक
3 नवंबर 2024 रविवार, तिथि द्वितीय, पक्ष शुक्ल, नक्षत्र अनुराधा, योग सौभाग्य, अभिजीत मुहूर्त 11:42:32 से 12:26:30 तक
28 अक्टूबर से 3 नवंबर 2024 के व्रत और त्यौहार
अपने इस व्यस्त जीवन की अति व्यस्तता के चलते आपसे भी कोई भी महत्वपूर्ण दिन, व्रत या त्योहार छूट न जाए इस बात को ध्यान में रखते हुए हम अपने इस विशेष सेगमेंट में आपको आने वाले 7 दिनों में पड़ने वाले हर एक महत्वपूर्ण दिन की जानकारी यहां प्रदान करते हैं। बात करें इस सप्ताह में पड़ने वाले व्रत और त्योहारों की तो,
28 अक्टूबर गोवत्स द्वादशी, रमा एकादशी
29 अक्टूबर धनतेरस, यम दीपम, प्रदोष व्रत
30 अक्टूबर काली चौदस, हनुमान पूजा, मासिक शिवरात्रि
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इस सप्ताह के ग्रहण और गोचर
दिवाली का यह सप्ताह अपने आप में ही विशेष खास और महत्वपूर्ण रहने वाला है। इस सप्ताह को और भी खास बनाने के लिए कौन-कौन से ग्रहों का गोचर होने वाला है चलिए इस पर भी एक नजर डाल लेते हैं। बात करें इस सप्ताह में होने वाले ग्रहण और गोचर की तो इस सप्ताह में केवल एक ही गोचर होगा और वो है 29 अक्टूबर को होने वाला बुध का वृश्चिक राशि में गोचर। इसका समय होगा 22:24 मिनट। यह गोचर निश्चित रूप से सभी 12 राशियों को प्रभावित अवश्य करेगा। अगर आप अपनी राशि पर इसका व्यक्तिगत और विस्तृत प्रभाव जानना चाहते हैं तो अभी विद्वान ज्योतिषियों से संपर्क करें।
28 अक्टूबर से 3 नवंबर के विवाह मुहूर्त
सनातन धर्म में विवाह जैसा शुभ और मांगलिक कार्य हमेशा शुभ मुहूर्त देखकर किया जाता है। इसकी वजह साफ है कि ऐसी मान्यता है कि जब भी कोई शुभ काम शुभ मुहूर्त देखकर किया जाए तो इससे उसकी शुभता बढ़ जाती है। अन्यथा व्यक्ति को अपने जीवन में तमाम परेशानियां या रुकावटें झेलने पड़ सकते हैं। ऐसे में बात करें 28 अक्टूबर से 3 नवंबर के बीच पड़ने वाले विवाह मुहूर्त की तो, जहां अक्टूबर में इस सप्ताह में एक दिन अर्थात 30 अक्टूबर को विवाह मुहूर्त पड़ेगा वहीं नवंबर में इस सप्ताह में कोई भी विवाह मुहूर्त नहीं है।वर्ष 2025 में शुभ विवाह मुहूर्त की जानकारी हासिल करना चाहते हैं तो यहां क्लिक करें- विवाह मुहूर्त 2025
28 अक्टूबर से 3 नवंबर के बैंक अवकाश
यह सप्ताह वैसे भी तमाम व्रत और त्योहार से घिरा रहने वाला है। ऐसे मेंइस सप्ताह में कई दिन बैंक अवकाश रहने की संभावना है। आपका कोई भी काम रुक ना जाए या अटक न जाए इसलिए चलिए एक नजर डाल लेते हैं इस सप्ताह में पड़ने वाले बैंक अवकाशों की।
31 अक्टूबर 2024, गुरुवार नरक चतुर्दशी है। इसका अवकाश कई राज्य में मनाया जाएगा।
31 अक्टूबर 2024, गुरुवार सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्मदिन ( दिवाली ) है। इसका अवकाश गुजरात, देश भर में मनाया जाएगा।
1 नवंबर 2024, शुक्रवार कुट, पुडुचेरी लिबेरेशन डे, हरयाणा डे, कर्नाटक राजयोत्सव, केरल पिरावी है। इनके अवकाश कुट – मणिपुर, पुडुचेरी मुक्ति दिवस – पुडुचेरी, हरियाणा दिवस – हरियाणा कर्नाटक राज्योत्सव – कर्नाटक और केरल पिरावी – केरल में मनाए जाएंगे।
2 नवंबर 2024 शनिवार बलिप्रतिपदा है। इसका बैंक अवकाश अधिकांश राज्य में मान्य होगा।
2 नवंबर 2024 शनिवार विक्रम संवत- नववर्ष है। इसका बैंक अवकाश कई राज्य में है।
2 नवंबर 2024 शनिवार गोवर्धन पूजा है। इसका अवकाश उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, बिहार, दिल्ली में मान्य रहेगा।
2 नवंबर 2024 शनिवार निंगोल चाकोउबा है। इसका बैंक अवकाश मणिपुर में है।
3 नवंबर 2024 रविवार भाई दूज है। इसका बैंक अवकाश पूरे भारत में रहेगा।
इस सप्ताह जन्मे मशहूर सितारों के जन्मदिन की जानकारी
अपने इस आखिरी सेगमेंट में हम बात करते हैं इस सप्ताह पड़ने वाले मशहूर सितारों के जन्मदिन के बारे में। बात करें अक्टूबर में जन्म लेने वाले लोगों का स्वभाव और व्यक्तित्व कैसा होता है तो अगर अक्टूबर के महीने में जन्म लेने वाले लोगों के पर्सनालिटी के बारे में कुछ रोचक तथ्यों की बात करें तो, इन बच्चों की राशि वृश्चिक और तुला पड़ती है। अर्थात अगर आपका जन्मदिन 1 अक्टूबर से 21 अक्टूबर तक हुआ है तो आपकी राशि तुला होगी 22 अक्टूबर या उसके बाद आपका जन्मदिन होता है तो आपकी राशि वृश्चिक होती है।
अक्टूबर के बच्चों के दो जन्म रन होते हैं। अक्टूबर में जन्मे बच्चों को दोगुने रत्न मिलते हैं- टूमलाइन और ओपल उनके चमकते हुए पत्थर हैं। दोनों ही बहुमुखी हैं और थोड़े अलग हैं। ओपल में रंग बदलने की खूबी होती है और आप इसे कैसे देखते हैं, इसके आधार पर इसका रंग अलग हो सकता है। पत्थर की गिरगिट जैसी विशेषताओं ने इसे व्यापक अर्थ दिया है। ऐतिहासिक रूप से, यह माना जाता था कि इसमें हर रंग के पत्थर के सभी गुण होते हैं। इसी तरह, टूमलाइन कई रंगों में आता है, जिसमें काला टूमलाइन (आत्मविश्वास और सुरक्षा से जुड़ा), गुलाबी टूमलाइन (प्यार और करुणा से जुड़ा) और हरा टूमलाइन (शक्ति और सहनशक्ति का प्रतीक) शामिल है।
अक्टूबर में जन्मे बच्चों में एथलीट क्षमता बहुत होती है। इन्हें खेलना कूदना पसंद होता है और काफी मजबूत व्यक्तित्व वाले होते हैं। यह लोग अपने दम पर और अपनी अच्छी सेहत के दम पर 100 वर्षों तक भी जीवित रह सकते हैं। अक्टूबर के महीने में जन्मे लोग राष्ट्रपति बनने लायक होते हैं। इसके अलावा आपकी जानकारी के लिए बता दे ब्रूनो मार्स, मार्ट डायमंड, लेना हैदी, किम कार्दशियन, रायन रेनॉड्स जैसे लोगों का जन्मदिन अक्टूबर के ही महीने में आता है।
अब अंत में बात करें इस सप्ताह में पड़ने वाले मशहूर सितारों के जन्मदिन के बारे में तो,
28 अक्टूबर अदिति राव हैदरी
29 अक्टूबर रीमा सेन
30 अक्टूबर अभिजीत भट्टाचार्य, अनन्या पांडे
1 नवंबर ऐश्वर्या राय बच्चन
2 नवंबर ईशा देओल
3 नवंबर हिमांशु कोहली
यदि आप अपने फेवरेट सितारे की कुंडली देखकर उनके भविष्य के बारे में कुछ भी जानना चाहते हैं तो आप यहाँ क्लिक कर सकते हैं।
एस्ट्रोसेज की तरफ से इन सभी सितारों को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं।
हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारा यह ब्लॉग ज़रूर पसंद आया होगा। अगर ऐसा है तो आप इसे अपने अन्य शुभचिंतकों के साथ ज़रूर साझा करें। धन्यवाद!
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1: महालया अमावस्या क्यों मनाई जाती है?
महालया अमावस्या एक महत्वपूर्ण हिंदू त्यौहार है जो पूरे भारत में मनाया जाता है, मुख्य रूप से भारतीय राज्य पश्चिम बंगाल में। देवी पक्ष, देवी दुर्गा की पूजा के लिए समर्पित दो सप्ताह का त्यौहार, आधिकारिक तौर पर इस दिन से शुरू होता है।
2: आयुध पूजा का महत्व क्या है?
आयुध पूजा के अवसर पर, दैनिक जीवन और विभिन्न व्यवसायों में उपयोग की जाने वाली सामग्रियों की पूजा की जाती है। इसका उद्देश्य किसी की आजीविका में इन उपकरणों के महत्व को स्वीकार करना और उनके सुरक्षित और कुशल संचालन के लिए ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त करना है।
3: परगट दिवस कहां मनाया जाता है?
परगट दिवस पूरे देश में मनाया जाता है।
4: सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्मदिन कब मनाया जाता है?
सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्मदिन 31 अक्टूबर को मनाया जाता है।
टैरो साप्ताहिक राशिफल (27 अक्टूबर से 2 नवंबर, 2024): इस सप्ताह इन राशियों को मिलेगा भाग्य का साथ!
टैरो साप्ताहिक राशिफल 27 अक्टूबर से 2 नवंबर: टैरो कार्ड एक प्राचीन विद्या है जिसका उपयोग भविष्य जानने के लिए किया जाता है। इसका प्रयोग प्राचीन काल से ही टैरो कार्ड रीडर और रहस्यवादियों द्वारा अंतर्ज्ञान प्राप्त करने और किसी विषय की गहराई तक पहुँचने के लिए होता रहा है। यदि कोई व्यक्ति बेहद आस्था और विश्वास के साथ मन में उठ रहे सवालों के जवाब ढूंढ़ने के लिए आता है, तो टैरो कार्ड की दुनिया आपको हैरान कर सकती है। बहुत से लोग मानते हैं कि टैरो एक मनोरंजन का साधन है और इसे ज्यादातर मनोरंजन के रूप में देखते हैं।
साल 2024 के अक्टूबर का यह सप्ताह यानी कि टैरो साप्ताहिक राशिफल 27 अक्टूबर से 2 नवंबर 2024 अपने साथ क्या कुछ लेकर आएगा? यह जानने से पहले हम टैरो कार्ड के बारे में बात करेंगे। आपको बता दें कि टैरो की उत्पति आज से 1400 वर्ष पहले हुई थी और इसका सबसे पहला वर्णन इटली में मिलता है। शुरुआत में टैरो को ताश के रूप में राजघरानों की पार्टियों में खेला जाता था। हालांकि, टैरो कार्ड का वास्तविक उपयोग 16वीं सदी में यूरोप के कुछ लोगों द्वारा किया गया जब उन्होंने जाना और समझा कि कैसे 78 कार्ड्स की मदद से भविष्य के बारे में जाना जा सकता है, उसी समय से इसका महत्व कई गुना बढ़ गया। मध्यकाल में टैरो को जादू-टोना से जोड़कर देखा जाने लगा और इसके परिणामस्वरूप आम लोगों ने भविष्य बताने वाली इस विद्या से दूरी बनाना सही समझा।
लेकिन टैरो कार्ड का सफर यही थमा नहीं और इसने कुछ दशकों पहले पुनः प्रसिद्धि प्राप्त की जब दुनिया के सामने इसे एक भविष्य बताने वाली विद्या के रूप में पहचान मिली। भारत समेत दुनियाभर में टैरो की गिनती भविष्यवाणी करने वाली महत्वपूर्ण विद्याओं में होती है और अंत में टैरो कार्ड वह सम्मान पाने में सफल हुआ है जिसका वह हक़दार था। तो आइए अब इस साप्ताहिक राशिफल की शुरुआत करते हैं और जानते हैं कि अक्टूबर का यह सप्ताह यानी कि 27 अक्टूबर से 02 नवंबर 2024 तक का समय सभी 12 राशियों के लिए कैसा रहने की संभावना है?
टैरो साप्ताहिक राशिफल 27 अक्टूबर से 02 नवंबर, 2024: राशि अनुसार राशिफल
मेष राशि
प्रेम जीवन: पेज़ ऑफ वैंड्स
आर्थिक जीवन: सेवन ऑफ स्वॉर्ड्स
करियर: नाइट ऑफ पेंटाकल्स
स्वास्थ्य: पेज़ ऑफ कप्स
मेष राशि के जातकों के प्रेम जीवन की बात करें तो पेज ऑफ वैंड्स आपके लिए बेहतरीन कार्ड प्रतीत हो रहा है, जो दर्शा रहा है कि आपके जीवन में प्रेम भरपूर होगा। जो जातक सिंगल हैं, उनके लिए यह अवधि बहुत अधिक अनुकूल है क्योंकि उन्हें रिलेशनशिप में आने के कई अवसर प्राप्त हो सकते हैं, ऐसे में, आपको इसका लाभ उठाना होगा। जो लोग रिलेशनशिप में हैं या शादीशुदा हैं, उनके लिए यह सप्ताह प्यार से भरा रहेगा और वे अपने साथी के साथ अच्छे पलों का आनंद लेंगे।
सेवन ऑफ स्वॉर्ड्स दर्शाता है कि आप अपने काम और वित्त मामलों को प्रोफेशनल तरीके से संभालने का प्रयास करेंगे। यदि आप खुद को बेईमानी के रास्ते पर ले चलते हैं, जैसे कि उत्पाद विवरण को बढ़ा-चढ़ाकर बताना या अधूरे वादे करना, तो आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे में, आपको अपनी रणनीति का पुनर्मूल्यांकन करने की आवश्यकता होगी।
नाइट ऑफ पेंटाकल्स आपके लिए करियर के लिए बहुत अच्छा कार्ड है और इसका अर्थ है कि आपको किसी ऐसे व्यक्ति से प्रस्ताव मिलने वाला है जो एक बेहद सफल व्यवसायी बनने की ओर आगे बढ़ रहा है। वह आपको अपना व्यापार खड़े में सहायता करेगा।
पेज़ ऑफ कप्स स्वास्थ्य के मामले में सकारात्मक कार्ड प्रतीत हो रहा है, जो आपको गुड न्यूज देगा। इसका मतलब यह भी हो सकता है कि आपको किसी ऐसी थेरेपी या उपचार के बारे में पता चले जो आपको समग्र रूप से बेहतर महसूस करने में मदद करेगी।
शुभ पौधा: ऑरेंज ऑर्किड
वृषभ राशि
प्रेम जीवन: ऐस ऑफ वैंड्स
आर्थिक जीवन: सेवन ऑफ स्वॉर्ड्स
करियर: पेज़ ऑफ वैंड्स
स्वास्थ्य: नाइट ऑफ पेंटाकल्स
वृषभ राशि के जातकों के लिए प्रेम जीवन की बात करें, तो ऐस ऑफ़ वैंड्स संकेत दे रहा है कि यदि आप किसी रिश्ते में हैं, तो इस सप्ताह आपकी सगाई, शादी, घर खरीदना या साथ रहना, छुट्टियाँ मनाना या घर पर नया मेहमान आने जैसी खुशखबरी आपको मिल सकती है। यदि आप परिवार को आगे बढ़ाने का सपना देख रहे हैं तो एक कार्ड आपके लिए बहुत अधिक शुभ साबित होगा क्योंकि यह कार्ड प्रजनन क्षमता, गर्भावस्था और जन्म का प्रतीक है।
आर्थिक जीवन में सेवन ऑफ स्वॉर्ड्स कार्डआपको पैसे का लेन-देन करने और बेईमानी के प्रति सचेत रहने के लिए कह रहा है क्योंकि आपके साथ धोखाधड़ी, चोरी और सेंधमारी हो सकती है इसलिए सावधान रहें। यह कार्ड आपको चेतावनी दे सकता है कि अपने पैसे के साथ कोई रिस्क न लें। इस समय इसे निवेश न करें या अभी कोई गलत लेन-देन न करें।
करियर के लिहाज़ से पेज ऑफ वैंड्स संकेत दे रहा है कि इस सप्ताह आपको नए अनुभव और अवसर प्राप्त होंगे लेकिन चुनाव के लिए सही दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता होगी। यह अवधि आत्मविश्वास और उत्साह के साथ अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने की होगी। यदि आप कोई व्यवसाय शुरू करने की सोच रहे हैं, तो पेज ऑफ वैंड्स संकेत देता है कि आप अपने इस नए प्रयास के लिए उत्साहित और ऊर्जा से भरे हुए होंगे।
नाइट ऑफ पेंटाकल्स दर्शाता है कि इस सप्ताह आप समग्र रूप से अच्छे स्वास्थ्य में होंगे और आप अपने अच्छे स्वास्थ्य का पूरा आनंद लेंगे।
शुभ पौधा: पार्लर पाम
बृहत् कुंडलीमें छिपा है, आपके जीवन का सारा राज, जानें ग्रहों की चाल का पूरालेखा-जोखा
मिथुन राशि
प्रेम जीवन: द लवर
आर्थिक जीवन: किंग ऑफ कप्स
करियर: पेज़ ऑफ स्वॉर्ड्स
स्वास्थ्य: फाइव ऑफ स्वॉर्ड्स
मिथुन राशि के जातकों के प्रेम जीवन के लिहाज से यह सप्ताह शानदार रहेगा। आप अपने साथी के साथ कुछ बेहतरीन समय बिताएंगे और एक-दूसरे के साथ अच्छे पलों का आनंद लेंगे। आप अपने पार्टनर के बहुत अधिक करीब आएंगे और एक-दूसरे का मान-सम्मान करेंगे।
किंग ऑफ कप्स कार्ड आर्थिक जीवन के लिए संकेत दे रहा है कि इस सप्ताह जीवन स्तर को बेहतर बनाए रखने और आपके सभी बिलों का भुगतान करने के लिए आपके पास पर्याप्त धन है। आप अपने जीवन को सरल बनाने के लिए एक बजट बनाएं और अपने धन को समझदारी से संभालेंगे, जिससे आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत बनी रहेगी।
पेज ऑफ स्वॉर्ड्स को चाहे कितना भी नकारात्मक कार्ड माना जाएगा। लेकिन, करियर के लिए इस कार्ड को हम सकारात्मक कहेंगे। इस सप्ताह करियर के संबंध में आपके विचारों में स्पष्टता देखने को मिलेगी। संभव है कि इस दौरान आपको नई-नई चीज़ें सीखने का मौका मिले और आपको नई जिम्मेदारियां मिलने की संभावना है।
