गुरु पूर्णिमा 2026: सनातन धर्म में हर माह आने वाली पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व होता है जो प्रत्येक महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी के अगले दिन आती है। इसी क्रम में, आषाढ़ माह की पूर्णिमा को आषाढ़ी पूर्णिमा भी कहा जाता है। इसे गुरु पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन वेदों के रचयिता महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं। आषाढ़ी पूर्णिमा के साथ ही आषाढ़ माह की समाप्ति हो जाती है और हिंदू धर्म के पवित्र महीने सावन का आरंभ हो जाता है जिसे भगवान शिव का प्रिय मास कहा जाता है।

गुरु पूर्णिमा हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है जो गुरु के सम्मान में बहुत भक्तिभाव से मनाया जाता है। यह दिन गुरुओं को समर्पित होता है और इस अवसर पर शिष्य अपने गुरु के चरण छूकर उनका आशीर्वाद लेते हैं, और उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं। वैसे तो, हर पूर्णिमा को पुण्यदायी माना जाता है, लेकिन गुरु पूर्णिमा का महत्व अधिक है क्योंकि इसे पूरे देश में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है।
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सामान्य रूप से, गुरु पूर्णिमा के दिन लोग अपने गुरुओं के प्रति आभार व्यक्त करते हैं, उनकी पूजा-अर्चना करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। गुरु पूर्णिमा पर महर्षि वेदव्यास, जिन्हें भगवान विष्णु का अंश माना जाता है, विशेष रूप से उनका पूजन किया जाता है क्योंकि इसके बिना आपकी पूजा अधूरी मानी जाती है। इन सब बातों को ध्यान में रखकर एस्ट्रोसेज एआई आपके लिए “गुरु पूर्णिमा 2026” का यह विशेष ब्लॉग लेकर आया है जिसके माध्यम से आपको गुरु पूर्णिमा की सही तिथि, पूजा मुहूर्त और महत्व जैस महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी। साथ ही, इस दिन किन उपायों को करके आप अपने गुरुजी की कृपा पा सकते हैं, इससे भी हम आपको अवगत करवाएंगे। आइए अब हम आगे बढ़ते हैं और नज़र डालते हैं गुरु पूर्णिमा की तिथि और समय पर।
गुरु पूर्णिमा 2026: तिथि और समय
गुरु पूर्णिमा का दिन गुरुओं को समर्पित होता है और इस पर्व को हर साल आषाढ़ माह में मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, गुरु पूर्णिमा का पर्व प्रत्येक वर्ष आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। अंग्रेजी कैलेंडर में, यह दिन सामान्यतः जून या जुलाई में पड़ता है। बात करें वर्ष 2026 की, तो इस साल गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई, 2026 को मनाई जाएगी। यह दिन दान-पुण्य और गुरु को दक्षिणा देने के लिए बेहद शुभ माना जाता है। चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और जान लेते हैं गुरु पूर्णिमा 2026 का मुहूर्त।
गुरु पूर्णिमा तिथि: 29 जुलाई 2026, बुधवार
पूर्णिमा तिथि आरंभ: 28 जुलाई 2026 की शाम 06 बजकर 21 मिनट से,
पूर्णिमा तिथि समाप्त: 29 जुलाई 2026 की रात 08 बजकर 07 मिनट तक
नोट: सनातन धर्म में उदया तिथि को महत्व दिया जाता है इसलिए उदया तिथि के अनुसार आषाढ़ी पूर्णिमा या गुरु पूर्णिमा का पर्व 29 जुलाई 2026 को मनाया जाएगा।
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गुरु पूर्णिमा 2026 पर बनेगा शुभ योग
जब किसी व्रत एवं त्योहार पर शुभ योग का निर्माण होता है, तब उस दिन का महत्व और प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में, गुरु पूर्णिमा का दिन बेहद ख़ास रहने वाला है क्योंकि इस दिन शुभ माने जाने वाले प्रीति योग और हर्षण योग का निर्माण होने जा रहा है। इस तिथि पर पूरे दिन दोनों योग रहेंगे। प्रीति योग को प्रेम, सौहार्द और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। वहीं, हर्षण योग आपको कार्यों में सफलता प्रदान करता है। ऐसे में, गुरु पूर्णिमा पर की जाने वाली पूजा से जीवन में सुख-शांति और सफलता आएगी। साथ ही, आपको कार्यों में सकारात्मक परिणामों की प्राप्ति होगी।
अब हम आपको अवगत करवाते हैं गुरु पूर्णिमा या आषाढ़ी पूर्णिमा के महत्व से।
