उगादी 2026: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार उगादी एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है। यह नवीनीकरण, समृद्धि और विरासत का एक बड़ा एवं महत्वपूर्ण उत्सव है। भारत के कई राज्यों जैसे कि आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक आदि में उगादी का पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।

उगादी एक प्राचीन त्योहार है जिससे हिंदू नववर्ष की शुरुआत होती है। एस्ट्रोसेज एआई के इस विशेष ब्लॉग में आगे विस्तार से बताया गया है कि उगादी का क्या महत्व है, इस बार उगादी किस तिथि पर पड़ रही है, इस दिन क्या किया जाता है आदि। तो चलिए अब बिना देर किए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं उगादी 2026 के बारे में।
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कब है उगादी 2026
इस बार 19 मार्च, 2026 को उगादी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन से तेलुगु संवत्सर 2083 की शुरुआत होगी। 19 मार्च, 2026 को सुबह 06 बजकर 55 मिनट पर प्रतिपदा तिथि की शुरुआत होगी और इसका समापन 20 मार्च, 2026 को 04 बजकर 54 मिनट पर प्रतिपदा तिथि समाप्त होगी।
कैसे मनाते हैं उगादी 2026
उगादी से एक सप्ताह पहले से इसका जश्न शुरू हो जाता है। लोग अपने घरों की साफ-सफाई करना शुरू कर देते हैं, घरों को सजाते हैं, नए कपड़े खरीदते हैं और हिंदू नववर्ष मनाने के लिए जरूरी चीज़ें लेकर आते हैं। उगादी के दिन लोग नए कपड़े पहनते हैं, एक-दूसरे को शुभकामनाएं देतेहैं और समारोह में हिस्सा लेते हैं। इस दिन रंगोंली बनाई जाती है और पारंपरिक उगादी पकवानों का आनंद लेते हैं।
इस त्योहार के लोकप्रिय पकवानों में उगादी पचड़ी का नाम शामिल है। भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता के कारण हिंदू नववर्ष पूरे भारत में वैशाखी और गुड़ी पड़वा जैसे कई नामों से मनाया जाता है।
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उगादी 2026 की पूजन विधि
आप उगादी पर निम्न विधि से पूजन कर सकते हैं:
उगादी हिंदू धर्म में समृद्धि और एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है। इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर शरीर और आत्मा को शुद्ध करने के लिए तिल के तेल से स्नान किया जाता है। इसे अभ्यंग स्नान कहते हैं।
घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करने के लिए घरों के प्रमुख द्वार पर आम के पत्तों से बनी तोरण लगाई जाती है और घर को फूलों एवं रंगोली से सजाया जाता है।
परिवार का कोई बड़ा सदस्य या पंडित आदि नए साल का हिंदू पंचांग पढ़ते हैं।
देवी-देवताओं का आशीर्वाद पाने के लिए विशेष प्रार्थनाएं और पूजा की जाती हैं।
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भारत के अलग-अलग राज्यों में उगादी 2026
भारत के कई राज्यों मे उगादी का पर्व बहुत हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कनार्टक का प्रमुख त्योहार है। हालांकि, कई जगहों पर इसे अलग नाम से भी मनाया जाता है।
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना: यहां पर पूजा एवं अभ्यंग स्नान से पर्व की शुरुआत होती है। इस दिन घरों की अच्छे से सफाई की जाती है। लोग आम के पत्तों से तोरण बनाकर उसे अपने घर के मुख्य दरवाज़े पर लगाते हैं और रंगोली बनाते हैं। यहां पर घरों को सजाया जाता है। इस दिन उगादी पचड़ी बनाया जाता है जिसमें मीठा, खट्टा, कड़वा, मसालेदार, नमकीन और तीखा स्वाद होता है।
