एकसाथ पड़ रही है चैत्र और शनि अमावस्या, आज कर लिया ये काम तो फिर कभी नहीं सताएंगे शनि महाराज!
सनातन धर्म एवं वैदिक ज्योतिष में अमावस्या का बहुत महत्व है। हर महीने की कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को अमावस्या पड़ती है। एक साल में कुल 12 अमावस्या पड़ती हैं और हर महीने में एक अमावस्या तिथि आती है। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र अमावस्या हिंदू वर्ष का अंतिम दिन होता है। इसे भूतड़ी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। अमूमन यह मार्च के आखिर या अप्रैल की शुरुआत में आती है।
आज एस्ट्रोसेज एआई के इस विशेष ब्लॉग में हम आपको चैत्र अमावस्या 2025 के बारे में बताने जा रहे हैं। इसके साथ ही इस बारे में भी चर्चा करेंगे कि इस दिन राशि अनुसार क्या दान करना चाहिए एवं चैत्र अमावस्या का क्या महत्व है और इस दिन किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। तो चलिए अब बिना देर किए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं चैत्र अमावस्या की तिथि एवं पूजन विधि के बारे में।
28 मार्च, 2025 को शाम को 07 बजकर 57 मिनट पर अमावस्या तिथि आरंभ होगी और इसका समापन 29 मार्च को शाम 04 बजकर 29 मिनट पर होगा। इस प्रकार चैत्र अमावस्या 29 मार्च को पड़ रही है।
शनि अमावस्या भी है इस दिन
चूंकि, यह अमावस्या शनिवार के दिन पड़ रही है इसलिए इस दिन शनिश्चरी अमावस्या भी मनाई जाएगी। शनि अमावस्या पर शनि देव को प्रसन्न करने एवं उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए उनसे संबंधित वस्तुओं जैसे कि लोहा, तेल और काले वस्त्र दान करने का बहुत महत्व है। इस दिन काले तिल और काली उड़द की दाल का भी दान कर सकते हैं। इस दिन पितरों को प्रसन्न एवं शांत करने के लिए पूजा-पाठ एवं पिंडदान करना चाहिए। इसके अलावा शनि देव की मूर्ति के आगे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
चैत्र अमावस्या पर बन रहा है शुभ योग
इस दिन ब्रह्म योग बन रहा है जिसकी शुरुआत 28 मार्च को 02 बजकर 06 मिनट पर होगी और 29 मार्च को रात 10 बजकर 02 मिनट पर यह योग खत्म होगा। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार ब्रह्म योग एक शक्तिशाली योग है जो कि अपार धन, बुद्धि, स्वास्थ्य, दीर्घायु और साहस प्रदान करता है।
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चैत्र अमावस्या का क्या महत्व है
पितरों का तर्पण करने के लिए अमावस्या तिथि को उपयुक्त माना जाता है। इस तरह चैत्र अमावस्या पर भी पितरों की शांति के लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं। इससे पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। चैत्र अमावस्या पर कौवे, गाय, कुत्ते या गरीब लोगों को खाना खिलाया जाता है या उन्हें अपने सामर्थ्य के अनुसार दान दिया जाता है।
गरुण पुराण में वर्णित है कि अमावस्या तिथि पर पूर्वज अपने वंशजों के घर आते हैं। इसलिए इस दिन पितरों के नाम पर दान करने से उच्च फल प्राप्त होता है। इस दिन व्रत रखने का भी बहुत महत्व है। ऐसा करने से पितृ दोष से मुक्ति मिल सकती है। इसमें अमावस्या तिथि से व्रत शुरू करके प्रतिपदा तिथि पर चंद्रमा के दर्शन करने पर व्रत संपूर्ण होता है।
अगर आप चैत्र अमावस्या पर व्रत रखना चाहते हैं, तो इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं। अगर संभव हो, तो इस दिन किसी पवित्र नदी में स्नान भी कर सकते हैं या फिर आप अपने नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
इसके बाद आप अपने घर के पूजन स्थल में दीपक जलाएं और व्रत का संकल्प लें। फिर एक लोटे जल में गंगाजल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।
इस दिन पितरों के नाम पर दान करना चाहिए। ऐसा करने से पितर प्रसन्न होते हैं एवं मनुष्य के जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।
चैत्र अमावस्या पर अपने इष्ट देव का ध्यान करना भी शुभ होता है।
अगर आपकी कुंडली में पितृ दोष है, तो इससे मुक्ति पाने के लिए आप चैत्र अमावस्या के दिन काले तिलों का दान कर सकते हैं। माना जाता है कि इस उपाय को करने से पितृ दोष दूर होता है और शनि देव की कृपा प्राप्त होती है।
पितरों की शांति के लिए ब्राह्मण को भोजन करवाना ज़रूरी होता है। इससे पितरों की आत्मा को तृप्ति मिलती है।
इसके अलावा पीपल के वृक्ष की पूजा करें, जल चढ़ाएं और शाम के समय दीपक जलाएं।
दरिद्रता दूर करने के लिए
अमावस्या तिथि पर तांबे के लोटे में लाल चंदन, गंगा जल और शुद्ध जल मिलाकर ‘ॐ घृणि सूर्याय नम:’ मंत्र का जाप करते सूर्य देव को अर्घ्य दें। इस उपाय को करने से गरीबी दूर हो जाती है।
इस दिन पितरों के नाम पर असहाय और गरीब लोगों को भोजन कराएं। इससे पैसों की तंगी दूर होती है और धन-संपत्ति की प्राप्ति होती है।
चंद्रमा कमज़ोर हो तो क्या करें
यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा कमज़ोर है, तो वह जातक अमावस्या के दिन गाय को दही और चावल खिलाए। इससे मन शांत रहता है।
चैत्र अमावस्या पर न करें ये गलतियां
सनातन धर्म में चैत्र अमावस्या का बहुत महत्व है इसलिए इस दिन तामसिक भोजन एवं मदिरा आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन प्याज़ और लहसुन से भी परहेज़ करना चाहिए।
इसके अलावा अमावस्या तिथि पर घर आए भिक्षुक या ब्राह्मण को खाली हाथ नहीं भोजना चाहिए।
अमावस्या पर देर तक सोने से बचना चाहिए बल्कि सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कर लेना चाहिए एवं रातभर ईश्वर का ध्यान करना चाहिए।
इस तिथि पर बाल एवं नाखून भी नहीं काटने चाहिए। ऐसा करना बहुत अशुभ होता है।
अमावस्या पर आप गरीबों को दान करें एवं बड़ों का सम्मान करें और किसी से भी अपशब्द न कहें।
चैत्र अमावस्या 2025 पर राशि अनुसार क्या दान करें
आप चैत्र अमावस्या पर राशि अनुसार निम्न चीज़ों का दान कर सकते हैं:
मेष राशि: आप मसूर की दाल, गुड़, लाल रंग के वस्त्र और तांबे के बर्तनों का दान करें। ऐसा करने से आपका कर्ज़ खत्म होगा, शत्रुओं का नाश और मानसिक शांति मिलेगी।
वृषभ राशि: चैत्र अमावस्या पर वृषभ राशि के जातक सफेद रंग के वस्त्र, दही चावल, मिश्री और शंख का दान करें। इससे आपके परिवार में सुख और धन में वृद्धि होगी।
मिथुन राशि: इस राशि वाले हरे रंग के कपड़े, मूंग की दाल, पान के पत्ते और हरे रंग का फूल दान में दें। इससे आपको अपने करियर में प्रगति मिलेगी।
कर्क राशि: आप चैत्र अमावस्या पर दूध, चावल, चांदी, सफेद रंग की मिठाई और मोती का दान करें। इस उपाय से आपके घर में शांति आएगी और आपकी मां की सेहत में सुधार आएगा।
सिंह राशि: आप गेहूं, गुड़, तांबे के बर्तन, लाल रंग के फल जैसे कि सेब और अनार का दान करें। इससे आपको करियर में उन्नति मिलेगी और आपके आत्मविश्वास में वृद्धि होगी।
कन्या राशि: चैत्र अमावस्या पर कन्या राशि वाले तुलसी, किताबों, स्टेशनरी, अनाज और हरी मूंग का दान करें। इससे आपको आर्थिक समृद्धि मिलेगी।
तुला राशि: आप इत्र, चंदन, सफेद रंग के वस्त्र, दही और सुगंधित फूल आदि का दान करें। इससे वैवाहिक जीवन में सुख आता है और प्रेम संबंध मज़बूत होते हैं।
वृश्चिक राशि: आप लाल मसूर की दाल, तांबे का सिक्का, बेलपत्र और लाल रंग के कपड़ों का दान करें।
धनु राशि: पीले रंग के वस्त्र, हल्दी, केले, घी, चने की दाल का दान करने से आपको लाभ होगा।
मकर राशि: इस राशि वाले सरसों के तेल, लोहे की वस्तुओं, उड़द की दाल और काले तिल का दान करें।
कुंभ राशि: आप चैत्र अमावस्या पर नीले रंग के कपड़ों, छाता, जूते और तिल आदि का दान करें।
मीन राशि: ये जातक मानसिक शांति के लिए अमावस्या तिथि पर पीले रंग की मिठाई, हल्दी, केसर, चंदन का दान करें और गाय को चारा खिलाएं।
हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारा यह लेख ज़रूर पसंद आया होगा। अगर ऐसा है तो आप इसे अपने अन्य शुभचिंतकों के साथ ज़रूर साझा करें। धन्यवाद!
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1. 2025 में चैत्र अमावस्या कब है?
उत्तर. चैत्र अमावस्या 29 मार्च को पड़ रही है।
प्रश्न 2. चैत्र अमावस के दिन क्या करना चाहिए?
उत्तर. इस दिन स्नान और दान करना चाहिए।
प्रश्न 3. अमावस्या की रात को क्या नहीं करना चाहिए?
उत्तर. इस दिन क्रोध, ईर्ष्या और मास मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए।
शनि गोचर के साथ ही लग रहा है सूर्य ग्रहण, इन राशियों को भुगतने पड़ेंगे भयंकर परिणाम
सूर्य ग्रहण 2025: एस्ट्रोसेज एआई की हमेशा से यही पहल रही है कि किसी भी महत्वपूर्ण ज्योतिषीय घटना की नवीनतम अपडेट हम अपने रीडर्स को समय से पहले दे पाएं और इसी कड़ी में हम आपके लिए लेकर आए हैं सूर्य ग्रहण 2025 से संबंधित यह खास ब्लॉग।
29 मार्च, 2025 को साल का पहला सूर्य ग्रहण लगेगा। इसी दिन एक और दिलचस्प एवं प्रभावशाली ज्योतिषीय घटना देखने को मिलेगी जो कि शनि का मीन राशि में गोचर है। आप पंचांग 2025 में भी इसे देख सकते हैं।
ज्योतिष में सूर्य ग्रहण को एक शक्तिशाली घटना के रूप में देखा जाता है जो कि बदलाव और परिवर्तन का समय होता है। जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है, तब वह कुछ क्षणों के लिए सूर्य की रोशनी को अवरूद्ध कर देता है जिसे सूर्य ग्रहण के रूप में जाना जाता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार इस समय जो चीज़ें अज्ञात या गुप्त होती हैं, वे सामने आ सकती हैं और जीवन में बड़े बदलाव ला सकती हैं। इस समय लोगों को अपने स्वास्थ्य खासतौर पर आंखों और हृदय को लेकर अधिक सतर्क रहने की ज़रूरत होती है। तो चलिए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं कि ज्योतिषीय दृष्टि से सूर्य ग्रहण 2025 का क्या प्रभाव पड़ेगा।
सूर्य ग्रहण प्रारंभ होने का समय(भारतीय स्टैंडर्ड टाइम के अनुसार)
सूर्य ग्रहण समाप्त होने का समय
दृश्यता का क्षेत्र
चैत्र मासकृष्ण पक्षअमावस्या तिथि
शनिवार, 29 मार्च, 2025
दोपहर 02 बजकर 21 मिनट से शुरू
शाम 06 बजकर 14 मिनट तक
बरमूड़ा, बारबदोस, डेनमार्क, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, उत्तरी ब्राज़ील, फिनलैंड, जर्मनी, फ्रांस, हंगरी, आयरलैंड, मोरक्को, ग्रीनलैंड, पूर्वी कनाडा, लिथुआनिया, नीदरलैंड, पुर्तगाल, उत्तरी रूस, स्पेन, सूरीनाम, स्वीडन, पोलैंड, पुर्तगाल, नॉर्वे, यूक्रेन, स्विट्जरलैंड, इंग्लैंड और संयुक्त राज्य अमेरिका का पूर्वी क्षेत्र)(यह ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं है)
नोट: सूर्य ग्रहण 2025 की बात करें, तो उपरोक्त तालिका में बताया गया समय भारतीय मानक समय (IST) के अनुसार है।
सूर्य ग्रहण 2025: सभी राशियों पर प्रभाव
मेष राशि
मेष राशि के बारहवें भाव में मीन राशि में सूर्य राहु के साथ विराजमान रहेंगे। ये अपनी योग्यता और वित्तीय समझ का सही उपयोग कर के अपनी आय और खर्चों को संभालने में सक्षम होंगे। इससे इनकी आर्थिक स्थिति बेहतर होगी। आपको अपनी जान-पहचान के लोगों के सहयोग से अपने लक्ष्यों को पूरा करने में मदद मिलेगी। आज आपको अपने भाई-बहनों और अपने अधीन काम करने वाले लोगों से अत्यधिक सहयोग मिलने की संभावना है। आप अपने परिवार को किसी तीर्थस्थल की यात्रा पर लेकर जा सकते हैं।
वृषभ राशि के चौथे भाव के स्वामी सूर्य देव हैं और यह भाव मां एवं सुख का होता है। सूर्य वृषभ राशि के ग्यारहवें भाव में राहु के साथ युति में बैठे हैं। इस समय काम को लेकर आपके फोकस में कमी आ सकती है जिससे आपके लिए अपने लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित कर पाना मुश्किल हो सकता है। इसका प्रभाव कार्यक्षेत्र में आपकी उत्पादकता पर भी देखने को मिलेगा। आपके लिए धार्मिक स्थल की यात्रा करने के योग बन रहे हैं। हालांकि, शाम तक चीज़ें आपके नियंत्रण में आ जाएंगी और आप अपनी गलतियों को पहचानने में सक्षम होंगे। आप आगे के लिए योजना बना सकते हैं। आपको अपने माता-पिता की सेहत का ख्याल रखने की सलाह दी जाती है। आज के दिन प्रेमियों को बेवजह की बातों पर झगड़ा करने से बचना चाहिए।
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मिथुन राशि
मिथुन राशि के तीसरे भाव के स्वामी सूर्य देव हैं और अब वह इस राशि के दसवें भाव में उपस्थित हैं। आपको एहसास होगा कि आपके अंदर धैर्य की कमी है जिसका असर आपके काम करने के तरीके पर पड़ सकता है। हालांकि, शाम तक या सूर्य ग्रहण 2025 के बाद कुछ दिनों के अंदर परिस्थिति बेहतर होने लगेगी। आपको अपनी संतान के स्वास्थ्य और शिक्षा पर ध्यान देने की आवश्यकता है। आप अपने शत्रुओं और प्रतिद्वंदियों पर हावी रहेंगे। हालांकि, मुश्किल निर्णय लेते समय निवेशकों को सावधान रहने की ज़रूरत है। यदि आप कहीं और जाना चाहते हैं, तो आपको कुछ दिनों के लिए अपने इस निर्णय को टाल देना चाहिए।
कर्क राशि के दूसरे भाव के स्वामी सूर्य ग्रह हैं जो कि अब राहु के साथ आपके नौवें भाव में रहेंगे। कर्क राशि वाले अपने करियर और नौकरी को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लेने में सक्षम होंगे जिससे उन्हें भविष्य में लाभ होने की उम्मीद है। आप कहीं घूमने की योजना बना सकते हैं। आपके अधीन काम करने वाले लोग आपके लिए सहायक साबित होंगे। आपको अपने भाई-बहनों की उपलब्धियों को लेकर कोई शुभ समाचार मिल सकता है। इसके अलावा अगर कोई कानूनी मुकदमा चल रहा है, तो आप उसमें जीत हासिल कर सकते हैं। अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए इस समय छात्र अधिक एकाग्र नज़र आएंगे।
सिंह राशि के पहले भाव के स्वामी सूर्य देव हैं और अब वह आपके आठवें भाव में विराजमान रहेंगे। बातचीत करने में कुशल होने के कारण आपको अपने करियर में सफलता प्राप्त होगी। सभी से विनम्रता से बात करने की वजह से आपकी प्रतिष्ठा में इज़ाफा होगा। खर्चे बढ़ने के कारण आपकी बचत प्रभावित हो सकती है। आपके सहकर्मी आपके निर्णयों में आपका समर्थन करेंगे जिससे आपके कार्य और तेजी से आगे बढ़ेंगे। प्रेमी एक-दूसरे से सकारात्मक विचार साझा कर सकते हैं जिससे उनके रिश्ते की नींव मज़बूत होगी।
कन्या राशि के बारहवें भाव के स्वामी सूर्य देव हैं जो कि अब आपके सातवें भाव में बैठे हैं। ये जातक अपने जीवनसाथी पर हावी होने की कोशिश कर सकते हैं जिससे इनके वैवाहिक जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। आपको अपनी नौकरी और कार्यक्षेत्र में दिए गए दायित्व बोझ लग सकते हैं। इस समय आपकी ऊर्जा काफी कम रह सकती है। आपको अपनी कड़ी मेहनत की वजह से आर्थिक स्तर पर सफलता मिलने के योग हैं। आप अपनी गरिमा को बनाए रखकर नकारात्मक लोगों से खुद को दूर रख सकते हैं।
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तुला राशि
तुला राशि के ग्यारहवें भाव के स्वामी सूर्य देव हैं जो कि अब इस राशि के छठे भाव में राहु के साथ युति में बैठे हैं। कुंडली का छठा भाव कर्ज़ और रोग का कारक होता है। चूंकि, यह भाव सरकार को भी दर्शाता है इसलिए जो जातक सरकारी नौकरी करते हैं, उनके ऊपर उच्च अधिकारी सवाल उठा सकते हैं या उन्हें अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। अत्यधिक कठोर बनने या दूसरों पर हावी होने की प्रवृत्ति के कारण आपकी अपने सहकर्मियों, परिवार के सदस्यों या अन्य लोगों से मतभेद होने की आशंका है। इससे आपके विकास में बाधा आ सकती है और आप अपने भविष्य के बारे में सोच पाने में असमर्थ हो सकते हैं। इससे आपके विचार और सफल होने की प्रेरणा पर प्रभाव पड़ सकता है। यह समय अपने शब्दों और कार्यों पर विचार करने एवं उनकी समीक्षा करने के लिए है।
वृश्चिक राशि के दसवें भाव के स्वामी सूर्य देव हैं जो कि अब आपके शिक्षा, व्यवसाय और रचनात्मकता के भाव यानी पंचम भाव में विराजमान रहेंगे। वृश्चिक राशि के जातकों को अपने अज्ञात शत्रुओं, बीमारी और पैसों की तंगी या चोरी होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। चूंकि, सूर्य आपके दशम भाव के स्वामी हैं इसलिए सूर्य गोचर 2025 की समयावधि आपके लिए ज्यादा अनुकूल नहीं रहने वाली है। आपके ऊपर कर्ज़ एवं वित्तीय समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इन्हें कार्यक्षेत्र में अपने सहकर्मियों या प्रतिद्वंदियों से खतरा हो सकता है। आपके अपने पिता, प्रोफेसर या सलाहकार से विवाद होने के संकेत हैं। ऐसे में आपको सावधान रहने की आवश्यकता है।
धनु राशि के नौवें भाव के स्वामी सूर्य देव हैं और अब सूर्य गोचर 2025 के दौरान वह राहु के साथ आपके चौथे भाव में विराजमान रहेंगे। अत्यधिक काम करने की वजह से आप थका हुआ महसूस कर सकते हैं। इसके अलावा आपकी एकाग्रता में भी कमी आने के संकेत हैं। इस गोचर के प्रभाव के कारण आप लापरवाह और सुस्त हो सकते हैं इसलिए आपको इस समय धैर्य बनाए रखने की सलाह दी जाती है। आप अपनी लंबी दूरी की यात्राओं को कुछ समय के लिए टाल दें। आपके सभी पुराने निवेश घाटे में जा सकते हैं। छात्रों को अत्यधिक प्रयास करने की ज़रूरत है। वहीं विवाहित जातकों को किसी भी बात पर अपने जीवनसाथी से बहस करने से बचना चाहिए।
मकर राशि वाले जातक अपने काम और करियर में बहुत ज्यादा व्यस्त रहने वाले हैं। आपको कम मेहनत करने पर भी सफलता मिलने के योग हैं। आपको पूर्व में किए गए अपने निवेश से अच्छा लाभ मिलने की संभावना है। आप अपने निजी जीवन और करियर दोनों का आनंद ले पाएंगे। आपकी लोकप्रियता में इज़ाफा देखने को मिलेगा। आप कोई नया व्यवसाय शुरू सकते हैं। आप इस समय अपने जीवनसाथी के साथ अपने विवादों को सुलझा सकते हैं।
पहले की चुनौतीपूर्ण स्थितियों के ठीक होने की वजह से कुंभ राशि के जातक सूर्य ग्रहण 2025 के दौरान राहत महसूस कर सकते हैं। कार्यक्षेत्र में आपको अपने नेटवर्क से फायदा हो सकता है। आपको काम के सिलसिले में विदेश यात्रा पर जाने का मौका मिल सकता है। इस समयावधि में पारिवारिक जीवन में सुख-शांति बनी रहेगी और प्रेम संबंध भी फल-फूलेंगे। आप अपने परिवार के लिए कलात्मक या रचनात्मक वस्तुएं ला सकते हैं। आप अपने परिवार या दोस्तों को कहीं बाहर घुमाने भी लेकर जा सकते हैं।
मीन राशि के छठे भाव के स्वामी सूर्य देव हैं जो कि अब आपके पहले भाव में रहेंगे। यह स्थिति आपको नकारात्मक लग सकती है लेकिन इससे आपको अशुभ परिणाम प्राप्त नहीं होंगे बल्कि कुछ हद तक इससे आपको मदद ही मिलेगी। इस समय आपके अंदर रचनात्मकता बढ़ सकती है जिससे आपकी अपने घर को रेनोवेट करने की इच्छा हो सकती है। आप अपने घर या ऑफिस को बेहतर बनाने के लिए कुछ सामान खरीद सकते हैं। इससे समाज में आपकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी। इसके अलावा आपके और आपके जीवनसाथी के बीच अच्छे संबंध रहेंगे। इससे आपको अपने निजी जीवन में संतोष महसूस होगा। आपके अपने पार्टनर, सहकर्मियों और दोस्तों के साथ चल रहे मतभेद अब सुलझ सकते हैं। यदि पहले से कोई मुकदमा या विवाद चल रहा है, तो आपको इस संबंध में शुभ समाचार मिल सकता है।
ग्रहण के दौरान शरीर पर तेल लगाने या स्पा जाने या मालिश करवाने से बचें।
यदि संभव हो, तो ग्रहण के दौरान कहीं भी यात्रा करने से बचना चाहिए।
ग्रहण शुरू होने से पहले तुलसी के पत्ते का सेवन करना चाहिए।
आप ग्रहण के दौरान धार्मिक ग्रंथों का पाठ और मंत्रों का जाप कर सकते हैं।
सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य मंत्र ‘ॐ सूर्याय नम:’ का जाप करना भी लाभकारी होता है।
सूर्य ग्रहण के समय ईश्वर का ध्यान करें और आप शुभ कार्य जैसे कि दान आदि भी कर सकते हैं। आप अपनी इच्छा के अनुसार दान कर सकते हैं।
सूर्य ग्रहण के दौरान गेहूं का दान करने से आर्थिक लाभ होता है।
सूर्य आत्मा के कारक हैं इसलिए सूर्य ग्रहण के दौरान योग और ध्यान करना लाभकारी रहता है। इससे शांति मिलती है एवं आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
ग्रहण के समाप्त होने पर स्नान करना चाहिए।
सूर्य ग्रहण 2025: गर्भवती महिलाओं के लिए सावधानियां
वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य ग्रहण के दौरान दुनियाभर के लोगों पर नकारात्मक ऊर्जाएं हमला करने लगती हैं। इसलिए विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं को सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि गर्भावस्था में महिला के शरीर के अंदर कई तरह के हार्मोनल बदलाव आते हैं जिसके कारण नकारात्मक ऊर्जाएं आसानी से इन पर हमला कर सकती हैं। ग्रहण के दौरान खासतौर पर गर्भवती महिलाओं के लिए स्वस्थ रहना बहुत महत्वपूर्ण होता है। आगे सूर्य ग्रहण 2025 के दौरान गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा के लिए कुछ उपाय बताए गए हैं।
कभी भी सूर्य ग्रहण के दौरान नंगी आंखों से सूर्य की ओर नहीं देखना चाहिए क्योंकि इससे आंखों को नुकसान पहुंच सकता है। चूंकि, आजकल ज्यादातर महिलाएं कामकाजी होती हैं और अगर आप गर्भवती हैं और आपको काम के लिए घर से बाहर निकलना है, तो आपको अधिक सावधान रहना चाहिए।
अगर आप गर्भवती हैं और आपका ग्रहण के दौरान बाहर जाना ज़रूरी है, तो आप सुरक्षा मानकों को पूरा करने वाले चश्मे या ग्रहण को देखने वाले अन्य उपकरणों का प्रयोग करें।
जिन महिलाओं की कुंडली में सूर्य कमज़ोर होता है, उन्हें अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि सूर्य आंखों की रोशनी एवं आरोग्य बल या स्वास्थ्य के कारक हैं।
यदि आप गर्भवती हैं, तो ग्रहण के दौरान और सूतक काल में सुईं का इस्तेमाल करने से बचें। इसके अलावा इस समय सोना भी नहीं चाहिए।
परंपरा के अनुसार ग्रहण के समय कुछ भी खाना-पीना वर्जित है, हालांकि गर्भवती महिलाओं को हाइड्रेट रहना चाहिए और खूब पानी पीना चाहिए। किसी भी तरह की समस्या से बचने के लिए आप खीरे जैसे फल खा सकती हैं।
अगर आपको काम को लेकर सार्वजनिक स्थान पर जाना पड़ रहा है, तो आप लोगों से दूरी बनाकर रखें और खासतौर पर भीड़भाड़ वाली जगहों से दूर रहें। अगर आपकी प्रेग्नेंसी के आखिरी महीने चल रहे हैं, तो आप किसी भी ऐसी परिस्थिति से बचें जहां पर धक्का-मुक्की होने या तनाव होने का डर रहे।
कुछ गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान होने वाली उत्तेजना या तनाव से चिंता हो सकती है। अगर आपको तनाव या असहज महसूस हो रहा है, तो आप घर से बाहर न निकलें और आराम करें।
यदि आप थका हुआ या असहज महसूस कर रही हैं, तो आपको अपने शरीर पर ध्यान देना चाहिए और आराम करना चाहिए। प्रेग्नेंसी में थकान होना आम बात है इसलिए काम से ब्रेक लेने में हिचकिचाएं नहीं और ज्यादा थकान न होने दें।
यदि संभव हो, तो सूर्य ग्रहण के दौरान कुछ भी खाएं-पिएं नहीं।
ग्रहण के समय नुकीली चीज़ों का इस्तेमाल करने से बचें।
कुछ परंपराओं के अनुसार ग्रहण के दौरान मंत्र जाप या प्रार्थना करना शुभ माना जाता है।
मान्यता है कि ग्रहण से पहले और बाद में स्नान करना चाहिए।
पूरे ढ़के हुए कपड़े पहनें या विशेष ताबीज़ पहनना लाभकारी हो सकता है।
सूर्य ग्रहण 2025: स्वास्थ्य पर प्रभाव
वैदिक चिकित्सा ज्योतिष में सूर्य ग्रहण को इम्युनिटी के कमज़ोर होने और जीवनशैली में कुछ बदलाव करने को दर्शाता है। यह महत्वपूर्ण घटनाओं जैसे कि नई नौकरी शुरू करने या किसी रिश्ते को खत्म करने का संकेत भी दे सकता है। सूर्य हृदय, हड्डियों, मांसपेशियों और आंखों आदि का कारक है और सूर्य ग्रहण 2025 के दौरान लोगों को इन अंगों से संबंधित समस्याएं होने का खतरा अधिक रहता है। यदि किसी व्यक्ति को पहले से ही इन अंगों से जुड़ी कोई समस्या है, तो उन जातकों को विशेष रूप से सावधानी बरतनी चाहिए।
सूर्य ग्रहण का स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है
सूर्य ग्रहण स्वास्थ्य से संबंधित चिंताओं को दूर करने के लिए बदलाव लाने की प्रेरणा दे सकता है।
यह लोगों को अपनी ऐसी पुरानी आदतों, धारणाओं और भावनाओं को छोड़ने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है जो अब उनके विकास में सहायक नहीं हैं।
सूर्य ग्रहण छिपी हुई बातों या रहस्यों को उजागर कर सकता है।
सूर्य ग्रहण का लाभ कैसे उठाएं
अतीत को पीछे छोड़कर विकास और नवीनीकरण के नए अवसरों को अपनाएं।
स्पष्ट उद्देश्य निर्धारित करें, अपने लक्ष्यों पर विचार करें, अपनी राशि के अनुसार मार्गदर्शन के लिए किसी ज्योतिषी से परामर्श लें और ध्यान करें।
अपने लक्ष्यों को निर्धारित कर उन्हें प्राप्त करने का प्रयास करें।
अपने जीवन के बारे में सोचें और जो चीज़ें आपको रोक रही हैं, उन्हें छोड़ने की कोशिश करें।
आप सच्चाई का सामना करें जिससे आपको विकास करने और विश्वसनीय बनने में मदद मिले।
इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1. सूर्य ग्रहण को सकारात्मक क्यों नहीं माना जाता है?
