साल का पहला सूर्यग्रहण कुछ ही देर में: जानें हर छोटी-बड़ी बातें

बस कुछ ही पलों में साल का पहला सूर्य ग्रहण लगने वाला है। सूर्यग्रहण को बेहद ही महत्वपूर्ण खगोलीय घटना माना जाता है। कोरोना काल में सूर्य ग्रह का यह गोचर कुछ बड़े और महत्वपूर्ण बदलाव, परिवर्तन और प्रभावों का गवाह भी बन सकता है। बिना एक भी पल जाया किये आइये जान लेते हैं साल के इस पहले सूर्य ग्रहण से जुड़ी हर एक छोटी बड़ी और महत्वपूर्ण बातों की जानकारी। 

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2021 का पहला सूर्य ग्रहण: समय और दृश्यता 

साल का पहला सूर्य ग्रहण वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा। वलयाकार सूर्य ग्रहण का अर्थ हुआ कि, जब चंद्रमा सूर्य के सामने आते हुए, उसे इस प्रकार से ढक लेता है कि सूर्य बीच में से तो ढका हुआ प्रतीत हो, लेकिन उसके किनारों से रोशनी का एक छल्ला या अंगूठी बनता हुआ दिखाई दे। अब बात करें अगर इस ग्रहण के समय की तो,

साल का पहला ग्रहण: 13 बजकर 42 मिनट से प्रारंभ होकर 18 बजकर 41 मिनट बजे तक रहेगा। इसके अलावा यह ग्रहण उत्तरी अमेरिका के उत्तरी भाग, यूरोप और एशिया में आंशिक व उत्तरी कनाडा, ग्रीनलैंड और रूस में पूर्ण रूप से देखा जा सकेगा।

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सूतक काल: इसका अर्थ और इस दौरान क्या करें क्या न करें 

अब सवाल उठता है कि, सूतक काल क्या होता है? दरअसल सूतक काल किसी भी ग्रहण से पहले की समय अवधि को कहा गया है। ज्योतिष के जानकार इस समय को अशुभ मानते हैं और इसलिए इस दौरान कुछ विशेष कार्य वर्जित बताये गए हैं और साथ ही कुछ काम ऐसे भी बताये गए हैं जिन्हें करने से आप अपने जीवन से सूतक काल और ग्रहण के दुष्प्रभाव को कम या दूर कर सकते हैं।

इसके अलावा जानकारी के लिए बता दें कि, पंचांग के अनुसार, सूर्य ग्रहण से पूर्व चार प्रहर के लिए उसका सूतक माना जाता है। पंचांग में सूर्योदय से सूर्यास्त तक कुल आठ प्रहर होते हैं। अतः सूर्य ग्रहण में ग्रहण लगने के ठीक बारह घंटे पहले से सूतक काल शुरू हो जाता है। सूतक की यह अवधि ग्रहण के बाद ही समाप्त होती है। यदि आप जानना चाहते हैं कि, सूर्यग्रहण के सूतक काल के दौरान आपको क्या करना और क्या नही करना चाहिए तो पढ़ें हमारा यह विस्तृत लेख

सूर्य ग्रहण पर 148 साल बाद बन रहा है विशेष संयोग 

सूर्य ग्रहण को वैसे भी बेहद ही महत्वपूर्ण और ख़ास माना गया है। ऐसे में इस साल इस सूर्य ग्रहण को और भी ज्यादा ख़ास और महत्वपूर्ण बनाने के लिए कई बातों का संयोग बन रहा है। जैसे इसी दिन वट सावित्री का व्रत किया जा रहा है, इसी दिन ज्येष्ठ माह की अमावस्या है, और 148 सालों बाद सूर्य ग्रहण के दिन शनि जयंती का विशेष संयोग भी बन रहा है।

ऐसे में इन सभी बातों का संयोग हमारे आपके जीवन पर कुछ न कुछ प्रभाव तो अवश्य डालेगा ही। यदि आप शनि जयंती पर सूर्य ग्रहण के इस विशेष संयोग का अपनी राशि पर प्रभाव जानना चाहते हैं तो पढ़ें आचार्या विन्नी अरोड़ा का यह विशेष आर्टिकल

