सर्वपितृ अमावस्या 2026: सर्वपितृ अमावस्या 2026 को महालय अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। यह 16 दिनों तक चलने वाले पितृपक्ष का अंतिम दिन होता है जो पितरों को समर्पित होता है। हिंदू धर्म में सर्वपितृ अमावस्या विशेष महत्व रखती है और इस दिन उनका श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती है। एस्ट्रोसेज एआई का यह ख़ास ब्लॉग आपको “सर्वपितृ अमावस्या 2026” से जुड़ी समस्त जानकारी प्राप्त होगी जैसे तिथि, मुहूर्त आदि। साथ ही, इस तिथि का धार्मिक महत्व और अचूक उपाय भी प्रदान करेंगे।

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सर्वपितृ अमावस्या 2026: तिथि एवं पूजा मुहूर्त
सर्वपितृ अमावस्या 2026 इस साल 10 अक्टूबर 2026, शनिवार को पड़ेगी। इस तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और पूर्वजों का तर्पण किया जाता है इसलिए कर्म संबंधी समस्याएं दूर होती हैं। साथ ही, पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।
सर्वपितृ अमावस्या 2026 तिथि: 10 अक्टूबर 2026, शनिवार
अमावस्या आरंभ: 9 अक्टूबर 2026 की रात 09 बजकर 37 मिनट से
अमावस्या समाप्त: 10 अक्टूबर 2026 की रात 09 बजकर 20 मिनट तक
कुतुप मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 45 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक
रोहिणी मुहूर्त: दोपहर 12 बजकर 31 मिनट से दोपहर 01 बजकर 17 मिनट तक
अपराह्न काल: दोपहर 01 बजकर 17 मिनट से दोपहर 03 बजकर 36 मिनट तक
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सर्वपितृ अमावस्या 2026: आध्यात्मिक महत्व
हिंदू धर्म में सर्वपितृ अमावस्या 2026 को पितृ पक्ष की समाप्ति का प्रतीक माना जाता है। इस तिथि पर पितरों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि सर्वपितृ अमावस्या पर इन कार्यों को करने से पितरों की आत्मा की शांति प्राप्त होती है। साथ ही, आध्यात्मिक प्रगति का मार्ग प्रशस्त होता है।
अश्विन अमावस्या को पितृ पक्ष का एक महत्वपूर्ण दिन माना जाता है और इस दिन उनका श्राद्ध किया जाता है, जिनका श्राद्ध पितृपक्ष में नहीं किया जाता है। जिन लोगों की मृत्यु की तिथि अज्ञात होती है या जिनका निधन असामान्य परिस्थितियों में हुआ हो, उनका श्राद्ध भी सर्वपितृ अमावस्या पर किया जाता है। पूर्वजों से परिवार की सुख-शांति और पितरों के आशीर्वाद की कामना की जाती है।
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सर्वपितृ अमावस्या 2026: श्राद्ध और तर्पण विधि
सर्वपितृ अमावस्या 2026 पर तर्पण और पितरों से संबंधित धार्मिक अनुष्ठान अपराह्न काल में किए जाते हैं। आप अपने परिवार के रीति-रिवाजों के अनुसार पुत्रों तर्पण कर सकते हैं:
- सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी में स्नान करें या पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। इसके पश्चात, सफेद या हल्के रंग के वस्त्र धारण करें।
- दक्षिण दिशा की तरफ मुंह करें और काले तिल एवं कुश के साथ पितरों का स्मरण करते हुए जल अर्पित करें।
- श्राद्ध के लिए चावल, खीर और पूरी जैसे सात्विक भोजन तैयार करें। पके हुए चावल और काले तिल से पिंड बनाकर पितरों को अर्पित करें।
- पंचबलि के अनुसार, भोजन का एक हिस्सा गाय, कुत्ते, कौए, चींटियों और देवताओं के लिए निकालें।
- ब्राह्मणों या किसी जरूरतमंद को भोजन कराएं। आप अपनी क्षमता के अनुसार कपड़े, तिल, अनाज या दक्षिणा देकर उन्हें विदा करें।
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सर्वपितृ अमावस्या 2026 पर करें ये उपाय
सर्वपितृ अमावस्या 2026 पर जातक अपने पितरों की कृपा एवं आशीर्वाद पाने के लिए नीचे दिए गए उपायों को करना शुभ रहेगा।
- संध्या के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल या घी का दीपक जलाएं। पूर्वजों से शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।
- जरूरतमंदों को अपने सामर्थ्य के अनुसार काले तिल, भोजन, कंबल या गर्म कपड़ों का दान करें।
- पितृ गायत्री मंत्र “ॐ पितृ गणाय विद्महे जगत धारिणे धीमहि तन्नो पित्रो प्रचोदयात्” का 108 बार जाप करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस साल सर्व पितृ अमावस्या 10 अक्टूबर 2026 को पड़ेगी।
इस दिन श्राद्ध और तर्पण के लिए दोपहर 01 बजकर 17 मिनट से दोपहर 03 बजकर 36 मिनट का समय अनुकूल रहेगा।
हाँ, सर्वपितृ अमावस्या पर सभी पितरों का श्राद्ध और तर्पण किया जा सकता है।