अनंत चतुर्दशी 2026: अनंत चतुर्दशी 2026 का पर्व 10 दिनों तक चलने वाले गणेशोत्सव का अंतिम दिन होता है। इस दिन भक्तों द्वारा गणेश विसर्जन किया जाता है। गणेश चतुर्थी पर भक्तिभाव और श्रद्धा से बप्पा को घर लेकर आते है और अनंत चतुर्दशी पर उन्हें अगले बरस जल्दी आने का वादा करके विदा करते हैं। हालांकि, अनंत चतुर्दशी और गणेश विसर्जन का आपस में कोई संबंध नहीं है।

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बता दें कि अनंत चतुर्दशी का पवित्र दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप को समर्पित होता है, और इस दिन अनंत सूत्र बांधने की परंपरा है। इस पर्व से महाभारत की एक विशेष कथा जुड़ी है। एस्ट्रोसेज एआई का यह विशेष ब्लॉग आपको “अनंत चतुर्दशी 2026” से जुड़ी विस्तृत जानकारी प्राप्त होगी जैसे तिथि, मुहूर्त आदि। साथ ही, आपको इस दिन की सही पूजा विधि, उपाय और महाभारतकालीन कथा से भी आपको अवगत करवाएंगे।
अनंत चतुर्दशी 2026: तिथि एवं पूजा मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, अनंत चतुर्दशी का पर्व इस साल 25 सितंबर 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन की पूजा मध्याह्न काल में करना विशेष रूप शहभ माना जाता है। अनंत चतुर्दशी पर अनंत सूत्र बांधने की भी परंपरा है। आइए अब नज़र डालते हैं अनंत चतुर्दशी 2026 के पूजा मुहूर्त पर।
अनंत चतुर्दशी पूजा मुहूर्त: 06:10:39 से 23:08:23 तक
अवधि:16 घंटे 57 मिनट
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अनंत चतुर्दशी 2026: धार्मिक महत्व
पंचांग के अनुसार, अनंत चतुर्दशी 2026 का पर्व हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। बात करें अनंत चतुर्दशी के अर्थ की, तो अनंत’ का अर्थ अनंत, शाश्वत और जिसका कोई अंत न हो” से है जबकि चतुर्दशी हिंदू माह में तिथि होती है। यह भगवान विष्णु के प्रमुख नामों में से एक है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु चातुर्मास के दौरान क्षीर सागर में शेषनाग पर विश्राम करते हैं।
हिंदू धार्मिक ग्रंथों में भगवान विष्णु ने 14 लोकों की रचना की और सृष्टि की रक्षा के लिए अलग-अलग रूपों में अवतार लिया। श्रीहरि की अनंत शक्तियों और दिव्य स्वरूप के कारण ही इन्हें ‘अनंत’ नाम से जाना जाता है, इसलिए इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना विधि-विधान से की जाती है और उनसे सुख-समृद्धि और स्थिरता की कामना करते हैं। अनंत चतुर्दशी के शुभ दिन पर अनंत सूत्र बांधने की भी परंपरा है। इस दिन भक्तजन भगवान अनंत का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
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अनंत चतुर्दशी 2026 से जुड़ी महाभारतकालीन कथा
अनंत चतुर्दशी से जुड़ी कथा का वर्णन महाभारत में भगवान श्रीकृष्ण और पांडवों के ज्येष्ठ पांडव युधिष्ठिर के बीच हुए एक प्रसंग में मिलता है। कथा के अनुसार, जब पांडव कौरवों के साथ खेले गए जुए में अपना राज्य और मान-सम्मान सब खो बैठे, तब उन्हें कई वर्षों के वनवास पर जाना पड़ा। वनवास के 12 वर्षों के इस कठिन समय में भगवान श्रीकृष्ण उनसे मिलने वन पहुंचे। उस समय युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण से पूछा कि क्या कोई ऐसा उपाय है, जिससे पांडव अपना खोया हुआ राज्य वापस पा सकें और इन परेशानियों से मुक्ति प्राप्त कर सकें।