गुरु पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में गुरु को भगवान का दर्जा दिया गया है क्योंकि एक गुरु ही होता है जो अपने शिष्य को जीवन में सही मार्ग दिखाता है, और उसे भगवान तक पहुंचने की दिशा प्रदान करता है। गुरु केवल शिष्य को ज्ञान नहीं देता है, बल्कि जीवन को सही दिशा और प्रकाशित भी करते हैं। हिंदू धर्म में गुरु के महत्व का वर्णन संस्कृत भाषा में एक श्लोक के माध्यम से किया गया है जो इस प्रकार है: के
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः,
गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः।
इस श्लोक का अर्थ है “गुरु ब्रह्मा हैं, गुरु विष्णु हैं, गुरु ही शंकर हैं, गुरु ही साक्षात परब्रह्म हैं, उन सद्गुरु को प्रणाम।” इस श्लोक से स्पष्ट होता है कि हमारे जीवन में गुरु का स्थान कितना ऊंचा और महत्वपूर्ण है।
हिंदू धर्म की पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ी पूर्णिमा की तिथि पर ही महाभारत के रचयिता महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ था। उन्हें प्रथम गुरु के रूप में माना जाता है, क्योंकि उन्होंने ही मानव जाति को वेदों का ज्ञान प्रदान किया और उन्हें चार भागों में विभाजित किया। इसी वजह से महर्षि व्यास जी के जन्मदिन को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है, जिसे हम गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाते हैं।
भारत में गुरु पूर्णिमा के पर्व को बड़े श्रद्धाभाव और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस शुभ अवसर पर शिष्य अपने गुरु के प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं, उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेते हैं और उन्हें धन्यवाद देते हैं। साथ ही, पूर्णिमा तिथि होने के कारण इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का भी विशेष महत्व होता है। बता दें कि महर्षि वेदव्यास को स्वयं भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है।
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गुरु किसे कहते हैं और क्या है इसका अर्थ?
आगे बढ़ने से पहले हमें गुरु शब्द के अर्थ को समझना होगा। बता दें कि गुरु शब्द की उत्पत्ति दो शब्दों से मिलकर हुई है गु” यानी अज्ञान और “रु” यानी उसे दूर करने वाला। सरल शब्दों में गुरु वह व्यक्ति होता है जो हमारे जीवन से अज्ञान का अंधकार हटाकर हमें ज्ञान और सही दिशा की तरफ लेकर जाता है। वह न केवल सिखाता है, बल्कि हमारे जीवन को सकारात्मकता से भर देता है और आगे बढ़ने में मार्गदर्शन करता है।
गुरु का कार्य सिर्फ़ पढ़ाना नहीं होता है, बल्कि यह शिष्य के व्यक्तित्व को संवारने और उसे बेहतर इंसान बनाने में भी मदद करता है। गुरु के मार्गदर्शन से ही व्यक्ति अपने जीवन का सही उद्देश्य समझ पाता है और सफलता के मार्ग पर अग्रसर होता है। हालांकि, बता दें कि गुरु मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं, पहला शिक्षा गुरु और दूसरा दीक्षा गुरु। शिक्षा गुरु हमें किताबों और विषयों का ज्ञान देते हैं, जबकि दीक्षा गुरु हमारे भीतर छिपी क्षमताओं को पहचान कर उन्हें निखारते हैं जिससे वह हमें सरल एवं आध्यात्मिक मार्ग की ओर ले जाते हैं।
गुरु पूर्णिमा पर अवश्य करें स्नान
धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से दान-स्नान का विशेष महत्व माना गया है और गुरु पूर्णिमा के दिन इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। ऐसी मान्यता है कि पूर्णिमा तिथि पर गंगा या किसी पवित्र नदी या तालाब में स्नान करने से देवी-देवताओं के आशीर्वाद की प्राप्ति होती है। यदि आपके लिए ऐसा करना संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगा जल मिलाकर स्नान करना भी अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है। इससे भी गंगा जल में डुबकी लगाने के समान पुण्य मिलता है।
गुरु पूर्णिमा के दिन पवित्र जल में स्नान करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है, भाग्य मजबूत होता है और आर्थिक समस्याएं दूर होने लगती हैं। साथ ही, आषाढ़ी पूर्णिमा के अवसर पर ब्राह्मणों, गरीबों या जरूरतमंदों को पीले वस्त्र और मिठाई का दान करना बेहद शुभ माना जाता है। ऐसा करने से जीवन से सभी परेशानियों का अंत होता है और सकारात्मकता बढ़ती है।
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क्यों की जाती है गुरु पूर्णिमा पर वेदव्यास पूजा?
