मंगल की राशि में बुध देव का होगा गोचर, इन राशियों पर होगी धन-दौलत की बरसात!

बुध का मेष राशि में गोचर: ज्योतिष शास्त्र में “ग्रहों के राजकुमार” के नाम से विख्यात बुध ग्रह को विशेष दर्जा दिया गया है। हम यह बात भली-भांति जानते हैं कि हर ग्रह की अपनी खूबियां और खामियां होती हैं जिनका प्रभाव जीवन पर पड़ता है। हमारे आज का यह स्पेशल ब्लॉग आपको सौरमंडल के सबसे छोटे और तेज़ रफ़्तार से चलने वाले बुध ग्रह के बारे में विस्तार से बात करेंगे। ज्योतिष में बुध देव की गिनती शुभ ग्रहों में होती है और यह सौरमंडल में सूर्य ग्रह के सबसे निकट स्थित हैं। अब यह जल्द ही अपना राशि परिवर्तन करते हुए मेष राशि में जा रहे हैं जिंस्का प्रभाव देश-दुनिया समेत राशियों पर दिखाई देगा। 

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सिर्फ इतना ही नहीं, एस्ट्रोसेज एआई के इस ख़ास ब्लॉग के माध्यम से आपको “बुध का मेष राशि में गोचर” से जुड़ी विस्तृत जानकारी प्राप्त होगी जैसे कि तिथि और समय आदि। बता दें कि बुध महाराज जब एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसका प्रभाव मनुष्य जीवन के विभिन्न क्षेत्रों पर दिखाई दे सकता है। शायद यह बात आपको हैरान कर सकती है कि बुध महाराज का प्रत्येक गोचर और उनकी स्थिति निजी जीवन से लेकर करियर तक को प्रभावित करते हैं। तो आइए अब हम आगे बढ़ते हैं और जानते हैं बुध का मेष राशि में गोचर कब और किस समय होगा। 

बुध का मेष राशि में गोचर: तिथि और समय 

बुध गोचर के समय के बारे में जानने से पहले हम आपको बता दें कि बुध देव तीव्र गति से चलते हैं। ऐसे में, बुध को एक राशि से दूसरी राशि में गोचर करने में लगभग 27 से 30 दिनों का समय लगता है। युवा ग्रह के नाम से जाने वाले बुध महाराज अब 30 अप्रैल 2026 की सुबह 06 बजकर 38 मिनट पर मेष राशि में गोचर करने जा रहे हैं। शायद ही आप जानते होंगे कि मेष राशि के स्वामी ग्रह मंगल देव हैं। इनके और बुध ग्रह के संबंध ज्यादा अच्छे नहीं माने गए हैं इसलिए आपकी कुंडली में बुध की स्थिति के आधार पर इनका गोचर कुछ राशियों को शुभ और कुछ राशियों को नकारात्मक परिणाम दे सकता है। चलिए अब नज़र डालते हैं बुध ग्रह मेष राशि के प्रभाव के बारे में। 

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बुध का मेष राशि में प्रभाव 

  • जिन जातकों की कुंडली में बुध देव मेष राशि में विराजमान होते हैं, तो ऐसे लोगों को किसी का इंतजार करना पसंद नहीं होता हैं इसलिए जब बुध इस राशि में प्रवेश करते हैं, तो यह समय मन में बेचैनी और अधीरता पैदा करता है। 
  • ऐसे व्यक्ति एक जगह टिककर नहीं रह सकता है और अपने विचारों को बार-बार मन में दोहराते हुए नज़र आता है।
  • मेष राशि को आत्म-अभिव्यक्ति का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में, बुध का मेष राशि में गोचर संचार के नए रास्ते खोलने का काम करेगा। इस दौरान व्यक्ति अपने मन की बात खुलकर कहने का साहस नहीं जुटा पाएंगे। इसके परिणामस्वरूप, आप जो सोचते हैं और महसूस करते हैं, उसे सीधे शब्दों में व्यक्त करने का आत्मविश्वास बढ़ेग।
  • बता दें कि जीवन में जब आपको समझौता, संवेदनशीलता और सहयोग की जरूरत होगी, तब व्यक्ति को अपने शब्दों को दूसरों से कहने में समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
  • बुध और मेष राशि के संयोग से जातकों की वाणी और विचारों में साहस, स्पष्टता और नवीनता देखने को मिलेगी। यह समय उन समस्याओं के समाधान खोजने में मददगार साबित होगा जो काफ़ी समय से अटकी हुई है। 
  • इस गोचर के दौरान आपके मन में आने वाला पहला विचार सामान्य रूप से सही साबित हो सकता है इसलिए अपने मन की आवाज़ पर विश्वास रखें। साथ ही, दूसरों को लेकर बेकार की अपनी राय बनाने से बचें। 
  • मेष राशि में बुध ग्रह का प्रभाव तीव्र होता है जितनी तेज़ी से यह आपको किसी काम के लिए प्रेरित करता है, उतनी ही तेज़ी से प्रेरणा में कमी भी आ जाती है। 
  • ऐसे में, आपको बुध का मेष राशि में गोचर के दौरान जो भी अवसर मिलें, उनका फायदा तुरंत उठा लें।