तब भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को अनंत चतुर्दशी व्रत के बारे में बताया। उन्होंने आगे कहा कि यह व्रत भगवान स्वरूप को समर्पित होता है, जिन्हें भगवान विष्णु का शाश्वत स्वरूप माना जाता है। श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को अपने भाइयों और पत्नी के साथ श्रद्धा से अनंत चतुर्दशी व्रत को रखने, भगवान विष्णु की पूजा करने और अनंत सूत्र बांधने के लिए कहा। इसके बाद, पांडवों ने पूरे भक्ति और विश्वास के साथ अनंत चतुर्दशी व्रत किया।
ऐसी मान्यता है कि भगवान अनंत की कृपा से पांडवों को न सिर्फ़ उनका खोया हुआ राज्य वापस मिला, बल्कि यश, समृद्धि और वैभव की भी प्राप्ति हुई। अनंत चतुर्दशी की इस कथा से प्रेरणा मिलती है कि जीवन की कठिन परिस्थितियों में आस्था, भक्ति, धैर्य और दृढ़ संकल्प बनाए रखने से व्यक्ति को जीवन आगे बढ़ने की शक्ति मिलती है।
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अनंत चतुर्दशी 2026: पूजा विधि
अनंत चतुर्दशी 2026 के दिन भक्त भगवान विष्णु के अनत स्वरूप की पूजा करते हैं और अनंत सूत्र बांधते हैं, इसलिए यह पूजा सही विधि से करना आवश्यक होता है जो आप नीचे दी गई विधि से आप कर सकते हैं /
- अनंत चतुर्दशी 2026 के शुभ अवसर पर प्रातःकाल स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
- पूजा स्थान पर कलश की स्थापना करें और उस पर कुशा से बना अष्टदल कमल रखें या फिर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- सूती या रेशमी धागे में 14 गांठें लगाकर अनंत सूत्र तैयार करें। अब इस सूत्र को सिंदूर, केसर और हल्दी में डुबाएं। बता दें कि अनंत सूत्र की 14 गांठों को भगवान विष्णु द्वारा बनाए गए 14 लोकों का प्रतीक माना जाता हैं।
- अब भगवान विष्णु के सामने अनंत सूत्र रखें और षोडशोपचार पूजन करें।
- अनंत चतुर्दशी की पूजा के दौरान गए मंत्र का जाप करें।
“अनंत संसार महासमुद्रे मग्नं समभ्युद्धर वासुदेव।
अनंतरूपे विनियोजयस्व ह्यनंत सूत्राय नमो नमस्ते।”
- पूजा के बाद अनंत सूत्र हाथ में बांधें। धार्मिक मान्यताओं में अनंत सूत्र को पुरुष बाएं हाथ और महिलाएं दाएं हाथ में बांधती हैं जिसे हर साल अनंत चतुर्दशी के दिन बदला जाता है। इसे 14 वर्षों तक व्रत का हिस्सा माना जाता है।
- अनंत चतुर्दशी 2026 की पूजा के उपरांत ब्राह्मणों को भोजन कराएं और परिवार के साथ स्वयं भी प्रसाद का सेवन करें। शांति, समृद्धि और सुख-समृद्धि के लिए विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें या सुनें।
- इसके साथ ही 10 दिवसीय गणेश चतुर्थी उत्सव का भी समापन हो जाता है।
- भक्तजन गणेश जी की मूर्ति को धूमधाम से जल में विसर्जित करते हैं और “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ!” का नारा लगाते हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
इस साल अनंत चतुर्दशी का पर्व 25 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा।
साल 2026 में गणेश स्थापना का मुहूर्त सुबह 11 बजकर 02 मिनट से दोपहर 01 बजकर 31 मिनट तक रहेगा।
इस वर्ष गणेश विसर्जन 25 सितंबर 2026 पर किया जाएगा