जैसा कि हमने आपको बताया कि गुरु पूर्णिमा या आषाढ़ी पूर्णिमा को महर्षि वेदव्यास के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। इस दिन महाभारत और वेदों के रचयिता महर्षि वेदव्यास के पूजन के बिना गुरु पूर्णिमा की पूजा अधूरी मानी जाती है क्योंकि इन्हें संसार के प्रथम गुरु का पद प्राप्त है।
इस पूर्णिमा के दिन महर्षि व्यास का जन्म हुआ था इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। इन्हें भगवान विष्णु का अंश और जगत के पालनकर्ता का स्वरूप माना जाता है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, व्यास जी द्वारा ही चारों वेदों का संकलन और उन्हें विभाजित किया गया था जिसकी उत्पत्ति स्वयं सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी ने की थी। इसके अलावा, व्यास जी ने महाभारत सहित कई पुराणों की भी रचना की जिसने मानव जाति को धर्म, ज्ञान और जीवन के मूल सिद्धांतों की समझ मिली।
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गुरु पूर्णिमा पर माँ लक्ष्मी की कृपा के लिए करें ये काम
कलह और विवाद से शांति: अगर आपके परिवार में मतभेद, विवाद और कलह की स्थिति हमेशा बनी रहती है, तो आप आषाढ़ पूर्णिमा 2026 के दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करें। पूजा के दौरान विष्णु जी को सफेद चंदन का तिलक लगाकर सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें। साथ ही, पूर्णिमा तिथि के दिन घर में दीपक जलाएं।
धन प्राप्ति के बनेंगे योग: धन प्राप्ति के लिए आषाढ़ पूर्णिमा पर माँ लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा करें। इस दौरान माता को लाल रंग के फूल और प्रसाद में खीर अर्पित करें। इसके अलावा, कनकधारा स्तोत्र का भी पाठ अवश्य करें क्योंकि ऐसा करना शुभ माना जाता है और आपके जीवन से धन संबंधित समस्याओं का अंत होता है।
माँ लक्ष्मी का मिलेगा आशीर्वाद: आषाढ़ पूर्णिमा के शुभ अवसर पर 11 कौड़ियों पर हल्दी लगाएं और फिर, देवी को समर्पित करें। इसके बाद, देवी लक्ष्मी के सामने घी का दीपक जलाएं और लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें। पूजा समाप्त होने के बाद इन कौड़ियों को अपनी तिजोरी में रखें।
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गुरु पूर्णिमा पर अवश्य पढ़ें ये कथा
हम यह भली-भांति जानते हैं कि गुरु पूर्णिमा का पर्व गुरुओं को समर्पित होता है और इस दिन वेदव्यास जी का जन्म होने के कारण ही गुरु पूर्णिमा को मनाया जाता है। धार्मिक ग्रंथों में गुरु पूर्णिमा के संबंध में कथा का वर्णन मिलता है जो हम आपको नीचे बताने जा रहे हैं।
पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु के अंश अवतार के रूप में महर्षि वेदव्यास ने धरती पर जन्म लिया था। उनके पिता का नाम ऋषि पराशर और माता देवी सत्यवती थी। इनकी रुचि बचपन से ही अध्यात्म में काफी थी और इसी वजह से उन्होंने वन जाकर तपस्या शुरू करने की इच्छा अपने माता-पिता के सामने प्रकट की। लेकिन, उनकी माता ने व्यास जी की इस इच्छा के लिए स्पष्ट रूप से मना कर दिया। महर्षि वेदव्यास ने अपनी माता को मनाने के लिए बहुत प्रयत्न किया और अंत में माता से उनकी बात मान ली। माता ने उन्हें आज्ञा देते हुए कहा कि जब तुम्हें घर की याद आए, तो वापस लौट आना।
