गुरु का कर्क राशि में गोचर: जानें 12 राशियों पर प्रभाव!

देवगुरु बृहस्पति करेंगे अपनी उच्च राशि में प्रवेश, किन राशियों के होंगे सुनहरे दिन शुरू?

गुरु का कर्क राशि में गोचर: वैदिक ज्योतिष में गुरु ग्रह को देवताओं के गुरु का दर्जा प्राप्त है जो नवग्रहों में प्रमुख माने जाते हैं। इन्हें सभी ग्रहों में मंत्री का पद प्राप्त है इसलिए सौरमंडल में इनकी स्थिति को महत्वपूर्ण माना जाता है। इस प्रकार, बृहस्पति देव को ज्योतिष और हिंदू धर्म में विशेष स्थान प्राप्त है। यह शुभ और लाभकारी ग्रह हैं जिनकी चाल, दशा और राशि में होने वाला प्रत्येक परिवर्तन राशियों के साथ-साथ संसार को प्रभावित करने का असीम सामर्थ्य रखता है। इसी क्रम में, अब गुरु ग्रह जल्द ही अपनी स्थिति में बदलाव करते हुए कर्क राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं और इसका असर मनुष्य जीवन एवं संसार को भी प्रभावित कर सकता है। ऐसे में, एस्ट्रोसेज एआई का यह ख़ास ब्लॉग “गुरु का कर्क राशि में गोचर” से जुड़ी समस्त जानकारी प्रदान करेगा जैसे तिथि और समय आदि।   

जैसे कि हम आपको ऊपर बता चुके हैं कि गुरु ग्रह को नवग्रहों में शुभ और लाभ देने वाले ग्रहों में से एक माना जाता है। मानव जीवन में गुरु ग्रह ज्ञान, समृद्धि और भाग्य का प्रतिनिधित्व करते हैं। शायद ही आप जानते होंगे कि बृहस्पति देव एक राशि में काफ़ी लंबे समय तक रहते हैं इसलिए इनकी चाल, दशा और राशि परिवर्तन विशेष मायने रखता है। 

ऐसे में, अब इनका गोचर कर्क राशि में गोचर होने जा रहा है और इसके परिणामस्वरूप, यह कुछ राशियों को शुभ और कुछ राशियों को अशुभ परिणाम प्रदान कर सकता है। बृहस्पति ग्रह के नकारात्मक प्रभावों से बचने के लिए आप किन आसान उपायों को अपना सकते हैं, इससे भी हम आपको अवगत करवाएंगे। तो चलिए बिना देर किए अब हम आगे बढ़ते हैं और सबसे पहले नज़र डालते हैं गुरु का कर्क राशि में गोचर की तिथि और समय पर। 

गुरु का कर्क राशि में गोचर: कब और क्या रहेगा समय?

शुभ ग्रह के नाम से प्रसिद्ध गुरु महाराज मनुष्य जीवन के महत्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे ज्ञान, शिक्षक, संतान, बड़े भाई, शिक्षा, पवित्र स्थल और धार्मिक कार्य को नियंत्रित करते हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, प्रत्येक ग्रह एक निश्चित समय के बाद अपना राशि परिवर्तन करता है और इसी प्रकार, बृहस्पति देव का गोचर हर 13 महीने बाद होता है। इसके बाद, वह दूसरी राशि में प्रवेश कर जाते हैं। बता दें कि अब बृहस्पति देव 02 जून 2026 की सुबह 06 बजकर 30 मिनट पर कर्क राशि में गोचर कर जाएंगे। कर्क राशि गुरु ग्रह की उच्च राशि मानी जाती है जिसके अधिपति देव चंद्र ग्रह हैं। साथ ही, बृहस्पति ग्रह चंद्र देव से मित्रवत संबंध रखते हैं और ऐसे में, यह राशियों को शुभ परिणाम दे सकते हैं। आइए अब हम आपको रूबरू करवाते हैं कर्क राशि में गुरु ग्रह के प्रभाव से।  

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क्यों ख़ास है गुरु का कर्क राशि में गोचर? 