उत्तर. सूर्य ग्रहण को नकारात्मक माना जाता है क्योंकि इस दौरान सूर्य राहु या केतु की छाया में आ जाता है और ग्रहण के समय सूर्य की किरणों का प्रभाव नकारात्मक पड़ सकता है।
प्रश्न 2. किस राशि में सूर्य ग्रहण 2025 लगेगा?
उत्तर. यह ग्रहण मीन राशि में लगेगा।
प्रश्न 3. किस महीने में सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है?
उत्तर. चैत्र मास, कृष्ण पक्ष।
हिन्दू नववर्ष 2025: चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (विक्रमी संवत् 2082) की विशेष भविष्यवाणी
हिंदू नव वर्ष 2025 इस बार 29 मार्च 2025 शनिवार की शाम 16 बजकर 27 मिनट से आरंभ हो जाएगा। लेकिन, सूर्योदय कालीन तिथि ग्रहण करने के कारण सनातन धर्म का नव वर्ष 2025 यानी कि विक्रम संवत् 2082 इस वर्ष 30 मार्च 2025 रविवार के दिन मनाया जाएगा। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को हिंदू नव वर्ष की शुरुआत माना जाता है और इसी दिन से विक्रम संवत बदल जाता है। इस बार 29 मार्च को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा प्रारंभ होगी, लेकिन उदया तिथि के अनुसार, चैत्र नवरात्रि और नव वर्ष उत्सव 30 मार्च 2025, रविवार के दिन पूरे हर्षोल्लास से मनाया जाएगा।
सनातन धर्म प्राचीन काल से ही अस्तित्व में रहा है और चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को हिंदू धर्म का नव वर्ष मनाया जाता है इसलिए यह सभी सनातन धर्म को मानने वाले लोगों के लिए एक विशेष और अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है जो इस वर्ष भी प्रत्येक वर्ष की भांति भक्ति भाव और भव्य तरीके से मनाया जाएगा। सनातन धर्म के लोग इस पर्व को पूरे विधि-विधान और उत्साह के साथ मनाएंगे। मां दुर्गा की शक्ति आराधना का पवित्र पावन चैत्र नवरात्रि भी 30 मार्च 2025 से शुरू हो जाएगा और इसी दिन घट स्थापना भी होगी।
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को नूतन संवत्सर का आरंभ होता है। यह विशेष दिन सभी के लिए अत्यंत शुभ समय लेकर आता है। यही वजह है कि इस दिन को सभी अपने निवास स्थान पर अपने कुल गोत्र और संप्रदाय के अनुसार ध्वज लगाकर विधि विधान से मनाते हैं। इस दिन अपने घर को सजाना चाहिए, प्रकाश करना चाहिए, मंगल गीत गाने चाहिए, रोशनी करनी चाहिए, तोरण को लगाना चाहिए तथा मंगल स्नान करने के बाद इस दिन विशेष रूप से देवी-देवताओं, कुल पुरोहित, ब्राह्मणों, गुरुजनों और धर्म ध्वज की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। इस दिन विशेष रूप से अपने ध्वज के नीचे बैठकर सभी को पूजा-अर्चना करनी चाहिए। इस दिन नए वस्त्र-आभूषण धारण करने चाहिए और अपने व्यक्तिगत ज्योतिषी से नए संवत्सर का भविष्यफल भी जानना चाहिए जिससे आप अपने आने वाले समय को और बेहतर बना सकें।
नए संवत्सर का आरंभ होना यानी हिंदू नव वर्ष का शुरू होना सभी के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है इसलिए ज्योतिषी से पूरे वर्ष का पूर्ण अवलोकन भी करवा लेना चाहिए। इससे हमें पता चलता है कि हमारे जीवन में किस प्रकार की घटनाएं पूरे वर्ष संवत्सर के दौरान घट सकती हैं। हम यह भी जानने की उत्सुकता रखते हैं कि नया संवत्सर हमारे देश और दुनिया के लिए तथा आम इंसान के लिए किस प्रकार के परिणाम लेकर आएगा? ईश्वर की कृपा से और ग्रहों के गोचर एवं चाल के परिणाम स्वरूप किस प्रकार के परिणाम हम सभी को प्राप्त होंगे।
इस वजह से हम चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि यानी कि वर्ष लग्न कुंडली का विशेष रूप से अवलोकन करते हैं। जब भी हमें नव वर्ष के बारे में भविष्यवाणी करने की आवश्यकता होती है, तो हम चैत्र शुक्ल प्रतिपदा यानी कि वर्ष लग्न कुंडली का अवलोकन विशेष रूप से करते हैं और उसके साथ ही वर्ष जगत लग्न कुंडली का भी अवलोकन करते हैं। इन्हीं के आधार पर पूरे संवत्सर में होने वाली शुभ-अशुभ घटनाओं के बारे में पूर्ण रूप से विचार किया जाता है और यह जानने का प्रयास किया जाता है कि आने वाला संवत्सर किस प्रकार की अच्छी और बुरी परिस्थितियों को जन्म देने वाला है।
(चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 2025 वर्ष लग्न कुंडली)
बृहत् कुंडली में छिपा है, आपके जीवन का सारा राज, जानें ग्रहों की चाल का पूरा लेखा-जोखा
हिंदू नव वर्ष 2025 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रम संवत् 2082 जिसे हम नूतन वर्षारंभ या नूतन संवत्सर आरंभ भी कहते हैं, उसकी कुंडली सिंह लग्न की बनी है। लग्न के स्वामी सूर्य महाराज अष्टम भाव में चंद्रमा, बुध, शुक्र और राहु के साथ विराजमान हैं। शनि महाराज कुंभ राशि में सप्तम भाव में विराजमान हैं और केतु दूसरे भाव में कन्या राशि में हैं। बृहस्पति महाराज वृषभ राशि में दशम भाव में उपस्थित हैं, तो मंगल महाराज मिथुन राशि में एकादश भाव में उपस्थित हैं। यहां पर ध्यान देने की बात है कि चंद्रमा, बुध और शनि अस्त अवस्था में हैं जबकि शुक्र वक्री अवस्था में विराजमान हैं। मंगल भाग्य स्थान के स्वामी होकर एकादश भाव में विराजमान हैं जबकि पंचमेश और अष्टमेश बृहस्पति दशम भाव में विराजित हैं।
लग्नेश सूर्य का अष्टम भाव में जाना ज्यादा अनुकूल नहीं है, लेकिन त्रिकोणेश बृहस्पति का दशमस्थ केंद्र में जाना राजयोग कारक परिणाम देने में सक्षम है। मंगल की स्थिति भी अनुकूल है। सप्तम भाव में शनि स्वराशि में होकर मजबूत और दिग्बली अवस्था में हैं। विपरीत राजयोग की स्थितियां भी निर्मित हो रही हैं।
अभी ऊपर हमने यह जाना कि नूतन वर्ष 2025 की प्रवेश लग्न कुंडली में ग्रह किस स्थिति में हैं और कौन से ग्रह कौन सी राशियों में गोचर कर रहे हैं जिससे हमारे जीवन पर विभिन्न प्रकार के प्रभाव पड़ सकते हैं। चलिए अब आगे बढ़ते हैं और यह जानने का प्रयास करते हैं कि वर्ष लग्न कुंडली के अनुसार नूतन संवत्सर 2082 यानी हिंदू नव वर्ष 2025 हमारे देश और देशवासियों के लिए तथा अन्य देशों और उनमें रहने वाले लोगों को किस तरह से प्रभावित करने की संभावना है:
उपरोक्त कुंडली में मीन राशि में सूर्य, बुध, चंद्र, शुक्र और राहु ये पांच ग्रह विराजमान हैं। सूर्य लग्नेश अष्टम भाव में उपस्थित हैं जो कि प्राकृतिक आपदाओं को दर्शाता है और ऐसे में, प्राकृतिक प्रकोप, प्राकृतिक आपदाएं, राजनीतिक आपदा, भूकंप, बाढ़, अग्निकांड आदि के कारण जन-धन की हानि होने के योग बन सकते हैं।
सप्तम भाव में शनि अपनी राशि में उपस्थित होकर लग्न को देख रहे हैं जो कि कुछ जटिल समस्याओं को जन्म दे सकते हैं।
ग्रहों की स्थिति के अनुसार, पूर्व और उत्तर-पश्चिम तथा दक्षिण की ओर से भारत के विरोधी देश अपनी कुछ सक्रियता दिखा सकते हैं। इसके प्रति सरकार को सतर्क रहना होगा।
बृहस्पति महाराज राजयोग निर्मित कर रहे हैं और चतुर्थ भाव पर दृष्टि डाल रहे हैं जिससे भारत की आर्थिक समृद्धि बढ़ने के योग बनेंगे। विश्व पटल पर भारत की प्रगति आश्चर्यजनक रूप से होने की संभावना बनेगी।
नवम स्थान पर शनि की दृष्टि होने के कारण राजनीतिक क्षेत्र में उठापटक होने के योग बनेंगे। कई राजनीतिक पार्टियों में एकता बढ़ने की स्थिति बनेगी, लेकिन भाजपा का प्रभाव बढ़ने के योग बनेंगे।
वर्ष 2082 की वर्ष प्रवेश कुंडली में सिंह लग्न उदित हो रहा है। यह संवत् आम जनजीवन के लिए और विशेष रूप से कृषक समुदाय के लिए ज्यादा लाभप्रद होने की संभावना नहीं है।
देश के दक्षिणी राज्यों में जीव-जंतुओं से कष्ट होने की संभावना जनता को हो सकती है।
आमतौर पर ग्रहों की इस स्थिति के अनुसार छह महीने तक अनाज के सस्ते होने की संभावना बनेगी। कुछ स्थानों पर बादल फटने जैसी स्थिति और भारी वर्षा से जनहानि के समाचार मिल सकते हैं।
देश के पश्चिमी राज्यों में धातुएं महंगी हो सकती हैं जैसे सोना आदि। वहीं, देश के उत्तरी भागों में अधिक वर्षा से हानिकारक घटनाएं हो सकती हैं।
देश के पूर्वी भाग में कृषि वर्ग को भारी हानि उठानी पड़ सकती है जबकि देश के मध्य में स्थित राज्यों में राजनीतिज्ञों में मतभेद और शासन सत्ता में उलटफेर होने के योग बन सकते हैं।
भारत की प्रभाव राशि मकर है जिसके स्वामी शनि स्वराशि के होने से आर्थिक और सामाजिक रूप से प्रगति होने के योग बनेंगे।
उपरोक्त कुंडली कुंभ लग्न की है जिसके स्वामी शनि उच्च राशि के शुक्र, राहु और बुध के साथ दूसरे भाव में विराजमान हैं। कन्या राशि में अष्टम भाव में केतु उपस्थित हैं। सूर्य मेष राशि में तीसरे भाव में, बृहस्पति वृषभ राशि में दूसरे भाव में, मंगल अपनी नीच राशि कर्क में छठे भाव में और चंद्रमा तुला राशि में नवम भाव में विराजमान हैं। आइए जानते हैं इस कुंडली से आने वाले समय की क्या जानकारी मिलती है:
जगत लग्न कुंडली में लग्नेश शनि और भारत की प्रभाव राशि मकर के स्वामी शनि पंचमेश और अष्टमेश बुध के साथ शुक्र व राहु संयुक्त विराजमान हैं। इसके परिणामस्वरूप, भारत के सीमावर्ती प्रांतों जैसे कि लद्दाख, मिजोरम, कश्मीर आदि अशांत क्षेत्रों में सैन्य क्षमता को बढ़ाने पर ध्यान देना होगा। भारत के शत्रु देश विशेष रूप से चीन और पाकिस्तान आदि की गतिविधियां और कुछ अवांछित घटनाएं अशांति उत्पन्न कर सकती हैं। नीच राशि के मंगल छठे भाव में बैठकर चंद्रमा को देख रहे हैं और उनकी कुंभ लग्न पर दृष्टि भी है जिससे अश्विन और पौष मास के बीच किसी प्रकार की महामारी जैसी परेशानी उत्पन्न होने की संभावना बन सकती है।
इस कुंडली में बृहस्पति महाराज जो आय भाव और धन भाव के स्वामी हैं। वह चतुर्थ भाव में विराजमान हैं जिससे भारत का व्यापार तेजी से बढ़ेगा और देश की प्रगति होगी और अर्थव्यवस्था में सुधार आएगा।
सूर्य के तीसरे भाव में उच्च राशि में और शुभ ग्रह बृहस्पति के केंद्र भाव में होने से भारत में खुशहाली के योग बन सकते हैं।
लग्नेश शनि के दूसरे भाव में राहु, बुध व शुक्र के साथ विराजमान होने के कारण विश्व में मुस्लिम राष्ट्रों जैसे कि इजरायल, ईरान आदि में प्रतिशोध की भावना बढ़ सकती है जिससे युद्ध,अपराध और मानवता के खिलाफ अशांति का वातावरण उत्पन्न हो सकता है।
यूक्रेन और रूस के युद्ध के बीच विश्व के कुछ अन्य देशों में भी प्रतिशोध की भावना विश्व की शांति को भंग करने का कार्य कर सकती है।
जगत लग्न कुंडली में शुक्र नवमेश होकर शनि और राहु के साथ बैठे हैं जिससे ऊर्जा संयंत्र और परमाणु क्षेत्र क्षतिग्रस्त होने का खतरा भी बना रहेगा। इन पर संकट मंडराता रहेगा जिससे दुनिया डर के वातावरण में जीने को मजबूर हो सकती है।
दूसरे भाव में राहु, बुध और शुक्र, शनि के साथ विराजमान होने से भारत की आर्थिक स्थिति अच्छी होने की कगार पर आएगी। लेकिन, उसके लिए हद से ज्यादा प्रयास करने की आवश्यकता पड़ेगी और कुछ नए उद्योग-धंधों की स्थापना करना आवश्यक होगा।
उपरोक्त ग्रह स्थितियों के अनुसार, जुलाई 2025 तक यूरोपीय देशों के लिए समय कठिन रहेगा। हत्याकांड, भूकंप, समुद्री तूफान जैसी स्थितियां बन सकती हैं। जून-जुलाई में शनि मंगल का षडाष्टक योग भी युद्ध जैसी अशांति दे सकता है।
जून 2025 से अगस्त 2025 के बीच यूरोपीय देशों में भयंकर अशांति फैलने के योग बन सकते हैं। शनि और मंगल के समसप्तक संबंध और कुंभ राशि के राहु के कारण आतंकवादी घटनाओं में भी बढ़ोतरी हो सकती है। साथ ही, कई क्षेत्रों में युद्ध जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। इसी समय समुद्री तूफान, भूकंप, आदि की स्थिति भी बनेगी और किसी अत्यंत प्रतिष्ठित व्यक्ति का पद खाली हो सकता है।
इस दौरान चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, ब्राजील, रूस, जर्मनी, पोलैंड, इजरायल, ईरान, यूक्रेन, हंगरी जैसे देशों के बीच शस्त्रों की होड़ दिखाई देगी जिससे विश्व का वातावरण अशांत हो सकता है।
भारत के संदर्भ में बात करें तो, मार्च से अप्रैल तक शनि-मंगल की स्थिति भारत की राजनीतिक पार्टियों के बीच अति महत्वपूर्ण रह सकती है जिससे राजनीतिक दलों में प्रलोभन की प्रवृत्ति बढ़ेगी और उससे निराशाजनक परिणाम मिलेंगे। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी का प्रभुत्व अभी बना रहने की संभावना है।
शनि और राहु का प्रभाव मई के अंत तक किसी अत्यंत महत्वपूर्ण व्यक्ति के लिए विशेष दुखद रहने की संभावना है।
इसी दौरान मंगल और राहु का षडाष्टक योग और शनि की सूर्य पर दृष्टि भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में आतंकवाद के कारण अशांति को जन्म दे सकती है।
इस दौरान नाटो देशों में भी परस्पर वैमनस्य बढ़ने की संभावना रहेगी।
जून से जुलाई के अंत तक का समय राजनीति के लिए कठिन रहेगा। इस दौरान छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, कश्मीर, उत्तर प्रदेश में अवांछित घटनाक्रम और अभूतपूर्व घटनाएं हो सकती हैं। भारत के सीमावर्ती प्रांत चीन और पाकिस्तान की गतिविधियों से अशांत हो सकते हैं।
अगस्त से सितंबर के मध्य तक का समय शनि और मंगल की स्थिति के कारण राजनीतिक अस्थिरता और अशांति का संकेत दे रहा है। इस दौरान चीन और पाकिस्तान की गतिविधियों से सावधान रहना बहुत ज्यादा आवश्यक होगा।
शनि-मंगल और सूर्य-राहु की स्थिति इस वर्ष अनेक चुनौतीपूर्ण स्थितियों को अंजाम दे सकती हैं जिनमें एलओसी पर साइबर अटैक, अफगानिस्तान में नए युद्ध का सूत्रपात होने और पाकिस्तान में आंतरिक विद्रोह या विस्फोट आदि से भारी हानि होने के योग बन सकते हैं। इसी प्रकार, भारत में मई से सितंबर के बीच बंगाल, महाराष्ट्र, असम, छत्तीसगढ़, पंजाब, मध्य प्रदेश आदि राज्यों में आतंकवाद अथवा सांप्रदायिक उपद्रव से अशांति फैल सकती है।
इसी दौरान भारत की सरकार संविधान में संशोधन को विशेष महत्व देगी।
इस प्रकार कहा जा सकता है कि अष्टम भाव में ग्रहों का अधिक प्रभाव होने के कारण प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति बन सकती है जिसके प्रति आपदा मोचन बल और अन्य सेवाओं को सतर्क रहने की आवश्यकता पड़ेगी। हालांकि, अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत को विशेष रूप से सम्मान और सफलता प्राप्त होने के योग बन सकते हैं।
हिन्दू नववर्ष 2025 – चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (नूतन संवत्सर २०८२) का महत्वएवं प्रभाव
चैत्रे मासि जगद्ब्रह्मा ससर्ज प्रथमेऽहनि।
शुक्लपक्षे समग्रं तु तदा सूर्योदय सति।।
-हेमाद्रौ ब्राहोक्तेः
जब कभी हम हिंदू नव वर्ष या नूतन संवत्सर के बारे में बातचीत करते हैं, तो हेमाद्री के ब्रह्म पुराण के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि यानी कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को सूर्योदय के समय जगत पिता ब्रह्मदेव जी ने इस संपूर्ण चराचर जगत की रचना की थी। यही वजह है कि प्रत्येक सनातन धर्मी चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रथम तिथि यानी प्रतिपदा तिथि को नूतन संवत्सर का आरंभ मानता है इसलिए हिंदू नव वर्ष का प्रारंभ इसी दिन से माना जाता है और यहीं से नया विक्रमी संवत् भी शुरू होता है। यदि अंग्रेजी कैलेंडर वर्ष 2025 की बात करें तो, 29 मार्च, 2025 शनिवार को शाम 16:27 बजे उत्तराभाद्रपद नक्षत्र, ब्रह्म योग और किंस्तुघ्न करण में मीन राशि में नव संवत्सर का प्रवेश होगा। यह विक्रम संवत् 2082 कहलाएगा तथा इसका नाम “सिद्धार्थी” नामक संवत्सर होगा।
चूंकि इस वर्ष संवत्सर का प्रवेश सायंकाल के समय होगा, तो सूर्योदय कालीन तिथि लेने के कारण सूर्योदय के समय प्रतिपदा तिथि उपस्थित होगी इसलिए चैत्र मास के शुक्ल पक्ष के नवरात्रि का प्रारंभ अगले दिन यानी 30 मार्च, 2025 रविवार को होगा। रविवार से ही जप, पाठ, पूजन, दान, व्रत, अनुष्ठान, यज्ञ आदि धार्मिक कार्य किए जाएंगे। सूर्योदय कालीन तिथि के कारण चैत्र शुक्ल प्रतिपदा रविवार के दिन मनाई जाएगी इसलिए रविवार को शुरू होने के कारण इस संवत्सर के राजा सूर्य होंगे। यह संवत्सर बार्हस्पत्यमान (गुरु मान) से शिव (रूद्र) विंशति के अंतर्गत एकादश युग का तृतीय सिद्धार्थी नामक (संवत्सर में 53 वां) संवत्सर होगा।
नूतन संवत्सर 2082 का नाम सिद्धार्थी नामक संवत्सर है जिसका फल शास्त्रों में निम्न प्रकार बताया गया है:
सिद्धार्थवत्सरे भूयो ज्ञान वैराग्य युक्त प्रजा:।
सकला वसुधा भाति बहुसस्य अर्घ वृष्टिभि:।।
इसका तात्पर्य है कि सिद्धार्थी नामक संवत्सर के दौरान प्रजा ज्ञान, वैराग्य जैसे विषयों में विशेष रूप से रुचि महसूस करेगी। धार्मिक आयोजन विशेष रूप से आयोजित किए जाएंगे और इनमें अधिकता रहेगी। वर्ष में अच्छी वर्षा हो सकती है और प्रतिकूल जलवायु के उपरांत भी अच्छा उत्पादन देखने को मिल सकता है। शासन तंत्र में स्थिरता की स्थिति बनी रह सकती है। संपूर्ण पृथ्वी पर प्रसन्नता का योग बनेगा। इस संवत्सर के स्वामी सूर्य देव हैं, इस कारण से देश में सुकाल के बावजूद प्रजा असंतुष्टि की भावना से भरी रह सकती है। धन की मांग अधिक रह सकती है। चैत्र के महीने में आय में वृद्धि होने की संभावना है जबकि वैशाख में कुछ मंदी रहेगी। वैशाख और ज्येष्ठ में लोगों को पीड़ा और युद्ध का भय हो सकता है। भाद्रपद में खंड वृष्टि होगी जिससे वर्षा कम होगी। अश्विन में रोग और पीड़ा होने की संभावना रहेगी तथा धन में वृद्धि की रफ़्तार भी औसत रह सकती है जबकि मार्गशीर्ष आदि चार महीनों में राज्य में विरोध, प्रजा में अशांति तथा धान्य, आदि आवश्यक वस्तुओं में तेजी की स्थिति बनी रह सकती है।
