विकट संकष्टी चतुर्थी: हिंदू धर्म के अनुसार संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है और विकट संकष्टी चतुर्थी भी गणेश जी को ही समर्पित है। इस दिन ज्ञान और विघ्नों को दूर करने वाले गणेश जी की उपासना एवं व्रत करने का विधान है। एक वर्ष में कुल 12 संकष्टी चतुर्थी आती हैं और इस प्रकार हर मास में एक बार संकष्टी चतुर्थी आती है। वैशाख के महीने में चतुर्थी तिथि पर आने वाली संकष्टी चतुर्थी को विकट संकष्टी चतुर्थी के नाम से मनाया जाता है।

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विकट संकष्टी चतुर्थी कब है
05 अप्रैल, 2026 को विकट संकष्टी चतुर्थी मनाई जाएगी। इस दिन चंद्रोदय रात 09 बजकर 54 मिनट पर होगा। बता दें कि 05 अप्रैल को दोपहर 12 बजकर 02 मिनट पर चतुर्थी तिथि की शुरुआत होगी और इसका समापन 06 अप्रैल, 2026 को दोपहर 02 बजकर 13 मिनट पर होगा। इस दिन वज्र योग बन रहा है।
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विकट संकष्टी चतुर्थी का महत्व
चंद्र मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी पड़ती है। विघ्नों को दूर करने और अपने भक्तों को धन, शांति और ज्ञान देने वाले भगवान गणेश के लिए व्रत रखा जाता है। हर साल मनाई जाने वाली बारह संकष्टी चतुर्थी में से हर चतुर्थी भगवान गणेश के एक अलग रूप से जुड़ी होती है। साथ ही उससे एक पीठ और व्रत कथा भी होती है। विकट संकष्टी चतुर्थी का दिन आत्मनिरीक्षण करने, शुद्धि और ईश्वर का ध्यान करने के लिए उपयुक्त होता है।
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विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत
यदि किसी व्यक्ति को अपने जीवन में घोर संकटों का सामना करना पड़ रहा है, तो उसे विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत करना चाहिए। जीवन की समस्याओं को दूर करने का यह एक अमोघ उपाय है। व्रत करने से पहले इसे 4 या 13 वर्ष तक रखने का संकल्प लिया जाता है। इस अवधि के पूरा होने के बाद व्रत का उद्यापन कर दिया जाता है। इस व्रत के लिए चंद्रोदय व्यापिनी चतुर्थी तिथि को चुना जाता है लेकिन अगर दो दिन चंद्रोदय व्यापिनी चतुर्थी पड़ रही हैं, तो फिर प्रथम दिन को व्रत किया जाता है।
हिंदू पंचांग में प्रत्येक माह में दो चतुर्थी तिथि आती हैं। एक पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी जिसे संकष्टी चतुर्थी कहते हैं और दूसरी अमावस्या के बाद आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी जिसे विनायक चतुर्थी कहते हैं।
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विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने की विधि
अगर आप विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत करना चाहते हैं, तो इसकी विधि आगे बताई गई है:
- सबसे पहले चतुर्थी तिथि पर स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद साफ और धुले हुए वस्त्र पहनें।
- इसके बाद घर के पूजन स्थल में आएं और गणेश जी का ध्यान करते हुए व्रत रखने एवं मौन रहने का संकल्प लें।
- पूरा दिन संपूर्ण श्रद्धा के साथ व्रत रखें और फिर शाम को फिर से स्नान कर के पवित्र वेदी की रचना कर उसके ऊपर गणेश की मूर्ति या प्रतिमा स्थापित करें।
- अब आप भगवान गणेश का ध्यान एवं आह्वान करें। फिर विधि-विधान से षोड्शोपचार गणेश पूजन करें।
- संकष्टी के दिन गणेश जी को मोदक, सुपारी, दूर्वा और मूंग अर्पित करें। भगवान गणेश को ये सभी चीज़ें बहुत प्रिय हैं।
- गणेश जी की पूजा करने के बाद चंद्रोदय होने पर पुष्प आदि से चंद्रमा की पूजा करें और उन्हें अर्घ्य एवं नैवेद्य चढ़ाएं।
