एक साल बाद बुध-शुक्र मिलकर बनाएंगे लक्ष्मी-नारायण राजयोग, इन 3 राशियों के वेतन वृद्धि के बनेंगे योग!
वैदिक ज्योतिष में नवग्रह एक निश्चित समय और अंतराल के बाद एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं जिसे गोचर कहा जाता है। प्रत्येक ग्रह का गोचर सभी राशियों सहित मनुष्य जीवन को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। ऐसे में, ग्रहों के गोचर से अनेक तरह की युति का निर्माण होता है जिसकी वजह से शुभ-अशुभ योग भी बनते हैं। इसी क्रम में, अब जल्द ही शुक्र और बुध की कर्क राशि में युति होने जा रही है और इन ग्रहों के संयोजन से एक बेहद शुभ योग बनने जा रहा है। एस्ट्रोसेज के इस विशेष ब्लॉग में आपको शुक्र-बुध की युति और इससे बनने वाले शुभ योग के बारे में संपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी। साथ ही, इस शुभ योग से किन राशियों के अच्छे दिनों की शुरुआत होगी? इसका जवाब भी आपको इस ब्लॉग में मिलेगा। तो आइए बिना देर किये शुरुआत करते हैं इस लेख की और जानते हैं शुक्र एवं बुध की युति के बारे में।
प्रेम, वैभव एवं ऐश्वर्य के कारक ग्रह शुक्र देव 07 जुलाई 2024 की सुबह 04 बजकर 15 मिनट पर मिथुन से निकलकर कर्क राशि में गोचर कर गए हैं और इस राशि में ग्रहों के राजकुमार के नाम से प्रसिद्ध बुध ग्रह उपस्थित हैं। ऐसे में, कर्क राशि में बुध और शुक्र की युति हो रही है जिसकी वजह से लक्ष्मी नारायण राजयोग निर्मित हो रहा है। बता दें कि इस राजयोग की गणना बेहद शुभ योगों में होती है।
बृहत् कुंडली में छिपा है, आपके जीवन का सारा राज, जानें ग्रहों की चाल का पूरा लेखा-जोखा
शुक्र-बुध की युति से बन रहा लक्ष्मी नारायण राजयोग कुछ राशि के जातकों के लिए अत्यंत फलदायी साबित होगा। इस अवधि में कुछ राशि के जातकों को भाग्य का हर कदम पर साथ मिलेगा। करियर और व्यापार के क्षेत्र में भी आपको अपार सफलता मिलने के साथ-साथ धन लाभ मिलेगा और ऐसे में, आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। चलिए नज़र डालते हैं कर्क राशि में बनने वाले लक्ष्मी नारायण योग से किन राशियों पर बरसेगी देवी लक्ष्मी की कृपा।
लक्ष्मी नारायण योग से इन 3 राशियों को मिलेगा माँ लक्ष्मी का आशीर्वाद
कर्क राशि
कर्क राशि के जातकों के लिए शुक्र-बुध की युति बेहद शुभ परिणाम लेकर आएगी क्योंकि आपकी राशि के लग्न भाव में लक्ष्मी नारायण योग बन रहा है। इसके परिणामस्वरूप, इन लोगों को जीवन के हर कदम पर भाग्य का साथ मिलेगा। आपके जो काम लंबे समय से अटके हुए थे, अब वह पूरे होने लग जाएंगे। इस राशि के जातकों को परिवार के साथ यादगार समय बिताने का मौका मिलेगा।
इन लोगों को धन की देवी मां लक्ष्मी का आशीर्वाद मिलने से अचानक से धन लाभ होने के योग बनेंगे। संतान की तरफ से आपको खुशखबरी सुनने को मिल सकती है। जो जातक वाहन या फिर संपत्ति खरीदने का सोच-विचार कर रहे हैं, वह अब इस दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं और ऐसा करना आपके लिए लाभकारी रहेगा। इस दौरान शेयर मार्केट एवं सट्टा बाजार में धन का निवेश करने से अच्छे रिटर्न की प्राप्ति होगी। यह लोग जीवनसाथी का समर्थन मिलने से हर क्षेत्र में कामयाबी अपने नाम करेंगे। स्वास्थ्य की बात करें, तो आपकी सेहत अच्छी बनी रहेग, लेकिन अपने खानपान का आपको ध्यान रखना होगा।
मकर राशि के जातकों के लिए लक्ष्मी नारायण योग फलदायी साबित होगा क्योंकि यह राजयोग आपकी राशि के सातवें भाव में बन रहा है। कुंडली का सातवां भाव पार्टनर और जीवनसाथी आदि का प्रतिनिधित्व करता है। अगर पिछले कुछ समय से पार्टनर के साथ आपका कोई विवाद चला आ रहा है, तो अब उसका समाधान हो जाएगा। ऐसे में, आप उनके साथ किसी रोमांटिक डेट या फिर ट्रिप पर जाने की योजना बना सकते हैं। इस राशि के जो लोग अविवाहित हैं, उन्हें शादी का प्रस्ताव मिल सकता है। प्रेम जीवन को देखें, तो आप अपने रिश्ते को अगले पड़ाव पर लेकर जाने का फैसला ले सकते हैं। सरल शब्दों में कहें, तो आप साथी से शादी करने का सोच सकते हैं और इस मामले में भाग्य आपका पूरा साथ देगा।
जो जातक नौकरी करते हैं, उन्हें अच्छा खासा लाभ मिलने के योग बनेंगे। कार्यस्थल पर आपके द्वारा किये गए काम को सराहना मिलेगी। साथ ही, वेतन में अच्छी वृद्धि मिलने के योग बनेंगे। जिन जातकों का अपना व्यापार है, उनको काफ़ी समय से फंसा हुआ पैसा मिल सकता है और कोई डील भी होने के संकेत है। यह जातक अपनी बेहतरीन निर्णय लेने की क्षमता के बल पर कुछ ऐसा करने में सफल हों सकते हैं जो इनके भविष्य के लिए अच्छा साबित होगा। आपका स्वास्थ्य उत्तम बना रहेगा और आत्मविश्वास में भी वृद्धि देखने को मिलेगी। देवी लक्ष्मी की कृपा मकर राशि के जातकों पर होने से आपको आय के नए स्रोतों की प्राप्ति होगी और ऐसे में, आप भविष्य के लिए धन की बचत करने में सक्षम होंगे।
मिथुन राशि के जातकों के लिए शुक्र-बुध की युति से बनने वाला लक्ष्मी नारायण योग लाभदायक सिद्ध होगा। बता दें कि यह राजयोग आपकी राशि के दूसरे भाव में निर्मित हो रहा है। ऐसे में, भाग्य जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आपका साथ देगा। इन लोगों को लंबे समय से रुका हुआ या फिर किसी को उधार दिया गया पैसा वापस मिल सकता है। करियर के क्षेत्र में आपको अच्छी सफलता की प्राप्ति होगी और साथ ही, आपको धन लाभ मिलने के योग बनेंगे।
इन जातकों के भीतर साहस और आत्मविश्वास दोनों में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। यह लोग जीवन के विभिन्न आयामों में अपना झंडा लहराने में सक्षम होंगे। आपका जीवन सकारात्मकता से भरा रहेगा और आपको परिवार के साथ कीमती समय बिताने का मौका मिलेगा। इन जातकों को अचानक से धन की प्राप्ति होगी और इस अवधि में घर, वाहन या फिर संपत्ति खरीदने का सपना साकार होने की संभावना है।
हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारा यह लेख ज़रूर पसंद आया होगा। अगर ऐसा है तो आप इसे अपने अन्य शुभचिंतकों के साथ ज़रूर साझा करें। धन्यवाद!
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1. बुध-शुक्र की युति से कौन सा योग बनता है?
उत्तर 1. ज्योतिष के अनुसार, कुंडली में बुध और शुक्र के एक साथ होने पर लक्ष्मी नारायण योग का निर्माण होता है।
प्रश्न 2. क्या बुध और शुक्र की युति अच्छी होती है?
उत्तर 2. कुंडली के प्रथम भाव में शुक्र-बुध की युति होने से इंसान का व्यक्तित्व अच्छा और आकर्षक बनता है तथा बुद्धि तेज़ होती है।
प्रश्न 3. बुध कौन सी राशि में गोचर करेंगे?
उत्तर 3. बुध 19 जून को सूर्य देव की राशि सिंह में प्रवेश कर जाएंगे।
बुध के गोचर से तुला सहित इन जातकों को मिलेगा भाग्य का साथ; जाने देश दुनिया पर प्रभाव!