हम यह आपको ऊपर बता चुके हैं कि गुरु ग्रह हर 13 महीने में एक राशि से निकलकर दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं। लेकिन, कर्क राशि में गुरु ग्रह का गोचर 13 नहीं, बल्कि 08 महीनों में दूसरी बार होने जा रहा है। बता दें कि कर्क राशि में बृहस्पति देव का पिछला गोचर 19 अक्टूबर 2025 को हुआ था और इसके बाद, यह 11 नवंबर 2025 को कर्क राशि में वक्री हो गए थे। इसके पश्चात, गुरु देव 04 दिसंबर 2025 को वक्री अवस्था में मिथुन राशि में गोचर कर गए थे और फिर पुनः 11 मार्च 2026 को मिथुन राशि में मार्गी हो गए थे। इस प्रकार, अब लगभग 08 महीने बाद 02 जून 2026 को गुरु ग्रह पुनः अपनी उच्च राशि में गोचर कर जाएंगे और फिर से संसार को शुभ परिणाम देना शुरू करेंगे। आइए अब जान लेते हैं गुरु ग्रह का कर्क राशि में प्रभाव कैसा होता है। 

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गुरु का कर्क राशि में प्रभाव 

  • जब गुरु ग्रह अपने मित्र चंद्र देव की राशि कर्क में प्रवेश करेंगे और यह इनकी उच्च राशि भी है इसलिए गुरु का कर्क राशि में गोचर काफ़ी हद तक शुभ रहेगा। साथ ही, यह जातकों को अनुकूल परिणाम प्रदान करेगा। 
  • ऐसे जातक जिनका जन्म कर्क राशि में बृहस्पति की स्थिति के तहत हुआ है, वह ज्यादातर अपने घर-परिवार के लिए समर्पित रहते हैं और यह अपने परिवार से बहुत प्रेम करते हैं। ऐसे में, यह अपने जीवन में प्राथमिकता देते हैं।
  • इन लोगों के लिए परिवार बहुत मायने रखता है इसलिए यह अपने परिवार से जुड़ा किया गया कोई भी मजाक बर्दाश्त नहीं करते हैं। 
  • जिन लोगों का जन्म बृहस्पति की कर्क राशि में उपस्थिति के अंतर्गत होता है, वह अपने प्रियजनों और करीबियों से बात करते हुए बेहद सुरक्षात्मक और संवेदनशील हो जाते हैं। 
  • यह जातक इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखते हैं कि इनकी बातें किसी के दिल को ठेस न पहुंचाएं। 
  • कर्क राशि में गुरु ग्रह के बैठे होने से इन लोगों में अपनी मेहनत और समर्पण के बल पर करियर में प्रगति प्राप्त करना चाहते हैं क्योंकि यह अपनों को एक बेहतर जीवन देने की कामना रखते हैं। 

आइए अब आपको अवगत करवाते हैं गुरु ग्रह के धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व से। 

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गुरु ग्रह का धार्मिक महत्व 

सनातन धर्म में गुरु ग्रह यानी कि बृहस्पति देव को अत्यंत महत्वपूर्ण और शुभ स्थान प्राप्त है। इन्हें देवताओं के गुरु के रूप में “देवगुरु” कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बृहस्पति महाराज सभी देवताओं के गुरु हैं जबकि शुक्र देव को असुरों के गुरु माना गया है इसलिए यह दोनों ग्रह एक-दूसरे के प्रति शत्रुता का भाव रखते हैं। 

धार्मिक ग्रंथ महाभारत के अनुसार, बृहस्पति देव के पिता महर्षि अंगिरा थे जो स्वयं एक महान ऋषि थे। पौराणिक कथाओं में देवगुरु बृहस्पति को सृष्टि रचियता ब्रह्मा का स्वरूप भी कहा गया है जिससे उनका महत्व और भी बढ़ जाता है। सप्ताह में गुरुवार का दिन बृहस्पति देव को समर्पित होता है इसलिए इस दिन विशेष रूप से उनकी पूजा-अर्चना की जाती है। हिंदू परंपरा में बृहस्पति देव को केले के वृक्ष के रूप में भी पूजा जाता है और इनका प्रिय रंग पीला माना जाता है। इसी कारण गुरुवार के दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करना बहुत शुभ माना जाता है। गुरु ग्रह को ज्ञान, धर्म, शील और पवित्र स्थानों के कारक हैं जो व्यक्ति के जीवन में समृद्धि और सकारात्मकता लेकर आते हैं। 