फाइव ऑफ स्वॉर्ड्स स्वास्थ्य के मामले में संकेत दे रहा है कि इस सप्ताह आप थका हुआ महसूस कर सकते हैं और आपका स्वास्थ्य खराब हो सकता है। आशंका है कि आपकी ऊर्जा भी धीरे-धीरे कम हो चुकी है। आप बहुत अधिक चिंतित और परेशान महसूस कर सकते हैं।
शुभ पौधा: प्रेयर प्लांट
कर्क राशि
प्रेम जीवन: पेज़ ऑफ कप्स
आर्थिक जीवन: एट ऑफ पेंटाकल्स
करियर: द लवर
स्वास्थ्य: द मून
प्रेम जीवन में पेज़ ऑफ कप्स अनुकूल कार्ड प्रतीत हो रहा है। यह कार्ड संकेत दे रहा है कि यदि आप किसी रिश्ते में हैं तो आपको कई सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे क्योंकि यह कार्ड रोमांटिक प्रस्तावों, यूनियनों, गर्भधारण और शादियों की संभावना की ओर इशारा कर रहा है। इस कार्ड का अर्थ यह भी हो सकता है कि आपको अपनी भावनाओं को खुलकर सामने रखना चाहिए।
एट ऑफ पेंटाकल्स आर्थिक जीवन के लिए एक अच्छा कार्ड है क्योंकि यह उपलब्धियों, सफलता, कड़ी मेहनत के लिए बेहतर परिणाम का आशीर्वाद दे रहा है। अब समय आ गया है आपको अपनी कड़ी मेहनत व प्रयास के अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे और आप आर्थिक जीवन में स्थिरता प्राप्त करेंगे।
करियर द लवर कार्ड संकेत दे सकता रहा है इस अवधि आप अपनी मौजूदा स्थिति को अपग्रेड करने या करियर बदलने की सोच रहे हैं और अब आपको सही निर्णय लेने की आवश्यकता है। यह कार्ड भविष्यवाणी कर रहा है कि कार्यक्षेत्र में आप और आपके सहकर्मी एक-दूसरे की सफलताओं का समर्थन करेंगे और आप लोगों के बीच बेहतर समझ उत्पन्न होगी।
स्वास्थ्य के मोर्चे पर द मून कार्ड कुछ मानसिक तनाव के मुद्दों की ओर संकेत कर रहा है। यह कार्ड दर्शाता है कि आप ऐसी समस्याओं से पीड़ित हैं जो आपके मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही हैं। यह एक बुरा संकेत है और आपको निश्चित रूप से अपनी जांच करवानी चाहिए और डॉक्टर से सही राय लेनी चाहिए।
प्रेम जीवन में टेम्प्रन्स कार्ड संतुलित और शांतिपूर्ण संबंध को दर्शाता है। अगर आप किसी रिश्ते में हैं तो संभवत इस दौरान आपका रिश्ता आनंददायक और संतुष्टि दायक रहने वाला है। यह कार्ड जीवनसाथी के साथ संबंधों को दर्शाता है। जो लोग सिंगल हैं वे प्यार की तलाश और अपनी देखभाल पर ध्यान देंगे ।
आर्थिक जीवन में क्वीन ऑफ कप्स एक सकारात्मक कार्ड है, जो आर्थिक जीवन में स्थिरता और सकारात्मक परिणाम का संकेत दे रहा है। यह इंगित करता है कि आपकी वित्तीय स्थिति सकारात्मक बनी रहेगी। हालांकि, कार्ड निवेश में धन लगाने या वित्तीय लेने से बचने की सलाह दे रहा है।
करियर के लिए टू ऑफ कप्स स्थिरता और बेहतरीन बिज़नेस पार्टनरशिप को दर्शा रहा है। यदि आप किसी बिज़नेस पार्टनरशिप में प्रवेश करने के बारे में सोच रहे हैं, तो यह कार्ड सुझाव देता है यह आपके द्वारा लिया गया शानदार फैसला होगा। आपके लक्ष्य समान होंगे और आप अपने साथी से प्रभावित होंगे।
स्वास्थ्य के संदर्भ में, जजमेंट कार्ड कठिन समय से बाहर आने और आगे बढ़ने का प्रतिनिधित्व करता है। अब अपनी सेहत पर ध्यान देने और तमाम तरह की नकारात्मकता को दूर करने का समय आ गया है। आशंका है कि पिछली स्वास्थ्य समस्याओं से आपको अच्छा सबक मिला होगा और उससे आप बहुत कुछ सीखे होंगे।
शुभ पौधा: ब्रोमेलियाड
कन्या राशि
प्रेम जीवन: फोर ऑफ वैंड्स
आर्थिक जीवन: द हैरमिट
करियर: क्वीन हैंग्ड वैंड्स
स्वास्थ्य: द डेविल
प्रेम जीवन के लिए आपको फोर ऑफ वैंड्स कार्ड प्राप्त हुआ है। यदि आप किसी रिलेशनशिप में हैं, तो यह एक प्रेमपूर्ण और शांतिपूर्ण गठबंधन का प्रतिनिधित्व करता है। यह आपसी सम्मान, विश्वास और समझ पर आधारित एक ठोस रिश्ते का प्रतीक है। यह कार्ड दर्शा रहा है कि अब समय आ गया है आप अपने जीवनसाथी के साथ बेहतरीन समय का आनंद लेंगे। वहीं जो लोग सिंगल है, वे प्यार में खो सकते हैं।
आर्थिक जीवन की बात करें तो, यह चिंतन का समय है। इस दौरान आपको अपने धन की बचत करने पर ध्यान देने की आवश्यकता हो सकती है। इसके अलावा, जीवन में संतुलन बनाए रखने के लिए अपनी आध्यात्मिक जागरूकता विकसित करने पर भी आपको ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी जाती है।
क्वीन ऑफ वैंड्स करियर के लिहाज़ से ऐसे समय की ओर इशारा कर सकता है जब आप बेहद प्रेरित और उत्पादक होंगे। यह संकेत दे रहा है कि आप एक साथ कई चीज़ों का प्रबंधन करने में सक्षम हैं। कार्यक्षेत्र में आपकी क्षमता और तरीका आपको सफल बनाए रखने में आपकी मदद कर सकती है।
स्वास्थ्य को लेकर द डेविल कार्ड खराब जीवनशैली के बारे में संकेत दे रहा है, जो आपके स्वास्थ्य के साथ-साथ आपके जीवन पर भी भारी पड़ सकता है। यदि आपके अंदर कोई बुरी लत है तो उससे छुटकारा पाने के लिए मदद जरूर लें।
प्रेम जीवन के लिए ऐस ऑफ़ पेंटाकल्स का अर्थ है कि आपके प्रेम जीवन में एक नया अध्याय शुरू होने वाला है और नए प्रस्ताव आ सकते हैं। यदि आप विवाह करना चाहते हैं, तो इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि इस अवधि में आपका विवाह अवश्य हो जाएगा। यदि आप पहले से ही विवाहित हैं, तो यह जीवन में नए चरण का संकेत दे रहा है, जैसे कि माता-पिता बनना, आदि।
आर्थिक जीवन में नाइन ऑफ स्वॉर्ड्स (रिवर्सड) संकेत दे रहा है कि इस अवधि पैसों को लेकर आपकी चिंताएं कम हो जाएंगी और चीज़ें बेहतर होने लगेंगी या यह भी हो सकता है कि आप आर्थिक जीवन को लेकर इस हद तक तनाव में आ जाए कि आप अपना आपा खो दें। आपको सलाह दी जाती है कि अपने दोस्तों या परिवारजनों में अपनी चिंताओं के बारे में चर्चा करें।
करियर के लिहाज़ से टेन ऑफ कप्स (रिवर्सड) कार्ड दर्शा रहा है कि आप परिवार के साथ मिलकर काम करेंगे या समाज के हित के लिए कार्य करेंगे। यह कार्ड सहयोग की कमी या कार्यक्षेत्र में किसी का साथ न मिलने का भी संकेत दे सकता है। इस दौरान कार्यक्षेत्र में आपकी किसी के साथ विवाद या बहस हो सकती है। इसके अलावा, कार्यस्थल में बिजी शेड्यूल आपके पारिवारिक जीवन पर हानिकारक प्रभाव डाल सकती है।
स्वास्थ्य के लिहाज़ में नाइन ऑफ़ पेंटाकल्स भविष्यवाणी कर रहा है कि आप एक स्वस्थ सप्ताह बिताएंगे और अच्छे स्वास्थ्य का आनंद लेंगे। कुल मिलाकर इस सप्ताह आपका स्वास्थ्य बहुत अधिक शानदार रहेगा और आप अच्छे पलों का आनंद लेंगे।
भाग्यशाली पौधा: मॉन्स्टेरा
वृश्चिक राशि
प्रेम जीवन: दएम्प्रेस
आर्थिक जीवन: पेज़ ऑफ स्वॉर्ड्स
करियर: नाइट ऑफ स्वॉर्ड्स (रिवर्सड)
स्वास्थ्य: क्वीन ऑफ पेंटाकल्स
वृश्चिक राशि के जातकों के प्रेम जीवन की बात करें, तो द एम्परर कार्ड स्थिर और मजबूत संबंधों को दर्शा रहा है। यह कार्ड मातृत्व का भी प्रतीक है, जो विवाह, गर्भावस्था या एक नए परिवार की शुरुआत का संकेत दे रहा है।
आपके आर्थिक जीवन की बात करें तो पेज़ ऑफ स्वॉर्ड्स आपके लिए अधिक अनुकूल प्रतीत नहीं हो रहा है। यह संकेत दे रहा है कि आपको धन से जुड़े मामलों में देरी हो सकती है, जैसे नौकरी के प्रस्ताव, निवेश के अवसर अन्य किसी भी रूप में हो सकता है।
करियर में नाइट ऑफ स्वॉर्ड्स (रिवर्सड) कार्ड दृढ़ संकल्प, प्रेरणा और जुनून का संकेत दे रहा है। इस सप्ताह आपको करियर में सफलता प्राप्त करने के लिए साहसी होना चाहिए और रिस्क उठाने के लिए तैयार रहना चाहिए। आपको सलाह दी जाती है कि यदि आप सफलता प्राप्त करने के लिए शॉर्टकट लेने की कोशिश कर रहे हैं, तो सावधान हो जाए।
स्वास्थ्य के लिहाज़ से, इस सप्ताह आपकी माता आपका बहुत अधिक ख्याल रखेंगी और आपके स्वास्थ्य को लेकर चिंता करेंगी या आप अपने परिवार के सदस्यों की देखभाल कर सकते हैं।
शुभ पौधा: स्नेक प्लांट
धनु राशि
प्रेम जीवन: द एम्परर
आर्थिक जीवन: किंग ऑफ कप्स
करियर: टेन ऑफ वैंड्स (रिवर्सड)
स्वास्थ्य: सिक्स ऑफ कप्स
प्रेम जीवन की बात करें, तो इस सप्ताह आप अपनी भावनाओं को अधिक ईमानदारी से दूसरों के सामने व्यक्त करेंगे। द एम्परर कार्ड स्थिर संबंधों का संकेत देता है। यदि आप का रिश्ता अस्थिर रहा है और आपसी समझ की कमी रही है तो चीजें बेहतर होने लगेंगी और स्थिरता वापस आ जाएगी। आप अपने से बड़े पुरुष या महिला के लिए भी भावनाएं रख सकते हैं।
आर्थिक जीवन में किंग ऑफ कप्स कह रहा है कि धनु राशि वालों को धन से जुड़े मामलों में सफलता पाने के लिए बुद्धि और कूटनीति का इस्तेमाल करना होगा। यह कार्ड दर्शा रहा है कि करियर में तरक्की हासिल करने के मार्ग में इन जातकों का मार्गदर्शन कोई बड़ा और अनुभवी व्यक्ति कर सकता है।
टेन ऑफ वैंड्स (रिवर्सड) कार्ड भविष्यवाणी कर रहा है कि यदि आप अपने व्यापार में संघर्ष का सामना कर रहे हैं तो इससे आपको छुटकारा प्राप्त होगा। आप दो तरीकों में से एक को अपनाकर शांति प्राप्त कर सकते हैं, पहला है आप लोगों से सहायता मांगने का अनुरोध करें। आपको लग सकता है कि आप अपने पास मौजूद काम की मात्रा को संभाल नहीं पा रहे हैं या आपने चीजों को हल करने का कोई तरीका निकाल लिया है।
स्वास्थ्य के लिहाज़ में सिक्स ऑफ़ कप्स कार्ड ऐसे व्यक्ति के प्रति दया या सहानुभूति दिखाने का प्रतिनिधित्व कर सकता है जो चिकित्सा आपातकाल का सामना कर रहा है। उन्हें आपकी मदद की ज़रूरत कई अधिक हो सकती है। यह इस बात का भी संकेत हो सकता है कि आप बीमार हो रहे हैं या अपनी तेज़-तर्रार, आरामदेह जीवनशैली के कारण बहुत ज़्यादा तनाव में हैं।
शुभ पौधा: एलोकेसिया
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मकर राशि
प्रेम जीवन: थ्री ऑफ वैंड्स
आर्थिक जीवन: फाइव ऑफ स्वॉर्ड्स
करियर: थ्री ऑफ कप्स
स्वास्थ्य: फोर ऑफ कप्स
प्रेम जीवन में थ्री ऑफ वैंड्स कार्ड बहुत ही शुभ कार्ड है, खासकर जो किसी रिलेशनशिप में हैं। यह प्रगति, उपलब्धि और अपने निर्णयों से संतुष्टि का प्रतिनिधित्व करता है। यदि आपको यह कार्ड मिला है तो, यह संकेत दे रहा है कि आपके रिश्ते में सब कुछ ठीक चल रहा है। यह कार्ड विदेश जाना या विदेशी देशों का दौरा करने का भी संकेत दे रहा है। ऐसे में आप और आपका साथी विदेश यात्रा में जा सकते हैं या स्थानांतरण ले सकते हैं।
फाइव ऑफ स्वॉर्ड्स के अनुसार, आपको अपने वित्त को संभालते समय अधिक सावधानी बरतनी चाहिए और दूसरों पर भरोसा करते समय भी सतर्क रहना चाहिए। यह संभव है कि कुछ लोग आपका अनुचित लाभ उठाने या आपका शोषण करने की कोशिश कर सकते हैं। यह कार्ड कभी-कभी यह भी संकेत दे सकता है कि आपको अपनी खरीदारी कम करनी चाहिए क्योंकि अधिक खर्च की वजह से आप परेशानी में आ सकते हैं।
करियर में थ्री ऑफ कप्स पदोन्नति और नए प्रस्तावों के आने का जश्न मनाने का संकेत दे रहा है। इस अवधि आप एक बेहतर और उच्च पद के लिए जश्न मनाएंगे और आपके वरिष्ठ आपको पदोन्नति दिलाने के पक्ष में होंगे। यदि आप विदेश में किसी अच्छे अवसर की तलाश में हैं तो संभावना है कि आपको विदेश से बहुत अच्छे प्रस्ताव मिले।
फोर ऑफ कप्स मानसिक समस्या या तनाव जैसी बीमारियों से पीड़ित होने का संकेत देता है, अगर ऐसा है, तो अब समय आ गया है कि अपने स्वास्थ्य पर पूरी तरह ध्यान दें और डॉक्टर की सलाह लें। साथ ही, योग व ध्यान करें ताकि आप जल्द ठीक हो सके।
शुभ पौधा: लकी बैम्बू
कुंभ राशि
प्रेम जीवन: किंग ऑफ कप्स
आर्थिक जीवन: द चैरियट
करियर: द सन
स्वास्थ्य: फाइव ऑफ स्वॉर्ड्स
किंग ऑफ कप्स दया, सहानुभूति और समझ का प्रतिनिधित्व करता है। साथ ही, धैर्यवान, समझदार और प्यार करने वाले साथी का भी प्रतिनिधित्व करता है जो रिश्ते में सामंजस्यपूर्ण संबंध बनाने की कोशिश करता है।
द चैरियट कार्ड संकेत दे रहा है कि आर्थिक जीवन में बेहतर निर्णय लेने के लिए आपके पास ज्ञान की कमी हो सकती है इसलिए सावधानी से आगे बढ़ें। इसके अतिरिक्त, यह कार्ड आत्म-नियंत्रण को बढ़ावा देने और जल्दबाजी में खरीदारी या निर्णय लेने से आपको रोकता है।
द सन कार्ड आपकी नौकरी में जुनून और समृद्धि का प्रतिनिधित्व करता है। यह भविष्यवाणी कर रहा है कि दूसरे आपके काम को महत्व देंगे और आप प्रेरित व उत्साह से भरा हुआ महसूस करेंगे। यह कार्ड अक्सर आपके कार्यक्षेत्र में पदोन्नति या बेहतर पद पर पहुंचने का भी संकेत देता है।
फाइव ऑफ स्वॉर्ड्स आपके लिए अनुकूल कार्ड प्रतीत नहीं हो रहा है, यह बता रहा है कि स्वास्थ्य समस्याओं की वजह से आप थकान महसूस कर सकते हैं। यानी आपने जिन कठिनाइयों का सामना किया है या अभी कर रहे हैं, उसकी वजह से आपकी ऊर्जा खत्म हो सकती है
शुभ पौधा: मनी प्लांट
मीन राशि
प्रेम जीवन: ऐस ऑफ वैंड्स
आर्थिक जीवन: द टॉवर
करियर: सिक्स ऑफ पेंटाकल्स
स्वास्थ्य: द सन
मीन राशि के जातकों के प्रेम जीवन की बात करें तो ऐस ऑफ वैंड्स एक नए चरण की शुरुआत का संकेत दे रहा है, जैसे सगाई, शादी करना या परिवार बसाना। यदि आप सिंगल हैं तो इस सप्ताह आप शादी के बंधन में बंध सकते हैं और विवाहित जोड़े परिवार शुरू कर सकते हैं।
द टॉवर आपको वित्तीय मामलों में अपने पैसे को सावधानी से संभालने की सलाह देता है। यदि इस कार्ड के नकारात्मक परिणाम की बात करें तो यह दिवालियापन का प्रतीक हो सकता है। ऐसे में, आपको किसी भी तरह का रिस्क लेने से बचने की आवश्यकता हो सकती है। यदि आपने मुश्किल भरे दिनों के लिए पैसे नहीं बचाए हैं, तो आपको तुरंत सावधान हो जाना चाहिए और अभी से बचत कर लेना चाहिए क्योंकि भविष्य में बुरे दिनों से गुजरना पड़ सकता है।
सिक्स ऑफ़ पेंटाकल्स करियर के लिए एक उत्कृष्ट कार्ड है क्योंकि यह रोजगार और कार्यक्षेत्र पर आपके सम्मान का प्रतिनिधित्व करता है। यदि आप नौकरी की तलाश कर रहे हैं या करियर बदलने के बारे में सोच रहे हैं, तो यह कार्ड आपको अनुकूल परिणाम प्रदान करेगा। इस अवधि कोई सुपरवाइजर या प्रभावशाली बिजनेस पार्टनर आपको पैसे देकर या अपना समय, सहायता या सलाह देकर आपकी मदद कर सकता है।
द सन स्वास्थ्य के मामले में एक बेहतरीन कार्ड है और यह पूरे सप्ताह के लिए अच्छी जीवन शक्ति और अच्छे स्वास्थ्य की बात कर रहा है। इस सप्ताह आप अपने स्वास्थ्य के सर्वश्रेष्ठ स्तर पर रहेंगे और जीवन का भरपूर आनंद लेंगे। परिवार के साथ छुट्टी या ट्रेक पर भी जाने का प्लान कर सकते हैं।
इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1- टैरो अंक ज्योतिष से किस तरह अलग है?
अंक ज्योतिष विशुद्ध रूप से संख्याओं पर आधारित है और टैरो कार्ड पर जटिल रेखाचित्रों पर आधारित है, हालांकि अंक ज्योतिष टैरो का एक हिस्सा हो सकता है।
2- पिछले एक दशक में टैरो इतना लोकप्रिय क्यों हो गया है?
