बटुक भैरव जयंती 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की दशम तिथि को बटुक भैरव जयंती मनाई जाती है। इस दिन भगवान शिव के सबसे शक्तिशाली एवं अद्भुत रूपों में से एक बटुक भैरव की पूजा करने का विधान है। उन्हें संहारक के रूप में जाना जाता है। बटुक भैरव जयंती पर उनके इस उग्र स्वरूप की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन बटुक भैरव की सच्चे मन से पूजा करने से शत्रुओं का नाश होता है एवं जीवन से नकारात्मकता दूर हो जाती है। मान्यता है कि बटुक भैरव की पूजा करने से जीवन में खुशियां और शांति बढ़ती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

आगे एस्ट्रोसेज एआई के इस विशेष ब्लॉग में विस्तार से बताया गया है कि बटुक भैरव जयंती क्या है, इसका क्या महत्व है, इसकी पूजन विधि एवं नियम आदि क्या हैं लेकिन सबसे पहले जान लेते हैं वर्ष 2026 में बटुक जयंती कब पड़ रही है।
दुनियाभर के विद्वान ज्योतिषियों से करें कॉल/चैट पर बात और जानें अपने संतान के भविष्य से जुड़ी हर जानकारी
कब है बटुक भैरव जयंती
वर्ष 2026 में बटुक भैरव जयंती 24 जून या 29 जून को मनाई जाएगी। इसमें क्षेत्रीय पंचांग के अनुसार भिन्नता हो सकती है। इस दिन भगवान शिव के बाल रूप बटुक भैरव की पूजा की जाती है।
क्यों हुआ बटुक भैरव का जन्म
प्राचीन धर्मग्रंथों के अनुसार अपाद नाम के एक राक्षस ने अपनी कठोर तपस्या से एक ऐसा वरदान प्राप्त कर लिया था जिसके बाद वह अजेय एवं अमर बन गया था। कोई भी देवता या मनुष्य उसे मार नहीं सकता था। अपनी इस शक्ति के घमंड में चूर होकर उसने तीनों लोकों पर अपना आधिपत्य जमाना शुरू कर दिया था।
उसने स्वर्ग लोक से देवताओं को हटाया, पृथ्वी लोक पर मनुष्यों को कष्ट पहुंचाने लगा और पाताल लोक में उसने दिव्य प्राणियों को बंदी बना लिया। इस स्थिति में सभी देवता एकजुट होकर भगवान शिव के पास सहायता के लिए पहुंचे। सभी जानते थे कि अपाद को किसी भी ज्ञात शक्ति से मारा नहीं जा सकता है। तभी एक दिव्य युक्ति सामने आई कि उसका वरदान उसे बच्चों से सुरक्षित नहीं रखता है।
तब भगवान शिव की अनंत शक्ति से बटुक भैरव का प्राकट्य हुआ जो कि एक पांच वर्ष का बालक था। उसमें भगवान शिव की संपूर्ण शक्तियां समाहित थीं।
एक भीषण युद्ध के पश्चात्, बटुक भैरव विजयी हुए और उन्होंने ब्रह्मांड में पुनः संतुलन स्थापित किया। इस विजय को प्रतिवर्ष ‘बटुक भैरव जयंती’ के रूप में मनाया जाता है।
नए वर्ष की भविष्यवाणी प्राप्त करें वार्षिक कुंडली 2026 से
कलयुग में बटुक भैरव की पूजा करने का महत्व
- आज कलयुग में जहां हर तरफ नकारात्मकता फैली हुई है, वहां बटुक भैरव की पूजा करने का विशेष महत्व एवं लाभ है। बुरी नज़र और काला जादू से रक्षा मिलती है। तांत्रिक शक्तियों का प्रभाव नष्ट होता है।
- अपाद राक्षस वित्तीय और कर्मों से संबंधित अड़चनों को दर्शाता है। ऐसे में बटुक भैरव की पूजा करने से लंबे समय से चली आ रही आर्थिक समस्याएं खत्म होती हैं, धन से जुड़े कानूनी मसले हल होते हैं और संपन्नता बढ़ती है।
- चुनौतियों का सामने करने के लिए साहस आता है, कंफ्यूज़न दूर होती है और मुश्किल समय का सामना करने की ताकत मिलती है।
AstroSage AI पॉडकास्ट सुनें – यहां आपको मिलेंगे ज्योतिष, जीवन के रहस्य, किस्मत के संकेत और AI द्वारा बताए गए सटीक ज्योतिषीय समाधान। अपनी ज़िंदगी के अहम सवालों के जवाब अब आवाज़ में, आसान भाषा में।
बटुक भैरव जयंती की पूजन विधि
बटुक भैरव जयंती की पूजन विधि के बारे में आगे विस्तार से बताया गया है:
- इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर लें और फिर काले या लाल रंग के वस्त्र पहनें।
- अब अपने घर के पूजन स्थल को साफ करें और काले रंग के वस्त्र या आसन पर भगवान बटुक भैरव की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
- इसके बाद तेल का दीपक जलाएं और बटुक भैरव की विधिपूर्वक पूजा करने का संकल्प लें।
- बटुक भगवान को काले तिल, गुड़ और केला अर्पित करें। काले तिल नकारात्मकता को नष्ट करने और गुड़ एवं केला जीवन में मिठास का प्रतीक हैं।
