शनि जयंती 2026: भगवान सूर्य और माता छाया के पुत्र भगवान शनि देव को समर्पित होती है शनि जयंती। शनि देव को हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। वैदिक ज्योतिष में भगवान शनि को न्यायाधीश और कर्मफल दाता माना गया है जो मनुष्य को उनके कर्मों के अनुसार अच्छे और बुरे कर्मों का फल प्रदान करते हैं। सनातन धर्म में शनि देव को एक ऐसे भगवान का दर्जा दिया गया है जिनका नाम सुनते ही लोग भयभीत हो जाते हैं क्योंकि यह व्यक्ति को राजा से रंक और रंक से राजा बनाने की शक्ति रखते हैं। ऐसे में, शनि जयंती 2026 का पर्व बहुत ख़ास हो जाता है और आज हम अपने इस ब्लॉग में शनि जयंती 2026 के बारे में बात करेंगे।

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एस्ट्रोसेज एआई के इस ब्लॉग को विशेष रूप से हमारे पाठकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है जिसके अंतर्गत आपको “शनि जयंती 2026” से जुड़ी जानकारी विस्तारपूर्वक प्राप्त होगी जैसे तिथि और समय। साथ ही, इस दिन कैसे कर सकते हैं कुपित शनि को शांत? किन कामों को इस दिन करना चाहिए और किन कार्यों को करने से शनिदेव का प्रकोप आप पर टूट सकता है? इन सभी सवालों के जवाब हम आपको प्रदान करेंगे। लेकिन, इस बारे में विस्तार से जानने के लिए आपको हमारे ब्लॉग को अंत तक पढ़ना जारी रखना होगा।
शनि जयंती 2026: तिथि और पूजा मुहूर्त
न्याय और कर्म के देवता भगवान शनि को समर्पित होता है शनि जयंती का पर्व। इस दिन भगवान शनि की कृपा और आशीर्वाद को पाने के लिए भक्तजन पूजा-पाठ करते हैं। शनि ग्रह की साढ़ेसाती, ढैय्या और महादशा को काफी प्रभावशाली माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को शनि जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस तिथि को ज्येष्ठ अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार, यह तिथि सामान्य तौर पर मई या जून के महीने में आती है।
शनि जयंती 2026 की तिथि: 16 मई 2026, शनिवार
अमावस्या तिथि आरंभ: 16 मई 2026 की सुबह 05 बजकर 13 मिनट से,
अमावस्या तिथि समाप्त: 17 मई 2026 की रात 01 बजकर 33 मिनट तक।
चलिए अब हम आपको बताने जा रहे हैं कि शनि जयंती 2026 पर बन रहे शुभ योगों के बारे में।
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शनि जयंती 2026 पर बनेंगे दो शुभ योग
इस साल शनि जयंती का पर्व बहुत ख़ास रहने वाला है क्योंकि इस दिन दो बहुत शुभ योगों का निर्माण होने जा रहा हैं। बता दें कि शनि जयंती 2026 पर सौभाग्य योग निर्मित होने जा रहा है और यह 16 मई 2026 की सुबह 10 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। इस दौरान किए गए कार्य जीवन में सुख-समृद्धि और सफलता लेकर आते हैं। साथ ही, व्यक्ति के जीवन को उज्जवल बनाने का काम करता है। वहीं, शनि जयंती के दिन दूसरा बनने वाला शुभ योग बुधादित्य योग होगा। इस दिन सूर्य और बुध ग्रह वृषभ राशि में विराजमान होंगे और ऐसे में, शनि जयंती पर बुधादित्य योग में शनि देव की पूजा-पाठ करना फायदेमंद साबित होगा।
शनि जयंती 2026 का महत्व