टैरो वर्तमान ऊर्जाओं पर आधारित है और तुरंत उत्तर देता है। लोगों को उनकी समस्याओं के लिए तुरंत मार्गदर्शन मिलता है।
3- क्या टैरो रीडर बनने के लिए कोचिंग की आवश्यकता होती है?
हां, अगर आप टैरो सेशन लेते हैं तो कार्ड को समझना बेहतर और आसान होता है।
अंक ज्योतिष साप्ताहिक राशिफल: 27 अक्टूबर से 02 नवंबर, 2024
कैसे जानें अपना मुख्य अंक (मूलांक)?
अंक ज्योतिष साप्ताहिक भविष्यफल जानने के लिए अंक ज्योतिष मूलांक का बड़ा महत्व है। मूलांक जातक के जीवन का महत्वपूर्ण अंक माना गया है। आपका जन्म महीने की किसी भी तारीख़ को होता है, उसको इकाई के अंक में बदलने के बाद जो अंक प्राप्त होता है, वह आपका मूलांक कहलाता है। मूलांक 1 से 9 अंक के बीच कोई भी हो सकता है, उदाहरणस्वरूप- आपका जन्म किसी महीने की 10 तारीख़ को हुआ है तो आपका मूलांक 1+0 यानी 1 होगा।
इसी प्रकार किसी भी महीने की 1 तारीख़ से लेकर 31 तारीख़ तक जन्मे लोगों के लिए 1 से 9 तक के मूलांकों की गणना की जाती है। इस प्रकार सभी जातक अपना मूलांक जानकर उसके आधार पर साप्ताहिक राशिफल जान सकते हैं।
अपनी जन्मतिथि से जानें साप्ताहिक अंक राशिफल (27 अक्टूबर से 02 नवंबर , 2024)
अंक ज्योतिष का हमारे जीवन पर सीधा प्रभाव पड़ता है क्योंकि सभी अंकों का हमारे जन्म की तारीख़ से संबंध होता है। नीचे दिए गए लेख में हमने बताया है कि हर व्यक्ति की जन्म तिथि के हिसाब से उसका एक मूलांक निर्धारित होता है और ये सभी अंक अलग-अलग ग्रहों द्वारा शासित होते हैं।
जैसे कि मूलांक 1 पर सूर्य देव का आधिपत्य है। चंद्रमा मूलांक 2 का स्वामी है। अंक 3 को देव गुरु बृहस्पति का स्वामित्व प्राप्त है, राहु अंक 4 का राजा है। अंक 5 बुध ग्रह के अधीन है। 6 अंक के राजा शुक्र देव हैं और 7 का अंक केतु ग्रह का है। शनिदेव को अंक 8 का स्वामी माना गया है। अंक 9 मंगल देव का अंक है और इन्हीं ग्रहों के परिवर्तन से जातक के जीवन में अनेक तरह के परिवर्तन होते हैं।
बृहत् कुंडलीमें छिपा है, आपके जीवन का सारा राज, जानें ग्रहों की चाल का पूरालेखा-जोखा
मूलांक 1
(अगर आपका जन्म किसी भी महीने की 1, 10, 19, 28 तारीख़ को हुआ है)
मूलांक 1 के जातक समय के बेहद पाबंद होते हैं और ऐसे में, आप अपने लक्ष्यों को समय पर पूरा करना पसंद करेंगे। हालांकि, यह बहुत सोच-समझकर अपने कदमों को आगे बढ़ाते हैं जो कि इनके व्यक्तित्व का एक विशेष गुण होता है।
प्रेम जीवन: प्रेम जीवन की बात करें, तो मूलांक 1 वालों के रिश्ते पार्टनर के साथ मधुर बने रहेंगे जिसकी वजह साथी के प्रति आपकी ईमानदारी होगी।
शिक्षा: शिक्षा के क्षेत्र में इस मूलांक के छात्रों की रुचि मैनेजमेंट डिसिप्लिन, बिज़नेस स्टेटिस्टिक्स आदि विषयों में होगी। इसके परिणामस्वरूप, आप इन सब्जेक्ट्स में महारत हासिल कर सकेंगे।
पेशेवर जीवन: पेशेवर जीवन में मूलांक 1 के जातक कार्यस्थल पर अपनी चमक बिखेरते हुए दिखाई देंगे। इस दौरान आप काम को बहुत अच्छे से करेंगे और ऐसे में, आपको वरिष्ठों से सराहना मिलेगी। अगर आपका संबंध व्यापार से है, तो बिज़नेस में आपका प्रदर्शन अच्छा रहेगा। साथ ही, आप अपनी क्षमताओं को भी उजागर कर सकेंगे।
स्वास्थ्य: स्वास्थ्य को देखें, तो इस मूलांक वालों की सेहत अच्छी रहेगी और इसकी वजह आपका आत्मविश्वास और मज़बूत रोग प्रतिरोधक क्षमता होगी।
उपाय: सूर्य ग्रह के लिए अगले छह महीने तक पूजा करें।
मूलांक 2
(अगर आपका जन्म किसी भी महीने की 2, 11, 20, 29 तारीख़ को हुआ है)
मूलांक 2 के तहत पैदा होने वाले जातक इस सप्ताह जीवन के बड़े और महत्वपूर्ण फैसले लेते समय कंफ्यूज़ नज़र आ सकते हैं जो कि आपकी प्रगति के मार्ग में समस्या पैदा करने का काम करेंगे। इन लोगों को कार्यो के सकारात्मक परिणाम पाने के लिए योजना बनाकर चलने की सलाह दी जाती है।
प्रेम जीवन: मूलांक 2 के जातकों की पार्टनर के साथ बहस या फिर मतभेद होने की आशंका है और इससे जितना हो सके आपको बचने की कोशिश करनी होगी। साथ ही, इस दौरान साथी के साथ किसी तीर्थ स्थल की यात्रा पर जाने की संभावना है और इस तरह की यात्राएं आपको सुकून देने का काम करेंगी।
शिक्षा: शिक्षा की बात करें, तो मूलांक 2 के छात्रों को इस सप्ताह अपनी पढ़ाई पर विशेष रूप से ध्यान देना होगा क्योंकि इस दौरान आपकी एकाग्र क्षमता कमज़ोर रह सकती है। ऐसे में, आपको मन लगाकर और समर्पित होकर पढ़ाई करने की जरूरत होगी।
पेशेवर जीवन: जो जातक नौकरी करते हैं, उनके कामों की रफ़्तार थोड़ी धीमी पड़ सकती है क्योंकि आप पर काम का बोझ बढ़ सकता है जो कि आपके लिए चिंता का विषय बन सकता है। दूसरी तरफ, जिन लोगों का खुद का व्यापार है, उन्हें बिज़नेस में अच्छे से योजना बनाकर चलना होगा।
स्वास्थ्य: स्वास्थ्य की दृष्टि से, यह सप्ताह थोड़ा नाज़ुक रह सकता है क्योंकि आपको सर्दी-जुकाम जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझना पड़ सकता है। इन रोगों की वजह आपकी कमज़ोर रोग प्रतिरोधक क्षमता हो सकती है और ऐसे में, आपकी सेहत प्रभावित होने की आशंका है।
उपाय: प्रतिदिन ‘ॐ सों सोमाय नमः’ का 20 बार जाप करें।
(अगर आपका जन्म किसी भी महीने की 3, 12, 21, 30 तारीख़ को हुआ है)
मूलांक 3 के जातक साहस से भरे रहेंगे और इसकी झलक उनके द्वारा लिए गए महत्वपूर्ण फैसलों में भी दिखाई देगी।
प्रेम जीवन: प्रेम जीवन को देखें, तो इस मूलांक वालों का रवैया पार्टनर के प्रति प्रेम एवं रोमांस से पूर्ण रहेगा। ऐसे में, आप दोनों एक-दूसरे के साथ बेझिझक होकर बातें शेयर करते हुए दिखाई देंगे जिससे आप दोनों के बीच आपसी तालमेल बेहतर होगा।
शिक्षा: मूलांक 3 के छात्र पेशेवर कोर्स जैसे कि बिज़नेस स्टेटिस्टिक्स, लॉजिस्टिक्स और फाइनेंशियल अकाउंटिंग आदि में अच्छी ख़ासी सफलता प्राप्त करेंगे। साथ ही, आपकी बेहतरीन क्षमताएं आपको साथी छात्रों की नज़रों में लेकर आएगी।
पेशेवर जीवन: पेशेवर जीवन में इस मूलांक के जातकों को नौकरी के नए अवसर मिलने की संभावना है और ऐसे अवसर आपकी सभी इच्छाओं को पूरा करने का काम करेंगे। इस दौरान आपको पदोन्नति मिलने के भी योग बनेंगे। वहीं, अगर आपका अपना व्यापार है, तो आप प्रतिद्वंदियों को अच्छी टक्कर देने में सक्षम होंगे।
स्वास्थ्य: स्वास्थ्य की बात करें, तो मूलांक 3 के जातकों की सेहत इस सप्ताह अच्छी बनी रहेगी जिसका कारण आपकी प्रसन्नता होगी। ऐसे में, आप खुद को फिट बनाए रखेंगे।
उपाय: प्रतिदिन “ॐ गुरवे नमः” का 21 बार जाप करें।
मूलांक 4
(अगर आपका जन्म किसी भी महीने की 4, 13, 22, 31 तारीख़ को हुआ है)
जिन जातकों का जन्म मूलांक 4 के अंतर्गत होता है, वह बेहद बुद्धिमान और जुनून से भरे होते हैं। इन लोगों का झुकाव भौतिक वस्तुओं या फिर सुख-सुविधाओं में होता है।
प्रेम जीवन: इस सप्ताह आपका रिश्ता पार्टनर के साथ प्रेमपूर्ण रहेगा और ऐसे में, आप दोनों के बीच आपसी तालमेल बेहतर होगा। साथ ही, इन जातकों के व्यवहार से साथी प्रसन्न दिखाई देगा।
शिक्षा: शिक्षा की बात करें, तो इस मूलांक वाले छात्र जो कंप्यूटर एप्लीकेशन, सॉफ्टवेयर टेस्टिंग आदि विषयों की पढ़ाई कर रहे हैं, वह इनमें अपनी स्किल्स का प्रदर्शन करते हुए नज़र आएंगे। शिक्षा में आप तार्किक होकर पढ़ाई करेंगे।
पेशेवर जीवन: मूलांक 4 के जातक कार्यस्थल में खुद को मिलने वाले हर काम में तर्क ढूंढ़ने में सक्षम होंगे और इसके परिणामस्वरूप, आप कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा कर सकेंगे। जिन जातकों का संबंध व्यापार से है, उनके व्यक्तित्व में नेतृत्व की क्षमता मौजूद होगी जो कि आपको प्रतिद्वंदियों से आगे लेकर जाने का काम करेगी।
स्वास्थ्य: स्वास्थ्य के मामले में इन लोगों को रात में नींद देर से आने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है जिसकी वजह आपका हद से ज्यादा सोचना होगा। संभव है कि अगर आप ऐसे ही सोचते रहेंगे, तो आप आगे चलकर भ्रमित महसूस कर सकते हैं।
उपाय: मंगलवार के दिन देवी दुर्गा के लिए यज्ञ/हवन करें।
अब घर बैठे विशेषज्ञ पुरोहित से कराएं इच्छानुसार ऑनलाइन पूजा और पाएं उत्तम परिणाम!
मूलांक 5
(अगर आपका जन्म किसी भी महीने की 5, 14, 23 तारीख़ को हुआ है)
मूलांक 5 वालों की रुचि ड्राइंग, पेंटिंग आदि में हो सकती है। संभव है कि इन लोगों को हमेशा से इसमें दिलचस्पी रही हो इसलिए यह इसको आगे लेकर जाना चाहते हैं।
प्रेम जीवन: इस सप्ताह इन जातकों के रिश्ते में पार्टनर के साथ सौहार्द और प्रेम बना रहेगा। इस दौरान जीवनसाथी के साथ संबंध मधुर होने की वजह से आप दोनों का आपसी तालमेल मज़बूत होगा।
शिक्षा: शिक्षा के क्षेत्र में मूलांक 5 के छात्र डिजिटल मार्केटिंग, अकाउंटिंग जैसे विषयों में अपनी स्किल्स का प्रदर्शन करने के साथ-साथ अपनी एक अलग जगह बनाने में सक्षम होंगे।
पेशेवर जीवन: इस सप्ताह के दौरान मूलांक 5 के जो लोग नौकरी कर रहे हैं, वह अपने वरिष्ठों के साथ अच्छे रिश्ते बनाए रखने में सफल रहेंगे। वहीं, जो लोग व्यापार करते हैं, वह अपने बिज़नेस को सही तरीके से आगे लेकर जाने का काम करेंगे।
स्वास्थ्य: स्वास्थ्य के लिए यह सप्ताह अनुकूल रहेगा क्योंकि इस दौरान आपकी सेहत अच्छी बनी रहेगी जिसकी वजह आपका तेज़ दिमाग और शानदार सेंस ऑफ ह्यूमर होगा।
(अगर आपका जन्म किसी भी महीने की 6, 15, 24 तारीख़ को हुआ है)
मूलांक 6 के अंतर्गत पैदा होने वाले जातकों में रचनात्मकता कूट-कूट कर भरी होती है। इन्हें यात्राओं का बेहद शौक होता है और अक्सर यह यात्रा करते हुए नज़र आ सकते हैं।
प्रेम जीवन: मूलांक 6 के जातक घर-परिवार में चल रहे विवादों की वजह से अपने रिश्ते में पार्टनर को लेकर अत्यंत संवेदनशील रह सकते हैं। इसके परिणामस्वरूप, जीवनसाथी के साथ आपसी तालमेल ज्यादा अच्छा नहीं रहने की आशंका है।
शिक्षा: शिक्षा की बात करें, तो आप इस सप्ताह पेशेवर कोर्स जैसे वेब डिजाइनिंग, मल्टीमीडिया आदि में अच्छे अंक हासिल करने में पीछे रह सकते हैं।
पेशेवर जीवन: पेशवर जीवन में इन लोगों पर इस सप्ताह काम का दबाव बढ़ सकता है और इसका कारण आपका व्यस्त शेड्यूल हो सकता है। अगर आप व्यापार करते हैं, तो बिज़नेस में आप अपने प्रतिद्वंदियों को पछाड़ सकते हैं।
स्वास्थ्य: स्वास्थ्य को देखें, तो वसा वाला भोजन अधिक मात्रा में खाने की वजह से आपको कोलेस्ट्रॉल की समस्या घेर सकती है। ऐसे में, आपको अपने खानपान का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।
उपाय: प्रतिदिन “ॐ श्री लक्ष्मी भ्यो नमः” का 33 बार जाप करें।
मूलांक 7
(अगर आपका जन्म किसी भी महीने की 7, 16, 25 तारीख़ को हुआ है)
मूलांक 7 के जातकों का झुकाव अध्यात्म के प्रति बढ़ सकता है और ऐसे में, आप धार्मिक कार्य करते हुए दिखाई दे सकते हैं। साथ ही, इस दौरान आप किसी तीर्थ स्थल की यात्रा पर भी जा सकते हैं।
प्रेम जीवन: इस सप्ताह इन जातकों के मन में साथी के लिए गलत विचार या भावनाएं आ सकती हैं और इसके फलस्वरूप, आप दोनों के बीच मतभेद जन्म ले सकते हैं। इन सब परिस्थितियों की वजह से आपका रिश्ता नकारात्मक रूप से प्रभावित हो सकता है और कुछ ऐसा हो सकता है जिसके बारे में आपने सोचा भी नहीं होगा।
शिक्षा: मूलांक 7 के छात्रों का मन पढ़ाई से हट सकता है और ऐसे में, शिक्षा में आपके प्रदर्शन में गिरावट देखने को मिल सकती है जिसकी वजह से आपकी प्रगति की रफ़्तार थम सकती है। साथ ही, आत्मविश्वास की कमी भी आपके लिए समस्या का काम कर सकती है।
पेशेवर जीवन: पेशवर जीवन में यह लोग बेकार के कारणों की वजह से नौकरी में बदलाव करने को मज़बूर हो सकते हैं और इसे आपकी प्रगति के लिए अच्छा नहीं कहा जा सकता है। इसके अलावा, जो लोग व्यापार करते हैं, उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
स्वास्थ्य: मूलांक 7 वालों को इस हफ़्ते किसी एलर्जी की वजह से त्वचा पर रैशेज की समस्या परेशान कर सकती है जो कि आपकी कमज़ोर रोग प्रतिरोधक क्षमता का परिणाम हो सकती है।
(अगर आपका जन्म किसी भी महीने की 8, 17, 26 तारीख़ को हुआ है)
मूलांक 8 के जातक धैर्यवान होते हैं, लेकिन इनके कामों को करने की रफ़्तार थोड़ी धीमी होती है। इन लोगों को हारने का डर होता है जो कभी-कभी इन पर हावी हो जाता है।
प्रेम जीवन: इन जातकों को प्रेम जीवन में अपने पार्टनर के साथ अहंकार से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है जिसके चलते आप दोनों के बीच दूरियां आ सकती हैं। इस तरह की समस्याएं आपके रिश्ते से खुशियों को गायब करने का काम कर सकती हैं जिसको आप बनाए रखना चाहते होंगे।
शिक्षा: शिक्षा के क्षेत्र में मूलांक 8 के छात्रों को सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है क्योंकि इस दौरान आपका ध्यान पढ़ाई से भटक सकता है जिससे आपको बचना होगा, अन्यथा इसका असर पढ़ाई में आपके प्रदर्शन पर पड़ सकता है।
पेशेवर जीवन: इस मूलांक के नौकरी करने वाले जातक बेहतर वेतन और प्रगति के लिए नौकरी में बदलाव करने के बारे में सोच-विचार कर सकते हैं। लेकिन, संभव है कि इस अवधि में आपको कार्यों में मनचाही सफलता न मिले। जिन लोगों का अपना व्यापार है, उनके सामने न लाभ न हानि की स्थिति आ सकती है।
स्वास्थ्य: इस सप्ताह मूलांक 8 वालों को पैरों में दर्द, घुटनों में दर्द और अकड़न जैसी स्वास्थ्य समस्याएं परेशान कर सकती हैं। ऐसे में, आपको तला-भुना खाने से परहेज़ करना होगा और अपने खानपान पर नज़र बनाए रखनी होगी।
(अगर आपका जन्म किसी भी महीने की 9, 18, 27 तारीख़ को हुआ है)
मूलांक 9 के तहत जन्मे जातक काफ़ी सक्रिय होते हैं और ऐसे में, यह अपने जीवन के बड़े फैसले भी आसानी से ले लेते हैं। इन लोगों में नेतृत्व के गुण मौजूद होते हैं और इसकी बदौलत यह कार्यक्षेत्र में अपनी एक अलग जगह बनाने में सक्षम होते हैं।
प्रेम जीवन: प्रेम जीवन की बात करें, तो इन लोगों का रिश्ता पार्टनर के साथ प्रेम, सौहार्द और खुशियों से पूर्ण रहेगा। आपकी बातें और विचार दोनों एकदम स्पष्ट होंगे और इस वजह से आप दोनों एक-दूसरे के करीब आएंगे।
शिक्षा: शिक्षा की दृष्टि से, यह सप्ताह आपके लिए अनुकूल रहेगा क्योंकि इस अवधि में आप पढ़ाई में अच्छे अंक हासिल करने में सफल हो सकते हैं। साथ ही, इस मूलांक के छात्रों का प्रदर्शन इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, केमिस्ट्री आदि में शानदार रहेगा और आप नए सब्जेक्ट्स में आसानी से महारत हासिल कर सकेंगे।
पेशेवर जीवन: मूलांक 9 के जो जातक सरकरी नौकरी के लिए प्रयास कर रहे हैं, उनके लिए यह हफ़्ता इस संबंध में कुछ बेहतरीन अवसर लेकर आ सकता है। वहीं, जिन लोगों का खुद का व्यापार है, वह बिज़नेस में नई डील्स करते हुए दिखाई दे सकते यहीं जिससे आपको अच्छा ख़ासा लाभ प्राप्त होगा। साथ ही, आपके मल्टीलेवल नेटवर्किंग बिज़नेस में भी प्रवेश करने की संभावना है।
स्वास्थ्य: इस हफ्ते आपका स्वास्थ्य अच्छा रहेगा और आप पूरी तरह से फिट दिखाई देंगे क्योंकि आप साहसी और दृढ़ बने रहेंगे। साथ ही, मज़बूत आत्मविश्वास आपकी सेहत को उत्तम बनाए रखेगा।
उपाय: मंगलवार के दिन मंगल ग्रह के लिए यज्ञ/हवन करें।
इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अंक ज्योतिष में अपना मूलांक कैसे पता करें?