मेष राशि में बुध ग्रह का प्रभाव जानने के बाद अब हम आपको अवगत करवाते हैं बुध के धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व। 

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ज्योतिषीय दृष्टि से बुध ग्रह 

ज्योतिष में बुध को महत्वपूर्ण ग्रह माना गया है जो ग्रहों के युवराज के नाम से प्रसिद्ध हैं। मनुष्य जीवन में बुध बुद्धि, वाणी, संचार और व्यापार को नियंत्रित करते हैं। यह किसी व्यक्ति की सोच-विचार करने, व्यापार करने और निर्णय लेने की क्षमता को गहराई से प्रभावीर करता है। जन्म कुंडली में बुध महाराज की स्थिति इस बात का संकेत देती है कि व्यक्ति कितना तार्किक है, वह अपने विचारों को कितनी स्पष्टता से व्यक्त कर पाता है और दूसरों के साथ संवाद स्थापित करने में कितना सक्षम है। 

बुध देव की कृपा से जातक नई चीजों को शीघ्रता से सीखने में सफलता हासिल करता है। साथ ही, व्यापार या संचार से जुड़े क्षेत्रों में विशेष रूप से कामयाब होता है। बुध को द्विस्वभाव ग्रह माना गया है, अर्थात ये जिस ग्रह के साथ कुंडली में स्थित होते हैं, उसी के प्रभाव के अनुसार शुभ या अशुभ परिणाम प्रदान करते हैं। बात करें राशि चक्र की, तो बुध ग्रह मिथुन और कन्या राशि के स्वामी हैं। कन्या राशि में वे उच्च अवस्था में माने जाते हैं, जबकि गुरु की राशि मीन में इनकी स्थिति नीच की होती हैं। सभी 27 नक्षत्रों में से अश्लेषा, ज्येष्ठा और रेवती नक्षत्र पर बुध देव को आधिपत्य प्राप्त हैं। ग्रहों के साथ इनके संबंधों की बात करें, तो सूर्य और शुक्र इनके मित्र माने हैं जबकि गुरु और शनि के साथ यह तटस्थ संबंध रखते हैं।

आइए अब हम आपको अवगत करवाते हैं बुध ग्रह से जुड़ी ऐसी बातों से जिन्हें आप शायद ही जानते होंगे। 

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बुध का मेष राशि में गोचर: बुध ग्रह से जुड़े रोचक तथ्य 

स्वभाव: वैदिक ज्योतिष में बुध महाराज को द्विस्वभाव ग्रह कहा जाता है क्योंकि यह कुंडली में  शुभ और अशुभ ग्रहों के साथ बैठे होने पर उन्हीं के अनुसार सकारात्मक और नकारात्मक परिणाम प्रदान करते हैं।

ऊर्जा: बुध देव की ऊर्जा जिज्ञासु, बहुमुखी और तार्किक मानी जाती है। साथ ही, यह चीज़ें को ग्रहण करने की क्षमता और बुद्धिमानी का प्रतिनिधित्व करते हैं।

तत्व: ज्योतिष में बुध महाराज पृथ्वी तत्व के ग्रह माने गए हैं क्योंकि यह ज़मीन से जुड़ाव, तर्क और व्यावहारिकता के प्रतीक हैं।

लिंग: बुध ग्रह को नपुंसक माना जाता है और यह स्त्री और पुरुष ऊर्जा में संतुलन बनाकर चलते हैं इसलिए न यह पुरुष हैं और न ही स्त्री ग्रह हैं।

व्यक्तित्व: पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, बुध देव को युवा ग्रह कहा जाता है और इनका व्यक्तित्व बहुत आकर्षण होता है। साथ ही, यह बेहद बुद्धिमान माने गए हैं।