कनार्टक: इस राज्य में उगादी पर्व की शुरुआत तेल स्नान और प्रार्थनाओं से होती है। इसे नीम और गुड़ के मिश्रण के रूप में लिया जाता है जो कि जीवन के कड़वे और मीठे अनुभवों का प्रतीक है। यहां पर उगादी की पूर्व संध्या पर मंदिरों में विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है।
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उगादी 2026 पर आने वाले अन्य त्योहार
भारत के विभिन्न राज्यों में इस दिन अलग-अलग नाम से कई अन्य त्योहार मनाए जाते हैं जैसे कि महाराष्ट्र में इस दिन गुड़ी पड़वा मनाई जाती है। इस दिन घरों की छत पर जीत और संपन्नता के प्रतीक के रूप में ध्वज लगाया जाता है।
वहीं कश्मीर में इस दिन नवरेह नाम का पर्व मनाते हैं। इस दौरान कश्मीरी पंडित चावल, दही और फूलों की थाली से साल की शुरुआत करते हैं। सिंधी लोग इस दिन चेट्टी चंड मनाते हैं। यह इस समुदाय के आध्यात्मिक गुरु झूलेलाल के जन्मोत्सव का प्रतीक है। मणिपुर में इस दिन साजिबु नोंग्मा पंबा मनाया जाता है।
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उगादी 2026 का खास व्यंजन
उगादी पर्व का सबसे खास पहलू है उगादी पचड़ी। यह एक खास व्यंजन है जो जीवन की अलग-अलग भावनाओं को पहलुओं को दर्शाता है। इस डिश से लोगों को याद रहता है कि जिंदगी अलग-अलग तरह की भावनाओं को मिश्रण है और इन्हें शांति से स्वीकार कर लेना चाहिए।
इस डिश में नीम के पत्ते डालते हैं जो कि कड़वे होते हैं। ये जीवन की चुनौतियों और अड़चनों का प्रतीक है। इसमें गुड़ भी डाला जाता है जिसका स्वाद मीठा होता है और खुशियों एवं सफलता का कारक है। इस व्यंजन में इमली भी डालते हैं जो खट्टी होती है। इमली अचानक होने वाली घटनाओं को दर्शाती है। इसके अलावा कच्चा आम है जो खट्टा होता है। यह नए अवसरों को दर्शाता है। हरी मिर्च तीखी होती है और जोश एवं जुनून को दिखाती है। नमक नमकीन स्वाद देता है और जीवन में संतुलन का प्रतीक बनता है।
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21वीं सदी में उगादी कैसे मनाएं
उगादी एक पारंपरिक उत्सव है लेकिन नई पीढ़ी के लिए इसे और ज्यादा आकर्षक बनाने के लिए कुछ नई चीज़ें की जा सकती हैं:
- वर्चुअल सेलिब्रेशन: जो लोग परिवार से दूर रहते हैं, वे अब वर्चुली पंचांग श्रवणम और प्रार्थना में शामिल होते हैं।
- इको-फ्रेंडली उगादी: अब सिंथेटिक सजावट के बजाय इको फ्रेंडली रंगों से रंगोली बनाई जाती है और घर को सजाने में प्राकृतिक फूलों का इस्तेमाल किया जाता है।
- फ्यूज़न फेस्टिवल: यह पर्व संपन्नता और समृद्धि का प्रतीक है इसलिए इस दिन वस्त्रों, अन्न और धन आदि का दान देना एवं जरूरतमंद लोगों की मदद करने का बहुत महत्व है।
- दावत: इस दिन अनाथाश्रम, वृद्धाश्रम आदि में रहने वाले बच्चों और वृद्धजनों को भोजन करवाया जाता है। इसके अलावा स्थानीय कारीगरों से हाथ से बनी उगादी के त्योहार की सजावट की चीज़ें, मिट्टी के बर्तन और पारंपरिक बुनाई वाली चीज़ें खरीदें ताकि उनकी आजीविका बनी रहे।
- उपहार क्या दें: इस उगादी 2026 पर आप अपने दोस्तों और प्रियजनों को पौधे, आयुर्वेदिक पौधे आदि उपहार में दे सकते हैं।
- कुकिंग चैलेंज: इस उगादी पर आप अपने परिवार के सदस्यों के बीच एक कुकिंग प्रतियोगिता रख सकते हैं जिसमें हर सदस्य को उगादी पचड़ी या फिर इस त्योहार से जुड़ा अन्य कोई खास व्यंजन बनाना होगा।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गुड़ी पड़वा
19 मार्च, 2026 को है।
नहीं।