बुध का सिंह राशि में गोचर: एस्ट्रोसेज के इस विशेष ब्लॉग में हम आपको बुध का सिंह राशि में गोचरके बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान करेंगे। साथ ही, यह भी बताएंगे कि इस गोचर का प्रभाव सभी 12 राशियों पर किस प्रकार से पड़ेगा। बता दें कुछ राशियों को बुध के गोचर से बहुत अधिक लाभ होगा तो, वहीं कुछ राशि वालों को इस अवधि बहुत ही सावधानी से आगे बढ़ने की आवश्यकता होगी क्योंकि उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, इस ब्लॉग में बुध ग्रह को मजबूत करने के कुछ शानदार व आसान उपायों के बारे में भी बताएंगे और देश-दुनिया व शेयर मार्केट पर भी इसके प्रभाव के बारे में चर्चा करेंगे।
बता दें कि बुध 19 जुलाई 2024 को सूर्य के स्वामित्व वाली राशि सिंह में गोचर करने जा रहे हैं। तो आइए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं किस राशि के जातकों को इस दौरान शुभ परिणाम मिलेंगे और किन्हें अशुभ।
ज्योतिष में बुध तेज़ गति से चलने वाला एक प्रमुख ग्रह है, जो बुद्धि, संचार और सीखने का कारक है। ग्रहों के राजकुमार बुध कन्या और मिथुन राशि के स्वामी हैं। यह ग्रह हमारी वाणी, लिखित और संचार अभिव्यक्ति के अन्य रूपों को नियंत्रित करता है। वैदिक ज्योतिष में, जब कुंडली में बुध मज़बूत स्थिति में होते हैं, तो यह जातकों को जीवन में सभी तरह की सुख-सुविधाएं प्रदान करते हैं। साथ ही, आपको तेज़ बुद्धि और अच्छा स्वास्थ्य का भी आशीर्वाद देते हैं। बुध ग्रह के मज़बूत होने पर यह व्यक्ति को उच्च ज्ञान प्राप्त करने में सक्षम बनाते हैं और उन्हें हर क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम भी देते हैं। इनका यह ज्ञान व्यापार के क्षेत्र में जातक को अच्छे फैसले लेने में मार्गदर्शन करता है।
जिन लोगों की कुंडली में बुध देव की स्थिति शुभ होती है, वह व्यापार और सट्टेबाजी के क्षेत्र में अपार सफलता हासिल करते हैं। इन जातकों की रुचि गूढ़ विज्ञान जैसे ज्योतिष, रहस्यवाद आदि में हो सकती है और यह इन क्षेत्रों में अपनी चमक बिखेरते हुए नज़र आ सकते हैं। वहीं कुंडली में बुध ग्रह जब राहु, केतु या मंगल जैसे अशुभ ग्रहों के साथ स्थित होते हैं, तो जातकों को जीवन के सभी क्षेत्रों में कदम-कदम पर समस्याओं और चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
बृहत् कुंडलीमें छिपा है, आपके जीवन का सारा राज, जानें ग्रहों की चाल का पूरालेखा-जोखा
बुध का सिंह राशि में गोचर: समय व तिथि
सिंह राशि के स्वामी सूर्य हैं और बुध व सूर्य आपस में मित्रता का भाव रखते हैं और अब बुध 19 जुलाई, 2024 की शाम 08 बजकर 31 मिनट पर सिंह राशि में गोचर करने जा रहे हैं। इसके बाद 22 अगस्त 2024 को बुध वक्री गति में कर्क राशि में गोचर करेंगे।
सिंह राशि में बुध: विशेषताएँ
सिंह राशि में बुध के प्रभाव से व्यक्ति अत्यधिक चंचल स्वभाव का होता है और अपनी गरिमा में रहकर अपनी बातों को लोगों के समक्ष रखता है। सिंह रचनात्मक कलाओं का प्रतिनिधित्व करती है इसलिए सिंह राशि में बुध के होने से जातक लेखक, थिएटर अभिनेता या मंच पर गायक के रूप में उत्कृष्टता हासिल करता है। इसके प्रभाव से व्यक्ति प्रभावशाली होता है और कहीं भी लिखने, अभिनय करने, बोलने या गाने से नहीं डरता। सिंह सिंहासन और अधिकार का प्रतीक है और सिंह राशि में बुध का अर्थ है अच्छा व्यवहार और उच्च संचार शैली। सिंह राशि में बुध होने से जातक अपने भाषण से सबका ध्यान अपनी ओर केंद्रित कर सकते हैं।
सिंह राशि में बुध यह दर्शाता है कि आप अपनी पसंद के साथ समझौता नहीं करते हैं, और हमेशा सर्वश्रेष्ठ चुनते हैं। यह आपको प्रकृति प्रेमी भी बना सकता है, जिससे आपको बागवानी, पेड़ लगाना और धूप में लेटना पसंद है। आम तौर पर, आप गोरे रंग के होते हैं, आपका माथा चौड़ा होता है, और आपको ब्रांडेड और महंगे कपड़े पहनने का शौक होता है क्योंकि आपका बुध इस बात पर निर्भर करता है कि आप खुद को कैसे पेश करते हैं। यह स्थान सरकारी और प्रशासनिक नौकरियों में सफलता भी दिलाता है। साथ ही, यह आपको कपड़ों (विशेष रूप से ऊनी कपड़ों), गहनों, गेहूं और प्रकृति से जुड़ी किसी भी चीज़ का व्यवसाय करने में शानदार बनाता है। इसके प्रभाव से आप रंगमंच और कला के क्षेत्र में भी शानदार प्रदर्शन कर सकते हैं।
बुध का सिंह राशि में गोचर: इन राशियों को मिलेंगे शुभ परिणाम
वृषभ राशि
वृषभ राशि के जातकों के लिए बुध दूसरे और पांचवें भाव के स्वामी हैं और बुध का सिंह राशि में गोचर आपके चौथे भाव में होने जा रहा है। इस गोचर के फलस्वरूप आपको अनुकूल परिणाम प्राप्त होंगे। आप सुख और सुविधाओं से भरे रहेंगे। इस दौरान आपको अपनी माता का आशीर्वाद और सहयोग प्राप्त होगा। साथ ही, घर का माहौल शांतिपूर्ण रहेगा। करियर के मोर्चे पर जातक अपनी नौकरी में अधिक संतुष्टि प्राप्त करेंगे।
साथ ही कार्यक्षेत्र में आपको अपने वरिष्ठों से सराहना प्राप्त होगा और सहकर्मियों से सहयोग मिलेगी, जिससे आपको खुशी और संतुष्टि प्राप्त होगी। आप दूसरों से आगे रहने में सक्षम होंगे। वृषभ राशि के कुछ जातक बेहतर संभावनाओं के लिए अपनी नौकरी छोड़ सकते हैं और कुछ का तबादला हो सकता है और उन्हें बेहतर अवसर मिल सकते हैं। इस गोचर के दौरान व्यवसाय करने वाले जातकों को अच्छा लाभ प्राप्त होगा और आपका व्यापार तेज़ी से आगे बढ़ेगा। इस अवधि आप अपने प्रतिद्वंदियों को कड़ी टक्कर देने में सक्षम होंगे।
मिथुन राशि
मिथुन राशि के जातकों के लिए बुध पहले और चौथे भाव के स्वामी हैं और यह आपके तीसरे भाव में गोचर करने जा रहे हैं। करियर के मामले में यह गोचर जातकों के लिए अनुकूल साबित होगा और आपको विदेशों से नए व अच्छे अवसर प्राप्त हो सकते हैं। इन अवसरों से आपको संतुष्टि प्राप्त होगी। कार्यक्षेत्र में पदोन्नति और विशेष प्रोत्साहन मिलने के योग बन रहे हैं। आप अपने कार्यस्थल पर आरामदायक स्थिति में होंगे और ख़ुशनुमा पलों का आनंद लेंगे। जिन लोगों का खुद का व्यापार है वे इस दौरान उच्च धन लाभ अर्जित करने में सक्षम होंगे और अपने प्रतिद्वंदियों को कड़ी टक्कर देंगे। इस अवधि में आप अपने बिज़नेस में अधिक ध्यान देंगे और इसके विकास के लिए आगे बढ़ेंगे। साथ ही, आपको एक से अधिक व्यवसाय करने का अवसर भी प्राप्त हो सकता है। इस दौरान आप कोई नया बिज़नेस शुरू कर सकते हैं या एक से ज्यादा व्यापार में शामिल हो सकते हैं।
तुला राशि के जातकों के लिए बुध नौवें और बारहवें भाव के स्वामी हैं तथा बुध का सिंह राशि में गोचर आपके ग्यारहवें भाव में होगा। इसके परिणामस्वरूप आप इस अवधि अपने बड़ों का सहयोग और समर्थन प्राप्त होगा। इसके अलावा, आपको लंबी दूरी की यात्रा करनी पड़ सकती है और भाग्य का भरपूर साथ मिलेगा। करियर की दृष्टि से, बुध का सिंह राशि में गोचर आपके लिए बेहद अनुकूल साबित होगा। इस दौरान आपको अपनी कड़ी मेहनत के परिणामस्वरूप विदेश में नौकरी के नए अवसर प्राप्त होंगे जिससे आपको खुशी और संतुष्टि महसूस होगी। ऐसे में आप खुद को साबित करने में सफल होंगे। जिन जातकों का अपना व्यापार है वे इस दौरान उच्च धन लाभ अर्जित करेंगे और अपने प्रतिद्वंदियों को कड़ी टक्कर देने में सक्षम होंगे। इसके अलावा आप अच्छा लाभ प्राप्त करने के लिए किसी नए काम की शुरुआत कर सकते हैं।
धनु राशि
धनु राशि के जातकों के लिए बुध सातवें और दसवें भाव के स्वामी है और बुध का सिंह राशि में गोचर आपके नौवें भाव में होगा। इस दौरान कड़ी मेहनत और भाग्य की बदौलत आप अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में सक्षम होंगे। इसके अलावा आप सामान्य सिद्धांतों का पालन करते हुए अपने कार्यों को पूरा करेंगे। करियर की बात करें तो, बुध का सिंह राशि में गोचर आपके लिए शानदार साबित होगा। इस दौरान आपको नौकरी में कई नए अवसर प्राप्त होंगे। साथ ही, नौकरी के सिलसिले में विदेश यात्राएं भी करनी पड़ सकती है। हालांकि आप में से कुछ लोगों को नौकरी बदलने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
धनु राशि के जो जातक व्यापार करते हैं उनके लिए ये समय फलदायी साबित होगा। इस दौरान आप अच्छा ख़ासा लाभ कमाने में सक्षम होंगे। आप अपने प्रतिद्वंद्वियों को कड़ा मुकाबला देंगे और जीत हासिल करेंगे। अपने व्यवसाय के लिए एक मजबूत नींव रख सकते हैं।
बुध का सिंह राशि में गोचर: इन राशियों पर पड़ेगा नकारात्मक प्रभाव
कर्क राशि
कर्क राशि के जातकों के लिए बुध तीसरे और बारहवें भाव के स्वामी हैं और बुध का सिंह राशि में गोचर आपके दूसरे भाव में होगा। इस दौरान आपको औसत परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। विकास में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा आपको उच्च लाभ मिलने में देरी का सामना करना पड़ सकता है। करियर की बात करें तो, बुध का सिंह राशि में गोचर आपको मिले जुले परिणाम प्रदान कर सकता है। कार्यक्षेत्र में काम का दबाव बढ़ सकता है और आशंका है कि आपको अपने काम के लिए वरिष्ठों से पर्याप्त सराहना न मिले। इसके अलावा अधीनस्थों से भी परेशानी महसूस हो सकती है।
जिन जातकों का अपना व्यापार है उन्हें इस दौरान लाभ में कमी देखने को मिल सकती है और अधिक लाभ कमाने के लिए आपको कड़ी मेहनत करने की आवश्यकता होगी। यह अवधि केवल उन लोगों के लिए बेहतर साबित होगी जो विदेश में व्यापार कर रहे हैं।
अब घर बैठे विशेषज्ञ पुरोहित से कराएं इच्छानुसार ऑनलाइन पूजा और पाएं उत्तम परिणाम!
