सूर्य का कन्या राशि में गोचर: जानें 12 राशियों पर प्रभाव

सूर्य का कन्या राशि में गोचर: जानें किनके लिए रहेगा शुभ और किनकी बढ़ाएगा मुश्किलें?

सूर्य का कन्या राशि में गोचर: नवग्रहों के जनक कहे जाने वाले सूर्य देव अब स्वराशि सिंह से निकलकर कन्या राशि में गोचर करने जाएंगे। बता दें कि सूर्य का यह गोचर जीवन के भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में बड़े बदलाव लेकर आ सकता है। एस्ट्रोसेज एआई का यह विशेष ब्लॉग आपको “सूर्य का कन्या राशि में गोचर” से जुड़ी समस्त जानकारी प्रदान करेगा जैसे तिथि और समय आदि। साथ ही, सूर्य के इस गोचर का ज्योतिषीय महत्व और देश पर पड़ने वाले प्रभाव से भी आपको अवगत करवाएंगे। इसके अलावा, सूर्य गोचर के अशुभ प्रभाव को कम करने के उपाय भी आपको प्रदान करेंगे। तो आइए बिना देर किए अब हम आगे बढ़ते हैं और जानते हैं सूर्य गोचर के बारे में सब कुछ।

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सूर्य का कन्या राशि में गोचर: तिथि एवं समय

सूर्य देव 17 सितंबर 2026 की सुबह 07 बजकर 47 मिनट पर अपनी राशि सिंह से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। वह इस राशि में 17 अक्टूबर 2026 तक रहेंगे। बता दें कि सूर्य का यह गोचर बुध की राशि में होगा। 

वैदिक ज्योतिष में सूर्य और बुध ग्रह को एक-दूसरे के मित्र माना जाता हैं। लेकिन 26 सितंबर 2026 तक इनके संबंध ज्यादा अनुकूल नहीं रहने की आशंका है। ऐसे में, 17 से 26 सितंबर के बीच सूर्य के इस गोचर से मिलने वाले परिणाम औसत रह सकते हैं। 26 सितंबर के बाद जब बुध का राशि परिवर्तन होगा, तब सूर्य और बुध के संबंध मजबूत होंगे। इसके बाद, सूर्य के इस गोचर से आपको सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना है।

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ज्योतिषीय दृष्टि से सूर्य ग्रह

वैदिक ज्योतिष में सूर्य देव को नवग्रहों में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है जो जीवन शक्ति, स्वयं को अभिव्यक्त करना, आत्म, नेतृत्व, इच्छाशक्ति, शारीरिक शक्ति और पिता के कारक माने जाते हैं। सूर्य का संबंध अधिकार, आत्मविश्वास और बड़े निर्णय लेने की क्षमता से भी है।

राशि चक्र में सूर्य महाराज सिंह राशि के स्वामी हैं जो मेष राशि में उच्च और तुला राशि में नीच अवस्था में होते हैं। किसी व्यक्ति के जीवन में इनका प्रभाव अनुशासन, जिम्मेदारी और अलग-अलग परिस्थितियों में अधिकार और  नेतृत्व क्षमता को भी प्रभावित करता है। इसी क्रम में. जातक की कुंडली में सूर्य की स्थिति और विभिन्न राशियों में इनका गोचर जीवन के कई क्षेत्रों को समझने में विशेष भूमिका निभाता है।

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सूर्य ग्रह से जुड़े रोचक तथ्य

  • सौरमंडल में सूर्य ग्रह को सबसे प्रमुख ग्रह माना जाता है और इन्हें वैदिक ज्योतिष में आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और जीवन शक्ति के कारक माना जाता है।  
  • सप्ताह में रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित होता है और यह दिन सूर्य की पूजा एवं इनसे जुड़े उपाय करने के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।    
  • सूर्य ग्रह का संबंध लाल और संतरी रंग से होता है। साथ ही, इनका रत्न माणिक्य माना जाता है।
  • ज्योतिष में सूर्य महाराज सरकार, राजनीति, हड्डियों, हृदय, आंखों, पिता और अधिकार आदि को नियंत्रित करते हैं।
  • सूर्य देव की कृपा प्राप्त करने के लिए नियमित रूप से सूर्य के बीज मंत्र या आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना शुभ माना जाता है। 
  • सनातन धर्म में सूर्य ग्रह को प्रयत्क्ष देवता के रूप में जाना जाता है जिनके दर्शन संसार साक्षात् कर सकते हैं।
  • मेष राशि में सूर्य10 डिग्री पर उच्च और तुला राशि में 10 डिग्री पर नीच अव्स्तह में होते हैं। 
  • सभी 27 नक्षत्रों में सूर्य ग्रह कृत्तिका, उत्तराफाल्गुनी और उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के अधिपति देव हैं। 
  • सूर्य ग्रह चंद्रमा, मंगल और गुरु देव के मित्र माने जाते हैं जबकि शनि और शुक्र इनके शटर माने जाते हैं। 

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कुंडली में शुभ सूर्य का प्रभाव 

जब कुंडली में सूर्य देव की स्थिति शुभ और मज़बूत होती है, तो यह जीवन के भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में सकारात्मक परिणाम प्रदान करते हैं, विशेष रूप से नेतृत्व, करियर, स्वास्थ्य और सामाजिक मान-सम्मान को प्रभावित करते हैं।