तोयपूर्णा: भवेन्मेघा: बहुसस्या च मेदिनी।
सुखिनः पार्थिवाः सर्वे सिद्धार्थे वरवर्णिनि।।
इसका तात्पर्य है कि इस संवत्सर में वर्षा पर्याप्त होने की संभावना बनेगी। खाद्य पदार्थ एवं जन जीवन के उपयोग में आने वाली वस्तुओं की उपलब्धता पर्याप्त हो सकती है। शासन में राजनीतिक स्थिरता बने रहने की संभावना है, लेकिन कुछ प्रदेशों में अति वर्षा और बाढ़ की स्थिति बन सकती है।
इसके अतिरिक्त, वर्ष प्रबोध ग्रंथ के अनुसार सिद्धार्थी संवत्सर का फल जानने का प्रयास करें, तो उसके अनुसार चैत्र और वैशाख माह में जनता रोग आदि से परेशान हो सकती है। ज्येष्ठ और आषाढ़ में प्राकृतिक प्रकोप होने और श्रावण मास में भयंकर वर्षा से हानि हो सकती है, लेकिन राजनीतिक दृष्टि से समय कुछ अनुकूल रह सकता है।
नूतन संवत्सर 2082 के राजा
चैत्रसितप्रतिपदि यो वारोऽर्कोदये सः वर्षेशः।
-ज्योतिर्निबन्ध
उपरोक्त वर्णित श्लोक ज्योतिर्निबन्ध में दिया गया है। इस श्लोक का तात्पर्य है कि चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को सूर्योदयकालीन समय पर जो भी वार या दिन होता है, उस वार के अनुसार ही उस संवत्सर का राजा घोषित किया जाता है। इस बार नूतन संवत्सर 2082 में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा शनिवार 29 मार्च को आएगी, लेकिन सूर्योदय कालीन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा अगले दिन रविवार को व्याप्त होने के कारण इस बार हिंदू नव वर्ष विक्रमी संवत् 2082 के राजा रवि (सूर्य) होंगे।
नूतन संवत्सर (वर्ष) 2082 के विशेष एवं महत्वपूर्ण बिंदु
उपरोक्त श्लोक के अनुसार, संवत्सर का राजा सूर्य होने पर देश के कुछ क्षेत्रों में उपयोगी वर्ष की कमी हो सकती है। दूध देने वाले जानवर जैसे कि गाय, भैंस आदि दूध कम देंगे। सामान्य जनमानस में दुख, कलह, क्लेश, विग्रह, कष्ट बढ़ सकते हैं। धान, गन्ना, आदि फसलों, फल, फूल और मौसमी फलों का उत्पादन कम होने की संभावना बनेगी। राजनेताओं और प्रशासकों में परस्पर टकराव और विरोध अधिक रह सकता है। डकैती, चोरी, ठगी, लूटमार, रेल अग्निकांड, आदि की घटनाएं अधिक होने के योग बन सकते हैं। सांप्रदायिक उपद्रव और कट्टरवाद जैसी घटनाएं बढ़ सकती हैं।
लोगों के बीच उत्तेजना, क्रोध, कलह और आंखों से जुड़े गंभीर रोग आदि बढ़ सकते हैं। लोगों के मन में राजसिक प्रवृत्ति बढ़ने के योग बनेंगे। इसके अतिरिक्त, किसी बड़े राजनेता का आकस्मिक निधन होने से देश में शोक की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। राजा के पद पर नूतन संवत्सर 2082 में सूर्य के आसीन होने के कारण इस संवत्सर का वाहन अश्व रहेगा। दूध और फलों के कम उत्पादन और वर्ष में कमी से महंगाई बढ़ने के योग बन सकते हैं। कई सत्ताधीशों के अधिकारों की हानि हो सकती है और कुछ राज्यों में सत्ता परिवर्तन और मंत्रिमंडल में फेरबदल के योग बन सकते हैं।
तीक्ष्णोऽर्कः स्वल्पसस्यश्च गतमेघेऽतितस्करः।
बहूरग-व्याधिगणो भास्कराब्दो-रणाकुलः।।
संवत्सर का राजा सूर्य होने के कारण फल, औषधि, कृषि और अन्य उत्पादों में कमी हो सकती है। प्रतिकूल वर्षा होने से खड़ी फसलों को नुकसान हो सकता है। पाखंडियों, तस्करों, अपराधियों, चोरों और लुटेरों का प्रभुत्व बढ़ सकता है। असाध्य रोग और विचित्र प्रकार की शारीरिक समस्याओं का प्रसार होने का भय रहेगा। सीमावर्ती प्रांतों में उग्रवादी घटनाओं और छद्म युद्ध में खतरनाक अस्त्रों का प्रयोग होने की आशंका है। साथ ही, अग्निकांड जैसी घटनाएं हो सकती हैं, राजनीतिक दलों में परस्पर मतभेद और विरोध चरम सीमा तक पहुंचने के योग बनेंगे। जंगलों में आग लगने से वन संपदा की हानि और शरद ऋतु में सर्दी कम पड़ने तथा गर्मी में बढ़ोतरी होने की संभावना है। रेंगने वाले और जंगली जानवरों का आम जनमानस की बस्तियों में प्रवेश हो सकता है। सज्जन लोगों को कष्ट हो सकता है तथा बाढ़ जैसी विपरीत परिस्थितियों में पशुधन की हानि हो सकती हैं।
वर्ष का मंत्री सूर्य ग्रह
नृपभयं गदतोऽपि हि तस्करात् प्रचुर धान्यधनादि महीतले।
रसचयं हिसमर्घतमन्दतारविमात्यबदांहिसमागतः।।
नए संवत्सर के मंत्री पद पर भी सूर्य देव ही विराजमान होंगे जिसके परिणामस्वरूप, राजाओं यानी राजनेताओं को भय होने, राजनीतिक पार्टियों और प्रशंसकों में परस्पर विरोध और टकराव बढ़ने के योग बनेंगे। इसके अतिरिक्त, केंद्र व राज्य सरकारों में भी मतभेद बढ़ सकता है। धन-धान्य आदि सुख-साधनों में वृद्धि होगी, परंतु कठोर सरकारी नीति और गतिविधियों के कारण तथा चोर, लुटेरों और डकैतों के कारण प्रजा में असंतोष की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। कठिन और असाध्य रोगों की अधिकता होने से जनता में अराजकता रह सकती है। दूध, तेल, पेयजल, फल, सब्जियां, चीनी, इत्यादि रसदार वस्तुओं की कमी और उनके दामों में तेजी आने के योग बन सकते हैं। जन उपयोगी वस्तुओं के मूल्य में भी तेजी आ सकती है। सूर्य के मंत्री पद पर बैठने से संवत्सर में प्रशासनिक कठोरता बढ़ने के योग बनेंगे। चोरी, तस्करी और जीएसटी चोरी जैसी घटनाएं बढ़ सकती हैं, लेकिन जीडीपी में सुधार होने की स्थिति बनेगी। धन में वृद्धि और इंपोर्ट से महंगाई पर नियंत्रण पाने के प्रयास किए जा सकते हैं। खांड, शक्कर, तेल, घी, आदि की मांग में कमी आ सकती है।
वर्ष का सस्येश बुध ग्रह
जलधराजलराशिमुचोभृशं सुख समृद्धि युतं निरूपद्रवम्।
द्विजगणाः स्तुति पाठरताः सदा प्रथमसस्यपतौसतिबोधने।।
सस्येश यानी ग्रीष्मकालीन फसलों का स्वामी बुध ग्रह होने से देश में वर्षा अधिक होने के योग बनते हैं। लोगों के जीवन में सुख और समृद्धि का वातावरण रहता है, लेकिन महंगाई और खर्चों में बढ़ोतरी होने के योग बनते हैं। सामाजिक स्थिति शांतिपूर्ण रहने की स्थिति बनती है। जो बुद्धिजीवी वर्ग के लोग हैं, उनकी शासन तंत्र द्वारा प्रशंसा होती है जबकि विभिन्न प्रकार के उपद्रवों और आतंक आदि की घटनाओं में अपेक्षाकृत कमी होने के योग बनते हैं। द्विजगण, ब्रह्म वेद अध्ययन करने वाले, हवन करने वाले, धार्मिक कार्यों में और अधिक प्रवृत्त होने लगेंगे। बुद्धिजीवी लोग अध्ययन और अध्यापन के कार्यों में अधिक सक्रिय होंगे और इनमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे, उच्च तकनीकी की तरफ लोगों का विशेष रुझान देखने को मिल सकता है।
वर्ष का धान्येश चन्द्र ग्रह
चन्द्रेधान्याधिपतेजातेप्रजावृद्धिः प्रजायते।
गोधूमाःसर्षपाश्चैव गोषुक्षीरंतदाबहुः।।
धान्येश यानी कि शीतकालीन फसलों का स्वामी ग्रह यदि चंद्रमा बनता है, तो इस वर्ष के दौरान शीतकाल में होने वाली फसलों जैसे कि चना, कपास, सरसों, सोयाबीन, गेहूं, अन्य धान्य सहित गाय का घी, गाय का दूध आदि के उत्पादन में विशेष वृद्धि होने के योग बनेंगे। श्रेष्ठ, अच्छी तथा उपयोगी वर्षा होने की संभावना बढ़ जाती है। धरती पर नदी, तालाब में जल का स्तर अच्छा रहता है तथा लोगों के मध्य उत्साह बने रहने की स्थिति बनती है।
मेघेश यानी कि वर्षा का स्वामी अर्थात मेघों का स्वामी सूर्य ग्रह होने पर जौ, गेहूं, चना, चावल, बाजरा, मूंग, आदि की पैदावार बढ़िया होती है। पृथ्वी पर विभिन्न प्रकार के सुख साधन, ऐश्वर्य और विविध प्रकार के साधनों का विस्तार होने की स्थिति बनती है। लेकिन, गुड़, शक्कर, दूध, चावल की पैदावार कम हो सकती है। कई स्थानों पर नदी-नालों में जल स्तर कम हो सकता है तथा वर्षा की कमी हो सकती है। जनता पाखंड, भय, ढोंग से परेशान हो सकती है।
वर्ष का रसेश शुक्र ग्रह
यजनयाजनकोत्सवकोत्सुकाजनपदाजलतोषितमानसाः।
सुखसुभिक्षसुमादवतीधराधरणिपा हतपापगणप्रियाः।।
नूतन संवत्सर का रसेश यदि शुक्र ग्रह हो, तो लोग यज्ञ और मांगलिक उत्सव करने में उत्सुकता दिखाते हैं। अनुकूल वर्षा होने से लोगों में संतुष्टि और प्रसन्नता का भाव बढ़ता है। पृथ्वी पर अच्छी फसल रहती है, सुख साधनों में बढ़ोतरी होती है और संपन्नता बढ़ती है। मौसमी फलों और कृषि आदि की पैदावार बढ़िया होती है। शासन-प्रशासन के लोग लोक कल्याण के कार्यों में अधिक दिलचस्पी दिखाते हैं।
वर्ष का नीरसेश बुध ग्रह
चित्रवस्त्रादिकंचैवशंखचन्दनपूर्वकम्।
अर्घवृद्धिःप्रजायेतनीरसेशोबुधोयदि।।
नीरसेश, जिसे ठोस धातु पदार्थों का स्वामी कहा जाता है, यदि बुध ग्रह हो तो विभिन्न रंगों के यानी कि रंग-बिरंगे सुंदर वस्त्र, चंदन, लकड़ी, हीरा, मोती, पुखराज, पन्ना और जवाहरात के भावों में तेजी देखने को मिलती है। साथ ही, विभिन्न धातुओं जैसे कि सोना, चांदी, तांबा, लोहा आदि के भावों में भी विशेष तेजी दिखाई देती है।
वर्ष का फलेश शनि ग्रह
यदिशनिःफलपःफलहाभवेज्जनित पुष्पगणस्य दमःसदा।
हिमभयंवरतस्करजन्तुभीर्जनपदो गदराशिसमाकुलः।।
यदि वर्ष के फलों का स्वामी फलेश शनि ग्रह हो, तो फलदार वृक्षों पर फल और पुष्पों के उत्पादन में कमी की स्थिति बनती है। पहाड़ी क्षेत्रों में कहीं प्रतिकूल वर्षा होती है और कहीं असमय बाढ़ आदि आने के कारण हानि के योग बनते हैं। बेईमानी, चोरी, ठगी और भ्रष्टाचार की घटनाएं अधिक होती हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में कहीं हिमपात, बर्फबारी से हानि हो सकती है। प्रदूषण, स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं और पेचीदा रोगों के कारण अधिकांश लोग दुखी रहते हैं तथा शहरों में जनसंख्या का दबाव बढ़ता है।
वर्ष का धनेश मंगल ग्रह
असममौल्यकरोधरणीसुतः शरदितांपकरस्तुषधान्यहृत्।
सहसिमासिभवेद्विगुणंतदानरपतिर्जनशोखविधायकः।।
वर्ष का धनेश यानी कि कोषाध्यक्ष यदि मंगल हो, तो उस नूतन वर्ष में थोक व्यापार की वस्तुओं के मूल्य में विशेष उतार-चढ़ाव के योग बनते हैं यानी व्यापार में अस्थिरता की संभावना बढ़ जाती है। शेयर बाजार में भी अस्थिरता का माहौल रहता है। माघ के महीने में वर्षा न होने और असमय या बेमौसम वर्षा होने के कारण गेहूं, आदि भूसे से प्राप्त होने वाले अनाजों का उत्पादन कम हो जाता है। समस्त देश में अनिश्चितता और अस्थिरता का माहौल रहने की स्थिति बनती है। शासन-प्रशासन की अधिकांश नीतियां आम जनमानस के दुखों और कष्टों को बढ़ाने वाली हो सकती हैं।
वर्ष का दुर्गेश शनि ग्रह
रविसुतेगढ़पालिनिविग्रहे सकलदेशगताश्चलिताजनाः।
विविधवैरिविशेषितनागराः कृषिधनं शलभैर्भुषितंभुवि।।
दुर्गेश यानी सेनापति यदि शनि ग्रह हो, तो उस वर्ष अनेक देशों के बीच आंतरिक संघर्ष, दंगे-फसाद और युद्ध जैसे वातावरण से अराजकता फैलती है जिससे लोग आतंकित होकर अपना निवास स्थान छोड़कर दूसरी जगह पलायन करने के लिए मजबूर हो जाते हैं। विभिन्न प्रांतों में सांप्रदायिक और जातीय झगड़ा-फसाद, टकराव की घटनाएं अधिक होती हैं तथा वातावरण अशांत हो जाता है। कुछ स्थानों पर विषाक्त कीटाणुओं, चूहों, टिड्डियों, अतिवृष्टि और अनावृष्टि, प्राकृतिक आपदाओं और प्रकोप से खड़ी फसलों को नुकसान होता है जिससे कृषि की भी स्थिति खराब होती है। ऐसा वर्ष के दौरान विशेषकर भाद्रपद और अश्विन मास में देखने को मिल सकता है।
स्वयं राजा स्वयं मंत्री जनेषु रोगपीड़ा चौराग्नि।
शंका – विग्रह – भयं च नृपाणाम्।।
नव संवत्सर 2082 में राजा और मंत्री दोनों ही पद सूर्य देव को प्राप्त हुए हैं। यदि एक वर्ष में यह दोनों ही पद एक ही ग्रह को प्राप्त हो जाएं तो विभिन्न देशों के राजनेता निरंकुश हो सकते हैं। ऐसे में, मनमाना आचरण करने की स्थिति बनेगी और स्वार्थ पूर्ण करने के लिए कुछ भी करने को तत्पर रहेंगे। भूकंप, बाढ़, अग्निकांड, प्राकृतिक उपद्रव, प्रकोप तथा सांप्रदायिक हिंसा और जातीय उपद्रव अधिक होने के योग बन सकते हैं। वर्षा की कमी और उसके कारण जलवायु में गर्मी बढ़ने के योग बनेंगे तथा सर्दी कम रहेगी। लोगों में आवेश, क्रोध और उत्तेजना के कारण हिंसक घटनाएं अधिक हो सकती हैं। विपक्षी नेताओं और सत्ताधारी नेताओं के बीच टकराव और आरोप-प्रत्यारोप अधिक होने के योग बनेंगे। सब्जी, अनाज, फल और धान्य आदि की पैदावार कम हो सकती है। डकैती, चोरी, लूटमार, तस्करी, अग्निकांड और लोगों में गंभीर रोग, तनाव, आंखों से संबंधित तथा रक्त व पित्त से जुड़े रोग होने की संभावना बनेगी। अनाज में तेजी के कारण व्यापारी लोग इसका लाभ उठा सकते हैं।
इस प्रकार हमने नूतन संवत्सर 2082 के बारे में बहुत कुछ ऊपर जान लिया है। यदि इसकी संक्षेप में बात करें और उसके प्रभाव की बात करें, तो निम्नलिखित बातों को समझा जा सकता है:
इस वर्ष में सिद्धार्थी नाम का संवत्सर होगा जिससे आम जनमानस में ज्ञान, वैराग्य जैसे विषयों में विशेष रूप से जिज्ञासा और रुचि बढ़ेगी। देश में धार्मिक आयोजनों में बढ़ोतरी होगी।
संवत्सर के राजा और मंत्री दोनों ही मुख्य पदों पर सूर्य देव को अधिकार प्राप्त हुआ है जिससे समाज के लोगों में क्रोध और उत्तेजना बढ़ेगी। आवेश के कारण हिंसक घटनाएं और उपद्रव में अधिकता हो सकती है।
सांप्रदायिक उपद्रव और कट्टरवाद की स्थिति अधिक होगी। लोगों के बीच नेत्र संबंधी गंभीर रोग, गंभीर समस्याएं और कलह जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।
हिंदू नव वर्ष 2082 में सूर्य को तीन, शनि और बुध को दो-दो, चंद्र, शुक्र और मंगल को एक-एक पद प्राप्त हुए हैं।
इस वर्ष क्रूर ग्रहों को छह पद और सौम्य ग्रहों को चार पद प्राप्त हुए हैं।
यदि राजनीतिक स्थिति को देखा जाए तो, इस वर्ष भारत में विशेष उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच आपसी आरोप-प्रत्यारोप से राजनीतिक माहौल अत्यंत ही खराब हो जाएगा। कुछ नए गठबंधन होने की स्थिति बनेगी तथा सरकारी नीतियां और गतिविधियां काफी कठोर हो सकती हैं जिसके कारण आम जनता में असंतोष और भय उत्पन्न हो सकता है।
इस वर्ष मार्च से जून और जुलाई से अक्टूबर के बीच खप्पर योग बनेगा जिससे किसी राज्य में सत्ता भंग होने, किसी प्रमुख नेता के पद से हट जाने या कष्टपूर्ण स्थिति के योग बन सकते हैं। प्राकृतिक प्रकोप में भी बढ़ोतरी हो सकती है तथा अग्निकांड, रेल दुर्घटना और तेल और गैस के दामों में भी तेजी आ सकती है।
हम आशा करते हैं कि हिन्दू नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 2025 (नूतन संवत्सर 2082) आपके लिए अत्यंत ही शुभ और मंगलमय रहे तथा आपके जीवन में सब शुभ ही शुभ हो। हम आपके उज्जवल भविष्य की शुभकामना करते हैं।
इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. 2025 में हिंदू नव वर्ष कब से शुरू होगा?
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल हिंदू नव वर्ष का आरंभ 30 मार्च 2025, रविवार से होगा।
2. इस साल विक्रम संवत् के किस वर्ष का आरंभ होगा?
वर्ष 2025 में चैत्र माह की प्रतिपदा तिथि से विक्रम संवत् 2082 की शुरुआत होगी।
3. विक्रम संवत् 2082 का राजा कौन होगा?
संवत् 2082 के राजा सूर्य देव होंगे।
प्रेम एवं ऐश्वर्य के कारक ग्रह शुक्र होंगे उदित, इन राशियों की होगी चांदी ही चांदी!
शुक्र का मीन राशि में उदय: एस्ट्रोसेज एआई हमेशा से अपने लेखों के माध्यम से ग्रहों की चाल, दशा या राशि में होने वाला परिवर्तन के बारे में आपको बताता आया है जिसका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रभाव मनुष्य जीवन पर पड़ता है। इसी क्रम में, ज्योतिष शास्त्र में शुक्र ग्रह को “प्रेम का देवता” माना जाता है क्योंकि यह सुंदरता, लक्ज़री और प्रेम के कारक कहे गए हैं। साथ ही, यह मनुष्य जीवन में भौतिक वस्तुओं के प्रति लगाव को नियंत्रित करने का भी काम करते हैं। शुक्र महाराज के प्रभाव से कोई व्यक्ति आपके प्रति और आप दूसरों के प्रति आकर्षित होता है। ऐसे में, जब-जब शुक्र ग्रह की स्थिति में या राशि में परिवर्तन होता है, तो इसका असर प्रत्येक व्यक्ति के प्रेम जीवन से लेकर वैवाहिक जीवन तक पर पड़ता हैं। अब जल्द ही शुक्र महाराज मीन राशि में उदित होने जा रहे हैं।
आज के इस विशेष ब्लॉग में हम “शुक्र का मीन राशि में उदय” के बारे में विस्तारपूर्वक चर्चा करेंगे। साथ ही, शुक्र देव कब और किस समय करेंगे अपनी चाल में बदलाव? शुक्र का मीन राशि में उदित होना आपको कैसे परिणाम देगा? क्या होती है ग्रह की उदित अवस्था? शुक्र का उदय किन राशियों को देगी सकारात्मक परिणाम और किन राशियों को इस अवधि में रखना होगा फूंक-फूंक कर कदम? इन सभी सवालों के जवाब आपको हमारे इस लेख में मिलेंगे जो कि हमारे अनुभवी एवं विद्वान ज्योतिषियों द्वारा ग्रह-नक्षत्रों की चाल, स्थिति एवं दशा की गणना करके आपके लिए तैयार किया गया है। तो आइए सबसे पहले नज़र डालते हैं शुक्र उदित के समय पर।
शुक्र का मीन राशि में उदय: तिथि एवं समय
विलासिता, समृद्धि, प्रसिद्धि, प्रेमपूर्ण रिलेशनशिप और रचनात्मकता का आशीर्वाद देने वाले शुक्र ग्रह तक़रीबन 28 दिन तक एक राशि में रहते हैं और उसके बाद दूसरी राशि में गोचर कर जाते हैं। हालांकि, जब यह किसी एक राशि में मौजूद होते हैं, तो उस दौरान अपनी चाल में बदलाव करते हुए अस्त, उदय, वक्री और मार्गी होते हैं। इसी क्रम में, अब शुक्र देव 28 मार्च 2025 की सुबह 06 बजकर 50 मिनट पर मीन राशि में उदित हो जाएंगे। बता दें कि शुक्र देव 18 मार्च 2025 को मीन राशि में अस्त हो गए थे। ऐसे में, शुक्र की उदित अवस्था संसार समेत कुछ राशियों के जीवन में बड़े परिवर्तन लेकर आ सकती हैं। अब हम आगे बढ़ने से पहले आपको अवगत करवाते हैं कि क्या होता है ग्रह का उदय होना।
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क्या होता है ग्रह का उदय होना?