कन्या राशि
कन्या राशि के जातकों के लिए बुध पहले और दसवें भाव के स्वामी हैं और बुध का सिंह राशि में गोचर आपके बारहवें भाव में होगा। कन्या राशि के जातक इस दौरान अपने भविष्य को लेकर चिंतित हो सकते हैं। आपके जीवन में कई ऐसे बदलाव आ सकते हैं जो आपके लिए अच्छे नहीं कहे जा सकते हैं। करियर के लिहाज से देखें तो बुध का सिंह राशि में गोचर आपके लिए ज्यादा ख़ास नहीं रहने की आशंका है। इस दौरान कार्यक्षेत्र में लाभ न मिलने की संभावना है। हो सकता है कि उच्च अधिकारियों से पर्याप्त सराहना न मिले और जिसके कारण बेहतर अवसरों के लिए आप नौकरी बदलने पर विचार कर सकते हैं।
बुध का सिंह राशि में गोचर: प्रभावशाली उपाय
भगवान गणेश की पूजा करें और उन्हें दूर्वा घास और देसी घी के लड्डू चढ़ाएं।
बुध ग्रह के लिए हवन करें।
अपने परिवार की महिलाओं को कपड़े और हरी चूड़ियां दान करें।
किन्नरों का आशीर्वाद लें।
प्रतिदिन गायों को चारा खिलाएं।
पक्षियों को, खास तौर पर कबूतरों और तोते को भिगोए हुए हरे चने खिलाएं।
बुध का सिंह राशि में गोचर: विश्वव्यापी प्रभाव
सरकार और राजनीति
बुध का सिंह राशि में गोचर सरकार विभिन्न क्षेत्रों का समर्थन कर सकती है और वह ऐसा इन क्षेत्रों में सुधार लाकर और योजनाएं लागू करके कर सकती हैं।
देश के बड़े राजनेता और उच्च अधिकारी जिम्मेदारी से पूर्ण बयान दे सकते हैं। ऐसे में, वह जनता के साथ जुड़ने और उनकी बात सुनने का प्रयास करेंगे।
सरकार लोगों की भावनाओं से जुड़ने की कोशिश करेगी और कुछ नेता या मंत्री चतुराईपूर्ण भाषणों का उपयोग करके लोगों को लुभाने की कोशिश भी कर सकते हैं।
मीडिया और जनसंपर्क
बुध का सिंह राशि में गोचर के दौरान मीडिया में रिपोर्टर, ग्राउंड वर्कर आदि के रूप में काम करने वाले लोगों को अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे।
यह गोचर सोशल मीडिया प्रभावितों को उनके करियर में वृद्धि के साथ बहुत सकारात्मक रूप से प्रभावित करेगा।
इस गोचर के दौरान शेयर बाज़ार और सट्टा बाज़ार अस्थिर रह सकते हैं।
इस गोचर से जनसंपर्क में लगे लोगों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
निजी क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को विभिन्न तरीकों से लाभ होगा।
बुध का सिंह राशि में गोचर: शेयर बाजार रिपोर्ट
बुध के गोचर का शेयर बाजार पर हमेशा से बहुत अधिक प्रभाव रहा है और यह हर राशि के गोचर के साथ अलग-अलग कंपनियों के शेयरों की लाभप्रदता प्रभावित होती है। आइए देखते हैं कि बुध का सिंह राशि में गोचर के दौरान शेयर बाजार में किस तरह के बदलाव देखने को मिलेंगे। शेयर बाजार भविष्यवाणी 2024 के अनुसार,
फार्मा, पब्लिक और आईटी सेक्टर आदि के लिए आने वाला समय चुनौतीपूर्ण रहने की आशंका है।
बैंकिंग क्षेत्र काफ़ी समय से समस्याओं का सामना कर रहा है और इनका यह कठिन समय आगे भी जारी रह सकता है।
इस महीने का अंतिम समय रबर, तंबाकू और खाने-पीने में इस्तेमाल होने वाले तेल उद्योग आदि के लिए अच्छा रहने की संभावना है।
बुध का सिंह राशि में गोचर: आगामी खेल प्रतियोगिता
आगामी खेल टूर्नामेंट जुलाई-अगस्त, 2024
टूर्नामेंट
खेल
तिथि
ओपन चैंपियनशिप- गोल्फ
गोल्फ
14-21 जुलाई
महिला अंडर-19 यूरो चैंपियनशिप
फुटबॉल
15 जुलाई-27 जुलाई
पेरिस 2024 ओलंपिक
–
26 जुलाई-11 अगस्त
बुध के सिंह राशि में गोचर करने से आने वाले खेल टूर्नामेंट पर इसका बहुत अच्छा प्रभाव पड़ेगा क्योंकि यह एक मित्र राशि है। इन टूर्नामेंटों से हमें कई उभरते हुए खेल सितारे मिल सकते हैं।
इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1. बुध का सिंह राशि में गोचर कब हो रहा है?
उत्तर 1. बुध 19 जुलाई, 2024 की शाम 08 बजकर 31 मिनट पर सिंह राशि में गोचर करने जा रहे हैं।
प्रश्न 2. बुध की उच्च राशि कौन सी है?
उत्तर: कन्या राशि
प्रश्न 2. बुध के मित्र ग्रह कौन से हैं?
उत्तर: शनि और शुक्र
प्रश्न 3. बुध के किन्हीं दो शत्रु ग्रहों के नाम बताइए?