धर्मग्रंथों के अनुसार, शनि जयंती का पर्व बहुत ख़ास माना जाता है क्योंकि इस दिन शनि देव का जन्म हुआ था इसलिए इसे सूर्य पुत्र के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। ज्योतिष में शनि देव को न्याय का देवता कहा जाता है जो हर व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। जिन लोगों के कर्म अच्छे होते हैं, उन्हें शनिदेव से डरने की जरूरत नहीं होती है। इसके विपरीत, शनि महाराज मेहनत करने वालो को सफलता देने के साथ-साथ उन्हें ऊँचाइयों तक पहुंचाेने का काम करते हैं। वहीं, जो लोग पापी होते हैं या फिर जिनके कर्म अच्छे नहीं होते है, उन्हें अपने जीवन में शनि का प्रकोप झेलना पड़ता है।
अब हम बात करते हैं शनि जयंती पर भगवान शनि की पूजा कैसे करनी चाहिए, ताकि उनके बुरे प्रभाव कम हो सकें। इस दिन कई लोग व्रत भी रखते हैं। अगर किसी की कुंडली में शनि दोष मौजूद हैं या फिर कुंडली में शनि कमज़ोर अवस्था में होते हैं, उन्हें इस दिन व्रत करना चाहिए। इसके अलावा, शनि मंदिर जाकर सरसों का तेल, काले तिल, नीले फूल और शमी के पत्ते चढ़ाने चाहिए। इससे शनि ग्रह शांत होते हैं और आपके जीवन से उनका नकारात्मक प्रभाव कम होता है। शनि जयंती के अवसर पर जो व्यक्ति सच्चे मन से पूजा करता है, उसे साढ़ेसाती और ढैय्या के बुरे असर से राहत मिलती है। साथ ही, व्यक्ति को करियर, नौकरी और व्यापार में भी अपार सफलता की प्राप्ति होती है।
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शनि जयंती 2026 का धार्मिक महत्व
धार्मिक दृष्टि से भी शनि जयंती को महत्वपूर्ण माना गया है, विशेष रूप से शनि देव को शांत करने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए। बता दें कि शनि देव को भगवान शिव का परम भक्त कहा जाता है जो सेवा, मेहनत और न्याय से जुड़े क्षेत्रों को भी नियंत्रित करते हैं। ज्योतिष में शनि ग्रह की गिनती सबसे प्रमुख ग्रहों में होती है। मान्यताओं के अनुसार, जहाँ भी शनि ग्रह की सीधी दृष्टि पड़ती हैं, तो वह व्यक्ति के जीवन में बदलाव और समस्याएं लेकर आती हैं।
पौराणिक ग्रंथों में वर्णित कथा के अनुसार, रावण ने शनिदेव को अपने महल में बंदी बनाया हुआ था और उन्हें हनुमान जी ने मुक्त करवाया था। इससे प्रसन्न होकर भगवान शनि ने कहा कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन से हनुमान जी की पूजा करेगा, उस पर शनि दोष का प्रभाव नहीं पड़ेगा। ऐसे लोगों पर हमेशा शनि देव की कृपा बनी रहेगी।
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शनि जयंती से जुड़ी पौराणिक कथा
धार्मिक ग्रंथों में वर्णित कथा के अनुसार, सूर्य देव का विवाह राजा दक्ष की पुत्री संज्ञा के साथ हुआ था और उनसे उन्हें तीन संताने मनु, यमराज और यमुना हुए। पौराणिक कथा के अनुसार, संज्ञा ने एक बार अपने पिता दक्ष से सूर्य के तेज से होने वाली परेशानी के बारे में जिक्र किया, तो राजा दक्ष ने अपनी पुत्री की इस बात पर ध्यान देना उचित नहीं समझा। प्रजापति दक्ष ने अपनी पुत्री से कहा कि अब तुम सूर्य देव की अर्धांगिनी हो, और पिता के ऐसा कहने पर संज्ञा ने अपने तपोबल के प्रभाव से अपनी छाया को उत्पन्न किया जिसका नाम उन्होंने सवर्णा रखा और वह उसे अपने स्थान पर रखकर तपस्या के लिए वन चली गई।
कुछ समय बाद सूर्य देव की पत्नी संज्ञा की छाया ने अपने गर्भ से शनि देव को जन्म दिया। शनि देव का रंग बेहद ही श्याम था। जब सूर्य देव को इस बात के बारे में पता चला कि सवर्णा उनकी अर्धांगिनी नहीं हैं, बल्कि उनकी पत्नी की छाया है, तो उन्होंने शनि देव को अपना पुत्र मानने से इनकार कर दिया। इस बात से शनि देव कुपित हो गए और उनकी दृष्टि सूर्य देव पर पड़ गई और इसके प्रभाव से सूर्य देव का रंग काला पड़ गया।