बुध ग्रह का प्रिय रंग, अंक और दिन 

यह बात हम भली-भांति जानते हैं कि ज्योतिष में प्रत्येक ग्रह का अपना प्रिय रंग, दिन, अंक, और रत्न होता है। इसी प्रकार, अगर आप अपनी कुंडली में किसी ग्रह को मज़बूत करना चाहते हैं या फिर ग्रह के अशुभ प्रभाव कम करने चाहते हैं, तो आपको उस विशेष ग्रह को प्रिय रंग, दिन, रत्न और अंक की सहायता से मज़बूत कर सकते हैं। 

बुद्धि, वाणी और संचार के कारक बुध का प्रिय रंग हरा माना गया है। वहीं, सप्ताह में बुधवार का दिन समर्पित होता हैं और इनका पन्ना रत्न है। ऐसे में, बुध ग्रह से शुभ परिणाम पाने के लिए व्यक्ति को बुधवार के दिन हरे रंग के ज्यादा से ज्यादा वस्त्र धारण करने चाहिए। साथ ही, आप बुधवार को हरी सब्ज़ियों का दान करना भी शुभ माना जाता है। सिर्फ इतना ही नहीं, बुध ग्रह के नकारात्मक प्रभावों से राहत के लिए बुधवार के दिन बुध देव की पूजा और व्रत करना भी अत्यंत फलदायी माना जाता है। आइए आपको रूबरू करवाते हैं बुध ग्रह के शुभ और अशुभ प्रभावों से। 

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मनुष्य जीवन पर शुभ बुध का प्रभाव 

  • कुंडली में बुध का शुभ प्रभाव होने से व्यक्ति का संचार कौशल शानदार होता है और इनकी वाणी में बेहद मीठी होती है इसलिए दूसरे आसानी से इनसे प्रभावित हो जाते हैं। 
  • जिन लोगों का बुध ग्रह बलवान अवस्था में होते हैं, वह तर्क शास्त्र में महारत हासिल करते हैं और अत्यंत ज्ञानी भी होते हैं। ऐसे लोगों को वाद-विवाद या डिबेट में हराना बहुत मुश्किल होता है।
  • बुध महाराज की कृपा आप पर होने से जातक के रिश्ते अपनी महिला रिश्तेदारों जैसे बुआ और मौसी के साथ मज़बूत होते हैं।     
  • अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में बुध ग्रह उच्च राशि में या अनुकूल स्थिति में होता है, तो जातक अपने विचारों को बहुत आसानी से दूसरों के सामने रखने में सक्षम होता है। इनकी मधुर वाणी से लोग जल्दी ही प्रभावित हो जाते हैं। साथ ही, ऐसे लोगों का स्वभाव बहुत  विश्लेषणात्मक और सरल होता है।
  • बुध का आप पर आशीर्वाद होने से जातक बुद्धिमान होने के साथ-साथ व्यापार में भी अपार सफलता हासिल करता है।  

मनुष्य जीवन पर अशुभ बुध का प्रभाव 

  • जीवन पर बुध ग्रह का अशुभ प्रभाव होने से जातक के बाल असमय ही झड़ने या टूटने लगते हैं या फिर अचानक से नाखून कमज़ोर होकर टूटने लगते हैं। 
  • अगर आपको जीवन से जुड़े बड़े फैसले लेने में कठिनाई का अनुभव होता है और ऐसे में, आपके द्वारा लिए गए निर्णय भविष्य में आपको हानि पहुंचाने का काम करते हैं, तो इसे भी कमज़ोर बुध का लक्षण माना जाता है।  
  • बुध का कुंडली में नकारात्मक प्रभाव होने से व्यक्ति को कोई ऐसा रोग घेर लेता है जिसके बारे में तुरंत पता नहीं चल पाता है। इसके परिणामस्वरूप, आपको भविष्य में अनेक प्रकार की समस्याओं से जूझना पड़ता है। 
  • बुध की कुंडली में दुर्बलता का सीधा प्रभाव व्यक्ति की सुंदरता पर नज़र आता है।
  • यदि आपका बुध ग्रह कमज़ोर होता है तो, आपके रिश्ते महिला रिश्तेदारों के साथ ख़राब होने लगते हैं, ख़ासतौर पर बुआ और मौसी के साथ।     
  • बुध का आपकी कुंडली में नकारात्मक प्रभाव होने से परिवार के सदस्यों के साथ आपके रिश्ते न चाहते हुए भी बिगड़ने लगते हैं। साथ ही, घर में लड़ाई-झगङे और मतभेद का माहौल बना रहता है, जिसका कारण बुध का अशुभ प्रभाव होता है। 