- पूजा के बाद ब्राह्मण भोज करवाएं और अंत में व्रत का पारण करें।
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कौन हैं विकट गणेश
भगवान गणेश के 32 दिव्य अवतारों में से एक विकट गणेश हैं। विकट का अर्थ भयानक या क्रूर होता है लेकिन विकट रूप में गणेश जी विनाशकारी नहीं बल्कि रक्षा करने वाले हैं। इस अवतार में गणेश जी अपने भक्तों की बड़ी मुश्किलों और अंधकारमय समय से रक्षा करते हैं। वे अपने भक्तों को नकारात्मकता, शत्रुओं जैसे कि अहंकार, क्रोध और लालच से बचाते हैं। विकट संकष्टी चतुर्थी पर गणेश जी से आध्यात्मिक अज्ञानता और बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना की जाती है।
विकट सकट चौथ का महत्व
इस चतुर्थी का संबंध गणेश जी से है जो बाधाओं को दूर करते हैं, ज्ञान प्रदान करते हैं और जीवन में सुख एवं समृद्धि देते हैं। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से भगवान गणेश की आराधना करने से मानसिक स्पष्टता, आंतरिक शक्ति और आध्यात्मिक जागृति बढ़ती है। शास्त्रों में संकष्टी चतुर्थी को बहुत शुभ माना गया है क्योंकि भगवान गणेश को प्रसन्न करने एवं उनकी कृपा पाने के लिए यह दिन सबसे मंगलकारी होता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से इस व्रत को रखता है और पूरे रीति-रिवाज़ से पूजा करता है, उसे कर्मों के बोझ और जीवन की चुनौतियों को दूर करने का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विकट संकष्टी चतुर्थी पर गणेश जी के विकट रूप की पूजा करने से सांसारिक कर्तव्यों एवं आध्यात्मिक विकास के बीच संतुलन बनाने की क्षमता बढ़ती है। इस अवसर पर गणेश जी के मंत्रों का जाप करना, मोदक चढ़ाना और संकष्टी चतुर्थी की कथा सुनना आध्यात्मिक चेतना को बढ़ाता है। इससे ईश्वर के साथ गहरा संबंध बनता है।
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विकट संकष्टी चतुर्थी पर क्या करते हैं
इस चतुर्थी पर निम्न कार्य किए जाते हैं:
- इस दिन सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक व्रत रखा जाता है। कुछ लोग निर्जल व्रत रखते हैं, तो वहीं कुछ लोग फल, दूध या सात्विक भोजन करते हैं। विकट संकष्टी चतुर्थी पर गणेश जी की पूजा की जाती है। इस दिन गणेश जी की विशेष पूजा होती है और उन्हें दूर्वा, मोदक, केले और लाल रंग के पुष्प चढ़ाए जाते हैं।
- चतुर्थी तिथि पर चंद्रोदय के बाद अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है। पूजा के दौरान संंकष्टी चतुर्थी व्रत कथा सुनना और पढ़ना महत्वपूर्ण होता है। इससे व्रत रखने के लिए आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं।
विकट सकट चौथ की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार एक समय एक राज्य में धर्मकेतु नामक एक ज्ञानी ब्राह्मण वास करता था। उसकी दो पत्नियां थीं जिनमें से एक का नाम सुशीला और दूसरी पत्नी का नाम चंचला था। उसकी पहली पत्नी सुशीला धार्मिक स्वभाव वाली महिला थी लेकिन चंचला को धर्म एवं धार्मिक कार्यों में बिलकुल भी रुचि नहीं थी। सुशीला अक्सर व्रत रखा करती थी जिसकी वजह से वह काफी दुर्बल हो गई थी जबकि चंचला की सेहत अच्छी थी।
कुछ समय के पश्चात् सुशीला के पुत्री और चंचला के पुत्र ने जन्म लिया। चंचला ने सुशीला से कहा कि तुम तो इतने व्रत-उपवास किया करती थीं फिर भी भगवान ने तुम्हें पुत्री दी। मुझे देखो मैंने तो कुछ भी नहीं किया फिर भी मुझे पुत्र मिला। चंचला के मुख से इन शब्दों को सुनकर सुशीला का मन बहुत आहत हुआ।