उत्तर: राहु और मंगल
पैसों की तंगी कर रही है परेशान, तो लक्ष्मी जी और कुबेर देवता को प्रसन्न करने के लिए करें ये चमत्कारिक उपाय
धन एक ऐसी चीज़ है जिसकी जरूरत हर किसी को हर कदम पर पड़ती है। भोजन करना हो या फिर शिक्षा प्राप्त करनी हो, हर एक कार्य के लिए पैसों की आवश्यकता होती है। हालांकि, इस संसार में सभी के पास अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त धन नहीं होता है। वहीं कुछ लोग आर्थिक संकट से घिरे रहते हैं। ऐसे में इनके लिए अपनी जरूरतों को पूरा कर पाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है।
जिन लोगों पर कुबेर देवता और धन की देवी मां लक्ष्मी की कृपा नहीं होती है, उन्हें अपने जीवन में आर्थिक कष्टों का सामना करना पड़ता है। हालांकि, ऐसे कुछ उपाय भी मौजूद हैं जिनकी मदद से मनुष्य के जीवन से पैसों की तंगी को दूर किया जा सकता है। इसके लिए कुबेर देवता और मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के कुछ उपाय करने होंगे।
अगर आप भी पैसों की तंगी से जूझ रहे हैं, तो इस ब्लॉग में जानिए मां लक्ष्मी और कुबेर देवता को प्रसन्न करने के उपायों के बारे में।
यदि लाख कोशिशों के बाद भी आपके पास धन नहीं टिकता है या आपको आर्थिक परेशानियां घेरे रहती हैं, तो आप यहां बताए गए कुछ उपायों में से कोई भी एक सरल उपाय रोज़ कर के देखें। इन उपायों की सहायता से आपकी समस्या का समाधान जरूर हो जाएगा। इसके साथ ही आपके जीवन में धन के आने के नए रास्ते भी खुल जाएंगे।
बृहत् कुंडली में छिपा है, आपके जीवन का सारा राज, जानें ग्रहों की चाल का पूरा लेखा-जोखा
धन प्राप्ति के उपाय
वास्तु शास्त्र के अनुसार तिजोरी दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम दिशा में होनी चाहिए। आप जिस अलमारी में पैसे रखते हैं, उसे भी इसी दिशा में रखें। इसका दरवाज़ा उत्तर दिशा में खुलना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार इस दिशा के स्वामी स्वयं कुबेर महाराज हैं। इस उपाय को करने से आपकी तिजोरी हमेशा पैसों से भरी रहेगी।
अपनी तिजोरी में धन को दोगुना करने के लिए आप लॉकर के सामने एक शीशा लगाएं। इससे आपके धन की छवि आईने में दिखेगी और उसमें वृद्धि होगी।
आप कभी भी किसी से भी कोई चीज़ मुफ्त में न लें। इसके अलावा अपनी भी कोई चीज़ या सेवा मुफ्त में न दें। गलत तरीके से कमाया हुआ धन, ज्यादा समय तक नहीं टिक पाता है इसलिए आप धन कमाने के लिए नैतिक तरीकों का ही इस्तेमाल करें। पैसों के लेने-देन के दौरान इन बातों का ध्यान अवश्य रखें।
आप जो भी कमाते हैं, उसका एक हिस्सा दान कर दें। हर महीने अपनी आय के एक हिस्से को दान करने से आपके ऊपर मां लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहेगी और आपकी सुख-समृद्धि में वृद्धि होगी। इसके अलावा जिन घरों में महिलाओं का सम्मान होता है, वहां पर धन की कभी कोई कमी नहीं होती है। ऐसे घरों में मां लक्ष्मी हमेशा विराजमान रहती हैं।
जिन लोगों को आर्थिक कष्ट हो रहा है या जो अपनी आर्थिक स्थिति को मज़बूत करना चाहते हैं, वे अपने घर के पूजन स्थल में एक लाल रंग के वस्त्र पर कुबेर यंत्र को स्थापित करें। रोज़ इस यंत्र की पूजा करने से आपकी संपन्नता में वृद्धि होगी और आपके घर में सुख-समृद्धि आएगी।
शास्त्रों के अनुसार घर में तुलसी का पौधा लगाना बहुत शुभ होता है। रोज़ शाम को इस पौधे के पास घी में मिट्टी का दीया जलाएं। इस उपाय को करने से मां लक्ष्मी हमेशा के लिए आपके घर में विराजमान रहती हैं और आपकी सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
धन की देवी मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने हेतु आप सफेद रंग की चीज़ों का दान कर सकते हैं। जो व्यक्ति दान करता है, उस पर ईश्वर की कृपा सदैव बनी रहती है। अपने घर से आर्थिक तंगी को दूर करने के लिए आप अपने घर के अंदर टूटे हुए बर्तन आदि न रखें और इनका उपयोग करते हैं, तो वो भी बंद कर दें।
दक्षिणावर्ती शंख से पूजा करें
आप शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु को जल चढ़ाएं। मां लक्ष्मी अपने पति भगवान विष्णु की पूजा करने से अति प्रसन्न होती हैं।
रोज़ स्नान करने के बाद आप मां लक्ष्मी की पूजा करें और अपने माथे के ऊपर केसर का तिलक लगाएं।
अब घर बैठे विशेषज्ञ पुरोहित से कराएं इच्छानुसार ऑनलाइन पूजा और पाएं उत्तम परिणाम!
हरी घास खिलाएं
अगर आपके परिवार में आर्थिक तंगी चल रही है, तो इससे छुटकारा पाने के लिए आप बुधवार के दिन गाय को हरा चारा खिलाएं।। महिलाएं रोज़ सुबह स्नान के बाद अपने घर के प्रमुख द्वार पर एक लोटा पानी जरूर डालें। इस उपाय को करने से घर के अंदर समृद्धि आती है और सभी प्रकार की तंगी दूर होती है।
शुक्रवार का दिन
शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी को समर्पित है। उन्हें प्रसन्न करने के लिए किसी भी शुक्रवार को तीन कुंवारी कन्याओं को खीर खिलाएं और उन्हें पीले रंग के वस्त्रों के साथ कुछ पैसे भी दान में दें। इस उपाय को करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और आपके ऊपर उनकी कृपा सदैव बनी रहती है।
FAQ
प्रश्न. तुरंत धन पाने के लिए क्या करें?
उत्तर. गुरुवार के दिन केले के पौधे पर जल चढ़ाएं और उसकी पूजा करें।
प्रश्न. घर में क्या रखने से धन आता है?
उत्तर. इसके लिए आप अपने घर में श्रीफल रख सकते हैं।
प्रश्न. शिवलिंग पर क्या चढ़ाने से धन प्राप्त होता है?
हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारा यह ब्लॉग ज़रूर पसंद आया होगा। अगर ऐसा है तो आप इसे अपने अन्य शुभचिंतकों के साथ ज़रूर साझा करें। धन्यवाद!
केतु गोचर 2024: इन राशियों को करियर में मिलेगी खूब तरक्की
30 अक्टूबर, 2023 को दोपहर 02 बजकर 13 मिनट पर केतु ने कन्या राशि में प्रवेश किया है और इस राशि में वह 2025 तक रहेंगे। केतु के इस महत्वपूर्ण गोचर का राशिचक्र की सभी 12 राशियों पर प्रभाव पड़ेगा लेकिन कुछ चुनिंदा राशियां ऐसी हैं जिन्हें करियर में अभूतपूर्व तरक्की मिलने की संभावना है। केतु एक आध्यात्मिक ग्रह है और इस ग्रह के प्रभाव से व्यक्ति सभी तरह के सांसारिक और भौतिक सुखों से खुद को दूर कर लेता है। केतु एक ऐसा ग्रह है जो व्यक्ति से काफी कुछ छीन लेता है और इसके प्रभाव की वजह से व्यक्ति के विकास में भी रुकावटें आने की संभावना रहती है लेकिन इस बार केतु के गोचर करने पर कुछ राशियों के लोगों को अपने करियर में असीम तरक्की और लाभ प्राप्त होने के संकेत हैं।
तो चलिए आगे जानते हैं कि केतु गोचर 2024 से किन राशियों के लोगों को करियर के क्षेत्र में प्रगति और सफलता मिलने की संभावना है।
आपकी राशि के लिए कैसा रहेगा आने वाला साल? विद्वान ज्योतिषियों से जानें इसका जवाब
मेष राशि: केतु आपके छठे भाव में आए हैं इसलिए यह गोचर आपके करियर के लिए ही नहीं बल्कि जीवन के अन्य पहलुओं के लिए भी लाभकारी सिद्ध होगा। आप अपने कार्यक्षेत्र में जो भी प्रयास करेंगे, उसमें आपको सफलता मिलेगी। करियर में आप कोई बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकते हैं और इस समय आपको शानदार सफलता मिलने की भी संभावना है। नौकरीपेशा जातकों को नौकरी के नए अवसर मिल सकते हैं। इससे आप संतुष्ट महसूस करेंगे। आपकी आय में भी वृद्धि होने के योग बन रहे हैं।
कर्क राशि: केतु का गोचर आपके तीसरे भाव में हुआ है जिससे आपको करियर में शानदार सफलता प्राप्त होगी। आप इस समय अपने करियर को चमकाने के लिए जो भी प्रयास करेंगे, उसमें आपको निश्चित ही सफलता प्राप्त होगी। आपको काम के सिलसिले में विदेश जाने का अवसर भी मिल सकता है और इस अवसर की मदद से आपका काफी विकास हो पाएगा। आपको नौकरी के नए अवसर मिलने की भी संभावना है।
कन्या राशि: केतु का गोचर आपके पहले भाव में हुआ है। मई, 2024 के महीने के बाद आपको अपने करियर में अच्छे परिणाम मिलने शुरू होंगे। करियर के क्षेत्र में आपको लाभ प्राप्त होगा और आपकी आर्थिक स्थिति में भी मज़बूती आएगी।
क्या वर्ष 2024 में आपके जीवन में होगी प्रेम की दस्तक? प्रेम राशिफल 2024 बताएगा जवाब
वृश्चिक राशि : केतु आपके ग्यारहवें भाव में गोचर करेंगे जिससे आपकाे अत्यंत लाभ मिलने वाला है। आप अपने हुनर काे पहचानने में सफल होंगे और करियर के क्षेत्र में बुद्धिमानी से निर्णय लेंगे। अपने कार्यक्षेत्र में आप एक लीडर के रूप में उभर कर सामने आएंगे। इस समय आप अपने करियर या काम में जो भी प्रयास करेंगे, उसमें आपको सफलता अवश्य मिलेगी।
सभी बारह राशियों का सबसे विस्तृत 2024 फलादेश: राशिफल 2024
धनु राशि: केतु के कन्या राशि में गोचर करने पर आप अपने करियर को लेकर काफी गंभीर रहने वाले हैं। इस समय आपका सारा ध्यान करियर के क्षेत्र में आगे बढ़ने और सफलता पाने पर रहने वाला है। आप अपने करियर में नए अवसरों की तलाश में रहने वाले हैं। अगर आप इस समय अपना पूरा ध्यान अपने करियर पर लगाकर रखेंगे, तो आपको अपने प्रयासों में सफलता जरूर मिलेगी। यह समय आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है इसलिए इस दौरान अपन हाथ में आने वाले किसी भी मौके को जाने न दें।
हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारा यह ब्लॉग ज़रूर पसंद आया होगा। अगर ऐसा है तो आप इसे अपने अन्य शुभचिंतकों के साथ ज़रूर साझा करें। धन्यवाद!