अंक ज्योतिष में मूलांक और भाग्यांक निकालना बहुत सरल होता है। जन्म तिथि को जोड़ने पर आने वाला अंक मूलांक होता है, तो वहीं जन्म तिथि, महीना और साल को जोड़कर प्राप्त होने वाला अंक भाग्यांक कहलाता है।
मूलांक 4 के स्वामी कौन हैं?
अंक ज्योतिष में मूलांक 4 के अधिपति देव छाया ग्रह राहु हैं।
अंक ज्योतिष से अपना भविष्य कैसे जान सकते हैं?
अंकशास्त्र में किसी व्यक्ति का भविष्य उसके भाग्यांक और मूलांक की सहायता से जाना जा सकता है।
दिवाली 2024- तिथि को लेकर ना हों कंफ्यूज, इस दिन मनाया जाएगा साल का सबसे बड़ा त्यौहार जानें शुभ मुहूर्त!
हिंदू धर्म के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक होता है दिवाली का त्योहार जिसका लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं। दिवाली का यह पर्व देश भर में धूमधाम के साथ तो मनाया ही जाता है विदेश में भी इसकी अलग ही चमक देखने को मिलती है। बात करें वर्ष 2024 की दिवाली को तो इस वर्ष तिथि को लेकर काफी संशय चल रहा है। अगर आप भी इस बात को लेकर कन्फ्यूज हैं कि दिवाली कब मनानी है, कैसे मनानी है, इस दिन का शुभ मुहूर्त क्या रहने वाला है, आदि तो आप एकदम सही जगह पर आए हैं क्योंकि एस्ट्रोसेज के हमारे इस दिवाली विशेष ब्लॉग के माध्यम से हम आपके इन्हीं सभी सवालों का जवाब देने का प्रयत्न करेंगे।
साथ ही जानेंगे इस बेहद ही खास त्यौहार से जुड़ी कुछ रोचक और दिलचस्प बातों की भी जानकारी। तो चलिए बिना देरी किए शुरू करते हैं हमारा यह स्पेशल ब्लॉग और सबसे पहले जान लेते हैं वर्ष 2024 में दिवाली किस दिन पड़ रही है।
दिवाली का त्योहार 5 दिनों तक चलने वाला एक बेहद ही महत्वपूर्ण त्यौहार होता है। वर्ष 2024 में इस त्यौहार की शुरुआत 29 अक्टूबर से हो जाएगी और 3 नवंबर तक यह त्यौहार चलेगा। दरअसल दिवाली का त्योहार धनतेरस से शुरू होता है और यह भैया दूज पर जाकर समाप्त हो जाता है।
ऐसे में धनतेरस की बात करें तो धनतेरस से ही दिवाली के पर्व की शुरुआत मानी जाती है। धनतेरस को धन त्रयोदशी भी कहते हैं। इस दिन देवता कुबेर के साथ मां लक्ष्मी की पूजा का विधान बताया गया है। वर्ष 2024 में 29 अक्टूबर को धनतेरस का त्यौहार मनाया जाएगा। इस दिन खरीदारी का महत्व होता है। ऐसे में आप चाहें तो इस दिन बर्तन, सोना, चांदी, आभूषण वस्त्र आदि खरीद सकते हैं।
इसके बाद अगला दिन होता है छोटी दिवाली का। धनतेरस के बाद छोटी दिवाली मनाते हैं। इसे कई जगहों पर नरक चतुर्दशी भी कहते हैं। इस दिन भगवान हनुमान की पूजा का विधान बताया गया है। वर्ष 2024 में छोटी दिवाली या नरक चतुर्दशी 30 अक्टूबर को मनाई जाएगी।
इसके बाद दिवाली का त्योहार मनाया जाता है। अब बात करें दिवाली की तो दिवाली को लक्ष्मी पूजा के नाम से भी जानते हैं और दिवाली का त्योहार इस वर्ष 1 नवंबर 2024 को मनाया जाएगा।
लक्ष्मी पूजा का समय – शाम 05.36 – शाम 06.16 (1 नवंबर 2024), अवधि – 01 घंटा 56 मिनट
प्रदोष काल – शाम 05:36 – रात 08:11
वृषभ काल – शाम 06.20 – रात 08.15 (लक्ष्मी पूजा मुहूर्त स्थिर लग्न के बिना)
इसके बाद अगले दिन गोवर्धन पूजा और भाई दूज का पर्व मनाया जाता है। वर्ष 2024 में दिवाली के अगले दिन यानी 2 नवंबर और 3 नवंबर को गोवर्धन पूजा और भैया दूज मनाया जाएगा। गोवर्धन पूजा के दिन भगवान कृष्ण की पूजा की जाती है। इसी दिन भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को एक उंगली पर उठा लिया था। वहीं भैया दूज की बात करें तो इस दिन बहनें अपने भाई का टीका करती हैं और बदले में भाई उन्हें तोहफे देते हैं।
बृहत् कुंडली में छिपा है, आपके जीवन का सारा राज, जानें ग्रहों की चाल का पूरा लेखा-जोखा
दिवाली के पांच मुख्य दिनों की तिथि
जैसा कि हमने पहले भी बताया कि दिवाली का यह त्यौहार 5 दिनों तक मनाया जाता है।
दिवाली का पहला दिन धनतेरस होता है जो 29 अक्टूबर 2024 को पड़ेगा
दूसरे दिन छोटी दिवाली या नरक चतुर्दशी मनाते हैं जो की 31 अक्टूबर को मनाई जाएगी
दिवाली का तीसरा दिन दिवाली या फिर लक्ष्मी पूजा के नाम से मनाया जाता है यह 1 नवंबर 2024 को पड़ेगा
दिवाली का चौथा दिन गोवर्धन पूजा को समर्पित होता है यह 2 नवंबर 2024 को मनाया जाएगा और
दिवाली का आखिरी दिन भाई दूज के रूप में मनाया जाता है और इस वर्ष यह 3 नवंबर 2024 को पड़ने वाला है
दिवाली के त्यौहार के बारे में कहा जाता है कि, यह प्रकाश का पर्व है। साथ ही यह बुराई पर अच्छाई की जीत के जश्न के रूप में भी मनाया जाता है। इसे दिवाली, दीपावली के नाम से जानते हैं। दिवाली का यह त्यौहार कार्तिक मास की अमावस्या तिथि के दिन मनाया जाता है। कहते हैं इसी दिन भगवान श्री राम अपना 14 वर्षों का वनवास काटने के बाद वापस अयोध्या वापिस आए थे।
इस वर्ष दिवाली को लेकर अलग मत:बात करें अमावस्या तिथि की तो वर्ष 2024 में अमावस्या तिथि 31 तारीख को दोपहर 3:22 से शुरू हो रही है और यह 1 नवंबर को शाम 5:23 पर समाप्त हो जाएगी। इसके चलते 1 तारीख को अमावस्या तिथि प्रदोष और निशिथा काल को स्पर्श नहीं कर पाएगी जबकि 31 को प्रदोष काल से निशिथा काल तक व्याप्त रहेगी। ऐसे में शास्त्रों के अनुसार 31 अक्टूबर के दिन दीवाली उत्सव और लक्ष्मी पूजन करना सबसे अधिक फलदाई रहने वाला है क्योंकि दिवाली का पर्व तभी मनाना उत्तम रहता है जब प्रदोष से लेकर निशिथा काल तक अमावस्या तिथि रहे।
हमारे अनुभवी एवं विद्वान ज्योतिषी पंडित हनुमान मिश्रा का कहना है कि “जो लोग ऑफिस इत्यादि में पूजा करना चाहते हैं, वह लोग 01 नवंबर को दिन में लक्ष्मी पूजा कर सकते हैं।”
दिवाली शुभ योग 2024
बात करें इस दिवाली पर बनने वाले शुभ योगों की तो कार्तिक मास की अमावस्या तिथि पर सुबह 10:41 तक प्रीति योग बनेगा, इसके बाद आयुष्मान योग का शुभ संयोग बन रहा है जो पूर्ण रात्रि तक रहेगा। दिवाली पर शिव वास योग का भी निर्माण होने जा रहा है। शिव वास योग शाम 6:16 से रहेगा वहीं स्वाति नक्षत्र का संयोग दिवाली पर बनने वाला है। कहते हैं इन योगों में अगर धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा की जाए तो इससे जीवन में हमेशा सुख और समृद्धि बनी रहती है और इनमें निरंतर वृद्धि होती है।
अधिक जानकारी: वर्ष 2024 में कार्तिक अमावस्या तिथि निशिथा मुहूर्त के साथ व्याप्त नहीं रहेगी। ऐसे में इस बार दिवाली पर रात्रि कल में लक्ष्मी पूजा नहीं हो पाएगी। कहते हैं कि निशिथा काल में देवी लक्ष्मी घर-घर जाती हैं और इस दौरान मां लक्ष्मी की पूजा करने से लक्ष्मी जी की सिद्धियां प्राप्त होती है। शास्त्रों के अनुसार और पंचांग के अनुसार ऐसा माना जाता है कि अगर स्थिर लग्न के दौरान लक्ष्मी पूजा की जाए तो लक्ष्मी जी घर में वास करने लगती हैं। वृषभ लग्न को स्थिर माना जाता है और दिवाली के त्यौहार के दौरान यह अधिकतर प्रदोष काल के साथ व्याप्त होता है। हालांकि वर्ष 2024 में दिवाली वाले दिन स्थिर लग्न मुहूर्त नहीं बन रहा है।
हालांकि अगर आप अभी भी स्थिति के कन्फ्यूजन के भँवर में उलझे हुए हैं तो हमारी सलाह यही है कि आप विद्वान ज्योतिषियों से एक बार इससे संबंधित परामर्श हासिल कर लें।
बात करें दिवाली के इस भव्य त्यौहार के महत्व की तो, कहते हैं इसी दिन भगवान राम लंका पर विजय प्राप्त करके वापस अयोध्या लौटे थे। इस दिन से हर साल कार्तिक अमावस्या पर दिवाली का त्यौहार मनाया जाता है। दिवाली के दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा अर्चना की जाती है। इसके साथ ही भगवान राम के वापस अयोध्या आने की खुशी में दीप जलाए जाते हैं। हर साल कार्तिक अमावस्या के दिन दिवाली मनाई जाती है। इस दिन लोग घरों को रोशन करते हैं, दीपक जलाते हैं, लक्ष्मी पूजा करते हैं और अपने जीवन में हमेशा सुख समृद्धि और धन की कामना के लिए पूजा करते हैं।
दिवाली पर कैसे करें मां लक्ष्मी की पूजा
दिवाली के दिन मां लक्ष्मी पूजा की अलग विधि और नियम बताए गए हैं।
इस दिन लक्ष्मी जी की पूजा के लिए सबसे पहले पूर्व दिशा या फिर ईशान कोण में एक चौकी या एक पटरा रख दें।
अब इस पर लाल या फिर गुलाबी साफ वस्त्र बिछाएँ।
इस पर सबसे पहले गणेश जी की मूर्ति विराजित करें। इनके दाहिनी ओर मां लक्ष्मी जी की तस्वीर या मूर्ति रख दें।
अब आसान पर बैठें और अपने चारों ओर गंगाजल छिड़क लें। इसके बाद पूजा का संकल्प लें और फिर पूजा प्रारंभ करें।
भगवान गणेश को रोली, दूर्वा अर्पित करें और मां लक्ष्मी को सिंदूर अर्पित करें।
इसके बाद दोनों को फूल चढ़ाएँ, एक मुखी घी का दीपक प्रज्वलित करें।
इसके बाद मां लक्ष्मी और भगवान गणेश को प्रसाद अर्पित करें।
भगवान गणेश और मां लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करें।
अंत में आरती करें और शंखनाद करें।
पूजा के बाद घर के अलग-अलग हिस्सों में दीपक जलाएं।
इसके अलावा मुमकिन हो तो घर के अलावा किसी कुएँ के पास और मंदिर में भी दीप प्रज्वलित करें।
दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा के लिए इन मंत्रों का जाप किया जा सकता है:
ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यो नमः
ॐ श्रीं ल्कीं महालक्ष्मी महालक्ष्मी एह्येहि सर्व सौभाग्यं देहि मे स्वाहा
पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु के सातवें अवतार भगवान राम ने राक्षस राजा रावण को हराने के बाद इसी दिन अयोध्या में वापसी की थी क्योंकि यह हिंदू कार्तिक महीने में अमावस्या का दिन था ऐसे में जिस रात को वापस अयोध्या आए अयोध्या में लोगों ने दिए जलाकर और अपने घरों को रंगोली से सजाकर भगवान राम का भव्य स्वागत किया था।
वहीं दूसरी ओर देखें तो दक्षिण भारत में लोग इस अवसर को उस दिन के रूप में मनाते हैं जब भगवान कृष्ण ने राक्षस नरकासुर को हराया था। इसके अलावा माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी का विवाह हुआ था।
पौराणिक किंवदंतियों के अनुसार कहा जाता है कि देवी लक्ष्मी का जन्म कार्तिक माह की अमावस्या तिथि के दिन ही हुआ था। इस दिन दुनिया भर में लोग रोशनी का यह त्यौहार बेहद ही खुशी और उत्साह के साथ मनाते हैं। हर घर में लोग बहुमूल्य वस्तुओं के साथ-साथ भगवान गणेश और माँ लक्ष्मी की पूजा करते हैं।
महालक्ष्मी का चाहिए आशीर्वाद तो दिवाली से पहले इन चीजों को घर से निकाल दें
दिवाली के कुछ दिनों पहले से ही लोग साफ सफाई में जुट जाते हैं। कहा जाता है मां लक्ष्मी केवल वहीं वास करती हैं जहां साफ सफाई होती है। यही वजह है कि दिवाली के आसपास साफ सफाई का खास महत्व होता है। ऐसे में आप भी कुछ बातों का विशेष रूप से ध्यान रखें। साफ सफाई के दौरान अगर आपको भी अपने घर में कुछ विशेष चीज नजर आयें तो इन्हें घर से निकाल दें अन्यथा आपको पूर्ण रूप से मां लक्ष्मी की कृपा नहीं मिल पाएगी। क्या कुछ हैं ये चीज़ें आगे बढ़कर जान लेते हैं:
टूटा हुआ कांच: वास्तु शास्त्र के अनुसार अगर घर में टूटा हुआ कांच रखा है तो इस शुभ नहीं माना जाता है। यह कलह क्लेश की वजह बनता है। अगर घर में टूटा हुआ कांच है तो परिवार में आए दिन झगड़े होते रहेंगे। ऐसे में साफ सफाई के दौरान इसे तुरंत बाहर निकाल दें।
टूटे हुए बर्तन: घर में टूटे हुए बर्तन भी अशुभ माने जाते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार टूटे बर्तन सुख समृद्धि छीन लेते हैं और घर में कंगाली की वजह बनते हैं। साथ ही यह आर्थिक परेशानियों को भी न्योता देते हैं।
पुराने दिये: वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में पुराने दिये रखना भी शुभ नहीं माना गया है। ऐसे में दिवाली आने से पहले अपने घर से पुराने दिये बाहर निकाल दें और नए दिये ले आयें। आप चाहे तो पुराने दीयों का दान भी कर सकते हैं।
टूटा हुआ बेड: वास्तु शास्त्र के अनुसार अगर घर में कोई पुराना या टूटा हुआ बेड पड़ा है तो उसे भी दिवाली आने से पहले निश्चित रूप से बाहर कर दें। इससे घर में पारिवारिक कलह, पति-पत्नी के बीच मनमुटाव और रिश्ते खराब होने की संभावना बढ़ जाती है।
बंद घड़ी: वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में रखी बंद घड़ी नकारात्मकता को न्योता देती है। साथ ही यह घर में मौजूद लोगों की असफलता का कारण भी बनती है। ऐसे में अगर आपके घर में भी बंद घड़ी पड़ी है तो इसे तुरंत बाहर निकाल दें।
छोटी दिवाली के दिन यमराज से नरक का द्वार बंद करने और अपने जीवन में सुख समृद्धि की मनोकामना करने के लिए यम दीपक जलाया जाता है लेकिन इससे पहले कुछ बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना होता है।
यम का दीपक गोबर से बना हुआ होना चाहिए।
इसमें सरसों का तेल डालकर जलाएं।
इसमें एक बाती या चार बाती हो इस बात का विशेष ख्याल रखें।
इसके अलावा कोशिश करें कि घर के बुजुर्ग ही इस दीपक को जलाएं।
यह दिया शाम 7:00 बजे के बाद जलाएं।
इसमें तेल उचित मात्रा में डालें ताकि कम से कम यह दीपक 4 घंटे या उससे अधिक समय तक जलते रहे।
हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारा यह ब्लॉग ज़रूर पसंद आया होगा। अगर ऐसा है तो आप इसे अपने अन्य शुभचिंतकों के साथ ज़रूर साझा करें। धन्यवाद!
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1: 2024 में दीपावली का त्यौहार कब मनाया जाएगा?
2024 में 1 नवंबर 2024 को दिवाली का त्यौहार मनाया जाएगा।
2: धनतेरस 2024 कब है?
वर्ष 2024 में धनतेरस का त्योहार 29 अक्टूबर के दिन मनाया जाएगा। इसी दिन से दिवाली के त्यौहार की शुरुआत हो जाती है।
3: दिवाली के दिन क्या किया जाता है?
दिवाली के दिन घरों को सजाया जाता है, दीपक जलाए जाते हैं, रोशनी की जाती है, रंगोली बनाई जाती है, मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं और अपने घर में मां लक्ष्मी के सदा सदा वास करने की प्रार्थना करते हैं।
बुध का वृश्चिक राशि में गोचर: इन 3 राशियों को फूंक-फूंक कर रखना होगा कदम!