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बुध का मेष राशि में गोचर: सरल एवं प्रभावी उपाय 

  • कुंडली में कुपित बुध को शांत करने के लिए बुधवार के दिन देवी दुर्गा के मंदिर जाएं और माता को हरे रंग की चूड़ियां अर्पित करें। 
  • बुधवार के दिन “ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:” मंत्र का जाप करें।
  • बुध ग्रह से शुभ परिणाम पाने के लिए बुधवार को प्रातःकाल स्नान करें और हरे रंग के वस्त्र धारण करने के बाद “ॐ बुं बुधाय नमः” का 108 बार जाप करें।
  • कुंडली में बुध देव को मज़बूत करने के लिए बहन, बेटी, साली और बुआ का आदर-सम्मान करें। साथ ही, उनके साथ रिश्ते को मधुर बनाकर रखें और उन्हें बुधवार के दिन कुछ मीठा खिलाएं। 
  • बुध महाराज को हरा रंग अत्यंत प्रिय है इसलिए बुधवार को हरी सब्जियों का दान करें और हरे रंग के कपड़े धारण करें। ऐसा करने से बुध ग्रह प्रसन्न होते हैं। 
  • बुध ग्रह की कृपा पाने के लिए के लिए हरी सब्जियों और आंवला का सेवन करना चाहिए। 
  • मान्यता है कि सुहागिन महिलाओं को हरी चूड़ियां भेंट में देने से कुंडली में बुध ग्रह की स्थिति मजबूत होती है।
  • दुर्बल बुध के नकारात्मक प्रभावों से मुक्ति पाने के लिए बुधवार के दिन तुलसी की पत्ती को धोएं और उसका सेवन करें। इस उपाय को करने से बुध देव के अशुभ प्रभाव में कमी आती है।     

कालसर्प दोष रिपोर्ट – काल सर्प योग कैलकुलेटर

बुध का मेष राशि में गोचर: राशि अनुसार प्रभाव और उपाय 

मेष राशि

मेष राशि के जातकों के लिए बुध देव तीसरे और छठे भाव के स्वामी हैं जो अब … (विस्तार से पढ़ें)

वृषभ राशि

वृषभ राशि वालों के लिए बुध महाराज आपके दूसरे और पांचवें भाव के…(विस्तार से पढ़ें)

मिथुन राशि

मिथुन राशि के जातकों की कुंडली में बुध देव एक महत्वपूर्ण ग्रह माने जाते हैं क्योंकि…(विस्तार से पढ़ें)

कर्क राशि

कर्क राशि वालों की कुंडली में बुध महाराज आपके बारहवें और तीसरे भाव के… (विस्तार से पढ़ें))

सिंह राशि

सिंह राशि के जातकों के लिए बुध महाराज आपके दूसरे और ग्यारहवें भाव के … (विस्तार से पढ़ें) 

कन्या राशि

कन्या राशि के जातकों के लिए बुध देव आपके लग्न भाव के स्वामी हैं जो अब अपनी…(विस्तार से पढ़ें)

तुला राशि

तुला राशि वालों की कुंडली में बुध ग्रह आपके सातवें भाव में गोचर करने जा … (विस्तार से पढ़ें)

वृश्चिक राशि 

वृश्चिक राशि वालों के लिए बुध देव को अशुभ ग्रह माना जाता है क्योंकि इनके… (विस्तार से पढ़ें) 

धनु राशि 

धनु राशि वालों की कुंडली में बुध देव आपके सातवें भाव के स्वामी हैं और इस भाव का…(विस्तार से पढ़ें)

मकर राशि

मकर राशि वालों के लिए बुध ग्रह आपके भाग्य भाव अर्थत नौवें भाव के स्वामी हैं। बता दें…(विस्तार से पढ़ें)

कुंभ राशि

कुंभ राशि के जातकों के तीसरे भाव में बुध ग्रह गोचर करने जा रहे हैं। बता दें…(विस्तार से पढ़ें)

मीन राशि

मीन राशि के जातकों के लिए बुध महाराज आपके चौथे और नौवें भाव …(विस्तार से पढ़ें)

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इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. बुध का मेष राशि में गोचर कब होगा?

मेष राशि में बुध का गोचर 30 अप्रैल 2026 को होने जा रहा है।

2. बुध ग्रह की राशियां कौन सी हैं?

बुध ग्रह मिथुन और कन्या राशि का स्वामी है।

3. मेष राशि का स्वामी कौन है?

राशि चक्र की पहली राशि मेष के स्वामी मंगल ग्रह हैं।