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ज्योतिषीय दृष्टि से बृहस्पति देव का महत्व 

ज्योतिष शास्त्र में गुरु ग्रह को विस्तार, उन्नति और ज्ञान का कारक ग्रह माना गया है जो सभी प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए जिम्मेदार होते हैं। ऐसे में, गुरु देव की चाल, दशा और स्थिति में होने वाला प्रत्येक परिवर्तन आम मनुष्यों से लेकर ज्योतिषियों के लिए विशेष महत्व रखता है। हर व्यक्ति के जीवन में बृहस्पति देव करियर, व्यापार और नौकरी के साथ-साथ अध्यात्म जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। अगर किसी व्यक्ति पर गुरु महाराज का आशीर्वाद होता है, तो उसके भीतर सात्विक गुण विकसित होने लगते हैं। साथ ही, इस तरह के लोग अपने जीवन में सत्य और धर्म की राह पर चलना पसंद करते हैं।

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 बता दें कि ऐसे जातक जिनकी कुंडली में बृहस्पति देव की स्थिति बहुत शुभ या मज़बूत होती हैं, वह अपने जीवन में अधिकांश क्षेत्रों में अपार सफलता हासिल करते हैं। लेकिन, इन लोगों के मोटापे का शिकार होने की संभावना होती हैं। वहीं दूसरी तरफ, जिन लोगों की कुंडली में बृहस्पति ग्रह अशुभ, पीड़ित या दुर्बल अवस्था में होते हैं, तो उन्हें पाचन या पेट से संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसी क्रम में, गुरु ग्रह की कृपा आपको मज़बूत पाचन क्षमता प्रदान करता है और पेट से जुड़े रोग भी आपको परेशान नहीं करते हैं। 

ज्योतिष में सिर्फ़ गुरु ग्रह की स्थिति और गोचर ही नहीं, बल्कि इनकी दृष्टि भी बहुत शुभ मानी जाती है। यदि आपकी कुंडली के किसी दुर्बल या कमज़ोर भाव पर बृहस्पति देव की दृष्टि पड़ रही होती है, तो यह आपके भाव को मज़बूत बनाती है। साथ ही, आपको नकारात्मक प्रभावों से भी छुटकारा मिलता है। हम जानते हैं कि गुरु ग्रह एक राशि में 13 महीने रहते हैं और इस वजह से उन्हें अपना एक राशि चक्र पूरा करने में तक़रीबन 12 साल से अधिक का समय लगता है। इस प्रकार, बृहस्पति देव का हर गोचर बहुत ख़ास हो जाता है। अगर गुरु ग्रह किसी खास भाव या ग्रह से होकर गुजरते हैं, तो इनकी उपस्थिति के प्रभाव से उस भाव में विकास, भाग्य और नई सोच को बढ़ावा मिलता है।

गुरु का कर्क राशि में गोचर: कमज़ोर गुरु का प्रभाव 

  • ऐसे जातक जिनकी कुंडली में गुरु ग्रह कमज़ोर अवस्था में होते हैं, उन्हें धन कमाने के मार्ग में अनेक तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।  
  • गुरु ग्रह को ज्ञान का कारक कहा जाता है और ऐसे में, इनके दुर्बल होने पर जातक का मन पढ़ाई में नहीं लगता है और कई प्रयास करने के बाद भी वह पढ़ाई करने में असफल हो सकता है। 
  • गुरु ग्रह के नकारात्मक स्थिति में होने पर जातकों को नौकरी में प्रोमोशन मिलने में देरी होती है या फिर वह अटक जाता है, व्यापार के भी बंद होने की नौबत आ जाती है। साथ ही, अशुभ गुरु के कारण आपके मान-सम्मान में भी कमी आती है।
  • गुरु ग्रह को भाग्य का कारक भी माना जाता है और जब यह कुंडली में कमजोर स्थिति में होते हैं, तो व्यक्ति को अपने कार्यों में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। साथ ही, भाग्य भी पूरी तरह आपका साथ नहीं देता है।
  • गुरु ग्रह के कमज़ोर या निर्बल अवस्था में होने पर व्यक्ति को पेट से जुड़े रोग, कान, गला, आँख और किडनी से संबंधित रोग घेर सकते हैं। 