एस्ट्रोसेज अपने पाठकों के लिए विशेष रूप से “बुध का वृश्चिक राशि में गोचर” का यह ब्लॉग लेकर आया है जिसमें आपको बुध गोचर से जुड़ी समस्त जानकारी प्राप्त होगी जैसे कि तिथि, समय आदि। बता दें कि बुध ग्रह को नवग्रहों में राजकुमार का दर्जा प्राप्त है और यह मनुष्य जीवन को अत्यधिक प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। अब 29 अक्टूबर 2024 को बुध का वृश्चिक राशि में गोचर होने जा रहा है। इस ब्लॉग में हम आपको अवगत करवाएंगे कि बुध का यह गोचर विश्व सहित सभी राशियों को किस तरह से प्रभावित करेगा।
वैदिक ज्योतिष में बुध महाराज को देवताओं के दूत कहा जाता है। राशि चक्र में इन्हें कन्या और मिथुन राशि पर स्वामित्व प्राप्त है। सौरमंडल में बुध ग्रह सूर्य के सबसे निकट स्थित है और इन्हें भारतीय मान्यताओं में बुद्धि के कारक ग्रह माना जाता है। किसी व्यक्ति के जीवन में बुध चतुरता, और ह्यूमर का प्रतिनिधित्व करता है। हालांकि, बुध एक लाभकारी ग्रह है, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में अशुभ होकर नकारात्मक फल देने लगता है। कुंडली में मज़बूत बुध जहां तेज़ बुद्धि को दर्शाता है,लेकिन फिर भी कभी-कभार जातकों को महत्वपूर्ण फैसले लेने में कठिनाई का अनुभव हो सकता है।
बुध का वृश्चिक राशि में गोचर: समय
बुध देव वृश्चिक राशि में 29 अक्टूबर 2024 की रात 10 बजकर 24 मिनट पर प्रवेश कर जाएंगे। हालांकि, बुध महाराज की वृश्चिक राशि में उपस्थिति को ज्यादा अच्छा नहीं कहा जा सकता है क्योंकि इस राशि के स्वामी ग्रह मंगल हैं जिन्हें बुध ग्रह का शत्रु माना जाता है। इसके परिणामस्वरूप, वृश्चिक राशि में बुध की मौजूदगी राशि चक्र की कुछ राशियों के लिए दुख और कष्ट लेकर आ सकती है। आइए बिना देर किये शुरुआत करते हैं इस लेख की और जानते हैं कौन सी हैं वह राशियां।
बुध वृश्चिक राशि में: विशेषताएं
जब बुध ग्रह वृश्चिक राशि में विराजमान होते हैं, तो जातकों का सारा ध्यान रिसर्च करने में होता है। साथ ही, यह आपको अपने विश्वास या मत को लेकर अडिग बनाने का काम करते हैं। एक तरफ, वृश्चिक राशि आपको बातों या चीज़ों को छुपाने के लिए प्रेरित करती है, तो वहीं बुध ग्रह अभिव्यक्ति का ग्रह है। ऐसे में, जब बुध वृश्चिक राशि में मौजूद होते हैं, तब आपके चेहरे के भाव से कोई आपके मन की बात नहीं जान सकता है क्योंकि सब कुछ वैसा नहीं होता है जैसा आपके चेहरे से दिखाई दे रहा होता है।
वृश्चिक राशि में बुध की उपस्थिति आपको नए-नए आविष्कार करने वाला, रहस्यवादी, रिसर्चर, वैज्ञानिक और जासूस बनाने का काम करती है। लेकिन, बुध के इस राशि में नकारात्मक होने पर यह आपको चोर, हैकर या मनोरोगी भी बना सकती है। साथ ही, ऐसी स्थिति में व्यक्ति खतरनाक और रहस्यमयी बनता है और अगर कोई अशुभ ग्रह इस स्थिति को प्रभावित करने लगता है, तो हालात और ज्यादा बिगड़ सकते हैं।
बृहत् कुंडलीमें छिपा है, आपके जीवन का सारा राज, जानें ग्रहों की चाल का पूरालेखा-जोखा
बुध का वृश्चिक राशि में गोचर: इन राशियों को करेगा नकारात्मक रूप से प्रभावित
मेष राशि
मेष राशि वालों के लिए बुध महाराज का गोचर आपके आठवें भाव में होने जा रहा है जो कि आपके तीसरे और छठे भाव के स्वामी हैं। कुंडली में यह भाव गूढ़ विज्ञान, अचानक से होने वाली घटनाओं, लंबी आयु और रहस्य आदि का होता है। बता दें कि आपके आठवें भाव में बुध ग्रह की स्थिति को ज्यादा अच्छा नहीं माना जा सकता है और इस गोचर के दौरान इनका वक्री होना परिस्थितियों को बद से बदतर बनाने का काम कर सकता है। ऐसे में, आपकी बातचीत का तरीका वाद-विवाद या मतभेदों की वजह बन सकता है।
इन जातकों के आठवें भाव में बुध महाराज का गोचर होने से आपकी पुरानी स्वास्थ्य समस्याएं फिर से उभरकर सामने आ सकती हैं जैसे कि त्वचा या फिर गले से जुड़ी कोई स्वास्थ्य समस्या आदि। इस तरह के रोग एकदम से लौटकर आने से आप मानसिक रूप से परेशान नज़र आ सकते हैं।
मिथुन राशि
मिथुन राशि वालों के लिए बुध महाराज आपकी कुंडली में शत्रु, स्वास्थ्य, प्रतियोगिता और मामा के भाव यानी कि छठे भाव में गोचर करने जा रहे हैं। बता दें कि बुध देव आपके लग्न भाव और चौथे भाव के भी अधिपति देव हैं। ऐसे में, बुध का वृश्चिक राशि में गोचर होने से आपको बेहद सावधान रहना होगा क्योंकि इस अवधि को आपकी माता की सेहत के लिए या फिर आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं कहा जा सकता है। इसके परिणामस्वरूप, आपके दवाइयों पर होने वाले खर्चों में बढ़ोतरी हो सकती है।
सिर्फ इतना ही नहीं, बुध के वृश्चिक राशि में प्रवेश के दौरान आपको घर-परिवार में कलह या फिर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही, आप और आपकी माता मामा से मिलने के लिए जा सकते हैं। करियर के क्षेत्र में आपका सारा ध्यान रोज़मर्रा के कामों पर होगा। किसी समारोह में लोगों से मिलना आपके तनाव को कम करने में सहायक सिद्ध होगा। इसके विपरीत, कार्यस्थल में आप ऊर्जावान बने रहेंगे और आप अच्छे से जानते होंगे कि अपने लक्ष्यों को सही तरीके से किस तरह से पूरा करना होगा। जिन जातकों का खुद का व्यापार है, उन्हें किसी भी तरह का जोखिम न उठाने की सलाह दी जाती है क्योंकि इस दौरान आपको नुकसान होने की प्रबल संभावना है।
धनु राशि के जातकों के बारहवें भाव में बुध ग्रह गोचर करने जा रहे हैं। कुंडली में इस भाव का संबंध विदेश, आइसोलेशन, अस्पताल, खर्चों और मल्टीनेशनल कंपनियों से होता है। जैसे कि बुध देव आपके सातवें और दसवें भाव के स्वामी हैं और अब इनकी बारहवें भाव में मौजूदगी आपको करियर में विदेश से जुड़े अवसर प्रदान करेगी, लेकिन इस राह में आपको समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। बुध महाराज आपके लिए मारक ग्रह भी हैं और साथ ही, इन्हें केन्द्राधिपति दोष भी लग रहा है।
हालांकि, वृश्चिक राशि में बुध के बैठे होने से आपकी आय में वृद्धि होगी, लेकिन यह आपके सभी खर्चों को पूरा नहीं कर पाएगी और ऐसे में, आपको अपनी बचत का एक बड़ा हिस्सा इस्तेमाल करना पड़ सकता है। इस अवधि में जितना हो सके, उतना मेडिकल से जुड़ी समस्याओं से दूर रहें क्योंकि यह गंभीर रूप धारण कर सकती है। इसके अलावा, सातवें भाव के स्वामी के रूप में बुध के बारहवें भाव में जाने से आपके पार्टनर को घबराहट और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं परेशान कर सकते हैं।
बुध का वृश्चिक राशि में गोचर: इन राशियों को मिलेंगे शुभ परिणाम
वृषभ राशि
वृषभ राशि के जातकों के लिए बुध ग्रह आपके दूसरे और पांचवें भाव के स्वामी हैं। अब बुध देव का वृश्चिक राशि में गोचर आपके सातवें भाव में होने जा रहा है जो कि जीवनसाथी और बिज़नेस पार्टनरशिप का भाव होता है। ऐसे में, यह समय रिश्ते को शादी में बदलने के लिए शानदार रहेगा। बुध के वृश्चिक राशि में प्रवेश के दौरान आप साथी से शादी करने के लिए कह सकते हैं और उन्हें अपने परिवार से मिलवा भी सकते हैं। साथ ही, शादी की तारीख भी तय कर सकते हैं।
इस राशि के विवाहित जातक अपने शादीशुदा जीवन की फिर से एक नई शुरुआत करने में सक्षम होंगे। अगर रिश्ते में पहले से कोई समस्या चल रही है, तो अब बुध के वृश्चिक राशि में गोचर के दौरान आप इन समस्याओं को बातचीत की मदद से सुलझाने की दिशा में मिलकर काम कर सकेंगे।
सिंह राशि वालों के लिए बुध ग्रह आपके दूसरे और ग्यारहवें भाव के स्वामी हैं जो कि धन और लाभ का भाव होता है। अब यह गोचर करके आपके चौथे भाव में विराजमान होंगे और कुंडली में चौथा भाव माता, घर, कार और संपत्ति आदि का प्रतिनिधित्व करता है। बता दें कि बुध महाराज आपके धन भाव को भी नियंत्रित करते हैं और ऐसे में, चौथे भाव में इनकी मौजूदगी आपको धन निवेश करने के लिए प्रेरित करेगी।
संभावना है कि बुध का वृश्चिक राशि में गोचर के दौरान आप घर या वाहन को बेहतर बनाने के लिए कोई नई खरीदारी कर सकते हैं या फिर पार्टी या पूजा का आयोजन कर सकते हैं जिसमें दोस्तों या परिवार हिस्सा ले सकते हैं। इसके अलावा, बुध आपके चौथे भाव में बैठकर दसवें भाव को देख रहे होंगे और इसे आपके करियर के लिए बहुत अच्छा कहा जाएगा, विशेष रूप से उन लोगों के लिए जो रियल एस्टेट इंडस्ट्री में काम करते हैं या रियल एस्टेट ब्रोकर के रूप में कार्यरत हैं।
मकर राशि के जातकों के लिए बुध देव आपके छठे और नौवें भाव के स्वामी हैं। अब यह आपके ग्यारहवें भाव में गोचर करने जा रहे हैं और कुंडली में इस भाव का संबंध बड़े भाई-बहन एवं इच्छाओं से होता है। बता दें कि अब बुध 29 अक्टूबर को वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे। ऐसे में, प्रतियोगी परीक्षा या फिर अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेने वाले छात्रों को पढ़ाई में अपने समर्पण और कड़ी मेहनत का फल मिलेगा। साथ ही, इस राशि के जो लोग नए व्यापार की शुरुआत करना चाहते हैं या फिर किसी मकसद से धन प्राप्त करना चाहते हैं, उन्हें धन की प्राप्ति हो सकती है।
वृश्चिक राशि में बुध की उपस्थिति के दौरान आपको बड़े भाई-बहन, चाचा और सोशल नेटवर्क से सहायता की प्राप्ति होगी। इसके अलावा, यह जातक अपने काम को लेकर जो सोचते आ रहे होंगे, अब वह सब होता चला जाएगा। हालांकि, ग्यारहवें भाव में बैठकर बुध की दृष्टि आपके शिक्षा के भाव अर्थात पांचवें भाव पर होगी और इसके फलस्वरूप, छात्रों के लिए इस समय को अनुकूल कहा जाएगा, विशेष रूप से उनके लिए जो राइटिंग, पब्लिक कम्युनिकेशन या कोई लैंग्वेज कोर्स की पढ़ाई कर रहे हैं।
बुध का वृश्चिक राशि में गोचर: सरल एवं अचूक उपाय
बुध ग्रह के लिए यज्ञ/हवन करें।
किन्नरों का आदर करें और उनका आशीर्वाद लें। साथ ही, प्रतिदिन विष्णु सहस्रनाम का जाप करें।
गरीब एवं जरूरतमंदों को हरी पत्तेदार सब्जियों का दान करें।
बुध का वृश्चिक राशि में गोचर: वैश्विक स्तर पर प्रभाव
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, यह गोचर साइकोलॉजी, रिसर्च या अन्य क्षेत्रों में नौकरी के नए अवसर लेकर आ सकता है। पश्चिमी ज्योतिष की मानें तो, बुध की वृश्चिक राशि में स्थिति को साइकोलॉजी, निवेश, जर्नलिज्म या रिसर्च आदि क्षेत्रों में नौकरी के लिए शुभ कहा जाएगा। साथ ही, लोगों में ज्ञान प्राप्त करने के प्रति रुचि बढ़ेगी।
अकादमिक, कॉमर्स एवं इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी
बुध महाराज की यह स्थिति अकादमिक, कॉमर्स और इकोनॉमिक्स आदि क्षेत्रों में करियर बनाने के लिए सहायक रहेगी।
वृश्चिक राशि में बुध के मौजूद होने से जातकों को प्रसिद्धि और समृद्धि की प्राप्ति होगी। इन जातकों को तुरंत लोकप्रियता मिलेगी।
अगर आप टेक्नोलॉजी या आईटी के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं, तो आपको अच्छे पद मिलने के योग बनेंगे।
रिसर्च एवं साइकोलॉजी
बुध का वृश्चिक राशि में गोचर को ज्यादा अच्छा नहीं कहा जा सकता है, लेकिन यह साइकोलॉजी, रिसर्च एवं विज्ञान से जुड़े लोगों को बेहतरीन परिणाम दे सकती है।
केमिकल इंडस्ट्री में काम करने जातकों को बुध गोचर शुभ फल प्रदान करेगा।
पीएचडी की पढ़ाई कर रहे छात्रों का प्रदर्शन शानदार रहेगा और वह इसमें उत्कृष्टता हासिल कर सकेंगे।
इस दौरान डिटेक्टिव एजेंसी और इससे से जुड़े लोगों को लाभ की प्राप्ति होगी।
बुध का वृश्चिक राशि में गोचर: स्टॉक मार्केट रिपोर्ट
हालांकि, बुध का वृश्चिक राशि में गोचर शेयर बाजार के लिए ज्यादा ख़ास नहीं रहने की आशंका है। बता दें कि 29 अक्टूबर 2024 को जब बुध वृश्चिक राशि में गोचर कर जाएंगे, तब आपको नवंबर के पहले हफ़्ते में बाजार में गिरावट देखने को मिल सकती है।
बुध गोचर के दौरान मिश्रित परिणाम मिलने की वजह से शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिल सकती है। हालांकि, मांग में वृद्धि होगी, लेकिन ग्राहकों की इच्छाओं में कमी आएगी।
मंदी का यह दौर 16 नवंबर तक जारी रहेगा। लेकिन, इस दौरान इन्वेस्टर्स के लिए शेयर्स को कम कीमत पर खरीदना लाभदायक रहेगा।
वृश्चिक राशि में बुध की मौजूदगी होने से जातकों की पब्लिक सेक्टर, स्टील इंडस्ट्री, शिपिंग मिल्स, ऑटोमोबाइल कंपनी, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और लेदर आदि क्षेत्रों में शेयर खरीदने में रुचि बढ़ेगी।
इस अवधि में आप बहुत कम समय में पैसा कमाने में सक्षम होंगे।
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बुध का वृश्चिक राशि में गोचर: इन खेल टूर्नामेंटों को करेगा प्रभावित
टूर्नामेंट
स्पोर्ट
तारीख़
डब्ल्यूटीए फाइनल्स
टेनिस
03 नवंबर 2024
लास वेगास ग्रैंड प्रिक्स
टेनिस
21 से 23 नवंबर, 2024
बुध के वृश्चिक राशि में गोचर को इस अवधि में होने वाले खेल टूर्नामेंट के लिए बहुत फलदायी कहा जाएगा क्योंकि वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल हैं इसलिए यह खिलाड़ियों को आक्रामक और साहस प्रदान करेंगे। ऐसे में, इस दौरान खिलाड़ियों को और इस इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को लाभ प्राप्त होगा।
हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारा यह लेख ज़रूर पसंद आया होगा। अगर ऐसा है तो आप इसे अपने अन्य शुभचिंतकों के साथ ज़रूर साझा करें। धन्यवाद!
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. क्या बुध की वृश्चिक राशि में स्थिति अच्छी होती है?
वृश्चिक राशि में बुध ग्रह की स्थिति औसत मानी जाती है।
2. बुध ग्रह के मित्र कौन हैं?
ज्योतिष में शनि और शुक्र को बुध का मित्र माना जाता है।
3. वृश्चिक राशि में बुध ग्रह की विशेषता क्या है?
बुध की वृश्चिक राशि में मौजूदगी की वजह से इन लोगों का स्वभाव चतुराई और रहस्यमयी होता है जो इन्हें इन्वेस्टिगेटर या फिर साइकेट्रिस्ट बनाने का काम करता है क्योंकि इसमें दूसरों के बारे में जानने का विशेष गुण होता है।
नवंबर में मनाए जाएंगे लक्ष्मी पूजा, भाई दूज जैसे पर्व, नोट कर लें इन प्रमुख त्योहारों की तिथियां!
नवंबर माह को अत्यंत विशेष माना जाता है फिर चाहे वह धार्मिक, ज्योतिषीय या वैज्ञानिक दृष्टि से हो। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार, यह साल का ग्यारहवां महीना होता है और इस माह की शुरुआत इशारा करती है कि हम धीरे-धीरे करके साल की समाप्ति की तरफ आगे बढ़ रहे हैं। इसी के साथ नए साल का आगाज़ होने में सिर्फ एक महीना रह जाता है। नवंबर का महीना अधिकतर लोगों को पसद होता है क्योंकि इस माह में सर्दियाँ धीमी रफ़्तार से अपने पैर पसारने लगती है। ऐसे में, अब अक्टूबर विदा लेने और नवंबर में प्रवेश करने के लिए हम तैयारहैं। हालांकि, आने वाले नए महीने के बारे में जानने के लिए हम सभी उत्सुक रहते हैं और हमारे मन में यह सवाल जरूर आते हैं कि क्या इस महीने मिलेगी मनपसंद नौकरी? कैसा होगा सेहत का हाल? पारिवारिक जीवन में रहेगी ख़ुशहाली या बढ़ेगा तनाव? इन सभी सवालों का जवाब मिलेगा आपको नवंबर 2024 के इस विशेष ब्लॉग में।
नवंबर का महीना कई मायनों से महत्वपूर्ण माना गया है क्योंकि इस माह में कई बड़े व्रत और त्योहार मनाए जाते हैं। इस महीने देवोत्थान एकादशी व्रत किया जाएगा जिसके साथ ही चातुर्मास का अंत होगा और एक बार पुनः शादी-विवाह व अन्य मांगलिक कार्यों का शुभारंभ हो जाएगा। इसके अलावा, नवंबर में कार्तिक पूर्णिमा और तुलसी विवाह जैसे त्योहार मनाए जाएंगे। साथ ही, एस्ट्रोसेज के नवंबर 2024 के इस विशेष ब्लॉग में हम आपको नवंबर में पैदा होने वाले लोगों के व्यक्तित्व के बारे में दिलचस्प तथ्यों से अवगत कराएंगे। इस महीने होने वाले ग्रह-गोचर एवं ग्रहण से जुड़ी जानकारी भी प्रदान करेंगे। तो अब बिना देर किये शुरुआत करते हैं इस लेख की और जानते हैं नवंबर 2024 के बारे में विस्तार से।
नवंबर 2024 का यह ब्लॉग क्यों है इतना ख़ास?