जैसे कि हम आपको पहले भी बता चुके हैं कि जब कोई ग्रह सूर्य के बेहद नज़दीक चला जाता है, तो वह अस्त होकर अपनी शक्तियां खो देता है। इसी प्रकार, ज्योतिष शास्त्र में उदय शब्द का अर्थ उस अवधि से है जब कोई ग्रह सूर्य से एक निश्चित दूरी पर आकर पुनः उदित हो जाता है। साथ ही, उदित होकर वह दोबारा अपनी शक्तियां प्राप्त कर लेता है और अपनी पूरी क्षमता से परिणाम देने में सक्षम होता है। हालांकि, शुक्र ग्रह के उदित होने को शुभ माना जाएगा क्योंकि यह अपनी उच्च राशि में उदित हो रहे हैं और ऐसे में, वह जातकों को बेहतर परिणाम दे सकते हैं।
शुक्र करेंगे मीन राशि में इन चार ग्रहों से युति
मार्च 2025 का महीना बेहद ख़ास रहने वाला है क्योंकि इस अवधि में मीन राशि में एक साथ कई ग्रह मौजूद होंगे। इसके परिणामस्वरूप, एक नहीं अनेक युतियों और शुभ योगों का निर्माण होगा। सबसे पहले बात करते हैं शुक्र ग्रह की, मीन राशि में शुक्र देव के साथ बुध ग्रह, सूर्य देव, राहु ग्रह और माह के अंत में शनि महाराज भी विराजमान होंगे। ऐसे में, शुक्र ग्रह इन तीनों ग्रहों के साथ युति का निर्माण करेंगे और इसके फलस्वरूप, शुक्र और बुध की युति से लक्ष्मी नारायण योग का निर्माण होगा। साथ ही, शुक्र, सूर्य, बुध, राहु और महीने के अंत में शनि महाराज के एक साथ एक राशि में बैठे होने से पंचग्रही योग भी निर्मित होगा।
सनातन धर्म में शुक्र ग्रह को धार्मिक रूप से विशेष महत्व प्राप्त है जो कि असुरों के गुरु यानी कि दैत्यगुरु के नाम से भी जाने जाते हैं। इनका एक नाम शुक्राचार्य भी हैं।
धन की देवी लक्ष्मी से भी शुक्र ग्रह का संबंध माना जाता है क्योंकि वह धन, वैभव, और समृद्धि की देवी हैं।
धार्मिक ग्रंथों में शुक्राचार्य का वर्णन इस प्रकार किया गया है कि शुक्र देव ने असुरों को ज्ञान, विज्ञान और जीवन के गूढ़ रहस्यों की शिक्षा प्रदान की थी।
शुक्राचार्य को कई महत्वपूर्ण मंत्रों और औषधियों के आविष्कार का श्रेय जाता है जिससे असुरों ने देवताओं के साथ युद्ध में विजय प्राप्त की।
धार्मिक दृष्टि से शुक्र ग्रह प्रेम, सौंदर्य और भौतिक समृद्धि का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह जातकों को आकर्षक व्यक्तित्व प्रदान करते हैं और उन्हें कला और संगीत जैसी कलाओं में निपुण बनाते हैं।
शुक्र देव की पूजा करने से जातक के जीवन में धन-समृद्धि, प्रेम, सुख और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
आइए अब जानते हैं मनुष्य जीवन को शुक्र ग्रह किस तरह प्रभावित करता है।
कुंडली में शुक्र देव का शुभ प्रभाव
कुंडली में शुक्र देव की स्थिति मज़बूत होने पर जातक के प्रेम जीवन और रिश्तों में मधुरता, और खुशहाली बनी रहती है।
शुक्र ग्रह सौंदर्य, संगीत, कला, आकर्षण और वैवाहिक जीवन के कारक होने के नाते इन क्षेत्रों में सकारात्मक परिणाम प्रदान करते हैं।
शुक्र महाराज के बलवान होने पर जातक आर्थिक रूप से मजबूत होता है और उसे अपने जीवन में कभी भी धन की कमी नहीं होती है।
शुक्र की शुभ स्थिति जातक को सुख-शांति से पूर्ण वैवाहिक और पारिवारिक जीवन का आशीर्वाद देती है। शादीशुदा जीवन मधुर बना रहता है।
कुंडली में शुक्र देव की स्थिति कमजोर होने पर जातक के घर-परिवार में गरीबी दस्तक देने लगती है।
शुक्र ग्रह की दुर्बलता जातक के जीवन को धन से जुड़ी समस्याओं से भरने का काम करती है। ऐसे में, आपको पैसों की कमी का सामना करना पड़ सकता है।
जिन जातकों की कुंडली में शुक्र ग्रह की स्थिति अशुभ होती है, उन्हें अपने शादीशुदा जीवन में कई तरह की परेशानियों एवं समस्याओं से जूझना पड़ता है।
ऐसे लोग जिनकी कुंडली में शुक्र देव का अशुभ प्रभाव होता है, उन्हें हर कार्य में असफलता की प्राप्ति होती है। साथ ही, कड़ी मेहनत करने के बाद भी तरक्की पाने में बाधाएं आती हैं।
शुक्र ग्रह से जुड़ी रोचक बातें
रत्न: ज्योतिष शास्त्र में शुक्र देव का रत्न हीरा माना गया है जो उन्हें अत्यंत प्रिय है। शुक्र ग्रह से शुभ फलों की प्राप्ति के लिए हीरा धारण करना शुभ माना जाता है।
देवता: बात करें शुक्र ग्रह के देवता की तो, शुक्र महाराज के देवता भगवान विष्णु हैं। बता दें कि शुक्र सुंदरता, सौभाग्य, प्रेम, ऐश्वर्य और विलासिता के कारक हैं।
धातु: शुक्र ग्रह का संबंध चांदी से माना जाता है और इन्हें प्रसन्न करने के लिए इसका उपयोग भी किया जा सकता है।
रंग: शुक्र ग्रह को सफेद रंग अतिप्रिय है इसलिए शुक्र देव से शुभ फल पाने के लिए सफ़ेद रंग की वस्तुओं को दान करना चाहिए।
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शुक्र मीन राशि में उदित के दौरान करें ये उपाय
शुक्र ग्रह की कृपा प्राप्ति के लिए जातक को ज्यादा से ज्यादा सफेद और गुलाबी रंग के कपड़े धारण करने चाहिए।
शुक्र को समर्पित दिन शुक्रवार का व्रत करें।
देवी लक्ष्मी को हर शुक्रवार 5 लाल रंग के फूल अर्पित करें।
प्रत्येक शुक्रवार शुक्र ग्रह के बीज मंत्र का जाप करें।
हर शुक्रवार माता लक्ष्मी को खीर का प्रसाद के रूप में भोग लगाएं और फिर इसे छोटी कन्या को बांटें।
प्रतिदिन कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें।
घर और कार्यस्थल पर शुक्र यंत्र की स्थापना करें और उसकी नियमित रूप से पूजा करें।
इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. शुक्र मीन राशि में उदित कब होंगे?
मीन राशि में शुक्र का उदय 28 मार्च 2025 को होगा।
2. शुक्र किसके कारक हैं?
ज्योतिष में शुक्र देव को प्रेम, ऐश्वर्य, विलासिता और भौतिक सुखों के कारक माना गया है।
3. मीन राशि किसकी राशि है?
गुरु ग्रह को मीन राशि का स्वामित्व प्राप्त है।
30 साल बाद मीन राशि में प्रवेश करेंगे शनिदेव, इन राशियों का होगा बुरा समय शुरू!!
शनि का मीन राशि में गोचर: ज्योतिष में शनि ग्रह को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। इन्हें कर्मफल दाता कहा जाता है क्योंकि यह इंसान को उनके अच्छे और बुरे कर्मों के आधार पर फल प्रदान करते हैं। दूसरी तरफ, सनातन धर्म में शनि महाराज को सूर्य देव का पुत्र माना जाता है। न्यायाधीश का पद प्राप्त होने की वजह से शनि ग्रह की गिनती सबसे शक्तिशाली ग्रहों में होती है जो कि नवग्रहों में सबसे धीमी गति से चलते हैं। मंद चाल में चलने के कारण शनि ग्रह का गोचर ढाई साल में होता है इसलिए इनकी चाल, दशा और स्थिति में होने वाला परिवर्तन विशेष मायने रखता है। अब शनि का मीन राशि में गोचर होने जा रहा है जिसका प्रभाव मनुष्य जीवन को अत्यधिक प्रभावित करेगा।
एस्ट्रोसेज एआई के इस लेख के माध्यम से आपको “शनि का मीन राशि में गोचर” से जुड़ी सारी जानकारी प्राप्त होगी जैसे कि तिथि और समय आदि। सिर्फ़ इतना ही नहीं, शनि गोचर के दिन होने वाली एक ज्योतिषीय घटना के बारे में आपको बताएंगे। साथ ही, शनि का राशि परिवर्तन किन राशियों के सौभाग्य में वृद्धि करेगा और किन राशियों के लिए दुर्भाग्य लेकर आ सकता है? किन राशियों पर साढ़े साती और ढैय्या की शुरुआत होगी? शनि गोचर के इस नकारात्मक प्रभावों से बचने के लिए आप कौन से उपाय अपना सकते हैं, आदि के बारे में हम विस्तार से बात करेंगे। इन सभी सवालों के जवाब पाने के लिए आपको इस ब्लॉग को अंत तक पढ़ना होगा। आइए सबसे पहले जान लेते हैं शनि गोचर की तिथि और समय।
शनि का मीन राशि में गोचर: तिथि एवं समय
शनि देव को एक राशि से निकलकर दूसरी राशि में प्रवेश करने में ढाई साल का समय लगता है। ऐसे में, अब यह लगभग ढाई साल बाद अपनी आधिपत्य वाली राशि कुंभ से निकलकर 29 मार्च 2025 की रात 10 बजकर 07 मिनट पर मीन राशि में गोचर करने जा रहे हैं। इस प्रकार, शनि का यह गोचर बहुत ख़ास रहेगा क्योंकि इस अवधि में मीन राशि में एक साथ कई ग्रह मौजूद होंगे जिससे कई विशेष योगों का निर्माण होगा जिसका असर संसार के साथ-साथ राशि चक्र की 12 राशियों पर सकारात्मक और नकारात्मक रूप से दिखाई दे सकता है।
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शनि गोचर और सूर्य ग्रहण एक साथ
ज्योतिष की दुनिया की दो सबसे बड़ी घटनाएं मार्च 2025 में एक दिन एक साथ होने जा रही हैं। हम बात कर रहे हैं सूर्य ग्रहण और शनि गोचर की, तो आपको बता दें कि साल 2025 का पहला सूर्य ग्रहण और ढाई साल बाद होने वाला शनि का मीन राशि में गोचर 29 मार्च 2025 को एक साथ होने जा रहा है। जहां सूर्य ग्रहण 29 मार्च 2025, शनिवार के दिन लगेगा और इसका आरंभ दोपहर 02 बजकर 21 मिनट होगा जबकि इसका अंत शाम 06 बजकर 14 मिनट पर हो जाएगा। हालांकि, यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए सूतक भी मान्य नहीं होगा। वहीं, शनि देव भी इसी दिन मीन राशि में प्रवेश करेंगे। साथ ही जानेगे, शनि गोचर से किन राशियों पर होगी साढ़े साती और ढैय्या शुरू? लेकिन उससे पहले जानते हैं साढ़े साती और ढैय्या के बारे में।
क्या होती है शनि साढ़े साती और ढैय्या?
साढ़े साती, शनि ग्रह की साढ़े सात साल तक चलने वाली ऐसी दशा होती है जो व्यक्ति के जीवन में एक बार अवश्य आती है। यह साढ़े सात वर्ष की अवधि ढाई-ढाई साल के तीन चरणों में आती हैं। पहला चरण व्यक्ति को आलसी बनाता है और दूसरा चरण आपसे ख़ूब मेहनत करवाता है। वहीं, इसका तीसरा और अंतिम चरण पिछले दो चरणों की तुलना में कम नुकसानदेह माना गया है।
दूसरी तरफ, शनि की ढैय्या ढाई साल की अवधि होती है और इस दौरान जब कुंडली में शनि देव चौथे भाव या आठवें भाव में मौजूद होते है, तब व्यक्ति ढैय्या के प्रभाव में आ जाता है। इस दौरान किसी व्यक्ति को मानसिक समस्याओं और धन से जुड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
अब बात करते हैं उन राशियों पर जिनके ऊपर शनि साढ़े साती और ढैय्या शुरू हो रही है।
किन राशियों पर शुरू होगी शनि साढ़े साती और ढैय्या?
जैसे कि हम जानते हैं कि शनि महाराज साल 2023 से अपनी आधिपत्य वाली कुंभ राशि में विराजमान थे और अब यह 29 मार्च 2025 को मीन राशि में गोचर करने जा रहे हैं। बता दें कि शनि देव जिस राशि में उपस्थित होते हैं, उस राशि पर, उससे पहले वाली राशि और बाद की राशि पर शनि साढ़े साती शुरू हो जाती है।
ऐसे में, शनि का मीन राशि में गोचर होने से कुंभ राशि पर अंतिम और मीन राशि पर साढ़े साती का दूसरा चरण शुरू हो जाएगा जबकि मंगल ग्रह की मेष राशि पर शनि साढ़े साती का आरंभ हो जाएगा। वर्तमान समय में शनि कुंभ राशि में होने से मकर राशि, कुंभ राशि और मीन राशि वालों के ऊपर साढ़ेसाती चल रही है। वहीं, अब मकर राशि वालों को साढ़े साती से मुक्ति मिल जाएगी।
अगर बात करें शनि ढैय्या की तो, शनि का मीन राशि में गोचर होने से सिंह राशि और वृश्चिक राशि पर शनि ढैय्या की शुरुआत हो जाएगी।
ज्योतिष की नज़रों में शनि देव
नौ ग्रहों में शनि ग्रह को अत्यंत महत्वपूर्ण दर्जा प्राप्त है जो कि किसी व्यक्ति की आयु, रोग, दुख, तकनीकी, विज्ञान, पीड़ा आदि के कारक माने गए हैं।
राशि चक्र में शनि को मकर और कुंभ शनि का स्वामी माना गया है जबकि तुला इनकी उच्च राशि है और मेष राशि में शनि नीच अवस्था में होते हैं।
शनि महाराज के एक राशि में ढाई साल तक रहने की अवधि को ज्योतिष की भाषा में शनि की ढैया के नाम से जाना जाता है।
जिन लोगों की कुंडली में शनि ग्रह की स्थिति मजबूत होती है, उन्हें जीवन में हर तरह का सुख प्राप्त होता है।
मज़बूत शनि वाले जातक कर्मठ और कर्मशील होते हैं। साथ ही, यह न्याय प्रिय भी होते हैं।
इसके विपरीत, ऐसे जातक जिनकी कुंडली में शनि महाराज दुर्बल या पीड़ित अवस्था में होते है, तो ऐसे जातकों की जीवन में कई तरह की समस्याओं से दो-चार होना पड़ता है।
शनि के कमज़ोर होने पर इन लोगों को अपने जीवन में दुर्घटना और जेल जाने जैसी परिस्थितियों का भी सामना करना पड़ सकता हैं।
इस तरह की स्थिति से बचने और शनि देव के दुष्प्रभावों को शांत करने के लिए ज्योतिष में कई तरह के सरल उपाय बताए गए हैं जिन्हें अपनाकर आप शनि के प्रभावों को कम कर सकते हैं। चलिए जान लेते हैं इन उपायों के बारे में।
ज्योतिष में प्रत्येक ग्रह का संबंध किसी न किसी रत्न से माना जाता है। इसी क्रम में, अगर आप शनि देव की कृपा पाना चाहते हैं या फिर शनि ग्रह को शांत करना चाहते हैं, तो आप नीलम रत्न पहन सकते हैं, विशेष रूप से मकर राशि और कुंभ राशि के जातकों के लिए नीलम रत्न को धारण करना शुभ रहेगा।
कुंडली में शनि शांति के लिए इन चीज़ों का करें दान
हिंदू धर्म में दान को कल्याणकारी माना जाता है जो व्यक्ति को हर तरह की समस्या से बाहर निकलने की क्षमता रखता है। ऐसे में, अगर आप कुंडली में कुपित शनि को शांत करना चाहते हैं, तो शनिवार के दिन शनि के होरा और शनि के नक्षत्र में शनि ग्रह से जुड़ी चीज़ों का दान करना अत्यंत फलदायी साबित होता है।
शनि देव पुष्य नक्षत्र, अनुराधा और उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के स्वामी है। आप दोपहर या संध्या काल में शनि से जुड़ी वस्तुएं जैसे कि साबुत उड़द की दाल, लोहा, काले रंग के वस्त्र, तिल के बीज और तेल आदि का दान कर सकते हैं।
बृहत् कुंडली में छिपा है, आपके जीवन का सारा राज, जानें ग्रहों की चाल का पूरा लेखा-जोखा
शनि ग्रह को प्रसन्न करने के सरल एवं अचूक उपाय
वैदिक ज्योतिष में शनि को क्रूर और पापी ग्रह के रूप में जाना जाता है, इसलिए इनके नाम से भी लोग भयभीत हो जाते हैं। आपको बता दें कि शनि आपके कोई शत्रु नहीं हैं और आपके कर्म अच्छे होने पर आपको इनसे भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। व्यक्ति के जीवन में शनि एक शिक्षक की भूमिका निभाते हैं जो व्यक्ति को सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। लेकिन, अगर आप गलत राह पर चलते हैं, तो शनि देव आपको दंडित भी करते हैं। जिन जातकों को जीवन में शनि के अशुभ प्रभावों का सामना करना पड़ रहा है, वह नीचे दिए ज्योतिषीय उपायों को अपनाकर कुंडली में शनि देव को मज़बूत कर सकते हैं।
शनिवार के दिन शनि देव की पूजा करें।
शनि ग्रह को प्रसन्न करने के लिए राधा-कृष्ण की उपासना शुभ रहती है।
आप अपने कर्मचारियों और सेवकों को प्रसन्न रखें और उनके साथ दुर्व्यवहार करने से बचें।
जातक मांस और मदिरा का सेवन न करें।
संभव हो, तो रात को दूध न पिएं।
कुंडली में शनि देव दुर्बल अवस्था में होने पर काले रंग के कपड़े धारण करने से बचें।
हनुमान जी की पूजा नियमित रूप से करने पर शनि ग्रह की कृपा प्राप्त होती है।
शनि देव के कुप्रभाव से बचने के लिए नीलम रत्न पहन सकते हैं। लेकिन, किसी अनुभवी ज्योतिषी से सलाह लेने के बाद ही आप नीलम धारण करें।
करियर एवं व्यापार में सफलता पाने के लिए शनि यंत्र की स्थापना करें।
आप शनि महाराज की जड़ी धतूरे की जड़ भी पहन सकते हैं।
इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. शनि का मीन राशि में गोचर कब होगा?
शनि देव 29 मार्च 2025 को मीन राशि में गोचर कर जाएंगे।
2. शनि किस राशि के स्वामी हैं?
राशि चक्र में शनि ग्रह को मकर और कुंभ राशि का स्वामी माना जाता है।
3. मीन राशि का स्वामी कौन हैं?
गुरु ग्रह को मीन राशि पर स्वामित्व प्राप्त हैं।
मासिक अंक फल अप्रैल 2025: अंकों से जानें अप्रैल माह का पूरा लेखा-जोखा!
मासिक अंकफल अप्रैल 2025: अंक ज्योतिष के अनुसार, अप्रैल का महीना साल का चौथा महीना होने के कारण अंक 4 का प्रभाव लिए होता है। इस महीने पर राहु ग्रह का प्रभाव अधिक रहने वाला है। आपको बता दें कि इस साल का अंक 9 है और ऐसे में, अप्रैल 2025 के महीने पर राहु के अलावा मंगल का भी प्रभाव रहने वाला है। हालांकि, मूलांक के आधार पर अलग-अलग लोगों पर राहु और मंगल का अलग-अलग असर पड़ेगा। लेकिन, अप्रैल 2025 का महीना सामान्य तौर पर राजनीतिक उठापटक, प्राकृतिक आपदाओं, दुर्घटनाओं, युद्ध आदि मामलों पर प्रभाव डाल सकता है। आइए जानते हैं कि आपके मूलांक के लिए अप्रैल का महीना कैसा रहेगा?