- फिर 108 बार ‘ॐ बटुक भैरवाय नम:’ मंत्र का जाप करें। उन्हें काले या नीले रंग के पुष्प अर्पित करें।
- बटुक भैरव कवच का पाठ करें। इस दिन बच्चों एवं अनाथ लोगों को अन्न का दान करना शुभ रहता है।
- स्कूल जाने वाले बच्चों को पढ़ाई की चीज़ें दान कर सके हैं। काले रंग के वस्त्र या उड़द की दाल भी दान कर सकते हैं।
बटुक भैरव का स्वरूप
बटुक भैरव को भगवान शिव का बाल स्वरूप माना जाता एमहै। उनका रंग गोरा है इसलिए उन्हें गोरा भैरव भी कहा जाता है। उनका शरीर स्फटिक की तरह चमकदार है और केश घुंघराले हैं। उनके मुख एक चमक है और उन्होंने कमर एवं पैरों में किंकिणी, नुपूर और नव मणी पहने हुए हैं। उनके तीन नेत्र हैं और भव्य एवं उज्जवल मुख है। उन्होंने हाथों में शूल एवं दण्ड धारण किया हुआ है।
रत्न, रुद्राक्ष और अन्य ज्योतिषीय उत्पादों की खरीद के लिए क्लिक करें: एस्ट्रोसेज एआई शॉप
बटुक भैरव की साधना करने से क्या होता है
जो व्यक्ति बटुक भैरव की पूजा या साधना करता है, उसे कभी भी अपने जीवन में धन की कमी नहीं होती है। जो साधक निरंतर उनकी साधना करता है, उसे भैरव बींब के रूप में दर्शन देकर कुछ सिद्धियां प्रदान करते हैं। इन सिद्धियों का प्रयोग वह जन कल्याण में करता है। बटुक भैरव अपने भक्तों के दूखों को दूर कर के उन्हें बल, बुद्धि, यश और धन प्रदान करते हैं। इस जयंती पर अष्ट महाभैरव की यात्रा एवं दर्शन पूजन करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है और भय से मुक्ति मिलती है।
भगवान शिव की पूजा
चूंकि, बटुक भैरव भगवान शिव का ही बाल स्वरूप हैं इसलिए इस दिन उनकी पूजा करने का भी विशेष महत्व है। इस जयंती पर सुबह नहाने के पानी में गंगाजल डालकर स्नान करें। इसके बाद सफेद रंग के वस्त्र धारण कर शिवलिंग का अभिषेक करें
गंगाजल डालकर स्नान करें। इसके बाद सफेद रंग के वस्त्र धारण कर शिवलिंग का अभिषेक करें और उस पर बेलपत्र एवं पंचामृत चढ़ाएं।
बृहत् कुंडली में छिपा है, आपके जीवन का सारा राज, जानें ग्रहों की चाल का पूरा लेखा-जोखा
बटुक भैरव जयंती पर क्या करें
आप बटुक भैरव जयंती पर निम्न कार्य कर भगवान शिव एवं बटुक देवता को प्रसन्न कर सकते हैं:
- भगवान शिव के इस बाल स्वरूप को सफेद रंग के पुष्प, मीठी खीर और लड्डू आदि चढ़ा सकते हैं।
- इसके अलावा महादेव सभी ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव को दूर करते हैं इसलिए इस जयंती पर आप शिवलिंग पर दूध चढ़ाएं। ऐसा करने से मनुष्य की सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है।
- यदि आपकी कुंडली में शनि दोष है, तो आप बटुक जयंती पर पकौड़े और पुए बनाकर उन्हें गरीब एवं जरूरतमंद लोगों को खिलाएं। इससे आपको शनि दोष से मुक्ति मिलेगी।
- ऐसा माना जाता है कि बटुक जयंती का दिन दुर्भाग्य को दूर करने के लिए होता है। इसलिए आप इस दिन ब्रेड पर सरसों का तेल लगाकर काले कुत्ते को खिलाएं।
फ्री ऑनलाइन जन्म कुंडली सॉफ्टवेयर से जानें अपनी कुंडली का पूरा लेखा-जोखा
बटुक भैरव जयंती के लिए उपाय
आप बटुक भैरव जयंती 2026 पर भगवान बटुक को प्रसन्न करने एवं उनकी कृपा पाने के लिए निम्न उपाय कर सकते हैं:
- उन्हें इस जयंती पर सफेद रंग के फूल, लड्डू और मीठे पुए अर्पित करें।
- शत्रुओं के नाश के लिए बटुक जयंती पर शाम के समय बटुक भैरव मंदिर जाएं और वहां पर 11 सा 21 बार बटुक भैरव कवच का पाठ करें।
- यदि किसी व्यक्ति पर कर्ज हो गया है, तो वह इस दिन मीठे पुए या हलवे का भोग लगाए। प्रसाद के रूप में खुद भी इसे ग्रहण करे।
- धन प्राप्ति के लिए घर के पूजन स्थल में बटुक भैरव यंत्र स्थापित कर उसके सामने घी का दीपक जलाएं एवं पूजन करें।
सभी ज्योतिषीय समाधानों के लिए क्लिक करें: ऑनलाइन शॉपिंग स्टोर
हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारा यह ब्लॉग ज़रूर पसंद आया होगा। अगर ऐसा है तो आप इसे अपने अन्य शुभचिंतकों के साथ ज़रूर साझा करें। धन्यवाद!
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वर्ष 2026 में बटुक भैरव जयंती 24 जून या 29 जून को मनाई जाएगी।
वह भगवान शिव का बाल रूप हैं।
इसे ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाते हैं।