एस्ट्रोसेज के इस लेख में आपको नवंबर 2024 में मनाए जाने वाले प्रमुख व्रत-त्योहारों की तिथियों के बारे में जानकारी प्राप्त होगी जिससे आप उनकी तैयारियां समय रहते कर सकें।
नवंबर में जन्म लेने वाले जातकों को कौन सी बातें बनाती है सबसे हटके? इस बारे में हम आपको बताएंगे और साथ ही, इन लोगों के व्यक्तित्व से जुड़े कुछ दिलचस्प तथ्यों से रूबरू करवाएंगे।
कब-कब पड़ेंगे नवंबर 2024 में बैंक हॉलिडे?
नवंबर 2024 में कौन सा ग्रह कब-कब करेगा अपनी राशि, स्थिति और चाल में बदलाव? नवंबर में लगेगा क्या कोई ग्रहण? इसकी बारे में भी हम आपको अवगत कराएंगे।
नवंबर राशि चक्र की सभी 12 राशियों के लिए कैसा रहेगा और इस माह किस तरह के परिणाम आपको मिलेंगे? इसके बारे में भी विस्तारपूर्वक बात करेंगे।
अब हम आगे बढ़ते हैं और नज़र डालते हैं नवंबर 2024 पर आधारित इस ब्लॉग में।
नवंबर 2024 का ज्योतिषीय तथ्य और हिंदू पंचांग की गणना
नवंबर 2024 का पंचांग देखें, तो साल 2024 के ग्यारहवें महीने नवंबर का आरंभ चित्रा नक्षत्र के तहत कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि यानी कि 01 नवंबर 2024, शुक्रवार को होगा जबकि इस माह का अंत अनुराधा नक्षत्र के अंतर्गत कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि अर्थात 30 नवंबर 2024 को हो जाएगा। एक बात जो इस माह को विशेष बना रही है वह है कि नवंबर की शुरुआत से लेकर इस महीने की समाप्ति दोनों अमावस्या तिथि पर होगी। नवंबर के पंचांग को जानने के बाद अब हम आपको इस माह से जुड़े कुछ रोचक पहलू बताएंगे।
नवंबर 2024 से जुड़ी कुछ विशेष बातें
बता दे कि नवंबर शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द ‘नोवम’ अर्थात नौवां से हुई है। रोमन कैलेंडर में नवंबर का महीना नौवां हुआ करता था और उस समय यह साल के नौवें स्थान पर आता था, लेकिन उसके बाद नवंबर ग्यारहवें स्थान पर कर दिया गया। प्राचीन रोमन कैलेंडर में सिर्फ 10 महीने हुआ करते थे और नए वर्ष की शुरुआत 01 मार्च से होती थी। इसके बाद 153 ईसा पूर्व में वर्ष का शुभारंभ 01 जनवरी से माना गया।
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नवंबर में जन्म लेने वाले लोगों का व्यक्तित्व
एक वर्ष में कुल बारह महीने आते हैं और हर महीने की अपनी विशेषता और महत्व होता है जो इन सभी महीनों को एक-दूसरे से अलग बनाता है। इस प्रकार, नवंबर माह को एक अलग दर्जा प्राप्त है और ऐसे में, जिन लोगों का जन्मदिन इस महीने में आता है उनके लिए नवंबर का महीना बेहद खास होता है। क्या आप जानते हैं कि कैसा होता है नवंबर में पैदा होने वाले लोगों का स्वभाव? कौन सी खूबियां मौजूद होती हैं इनके व्यक्तित्व में? अगर नहीं, तो चलिए आपको रूबरू करवाते हैं नवंबर में जन्मे जातकों के व्यक्तित्व की कुछ रोचक बातों से।
सबसे पहले हम बात करेंगे नवंबर बोर्न लोगों के व्यक्तित्व की, तो सामान्य रूप से इन लोगों का व्यक्तित्व बहुत आकर्षक होता है और यह जातक महत्वाकांक्षी होने के साथ-साथ दृढ़ निश्चयी होते हैं। इनका चरित्र काफी मजबूत होता है इसलिए यह किसी से कम ही डरते हैं। इनके अंदर साहस कूट-कूट कर भरा होता है और इस वजह से यह अपने जीवन में आने वाली हर समस्या का सामना डटकर करते हैं।
नवंबर में जन्मे जातकों का आशावादी दृष्टिकोण इन्हें जीवन में आने वाली समस्याओं और विपत्तियों का सामना करने के लिए प्रेरित करती हैं। इन लोगों का सारा ध्यान अपने काम पर केंद्रित रहता है इसलिए जब तक इनके काम पूरे नहीं हो जाते हैं, तब तक यह शांति से बैठेते नहीं हैं। नवंबर बोर्न लोगों को अपने जीवन में प्राइवेसी बहुत पसंद होती है और इस वजह से अपनी चीजों को सीक्रेट बनाकर रखते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, अपने परिवार और दोस्तों से भी यह अपने मन की बातें या चीजें छुपाने के प्रयास में रहते हैं। अपने इस स्वभाव के कारण यह आसानी से दूसरों के सामने नहीं खुलते हैं।
नवंबर माह के अंतर्गत पैदा होने वाले जातक जीवन की कठिन से कठिन परिस्थितियों को अपनी बुद्धि के बल पर संभालने में माहिर होते हैं। अगर कभी इन्हें हार का सामना करना भी पड़ता है, तो उसके बाद यह स्थितियों का पुनः आकलन करते हैं और फिर उसका समाधान निकालने की कोशिश करते हैं। यह अपनी लाइफ में सफल होने के साथ-साथ दूसरों को भी सफल होने के प्रेरित करते हैं और उनकी मदद करते हैं।
ऐसे जातक जिनका जन्मदिन नवंबर में आता है, वह बहुत जिज्ञासु प्रवृत्ति के होते हैं और इस वजह से हर चीज को जल्दी से सीखने में सक्षम होते हैं। यह जातक अपनी तेज़ बुद्धि का इस्तेमाल करके विपरीत हालातों से भी बाहर निकल आते हैं और हर परिस्थिति को अपने पक्ष में करने का गुण इनके पास होने के कारण कई बार ये लोगों को भी नियंत्रण करने की कोशिश करते हैं जो इनके व्यक्तित्व का एक अवगुण होता है।
हालांकि, नवंबर में जन्मे जातक आत्मविश्वासी होते हैं और बेहद जिद्दी स्वभाव के होते हैं। जीवन में आगे बढ़ने के लिए जोखिम लेने के लिए तैयार रहते हैं। ऐसे लोग अपनी कड़ी मेहनत और हुनर के दम पर अपने सपनों को साकार करते हैं, परन्तु इन्हें दूसरों से राय लेना रास नहीं आता है और जब कोई इनको सलाह देता है, तो यह उसे नज़रअंदाज़ कर देते हैं।
प्रेम जीवन और रिश्तों की बात करें, तो ज्योतिष कहता है कि नवंबर में पैदा होने वाले अपने रिश्तों के प्रति वफादार होते हैं और यह अपने हर रिश्ते को पूरी ईमानदारी एवं समर्पण के साथ निभाते हैं। अगर यह जातक किसी से प्रेम करते हैं, तो उन्हें कभी धोखा नहीं देते हैं। यह लोग एक बहुत अच्छे दोस्त माने जाते हैं और कभी अपने दोस्तों के साथ विश्वासघात नहीं करते हैं।
नवंबर में जन्म लेने वालों के लिए भाग्यशाली अंक: 03, 01, 07
नवंबर में जन्म लेने वालों के लिए भाग्यशाली रंग: गुलाबी, सफ़ेद और चॉकलेटी
नवंबर में जन्म लेने वालों के लिए शुभ दिन: गुरुवार, मंगलवार
नवंबर में जन्म लेने वालों के लिए भाग्यशाली रत्न: मोती, मूनस्टोन
नवंबर में जन्म लेने वालों के लिए उपाय: एक कटोरी में तेल लेकर उसमें अपना चेहरे देखें और फिर इस तेल को मंदिर में दान कर दें। ऐसा करने से जीवन की समस्याएं दूर होती हैं।
नवंबर के माह में पैदा होने वाले लोगों के व्यक्तित्व के बारे में रोचक एवं अज्ञात पहलुओं को जानने के बाद अब हम आपको इस महीने में पड़ने वाले बैंक अवकाशों की तिथियां प्रदान करेंगे।
सभी राज्य सिवाय आंध्र प्रदेश, गोवा, कर्नाटक, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और तेलंगाना
01 नवंबर 2024 (शुक्रवार)
हरियाणा दिवस
हरियाणा
01 नवंबर 2024 (शुक्रवार)
कन्नड़ राज्योत्सव
कर्नाटक
01 नवंबर 2024 (शुक्रवार)
कूट
मणिपुर
01 नवंबर 2024 (शुक्रवार)
पुडुचेरी मुक्ति दिवस
पांडिचेरी
02 नवंबर 2024 (शनिवार)
दिवाली/दीपावली
दमन और दिउ, हरियाणा, कर्नाटक, राजस्थान, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश
02 नवंबर 2024 (शनिवार)
विक्रम संवत नया साल
गुजरात
03 नवंबर 2024 (रविवार)
भाई दूज
गुजरात, राजस्थान, सिक्किम, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश
07 नवंबर 2024 (गुरुवार)
छठ पूजा
असम, बिहार, छत्तीसगढ़ एवं झारखण्ड
15 नवंबर 2024 (शुक्रवार)
गुरु नानक जयंती
सभी राज्य सिवाय आंध्र प्रदेश, बिहार, दादरा और नागर हवेली, दमन और दिउ, गोवा, कर्नाटक, केरल, मणिपुर,मेघालया, उड़ीसा, पांडिचेरी, सिक्किम, तमिलनाडुऔर त्रिपुरा
15 नवंबर 2024 (शुक्रवार)
कार्तिक पूर्णिमा
उड़ीसा और तेलंगाना
18 नवंबर 2024 (सोमवार)
कनकदास जयंती
कर्नाटक
22 नवंबर 2024 (शुक्रवार)
ल्हाबब ड्यूंचन
सिक्किम
23 नवंबर 2024 (शनिवार)
सेंग कुट स्नेम
मेघालय
नवंबर 2024 में पड़ने वाले प्रमुख व्रत एवं त्योहार
आइए नज़र डालते हैं नवंबर 2024 में मनाये जाने वाले प्रमुख एवं बड़े व्रत-पर्वों की तिथियों पर।
तिथि
दिन
पर्व/ त्योहार
01 नवंबर 2024
शुक्रवार
दिवाली, कार्तिक अमावस्या
02 नवंबर 2024
शनिवार
गोवर्धन पूजा
03 नवंबर 2024
रविवार
भाई दूज
07 नवंबर 2024
गुरुवार
छठ पूजा
12 नवंबर 2024
मंगलवार
देवुत्थान एकादशी
13 नवंबर 2024
बुधवार
प्रदोष व्रत (शुक्ल)
15 नवंबर 2024
शुक्रवार
कार्तिक पूर्णिमा व्रत
16 नवंबर 2024
शनिवार
वृश्चिक संक्रांति
18 नवंबर 2024
सोमवार
संकष्टी चतुर्थी
26 नवंबर 2024
मंगलवार
उत्पन्ना एकादशी
28 नवंबर 2024
गुरुवार
प्रदोष व्रत (कृष्ण)
29 नवंबर 2024
शुक्रवार
मासिक शिवरात्रि
नवंबर 2024 में विवाह मुहूर्त
जो लोग शादी एवं विवाह के लिए मुहूर्त की तलाश में हैं, तो हम यहाँ आपको नवंबर 2024 में विवाह के लिए शुभ तिथियां एवं मुहूर्त प्रदान कर रहे हैं जो कि इस प्रकार हैं:
तारीख
मुहूर्त का समय
नक्षत्र
तिथि
12 नवंबर 2024, मंगलवार
शाम 04 बजकर 04 मिनट से शाम 07 बजकर 10 मिनट तक
उत्तराभाद्रपद
द्वादशी
13 नवंबर 2024, बुधवार
दोपहर 03 बजकर 26 मिनट से रात 09 बजकर 48 मिनट तक
रेवती
त्रयोदशी
16 नवंबर 2024, शनिवार
रात 11 बजकर 48 मिनट से 17 नवंबर की सुबह 06 बजकर 45 मिनट तक
रोहिणी
द्वितीया
17 नवंबर 2024, रविवार
सुबह 06 बजकर 45 मिनट से 18 नवंबर की सुबह 06 बजकर 46 मिनट तक
रोहिणी, मृगशिरा
द्वितीया, तृतीया
18 नवंबर 2024, सोमवार
सुबह 06 बजकर 46 मिनट से सुबह 07 बजकर 56 मिनट तक
मृगशिरा
तृतीया
22 नवंबर 2024, शुक्रवार
रात 11 बजकर 44 मिनट से 23 नवंबर की सुबह 06 बजकर 50 मिनट तक
मघा
अष्टमी
23 नवंबर 2024, शनिवार
सुबह 06 बजकर 50 मिनट से रात 11 बजकर 42 मिनट तक
मघा
अष्टमी
25 नवंबर 2024, सोमवार
मध्यरात्रि 01 बजकर 01 मिनट से 26 नवंबर की सुबह 06 बजकर 53 मिनट तक
हस्त
एकादशी
26 नवंबर 2024, मंगलवार
सुबह 06 बजकर 53 मिनट से 27 नवंबर की सुबह 04 बजकर 35 मिनट तक
हस्त
एकादशी
28 नवंबर 2024, गुरुवार
सुबह 07 बजकर 36 मिनट से 26 नवंबर की सुबह 06 बजकर 55 मिनट तक
अगर हम बात करें नवंबर 2024 में होने वाले ग्रहण और गोचर की तो, इस महीने में दो बड़े ग्रहों का गोचर होने जा रहा है जबकि दो ग्रहों की चाल में बदलाव देखने को मिलेगा और इसमें एक ग्रह दो बार अपनी स्थिति में परिवर्तन करेगा। बता दें कि नवंबर 2024 में कोई ग्रहण नहीं लगेगा। तो आइए बिना देर किये जानते हैं इन गोचरों की तिथियों एवं समय के बारे में।
शुक्र का धनु राशि में गोचर (07 नवंबर 2024): वैदिक ज्योतिष में शुक्र को स्त्री ग्रह कहा जाता है जो प्रेम एवं सुंदरता के कारक माने गए हैं। शुक्र महाराज 07 नवंबर 2024 की देर रात 03 बजकर 21 मिनट पर गुरु ग्रह की राशि धनु में प्रवेश कर जाएंगे।
शनि कुंभ राशि में मार्गी (15 नवंबर 2024): न्याय एवं कर्म के दाता शनि ग्रह काफी समय तक वक्री चाल चलने के बाद 15 नवंबर 2024 की शाम 05 बजकर 09 मिनट पर अपने ही राशि कुंभ में मार्गी हो जाएंगे।
सूर्य का वृश्चिक राशि में गोचर (16 नवंबर 2024): वैदिक ज्योतिष में सूर्य को नवग्रहों में प्रमुख ग्रह माना जाता है और यह आत्मा के कारक ग्रह कहे गए हैं। अब यह 16 नवंबर 2024 की सुबह 07 बजकर 16 मिनट पर वृश्चिक राशि में गोचर करने जा रहे हैं।
बुध वृश्चिक राशि में वक्री (26 नवंबर 2024): बुद्धि, वाणी, तर्क और संचार कौशल के प्रमुख बुध ग्रह 26 नवंबर 2024 की सुबह 07 बजकर 39 मिनट पर वृश्चिक राशि में रहते हुए वक्री होने जा रहे हैं। ऐसे में, बुध की वक्री चाल सभी राशियों को प्रभावित करेगी।
बुध वृश्चिक राशि में अस्त (30 नवंबर 2024): ज्योतिष में ग्रहों के राजकुमार के नाम से विख्यात बुध ग्रह एक बार फिर वृश्चिक राशि में रहते हुए 30 नवंबर 2024 के दिन रात 08 बजकर 19 मिनट पर अस्त हो जाएंगे।
नवंबर में पड़ने वाले व्रत एवं त्योहारों का धार्मिक महत्व
दिवाली (01 नवंबर 2024, शुक्रवार): दिवाली को हिंदू धर्म का सबसे बड़ा एवं महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है जो हर साल कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है। यह पर्व लगातार पांच दिनों तक मनाया जाता है और धनतेरस से शुरू होकर भैया दूज पर समाप्त होता है। इस त्योहार को भारत समेत दुनियाभर में लोग बहुत धूमधाम से मनाते हैं। दिवाली को दीपावली और दीपोत्सव भी कहा जाता है। इस दिन धन की देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है।
कार्तिक अमावस्या (01 नवंबर 2024, शुक्रवार): प्रत्येक वर्ष दिवाली का त्योहार कार्तिक मास की अमावस्या तिथि पर मनाया जाता है। यह दिन पितरों का तर्पण और दान-पुण्य आदि धार्मिक कार्यों को करने के लिए श्रेष्ठ माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत के शांतिपर्व में साक्षात् स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने कार्तिक अमावस्या के दिन का महत्व बताते हुए कहा था कि ‘यह मेरा प्रिय दिन है और इस दिन मेरी वंदना से मनुष्य के समस्त ग्रह दोष दूर हो जाएंगे। कार्तिक अमावस्या की रात को दीपक जलाने की परंपरा है जिसे दीपावली के नाम से जाना जाता है।
गोवर्धन पूजा (02 नवंबर 2024, शनिवार): गोवर्धन पूजा हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व माना है जो कि भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है। यह त्योहार प्रकृति और मानव के संबंध को दर्शाता है और इसे अन्नकूट के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, गोवर्धन का पर्व हर साल कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है और यह दिवाली के ठीक अगले दिन मनाये जाने का विधान है। गोवर्धन पूजा की एक अलग ही रौनक मथुरा, वृंदावन, नंदगांव, गोकुल, बरसाना आदि में देखने को मिलती है।
भाई दूज (03 नवंबर 2024, रविवार): भाई दूज का पर्व भाई-बहन के पवित्र बंधन और प्रेम का प्रतीक माना गया है। इस पर्व को भैया दूज, भाई टीका, यम द्वितीया, भ्रातृ द्वितीया के नाम जाना जाता है। पंचांग के अनुसार, हर साल भाई दूज को कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। भैया दूज का त्योहार दीपावली के दूसरे दिन आता है और इस अवसर पर हर बहन अपने भाई का तिलक करके उसकी लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करती है। इसके बाद, भाई अपनी बहन को शगुन के रूप में उपहार देता है।
छठ पूजा (7 नवंबर 2024, गुरुवार): छठ पर्व को भारत के सबसे प्रमुख एवं महत्वपूर्ण पर्वों में से एक माना जाता है जो कि छठ पूजा या सूर्य षष्ठी के नाम से जाना जाता है। पंचांग के अनुसार, छठ पूजा एक लोक पर्व है और यह हर साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर की जाती है। छठ पूजा को दिवाली के 6 दिन बाद किया जाता है और इस त्योहार को विशेष रूप से उत्तर भारत के राज्यों बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन भगवान सूर्य देव और छठी मैया की पूजा करने की परंपरा है।
देवउठनी एकादशी (12 नवंबर 2024, मंगलवार): देवउठनी एकादशी को हिन्दुओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इस दिन श्रीहरि विष्णु के निद्रा से जागने के साथ शुभ एवं मांगलिक कार्यों की पुनः शुरुआत हो जाती है। पंचांग के अनुसार, हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी कहते हैं। यह एकादशी देवोत्थान, देवउठनी या प्रबोधिनी एकादशी के नाम से भी जानी जाती है। देवोत्थान एकादशी दीपावली के बाद आती है।
प्रदोष व्रत (कृष्ण) (13 नवंबर 2024, बुधवार): सनातनधर्म में किये जाने वाले व्रतों में से एक प्रदोष व्रत है जो कि पंचांग के अनुसार, हर माह की त्रयोदशी तिथि पर करने का विधान है। आपको बता दें कि हर महीने में प्रदोष व्रत दो बार आता है। इसी क्रम में, सोमवार के दिन पड़ने वाले व्रत को सोम प्रदोष व्रत, मंगलवार के दिन आने वाले व्रत को भौम प्रदोष और जो व्रत शनिवार को पड़ता है, उसे शनि प्रदोष व्रत कहते हैं। हर माह में आने वाला यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है।