यदि आप किसी महीने की 1, 10, 19 या फिर 28 तारीख को पैदा हुए हैं, तो आपका मूलांक 1 होगा। मूलांक 1 के लिए अप्रैल का महीना क्रमशः 5,9, 4 और 6 अंकों का प्रभाव लिए हुए है। अंक 6 को छोड़कर बाकी सभी अंक आपके मूलांक 1 का या तो समर्थन कर रहे हैं या फिर न्यूट्रल हैं। विशेष बात है कि इस महीने सबसे अधिक प्रभाव डालने वाला अंक 5 आपका पूरी तरह से फ़ेवर करता हुआ प्रतीत हो रहा है। अंक 6 की उपस्थिति महीने के दूसरे हिस्से को थोड़ा कमजोर बना सकती है, लेकिन इसका बहुत ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा। ऐसे में, इस महीने आप काफी अच्छे परिणाम प्राप्त कर सकेंगे और इन परिणामों को बेहतर करने के लिए आपको तर्कपूर्ण होकर सोचने की आवश्यकता होगी। साथ ही, तथ्यात्मक ढंग से काम करना भी जरूरी रहेगा।
आपकी बातचीत का तौर-तरीका जितना सभ्य और सौम्य रहेगा, परिणाम उतने ही अच्छे मिलेंगे। युवा लोगों के साथ मिलकर कुछ अच्छे कार्य भी संपन्न किए जा सकते हैं। वैसे यह महीना परिवर्तन का समर्थन कर सकता है, यानी कि यदि आप कोई परिवर्तन करना चाह रहे हैं, तो वह परिवर्तन सकारात्मक दिशा में हो सकेगा। जॉब चेंज हो या फिर पुराने काम को नए तरीके से करने की इच्छा हो, इन इच्छाओं को पूरा करने में अप्रैल का महीना मददगार हो सकता है। यात्राओं के दृष्टिकोण से भी महीना अच्छा रहेगा। आमोद-प्रमोद और मनोरंजन के मौके भी मिल सकेंगे। स्वयं को विस्तार देने में भी यह महीना आपके लिए मददगार बनेगा।
उपाय: गणपति अथर्वशीर्ष का नियमित रूप से पाठ करना शुभ रहेगा।
मूलांक 2
यदि आप किसी महीने की 2, 11, 20 या फिर 29 तारीख को पैदा हुए हैं, तो आपका मूलांक 2 होगा। मूलांक 2 के लिए अप्रैल का महीना क्रमशः 6, 9 और 4 अंकों का प्रभाव लिए हुए है। अंक 9 के अलावा बाकी सभी अंक आपके समर्थन में प्रतीत हो रहे हैं। अंकों के विरुद्ध होने का मतलब है कि इस महीने आपको क्रोध और किसी से लड़ाई नहीं करनी है। साथ ही, आवेश में आकर कोई निर्णय नहीं लेना है। विशेषकर महीने के पहले हिस्से में ऐसा करने से बचना बहुत जरूरी होगा। यद्यपि दो बार अंकों की उपस्थिति इस बात का संकेत कर रही है कि इस पूरे महीने ही नहीं पूरे साल आपको शांत होकर काम करने की आवश्यकता होगी।
यद्यपि आप भावुक व्यक्ति हैं, लेकिन फिर भी क्रोध से बचना होगा। इस महीने सबसे अधिक प्रभाव डालने वाला अंक 6 आपको सपोर्ट करना चाह रहा है। ऐसे में, आप घर-गृहस्थी को लेकर कुछ अच्छी और सार्थक योजना बना सकते हैं। संभव है कि इस योजना पर अप्रैल में काम भी शुरू हो सकता है। प्रेम संबंध के लिए यह महीना विशेष अनुकूलता देता हुआ प्रतीत हो रहा है। विवाह से संबंधित बातों को आगे बढ़ाने में भी अवधि मददगार सिद्ध होगी।
उपाय: कन्याओं का पूजन करके उनका आशीर्वाद लें।
बृहत् कुंडली में छिपा है, आपके जीवन का सारा राज, जानें ग्रहों की चाल का पूरा लेखा-जोखा
मूलांक 3
यदि आप किसी महीने की 3,12, 21 या फिर 30 तारीख को पैदा हुए हैं, तो आपका मूलांक 3 होगा। मूलांक 3 के लिए अप्रैल का महीना क्रमशः 7,9,4 और 6 अंकों का प्रभाव लिए हुए है। इस महीने अंक 6 के अलावा बाकी के सभी अंक आपके समर्थन में नज़र आ रहे हैं। अतः इस महीने किसी भी तरीके की कोई बड़ी कठिनाई नहीं आएगी। हो सकता है कि अंक 6 का प्रभाव महीने के दूसरे हिस्से में कुछ छोटी-मोटी कठिनाई आ सकती है, लेकिन उससे आपकी कार्यशैली या इस माह मिलने वाले परिणामों पर अधिक फर्क नहीं पड़ेगा। विशेषकर यदि आप महिलाओं के साथ अच्छा बर्ताव करते हैं और दिखावे के लिए खर्च करने से बचते हैं, तो परिणाम सामान्य तौर पर अनुकूल बने रहेंगे। यह महीना आपका कुछ नई सच्चाइयों से सामना करवा सकता है।
यदि आपके कामों में कोई समस्या आ रही है, तो आप इन समस्याओं का निवारण करने में सफल हो सकेंगे। धर्म और अध्यात्म के दृष्टिकोण से, इस महीने को काफी अच्छा कहा जाएगा। मानसिक अशांति को दूर करने में अप्रैल मददगार बन सकता है। आपके मन में परोपकार की भावनाएं मजबूत हो सकती हैं। अंक 9 और 4 की उपस्थिति इस बात का संकेत कर रही है कि कार्यक्षेत्र में समस्याओं के बाद बेहतरी देखने को मिलेगी। साथ ही, शारीरिक ऊर्जा अच्छी रहने से आप अपने कामों को सही समय पर पूरा कर सकेंगे। इसके फलस्वरूप, आपको अच्छे परिणाम भी मिलेंगे। आर्थिक और पारिवारिक मामले में भी समय अनुकूल रहेगा।
उपाय: गुरुवार के दिन मंदिर में चने की दाल का दान करें।
मूलांक 4
यदि आप किसी भी महीने की 4,13, 22 या फिर 31 तारीख़ को पैदा हुए हैं, तो आपका मूलांक 4 होगा। मूलांक 4 के लिए अप्रैल का महीना क्रमशः 8,9, 4 और 6 अंकों का प्रभाव लिए हुए है। इस महीने के अंक या तो आपके लिए न्यूट्रल रहेंगे या फिर आपको कुछ कमजोर परिणाम देने का संकेत कर रहे हैं। ऐसे में, इस महीने सावधानी पूर्वक निर्वाह करने की आवश्यकता होगी। यद्यपि अंक 8 का मासिक अंक के रूप में आना कई मामलों के लिए अनुकूल माना गया है, जैसे कि अंक 8 आर्थिक मामले में सार्थक परिणाम दिलाने का काम करता है। यह आपकी क्षमता को बढ़ाता है। व्यापार-व्यवसाय में सपोर्ट करता है। इतना ही नहीं, यदि आप अपने पुराने व्यापार से नए व्यापार व्यवसाय में जाना चाह रहे हैं, तो उस मामले में भी 8 का अंक सपोर्ट करता है।
पुराने कामों को नए ढंग से करने का तरीका भी अंक 8 सिखाता है। लेकिन, आपके मूलांक का शत्रु होने के कारण इन चीजों की प्राप्ति में विलंब हो सकता है अथवा इनकी प्राप्ति के रास्ते में व्यवधान आ सकता है। अतः इस महीने अच्छे परिणाम पाने के लिए आपको धैर्य रखने और समय का पाबंद होने की आवश्यकता रहेगी। स्वयं को आलस्य से दूर रखें। दिनचर्या को संयमित बनाकर सही तरीके से काम करें। ऐसा करने से अच्छे परिणाम आपको मिल सकेंगे। वहीं, लापरवाह में या फिर आलसी होने की स्थिति में परिणाम कमजोर रह सकते हैं इसलिए सकारात्मक फल पाने के लिए जागरूक बने रहें।
उपाय: गरीब और जरूरतमंद लोगों को अपने सामर्थ्य के अनुसार भोजन करवाएं।
यदि आप किसी भी महीने की 5, 14 या फिर 23 तारीख को पैदा हुए हैं, तो आपका मूलांक 5 होगा। मूलांक 5 के लिए अप्रैल का महीना क्रमशः 9, 4, 9 और 6 अंकों का प्रभाव लिए हुए है। अंक 9 की कई बार उपस्थिति इस बात का संकेत कर रही है कि इस महीने आपको धैर्य के साथ काम करना है। यद्यपि आपके जोश में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी, लेकिन जोश में होश नहीं खोना है। जोश और होश के संगम के साथ यदि आप आगे बढ़ेंगे तो परिणाम अच्छे मिल सकेंगे क्योंकि अंक 9 संपूर्णता की ओर ले जाने वाला अंक माना गया है।
ऐसे में, इस महीने आप पिछले समय से पेंडिंग पड़े हुए कामों को पूरा कर सकेंगे और राहत की सांस ले सकेंगे। इधर-उधर बिखरे हुए कामों को समेटने में यह महीना आपके लिए मददगार हो सकता है, लेकिन क्योंकि आपके मूलांक 5 के लिए अंक 9 विरोधी माना गया है, इसलिए आपको अधीर नहीं होना है। स्वयं के क्रोध और आवेश पर नियंत्रण रखना होगा। यदि आप इन तौर तरीकों को अपनाकर काम करेंगे तो इस महीने आप अच्छे परिणाम प्राप्त कर सकेंगे।
उपाय: नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करना शुभ रहेगा।
मूलांक 6
यदि आप किसी भी महीने की 6, 15 या फिर 24 तारीख को पैदा हुए हैं, तो आपका मूलांक 6 होगा। मूलांक 6 के लिए अप्रैल का महीना क्रमशः 1,9, 4 और 6 अंकों का प्रभाव लिए हुए है। अंक 9 के अलावा इस महीने के ज्यादातर अंक आपको एवरेज परिणाम देते हुए प्रतीत हो रहे हैं। ऐसे में, आपको भी इस महीने क्रोध और कलह से बचने की सलाह हम देना चाहेंगे। यह महीना आपके लिए कुछ नए कामों की शुरुआत करवाने में मददगार बन सकता है। भले ही कुछ कठिनाइयां रहें, लेकिन आप इन कठिनाइयों को पार करते हुए अपने लक्ष्य तक पहुंच सकेंगे। साथ ही, इस माह कुछ नई जिम्मेदारियां हैं जो आपका इंतजार कर रही हैं, आप उन जिम्मेदारियों को उठाने में समर्थ होंगे। हालांकि, इन तमाम मामलों में वरिष्ठों से सहयोग लेना समझदारी का काम होगा।
अंक 4 की उपस्थिति इस बात का संकेत कर रही है कि वरिष्ठों के साथ संबंधों को मजबूत करना आपके लिए फायदेमंद रहेगा। वैसे भी वरिष्ठों का सदैव आदर सम्मान करना चाहिए, लेकिन इस महीने आपको इस मामले में विशेष ध्यान देना होगा। ऐसे में, धीरे-धीरे फीके पड़ रहे हैं संबंध मजबूत होंगे और संबंधों के मेंटेन होने से आपका जीवन आसान हो सकेगा। विशेषकर पिता और पिता तुल्य व्यक्तियों के साथ संबंधों को मजबूत रखने में या मजबूत बनाने में यह महीना काफी मददगार हो सकेगा। इस महीने जल्दबाजी और अहंकार से बचना होगा और साथ ही, क्रोध और आवेश से बचना भी फायदेमंद रहेगा।
उपाय: सूर्य भगवान को कुमकुम मिला हुआ जल नियमित रूप से चढ़ाएं।
यदि आप किसी भी महीने की 7, 16 या फिर 25 तारीख को पैदा हुए हैं, तो आपका मूलांक 7 होगा। मूलांक 7 के लिए अप्रैल का महीना क्रमशः 2,9, 4 और 6 अंकों का प्रभाव लिए हुए है। इस महीने आप पर सबसे अधिक प्रभाव डालने वाले अंक 2 और 9 आपके समर्थन में नजर नहीं आ रहे हैं इसलिए इस माह अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए आपको कड़ी मेहनत करनी पड़ सकती है। अप्रैल संबंधों को सुधारने का महीना सिद्ध हो सकता है। ऐसे में, यदि आपके संबंध किसी के साथ कमजोर हैं, तो उन संबंधों को सुधारने की पहल जरूरी रहेगी। साझेदारी में काम करने वाले व्यक्तियों को इस महीने साझेदार के साथ न केवल अपने संबंध मजबूत रखने हैं, बल्कि साझेदारी के कामों में ध्यान देने की भी आवश्यकता रहेगी। आपको अपने हिस्से का काम पूरा करना होगा।
इस महीने धैर्य की भी बहुत आवश्यकता रहने वाली है। मन बीच-बीच में जरूरत से ज्यादा चंचल रह सकता है, जिस पर संयम पाना होगा। यदि किसी बुजुर्ग स्त्री के साथ कोई डील कर रहे हैं, तो उस मामले में सावधानी पूर्वक काम करने की आवश्यकता होगी। अपने से बड़ी उम्र की स्त्रियों के साथ मिलकर कोई काम करना चाह रहे हैं या उनके साथ कोई डील कर रहे हैं या आपकी वरिष्ठ कोई महिला है तो उनके साथ सम्मान पूर्वक पेश आना बहुत जरूरी होगा। बहुत जल्द उत्साहित होना या तुरंत हतोत्साहित हो जाना भी उचित नहीं रहेगा। अतः इस तरह के मनोभावों से बचना भी समझदारी का काम होगा। इन सावधानियों को अपनाने की स्थिति में आप अच्छे परिणाम प्राप्त कर सकेंगे, अन्यथा परिणाम कमजोर भी रह सकते हैं।
उपाय: मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करें।
मूलांक 8
यदि आप किसी भी महीने की 8, 17 या फिर 26 तारीख को पैदा हुए हैं, तो आपका मूलांक 8 होगा। मूलांक 8 के लिए अप्रैल का महीना क्रमशः 3,9, 4 और 6 अंकों का प्रभाव लिए हुए है। इस महीने के अंक या तो आपको पूरा समर्थन दे रहे हैं या फिर औसत रूप से परिणाम दे सकते हैं। विशेष बात यह है कि इस महीने सबसे ज्यादा प्रभाव डालने वाला अंक 3 आपके समर्थन में रहेगा। यही कारण है कि यह महीना आपको काफी अच्छे परिणाम दे सकता है और सामाजिक गतिविधियों के लिए विशेष रह सकता है।
यदि आप कोई नेता, पत्रकार या ऐसे व्यक्ति हैं जो बहुत सारे लोगों के साथ डील करते हैं, तो इस महीने आपको काफी अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। आपके धैर्य को अनुभव का साथ मिल जाने के कारण आप सामाजिक मामलों में एक विशेष स्तर तक जा सकते हैं। कुछ नया शुरू करने के लिए भी यह महीना मददगार बन सकता है। मित्रों से जुड़े हुए मामलों में इस महीने अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। आर्थिक मामले के लिए भी अप्रैल को काफी अच्छा कहा जाएगा। पारिवारिक मामलों में भी अंक 3 आपको अच्छे परिणाम देता हुआ प्रतीत हो रहा है अर्थात सामान्य तौर पर अप्रैल 2025 का महीना आपको काफी हद तक अनुकूल परिणाम दे सकता है।
यदि आप किसी भी महीने की 9,18 या फिर 27 तारीख को पैदा हुए हैं, तो आपका मूलांक 9 होगा। मूलांक 9 के लिए अप्रैल का महीना क्रमशः 4, 9 और 6 अंकों का प्रभाव लिए हुए है। वैसे, इस महीने अंक 6 के अलावा लगभग सभी अंक या तो आपके समर्थन में हैं या फिर आपके लिए न्यूट्रल रहेंगे। ऐसे में, खतरे जैसी कोई बात नहीं है, लेकिन ज्योतिष की दुनिया में अंक 9 यानी मंगल को अग्नि के समान माना गया है। वहीं, अंक 4 यानी राहु को पेट्रोलियम उत्पादों के जैसा माना गया है। ऐसे में, इन दोनों का संगम आग भड़काने का काम करता है इसलिए इस महीने आपको पूरे धैर्य के साथ काम करना है। आवेश में आकर किसी घटना को अंजाम नहीं देना है। किसी भी तरह का बड़ा जोखिम नहीं उठाना है। साथ ही, सामाजिक पद, प्रतिष्ठा और मर्यादा का ख्याल भी रखना होगा।
आपने जो कुछ अभी तक सीखा है, उसी के सहारे आगे बढ़ें। अपने अनुभव के आधार पर ही काम करें और साथ ही, अनुभवी लोगों से सलाह लेकर काम करें। किसी के बहकावे में बिल्कुल भी नहीं आना है। खासकर आर्थिक और प्रॉपर्टी से जुड़े हुए मामलों में किसी भी प्रकार का रिस्क न लें। यदि आप ऐसा करते हैं, तो आप नकारात्मक घटनाक्रम से स्वयं को सुरक्षित रख सकेंगे। वैसे भी अंक 4 का प्रभाव आपको हार्ड वर्क करने की सलाह दे रहा है अर्थात इस महीने आपको खूब मेहनत करनी है। साथ ही, स्वयं को अनुशासन में रहना है। जो नियम-कायदे और कानून देश के हैं या समाज के हैं, उनका पालन करना होगा। साथ ही, स्वयं के कुछ नियम भी बनाने हैं और उनका पालन करना भी जरूरी रहेगा। ऐसा करने की स्थिति में आप नकारात्मक परिणामों को रोक सकेंगे और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।
उपाय: माथे पर नियमित रूप से केसर का तिलक लगाना शुभ रहेगा।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. केतु का अंक कौन सा है?
अंक ज्योतिष में अंक 7 पर केतु ग्रह का स्वामित्व है।
2. अंक 1 का स्वामी कौन है?
सूर्य देव को अंक 1 के अधिपति देव माना गया है।
3. मूलांक 6 के लिए अप्रैल कैसा रहेगा?
जिन जातकों का मूलांक 6 है, उन्हें अप्रैल का महीना औसत परिणाम दे सकता है।
टैरो साप्ताहिक राशिफल (30 मार्च से 05 अप्रैल, 2025): इन राशियों की सेहत रहेगी अच्छी!
टैरो साप्ताहिक राशिफल 30 मार्च से 05 अप्रैल, 2025: दुनियाभर के कई लोकप्रिय टैरो रीडर्स और ज्योतिषियों का मानना है कि टैरो व्यक्ति की जिंदगी में भविष्यवाणी करने का ही काम नहीं करता बल्कि यह मनुष्य का मार्गदर्शन भी करता है। कहते हैं कि टैरो कार्ड अपनी देखभाल करने और खुद के बारे में जानने का एक ज़रिया है।
टैरो इस बात पर ध्यान देता है कि आप कहां थे, अभी आप कहां हैं या किस स्थिति में हैं और आने वाले कल में आपके साथ क्या हो सकता है। यह आपको ऊर्जा से भरपूर माहौल में प्रवेश करने का मौका देता है और अपने भविष्य के लिए सही विकल्प चुनने में मदद करता है। जिस तरह एक भरोसेमंद काउंसलर आपको अपने अंदर झांकना सिखाता है, उसी तरह टैरो आपको अपनी आत्मा से बात करने का मौका देता है।
आपको लग रहा है कि जैसे जिंदगी के मार्ग पर आप भटक गए हैं और आपको दिशा या सहायता की ज़रूरत है। पहले आप टैरो का मज़ाक उड़ाते थे लेकिन अब आप इसकी सटीकता से प्रभावित हो गए हैं या फिर आप एक ज्योतिषी हैं जिसे मार्गदर्शन या दिशा की ज़रूरत है या फिर आप अपना समय बिताने के लिए कोई नया शौक ढूंढ रहे हैं। इन कारणों से या अन्य किसी वजह से टैरो में लोगों की दिलचस्पी काफी बढ़ गई है। टैरो डेक में 78 कार्ड्स की मदद से भविष्य के बारे में जाना जा सकता है। इन कार्ड्स की मदद से आपको अपने जीवन में मार्गदर्शन मिल सकता है।
टैरो की उत्पति 15वीं शताब्दी में इटली में हुई थी। शुरुआत में टैरो को सिर्फ मनोरंजन के रूप में देखा जाता था और इससे आध्यात्मिक मार्गदर्शन लेने का महत्व कम था। हालांकि, टैरो कार्ड का वास्तविक उपयोग 16वीं सदी में यूरोप के कुछ लोगों द्वारा किया गया जब उन्होंने जाना और समझा कि कैसे 78 कार्ड्स की मदद से भविष्य के बारे में जाना जा सकता है, उसी समय से इसका महत्व कई गुना बढ़ गया।
टैरो एक ऐसा ज़रिया है जिसकी मदद से मानसिक और आध्यात्मिक प्रगति को प्राप्त किया जा सकता है। आप कुछ स्तर पर अध्यात्म से, थोड़ा अपनी अंतरात्मा से और थोड़ा अपने अंर्तज्ञान और आत्म-सुधार लाने से एवं बाहरी दुनिया से जुड़ें।
तो आइए अब इस साप्ताहिक राशिफल की शुरुआत करते हैं और जानते हैं कि 30 मार्च से 05 अप्रैल, 2025 तक का समय सभी 12 राशियों के लिए कैसे परिणाम लेकर आएगा?
टैरो साप्ताहिक राशिफल 30 मार्च से 05 अप्रैल, 2025: राशि अनुसार राशिफल
मेष राशि
प्रेम जीवन: किंग ऑफ स्वॉर्ड्स
आर्थिक जीवन: स्ट्रेंथ
करियर: पेज ऑफ वैंड्स
स्वास्थ्य: द वर्ल्ड
टैरो रीडिंग में मेष राशि के जातकों को किंग ऑफ स्वॉर्ड्स कार्ड मिला है जिसके अनुसार आप और आपका पार्टनर एक-दूसरे के विचारों को अच्छी तरह से समझ पाएंगे। इसके साथ ही आपका पार्टनर ज्यादा भावुक न होकर वास्तविकता को समझने वाला होगा।
वित्तीय टैरो राशिफल की बात करें, तो द स्ट्रेंथ कार्ड आमतौर पर समझदारी से वित्तीय निर्णय लेने, आत्मविश्वास बनाए रखने और खर्चों को लेकर संयम बनाए रखने की आवश्यकता को दर्शाता है। यह कार्ड भावनात्मक स्तर पर संतुलन बनाने और अपने निर्णयों पर भरोसा रखने के महत्व को उजागर करता है। इसके साथ ही यह कार्ड आपके लिए वित्तीय प्रगति और लाभ के संकेत भी दे रहा है।
करियर के लिए टैरो कार्ड रीडिंग में पेज ऑफ वैंड्स एक सकारात्मक कार्ड है। यह संकेत देता है कि आपको अपने करियर के क्षेत्र में नए अवसर मिल सकते हैं और नौकरी या व्यवसाय के लिहाज़ से यह सप्ताह संतोषजनक रहेगा। व्यापारियों को इस समय नई डील मिल सकती है। हालांकि, ये डील बहुत बड़ी नहीं होंगी लेकिन आपके बिज़नेस को चलाने के लिए पर्याप्त होगी।
द वर्ल्ड टैरो कार्ड का कहना है कि आप किसी स्वास्थ्य समस्या से ठीक हो सकते हैं और बेहतर महसूस कर सकते हैं। यह संकेत देता है कि आपकी अध्यात्म में अधिक रुचि हो सकती है। ध्यान करने और काम एवं निजी जीवन के बीच संतुलन बनाने से आपको फिट रहने में मदद मिल सकती है।
इस महीने की शुभ तिथियां: 9, 18 और 27
वृषभ राशि
प्रेम जीवन: फाइव ऑफ वैंड्स
आर्थिक जीवन: फोर ऑफ पेंटाकल्स
करियर: क्वीन ऑफ पेंटाकल्स
स्वास्थ्य: पेज ऑफ स्वॉर्ड्स
प्रेम जीवन में वृषभ राशिके जातकों को फाइव ऑफ वैंड्स कार्ड मिला है जिसके अनुसार आपके और आपके पार्टनर के बीच बहस या झगड़ा हो सकता है। यदि आपके परिवार वाले आपके रिश्ते के लिए सहमत नहीं हैं, तो आप दोनों मिलकर अपने प्यार के लिए लड़ सकते हैं। यह समय बदलाव को अपनाने और एकसाथ मिलकर अपने रिश्ते को मज़बूत करने के लिए अनुकूल है।
वित्तीय राशिफल में फोर ऑफ पेंटाकल्स कार्ड का कहना है कि आप अनजाने में अपने पैसे को लेकर कंजूस या पोज़ेसिव हो सकते हैं। आप जितना ज्यादा पैसा बचाने की कोशिश करेंगे, ये उतना ही ज्यादा आपके हाथ से फिसलता जाएगा। इस सप्ताह पैसों को लेकर आपको अपने स्वभाव में थोड़ा लचीलापन लाने की ज़रूरत है। छोटे-छोटे निवेश करने से बड़ा लाभ होने की उम्मीद है।
करियर में क्वीन ऑफ पेटाकल्स कार्ड का कहना है कि इस सप्ताह आप अपने काम को लेकर बहुत सतर्क और सख्त रहेंगे। आप एक सफल व्यक्ति के रूप में दिख सकते हैं और कार्यक्षेत्र में उत्कृष्ट आने का भरपूर प्रयास करेंगे। आपको आपकी कंपनी द्वारा सम्मानित भी किया जा सकता है। यदि आप व्यापार करते हैं, तो आपको अपने बिज़नेस में अच्छा लाभ मिल सकता है। इसके साथ ही इस सप्ताह आपके सम्मान और प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।
हेल्थ टैरो कार्ड रीडिंग में पेज ऑफ स्वॉर्ड्स कार्ड आपको मानसिक स्पष्टता प्रदान कर सकता है जिससे आप अपनी बाधाओं को पार कर सकते हैं। इस कार्ड का कहना है कि आपको किसी पुरानी बीमारी या चोट से उबरने का मौका मिल सकता है। हालांकि, किसी भी चीज़ की अति करने से बचें और धीरे-धीरे फिर से सब कुछ शुरू करें।
इस महीने की शुभ तिथियां: 6 और 15
मिथुन राशि
प्रेम जीवन: एट ऑफ पेंटाकल्स
आर्थिक जीवन: थ्री ऑफ वैंड्स
करियर: द सन
स्वास्थ्य: फाइव ऑफ पेंटाकल्स (रिवर्स्ड)
मिथुन राशि वालों को ऐट ऑफ पेंटाकल्स कार्ड मिला है जिसके अनुसार आप अपने रिश्ते में बहुत ज्यादा प्रयास करने और उस पर काम करने के लिए तैयार हैं। आपको निश्चित रूप से अपने निजी जीवन में अपनी कड़ी मेहनत का फल प्राप्त होगा। सिंगल जातक किसी प्रतिबद्ध जीवनसाथी की तलाश में हैं एवं जल्द ही आपको वह मिलने वाला है।
वित्तीय रीडिंग में थ्री ऑफ वैंड्स कार्ड कहता है कि आप अपनी आय के स्रोतों को बढ़ाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। आप अपनी आय का दूसरा स्रोत बनाना चाहते हैं और जल्द ही आपको इसमें सफलता मिलने वाली है। इस सप्ताह आपको स्थिर आय होने के संकेत हैं और आप अपनी वित्तीय स्थिति को मज़बूत करेंगे।
करियर में द सन कार्ड प्रमोशन मिलने के संकेत दे रहा है। आपका सामाजिक दायरा बढ़ेगा और निजी एवं पेशेवर स्तर पर आपकी स्थिति बेहतर होगी। आपको अपनी कंपनी में अपने सहकर्मियों और अपने अधीन काम करने वाले लोगों से सम्मान मिल सकता है।
हेल्थ रीडिंग में फाइव ऑफ पेंटाकल्स (रिवर्स्ड) कार्ड किसी पुरानी बीमारी या चोट से ठीक होने के संकेत दे रहा है। यदि कोई पुरानी स्वास्थ्य समस्या फिर से परेशान करती है, तो ध्यान रखें कि आप ठीक हो जाएंगे एवं डॉक्टर या किसी पेशेवर की मदद ले सकते हैं।
महीने की शुभ तिथियां: 5, 14 और 23
कर्क राशि
प्रेम जीवन: व्हील ऑफ फॉर्च्यून
आर्थिक जीवन: फोर ऑफ पेंटाकल्स
करियर: द चैरियट
स्वास्थ्य: द मून
व्हील ऑफ फॉर्च्यून कार्ड का कहना है कि अब आपका रिश्ता मज़बूत होगा। यदि आप जल्द ही विवाह के बंधन में बंधने की सोच रहे हैं, तो अब आपको वैवाहिक सुख मिल सकता है। आपके रिश्ते को कुछ परीक्षाएं देनी पड़ सकती हैं या उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है लेकिन आपका रिश्ता इससे टूटेगा नहीं और आखिर में आप अपने पार्टनर के साथ शांतिपूर्ण संबंध का आनंद लेंगे।
इस समय आपका सारा ध्यान पैसा कमाने और उसे बचाने पर रहने वाला है। आप इस सप्ताह कंजूस बन सकते हैं और पैसों को लेकर लोभी हो सकते हैं। आप ज़रूरत की चीज़ों पर भी खर्च करने से पहले दो बार सोचेंगे। आप सिर्फ पैसों पर ध्यान न दें और अपने करीबी लोगों को चोट पहुंचाने से बचें।
अपराइट चैरियट कार्ड का कहना है कि इस सप्ताह आपके अंदर सफल होने और चुनौतियों को पाने करने की दृढ़ इच्छाशक्ति हो सकती है। आपको अपनी क्षमता या कौशल पर पूरा विश्वास होगा। यदि आप अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो आपको अपने करियर में प्रगति मिल सकती है।
टैरो हेल्थ रीडिंग में द मून कार्ड कहता है कि आप किसी मानसिक समस्या या सिरदर्द या माइग्रेन से जूझ सकते हैं। इससे आपका स्वास्थ्य कमज़ोर रह सकता है और आपके संपूर्ण विकास में बाधा आ सकती है।