  • सूर्य के शुभ प्रभाव से जातक का आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता मज़बूत होती है। साथ ही, जातक जिम्मेदारी निभाने वाला बनता है। 
  • कुंडली में सूर्य के मज़बूत होने से व्यक्ति को उत्तम स्वास्थ्य, ऊर्जा, अच्छी रोग प्रतिरोधक क्षमता और तेज़ रोशनी का आशीर्वाद मिलता है।
  • सूर्य के बलवान होने पर जातक को सरकारी नौकरी, प्रशासनिक पद और नेतृत्व से जुड़े क्षेत्रों में सफलता प्राप्त होती है।
  • जिन जातकों की कुंडली में सूर्य शुभ होता है, तो उन्हें अपने पिता, वरिष्ठों और उच्च पद पर बैठे लोगों का सहयोग और मार्गदर्शन प्राप्त होता है।
  • सूर्य महाराज विपख और प्रशासनिक या कानूनी समस्याओं के समाधान में सहायता करते हैं।
  • इनकी कृपा से जातक को मान-सम्मान, पुरस्कार और समाज में उच्च पद की प्राप्ति होती है। 

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कुंडली में अशुभ सूर्य का प्रभाव 

कुंडली में सूर्य ग्रह की स्थिति दुर्बल या कमज़ोर होने पर जातक को जीवन में आत्मविश्वास, स्वास्थ्य, करियर और उच्च अधिकारियों से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। 

  • सूर्य की दुर्बलता जातक को झिझकता, आत्मविश्वास की कमी, इच्छाशक्ति कमज़ोर होना या फिर जिम्मेदारी निभाने में कठिनाई होती है। 
  • पिता, बड़ों या वरिष्ठ अधिकारियों के साथ रिश्तों में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है।
  • सरकार से जुड़े कार्यों, कानूनी मामलों या करियर में सफलता पाने में देरी हो सकती है। 
  • सूर्य देव के कमज़ोर होने से जातक को आंखों में जलन, सिरदर्द, हृदय या कमजोरी जैसी समस्याओं से जूझना पड़ता है। 
  • कुंडली में कुपित सूर्य के प्रभाव से व्यक्ति कभी-कभी अहंकारी या गुस्सैल बन सकता है जिससे पेशेवर जीवन के रिश्ते प्रभावित हो सकते हैं। 

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सूर्य का कन्या राशि में गोचर: देश पर प्रभाव

स्वतंत्र भारत की कुंडली के अनुसार, सूर्य का कन्या राशि में गोचर पांचवें भाव पर होगा जिससे देश में युवाओं और छात्रों से जुड़े मामलों में ध्यान केंद्रित रहेगा। देश से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों को लेकर जनता में कुछ असंतोष देखने को मिल सकता है। 

चंद्र कुंडली में सूर्य देश के तीसरे भाव में गोचर करेंगे जिसे इनके लिए अनुकूल स्थिति माना जाता है। इस गोचर के प्रभाव से टेलीकम्युनिकेशन और संचार से जुड़े क्षेत्र प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ सकता है। साथ ही, पडोसी देशों के साथ बातचीत होने की संभावना है। इस दौरान राजनेताओं के के बयान, महिलाओं से जुड़े मुद्दे, बढ़ता तापमान और ट्रैफिक संबंधित मामले चर्चा का विषय बन सकते हैं। 

सूर्य का कन्या राशि में गोचर: राशि अनुसार प्रभाव और उपाय 

मेष राशि

मेष राशि वालों के लिए सूर्य आपकी कुंडली में पंचम भाव का स्वामी होते हैं और…(विस्तार से पढ़ें) 

वृषभ राशि

वृषभ राशि वालों के लिए सूर्य आपकी कुंडली में चौथे भाव के स्वामी होते… (विस्तार से पढ़ें)

मिथुन राशि

मिथुन राशि वालों के लिए सूर्य आपकी कुंडली में तीसरे भाव के स्वामी होते हैं तथा… (विस्तार से पढ़ें)

कर्क राशि

कर्क राशि वालों के लिए सूर्य आपकी कुंडली में धन भाव के स्वामी होकर … (विस्तार से पढ़ें)

सिंह राशि

सिंह राशि वालों के लिए सूर्य आपके लग्न या राशि के स्वामी होते हैं तथा वर्तमान… (विस्तार से पढ़ें) 

कन्या राशि

कन्या राशि वालों के लिए सूर्य आपकी कुंडली में द्वादश भाव के स्वामी होते हैं और…(विस्तार से पढ़ें)

तुला राशि

तुला राशि वालों के लिए सूर्य आपके लाभेश होकर द्वादश भाव में गोचर… (विस्तार से पढ़ें) 

वृश्चिक राशि 

वृश्चिक राशि वालों के लिए दशम भाव के स्वामी होकर सूर्य आपके लाभ भाव में… (विस्तार से पढ़ें) 

धनु राशि 

धनु राशि वालों के लिए भाग्य भाव के स्वामी होकर सूर्य आपके दशम यानी कर्म… (विस्तार से पढ़ें)

मकर राशि

मकर राशि वालों के लिए सूर्य आपके अष्टमेश होते हैं और वर्तमान में ये… (विस्तार से पढ़ें)

कुंभ राशि

कुंभ राशि वालों के लिए सप्तमेश सूर्य आपके अष्टम भाव में गोचर… (विस्तार से पढ़ें)

मीन राशि

मीन राशि वालों के लिए सूर्य आपके छठे भाव के स्वामी होकर आपके सप्तम … (विस्तार से पढ़ें)

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. सूर्य का कन्या राशि में गोचर कब होगा?

सूर्य ग्रह 17 सितंबर 2026 को कन्या राशि में गोचर करने जा रहे हैं। 

2. कन्या राशि में सूर्य कब तक रहेंगे?

सूर्य ग्रह कन्या राशि में 17 अक्टूबर 2026 तक रहेंगे।

3. वैदिक ज्योतिष में सूर्य किसके कारक माने जाते हैं?

सूर्य देव जीवनशक्ति, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास, अधिकार और पिता के कारक म,माने गए हैं।