साल के पहले सूर्य ग्रहण का देश-दुनिया और सभी राशियों पर प्रभाव 

ज्योतिष में सूर्य ग्रह को आत्मा और आरोग्य का कारक माना गया है। ऐसे में सूर्य का ग्रहण अनुकूल तो नही कहा जा सकता, विशेषतौर पर तब जब पूरी दुनिया कोरोना वैश्विक महामारी की चपेट में है, भारत अभी किसी तरह से दूसरी लहर से उठने की कोशिश कर रहा है और जानकारों ने कोरोना की तीसरी लहर की चेतावनी दे दी है। ऐसे में इस समय में सूर्यग्रहण का होना इस बीमारी में वृद्धि की वजह बन सकता है।

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महामारी की चपेट के साथ-साथ इस ग्रहण से पड़ोसी देशों के साथ युद्ध के हालात भी बनने की प्रबल आशंका है। इस ग्रहण का देश और दुनिया पर विस्तृत प्रभाव जानने के लिए पढ़ें आचार्य मृगांक का यह विशेष आर्टिकल। 

ग्रहण से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें और दान का महत्व 

  • साल का पहला सूर्य ग्रहण अनुराधा नक्षत्र के अंतर्गत विक्रम संवत 2078 के दौरान ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को लगेगा।
  • ग्रहण काल और सूतक काल में कुछ कार्य निषेध बताये गए हैं। जैसे इस दौरान भोजन न करें, बाल न बनाएं, नाख़ून न काटें, सोयें नही, भगवान की मूर्ति छूने से बचें, इत्यादि।
  • ग्रहण काल और सूतक के दौरान आप ध्यान कर सकते हैं, सूर्य के बीज मन्त्रों का जप करें और साथ ही इस दौरान आप कुछ विशेष वास्तु उपाय भी कर सकते हैं। क्या हैं वो वास्तु उपाय जानने के लिए पढ़ें ये विशेष आर्टिकल।  इसके अलावा यदि आप ग्रहण से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण बातें जानना चाहते हैं तो आप हमारा यह ख़ास आर्टिकल भी पढ़ सकते हैं।

पहले सूर्य ग्रहण से सावधान रहे ये चार राशियाँ 

बस कुछ ही पलों में लगने वाला साल का पहला सूर्य ग्रहण मृगशिरा नक्षत्र के अंतर्गत ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को वृषभ राशि में लगेगा।कर्क राशि, वृश्चिक राशि और सिंह राशि के जातकों पर इस ग्रहण का विशेष प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। यदि इनमें से कोई भी राशि आपकी है तो अभी जान लें अपने जीवन पर इस ग्रहण का प्रभाव और उससे बचने के उपाय।  

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सूर्य ग्रहण: दान का महत्व 

पूजा पाठ की ही तरह ग्रहण के बाद भी दान पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है। कहते हैं ग्रहण के बाद दान करने से व्यक्ति अपने जीवन से ग्रहण के दुष्प्रभाव को कम, खत्म या दूर कर सकता है। ऐसे में जान लेते हैं कि, सभी बारह राशियों को क्या कुछ दान करना फलदायी साबित हो सकता है।

मेष राशि: लाल रंग के वस्त्र या अन्न का दान करें 

वृषभ राशि: सफ़ेद वस्तुओं जैसे दूध दही का दान करें 

मिथुन राशि: मूंग या हरे चारे का दान करें

कर्क राशि: चीनी, चावल का दान करें

सिंह राशि: तांबे के सिक्के, गेंहू का दान करें

कन्या राशि: हरे वस्त्र, हरी इलायची का दान करें

तुला राशि: पूजन सामग्री का दान करें

वृश्चिक राशि: पीली वस्तुओं, पीली मिठाई का दान करें

धनु राशि: केसर, चने की दाल इत्यादि का दान करें

मकर राशि: उड़द दाल, सरसों तेल का दान करें

कुंभ राशि: काली वस्तुओं, काला तिल का दान करें

मीन राशि: चने की दाल का दान करें

ग्रहण समाप्ति पर क्या करें?

एक बार जब ग्रहण समाप्त हो जाता है तो उसके साथ ही उसका सूतक काल भी समाप्त हो जाता है। ऐसे में जानकार बताते हैं कि, ग्रहण समाप्ति के बाद घर को अच्छी तरह से गंगाजल से साफ़ करके, खुद स्नान करने के बाद, पूजा पाठ करनी चाहिए। ऐसा करने से ग्रहण का दुष्प्रभाव आपके जीवन पर नहीं पड़ता है। यदि आप इसके बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं तो पढ़ें आचार्य मृगांक का यह विस्तृत आर्टिकल

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