लव टैरो रीडिंग में ऐट ऑफ वैंड्स कार्ड का कहना है कि अगर आपकी अपने पार्टनर से बातचीत बंद है, तो अब जल्द ही आपकी उनसे बात हो सकती है। अगर आप प्रेम संबंध में हैं और अपने पार्टनर को लेकर प्रतिबद्ध हैं, तो इस सप्ताह आपके रिश्ते का आधार इस बात पर निर्भर करेगा कि आप अपने पार्टनर से कितनी अच्छी तरह से बात करते हैं।
वित्तीय रीडिंग में टू ऑफ स्वॉर्ड्स कार्ड एक शुभ संकेत नहीं है। इस कार्ड का कहना है कि इस सप्ताह आपके सामने कोई महत्वपूर्ण या ऐसा खर्चा आ सकता है जिसे आपके लिए टाल पाना मुश्किल हो। इस पूरे सप्ताह आर्थिक तनाव बना रहेगा। आप अभी से योजना बनाकर चलें, तो बेहतर होगा।
करियर में नाइन ऑफ स्वॉर्ड्स कार्ड तनाव और संघर्ष के संकेत दे रहा है। आपको इस सप्ताह अपने ऑफिस में राजनीति का सामना करना पड़ सकता है या फिर कोई आपकी छवि को खराब करने की कोशिश कर सकता है। आपके ऊपर काम का दबाव भी बढ़ सकता है और आपको चिंता हो सकती है।
टू ऑफ पेंटाकल्स कार्ड का कहना है कि आपको अपने काम और निजी जीवन में संतुलन बनाने की ज़रूरत है। आप अपनी सेहत और फिटनेस पर ध्यान दें। यह कार्ड बताता है कि आपको स्वस्थ दिनचर्या अपनानी चाहिए। आपको अपनी सेहत को बेहतर करने के लिए कुछ बदलाव लाने होंगे।
महीने की शुभ तिथियां: 1, 10, 19
कन्या राशि
प्रेम जीवन: ऐस ऑफ कप्स
आर्थिक जीवन: थ्री ऑफ कप्स
करियर: सिक्स ऑफ पेंटाकल्स
स्वास्थ्य: टेम्पेरेंस
कन्या राशि के जातकों के लिए ऐस ऑफ कप्स कार्ड का कहना है कि इस सप्ताह आप इस बात से प्रभावित होंगे कि आपका पार्टनर आपके साथ कितनी अच्छी तरह से पेश आता है। ऐस ऑफ कप्स कार्ड प्यार, अंतरंगता, भावनाओं और करुणा का प्रतीक है। यह कार्ड प्रेम जीवन में एक नई शुरुआत को दर्शा रहा है। आप किसी नए रिश्ते की शुरुआत कर सकते हैं या अगर आप पहले से ही प्रेम संबंध में हैं, तो आपके और आपके पार्टनर के बीच नज़दीकियां बढ़ सकती हैं।
वित्तीय जीवन में आपको थ्री ऑफ कप्स कार्ड मिला है जो संकेत देता है कि आपके वेतन में वृद्धि हो सकती है या फिर बिज़नेस में आपकी अधिक बिक्री होगी। आपके पास अपने करीबियों के साथ सफलता का जश्न मनाने के लिए कई कारण होंगे।
करियर में सफलता की सीढ़ी चढ़ने के लिए आपको अपने वरिष्ठों से बहुत सहायता मिल सकती है। अगर आप अपने बिज़नेस के लिए निवेशक या बिज़नेस को बढ़ाने के लिए पार्टनर ढूंढ रहे हैं, तो अब आपका यह काम बन सकता है।
इस सप्ताह आपका स्वास्थ्य अच्छा रहने वाला है और आप हर मामूली स्वास्थ्य समस्या से निपटने में सक्षम होंगे। यह कार्ड इम्युनिटी के मज़बूत होने और उत्साह के संकेत देता है।
महीने की शुभ तिथियां: 15 और 25
तुला राशि
प्रेम जीवन: टेन ऑफ पेंटाकल्स
आर्थिक जीवन: टेन ऑफ वैंड्स
करियर: नाइट ऑफ कप्स
स्वास्थ्य: सेवन ऑफ पेंटाकल्स
टैरो साप्ताहिक राशिफल के अनुसार तुला राशि के जातकों को प्रेम जीवन में टेन ऑफ पेंटाकल्स कार्ड मिला है। इस कार्ड का कहना है कि आपको अपने परिवार के साथ अच्छे और यादगार पल बिताने का मौका मिलेगा। अगर आप अपने परिवार को बढ़ाने के बारे में सोच रहे हैं, तो इस सप्ताह आपको प्रेग्नेंसी की खबर मिल सकती है। परिवार के साथ समय बिताने के लिए यह सप्ताह अच्छा रहने वाला है।
वित्तीय जीवन में आपको टेन ऑफ वैंड्स कार्ड मिला है जिसका कहना है कि इस सप्ताह आप अपने परिवार और परिवार के सदस्यों की ज़रूरतों पर बहुत ज्यादा पैसा खर्च कर सकते हैं। इसकी वजह से आप अपनी उम्मीद या इच्छा के अनुसार बचत कर पाने में पीछे रह सकते हैं।
नाइट ऑफ कप्स कार्ड कहता है कि इस सप्ताह आपको अपने करियर में नए अवसर मिलने की संभावना है। यदि आप किसी नौकरी या कोर्स के आवेदन के जवाब का इंतज़ार कर रहे हैं, तो अब आपको सकारात्मक समाचार मिल सकता है। यह कार्ड अप्रत्याशित अवसर मिलने के संकेत भी दे रहा है। नाइट ऑफ कप्स कार्ड आने पर करियर में सब कुछ अच्छा रहता है।
टैरो हेल्थ रीडिंग में सेवन ऑफ पेंटाकल्स कार्ड कहता है कि आप अपनी सेहत को बेहतर करने के लिए सही प्रयास कर रहे हैं। आप उचित आहार और नियमित व्यायाम की मदद से अपनी सेहत में सुधार लाने की कोशिश कर रहे हैं। आपको अब धीरे-धीरे सकारात्मक परिणाम दिखने शुरू हो जाएंगे।
इस महीने की शुभ तिथियां: 6 और 24
वृश्चिक राशि
प्रेम जीवन: नाइन ऑफ वैंड्स
आर्थिक जीवन: द हैंग्ड मैन
करियर: किंग ऑफ स्वॉर्ड्स
स्वास्थ्य: नाइन ऑफ पेंटाकल्स
वृश्चिक राशि के जातकों को नाइन ऑफ वैंड्स कार्ड मिला है जिसके अनुसार आप समझते हैं कि आप जिस तरह का पार्टनर चाहते हैं, उसके लिए बहुत ज्यादा मेहनत, त्याग और खुद में सुधार करने की ज़रूरत है। वास्तव में यही प्रेम होता है। आपको ये महसूस होगा कि आप जो भी चीज़ या लक्ष्य पाना चाहते हैं, वह जल्द ही आपको प्राप्त होने वाला है। आप अपनी रोमांटिक लाइफ में कोई बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
अगर आप आर्थिक स्तर पर संघर्ष कर रहे हैं, तो द हैंग्ड मैन कहता है कि आपको अपने नज़रिए को बदलने की ज़रूरत है। आप अपनी वित्तीय स्थिति को लेकर बहुत ज्यादा चिंतित हैं या फिर आपके सोचने की वजह से ही परेशानियां उत्पन्न हो रही हैं। आप अपनी जिंदगी के अन्य पहलुओं में हो रही सकारात्मक चीज़ों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
करियर में किंग ऑफ स्वॉर्ड्स कार्ड कहता है कि इस सप्ताह आप अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए जीतोड़ मेहनत करेंगे। आप पहले से ज्यादा मेहनत करेंगे और अपनी सारी ऊर्जा कड़ी मेहनत करने में लगा देंगे। आप अपनी कंपनी में अपनी योग्यता साबित करेंगे।
नाइन ऑफ पेंटाकल्स कार्ड कहता है कि इस सप्ताह आप जोश और ऊर्जा से भरपूर रहने वाले हैं। आपकी मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। आपको कोई बड़ी स्वास्थ्य समस्या परेशान नहीं करेगी।
धनु राशि के जातकों को प्रेम जीवन में नाइन ऑफ कप्स कार्ड मिला है जिसका मतलब है कि कपल भावनात्मक रूप से संतुष्ट होंगे और अपने रिश्ते का भरपूर आनंद ले पाएंगे। आप शादी के बंधन में बंध सकते हैं या सगाई कर सकते हैं या फिर अपना परिवार शुरू करने के बारे में भी सोच सकते हैं। आप अपने निजी जीवन में स्थिरता लाने की ओर काम कर सकते हैं।
अगर आपने हाल ही में किसी आर्थिक संकट का सामना किया है, तो अब आप खुद पर थोड़े कठोर हो रहे हैं। हालांकि, द रिवर्स्ड जजमेंड कार्ड कहता है कि आप वित्तीय स्तर पर जानं-अनजाने में गलतियां दोहरा रहे हैं। आप अपनी वित्तीय स्थिति और लक्ष्यों को समझें और उन पर काम करना शुरू करें।
फोर ऑफ पेंटाकल्स कार्ड कहता है कि अब जाकर आपको अपने करियर में थोड़ी स्थिरता मिल सकती है। अगर यह आपकी पहली नौकरी है या करियर में इस स्थिरता को पाने के लिए आपने पहले संघर्ष किया है, तो अभी भी आप अपने करियर को लेकर थोड़े बेचैन हो सकते हैं।
सेहत के मामले में द डेथ कार्ड आध्यात्मिक विकास और जीवन में आने वाले परिवर्तनों का स्वागत करने के लिए कह रहा है। अगर आपको किसी चीज़ की लत है, तो उससे छुटकारा पाने की कोशिश करें।
इस महीने की शुभ तिथियां: 3 और 30
मकर राशि
प्रेम जीवन: टेन ऑफ पेंटाकल्स
आर्थिक जीवन: किंग ऑफ पेंटाकल्स
करियर: फोर ऑफ स्वॉर्ड्स
स्वास्थ्य: द स्टार
मकर राशि के जातकों को प्यार के मामले में इस सप्ताह टेन ऑफ पेंटाकल्स कार्ड मिला है। इस कार्ड का कहना है कि आप और आपका पार्टनर दोनों ही भावनात्मक और भौतिक रूप से अच्छी स्थिति में हैं। आप अपने प्रेमी या पार्टनर के साथ रहना शुरू कर सकते हैं, नया घर खरीद सकते हैं या परिवार शुरू करने के बारे में सोच सकते हैं। आपके पारिवारिक संबंध मज़बूत होंगे।
किंग ऑफ पेंटाकल्स कार्ड मेहनत का फल मिलने को दर्शाता है। यह कार्ड लकी चार्म भी है। इस समय आपकी आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी। आज आपका आर्थिक रूप से सुरक्षित और स्थिर हो पाना, कोई संयोग नहीं है बल्कि यह आपकी कड़ी मेहनत का परिणाम है।
आपके लिए काम बहुत ज्यादा थका देने वाला या निराशाजनक रहा है। हो सकता है कि आप लंबे समय से कड़ी मेहनत कर रहे हैं और अब आप मानसिक एवं शारीरिक रूप से थकान महसूस कर रहे हैं। काम से एक दो दिन की छुट्टी लेने से भी आपके मानसिक स्वास्थ्य पर काफी अच्छा असर पड़ेगा और आप पहले से बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे।
द स्टार कार्ड का कहना है कि आपका स्वास्थ्य स्थिर रहेगा लेकिन आपको काम से ब्रेक लेकर अपने मानसिक और भावनातमक स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए। एक छोटे-से ब्रेक से भी आप काफी तरोताज़ा महसूस कर सकते हैं।
इस महीने की शुभ तिथियां: 8 और 16
कुंभ राशि
प्रेम जीवन: नाइट ऑफ वैंड्स
आर्थिक जीवन: सिक्स ऑफ स्वॉर्ड्स
करियर: द सन
स्वास्थ्य: क्वीन ऑफ वैंड्स
कुंभ राशि के जातकों को प्रेम जीवन में नाइट ऑफ वैंड्स कार्ड मिला है जो कि उत्साह और रिश्ते को सफल बनाने के लिए प्रयास करने के लिए प्रेरित कर रहा है। इस कार्ड का यह भी कहना है कि आपको और आपके पार्टनर को एक साथ अच्छा समय बिताने की ज़रूरत है। इससे आप दोनों का रिश्ता मज़बूत होगा।
वित्तीय जीवन में सिक्स ऑफ स्वॉर्ड्स कार्ड आर्थिक समस्याओं से राहत पाने और वित्तीय जीवन में स्थिरता और पैसों के सही प्रबंधन को दर्शाता है। इस कार्ड का यह भी कहना है कि आप आर्थिक चुनौतियों को पार कर एक शांतिपूर्ण माहौल में प्रवेश कर रहे हैं, जहां पर वित्तीय तनाव कम होगा।
करियर में द सन कार्ड कहता है कि बॉस और प्रभावी लोग आपके काम से खुश होंगे। यह कार्ड प्रमोशन और बेहतरीन अवसर मिलने के संकेत भी दे रहा है। आप अपने करियर को सही दिशा में ले जाने में सक्षम होंगे और सफलता का आनंद लेंगे।
स्वास्थ्य के मामले में आपको क्वीन ऑफ वैंड्स कार्ड मिला है जो कि उत्तम स्वास्थ्य की ओर संकेत कर रहा है। हालांकि, अगर आप किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं, तो अब आप जल्द ही आसानी से उससे उबर पाएंगे।
इस सप्ताह मीन राशि के जातकों को ऐट ऑफ कप्स रिवर्स्ड काड मिला है। इस कार्ड का कहना है कि आपने अपने पार्टनर से बातचीत कर के एक-दूसरे के साथ समझौता कर लिया है इसलिए अब आपके रिश्ते में जो समस्याएं थीं वे सुलझ सकती हैं। आप दोनों ने एक-दूसरे को माफ करने और एक साथ आगे बढ़ने का फैसला कर लिया है।
वित्त जीवन की बात करें, तो सिक्स ऑफ वैंड्स कार्ड सफलता, उपलब्धि और आर्थिक स्तर पर किए जा रहे प्रयासों के लिए सकारात्मक परिणाम मिलने को दर्शाता है। आपके वेतन में बढ़ोतरी या पदोन्नति हो सकती है। यह कार्ड एक ऐसे अवसर को दर्शाता है जिसमें दूसरों के द्वारा आपकी कड़ी मेहनत को पहचान मिलने के कारण आपको अपने वित्तीय जीवन में स्थिरता और प्रगति मिल सकती है।
हो सकता है कि हाल ही में आप अपने काम में काफी व्यस्त या परेशान रहे हों। संभव है कि आप लंबे समय से अपनी पूरी ऊर्जा लगाकर काम कर रहे हों और अब तनाव आपके शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा हो। आप अपने शरीर से मिल रहे संकेतों पर ध्यान दें और आराम करें।
स्वास्थ्य की बात करें, तो सेवन ऑफ कप्स कार्ड स्वास्थ्य समस्याओं के हल के लिए अवास्तविक उम्मीदें रखने या कोई काल्पनिक समाधान न सोचने के बारे में चेतावनी दे रहा है। यह कार्ड केवल कुछ समय के लिए राहत देने वाले उपायों के बजाय खुद की देखभाल करने और अपने स्वास्थ्य के प्रति संतुलित दृष्टिकोण अपनाने के लिए कह रहा है।
इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1. क्या टैरो कार्ड में काला जादू का प्रयोग नहीं किया जाता है?
उत्तर. टैरो में किसी भी तरह का काला जादू नहीं होता है।
प्रश्न 2. क्या टैरो भारत में पॉपुलर है?
उत्तर. हां, अब टैरो बहुत लोकप्रिय हो रहा है।
प्रश्न 3. क्या टैरो का संबंध यूरोप से है?
उत्तर. हां, टैरो की उत्पत्ति यूरोप से हुई है।
शनि का मीन राशि में उदय: दुनिया में आ सकता है भूचाल, जानें राशियों का क्या होगा हाल
शनि का मीन राशि में उदय: एस्ट्रोसेज एआई की हमेशा से यही पहल रही है कि किसी भी महत्वपूर्ण ज्योतिषीय घटना की नवीनतम अपडेट हम अपने रीडर्स को समय से पहले दे पाएं और इसी कड़ी में हम आपके लिए लेकर आए हैं शनि का मीन राशि में उदय से संबंधित यह खास ब्लॉग।
29 मार्च, 2025 को शनि मीन राशि में अस्त अवस्था में प्रवेश करेंगे लेकिन 31 मार्च, 2025 को शनि का मीन राशि में उदय होगा।
शनि ग्रह अनुशासन और ऊर्जा का प्रतीक हैं और शनि की मीन राशि में उपस्थिति, इस ग्रह को मीन राशि की स्वप्निल, सहज ज्ञान और भावनात्मक विशेषताओं से जोड़ देती है। शनि का उदित होना जातकों और समाज को कई तरह से प्रभावित कर सकता है लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि वे शनि और मीन राशि की ऊर्जा के साथ कैसे तालमेल बिठाते हैं।
शनि ग्रह का संबंध संरचना, नियमों और सीमाओं से होता है जबकि मीन राशि अध्यात्म, भावनाओं और सहज ज्ञान का प्रतीक है। शनि का मीन राशि में उदय होने पर व्यक्ति कम भौतिक मामलों जैसे कि सपनों, भावनाओं और आध्यात्मिक कार्यों को लेकर जिम्मेदार और अनुशासित महसूस कर सकता है।
ये जातक आध्यात्मिक या कलात्मक भावनाओं को व्यवहारिक तरीके से अपनाने के लिए बाध्य महसूस कर सकते हैं। मीन राशि का संबंध वास्तविकता से बचने या दुनिया को एक आदर्श नज़रिए से देखने से होता है। इस राशि में शनि का होना व्यक्ति को अपने भ्रम का सामना करने और उन्हें दूर करने के लिए प्रेरित कर सकता है। यह लोगों को उन चीज़ों से निपटने में मदद कर सकता है जिससे वे अब तक बचते आ रहे हैं जिसमें विशेष रूप से आध्यात्मिक या भावनात्मक चीज़ें शामिल हैं।
शनि का मीन राशि में उदय: समय
31 मार्च, 2025 को रात 12 बजकर 43 मिनट पर शनि मीन राशि में उदित होंगे। 13 जुलाई, 2025 को सुबह 07 बजकर 24 मिनट पर शनि मीन राशि में वक्री होंगे। इसके बाद शनि 28 नवंबर, 2025 को सुबह 07 बजकर 26 मिनट पर मार्गी हो जाएंगे।
बृहत् कुंडलीमें छिपा है, आपके जीवन का सारा राज, जानें ग्रहों की चाल का पूरालेखा-जोखा
शनि का मीन राशि में उदय: विश्व पर प्रभाव
सरकारी और नीतियां
भारत के अन्य देशों के साथ संबंध बेहतर होंगे और भू-राजनीतिक परिदृश्य अधिक स्थिर होगा एवं इसके कुछ पहलुओं में सुधार देखने को मिलेगा।
सरकार मानवीय कार्यों पर अधिक ज़ोर देगी जिससे शांति के प्रयासों को बढ़ावा मिलेगा और सामाजिक अशांति में कमी आएगी।
सरकार पर्यावरण को साफ करने खासतौर पर जल प्रदूषण को लेकर कुछ कदम उठा सकती है। यमुना नदी जैसी महत्वूपर्ण नदियों और महासागरों की सफाई में तेजी आ सकती है या आम लोगों के बीच इसकी मांग बढ़ सकती है।
कुछ राज्यों या भारत के विभिन्न हिस्सों और दुनियाभर के लीडरों में बदलाव आ सकता है, प्रमुख सत्ता में परिवर्तन आ सकता है और शासन-प्रशासन से संबंधित लोगों के दृष्टिकोण में बदलाव देखने को मिल सकता है। भले ही छोटा-सा बदलाव आए लेकिन बदलाव आएगा ज़रूर।
सरकार को अचानक नई परियोजनाओं और योजनाओं पर ध्यान देने की ज़रूरत पड़ सकती है।
आध्यात्मिक और मानवीय गतिविधियां
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार शनि का मीन राशि में उदय होने पर वैश्विक स्तर पर समाज में बदलाव आ सकता है जिससे आध्यात्मिक उत्थान और शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान दिया जाएगा। लोग शुद्ध और संतुलित आहार में रुचि लेंगे।
शनि का मीन राशि में उदय होने पर पशुओं के अधिकारों को लेकर समाज में अधिक जागरूकता आएगी और मनुष्य एवं जानवरों के बीच संतुलन और स्नेह बढ़ेगा।
लोगों का रुझान उपचार के प्राकृतिक तरीकों की ओर अधिक बढ़ सकता है और भावनात्मक रूप से मज़बूत होने एवं जीवन में बदलाव को स्वीकार करने पर ध्यान देंगे।
प्राकृतिक आपदा और विपत्तियां
वर्ष 2025 मंगल का साल है जिन्हें खासतौर पर पृथ्वी, जल और वायु के मामले में प्राकृतिक एवं आकस्मिक आपदाओं का संकेतक माना जाता है। शनि का मीन राशि में उदय होने पर दुनियाभर में और भारत के पश्चिमी तट के कुछ हिस्सों में प्राकृतिक आपदाओं जैसे कि सुनामी या समुद्र के अंदर ज्वालामुखी के विस्फोट होने की आशंका है।
दुनियाभर में भूकंप आने का खतरा बढ़ सकता है।
2025 मंगल का वर्ष है और शनि देव वायु का प्रतिनिधित्व करते हैं जिससे वायु से संबंधित आपदाओं जैसे कि प्लेन के क्रैश होने आदि का खतरा बढ़ सकता है।
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शनि का मीन राशि में उदय: स्टॉक मार्केट पर प्रभाव
31 मार्च, 2025 के बाद से शनि का मीन राशि में उदय होना शेयर मार्केट को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है। इस दौरान शेयर मार्केट में निवेश करने को लेकर आपको थोड़ा सावधान रहने की सलाह दी जाती है।
शेयर मार्केट भविष्यवाणी 2025 के अनुसार अप्रैल महीने की शुरुआत मंगलवार के दिन से हो रही है जिसे अशुभ माना जाता है। महीने की शुरुआत में राहु, बुध, सूर्य, शुक्र और शनि मीन राशि में पंचग्रही योग का निर्माण करेंगे जबकि बृहस्पति वृषभ राशि में, मंगल मिथुन राशि में और केतु कन्या राशि में विराजमान रहेंगे। ग्रहों के इस दुर्लभ संयोग के कारण स्टॉक मार्केट में बड़े उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं।
रिलायंस इंडस्ट्री, परफ्यूम और कॉस्मेटिक इंडस्ट्री, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी, आईटी और अन्य क्षेत्र शुरुआत में बेहतर प्रदर्शन करेंगे लेकिन महीने के आखिर में इनकी गति धीमी पड़ सकती है।
इस समय ल्यूपिन, हैवल्स इंडिया, अजंता फार्मा, बलरामपुर चीनी, कजारिया सेरेमिक्स, दिविस लैब्स, गैलेंट मैटल, एचसीएल टेक्नोलॉजी, सोलर इंडस्ट्री, ब्लू स्टार, मुंद्रा पोर्ट, क्रिसिल, ज्योति लैब्स आदि में निवेश कर सकते हैं।
वेब डिज़ाइनिंग कंपनियों और प्रकाशन फर्म में मंदी देखने को मिल सकती है। इससे इनके विकास में रुकावट आने के संकेत हैं।
मार्च के पहले सप्ताह में कुछ नई विदेशी कंपनियां भारतीय बाज़ार में प्रवेश कर सकती हैं जिससे पेट्रोल, डीज़ल और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि होने की संभावना है।
शनि का मीन राशि में उदय: इन राशियों पर पड़ेगा सकारात्मक प्रभाव
वृषभ राशि
वृषभ राशि के जातकों के लिए शनि का मीन राशि में उदय बहुत ज्यादा शुभ रहने वाला है। शनि के आपके आय एवं लाभ के भाव में प्रवेश करने पर आपको आर्थिक स्तर पर सफल होने के कई अवसर मिल सकते हैं। आप कई स्रोतों से धन अर्जित करेंगे और आपको अपनी आमदनी में वृद्धि देखने को मिल सकती है। आपको खूब धन कमाने के अवसर मिलेंगे और कार्यक्षेत्र में आपकी प्रतिष्ठा में भी इज़ाफा होगा। व्यापारी फिज़ूलखर्ची पर नियंत्रण रखेंगे और कई ऑफरों का लाभ उठा सकते हैं। इन्हें निवेश और कार्यक्षेत्र में नए अवसरों से लाभ होने की उम्मीद है। आप नया बिज़नेस भी शुरू कर सकते हैं।
मिथुन राशि के आठवें और नौवें भाव के स्वामी शनि देव हैं और अब वह करियर एवं पेशे के भाव यानी दसवें घर में उदित होने जा रहे हैं। शनि का मीन राशि में उदय जातकों को बेहतरीन प्रदर्शन करने और पहले से ज्यादा कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित कर सकता है। शनि के आपके दसवें भाव में उदित होने से आप अपने कार्यक्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करेंगे और आपको करियर में कई अवसर प्राप्त होंगे। चूंकि, शनि आठवें भाव के स्वामी होकर अपनी ही राशि से तीसरे भाव में स्थित होंगे इसलिए आपको अचानक पैतृक संपत्ति मिल सकती है, आपके वेतन में बढ़ोतरी हो सकती है या आपको पदोन्नति मिलने की भी संभावना है। आप नौकरी छोड़कर बिज़नेस शुरू करने के बारे में भी सोच सकते हैं।
मकर राशि के लिए शनि का मीन राशि में उदय होना लाभकारी सिद्ध होगा। मार्च 2025 में शनि के मीन राशि में उदित होने से मकर राशि के जातकों को शनि की साढ़ेसाती से राहत मिलेगी। नौकरीपेशा जातकों को शानदार सफलता मिलने के योग हैं और इन्हें कार्यक्षेत्र में अधिक जिम्मेदारियां मिल सकती हैं।
इसके अलावा करियर बदलने के लिए यह अच्छा समय है और आपको रियल एस्टेट से खूब पैसा कमाने के अवसर प्राप्त होंगे। मकर राशि के लोगों को स्टॉक मार्केट और व्यापार से मुनाफा होने के आसार हैं। आपके धन एवं सुख-सुविधाओं में वृद्धि देखने को मिलेगी। व्यापारियों के लिए पैसा कमाने के लिए अनुकूल समय है। वे अपने कार्यों को अच्छी तरह से व्यवस्थित करने और लंबे समय से चली आ रही समस्याओं को हल करने में सक्षम होंगे।
शनि का मीन राशि में उदय: इन राशियों पर पड़ेगा नकारात्मक प्रभाव
कन्या राशि
कन्या राशि के पांचवे और छठे भाव के स्वामी शनि देव हैं और अब वह आकस्मिक घटनाओं एवं गूढ़ विज्ञान से संबंधित भाव यानी आठवें घर में उदित होंगे। शनि की यह स्थिति कन्या राशि के जातकों के लिए योग कारक नहीं है। शनि की दसवें भाव से आठवें भाव पर दृष्टि पड़ने की वजह से आपको अपने करियर में अचानक देरी या बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। संभव है कि आपका अचानक स्थानांतरण हो जाए या आपको नौकरी से निकाला भी जा सकता है। यदि आप व्यापार करते हैं, तो आपके व्यवसाय में अचानक मंदी आ सकती है जो आपके लिए अत्यधिक नुकसानदायक साबित होगी।
यदि आप किसी कानूनी मसले में फंसे हैं, तो उसका फैसला आपके विरुद्ध आ सकता है। कुंडली में शनि अशुभ स्थिति में हो या उस पर किसी अशुभ ग्रह का प्रभाव पड़ रहा हो, तो उपरोक्त प्रभाव और भी ज्यादा बदतर हो सकते हैं।
शनि तुला राशि के चौथे और पांचवे भाव के स्वामी हैं और अब वह आपके छठे भाव में उदित होने जा रहे हैं। चौथे भाव के स्वामी शनि के आपके छठे भाव में होने के कारण आपकी मां की सेहत खराब हो सकती है। आपको इस समयावधि में अपनी मां की सेहत का ख्याल रखने की सलाह दी जाती है।
यदि छठे भाव के स्वामी बृहस्पति जातक की कुंडली में अशुभ स्थान में बैठे हों, तब पांचवे भाव के स्वामी के छठे भाव में होने से छात्रों को शिक्षा के क्षेत्र में रुकावटें आ सकती हैं या विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षा में सफल होना मुश्किल हो सकता है।
शनि का मीन राशि में उदय होना आपको बीमार कर सकता है। चूंकि, शनि शारीरिक अंगों के स्वामी हैं इसलिए इस दौरान आपको पैर में चोट लगने की आशंका है।। ध्यान रखें और ज़रूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सहायता लें। डॉक्टर, बैंकर आदि को इस समयावधि में पेशेवर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। वकीलों और न्यायाधीशों को भी सावधान रहने की ज़रूरत है। आपकी अपने वरिष्ठों से बहस हो सकती है जिससे आपको कार्यस्थल पर समस्याएं होने की आशंका है।
इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1. शनि किस राशि में नीच का होता है?