इस घटना से पूरे संसार में अंधकार छा गया और परेशान होकर सूर्य देवता भगवान शिव के पास सहायता के लिए गए। उस समय भगवान शिव ने सूर्य देव को देवी छाया से क्षमा मांगने के लिए कहा और उन्होंने शिव जी के कहे अनुसार किया। सूर्य देव के ऐसा करने के बाद उन्हें शनि देव के क्रोध से मुक्ति मिल गई।
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शनि जयंती 2026: सही पूजा विधि
शनि देव को कर्मफल दाता और न्याय के देवता का दर्जा दिया गया है क्योंकि यह मनुष्य को उसके अच्छे और बुरे कर्मों के आधार पर फल प्रदान करते हैं। ऐसे में, शनि जयंती 2026 पर शनि पूजा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। बता दें कि इस दिन शनि महाराज का पूजन साढ़े साती, ढैय्या और कुपित शनि को शांत करता है और उनका आशीर्वाद दिलाता है इसलिए इनकी पूजा शनि जयंती पर सही विधि से करना जरूरी होता है। इसकी सही पूजा विधि हम आपको नीचे प्रदान कर रहे हैं।
- शनि जयंती के दिन भक्त सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें।
- इसके बाद, स्वच्छ कपड़े पहनकर व्रत और पूजा का संकल्प लें।
- अब आप घर के पास स्थित शनि मंदिर जाएं और शनि देव के चरणों के दर्शन करें।
- मंदिर में आप शनिदेव को सरसों का तेल अर्पित करें।
- भगवान शनि को पूजा के दौरान काले तिल, सरसों का तेल, दीपक और नीले फूल श्रद्धाभाव से चढ़ाएं।
- शनि स्तोत्र, शनि चालीसा, शनि मंत्र और हनुमान चालीसा का पाठ करें।
- संभव हो, तो शाम के समय शनि मंदिर पुनः जाकर उनका दर्शन और पूजन करें।
- अंत में शनि देव की आरती करें और अनजाने में हुई भूल के लिए क्षमा याचना करें।
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शनि जयंती 2026 पर न करें ये काम
शनि देव की दृष्टि अशुभ मानी जाती है इसलिए इनसे बचने के लिए भगवान शनि की मूर्ति के सामने खड़े होने और उनकी आँखों में आंखें डालकर बचना चाहिए। साथ ही, शनि देव की पूजा के दौरान अपना मुख पश्चिम दिशा की तरफ रखें।
- शनि जयंती 2026 हो या सामान्य दिन कभी भी भगवान शनि की पूजा में तांबे के बर्तन का प्रयोग न करें क्योंकि तांबे का संबंध भगवान सूर्य से माना गया है। बता दें कि सूर्य देव के साथ शनि देव शत्रुवत संबंध रखते हैं इसलिए इनकी पूजा में तांबे का उपयोग करने से बचें।
- शनि जयंती के अवसर पर शनि ग्रह से जुड़ी कोई वस्तु खरीदकर लेकर आने से बचें क्योंकि इससे आपको उनका प्रकोप झेलना पड़ सकता है।
- शनि जयंती के दिन तेल. लोहा, नमक नहीं खरीदना चाहिए। अगर आपको इस दिन इन चीज़ों का दान करना है, तो इन्हें एक दिन पहले खरीदकर रख लें।
- शनि जयंती के शुभ अवसर पर मांस-मदिरा का सेवन करने से बचें, अन्यथा शनि ग्रह आपसे रुष्ट हो सकते हैं।
- इस दिन गलती से भी गरीबों और असहाय लोगों को परेशान नहीं करना चाहिए क्योंकि शनि देव को गरीबों के रक्षक कहा जाता है इसलिए शनि जयंती पर गरीबों को कष्ट न पहुंचाएं।
- शनि जयंती 2026 के दिन भूलकर भी पशु-पक्षियों को परेशान नहीं करें।
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साढे साती और ढैय्या से राहत के लिए शनि जयंती पर करें ख़ास उपाय