कार्तिक पूर्णिमा (15 नवंबर 2024,शुक्रवार): हिंदू धर्म में कार्तिक शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा कहा जाता है। मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था इसलिए इसे ‘त्रिपुरी पूर्णिमा’ के नाम से भी जाना जाता है। कार्तिक पूर्णिमा पर कृतिका नक्षत्र होने पर इसे पूर्णिमा को ‘महाकार्तिकी’ कहते हैं और वहीं, इस दिन भरणी नक्षत्र होने पर कार्तिक पूर्णिमा से मिलने वाले शुभ फलों में वृद्धि हो जाती है। धर्मग्रंथों के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा की संध्याकाल में जगत के पालनहार भगवान विष्णु मत्स्यावतार में अवतरित हुए थे।
वृश्चिक संक्रांति (16 नवंबर 2024, शनिवार): वैदिक ज्योतिष में सूर्य को “राजा” का दर्जा प्राप्त है जो कि एक माह के अंतराल पर एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं। जब कभी भी सूर्य अपनी राशि में परिवर्तन करते हैं, तो उस घटना को संक्रांति कहा जाता है। अब सूर्य देव 16 नवंबर 2024 को तुला राशि से वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे इसलिए इस संक्रांति को वृश्चिक संक्रांति के नाम से जाना जाएगा। हालांकि, सूर्य हर महीने अपना राशि परिवर्तन करते हैं और इस प्रकार, एक वर्ष में कुल 12 संक्रांति आती हैं। सूर्य गोचर की अवधि को दान-पुण्य तथा धार्मिक कार्यों के लिए शुभ माना जाता है।
संकष्टी चतुर्थी (18 नवंबर 2024, सोमवार): हिंदू धर्म मेंसंकष्टी चतुर्थी की गणना प्रमुख व्रतों में होती है। यह व्रत हर महीने की कृष्ण और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर किया जाता है। संकष्टी चतुर्थी व्रत के संबंध में मान्यता है कि जो इस व्रत को सच्चे हृदय से करता है, भगवान गणेश उनके जीवन में पैदा होने वाली सभी समस्याओं और बाधाओं का अंत कर देते हैं इसलिए श्रीगणेश की पूजा संकष्टी चतुर्थी पर पूरी आस्था और विधिपूर्वक की जाती है।
उत्पन्ना एकादशी (26 नवंबर 2024, मंगलवार): साल भर में आने वाली सभी एकादशी तिथियों में से उत्पन्ना एकादशी को बहुत शुभ माना जाता है। कहते हैं कि उत्पन्ना एकादशी के दिन एकादशी माता का जन्म हुआ था इसलिए इसे उत्पन्ना एकादशी के नाम से जाना जाता है। देवी एकादशी को भगवान विष्णु का शक्ति स्वरूप माना गया है। मान्यता है कि जो व्यक्ति उत्पन्ना एकादशी का व्रत रखता है, उसको पूर्व जन्म के बुरे कर्मों के साथ-साथ वर्तमान जन्म के पापों से भी मुक्ति मिल जाती है। साथ ही, इस व्रत को बेहद कल्याणकारी कहा गया है।
मासिक शिवरात्रि (29 नवंबर 2024, शुक्रवार): मासिक शिवरात्रि भगवान शिव का एक पावन व्रत है। पंचांग के अनुसार, मासिक शिवरात्रि का व्रत कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को किया जाता है। यह दिन भोलेशंकर की कृपा प्राप्ति के लिए श्रेष्ठ होता है। हिन्दुओं के लिए मासिक शिवरात्रि व्रत महत्वपूर्ण माना गया है जो एक वर्ष में 12 बार आती है। इस व्रत को करने से भक्त के जीवन में उत्पन्न सभी प्रकार की समस्याओं का समाधान हो जाता है और आपकी समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति होती हैं।
मेष राशि वाले करियर में अच्छा लाभ कमाने में सक्षम होंगे। इस दौरान आपका सारा ध्यान नौकरी में तरक्की और पैसा कमाने पर केंद्रित होगा।
धन से जुड़े मामलों के लिए नवंबर थोड़ा कठिन रह सकता है क्योंकि आपकी आर्थिक स्थिति कमज़ोर रह सकती है और आपके खर्चे भी बढ़ सकते हैं।
मेष राशि वालों का वैवाहिक जीवन इस महीने ज्यादा अच्छा नहीं रहने की आशंका है।
वहीं, इस राशि वालों को प्रेम जीवन से जुड़े फैसले लेने में देरी का सामना करना पड़ सकता है।
राहु-केतु की वजह से आपका पारिवारिक जीवन उतार-चढ़ाव भरा रह सकता है क्योंकि यह आपके घर-परिवार की खुशियों को प्रभावित कर सकते हैं।
इन जातकों का स्वास्थ्य नवंबर के दूसरे भाग में बेहतर रहेगा क्योंकि इस माह के शुरुआती दिनों में आपको पाचन से जुड़ी समस्याएं परेशान कर सकती हैं।
उपाय: शनिवार के दिन ‘ॐ मंदाय नमः’ का 17 बार जाप करें।
वृषभ राशि
वृषभ राशि वालों की स्थिति करियर में अच्छी बनी रहेगी। ऐसे में, आप वर्तमान नौकरी में बने रहेंगे और काम में कड़ी मेहनत करके प्रसन्न रहेंगे।
अगर आप व्यापार करते हैं तो नवंबर में आपका बिज़नेस अच्छा चलेगा। इस दौरान कारोबार में आप अपनी चमक बिखरते हुए नज़र आएंगे।
आपके आर्थिक जीवन के लिए नवंबर औसत रहेगा। इस अवधि में आपके खर्चों में वृद्धि और बचत में कमी देखने को मिल सकती है। साथ ही, आपको सावधान रहना होगा।
छात्रों का प्रदर्शन पढ़ाई में अच्छा रहेगा और पढ़ाई के सिलसिले में आपके विदेश जाने के योग बनेंगे।
इन जातकों का पारिवारिक जीवन अशांत रहने की आशंका है और आपको रिश्ते में तनाव का सामना करना पड़ सकता है।
नवंबर 2024 वृषभ राशि वालों को प्रेम जीवन में मनचाही सफलता देने में पीछे रह सकता है और आपके मन में असुरक्षा की भावना जन्म ले सकती है।
उपाय: गुरुवारके दिन गुरु ग्रह के लिए यज्ञ/हवन करें।
मिथुन राशि
मिथुन राशि के जातकों को नौकरी के संबंध में सकारात्मक परिणाम प्राप्त करने के अच्छे अवसर मिलेंगे।
इस महीने आपका आर्थिक जीवन ज्यादा खास नहीं रहने की आशंका है। नवंबर में आपकी आय में कमी आएगी और आप ज्यादा पैसों की बचत भी नहीं कर सकेंगे।
नवंबर में जो जातक अपने प्रेमी/प्रेमिका के साथ विवाह करना चाहते हैं, वह माह के दूसरे भाग में इस दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।
इस माह में आपके रिश्ते परिवार वालों के साथ थोड़े नाज़ुक रह सकते हैं क्योंकि तालमेल की कमी की वजह से परिवार से ख़ुशियाँ नदारद रह सकती हैं।
मिथुन राशि वालों को सेहत के प्रति सतर्क रहना होगा। नवंबर में आपको गले में संक्रमण और पाचन से जुड़ीं समस्याएं परेशान कर सकती हैं।
उपाय: प्रतिदिन विष्णु सहस्त्रनाम का जाप करें।
कर्क राशि
कर्क राशि वालों को यह माह करियर में अच्छे परिणाम देने में पीछे रह सकते हैं। इस दौरान काम में अपनी पहचान बनाना आपके लिए आसान नहीं रहेगा और आपको खूब मेहनत करनी पड़ेगी।
इस राशि के व्यापार करने वालों को नवंबर का पहला भाग हानि करवा सकता है जबकि महीने के दूसरे भाग में व्यापार में सुधार आएगा।
आर्थिक जीवन के लिए नवंबर माह अच्छा रहेगा और इस दौरान धन का प्रवाह अच्छा बना रहेगा। ऐसे में, आपको अच्छी मात्रा में पैसा प्राप्त होगा।
जिन जातकों का विवाह हो चुका है, उनका वैवाहिक जीवन नवंबर में शानदार रहेगा और आप संतुष्ट नज़र आएंगे।
स्वास्थ्य की दृष्टि से, कर्क राशि वालों की सेहत इस माह अच्छी बनी रहेगी जिसकी वजह आपके भीतर की ऊर्जा और उत्साह होगा।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1. नवंबर 2024 में मासिक शिवरात्रि कब है?
उत्तर 1. इस महीने मासिक शिवरात्रि 29 नवंबर 2024, शुक्रवार के दिन पड़ रही है।
प्रश्न 2. क्या 01 नवंबर को अमावस्या है?
उत्तर 2. हाँ, 01 नवंबर 2024 को कार्तिक अमावस्या है और इस दिन दिवाली का पर्व मनाया जाएगा।
प्रश्न 3. नवंबर में भाई दूज कब है?
उत्तर 3. इस महीने भाई दूज का त्योहार 03 नवंबर 2024 रविवार के दिन पड़ेगा।
प्रश्न 4. 05 नवंबर को कौन सा दिन है?
उत्तर 4. 05 नवंबर 2024 को मंगलवार का दिन पड़ रहा है।
बेहद शुभ योग में पड़ेगी अहोई अष्टमी, तारों को देखने के बाद तोड़ा जाता है व्रत!
सनातन धर्म में अहोई अष्टमी एक महत्वपूर्ण त्योहार है। इस व्रत को माताएं अपने बच्चों की तरक्की और दीर्घायु के लिए रखती है। इस दिन देवी अहोई या अहोई माता का आशीर्वाद पाने के लिए पूजा व व्रत रखा जाता है। इसे माताएं बड़ी श्रद्धा और प्रेम से मनाती हैं। अहोई अष्टमी हिंदू कैलेंडर के अनुसार, कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आती है यानी करवा चौथ के चौथे दिन और दीपावली से आठ दिन पहले किया जाता है। यह दिन अत्यधिक महत्व रखता है क्योंकि माताएं देवी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विशेष अनुष्ठान, उपवास और प्रार्थना करती हैं। इस दिन अहोई माता के साथ-साथ स्याही माता की भी पूजा का विधान है। यह त्योहार विशेष रूप से उत्तर भारत में मनाया जाता है।
ख़ास बात यह है कि इस बार बेहद ख़ास योग में अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाएगा। तो आइए आगे बढ़ते हैं और एस्ट्रोसेज के इस विशेष ब्लॉग में हम जानते हैं साल 2024 में अहोई अष्टमी का व्रत कब रखा जाएगा, किस दिन कौन से योग बन रहे हैं व इस योग में कौन से उपाय आपको करने चाहिए।
हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाता है और इस साल यह व्रत 24 अक्टूबर 2024, गुरुवार के दिन किया जाएगा।
अष्टमी तिथि प्रारम्भ: 24 अक्टूबर 2024, गुरुवार की मध्यरात्रि 01 बजकर 21 मिनट से
अष्टमी तिथि समाप्त: 25 अक्टूबर 2024, शुक्रवार की मध्यरात्रि 02 बजकर 01 मिनट तक
अहोई अष्टमी पूजा मुहूर्त: 24 अक्टूबर 2024, गुरुवार की शाम 05 बजकर 50 मिनट से शाम 07 बजकर 06 मिनट तक
सितारों को देखने का समय: शाम 06 बजकर 18 मिनट पर
सूर्योदय का समय: सुबह 06 बजकर 27 मिनट
सूर्यास्त का समय: शाम 05 बजकर 43 मिनट
अहोई अष्टमी के दिन चंद्रोदय मुहूर्त: शाम 22 बजकर 52 मिनट
अहोई अष्टमी के दिन चन्द्रास्त का समय: मध्य रात्रि 12 बजकर 37 मिनट
ये शुभ योग बढ़ाएंगे अहोई अष्टमी 2024 का महत्व
साल 2024 में अहोई अष्टमी का व्रत बेहद शुभ संयोगों में किया जाएगा जिससे इस व्रत के परिणामों में कई गुना वृद्धि होगी। अब हम जानेंगे अहोई अष्टमी पर बनने वाले शुभ योगों के बारे में।
इस दिन सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है। सिद्धि योग बेहद शुभ योग है और यह योग निश्चित नक्षत्र के संयोग से बनता है। इस योग में पूजा करने से व्यक्ति की हर मनोकामना पूरी होती है व व्यक्ति को लाभ प्राप्त होता है।
अहोई अष्टमी का सनातन धर्म में विशेष महत्व है, खासकर महिलाओं के लिए। यह व्रत संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य के लिए किया जाता है। इस व्रत का मुख्य उद्देश्य संतान की लंबी आयु, समृद्धि और सुख-शांति की कामना करना है। माना जाता है कि जो महिलाएं इस व्रत को पूरे विधि-विधान से करती हैं, उनकी संतान को दीर्घायु प्राप्त होती है और वे जीवन में अपार सफलता प्राप्त करते हैं।
अहोई अष्टमी का व्रत निर्जला रखा जाता है, यानी व्रत रखने वाली महिलाएं दिनभर बिना जल और अन्न के रहती हैं। सूर्यास्त के बाद तारों को देखकर व्रत का पारण करती है। जिन महिलाओं की संतान नहीं होती है, उनके लिए भी अहोई अष्टमी का व्रत विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसी महिलाएं अहोई माता की आराधना कर संतान प्राप्ति की प्रार्थना करती हैं। मान्यता है कि इस व्रत को करने से उन्हें संतान सुख की प्राप्ति हो सकती है।
अहोई अष्टमी पूजा विधि
अहोई अष्टमी की पूजा कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को की जाती है। आइए जानते है पूजा की आसान विधि।
सबसे पहले व्रती महिलाओं को सूर्योदय से पहले उठकर घर के सभी कार्य कर लेने चाहिए। फिर स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए।
इसके बाद संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हुए व्रत का संकल्प लें।
पूजा स्थल पर अहोई माता का चित्र बनाएं या बाजार से अहोई माता का चित्र या कागज लाए।
बता दें इस दिन दीवार पर अहोई माता की आकृति बनाई जाती है जिसमें साही और उनके साथ के प्रतीक चिन्ह जैसे चांद, तारे आदि बनाए जाते हैं।
पूजा स्थल पर मिट्टी या तांबे का एक कलश स्थापित करें। कलश को जल से भरकर उसके ऊपर एक नारियल रखें।
कलश के साथ एक दीया जलाएं, जो पूरी पूजा के दौरान जलता रहे।
पूजा के लिए चावल, रोली, कुमकुम, हल्दी, सुपारी, मिठाई, धूप, दीप, कच्चा दूध, और फूल सामग्री शामिल करें।
अहोई माता को विशेष रूप से दूध, चावल और मिठाई का भोग चढ़ाएं। इसके बाद आरती करें।
साथ ही, व्रती महिलाएं धागा माता के सामने बांधती हैं और संतान की कुशलता की प्रार्थना करती हैं।
पूजा के बाद महिलाएं सूर्यास्त के बाद तारों को देखकर उन्हें जल अर्पित करती हैं।
तारा दर्शन के बाद व्रत का पारण किया जाता है। कुछ स्थानों पर चंद्रमा के दर्शन करने के बाद ही व्रत खोला जाता है, लेकिन आमतौर पर तारों का दर्शन मुख्य रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।
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अहोई अष्टमी की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में एक गांव में एक महिला रहती थी, जिसके सात बेटे थे। दीपावली से कुछ दिन पहले वह जंगल में मिट्टी खोदने गई, जिससे घर की सजावट के लिए मिट्टी लाई जा सके। मिट्टी खोदते समय गलती से उसकी कुदाल से एक साही के बच्चे की मृत्यु हो गई। उस महिला को यह बात पता नहीं चली, लेकिन उस दिन के बाद उसके सभी सात बेटे की एक-एक करके मृत्यु हो गई।
संतानों की मृत्यु से दुखी होकर वह महिला गांव के बुजुर्गों के पास गई और अपनी समस्या बताई। बुजुर्गों ने उसे सलाह दी कि उसने गलती से साही के बच्चे को मारा है, और यह सब उसी का परिणाम है। उन्होंने उसे यह उपाय सुझाया कि वह अहोई माता की आराधना करें और सच्चे मन से व्रत रखें।
महिला ने बुजुर्गों की सलाह मानते हुए अहोई माता का व्रत करना शुरू किया। उसने कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को व्रत रखा और पूरे श्रद्धा भाव से अहोई माता की पूजा की। पूजा के दौरान वह साही और उसकी संतान का चित्र दीवार पर बनाकर उनकी पूजा करती थी और उनसे क्षमा मांगती थी। अहोई माता उसकी भक्ति से प्रसन्न हो गईं और उसे आशीर्वाद दिया कि उसकी संतानें पुनः जीवित हो जाएंगी। इसके बाद उस महिला के सभी बेटे वापस जीवित हो गए और उसका घर फिर से खुशियों की लहर दौड़ गई। तब से ही यह मान्यता बन गई कि अहोई अष्टमी का व्रत रखने से संतान की लंबी आयु और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
अहोई अष्टमी की पूजा के साथ कुछ खास उपाय आपको बताए जा रहे हैं, जो व्रती माताओं के लिए अत्यंत लाभकारी माने जाते हैं। आइए जानते हैं इन उपायों के बारे में।
गाय को भोजन कराएं
अहोई अष्टमी के दिन गाय को भोजन कराने से विशेष फल की प्राप्त होती है। गाय को गुड़ या हरा चारा खिलाने से संतान की भलाई के लिए शुभफल की प्राप्ति होती है। यह उपाय संतान को दीर्घायु और बेहतर स्वास्थ्य प्रदान करने में मदद करता है।
धन-धान्य के लिए उपाय
अहोई अष्टमी के दिन शुद्ध चांदी की अहोई बनवाकर उसकी पूजा करने से सर्व सिद्धि की प्राप्ति होती है। यह उपाय धन-धान्य और संतान की उन्नति के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।
परेशानियों को दूर करने के लिए
अहोई अष्टमी के दिन संतान की भलाई के लिए ध्यान और प्रार्थना करना अत्यधिक लाभकारी होता है। यदि आपके बच्चे किसी कठिनाई में हैं, तो पूरी श्रद्धा से अहोई माता से उनकी रक्षा के लिए प्रार्थना करें और ध्यान करें।
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गरीब व जरूरतमंदों को दान करें
इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और धन का दान करना भी विशेष फलदायी होता है। अहोई अष्टमी पर किया गया दान पुण्य प्राप्ति और संतान के अच्छे भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
तांबे के सिक्का से करें उपाय
अहोई अष्टमी पर तांबे का एक सिक्का लें और उस पर हल्दी लगाकर उसे धागे में बांध लें। पूजा के समय इस सिक्के को अहोई माता के चरणों में रखें। पूजा के बाद इसे संतान की भलाई के लिए अपने गले में पहन लें।
इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1- क्या अहोई अष्टमी व्रत बिना पानी के किया जाता है?