उत्तर. मेष राशि।
प्रश्न 2. शनि कितने डिग्री पर सबसे उच्च के होते हैं?
उत्तर. 20 डिग्री पर।
प्रश्न 3. शनि किस नक्षत्र के स्वामी हैं?
उत्तर. पुष्या नक्षत्र।
अप्रैल में पड़ रहे हैं हनुमान जयंती और राम नवमी जैसे बड़े त्योहार, जानें विवाह के लिए कब है शुभ मुहूर्त!
अंग्रेज़ी कैलेंडर का चौथा महीना अप्रैल होता है। उत्तरी गोलार्ध में अप्रैल खगोलीय वसंत का दूसरा महीना और दक्षिणी गोलार्ध में खगोलीय पतझड़ का दूसरा महीना होता है। ज्योतिषीय और धार्मिक दृष्टि से अप्रैल माह बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इस दौरान ईद, वैशाख, राम नवमी और हनुमान जयंती जैसे कई बड़े पर्व और त्योहार आते हैं।
अप्रैल को वसंत ऋतु का मास भी कहा जाता है। इस महीने में कई सांस्कृतिक और ऐतिहासिक घटनाएं होती हैं जैसे कि अप्रैल फूल डे, ईस्टर और पृथ्वी दिवस। महाराष्ट्र में अप्रैल के महीने में गुड़ी पड़वा का पर्व मनाया जाता है। इस महीने में मुस्लिम धर्म के लोगों की ईद आती है तो वहीं, सिख और पंजाबी समुदाय वैशाख का पर्व मनाते हैं। अप्रैल में कभी-कभी राम नवमी भी पड़ती है जो कि हिंदुओं के लिए बहुत महत्व रखती है।
जब भी नए महीने की शुरुआत होती है, तब हर किसी का मन आशाओं, उम्मीदों और नए सपनों से भर जाता है। उन्हें यही उम्मीद रहती है कि जो काम पहले नहीं बन पाया, वो इस नए माह में बन जाएगा। नए माह की शुरुआत होने पर हर किसी के मन में यह सवाल उठता है कि ये महीना उनके लिए कैसे रहेगा या उनके लिए क्या खास लेकर आया है। क्या इस महीने करियर में तरक्की मिलेगी? व्यापार में किस प्रकार की समस्या झेलनी होगी? पारिवारिक जीवन में मिठास रहेगी या चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा? आदि कई तरह के सवाल हमारे मन-मस्तिष्क में घूमते रहते हैं। अब आपको एस्ट्रोसेज एआई के इस खास ब्लॉग अप्रैल 2025 में इन सभी सवालों का जवाब मिलने जा रहा है।
इसके साथ ही इस विशेष ब्लॉग में हम आपको अप्रैल 2025 में पड़ने वाले महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, तिथियों आदि से भी अवगत करवाएंगे। साथ ही, इस माह में पड़ने वाले ग्रहण-गोचर के साथ-साथ बैंक अवकाश के बारे में भी विस्तृत जानकारी प्रदान करेंगे।
अप्रैल 2025 का ज्योतिषीय तथ्य और हिंदू पंचांग की गणना
अप्रैल 2025 की शुरुआत भरणी नक्षत्र के अंतर्गत शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को होगी। वहीं, अप्रैल 2025 माह का समापन मृगशिरा नक्षत्र में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर होगा।
अप्रैल 2025 के व्रत एवं त्योहारों की तिथियां
तिथि
दिन
पर्व व व्रत
06 अप्रैल 2025
रविवार
राम नवमी
07 अप्रैल 2025
सोमवार
चैत्र नवरात्रि पारणा
08 अप्रैल 2025
मंगलवार
कामदा एकादशी
10 अप्रैल 2025
गुरुवार
प्रदोष व्रत (शुक्ल)
12 अप्रैल 2025
शनिवार
हनुमान जयंती
12 अप्रैल 2025
शनिवार
चैत्र पूर्णिमा व्रत
14 अप्रैल 2025
सोमवार
मेष संक्रांति
16 अप्रैल 2025
बुधवार
संकष्टी चतुर्थी
24 अप्रैल 2025
गुरुवार
वरुथिनी एकादशी
25 अप्रैल 2025
शुक्रवार
प्रदोष व्रत (कृष्ण)
26 अप्रैल 2025
शनिवार
मासिक शिवरात्रि
27 अप्रैल 2025
रविवार
वैशाख अमावस्या
30 अप्रैल 2025
बुधवार
अक्षय तृतीया
बृहत् कुंडली में छिपा है, आपके जीवन का सारा राज, जानें ग्रहों की चाल का पूरा लेखा-जोखा
अप्रैल 2025 में आने वाले सार्वजनिक अवकाशों की सूची
दिन
तारीख़
अवकाश
सोमवार
7 अप्रैल
रामनवमी
गुरुवार
10 अप्रैल
महावीर जयंती
सोमवार
14 अप्रैल
बैसाखी
रविवार
14 अप्रैल
अम्बेडकर जयंती
शुक्रवार
18 अप्रैल
गुड फ्राइडे
रविवार
20 अप्रैल
ईस्टर डे
अप्रैल 2025 में आने वाले बैंक अवकाशों की सूची
तिथि
दिन
अवकाश
राज्य
01 अप्रैल
मंगलवार
सरहुली
झारखंड
01 अप्रैल
मंगलवार
उड़ीसा दिवस
उड़ीसा
01 अप्रैल
मंगलवार
ईद-उल-फ़ितर
तेलंगाना
05 अप्रैल
शनिवार
बाबू जगजीवन राम जयंती
आंध्र प्रदेश, तेलंगाना
06 अप्रैल
रविवार
रामनवमी
इन राज्यों के अलावा अरुणाचल प्रदेश, असम, गोवा, झारखंड, कर्नाटक, केरल, लक्षद्वीप,, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, पांडिचेरी, तमिलनाडु, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल पूरे देश में राष्ट्रीय दिवस
10 अप्रैल
गुरुवार
महावीर जयंती
चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब , राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, लक्षद्वीप,
13 अप्रैल
रविवार
बैसाखी
हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, पंजाब
13 अप्रैल
रविवार
महा विशुबा संक्रांति
उड़ीसा
14 अप्रैल
सोमवार
बोहाग बिहू अवकाश
त्रिपुरा
14 अप्रैल
सोमवार
डॉ अंबेडकर जयंती
अंडमान और निकोबार, अरुणाचल प्रदेश, असम, चंडीगढ़, दमन और दीव, दादरा और नगर हवेली, दिल्ली, लक्षद्वीप,, मणिपुर, मिजोरम, मेघालय, नागालैंड और त्रिपुरा आदि राज्यों के अलावा राष्ट्रीय अवकाश
14 अप्रैल
सोमवार
तमिल नव वर्ष
तमिलनाडु
14 अप्रैल
सोमवार
विषु
केरल
14 अप्रैल
सोमवार
बोहाग बिहू
असम
14 अप्रैल
सोमवार
बंगाली नव वर्ष
त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल
14 अप्रैल
सोमवार
चीराओबा
मणिपुर
15 अप्रैल
मंगलवार
बोहाग बिहू
अरुणाचल प्रदेश
15 अप्रैल
मंगलवार
हिमाचल प्रदेश स्थापना दिवस
हिमाचल प्रदेश
16 अप्रैल
रविवार
बोहाग बिहू
असम
18 अप्रैल
शुक्रवार
गुड फ्राइडे
हरियाणा और झारखंड के अलावा राष्ट्रीय अवकाश
19 अप्रैल
शनिवार
ईस्टर सैटरडे
नागालैंड
20 अप्रैल
रविवार
ईस्टर संडे
केरल, नागालैंड
21 अप्रैल
सोमवार
गरिया पूजा
त्रिपुरा
29 अप्रैल
मंगलवार
महर्षि परशुराम जयंती
गुजरात, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश, पंजाब और राजस्थान
30 अप्रैल
बुधवार
बसवा जयंती
कर्नाटक
अप्रैल विवाह मुहूर्त 2025
दिनांक एवं दिन
नक्षत्र
तिथि
मुहूर्त का समय
14 अप्रैल 2025, सोमवार
स्वाति
द्वितीया
सुबह 06 बजकर 10 मिनट से रात 12 बजकर 13 मिनट तक
16 अप्रैल 2025, बुधवार
अनुराधा
चतुर्थी
रात 12 बजकर 18 मिनट से सुबह 05 बजकर 54 मिनट तक
18 अप्रैल 2025, शुक्रवार
मूल
षष्ठी
रात 01 बजकर 03 मिनट से सुबह 06 बजकर 06 मिनट तक
19 अप्रैल 2025, शनिवार
मूल
षष्ठी
सुबह 06 बजकर 06 मिनट से अगली सुबह 10 बजकर 20 मिनट तक
20 अप्रैल 2025, रविवार
उत्तराषाढ़ा
सप्तमी, अष्टमी
सुबह 11 बजकर 48 मिनट से अगली सुबह 06 बजकर 04 मिनट तक
अप्रैल 2025 में ग्रहों के गोचर की बात करें, तो इस महीने 03 अप्रैल को मंगल ग्रह कर्क राशि में गोचर करेंगे। इसके बाद 07 अप्रैल को बुध मीन राशि में मार्गी होंगे और फिर 13 अप्रैल को शुक्र मीन राशि में मार्गी हो जाएंगे। 14 अप्रैल को सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेंगे।
ग्रहण की बात करें, तो अप्रैल 2025 में कोई चंद्र या सूर्य ग्रहण नहीं लगेगा।
अप्रैल 2025 में पड़ने वाले महत्वपूर्ण व्रत एवं त्योहार का महत्व
विनायक चतुर्थी: 01 अप्रैल को विनायक चतुर्थी मनाई जाएगी। हर महीने विनायक चतुर्थी पड़ती है। इस दिन भगवान गणेश का पूजन एवं व्रत किया जाता है।
यमुना छठ: 03 अप्रैल को यमुना छठ का पर्व पड़ रहा है। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को यमुना छठ मनाई जाती है। मथुरा और वृंदावन के साथ-साथ गुजरात में भव्य तरीके से यमुना छठ का पर्व मनाया जाता है।
राम नवमी: 06 अप्रैल को देशभर में बड़ी धूमधाम से राम नवमी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन रामायण और राम रक्षा स्तोत्र का पाठ किया जाता है। चैत्र की नवमी तिथि को राम नवमी के रूप में मनाया जाता है।
कामदा एकादशी: 08 अप्रैल को कामदा एकादशी पड़ रही है। इस दिन भगवान विष्णु की उपासना एवं व्रत किया जाता है। मान्यता है कि जो भी व्यक्ति कामदा एकादशी पर व्रत रखता है, उसके सारे दुख और कष्ट दूर हो जाते हैं।
हनुमान जन्मोत्सव: 12 अप्रैल को हनुमान जयंती मनाई जाएगी। हनुमान जी के जन्मोत्सव के रूप में इस पर्व को मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन पवन पुत्र हनुमान जी का जन्म हुआ था। उत्तर भारत में चैत्र मास की पूर्णिमा को हनुमान जयंती मनाते हैं।
संकष्टी चतुर्थी: 16 अप्रैल को संकष्टी चतुर्थी है। इस दिन भगवान गणेश का पूजन किया जाता है। इससे भक्तों के सारे कष्ट और संकट दूर हो जाते हैं। जीवन में सुख-समृद्धि, संतान और सफलता पाने के लिए संकष्टी चतुर्थी का व्रत कर सकते हैं।
वैशाख अमावस्या: 27 अप्रैल को वैशाख अमावस्या है। यह हिंदू वर्ष का दूसरा महीना है। अमावस्या तिथि पर पितरों के लिए तर्पण करने का बहुत महत्व है।
अक्षय तृतीया: 30 अप्रैल को अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाएगा। हर साल वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया पड़ती है। इस दिन खरीदारी और दान पुण्य करने का बहुत महत्व है।
सभी 12 राशियों के लिए अप्रैल 2025 का राशिफल
मेष राशि
अप्रैल मासिक राशिफल 2025 के अनुसार, यह महीना मेष राशि के जातकों के लिए मध्यम रहने वाला है। आपको विदेश जाने का मौका मिल सकता है। इस महीने आपको अधिक यात्राएं करनी पड़ सकती हैं।
करियर: इस महीने आपको अपने कार्यक्षेत्र में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। आपको बहुत ज्यादा भाग-दौड़ करनी पड़ेगी। आपके ऊपर काम का दबाव भी बढ़ सकता है।
शिक्षा: इस महीने विदेश जाकर पढ़ाई करने का आपका सपना पूरा हो सकता है। आपको कोई बड़ी उपलब्धि मिलने के संकेत हैं। यदि आप अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखते हैं, तो आपको उत्तम परीक्षा परिणामों की प्राप्त होगी।
पारिवारिक जीवन: आपके पिता का स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। आपके विरोधी परास्त होंगे। हालांकि, परिवार के सदस्यों के बीच झगड़े और असंतुष्टि बढ़ सकती है।
प्रेम और वैवाहिक जीवन: प्यार के मामले में इस महीने की शुरुआत में आपको उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। आपके पार्टनर को कोई शारीरिक कष्ट होने की आशंका है।
आर्थिक जीवन: इस महीने धन के मामले में आपको बहुत ज्यादा सावधान रहने की आवश्यकता है। आपके खर्चों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
स्वास्थ्य: सेहत की दृष्टि से अप्रैल का महीना थोड़ा कमज़ोर रहने वाला है। आंखों की रोशनी में कमी या आंखों में जलन अथवा पानी बहना, पैरों में चोट अथवा मोच, कमर में दर्द जैसी शिकायतें आपको परेशान कर सकती हैं।
उपाय: आपको प्रतिदिन सूर्य देव को जल अर्पित करना चाहिए।
अप्रैल मासिक राशिफल 2025 के अनुसार, यह महीना वृषभ राशि के जातकों के लिए अनुकूल रहने की संभावना है। आपकी आमदनी में वृद्धि देखने को मिल सकती है।
करियर: आपको इस महीने अपने करियर के क्षेत्र में बहुत मेहनत करनी पड़ सकती है। आपके ऊपर काम का दबाव भी ज्यादा रह सकता है।
शिक्षा: छात्रों के लिए यह महीना चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। आपकी एकाग्रता में कमी आने के संकेत हैं। आपको किसी गुरुजन से मार्गदर्शन मिलेगा जिससे शिक्षा में आप सफलता प्राप्त कर पाएंगे।
पारिवारिक जीवन: आपकी अपने परिवारके लोगों से कहासुनी हो सकती है। आपके उग्रता से बोलने के कारण समस्या हो सकती है। आपके भाई -बहनों को शारीरिक और मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
प्रेम और वैवाहिक जीवन: आपके रिश्ते में आपसी समझ की कमी देखने को मिल सकती है। प्रेम संबंधों में फिर से समस्या उत्पन्न हो सकती है। रिश्ते में लड़ाई-झगड़े की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
आर्थिक जीवन: आपको इस महीने असीम धन की प्राप्ति होगी। किसी संपत्ति के क्रय-विक्रय से लाभ मिलने के योग हैं। शेयर बाज़ार में निवेश करने से भी लाभ होगा।
स्वास्थ्य: आपको पेट से संबंधित समस्याएं, कानों में दर्द या कानों में संक्रमण जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
उपाय: आपको बुधवार के दिन काले तिलों का दान करना चाहिए।
अप्रैल मासिक राशिफल 2025 के अनुसार, यह महीना मिथुन राशि के लोगों के लिए उतार-चढ़ाव से भरा रह सकता है। आपके स्वभाव में क्रोध बढ़ने के आसार हैं। इससे आपके संबंध और आपके व्यवसाय में समस्या हो सकती है।
करियर: कार्यक्षेत्र में आपको उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ेगा। आपके ऊपर काम का दबाव रहेगा। गुस्से में आकर या परेशान होकर किसी को भला-बुरा कहने से बचें।
शिक्षा: छात्रोंको पढ़ाई में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को अच्छे परिणाम मिलने की उम्मीद है।
पारिवारिक जीवन: आपके पारिवारिक जीवन में तनाव और टकराव बढ़ेगा। माता और पिता की सेहत में गिरावट आने की आशंका है।
प्रेम और वैवाहिक जीवन: आपके और आपके पार्टनर के बीच दूरियां आ सकती हैं। पति-पत्नी के बीच वैचारिक मतभेद हो सकता है। आपके जीवनसाथी का स्वास्थ्य भी बिगड़ सकता है।
आर्थिक जीवन: आप अच्छे कार्यों पर, पूजा पाठ पर, घर की आवश्यकताओं पर धन खर्च कर सकते हैं। कचहरी से संबंधित मुकदमों में आपके पक्ष में निर्णय आ सकता है।
स्वास्थ्य: आपको त्वचा रोग होने का डर है। आपको रक्ताल्पता, रक्त की अशुद्धि और अनियमित रक्तचाप की शिकायत भी हो सकती है। मुंह में छाले और जलन जैसी समस्याएं परेशान कर सकती हैं।
उपाय: आपको श्री गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करना चाहिए।
अप्रैल मासिक राशिफल 2025 कहता है कि इस महीने कर्क राशि के जातकों को कुछ हद तक अनुकूल परिणाम मिल सकते हैं। वैवाहिक संबंध मज़बूत होंगे। व्यापार में उन्नति के योग बनेंगे।
करियर: काम के सिलसिले में एक जगह से दूसरी जगह जाना पड़ सकता है। आपके वरिष्ठ अधिकारी आपके प्रति प्रेम का भाव रखेंगे।
शिक्षा: छात्रों का विदेश जाकर पढ़ाई करने का सपना पूरा हो सकता है। आप विदेश के किसी विद्यालय अथवा विश्वविद्यालय में दाखिला पाकर खुश हो सकते हैं। प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए भी यह महीना अनुकूल रहने वाला है।
पारिवारिक जीवन: आपके माता-पिता को इस समय कोई परेशानी हो सकती है। आपको उनका ध्यान रखने के साथ-साथ पारिवारिक जिम्मेदारियों पर ध्यान देना होगा।
प्रेम और वैवाहिक जीवन: आपके प्रियतम को स्वास्थ्य समस्याएं परेशान कर सकती हैं। आपको अपने क्रोध और चिड़चिड़ेपन पर नियंत्रण रखने की सलाह दी जाती है।
आर्थिक जीवन: आपके खर्चे बढ़ सकते हैं। शनि की कृपा से आपकी आमदनी में इज़ाफा होने के आसार हैं। आप दीर्घकालिक निवेश के बारे में गंभीरता से विचार कर सकते हैं।
स्वास्थ्य: आप सावधानी से वाहन चलाएं। आपको अपने क्रोध के कारण उच्च रक्तचाप की समस्या हो सकती है। आपको ज्यादा से ज्यादा मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए।
उपाय: हनुमान चालीसा का पाठ करना भी अत्यंत लाभ देगा।
अप्रैल मासिक राशिफल 2025 के अनुसार, सिंह राशि वालों का स्वास्थ्य महीने की शुरुआत में ही खराब हो सकता है। आपके खर्च बढ़ेंगे।
करियर: आप अपने काम से अपने कार्यक्षेत्र में अपनी जगह बनाने में सफल रहेंगे। आपके लिए नौकरी में स्थानांतरण या दूसरी नौकरी के योग बन रहे हैं। व्यापारियों को सावधानी रखनी होगी।
शिक्षा: छात्रों का मन पढ़ाई में लगेगा। आपको शिक्षा में मनचाहे परिणाम मिल सकते हैं। हालांकि, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
पारिवारिक जीवन: परिवार में किसी सदस्य का स्वास्थ्य चिंता का विषय बन सकता है। आपके लिए विदेश जाने के योग बन रहे हैं। भाई-बहन के साथ आपके संबंध बिगड़ सकते हैं।
प्रेम और वैवाहिक जीवन: आप और आपके पार्टनर के बीच कुछ कहासुनी हो सकती है। जीवनसाथी को और आपको स्वास्थ्य समस्याएं परेशान कर सकती हैं। इसका असर आपके वैवाहिक जीवन पर भी पड़ सकता है।
आर्थिक जीवन: आपकी आमदनी में जबरदस्त इज़ाफा देखने को मिलेगा। हालांकि, खर्चों में बढ़ोतरी होने की भी संभावना है। कुछ गुप्त खर्च भी होंगे। आपको सरकारी क्षेत्र से लाभ मिल सकता है।
स्वास्थ्य: आपको आंखों में दर्द, पाचन तंत्र से संबंधित समस्याएं और गुप्त समस्याएं भी परेशान कर सकती हैं। आपको अपनी स्वास्थ्य समस्याओं को नजरअंदाज़ करने से बचना होगा।
उपाय: शिवजी की उपासना करना भी आपके लिए लाभदायक रहेगा।
आपके वैवाहिक संबंधों में तनाव और टकराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। आपके और आपके जीवनसाथी की सेहत में भी गिरावट आने की आशंका है। नौकरी करने वाले जातकों के लिए समय अनुकूल रहेगा।
करियर: नौकरीपेशा जातकों के पद में बढ़ोतरी हो सकती है। यह महीना चुनौतियों से भरा रहने वाला है, फिर भी आपको कार्यक्षेत्र में अच्छी सफलता मिलने के योग हैं। व्यापार कर रहे जातकों के लिए अप्रैल का महीना थोड़ा समस्याओं से भरा रहने वाला है।
शिक्षा: इस समय छात्र खूब मन लगाकर पढ़ाई करेंगे। गुस्से में आकर किसी से भी उल्टा-सीधा कुछ बोलने से बचें। विद्यार्थियों को मेहनत का अच्छा फल मिल सकता है।
पारिवारिक जीवन: इस समय आपकी संतान को सुख मिलेगा। आप अपने परिवार को बढ़ाने के बारे में भी सोच सकते हैं। आपके अपने पिता के साथ संबंध मधुर बनेंगे।
प्रेम और वैवाहिक जीवन: आपके लिए प्रेम विवाह के योग बन रहे हैं।आपके प्रियतम को कुछ शारीरिक समस्याएं परेशान कर सकती हैं। आपके और आपके जीवनसाथी के बीच आपसी समझ में कमी देखने को मिल सकती है।
आर्थिक जीवन: आपको अपने भाग्य का साथ मिलेगा और आप सही निर्णय लेंगे। इससे आपको धन लाभ होने की संभावना है। आपकी आमदनी में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।
स्वास्थ्य: आपकी स्वास्थ्य समस्याओं में वृद्धि हो सकती है। आपको सिर दर्द, बुखार, बदहजमी और प्रजनन तंत्र से संबंधित समस्याएं परेशान कर सकती हैं।
अप्रैल मासिक राशिफल 2025 के अनुसार, तुला राशि के जातकों के लिए यह महीना सावधानी से बरतने वाला है। आपको शारीरिक समस्याएं और बीमारियां परेशान कर सकती हैं। आपके खर्चों में भी बढ़ोतरी होने के संकेत हैं।
करियर: आपको कार्यक्षेत्र में बार-बार समस्याएं देखनी पड़ सकती हैं। आपके शत्रु आप पर हावी हो सकते हैं। व्यापारिक यात्राओं के सफल होने के योग हैं। आपके व्यावसायिक संबंधों में भी प्रगाढ़ता आएगी।
शिक्षा: इस महीने छात्रों को पढ़ाई में अनेक बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। आपका स्वास्थ्य भी खराब हो सकता है जिससे आपकी पढ़ाई बाधित हो सकती है।