अब हम आगे बढ़ते हैं और आपको अवगत करवाते हैं गुरु का कर्क राशि में गोचर के दौरान आप किन उपायों को कर सकते हैं। 

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गुरु का कर्क राशि में गोचर: सरल एवं प्रभावी उपाय 

  • गुरु ग्रह से शुभ परिणाम प्राप्त करने के लिए गुरुवार का व्रत करें और बृहस्पति देव की पूजा करें। इस दिन आपके लिए  ‘ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः’  मंत्र का 3 या 5 माला का जाप करना शुभ रहेगा। 
  •  रोज़ाना सुबहतुलसी तुलसी को जल चढ़ाएं और उसके सामने दीपक जलाएं। साथ ही,   स्पर्श न करें क्योंकि ऐसा करने से गुरु ग्रह प्रसन्न होते हैं।     जे        
  • कुंडली में अशुभ गुरु को बलवान करने के लिए प्रत्येक गुरुवार स्नान के पानी में एक चुटकी हल्दी मिलाकर स्नान करें। संभव हो, तो इस दिन पीले रंग के वस्त्र ज्यादा से ज्यादा धारण करें। 
  • ऐसे जातक जिनकी कुंडली में गुरु पीड़ित या दुर्बल हैं, तो आप बृहस्पति देव के बीज मंत्र ‘ऊँ बृं बृहस्पतये नम:’ का 108 बार जाप करें। 
  • बृहस्पति देव को मज़बूत करने के लिए गुरु ग्रह के पुखराज रत्न या फिर उपरत्न सुनेला भी पहन सकते हैं। ऐसा करने से पहले आपको किसी अनुभवी ज्योतिषी से परामर्श लेने की सलाह दी जाती है। 

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गुरु का कर्क राशि में गोचर: राशि अनुसार प्रभाव और उपाय 

मेष राशि

मेष राशि वालों की कुंडली में गुरु ग्रह नौवें और बारहवें भाव… (विस्तार से पढ़ें) 

वृषभ राशि

वृषभ राशि वालों की कुंडली में गुरु देव आपके आठवें और ग्यारहवें भाव के… (विस्तार से पढ़ें)

मिथुन राशि

मिथुन राशि के जातकों की कुंडली में गुरु महाराज आपके सातवें और दसवें भाव के…(विस्तार से पढ़ें)

कर्क राशि

कर्क राशि वालों के लिए बृहस्पति देव आपके छठे और नौवें भाव के स्वामी हैं जो… (विस्तार से पढ़ें)

सिंह राशि

सिंह राशि के जातकों के लिए बृहस्पति देव आपके पांचवें और आठवें भाव के… (विस्तार से पढ़ें) 

कन्या राशि

कन्या राशि वालों की कुंडली में बृहस्पति महाराज आपके चौथे और… (विस्तार से पढ़ें)

तुला राशि

तुला राशि वालों की कुंडली में गुरु ग्रह आपके तीसरे और छठे भाव के … (विस्तार से पढ़ें) 

वृश्चिक राशि 

वृश्चिक राशि वालों के लिए गुरु ग्रह आपके दूसरे और पांचवें भाव … (विस्तार से पढ़ें) 

धनु राशि 

धनु राशि वालों की कुंडली में बृहस्पति महाराज आपकी कुंडली में पहले/लग्न … (विस्तार से पढ़ें)

मकर राशि

मकर राशि वालों के लिए गुरु देव आपके तीसरे और बारहवें भाव के स्वामी… (विस्तार से पढ़ें)

कुंभ राशि

कुंभ राशि के जातकों के लिए गुरु देव आपकी कुंडली में दूसरे और ग्यारहवें… (विस्तार से पढ़ें)

मीन राशि

मीन राशि के जातकों के लिए गुरु महाराज आपके पहले/लग्न भाव औ… (विस्तार से पढ़ें)

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इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. गुरु का कर्क राशि में गोचर कब होगा?

गुरु का कर्क राशि में गोचर 02 जून 2026 को होने जा रहा है।

2. बृहस्पति देव कौन हैं?

ज्योतिष में बृहस्पति देव को मंत्री का पद प्राप्त है। 

3. बृहस्पति को गुरु क्यों कहा जाता है?

हिंदू धर्म में बृहस्पति को देवताओं के गुरु माना जाता है।