विकट सकट चौथ का व्रत आने पर सुशीला ने पूरे मन और भक्ति भाव से इस व्रत को किया। सुशीला की सच्ची भक्ति देखकर गणेश जी प्रसन्न हुए और उन्होंने उसे पुत्र का वरदान दिया। शीघ्र ही सुशीला ने एक पुत्र को जन्म दिया किंतु उसके पति धर्मकेतु की मृत्यु हो गई। इसके बाद चंचला अलग घर में रहने लगी। वहीं सुशीला अपने पति के ही घर में रहती थी। सुशीला का पुत्र गणेश जी के आशीर्वाद से बहुत ज्ञानी था और उसने अपने घर को धन-धान्य से भर दिया था।
यह सब देखकर चंचला को ईर्ष्या होने लगी और उसने मौका मिलते हुए सुशीला की बेटी को कुएं में धक्का दे दिया। हालांकि, भगवान गणेश ने उसकी रक्षा और जब चंचला ने यह सब देखा कि स्वयं भगवान गणेश सुशीला और उसके परिवार की रक्षा कर रहे हैं, तब उसे अपने कर्मों पर बहुत पछतावा हुआ और उनसे सुशीला से मांफी मांगी। तब सुशीला के कहने पर चंचला ने भी संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा और उसे भी गणेश जी की कृपा प्राप्त हुई।
विकट सकट चौथ के लिए ज्योतिषीय उपाय
- विकट संकष्टी चतुर्थी पर गणेश जी की पूजा होती है इसलिए इस दिन भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए पूजा के दौरान गुड़ और तिल से बने लड्डू का भोग लगाएं। इससे आपकी हर समस्या का निवारण होगा।
- इस चतुर्थी पर लहसुन का उपयोग नहीं करना चाहिए। इसके अलावा मांस-मदिरा, मछली इत्यादि का सेवन करने से भी बचना चाहिए।
- अगर आप व्रत रख रहे हैं, तो गणेश चतुर्थी पर सफेद या पीले रंग के वस्त्र पहनकर गणेश जी की पूजा करें।
- विकट संकष्टी चतुर्थी पर गणेश जी को 5 लड्डुओं का भोग लगाएं और गणेश मंत्र का जाप करें। ऐसा करने से भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
- विकट संकष्टी चतुर्थी के अवसर पर गणेश जी को लाल रंग का वस्त्र और लाल रंग के फूल अर्पित करने चाहिए। इससे मानसिक तनाव दूर होता है और मन शांत रहता है।
- विकट संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश को 21 हरी दूर्वा अर्पित करें। हर दूर्वा चढ़ाते समय मन में संतान प्राप्ति की कामना करें। चंद्र दर्शन के बाद फल या मिठाई से व्रत खोलें। मान्यता है कि यह उपाय संतान से जुड़ी बाधाओं को दूर करता है।
- एक नारियल पर मौली बांधकर उसे भगवान गणेश के सामने रखें। “ॐ गण गणपतये नमः” मंत्र का 11 बार जाप करें। अगरे दिन उस नारियल को किसी पवित्र स्थान या बहते जल में प्रवाहित कर दें। यह उपाय कार्यों में आ रही रुकावट को समा्त करता है।
- संकष्टी चतुर्ती की रात भगवान गणेश के सामने घी का दीपक जलाएं। दीपक में एक लौंग और एक इलायची डालें और ‘वक्रतुंड महाकाय’ मंत्र का 7 बार पाठ करें। यह उपाय धन आगमन और आर्थिक स्थिरता के लिए शुभ माना जाता है।
- बच्चों से भगवान गणेश को लाल फूल और मोदक अर्पित करवाएं। इसके बाद बच्चे के सिर पर हाथ रखकर गणपति से बुद्धि और एकाग्रता की प्रार्थना करें। इससे पढ़ाई में मन लगने लगता है और समझने की शक्ति बढ़ती है।
- पूजा के बाद 7 दूर्वा और थोड़ा अक्षत लाल कपड़े में बांध लें। इसे पूजा स्थान या तिजोरी में रखें। यह उपाय घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने में सहायक माना जाता है।
- पति-पत्नी साथ बैठकर “ॐ गणेशाय नमः” मंत्र का 21 बार जप करें। भगवान गणेश को मिठाई का भोग लगाएं और प्रसाद आपस में बाँट लें। इससे आपसी मतभेद कम होते हैं और प्रेम बढ़ता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बार विकट संकष्टी चतुर्थी 05 अप्रैल, 2026 को रविवार के दिन पड़ रही है।
वज्र योग बन रहा है।
इस दिन गणेश जी की पूजा करने का विधान है।