मंगल दोष कर रहा है परेशान, तो जरूर करें मंगला गौरी व्रत पर ख़ास ये उपाय
भगवान शिव का प्रिय महीना सावन या श्रावण मास की शुरुआत होने वाली है। सावन की पहली तिथि कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा होती है। श्रावण मास में सावन सोमवार व्रत, मंगला गौरी व्रत और सावन शिवरात्रि बहुत अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है। वैसे तो सावन का पूरा महीना भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित है, लेकिन जिस प्रकार सावन सोमवार का व्रत भगवान भोलेनाथ की कृपा पाने के लिए विशेष माना जाता है, उसी प्रकार सावन माह में पड़ने वाले मंगलवार को माता पार्वती की पूजा-अर्चना की जाती है। यह व्रत मुख्य रूप से सुहागन महिलाएं और कन्याएं रखती हैं।
बता दें कि प्रत्येक साल सावन महीने के प्रत्येक मंगलवार को मंगला गौरी का व्रत रखा जाता है। मंगला गौरी व्रत के दिन माता पार्वती के साथ भगवान शिव, भगवान गणपति और नंदी की भी पूजा करने का विधान है। तो आइए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं कि इस साल मंगला गौरी का व्रत किस तिथि को पड़ेगा और मंगल दोष से छुटकारा पाने के लिए इस दिन कौन से उपाय फलदायी साबित हो सकते हैं।
मंगला गौरी 2024 की तिथि एवं मुहूर्त
भगवान शिव की तरह माता पार्वती को भी यह महीना बहुत अधिक प्रिय है इसलिए इस माह भोलेनाथ के साथ-साथ माता गौरी की भी पूजा करना शुभ माना जाता है। इस बार सावन या श्रावण माह की शुरुआत 22 जुलाई, सोमवार के दिन से हो रही है। ऐसे में सावन का पहला मंगला गौरी व्रत 23 जुलाई 2024, मंगलवार के दिन रखा जाएगा। इस व्रत पर मुख्य रूप से माता पार्वती की उपासना की जाती है।
मंगला गौरी का व्रत मुख्य रूप से सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए रखती है, साथ ही कुंवारी कन्याएं भी अच्छे वर की प्राप्ति और सौभाग्य एवं समृद्धि के लिए व्रत का पालन करती हैं। मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से पति को दीर्घायु की प्राप्ति होती है और कुंवारी कन्याओं को मनचाहे वर की। जिस प्रकार से माता गौरी और भगवान भोलेनाथ का साथ जन्म जन्मांतर का है, उसी प्रकार से व्रती महिलाएं भी उनसे ऐसे सौभाग्य की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं। इसके साथ ही, घर-परिवार में भी सुख-शांति का माहौल बना रहता है। ऐसी मान्यता है कि मंगला गौरी व्रत करने से विवाह में आ रही बाधाएं भी दूर हो सकती हैं।
मंगला गौरी व्रत के दिन सबसे पहले व्रत रखने वाली महिलाओं को सूर्योदय से पूर्व स्नान करने के बाद नए वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए।
संकल्प लेते समय महिलाओं को विशेष रूप अपने मन में इन बातों को बार-बार दोहरना चाहिए- “मैं अत्यंत आनंदित होकर एक वक़्त के भोजन का त्याग कर व्रत का संकल्प लेती हूं, मेरे सभी पापों का नाश हों और मेरे सौभाग्य में वृद्धि हो।”
इसके बाद घर के मंदिर में गौरी और शिव जी मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
एक कलश में मिट्टी डालकर उसमें जौ की कुछ बीजें डाल दें, अगले पांच दिनों तक पूजा के समय इस कलश में पानी डालें और पूरे विधि विधान से इसकी पूजा करें।
यह व्रत एक दिन, तीन दिन और पांच दिनों के लिए लिया जा सकता है।
इस दौरान माता गौरी की पूजा के लिए कुमकुम, अश्वगंधा, कस्तूरी और लाल रंग के फूलों का प्रयोग करें।
प्रसाद के रूप में आप नारियल जरूर चढ़ाएं, इशके अलावा अनार या कोई भी अन्य मौसमी फल चढ़ा सकते हैं।
पूजा व आरती के बाद इस व्रत से संबंधित कथा जरूर सुनें क्योंकि कथा के बिना व्रत अधूरा माना जाता है और इसके बाद ब्राह्मणों को भोजन करवाएं व अपनी क्षमता अनुसार, दान-दक्षिणा प्रदान करें।
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में धर्मपाल नामक एक सेठ रहता था। सेठ धर्मपाल के पास धन दौलत की कोई कमी नहीं थी। वह पूरी तरह सर्व गुण संपन्न था और भगवान शंकर का भक्त था। कालांतर में सेठ धर्मपाल की शादी गुणवान कन्या से हुई। हालांकि, विवाह के बाद कई वर्षों तक संतान की प्राप्ति नहीं हुई। इससे सेठ धर्मपाल काफी चिंतित रहने लगा। वह सोचने लगा कि अगर संतान नहीं हुई, तो उसके कारोबार का कौन उत्तराधिकारी होगा? एक दिन सेठ धर्मपाल की पत्नी ने संतान प्राप्ति के लिए किसी पंडित से संपर्क करने की बात कही।
पत्नी की सलाह को मानते हुए सेठ ने नगर के सबसे प्रसिद्ध पंडित के पास जाकर मुलाकात की। उस समय पंडित ने सेठ दंपत्ति को भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-उपासना करने की सलाह दी। इसके बाद सेठ धर्मपाल और उसकी पत्नी ने विधि विधान से महादेव और माता पार्वती की पूजा-उपासना की। सेठ धर्मपाल की पत्नी की कठिन भक्ति भाव को देखकर माता प्रसन्न हुई और प्रकट होकर बोली- हे देवी! तुम्हारी भक्ति देखकर मैं बहुत अधिक खुश हूं, जो वर मांगना चाहते हो! मांगो। तुम्हारी हर इच्छाओं की पूर्ति होगी। सेठ धर्मपाल की पत्नी ने तुरंत ही अपनी संतान प्राप्ति की कामना की। माता पार्वती ने संतान प्राप्ति का वरदान दिया लेकिन, संतान अल्पायु था।
एक वर्ष बाद, धर्मपाल की पत्नी ने पुत्र को जन्म दिया। जब पुत्र का नामकरण किया गया, तो उस समय धर्मपाल ने माता पार्वती के वचन से ज्योतिष को अवगत कराया। तब ज्योतिष ने सेठ धर्मपाल को पुत्र की शादी मंगला गौरी व्रत करने वाली कन्या से करने की सलाह दी। ज्योतिष के कहने पर सेठ धर्मपाल ने अपने पुत्र की शादी मंगला गौरी व्रत करने वाली कन्या से की। कन्या के व्रत करने से सेठ धर्मपाल के पुत्र को लंबी आयु की प्राप्ति हुई।
बृहत् कुंडली में छिपा है, आपके जीवन का सारा राज, जानें ग्रहों की चाल का पूरा लेखा-जोखा
मंगला गौरी पर करें ये ख़ास उपाय
मंगला गौरी के दिन कुछ ख़ास उपाय बताए जा रहे हैं, जिसे अपनाकर आप मंगल दोषों से मुक्ति पा सकते हैं। साथ ही, अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। आइए जानते हैं मंगला गौरी व्रत के उपायों के बारे में…
विवाह में आ रही देरी के लिए
यदि किसी जातक के विवाह में देरी हो रही है तो, इसके लिए मंगला गौरी व्रत पर मां गौरी को 16 श्रृंगार की सामग्री अर्पित करनी चाहिए। इससे मां गौरी प्रसन्न होती हैं और अपना विशेष आशीर्वाद प्रदान करती है। इसके साथ ही, व्रत के दिन मिट्टी का घड़ा बहते नदी में प्रवाहित करने से भी विवाह में आ रही समस्याएं दूर होती है।
मंगल ग्रह मजबूत करने के लिए
मंगला गौरी व्रत के दिन गरीबों और जरूरतमंदों में लाल मसूर की दाल और लाल वस्त्र आदि लाल सामान दान करना चाहिए। इससे कुंडली में मंगल ग्रह की स्थिति मजबूत होती है और जातक को मंगल दोष के बुरे प्रभावों से भी छुटकारा मिलता है। इसके साथ ही, इस दिन मां गौरी की पूजा के दौरान ‘ॐ गौरी शंकराय नमः’ मंत्र का जाप 108 बार करना चाहिए। इससे मंगल के शुभ प्रभाव प्राप्त होते हैं।
अब घर बैठे विशेषज्ञ पुरोहित से कराएं इच्छानुसार ऑनलाइन पूजा और पाएं उत्तम परिणाम!
मनचाहा वर प्राप्ति के लिए
ज्योतिष के अनुसार, मंगला गौरी व्रत के दिन कुंवारी कन्याओं मनचाहा वर प्राप्ति करने के लिए दो मुट्ठी मसूर दाल को एक लाल कपड़े में बांधकर किसी जरूरतमंद या गरीब व्यक्ति को दान कर देना चाहिए। इससे आपको मनचाहा वर की प्राप्ति होगी।
विवाह में आ रही अड़चनें दूर करने के लिए
यदि आपके विवाह में बार-बार अड़चनें आ रही है या बात बनते-बनते किसी कारण से रह जा रही है तो सावन ने हर मंगला गौरी व्रत का व्रत करें और इस दौरान इस मंत्र का जाप करें- सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सवार्थ साधिके। शरण्येत्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते। इससे शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
आठवें भाव में मंगल
यदि किसी अविवाहित कन्या की कुंडली में आठवें भाव में मंगल विराजमान हैं तो ज्योतिष अनुसार कन्या को हर मंगलवार के दिन रोटी बनाने से पहले तवे पर ठंडे पानी के छींटे मारकर फिर रोटी बनानी चाहिए। इससे मंगल के शुभ प्रभाव की प्राप्ति होगी।
इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1. इस साल मंगला गौरी का व्रत कब रखा जाएगा?