शनि चालीसा का पाठ: जीवन से दुखों के अंत के लिए शनि जयंती के अवसर पर शनि पूजा के दौरान शनि चालीसा का पाठ अवश्य करें। इस उपाय को करने से सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं।
शनि जयंती पर दान: शनि जयंती के शुभ दिन पर उड़द की दाल, जूते, चप्पल, काले रंग की वस्तुओं और छाता दान करना फलदायी माना जाता है।
पीपल के पेड़ का पूजन: शनि जयंती पर पीपल के पेड़ को जल अर्पित करें। साथ ही, शाम के समय पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। ऐसा कहा जाता है कि इस उपाय को करने से साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कम होता है।
शनि बीज मंत्र का जाप: इस दिन भगवान शनि के बीज मंत्र ‘ॐ प्रां प्रीं प्रों स: शनैश्चराय नमः‘ मंत्र का जाप करना शुभ होता है क्योंकि इससे शनि देव प्रसन्न होते हैं।
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शनि जयंती 2026 पर राशि अनुसार जरूर करें ये अचूक उपाय
मेष राशि: मेष राशि वाले शनि जयंती के दिन हनुमान जी को सिंदूर अर्पित करें और जरूरतमंदों को जूते-चप्पल का दान करें।
वृषभ राशि: वृषभ राशि के जातक इस दिन दही और चीनी का दान करें। साथ ही, आपके लिए भगवान शिव की पूजा करना शुभ रहेगा। इस उपाय से शनिदेव शांत होते हैं।
मिथुन राशि: मिथुन राशि वालों को शनि जयंती के अवसर पर ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए। इस दिन हनुमान जी की पूजा भी कल्याणकारी रहेगी।
कर्क राशि: शनि जयंती 2026 पर कर्क राशि के जातकों को शनि स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। आप इस दिन चावल और तिल का भी दान कर सकते हैं।
सिंह राशि: सिंह राशि वालों के लिए इस अवसर पर गेहूं और गुड़ का दान करना फलदायी साबित होगा। साथ ही, आप शनि मंत्र का भी जाप करें।
कन्या राशि: शनि जयंती के दिन कन्या राशि के जातक जरूरतमंदों को वस्त्र या कंबल का दान करें। साथ ही, भगवान शिव की पूजा करें।
तुला राशि: तुला राशि वाले शनि जयंती के दिन दही और चीनी का दान करें। इसके अलावा, इस अवसर पर आप शिवलिंग पर जल अर्पित करें।
वृश्चिक राशि: शनि जयंती पर वृश्चिक राशि वाले हनुमान जी की पूजा करें और प्रसाद के रूप में बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं।
धनु राशि: धनु राशि के जातक शनि जयंती पर काले तिल और काले वस्त्र का दान करें। साथ ही, पीले वस्त्र पहनकर शिवलिंग का जल से अभिषेक करें।
मकर राशि: मकर राशि के लोगों को इस दिन शनि देव को सरसों का तेल चढ़ाना चाहिए। शनि जयंती पर आप काले वस्त्र पहनकर शनि स्तोत्र का पाठ करें।
कुंभ राशि: कुंभ राशि वालों को शनि जयंती 2026 पर शनि स्तोत्र का पाठ करना शुभ रहेगा। साथ ही, आप इस दिन जानवरों को रोटी या पक्षियों को दाना खिलाएं।
मीन राशि: शनि जयंती के दिन मीन राशि वालों को सफाई कर्मचारियों को वस्त्र या मिठाई का दान करना चाहिए। इस दिन आप भगवान शिव के मंत्रों का भी जाप करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस वर्ष शनि जयंती का पर्व 16 मई 2026 को मनाया जाएगा।
भगवान शनि की कृपा और आशीर्वाद पाने के लिए शनिदेव का सरसों का तेल अर्पित करें और शनि चालीसा का पाठ करें।
हनुमान जी की पूजा से शनिदेव प्रसन्न होते हैं क्योंकि रावण ने अपनी लंका में भगवान शनि को बंदी बनाया हुआ था और हनुमान जी ने उन्हें लंकेश रावण की कैद से मुक्त कराया था।