पारिवारिक जीवन: पारिवारिक समस्याएं और संपत्ति से संबंधित विवाद बढ़ सकते हैं। परिवार में लड़ाई-झगड़े की स्थिति भी बन सकती है। माता-पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
प्रेम और वैवाहिक जीवन: आप जीवनसाथी के साथ लंबी यात्रा पर जा सकते हैं। प्रेम संबंधों के लिए यह महीना चुनौतीपूर्ण रह सकता है। आपको अपने रिश्ते को बचाने का प्रयास करना पड़ सकता है।
आर्थिक जीवन: आपको धन संचय करने पर ध्यान देना होगा, अन्यथा खर्चे आप पर हावी हो सकते हैं। आपको व्यापार में अच्छी आमदनी होने के योग हैं।
स्वास्थ्य: आपको पेट से जुड़ी समस्याएं और बड़ी आंत से संबंधित समस्या परेशान कर सकती है। आप अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें और नेत्र रोगों के प्रति भी सचेत रहें।
उपाय: शनिवार के दिन उड़द की दाल के वड़े बांटने से लाभ होगा।
आपकी आमदनी में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी लेकिन स्वास्थ्य समस्याएं पीड़ित कर सकती हैं। वैवाहिक संबंधों में मज़बूती आएगी। विद्यार्थियों को बहुत ज्यादा ध्यान देकर पढ़ाई करनी होगी।
करियर: कार्यक्षेत्र में कुछ उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। आपके मन में नौकरी बदलने का विचार आ सकता है। व्यापारी कुछ नई योजनाओं पर कार्य करेंगे जिसमें उन्हें सफलता मिलने के योग हैं।
शिक्षा: छात्रों को शिक्षा में अच्छे परिणाम मिलेंगे। आपके आसपास का माहौल आपका ध्यान भटकाने का काम कर सकता है। इस मामले में आपको सावधान रहना होगा।
पारिवारिक जीवन: परिवार के बीच तालमेल देखकर आपको खुशी होगी। आपकी मां का स्वास्थ्य खराब हो सकता है लेकिन वह भी धीरे-धीरे स्वस्थ हो जाएंगी।
प्रेम और वैवाहिक जीवन: आपकी विवाह की बात भी पक्की हो सकती है। आप अपने प्रेमी से अपने दिल की बात कह सकते हैं। ग्रहों की स्थिति आपके पक्ष में है और आपके अपने जीवनसाथी से मधुर संबंध बने रहेंगे।
आर्थिक जीवन: आपके पास आय के एक से अधिक साधन होंगे। आपके खर्चे भी नियंत्रण में रहेंगे। इससे आपकी आर्थिक स्थिति अच्छी होती चली जाएगी।
स्वास्थ्य: आपको इस महीने चोट लगने की आशंका है। इसके अलावा आपको पेट से जुड़ी समस्याएं ज्यादा परेशान कर सकती हैं। आपका पाचन तंत्र बिगड़ सकता है।
अप्रैल मासिक राशिफल 2025 के अनुसार, इस महीने आपके पारिवारिक जीवन में अशांति का माहौल रह सकता है। आपका काम में मन कम लगेगा और इसकी वजह से आपको नौकरी में समस्या हो सकती है।
करियर: आपके घर-परिवार की समस्याएं नौकरी में परेशानियों को बढ़ा सकती हैं। आपका मन काम में कम लगेगा। आप काम से जी चुराएंगे और आपसे काम में गलतियां भी हो सकती हैं।
शिक्षा: इस महीने छात्र आप खूब मेहनत करेंगे और लगातार प्रयास करेंगे। इसके परिणामस्वरूप आपको अच्छे परिणाम मिलेंगे और शिक्षा में आपकी स्थिति में सुधार आएगा।
पारिवारिक जीवन: आपके पारिवारिक जीवन में उथल-पुथल रह सकती है। परिवार के सदस्य एक-दूसरे पर आरोप लगा सकते हैं। माता-पिता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें।
प्रेम और वैवाहिक जीवन: आप प्यार के मामले में पराक्रमी बनेंगे। आपके प्रेम विवाह की बात पक्की हो सकती है। हालांकि, प्रियतम के स्वास्थ्य में गिरावट आ सकती है। वैवाहिक जीवन में लड़ाई-झगड़े की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
आर्थिक जीवन: आपको अपने खर्चों पर नियंत्रण रखने की आवश्यकता है। आपको मेहनत करके धन कमाने की ज़रूरत है। इस समय आपको अचानक से कुछ गुप्त धन प्राप्त हो सकता है।
स्वास्थ्य: आपकोरक्तचाप और खून से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। आपको किसी प्रकार की चोट लगने की आशंका है। वाहन चलाते समय आपको बेहद सावधानी रखनी होगी।
उपाय: आपको रविवार के दिन सूर्य देव के बीज मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए।
अप्रैल मासिक राशिफल 2025 के अनुसार, यह महीना मकर राशि के जातकों के लिए औसत रूप से फलदायी रहेगा। आपके लिए तीर्थ यात्रा के योग बन रहे हैं। आपको स्वास्थ्य समस्याएं होने का डर है।
करियर: आपकी कार्य कुशलता में बढ़ोतरी होगी। इसकी वजह से कार्यस्थल पर आपका दबदबा बना रहेगा। आपके सहकर्मी और आपके आसपास के लोग आपकी मदद करने के लिए आगे आ सकते हैं।
शिक्षा: छात्र पढ़ाई को समय देंगे जिससे उन्हें सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे। आप बहुत मेहनत से अपनी शिक्षा में आगे बढ़ेंगे। वहीं प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
पारिवारिक जीवन: पारिवारिक जीवन में लड़ाई-झगड़ा हो सकता है। आपके भाई-बहनों से संबंध भी बिगड़ सकते हैं। समाज में परिवार का स्तर ऊंचा होगा। आपको नई संपत्तियां खरीदने का मौका मिल सकता है।
प्रेम और वैवाहिक जीवन: आपके लिए प्रेम विवाह के योग बन रहे हैं। सिंगल जातकों के जीवन में किसी नए व्यक्ति की दस्तक हो सकती है। वैवाहिक जीवन में कलह की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
आर्थिक जीवन: आपकी आमदनी में लगातार बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। आप कोई संपत्ति भी खरीद सकते हैं। आप अपने भाई-बहनों और मित्रों की आर्थिक मदद कर सकते हैं।
स्वास्थ्य: आप नियमित रूप से योगाभ्यास और कसरत करें। मानसिक तनाव को दूर करने के लिए मेडिटेशन कर सकते हैं।
उपाय: बुधवार के दिन श्री गणेश जी महाराज को दुर्वांकुर अर्पित करना चाहिए।
इस महीने आपको कई मामलों में सावधानी बरतने की ज़रूरत है। परिवार के किसी सदस्य की सेहत बिगड़ सकती है। आर्थिक लाभ होने की उम्मीद है। व्यापारियों के लिए भी यह महीना अनुकूल रहने वाला है।
करियर: अगर आप नौकरी बदलना चाहते हैं, तो इस समय आपको अपने प्रयासों में सफलता मिल सकती है। व्यापार में उत्तम प्रगति देखने को मिलेगी। आपका व्यापार नई ऊंचाईयां प्राप्त करेगा।
शिक्षा: छात्रों को शिक्षा के क्षेत्र में अनेक प्रकार के व्यवधान देखने पड़ सकते हैं। आपकी पढ़ाई में बार-बार रुकावट आ सकती है और आपको एकाग्रता की कमी महसूस हो सकती है।
पारिवारिक जीवन: पारिवारिक संबंधों में उतार-चढ़ाव बने रहेंगे। परिवार में किसी बात को लेकर बहस हो सकती है। परिवार के बुजुर्ग सदस्यों को स्वास्थ्य समस्याएं परेशान कर सकती हैं।
प्रेम और वैवाहिक जीवन: आपके और आपके प्रियतम के बीच लड़ाई-झगड़ा हो सकता है। इस समय आपके रिश्ते में तनाव बढ़ सकता है। विवाहित जातकों को इस महीने सावधानी रखनी होगी।
आर्थिक जीवन: आपकी आर्थिक स्थिति मज़बूत रहेगी। आपको सरकारी क्षेत्र और व्यापार से भी उत्तम लाभ की प्राप्ति हो सकती है। आपके खर्चों में कुछ हद तक कमी आएगी।
स्वास्थ्य: आपके स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी रह सकती हैं। आपके अंदर क्रोध बढ़ सकता है और आपकी स्वास्थ्य समस्याओं में बढ़ोतरी होने की आशंका है।
उपाय: आपको मंगलवार के दिन लाल अनार का दान करना चाहिए।
अप्रैल मासिक राशिफल 2025 के अनुसार, यह महीना आपके लिए उतार-चढ़ाव से भरा रहने वाला है। आपको अनेक प्रकार की चुनौतियां आ सकती हैं। आपकी सेहत भी ज्यादा अच्छी नहीं रहने वाली है।
करियर: आपके स्वभाव में उग्रता आपके कार्यक्षेत्र में समस्या पैदा कर सकती है। आपके लिए नौकरी बदलने के प्रबल योग बन रहे हैं। इसके साथ ही नौकरी में आपको अच्छी पदोन्नति भी मिल सकती है।
शिक्षा: इस समय छात्रों को एकाग्रता बनाए रखने में समस्या आ सकती है। आपकी शिक्षा में धीरे-धीरे सुधार होने के योग बन सकते हैं। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो आपको अपनी तरफ से खूब मेहनत करनी होगी।
पारिवारिक जीवन: आपके पारिवारिक जीवन में उतार-चढ़ाव आने की आशंका है। आपकी आमदनी में भी अच्छी बढ़ोतरी होने के संकेत हैं। आपको अपने भाई-बहनों का सहयोग प्राप्त होगा।
प्रेम और वैवाहिक जीवन: आपके और आपके प्रियतम के बीच बार-बार अहम का टकराव हो सकता है। इससे आपके रिश्ते में समस्याएं पैदा हो सकती हैं। विवाहित जातकों के लिए यह महीना थोड़ा कमजोर रहने की संभावना है।
आर्थिक जीवन: आपकी भूमि या घर खरीदने की इच्छा पूरी हो सकती है। आपकी आमदनी बढ़ेगी और आपके लिए धन लाभ के प्रबल योग बन रहे हैं। व्यापार में भी धन लाभ होगा।
स्वास्थ्य: आपको सिर दर्द, बदन दर्द, बुखार, जोड़ों में दर्द की समस्या परेशान कर सकती है। इसके अलावा त्वचा अथवा छाती से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं।
उपाय: श्री हनुमान जी की पूजा करने से आपके सभी काम बनेंगे।
हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारा यह लेख ज़रूर पसंद आया होगा। अगर ऐसा है तो आप इसे अपने अन्य शुभचिंतकों के साथ ज़रूर साझा करें। धन्यवाद!
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1. अप्रैल महीने में कितने दिन होते हैं?
उत्तर. अप्रैल में 30 दिन होते हैं।
प्रश्न 2. अप्रैल में जन्मे लोग कैसे होते हैं?
उत्तर. ये हमेशा दूसरों की भावनाओं का ख्याल रखते हैं।
प्रश्न 3. अप्रैल में हनुमान जयंती कब है?
उत्तर. 12 अप्रैल, 2025 को हनुमान जयंती है।
पापमोचनी एकादशी 2025 पर व्रत रखने से मिट जाएंगे सात जन्मों के पाप, जानें राशि अनुसार उपाय!
साल में कुल 24 एकादशियां होती हैं और प्रत्येक मास में दो एकादशी तिथि पड़ती हैं। हिंदू धर्म में एकादशी के व्रत का बहुत महत्व है। कहते हैं कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन से एकादशी का व्रत रखता है एवं इस दिन भगवान विष्णु का पूजन करता है, उसकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।
आज एस्ट्रोसेज एआई के इस विशेष ब्लॉग में हम आपको पापमोचनी एकादशी 2025 के बारे में बताने जा रहे हैं। इसके साथ ही इस बारे में भी चर्चा करेंगे कि इस दिन राशि अनुसार क्या उपाय किए जा सकते हैं एवं पापमोचनी एकादशी का क्या महत्व है और किस विधि से इस एकादशी पर पूजन किया जाता है। तो चलिए अब बिना देर किए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं पापमोचनी एकादशी के व्रत आदि के बारे में।
प्रत्येक एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी तिथि को पापमोचनी एकादशी कहा जाता है। सभी एकादशियों में इसे सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना गया है।
पापमोचनी एकादशी का अर्थ है पाप को नष्ट करने वाली एकादशी। इस तिथि पर पूरे विधि-विधान के साथ विष्णु जी की पूजा की जाती है। मान्यता है कि जो भी व्यक्ति इस दिन व्रत रखता है, उसे अपने पाप कर्मों से मुक्ति मिल जाती है। इससे भक्त का तन और मन दोनों शुद्ध हो जाते हैं।
पापमोचनी एकादशी तिथि व समय
इस बार 25 मार्च को पापमोचनी एकादशी पड़ रही है। 25 मार्च, 2025 को सुबह 05 बजकर 08 मिनट पर एकादशी तिथि आरंभ होगी और इसका समापन 25 मार्च की अर्ध रात्रि को 03 बजकर 48 मिनट पर होगा।
पारणा मुहूर्त: 26 मार्च को दोपहर 01 बजकर 40 मिनट से लेकर शाम 04बजकर 08 मिनट तक है।
अवधि: 02 घंटे 27 मिनट
हरि वासर समाप्त होने का समय: 26 मार्च को 09 बजकर 18 मिनट पर।
बृहत् कुंडलीमें छिपा है, आपके जीवन का सारा राज, जानें ग्रहों की चाल का पूरालेखा-जोखा
पापमोचनी एकादशी 2025 पर बन रहा है शुभ योग
इस दिन शिव योग बन रहा है जिसे वैदिक ज्योतिष में अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। शिव योग के अलावा इस एकादशी पर सिद्ध योग भी बन रहा है। ये दोनों ही योग शुभ माने जाते हैं।
शिव योग का समय: 24 मार्च को शाम 04 बजकर 43 मिनट पर शिव योग आरंभ होकर 25 मार्च को दोपहर 02 बजकर 52 मिनट पर समाप्त होगा।
सिद्ध योग का समय: 25 मार्च को 02 बजकर 52 मिनट पर सिद्ध योग शुरू होगा और 26 मार्च को 12 बजकर 25 मिनट पर यह योग समाप्त होगा।
पापमोचनी एकादशी 2025 की पूजन विधि
पापमोचनी एकादशी पर आप निम्न विधि से पूजन कर सकते हैं:
एकादशी तिथि पर सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर लें और फिर व्रत का संकल्प लें एवं पूजा आरंभ करें।
इसके बाद आप भगवान विष्णु को जल, पीले रंग के फूल, माला और चंदन एवं अक्षत अर्पित करें।
अब आप विष्णु जी को केले के साथ अन्य चीज़ों का भोग लगाएं। भोग में तुलसी का प्रयोग करें।
घी का दीपक और धूप जलाएं। फिर मंत्र के साथ एकादशी की व्रत कथा पढ़ लें। कथा पढ़नी जरूरी है क्योंकि इसके बिना व्रत अधूरा माना जाता है।
व्रत के अगले दिन यानी द्वादशी तिथि पर पूजन करने के साथ ब्राह्मणों को दान करने के बाद पारण मुहूर्त में व्रत तोड़ें।
पापमोचनी एकादशी की कथा है कि प्राचीन समय में चैत्ररथ नाम का एक बहुत सुंदर जंगल था। इस जंगल में च्यवन ऋषि के पुत्र मेधावी ऋषि तपस्या कर रहे थे। इसी वन में देवराज इंद्र गंधर्व कन्याओं, अप्सराओं एवं देवताओं के साथ विचरण कर रहे थे। मेधावी ऋषि भगवान शिव के भक्त थे जबकि अप्सराएं शिवद्रोही कामदेव का अनुसरण करती थीं। एक बार कामदेव ने मेधावी ऋषि की तपस्या को भंग करने की योजना बनाई।
इस कार्य के लिए उन्होंने मंजू घोषा नाम की अप्सरा को चुना। मंजू ने अपने नृत्य, गान और सौंदर्य से मेधावी ऋषि की तपस्या भंग कर दी और वह मंजू पर पूरी तरह से मोहित हो गए। इसके बाद दोनों कई वर्षों तक एक साथ रहे। जब मंजू ने वापस जाने के लिए ऋषि से अनुमति मांगी, तब उन्हें अपनी इस भूल और तपस्या के भंग होने का आत्म ज्ञान हुआ और उन्होंने उसी क्षण क्रोध में आकर मंजू को पिशाचिनी होने का श्राप दे दिया। इसके बाद अप्सरा ने ऋषि से अपने कृत्य की मांफी मांगी और उनसे श्राप से मुक्ति पाने का उपाय पूछा।
तब ऋषि ने मंजू अप्सरा को पापमोचनी एकादशी के व्रत के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इस व्रत को करने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। ऋषि ने बताया कि इस व्रत को करने के बाद वह अपने पूर्व रूप और सौंदर्य को प्राप्त कर सकती है। इसके बाद ऋषि अपने पिता महर्षि च्यवन के पास चले गए। यहां पर उन्होंने अपने पिता को सारा वृतांत बताया। इस पर उनके पिता ने कहा कि पुत्र यह तुमने अच्छा नहीं किया। ऐसा कर के तुम भी पाप के भागी बन गए हो इसलिए अब तुम भी पापमोचनी एकादशी का व्रत करो। इससे तुम्हें भी अनजाने में किए गए अपने पाप से मुक्ति मिल जाएगी। इस प्रकार पापमोचनी एकादशी 2025 का व्रत कर के मंजू घोषा को अपने श्राप एवं पाप कर्म से मुक्ति मिली और मेधावी ऋषि भी अपने पाप से मुक्त हो गए।
यदि आपने एकादशी का व्रत रखा है, तो आपको अनाज का सेवन इस दिन नहीं करना चाहिए।
इस दिन फलों का सेवन करना चाहिए। फल के अलावा आप दूध और सूखे मेवे भी खा सकते हैं।
एकादशी पर तामसिक भोजन एवं मास-मदिरा और शराब इत्यादि से दूर रहना चाहिए।
इसके अलावा पापमोचनी एकादशी पर क्रोध, ईर्ष्या और नकारात्मक चीज़ों से भी दूर रहना चाहिए।
एकादशी पर दान-पुण्य करने का भी बहुत महत्व है।
पापमोचनी एकादशी पर करें ये उपाय
पापमोचनी एकादशी पर निम्न उपाय कर सकते हैं:
गाय को हरा चारा खिलाएं। इससे पुण्य की प्राप्ति होती है।
गरीबों और ब्राह्मणों को अन्न एवं वस्त्रों का दान करें एवं उन्हें दक्षिणा भी दें।
एकादशी के दिन पीतल के लोटे में जल भरकर, इसे किसी गरीब या ज़रूरतमंद व्यक्ति को दान कर दें।
इस दिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने का भी बहुत महत्व है। इससे मनुष्य के सारे पाप धुल जाते हैं।
पितरों की शांति के लिए एकादशी पर गंगा जल में काले तिल डालकर पितरों को अर्पित करना चाहिए। इस उपाय को करने से कालसर्प दोष भी दूर हो जाता है।
एकादशी पर दूध, चावल और मिठाई का दान पितरों के नाम से करना चाहिए। ऐसा करने से पितरों की कृपा मिलती है।
पापमोचनी एकादशी पर रात के समय चंद्रमा को जल में दूध और केसर डालकर अर्घ्य देने से मन को शांति मिलती है एवं ग्रह दोष दूर होने के साथ-साथ मानसिक तनाव भी दूर होता है।
अगर पति-पत्नी के बीच कलह चल रही है या दोनों की आपस में बनती नहीं है, तो एकादशी के दिन एक लोटे में जल भरकर, उसमें थोड़ी-सी पिसी हुई हल्दी डाल दें। इसमें एक सिक्का डालकर अपने ऊपर से सात बार वारकर बहते हुए जल या नदी में प्रवाहित कर दें।
पापमोचिनी एकादशी 2025 पर करें राशि अनुसार उपाय
पापमोचिनी एकादशी पर राशि अनुसार उपाय कर के आप भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।
मेष राशि: आप एकादशी के दिन लाल रंग के फूल और गुड़ भगवान विष्णु को अर्पित करें। इसके अलावा आप किसी गरीब व्यक्ति को मसूर की दाल दान में दें।
वृषभ राशि: इस राशि वाले जातक भगवान विष्णु को दूध से बनी मिठाई का भोग लगाएं। आप गरीब और ज़रूरतमंद लोगों को सफेद रंग के वस्त्र और मिश्री का दान कर सकते हैं।
मिथुन राशि: यदि आपकी मिथुन राशि है, तो आप विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें और भगवान विष्णु को केले एवं तुलसी की माला चढ़ाएं। आपको हरी मूंग दाल और हरी सब्जी का दान करना चाहिए।
कर्क राशि: पापमोचनी एकादशी 2025 पर कर्क राशि वाले भगवान विष्णु को खीर का प्रसाद चढ़ाएं एवं गंगाजल से स्नान करें। आप सफेद चावल और दूध का दान कर सकते हैं।
सिंह राशि: आप इस एकादशी पर विष्णु जी को चने और गुड़ का भोग लगाएं। इसके अलावा गेहूं और गुड़ का दान भी करें।
कन्या राशि: एकादशी के दिन आप तुलसी दल भगवान विष्णु को अर्पित कर सकते हैं। आप विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें और आंवले एवं हल्दी का दान करें।
तुला राशि: एकादशी पर तुला राशि वाले विष्णु जी को सफेद रंग की मिठाई का भोग लगाएं और सुगंधित पुष्प अर्पित करें। आपको एकादशी पर चीनी और सफेद रंग के वस्त्रों का दान करना चाहिए।
वृश्चिक राशि: आप केसर का दूध और लाल रंग के पुष्प विष्णु जी को चढ़ाएं। मसाले और अनाज का दान करें एवं विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें।
धनु राशि: इस दिन आप पीले रंग के पुष्प और केले विष्णु जी को चढ़ाएं। आपको पीले रंग के वस्त्रों और चने की दाल का दान करना चाहिए।
मकर राशि: पापमोचनी एकादशी 2025 पर मकर राशि वाले जातक भगवान विष्णु को नीले रंग के फूल और तिल चढ़ाएं। आप उड़द की दाल और तिल के लड्डू दान में दे सकते हैं।
कुंभ राशि: आपको नीले और सफेद रंग के फूल चढ़ाने चाहिए। इसके अलावा आप साबुत चावल और छाता दान में दें।
मीन राशि: इस राशि वाले पीले रंग के वस्त्र और चंदन चढ़ाएं। आपको हल्दी और मीठा प्रसाद दान में देना चाहिए।