उत्तर 1. साल 2024 में मंगला गौरी का व्रत 23 जुलाई 2024, मंगलवार के दिन रखा जाएगा।
प्रश्न 2. मंगला गौरी में माता को क्या अर्पित करना चाहिए?
उत्तर 2. मां मंगला गौरी व्रत के दौरान माता को आटे के लड्डू, फल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, और सुहाग सामग्री अर्पित करनी चाहिए।
प्रश्न 3. मंगला गौरी किसकी पत्नी थी?
उत्तर 3. माता गौरी भगवान शिव की पत्नी थी।
प्रश्न 4. मंगला गौरी व्रत कौन रख सकता है?
उत्तर 4. मंगला गौरी का व्रत सुहागिन महिला से लेकर कुंवारी कन्याएं भी रखती हैं।
दो शुभ योगों में मनाई जाएगी देवशयनी एकादशी, इस दिन जरूर करें राशि अनुसार ये ख़ास उपाय!
सनातन धर्म में सभी 24 एकादशी का बहुत अधिक महत्व है लेकिन, आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी तिथि बहुत अधिक महत्वपूर्ण और ख़ास मानी जाती है। इस एकादशी को देवशयनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। हर महीने आने वाली दो एकादशी में यह सबसे बड़ी एकादशी है। इसका बड़ा महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति को कई गुना पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
सनातन धर्म में देवशयनी एकादशी वर्ष का वह दिन होता है जब भगवान विष्णु चार महीने के लिए योग निद्रा अवस्था में चले जाते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी पर जागते हैं। मान्यता के अनुसार इस दौरान धरती का संचालन भगवान शिव करते हैं। देवशयनी एकादशी से चातुर्मास भी प्रारंभ होता है। सनातन धर्म में चातुर्मास का विशेष महत्व है। चातुर्मास का शाब्दिक अर्थ है चार महीने। इन चार महीनों के दौरान भगवान विष्णु क्षीरसागर में विश्राम करते हैं और इस अवधि से सभी मांगलिक और शुभ कार्यों को करने की मनाही हो जाती है। इसके बाद देवउठनी ग्यारस के बाद शुभ कार्य और विवाह संपन्न होते हैं।
ख़ास बात यह है कि इस साल पड़ने वाली देवशयनी एकादशी कई मायनों में महत्वपूर्ण रहने वाली है क्योंकि, इस दिन बेहद शुभ योगों का निर्माण हो रहा है, तो आइए जानते हैं इस साल कब है देवशयनी एकादशी, इसका महत्व, पूजा-विधि, पौराणिक कथा व इस दिन किए जाने वाले उपायों के बारे में।
बृहत् कुंडलीमें छिपा है, आपके जीवन का सारा राज, जानें ग्रहों की चाल का पूरालेखा-जोखा
देवशयनी एकादशी 2024: तिथि व समय
हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी मनाई जाती है और साल 2024 में यह तिथि 17 जुलाई बुधवार के दिन पड़ेगी।
एकादशी तिथि प्रारंभ: 16 जुलाई की शाम 8 बजकर 35 मिनट से शुरू होगी।
एकादशी तिथि समाप्त: 17 जुलाई की शाम 9 बजकर 4 मिनट तक रहेगी।
ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, देवशयनी एकादशी 17 जुलाई को मनाई जाएगी। इस दिन विष्णु भगवान की पूजा और व्रत करना शुभ होता है।
आषाढ़ी एकादशी पारण मुहूर्त : 18 जुलाई की सुबह 05 बजकर 34 मिनट से 08 बजकर 19 मिनट तक
अवधि : 2 घंटे 44 मिनट
इस दिन बनने वाले योग
इस बार देवशयनी एकादशी 17 जुलाई को मनाई जाएगी। इस दिन कई ऐसे में शुभ योग बन रहे हैं, जिनमें भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा अर्चना करने से आपकी सभी मनोकामना पूर्ण हो जाएंगी। एकादशी पर पहला शुभ योग सर्वार्थ सिद्धि और दूसरा अमृत सिद्धि योग बन रहा है। पहला योग सुबह 7 बजकर 5 मिनट से शुरू होकर अगले दिन 18 जुलाई को समाप्त होगा। वहीं दूसरा अमृत सिद्धि योग 5 बजकर 34 मिनट से शुरू होकर अगले दिन सुबह 3 बजकर 13 मिनट तक रहेगा। इन योग में सभी शुभ कार्यों को करने से सकारात्मक परिणामों की प्राप्ति होती है।
देवशयनी एकादशी का सनातन धर्म में बहुत अधिक महत्व है। मान्यता है कि इस दिन से चार महीने तक सूर्य, चंद्रमा और प्रकृति का तेजस तत्व कम हो जाता है इसलिए कहा जाता है कि देवशयन हो गया है। शुभ और सकारात्मक शक्तियों के कमज़ोर होने के चलते सभी शुभ कार्यों को करने की मनाही हो जाती है। चातुर्मास के दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि देवशयनी एकादशी का व्रत करने व्यक्ति को सभी 24 एकादशी के बराबर फल की प्राप्ति होती है।
शास्त्रों के अनुसार देवशयनी एकादशी पर इस मंत्र से- ‘सुप्ते त्वयि जगन्नाथ जमत्सुप्तं भवेदिदम्। विबुद्दे त्वयि बुद्धं च जगत्सर्व चराचरम्।’ श्रीहरि भगवान विष्णु बहुत जल्द प्रसन्न हो जाते हैं और साथ ही पापों का नाश होता है।
देवशयनी एकादशी की पूजा विधि
देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा करना बेहद शुभ होता है। इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सभी कार्यों से निवृत होकर स्नान करें।
इसके बाद पीले वस्त्र धारण करें और व्रत रखने का संकल्प लें।
फिर घर के मंदिर को साफ कर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की तस्वीर या मूर्ति को विराजमान करें।
इसके बाद शंख में दूध भरकर भगवान अभिषेक करें। अभिषेक करते वक्त केसर व शहद जरूर डालें। ऐसा करना शुभ माना जाता है।
इस दिन भगवान विष्णु को खीर का भोग जरूर लगाएं और भोग लगाते समय इसमें तुलसी जरूर डालें क्योंकि तुलसी उन्हें अति प्रिय हैं।
इस साथ ही, इस दिन पीले वस्त्र, चंदन, पान का पत्ता, सुपारी आदि अर्पित करें। साथ ही ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय नमः मंत्र का जाप करें। इससे आपको विशेष कृपा प्राप्त होगी।
इसके बाद द्वादशी के दिन ब्राह्मणों को भोजन कराकर व अपनी क्षमता अनुसार दान करें। फिर मुहूर्त में व्रत पारण करें।
देवशयनी एकादशी के दिन चावल या चावल से बनी चीजों का सेवन गलती से भी न करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चावल में जल की मात्रा अधिक होती है और जल में चंद्रमा का प्रभाव पड़ता है इसलिए इस दिन चावल से दूर रहना चाहिए।
देवशयनी एकादशी के दिन व्यक्ति को बाल नहीं धोने चाहिए, न कटवाना चाहिए और न ही नाखून काटना चाहिए। मान्यता है कि इस दिन बाल टूटना बहुत अधिक अशुभ माना जाता है।
इस तामसिक भोजन जैसे- लहसुन, प्याज और मांसाहारी का सेवन भूलकर भी न करें और न ही घर पर बनने दें।
देवशयनी एकादशी के दिन भूलकर भी काले रंग के वस्त्र न पहने क्योंकि काले वस्त्र पहनना अशुभ माना गया है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित है और उन्हें पीला रंग अति प्रिय है इसलिए इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनें।
जो जातक देवशयनी एकादशी का व्रत करते हैं तो जमीन पर बिस्तर बैठना और लेटना चाहिए। इस दिन सोना नहीं चाहिए और रात भर भगवान का भजन करना चाहिए।
देवशयनी एकादशी व्रत में तन के साथ मन की शुद्धता भी रखें। मन में किसी प्रकार के बुरे विचार न लाने दें और किसी से अप-शब्द न बोलें।
देवशयनी एकादशी के दिन जरूर पढ़ें ये कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से देवशयनी एकादशी के बारे में जानने की इच्छा जाहिर की। श्रीकृष्ण ने जो कथा सुनाई थी उसमें सूर्यवंश के एक सत्यवादी राजा का वर्णन था। कथा के अनुसार, सूर्यवंश में मांधाता नाम का एक प्रतापी और सत्यवादी राजा राज्य करता था। राजा के कामों से प्रजा बहुत अधिक खुश रहती थी और इस वजह से राज्य में बहुत खुशहाली का माहौल था। लेकिन, एक बार फिर अचानक राज्य में अकाल पड़ गया था और चारों तरफ त्राहि-त्राहि मचने लगी थी। प्रजा ही हाल बुरा होने लगा, जिसे देखकर राजा बहुत दुखी और परेशान हो गया।
राजा ने अपने राज्य का भला करने हेतु एक फैसला लिया वे जंगलों की तरफ प्रस्थान करेंगे और इस परेशानियों से निकलने का हल खोजने का प्रयास करेंगे। वन में घूमते-घूमते राजा को राजा ब्रह्माजी के पुत्र अंगिरा का आश्रम मिला और उस आश्रम से राजा मांधाता को देवशयनी एकादशी का व्रत के बारे में पता चला। राजा मांधाता ने भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए विधि-विधान से देवशयनी एकादशी का व्रत रखा और इसके बाद राज्य का अकाल मिट गया और पूरे राज्य में खुशी का वातावरण छा गया। एक बार फिर राजा के राज्य में हरियाली छा गई और सभी अपना जीवन सुखमय तरीके से जीने लगे। इसके बाद से ही सभी देवशयनी एकादशी का व्रत रखने लगे और इस व्रत का महत्व बहुत अधिक बढ़ गया।
अब घर बैठे विशेषज्ञ पुरोहित से कराएं इच्छानुसार ऑनलाइन पूजा और पाएं उत्तम परिणाम!