अहोई अष्टमी व्रत की प्रक्रिया में भोजन और पानी का सेवन शामिल नहीं है।
2- क्या अहोई अष्टमी के दिन सूर्योदय से पहले भोजन किया जा सकता है?
हां, अहोई अष्टमी का व्रत रखने वाली महिलाएं पर्व के दिन सूर्योदय से पहले भोजन कर सकती हैं।
3- अहोई अष्टमी पर किस देवी की पूजा की जाती है?
अहोई अष्टमी के व्रत में देवी अहोई की पूजा की जाती है।
4- अहोई अष्टमी का व्रत इस साल कब रखा जाएगा?
अहोई अष्टमी का व्रत 24 अक्टूबर गुरुवार के दिन रखा जाएगा।
अक्टूबर में ग्रहों के राजकुमार होने जा रहे हैं उदित- तुला समेत इन राशियों के शुरू होंगे अच्छे दिन!
बुध अर्थात बुद्धि का ग्रह जल्द ही तुला राशि में उदित होने जा रहा है। बुध का यह अहम परिवर्तन 22 अक्टूबर के दिन होगा। आज के हमारे खास ब्लॉग में हम इसी विषय पर बात करेंगे साथ ही जानेंगे तुला राशि में उदित होकर बुध किन राशियों का भाग्य चमकाएंगे और किन राशियों को इससे परेशानी उठानी पड़ सकती है। इसके अलावा जानेंगे बुध उदय के नकारात्मक प्रभावों को दूर करने के ज्योतिषीय उपायों की भी जानकारी।
आगे बढ़ने से पहले बुध ग्रह की बात करें तो ज्योतिष में बुध को बुद्धि, तर्क, गणित, व्यापार, व्यवसाय, आदि से संबंधित ग्रह माना जाता है। अगर कुंडली में बुध मजबूत स्थिति में है तो व्यक्ति को इन सभी क्षेत्रों में शुभ और सकारात्मक परिणाम मिलते हैं जिसके दम पर वह जीवन में सफलता प्राप्त करते हैं और आगे बढ़ते हैं।
वहीं इसके विपरीत अगर बुध ग्रह कुंडली में पीड़ित अवस्था में हो या नकारात्मक स्थिति में मौजूद हो तो ऐसे जातकों को तमाम परेशानियां और बाधाएँ अपने जीवन में उठानी पड़ती है। साथ ही तमाम कोशिशें के बावजूद सफलता इन्हें नहीं मिल पाती है। ऐसे में ज्योतिष के जानकार बुध ग्रह को मजबूत बनाने के लिए कुछ विशेष ज्योतिषीय उपायों को करने की जानकारी देते हैं। क्या कुछ हैं ये उपाय अगर आप भी जानना चाहते हैं तो यह लेख अंत तक पढ़ें। इसके अलावा अगर आप अपनी कुंडली में बुध ग्रह की स्थिति जानना चाहते हैं तो उसके लिए विद्वान ज्योतिषियों से अभी परामर्श लें।
बुध महाराज 22 अक्टूबर 2024 की शाम 06 बजकर 58 मिनट पर शुक्र द्वारा शासित राशि तुला में उदित होने जा रहे हैं।
तुला राशि में बुध- कैसा रहता है प्रभाव?
संचार से संबंधित ग्रह बुध जब मिलनसार वायु तत्व की राशि तुला में होता है तो यह आरामदायक और अच्छा महसूस करता है। वायु तत्व मन और संचार के बारे में बहुत कुछ दर्शाती है इसीलिए तुला राशि में बुध का होना एक अच्छा मेल कहा जाता है। तुला राशि को हमारे मतभेदों को दूर करने के तरीका ढूंढना पसंद है। यह राशि जानती है कि किसी भी स्थिति के एक से अधिक पक्ष होते हैं और विरोधी दृष्टिकोण में सामंजस्य स्थापित करना अनिवार्य होता है।
इस शांति दायक राशि में बुध का प्रवेश एक ऐसे समय का संकेत देता है जब हमारे रिश्तों में ज्यादा सामंजस्य बनाने के लिए वाणी थोड़ी नरम हो जाती है। ऐसे में तुला राशि में बुध तर्क, वितर्क या गलतफहमी के चलते हुए मुद्दों को ठीक करने का सही समय माना जाता है।
सूर्य के निकटतम ग्रह बुध का वैदिक ज्योतिष में बेहद महत्व बताया गया है। हिंदी में इस ग्रह को बुध कहते हैं और अंग्रेजी में मरकरी कहा जाता है। हिंदी में बुध का अर्थ बुद्धि से जोड़कर देखा जाता है। इसके अलावा बुध ग्रह को देवताओं का दूत भी कहा जाता है और यह हास्य, बुद्धि और बुद्धिमत्ता का प्रतिनिधित्व करता है। जब बुध तुला राशि में होता है तो इसका प्रभाव जातक को उत्कृष्ट बौद्धिक क्षमता प्रदान करता है। तुला राशि में बुध का नकारात्मक प्रभाव जातक की बुद्धि पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है और त्वचा संबंधित विभिन्न समस्याओं की वजह बनता है।
तुला राशि में बुध का जातकों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
तुला राशि में बुध के प्रभाव से जातक सख्त और धनी होंगे और परिवार से जुड़े रहेंगे। ऐसे व्यक्तियों का व्यवसाय बढ़ेगा और वह दूसरों के लिए सहायता करने के लिए तैयार और तत्पर रहेंगे। ऐसे जातकों को सरल, नैतिकता वाली महिलाओं के संगठन की तलाश रहती है। अगर इस राशि में बुध का संबंध सूर्य से होता है तो जातक बाहरी लोगों या दूसरे क्षेत्र के व्यक्तियों के साथ विवाह बंधन में बंध सकते हैं।
मकर और सिंह लग्न वालों को बुध उत्तम परिणाम देता है। अगर लग्न सिंह हो तो प्रमुख काल फलदाई होता है। बुध पर बृहस्पति या चंद्रमा की दृष्टि जातकों को शानदार परिणाम देती है। बुध के साथ शुक्र की युति व्यक्ति को प्रभावशाली बनाती है क्योंकि शुक्र और बुध मित्र स्थिति में होते हैं। यह बुध के लिए एक शुभ स्थान माना जाता है क्योंकि यह जातकों को उत्कृष्ट संचार कौशल प्रदान करता है।
बुध ग्रह को एक पृथ्वी ग्रह माना जाता है और जब यह तुला राशि में स्थित होता है तो यह जातकों को विभिन्न कला रूपों के ज्ञान से सुसज्जित करता है। वह कलात्मक और रचनात्मक गतिविधियों की ओर झुकाव रखते हैं। बुध संचार पर शासन करता है और शुक्र का प्रभाव उन्हें वाणी में परिष्कार और वाक्पटुता प्रदान करता है। ऐसे जातक विनम्र और मृदु भाषी भी होते हैं और उनमें दूसरों से अपनी बात मनमानी की शक्ति होती है। ऐसे जातक खर्चीले स्वभाव के होते हैं, रिश्तो के प्रति प्रेरित होते हैं और स्त्रियों में शौकीन होते हैं।
जीवन में इनका दृष्टिकोण भी संतुलित होता है। उनके पास बौद्धिक दिमाग और सुखद व्यवहार होता है। वह अपने तरीकों में बहुत कूटनीतिक होते हैं और यह अच्छी तरह से जानते हैं कि अवसरों का अधिकतम लाभ कैसे उठाया जा सकता है। ऐसे जातक उदारवादी, मैत्रीपूर्ण और मिलनसार स्वभाव के होते हैं। उनमें सुंदरता के प्रति ज्यादा रुचि देखने को मिलती है और वह वास्तु कला, विलासिता और आलीशान घरों की ओर ज्यादा प्रेरित होते हैं।
जब बुध तुला राशि में होता है तो हमेशा आरामदायक स्थिति में नजर आता है। ऐसे जातक मधुर वाणी वाले, प्रसन्न स्वभाव वाले और संगीत में गहरी रुचि रखने वाला होता है। क्योंकि तुला एक संतुलित राशि है और बुध बुद्धि का कारक ग्रह माना गया है इसीलिए जातक निर्णय लेने से पहले आने वाली हर चीज का विश्लेषण करते हैं। वे व्यावसायिक योजनाएं बनाने और अपने जीवन में प्रगति के लिए अपनी बुद्धि का उपयोग करने में भी कामयाब रहते हैं।
तुला राशि में बुध उदय- कैसा रहेगा तुला राशि पर प्रभाव
वैदिक ज्योतिष में बुध ग्रह बुद्धि से जुड़ा ग्रह माना जाता है। ऐसे में अब तुला राशि में जब बुध उदित होने वाले हैं तो आइये जान लेते हैं विशेष तौर पर तुला राशि के जातकों पर इसका क्या प्रभाव पड़ने की संभावना है।
तुला राशि में बुध उदय से तुला जातकों के जीवन में कई फायदे नजर आ सकते हैं जैसे कि, उनके आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी, शादीशुदा जातकों का दांपत्य जीवन खुशनुमा बनेगा, अविवाहित लोगों को विवाह के प्रस्ताव मिल सकते हैं, स्वभाव में सकारात्मक बदलाव आएगा, स्वास्थ्य अच्छा रहेगा, समाज में मान सम्मान और प्रतिष्ठा मिलेगी, करियर में नए और अच्छे अवसर मिलेंगे, नौकरी पेशा लोगों को विदेश में नौकरी के नए अवसर मिल सकते हैं, कमाई अच्छी होगी, बुद्धि मजबूत होगी, जीवनसाथी के साथ रिश्ते मजबूत होंगे।
कौन हैं आपके इष्ट देवता– अभी जानें इस बारे में सम्पूर्ण जानकारी
आइये अब आगे बढ़ते हैं और जान लेते हैं कि तुला राशि में बुध उदित होकर सभी 12 राशियों को किस तरह से प्रभावित करने वाले हैं।
बुध महाराज 22 अक्टूबर 2024 की शाम 06 बजकर 58 मिनट पर शुक्र द्वारा शासित राशि तुला में उदित होने जा रहे हैं।
2: बुध किसके कारक माने जाते हैं?
वैदिक ज्योतिष में बुध ग्रह को बुद्धि, तर्क, संवाद, गणित, चतुरता, अर्थव्यवस्था और वित्त का कारक माना जाता है।
3: क्या तुला राशि में बुध एक अच्छा स्थान माना जाता है?
तुला राशि में बुध को एक अच्छा स्थान पर होना माना जाता है।
4: बुध तुला राशि में होने पर क्या होता है?
जब बुध तुला राशि में होता है तो कूटनीति केंद्र में आती है।
31 अक्टूबर या 01 नवंबर कब करें लक्ष्मी पूजन? जानें दिवाली पूजा की सही तिथि
दिवाली 2024: साल 2024 में दीपावली त्योहार को लेकर दुविधा की स्थिति बनी हुई है। कुछ लोग भ्रमित भी हैं कि यह त्योहार किस दिन मनाया जाए? क्योंकि कार्तिक अमावस्या की तिथि इस बार दो दिन है। ऐसे में, इस कंफ्यूजन को दूर करने के लिए एस्ट्रोसेज के अनुभवी एवं विद्वान ज्योतिषी पंडित हनुमान मिश्रा जी द्वारा लक्ष्मी पूजन को लेकर यह विशेष ब्लॉग तैयार किया है जिसके माध्यम से आपको लक्ष्मी पूजा की सही तिथि और सही मुहूर्त की जानकारी प्राप्त हो सकेगी। तो चलिए शुरुआत करते हैं इस विशेष लेख की।
जैसे कि हम आपको बता चुके हैं कि इस बार अमावस्या तिथि दो दिन है। सामान्य शब्दों में कहें, तो 31 अक्टूबर 2024 को भी अमावस्या है और 1 नवंबर 2024 को भी अमावस्या है। जो लोग उदया तिथि को महत्व देते हैं अर्थात सूर्योदय के समय जो तिथि होती है उसको महत्व देते हैं, वह लोग 1 नवंबर 2024 को दिवाली मनाना ज्यादा उचित समझ रहे हैं। वहीं, प्रदोष काल से लेकर मध्य रात्रि के बीच अमावस्या को महत्व देने वाले 31 अक्टूबर 2024 को दिवाली मनाने के पक्ष में हैं।
ज्योतिषियों के अनुसार, क्या कहते हैं नियम?
दिवाली को लेकर ज्यादातर विद्वानों का मानना यह है कि जिस दिन कार्तिक महीने की अमावस्या प्रदोष काल से लेकर मध्य रात्रि तक हो, उसी दिन दीपावली मनाना ज्यादा उचित माना रहता है। इस बात का समर्थन ज्यादातर ज्योतिषी भी करते हैं क्योंकि प्रदोष काल में लक्ष्मी जी का प्रादुर्भाव माना जाता है। निशीथ काल में सभी तरह की पूजा साधना, विशेषकर तांत्रिक पूजा इत्यादि करने का विशेष महत्व माना गया है। इस वर्ष अर्थात 2024 में ऐसी स्थितियां 31 अक्टूबर 2024 के दिन लागू हो रही हैं जबकि 1 नवंबर 2024 के दिन अमावस्या तिथि सूर्योदय के समय तो मिल रही है, लेकिन समाप्ति शाम को 06:16 पर ही हो रही है।
कुछ पंचांगों में अमावस्या तिथि की समाप्ति सूर्यास्त से पहले ही बताई गई है। वैसे तो ज्यादातर मामलों में उदया तिथि का महत्व सर्वाधिक होता है, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में अन्य मुहूर्तों को ध्यान में रखते हुए मुहूर्त के समय मिलने वाली तिथि को अधिक महत्व दिया जाता है। यही वजह है कि प्रदोष काल से लेकर मध्य रात्रि, यहां तक की संपूर्ण रात्रि व्याप्त रहने वाली अमावस्या तिथि को महत्व देने के कारण इस बार दीपावली का त्योहार 31 अक्टूबर 2024 को मनाने की सर्वसम्मति विभिन्न विद्वानों ने दी है।
हालांकि कुछ मामलों में कुछ विशेष पूजन 1 नवंबर 2024 के दिन भी किये जा सकेंगे। विशेषकर कार्यालय में पूजा करवाने वाले लोगों को इस बार दोनों दिन पूजा करने का अवसर मिल रहा है अर्थात 31 अक्टूबर को दोपहर 3:52 के बाद अपनी सुविधा के अनुसार शुभ मुहूर्त में आप अपने कार्यालय की पूजा करवा सकते हैं। वहीं, यदि किसी कारणवश ऐसा न हो पाए, तो 1 नवंबर 2024 को दिन में आप कार्यालय में पूजा करवा सकते हैं।
31 अक्टूबर को लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त
31 अक्टूबर 2024 को लक्ष्मी पूजन के लिए पहला शुभ मुहूर्त प्रदोष काल में है। यह शाम को 05:36 से लेकर 8:11 तक रहेगा और इसी बीच, दिल्ली के समयानुसार वृषभ लग्न शाम को 06:25 से लेकर रात को 8:20 तक रहेगा। ऐसे में, इस दौरान मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की जा सकेगी।
यदि चौघड़िया के अनुसार शुभ मुहूर्त की बात की जाए, तो चल या चर, लाभ, अमृत और शुभ चौघड़िया में पूजा करने का भी विधान माना गया है। दिल्ली के समय अनुसार, इस दिन शुभ चौघड़िया शाम 4:13 से 5:36 तक रहेगा। अतः बहुत आवश्यक होने पर इस अवधि में पूजा-अर्चना की जा सकती है, लेकिन प्रदोष काल की शुरुआत शाम 5:36 के बाद हो रही है। अतः शाम 5:36 के बाद लक्ष्मी पूजन करना ज्यादा अच्छा कहा जाएगा, परंतु अगर किसी कारण यदि आपको पूजन करना हो तो आप शुभ चौघड़िया अर्थात 4:13 से 5:36 के बीच भी कर सकते हैं।
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इसके बाद, शाम को 5:36 से लेकर 7:13 के बीच अमृत चौघड़िया रहेगी। इस दौरान भी आप पूजा कर सकते हैं। शाम को 7:13 से लेकर 8:50 के बीच चर चौघड़िया में भी पूजन किया जा सकता है। इसके बाद, अंग्रेजी तिथि के अनुसार, अगले दिन अर्थात 31 अक्टूबर और 1 नवंबर (जिसे अंग्रेजी तिथि के अनुसार 1 नवंबर कहा जाएगा) की रात को 12:04 से लेकर 1:42 के बीच लाभ चौघड़िया में भी पूजन किया जा सकेगा। यदि किसी कारण से आप इसमें भी पूजा नहीं कर पाते हैं, तो अगली शुभ चौघड़िया रात में 3:19 के बाद मिलेगी जो 4:56 तक रहेगी। वहीं, अमृत चौघड़िया मुहूर्त सुबह 4:56 से सुबह 06: 33 तक रहेगा। इन चौघड़िया मुहूर्तों के अनुसार, आप लक्ष्मी पूजन कर सकते हैं।
दिवाली पर निशीथ काल कब से कब तक?
निशीथ काल में पूजा करने वालों के लिए शुभ मुहूर्त रात 11:39 से लेकर 12:31 तक रहेगा अर्थात लगभग 52 मिनट का निशीथ काल रहने वाला है। इस दौरान लक्ष्मी पूजा की जा सकती है, लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि निशीथ काल में पूजा को विशेष रूप से तांत्रिक क्रियाओं के लिए ज्यादा अच्छा माना गया है।
ऐसे में, उत्तम रहेगा कि प्रदोष काल में पड़ने वाले वृषभ लग्न में ही महालक्ष्मी और गणेश का पूजन कर लिया जाय क्योंकि लोक मान्यता है कि स्थिर लग्न में लक्ष्मी का पूजन करने से आपके यहां लक्ष्मी स्थिर रहती हैं। जैसा कि हमने पहले ही बताया है कि इस दिन वृषभ लग्न शाम को 6:25 से लेकर रात्रि 8:20 तक रहेगा। इस समय आपको प्रदोष काल भी मिल जाएगा, विशेषकर 8:11 से पहले-पहले। इसी दौरान आपको अमृत और चर चौघड़िया भी मिल जाएगा। इस प्रकार, अमृत नामक चौघड़िया का वरण करना भी अच्छा रहेगा यानी कि शाम 6:25 से 7:13 के बीच सर्वोत्तम मुहूर्त रहेगा। हालांकि, बाकी के बताए गए सभी मुहूर्त भी अच्छे ही हैं, लेकिन यदि अच्छे में भी बहुत अच्छा ढूंढना चाहते हैं, तो शाम को 06:25 से लेकर 7:13 के बीच का समय सर्वोत्तम रहेगा। कुल मिलाकर, 48 मिनट का यह मुहूर्त सर्वश्रेष्ठ रहेगा।
उम्मीद है एस्ट्रोसेज के स्पष्टीकरण के बाद, इस बार दीपावली पर्व को मनाने को लेकर उत्पन्न भ्रम अब आपके मन-मस्तिष्क से दूर हो गया होगा। महालक्ष्मी और भगवान गणेश की कृपा आप सब पर बनी रहे। आप सभी को दीपावली पर्व की बहुत-बहुत मंगलकामनाएं!!