इसके पश्चात, वेदव्यास जी जंगल की ओर तपस्या करने के लिए चले गए और कठोर तपस्या में लीन हो गए। इस तपस्या के दौरान उन्होंने संस्कृत भाषा का ज्ञान प्राप्त किया और इस ज्ञान के उपयोग से उन्होंने चारों वेदों, अठारह महापुराणों और महाभारत की रचना की। ऐसा माना जाता है कि महर्षि वेदव्यास आज भी हमारे बीच किसी न किसी रूप में उपस्थित हैं। हिंदू धर्म में महर्षि वेदव्यास को भगवान के रूप में पूजा जाता है। उनके नाम से देश में कई मंदिर भी बनाए गए हैं जहां लोग उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। आज भी वेदों में सबसे पहले महर्षि व्यास का नाम लिया जाता है।
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गुरु पूर्णिमा 2026 पर राशि अनुसार करें ये विशेष उपाय
मेष राशि: मेष राशि के जातक गुरु पूर्णिमा पर मंदिर जाएं और भगवान विष्णु की उपासना करें। इसके बाद, जरूरतमंदों और गरीबों को पीले वस्त्र या पीली मिठाई का दान करें। साथ ही, इस दिन अपने गुरु के दर्शन करें और उनका आशीर्वाद अवश्य लें।
वृषभ राशि: वृषभ राशि वाले गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर भगवान विष्णु, भगवान शिव और गुरु का पूजन करें। साथ ही, भगवद गीता या अन्य धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें। इसके पश्चात आप अपने सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद लोगों की सहायता करें।
मिथुन राशि: गुरु पूर्णिमा के दिन मिथुन राशि वालों को अपने गुरु द्वारा दिए गए मंत्रों का जाप करना चाहिए। साथ ही, गुरु को कुछ भेंट स्वरूप देकर आभार प्रकट करें और भगवान विष्णु की पूजा करें। प्रसाद के रूप में विष्णु जी को चावल की खीर का भोग लगाएं।
कर्क राशि: कर्क राशि वाले गुरु पूर्णिमा के अवसर पर मंदिर या घर के पूजा स्थान पर गुरु के चित्र के सामने घी का दीपक जलाएं। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से आपको अपार लाभ की प्राप्ति होगी।
सिंह राशि: सिंह राशि के जातकों को गुरु पूर्णिमा पर बच्चों और छात्रों को पढ़ाई की सामग्री दान में देनी चाहिए और अपनी क्षमतानुसार ज़रूरतमंदों की सहायता करें।
कन्या राशि: कन्या राशि वालों को गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर रात के समय चंद्रोदय होने पर चंद्र देव को जल अर्पित करें और फिर उनकी पूजा करें।
तुला राशि: तुला राशि के जातकों को गुरु पूर्णिमा पर परिवारजनों और करीबियों के साथ समय बिताने की सलाह दी जाती है। अध्यात्म और धर्म-कर्म पर चर्चा करें। साथ ही, किसी धार्मिक स्थान पर अपने गुरु का आशीर्वाद लें।
वृश्चिक राशि: गुरु पूर्णिमा के दिन वृश्चिक राशि वालों को गुरु मंत्र का जाप करना चाहिए और जरूरतमंदों एवं गरीबों को अपने सामर्थ्य के अनुसार भोजन करवाएं। साथ ही, आप अपने गुरु से आशीर्वाद प्राप्त करें।
धनु राशि: धनु राशि के जातक गुरु पूर्णिमा 2026 के दिन किसी तीर्थ स्थान की यात्रा करें और घर में सत्यनारायण की कथा सुनें।
मकर राशि: मकर राशि वाले आषाढ़ पूर्णिमा की रात चंद्र पूजन करें और गुरु मंत्र का जाप भी करें। इस दिन आप मंदिर में हवन भी करवा सकते हैं और भगवान विष्णु को चरणामृत का भोग अवश्य लगाएं।
कुंभ राशि: कुंभ राशि वालों को गुरु पूर्णिमा के दिन सत्य का पालन करना चाहिए और कुछ समय निकालकर अपने गुरु की सेवा करें। ऐसा करने से आपके अटके हुए कार्य बनने लगेंगे।
मीन राशि: मीन राशि के जातकों को इस पूर्णिमा तिथि के दिन धार्मिक कार्यों में हिस्सा लेना चाहिए। साथ ही, आप अपने गुरु के चरण छूकर उनका आशीर्वाद लें। इस उपाय को करने से आपका स्वास्थ्य उत्तम होगा और जीवन से समस्याएं भी दूर होंगी।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस वर्ष गुरु पूर्णिमा का पर्व 29 जुलाई 2026, बुधवार को मनाया जाएगा।
गुरु पूर्णिमा का पर्व महर्षि वेदव्यास जयंती के रूप में मनाया जाता है।
इस साल आषाढ़ पूर्णिमा 29 जुलाई 2026 के दिन पड़ेगी।