देवशयनी एकादशी के दिन करें राशि अनुसार उपाय
मेष राशि
मेष राशि के स्वामी मंगल हैं और यह ऊर्जा का ग्रह है। ऐसे में, यदि आप देवशयनी एकादशी के दिन लाल रंग के कपड़े पहनकर भगवान विष्णु की पूजा करें और उन्हें उनकी पसंद की चीजें भोग में अर्पित करें तो आपके जीवन में आ रही सभी प्रकार की समस्याओं से छुटकारा मिलेगा और जीवन सुखमय तरीके से बीतेगा।
वृषभ राशि
वृषभ राशि के लोगों को इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ माता लक्ष्मी का पूजन भी करना चाहिए और साथ ही, भोग में मखाने की खीर चढ़ाना चाहिए। ऐसा करने से आपकी सारी मनोकामना की पूर्ती होगी। इसके अलावा, इस दिन किसी भी सफ़ेद मिठाई का दान जरूर करें। इससे आपके रुके काम बनने लगेंगे।
मिथुन राशि
मिथुन राशि के जातकों के लिए देवशयनी एकादशी के दिन मंदिर में घी का दीपक जलाना अत्यंत शुभ होगा। यदि आप इस दिन घर के मुख्य द्वार पर भी घी का दीपक जलाएंगी तो घर में हमेशा सुख-समृद्धि बनी रहेगी और सकारात्मक ऊर्जा का वास रहेगा।
कर्क राशि
कर्क राशि के जातकों को देवशयनी एकादशी के दिन घर में लौंग कपूर जलाना चाहिए। ऐसा करना आपके लिए शुभ रहेगा और घर से सभी नकारात्मक ऊर्जाएं दूर हो जाएंगी। इस दिन आप किसी महिला को नारियल का दान करें। इससे स्वास्थ्य समस्याएं दूर होंगी।
सिंह राशि
सिंह राशि के लोग इस दिन तुलसी की विशेष रूप से पूजा करें और घी का दीपक जलाएं व लाल चुनरी चढ़ाएं। यदि आप इस दिन तुलसी जी की विधि-विधान से पूजा करेंगी तो आपको सभी परेशानियों से लड़ने की क्षमता मिलेगी।
कन्या राशि
आप इस दिन पीले वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु की पूजा करें। ऐसा करने से आपको विशेष फलों की प्राप्ति होगी। इस दिन आप विष्णु को पीले फूल चढ़ाएं। इसके साथ ही यदि आप पीले फल या अनाज का दान करेंगे तो इससे आपको सकारात्मक फल की प्राप्ति होगी।
तुला राशि
तुला राशि जातकों को इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को उनकी जरूरतों की चीजें जरूर दान करना चाहिए। ऐसा करने से आपके सभी कष्ट दूर हो सकते हैं। इस दिन भगवान विष्णु को भोग में पीली चीजें चढ़ाएं।
वृश्चिक राशि
यदि आप इस दिन घर के ईशान कोण पर दीपक जलाएंगी तो आपको शुभ फलों की प्राप्ति होगी। इस दिन माता लक्ष्मी को सिन्दूर और विष्णु जी को हल्दी चढ़ाएं। ऐसा करने से आपके रुके काम बनने लगेंगे।
धनु राशि
धनु राशि के जातकों को देवशयनी एकादशी के दिन सूर्य को जल देना चाहिए और साथ ही, सूर्य के मंत्रों का जाप करना चाहिए। ऐसा करने से आपकी सभी मनोकामनाओं की पूर्ति हो सकती है। इस दिन आप सरसों के तेल का दान अवश्य करें।
मकर राशि
मकर राशि जातकों को इस दिन अनाज का दान करना चाहिए। ऐसा करने से आपको सभी पापों से मुक्ति मिल सकती है। इसके अलावा, इस दिन यदि आप भगवान विष्णु को पीली चीजें चढ़ाएं तो आपके घर में समृद्धि बनी रहेगी।
कुंभ राशि
कुंभ राशि के जातकों को इस दिन चीनी का दान करना चाहिए। ऐसा करने से आपको धन लाभ हो सकता है। इसके अलावा, इस दिन एकादशी की कथा जरूर पढ़ें और हो सके तो घर के सदस्यों को भी सुनाएं।
मीन राशि
मीन राशि वालों को इस एकादशी के दिन चावल का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए अपितु चावल का दान करना आपके लिए फलदायी रहेगा। ऐसा करने से आपको अपने बिज़नेस और कार्यक्षेत्र में तरक्की हासिल होगी।
इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों
प्रश्न 1. देवशयनी एकादशी साल 2024 में कब पड़ रही है?
उत्तर. साल 2024 में योगिनी एकादशी 17 जुलाई बुधवार के दिन पड़ रही है।
प्रश्न 2.देवशयनी एकादशी क्यों मनाई जाती है?
उत्तर. इस एकादशी का शास्त्रों में विशेष महत्व है क्योंकि माना जाता है कि इस एकादशी से भगवान नारायण योग निद्रा में चले जाते हैं।
प्रश्न 3. देवउठनी एकादशी का दूसरा नाम क्या है?
उत्तर. देवउठनी एकादशी को प्रबोधिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।
प्रश्न 4. भगवान विष्णु किस एकादशी को सोने जाते हैं?
उत्तर. आषाढ़ मास की देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु चार माह के लिए शयन करते हैं।
घर के वास्तु दोष से हो सकती है ये बड़ी बीमारियां, इन उपायों से दूर होगी सारी समस्या
मानव जीवन को सुखद और सुगम बनाने में वास्तु शास्त्र का बहुत अधिक योगदान है। यह पांच तत्वों से मिलकर बना है, जो इस प्रकार है- पृथ्वी, अग्नि, आकाश, जल और वायु। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर बनने से लेकर घर में रखे हर एक वस्तु और दिशा का खास महत्व होता है। वास्तु के अनुसार घर की हर एक दिशा खास संकेत देती है। इन दिशाओं से सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह की ऊर्जा निकलती है। इन दिशाओं से निकलने वाली ऊर्जा का असर घर के हर एक सदस्यों पर पड़ता है। दरअसल घर पर वास्तु दोष तब लगता है जब वास्तु के नियमों का पालन न किया जा रहा है और इसके बाद ही वास्तु दोष लगना शुरू होता है। वास्तु दोष के परिणामस्वरूप घर में रहने वाला व्यक्ति शारीरिक व मानसिक रोगी तक बन जाता है। यह नहीं व्यक्ति को कई अन्य प्रकार की बीमारियां भी घेर लेती है। यदि वास्तु दोष से निपटने के लिए सही से उपाय न किया जाए तो व्यक्ति बड़ी से बड़ी बीमारी से घिर सकता है इसलिए इससे मुक्ति पाने के लिए उपाय करना जरूरी है।
एस्ट्रोसेज के इस विशेष ब्लॉग में हम जानेंगे कि वास्तु दोष होने पर व्यक्ति किस प्रकार की बीमारियों से ग्रस्त रहता है, वास्तु दोष कब होता है और इससे बचने के आसान उपाय आदि के बारे में यहां जानकारी हासिल करेंगे। तो बिना देरी किए आगे बढ़ते हैं और सबसे पहले जान लेते हैं कि वास्तु दोष होने पर कौन सी बड़ी बीमारियां व्यक्ति को परेशान कर सकती है।
वास्तु शास्त्र भारतीय संस्कृति का एक प्राचीन विज्ञान है, जो प्रकृति और ऊर्जा के नियमों पर आधारित है।विशेष रूप से सनातन धर्म में इसका विशेष महत्व है। लोग घर बनाते समय वास्तु के नियमों का खासतौर से ध्यान रखते हैं। वास्तु शास्त्र का मुख्य उद्देश्य प्रकृति और उपयोगिता पूर्ण शक्तियों का संचार और संतुलन सुनिश्चित करना है। इसके अनुसार, सही तरीके से इस्तेमाल से घर में सुख-शांति और समृद्धि का आगमन होता है और व्यक्ति तमाम तरह की समस्याओं से निजात पाता है।
बृहत् कुंडली में छिपा है, आपके जीवन का सारा राज, जानें ग्रहों की चाल का पूरा लेखा-जोखा
वास्तु दोष होने पर इन बीमारियों से परेशान रहता है व्यक्ति
वास्तु दोष से ऐसे तो कई तरह की बीमारियां पैदा हो सकती है लेकिन कुछ ऐसी बीमारियां है, जो काफी गंभीर रूप ले लेती है। यदि समय पर इसका समाधान न किया जाए तो यह व्यक्ति के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। तो आइए जानते हैं इन बीमारियों के बारे में।
पेट संबंधी समस्या
वास्तु दोष होने से पेट से संबंधित बीमारियों का खतरा बढ़ने लगता है। वास्तु दोष के अनुसार, घर का किचन उत्तर पूर्वी दिशा में नहीं होना चाहिए क्योंकि इस दिशा में किचन होना अशुभ माना जाता है। इस दिशा में खाना बनाने से पेट से संबंधित बीमारियां परेशान कर सकती है और यह बीमारी बड़ा रूप ले सकती है इसलिए इस बात का विशेष ध्यान रखें।
गैस और रक्त संबंधी बीमारी
