शारदीय नवरात्रि 2026 चौथा दिन: नवरात्रि की चतुर्थी तिथि पर माँ कूष्मांडा की पूजा की जाती है, जो देवी दुर्गा का चौथा स्वरूप है। हिंदू पंचांग में अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि माँ कूष्मांडा को समर्पित है। इस दिन का संबंध सृजन, ऊर्जा, जीवन शक्ति और शक्ति से होता है। मां कूष्मांडा नाम तीन शब्दों ‘कु’ यानी थोड़ा, ‘ऊष्मा’ यानी गर्मी या ऊर्जा और ‘अंड’ यानी ब्रह्मांडीय ऊर्जा से मिलकर बना है।

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हिंदू मान्यताओं के अनुसार, जब चारों तरफ अंधकार था, तब देवी ने अपनी मुस्कान से ब्रह्माण्ड की रचना की थी। इनकी पूजा से जीवन शक्ति, अच्छा स्वास्थ्य, समृद्धि, सकारात्मकता और आध्यात्मिक प्रगति प्राप्त होती है। एस्ट्रोसेज एआई का यह विशेष ब्लॉग आपको शारदीय नवरात्रि 2026 के चौथे दिन की तिथि, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और इस तिथि पर किए जाए वाले उपाय प्रदान करेंगे।
शारदीय नवरात्रि 2026 चौथा दिन: तिथि एवं शुभ मुहूर्त
वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि का चौथा दिन 14 अक्टूबर 2026, बुधवार को पड़ेगा। इस दिन भक्त देवी दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा करते हैं। शुभ तिथि और शुभ मुहूर्त में माँ कूष्मांडा की पूजा करने से जातक को धन-समृद्धि, अच्छी सेहत, जीवनशक्ति और आंतरिक शक्ति की प्राप्ति होती है।
शारदीय नवरात्रि चौथा दिन: 14 अक्टूबर 2026, बुधवार
चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 13 अक्टूबर 2026 की रात 11 बजकर 28 मिनट से,
चतुर्थी तिथि समाप्त: 15 अक्टूबर 2026 की रात 01 बजकर 14 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त : सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 30 मिनट तक
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शारदीय नवरात्रि 2026: माँ कूष्मांडा पूजा का महत्व
हिंदू धर्म में माँ कूष्मांडा के स्वरूप का वर्णन शेर पर सवार आठ भुजाओं वाली देवी के रूप में किया गया है, इसलिए इन्हें अष्टभुजा भी कहा जाता है। इन्होने अपने हाथ में त्रिशूल, चक्र, तलवार, धनुष, बाण, अमृत, रक्त से भरे दो पात्र और जप माला धारण की हुई है। इनकी आठ भुजाएं शक्ति, समृद्धि और आध्यात्मिक प्रगति को दर्शाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा का संबंध सूर्य और इसकी ऊर्जा से माना जाता है। माँ की पूजा से भक्त को अच्छे स्वास्थ्य, आत्मविश्वास, ऊर्जा, समृद्धि और सकारात्मकता की प्राप्ति होती है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, कूष्मांडा की पूजा से कुंडली में सूर्य से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं। साथ ही, जातक में आत्मविश्वास, नेतृत्व, ऊर्जा और मान-सम्मान की प्राप्ति होती है।
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शारदीय नवरात्रि 2026 चौथा दिन: पूजा विधि
- संभव हो तो चतुर्थ नवरात्रि पर भक्त ब्रह्म मुहूर्त में उठें और पूजास्थल की सफाई करें। इसके बाद, स्नान करके पीले या हरे रंग के वस्त्र पहनें।
- कलश के पास मां कूष्मांडा की मूर्ति या चित्र स्थापित करें, फिर लाल या पीले फूल, अक्षत, कुमकुम और चंदन माँ को अर्पित करें।
- इसके पश्चात, माता को मालपुआ, पेठा, हरे फल या देसी घी से बनी मिठाई का प्रसाद के रूप में भोग लगाएं।
- घी का दीपक जलाएं और माँ को धूप दिखाएं। अब माँ का स्मरण करें और देवी कूष्मांडा के 108 बार बीज मंत्रों का जाप करें।
- दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ करें। पूजा समाप्त होने के बाद प्रसाद सबको दें और स्वयं भी ग्रहण करें।
शारदीय नवरात्रि 2026 चौथा दिन: शुभ रंग और उपाय
शारदीय नवरात्रि चतुर्थी तिथि का शुभ रंग: शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन पीले या हरे रंग के कपड़े धारण करें। ऐसा करना शुभ माना जाता है। इस रंग का संबंध सकारात्मक ऊर्जा, समृद्धि, प्रगति और सौहार्द से होता है।
मालपुआ का लगाएं भोग: माँ कूष्मांडा को प्रसाद में मालपुआ का भोग लगाएं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी को इसका भोग लगाने से अच्छी सेहत, दीर्घायु, जीवनशक्ति और मानसिक स्पष्टता मिलती है।
माँ कूष्मांडा मंत्र: शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन माँ कूष्मांडा के मंत्र “ॐ देवी कूष्मांडायै नमः” का 108 बार जाप करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन माँ कूष्मांडा की पूजा की जाती है।
इस साल चौथा नवरात्रि 14 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा।
इस दिन माँ कूष्मांडा को मालपुआ या पेठा का भोग लगाना चाहिए।