घर की दीवारों के रंग का भी वास्तु में बहुत अधिक महत्व है इसलिए घर में पेंट करवाते समय वास्तु के नियमों का जरूर ध्यान करें। वास्तु जानकारों के अनुसार, अच्छे स्वास्थ्य के लिए दीवारों पर दिशा के अनुरूप हल्का और सात्विक रंगों का इस्तेमाल करना शुभ साबित हो सकता है। ऐसा करने से वास्तु दोष से बचा जा सकता है। वास्तु के हिसाब से घर में नारंगी या पीला रंग ब्लड प्रेशर, काला या गहरा नीला रंग वायु रोग, पेट में गैस, हाथ-पैरों में दर्द, गहरा लाल रंग रक्त संबंधी बीमारी या दुर्घटना का कारण बन सकता है इसलिए घर का पेंट करवाते समय अधिक ध्यान दें।
यदि आप भोजन करते समय वास्तु के नियमों का पालन नहीं करते हैं तो इससे आपके लिए बड़ी समस्या पैदा हो सकती है। वास्तु के नियम के अनुसार, दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके भोजन करने से बचना चाहिए क्योंकि इससे पैरों में दर्द की समस्या परेशान कर सकती है। जिन लोगों के पैरों में अक्सर दर्द रहता है वह वास्तु दोष के कारण ही होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, भोजन करते समय मुंह पूरब दिशा की तरफ होना चाहिए। इससे आपका स्वास्थ्य रहता है और कोई बड़ी समस्या आपको परेशान नहीं कर सकती है। इसके अलावा किचन में खाना बनाते समय अगर मुंह दक्षिण की ओर है तो त्वचा एवं हड्डी से संबंधित समस्या आपको परेशान कर सकती है। पश्चिम की तरफ मुंह करके खाना बनाने से आंख,नाक,कान और गले की समस्याएं हो सकती है।
नींद न आने की समस्या
नींद न आना, थकान, अधिक तनाव लेना सिर और हाथ पैरों में दर्द और बेचैनी आदि का भी वास्तु दोष से गहरा संबंध है। यदि आपने वास्तु के नियम का सही से पालन नहीं किया तो आपको इन समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। यदि आप सोने जा रहे हैं तो अपना बिस्तर इस प्रकार करें कि आपका पैर पूरब की ओर आए। इस दिशा में सोने और बैठने से स्वास्थ्य समस्याओं से राहत पाया जा सकता है। इसके अलावा, आय के भी स्त्रोत खुलते हैं। वास्तु के अनुसार, उत्तर की तरफ सिर और दक्षिण की तरफ पैर करके सोने से कई तरह की समस्याएं व्यक्ति को परेशान कर सकती है।
वास्तु शास्त्र में ऐसे कई नियमों के बारे में बताया गया है, जिसको ध्यान में रखकर घर से वास्तु दोष को कम किया जा सकता है और बीमारी होने से बचा जा सकता है। तो आइए जानते हैं इन नियमों के बारे में।
वास्तु शास्त्र के अनुसार, दक्षिण और पश्चिम दिशा के बीच पानी से संबंधित चीज़े जैसे नल या कुआं नहीं होना चाहिए। इसके अलावा, इस दिशा में वॉश बेसिन या वॉशिंग मशीन रखने से बचना चाहिए।
घर में कोई बीमारी है तो दवाइयों को भूलकर भी दक्षिण के दिशा में नहीं रखना चाहिए। दवाइयों को उत्तर या उत्तर पूर्व दिशा में रखना चाहिए।
यदि आप दवाओं का सेवन कर रहे हैं तो दवा हमेशा उत्तर की ओर मुंह करके खाना चाहिए।
वास्तु के अनुसार, उत्तर और उत्तर पूर्व दिशा में भारी बॉक्स नुमा चीजें जैसे इन्वर्टर रखने से बचना चाहिए। इन दिशाओं में कोई भी वास्तु दोष होने पर घर में बीमारियों का घर बन सकता है।
हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारा यह लेख ज़रूर पसंद आया होगा। अगर ऐसा है तो आप इसे अपने अन्य शुभचिंतकों के साथ ज़रूर साझा करें। धन्यवाद!
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1. वास्तु के अनुसार, घर में किस दिशा में क्या होना चाहिए?
उत्तर 1. घर पूर्व या उत्तर दिशा में ही होना चाहिए।
प्रश्न 2. कैसे पता करें कि घर में वास्तु दोष है?
उत्तर 2. यदि घर में समय-समय पर आर्थिक समस्याएं उत्पन्न हो रही है या घर में रहने वाले सदस्य बार-बार बीमार पड़ रहे हैं तो यह वास्तु दोष का कारण है।
प्रश्न 3. वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में शौचालय कहाँ होने चाहिए?
उत्तर 3. बाथरूम को या तो उत्तर या उत्तर पश्चिम दिशा में बनवाना चाहिए।
प्रश्न 4. कौन सी दिशा में सिर रखकर सोना चाहिए?
उत्तर 4. दक्षिण से उत्तर की तरफ सोने से व्यक्ति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
जुलाई में सूर्य के गोचर से बनेंगे दो शुभ संयोग, पलट जाएगी तीन लोगों की किस्मत, पैसों से भरी रहेगी जेब
ज्योतिषशास्त्र में सूर्य को आत्मा का कारक कहा गया है। सूर्य देव की कृपा के बिना किसी भी व्यक्ति को अपने करियर एवं कार्यक्षेत्र में सफलता मिल पाना मुश्किल होता है। जब सूर्य गोचर करता है, तो इसका असर मनुष्य के जीवन के हर एक पहलू पर पड़ता है।
इस बार सूर्य 16 जुलाई को कर्क राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। कर्क राशि में पहले से ही शुक्र और बुध उपस्थित हैं। इस प्रकार सूर्य, बुध और शुक्र तीनों की कर्क राशि में युति हो रही है। तीनों ग्रहों की इस युति से बेहद शुभ योगों का निर्माण होने जा रहा है। बुध और सूर्य की युति से बुधादित्य योग बन रहा है और सूर्य एवं शुक्र की युति से शुक्रादित्य योग बन रहा है। ज्योतिष में इन दोनों ही योगों को बहुत शुभ माना गया है।
जुलाई के महीने में शुक्रादित्य और बुधादित्य योग बनने से कुछ खास राशियों के लोगों को विशेष लाभ मिलने के संकेत हैं। इस ब्लॉग में हम आपको उन्हीं राशियों के बारे में बता रहे हैं जिन्हें इन दो संयोगों के कारण अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे।
ये राजा की तरह अपना जीवन बिताएंगे और इन्हें भाग्य का साथ तो मिलेगा ही साथ ही धन-वैभव भी प्राप्त होगा। तो चलिए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं कि इस समय किन राशियों की किस्मत खुलने वाली है।
बृहत् कुंडली में छिपा है, आपके जीवन का सारा राज, जानें ग्रहों की चाल का पूरा लेखा-जोखा
इन राशियों को होगा फायदा
कर्क राशि
जुलाई में बन रहे इस डबल राजयोग से कर्क राशि के लोगों को बहुत फायदा होने वाला है। इनके आत्मविश्वास में वृद्धि देखने को मिलेगी। आपको अपने भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। इसके साथ ही समाज के बड़े और प्रभावशाली लोगों से आपकी जान-पहचान होगी। ये आगे चलकर आपके लिए लाभकारी सिद्ध होंगे।
आपकी बुद्धिमानी और समझदारी में वृद्धि देखने को मिलेगी और आप अपने लक्ष्य को प्राप्त करने का प्रयास करेंगे। आपकी आय के स्रोत बढ़ेंगे और आप अपने खर्चों की पूर्ति करने के साथ-साथ पैसों की बचत कर पाने में भी सक्षम होंगे। सिंगल जातकों के लिए शादी का प्रस्ताव आ सकता है।
इस डबल राजयोग से कन्या राशि के लोगों को भी लाभ होने के संकेत हैं। इनकी आमदनी में वृद्धि होगी और समाज में भी इनका मान-सम्मान बढ़ेगा। नौकरीपेशा जातकों के लिए भी अनुकूल समय है। व्यापारियों को अपने क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। आपको अपने भाग्य का पूरा साथ मिल पाएगा जिससे आपके कार्य आसानी से पूरे हो पाएंगे।
इस समय आप प्रसन्न और संतुष्ट रहने वाले हैं। आपकी आर्थिक स्थिति में भी सुधार आने वाला है। आप अपने लिए प्रॉपर्टी या वाहन आदि खरीद सकते हैं। निवेश करने के लिए भी अच्छा समय है। अटका हुआ पैसा वापिस मिल सकता है। पारिवारिक जीवन में खुशियां आएंगी। पति-पत्नी के बीच प्यार और स्नेह बढ़ेगा।
तुला राशि के लोगों को सूर्य के गोचर करने पर अपने जीवन के हर क्षेत्र में शुभ परिणाम मिलने शुरू हो जाएंगे। आपके अधूरे और अटके हुए काम पूरे हो सकते हैं। व्यापारियों के लिए अपार सफलता के योग बन रहे हैं। आपकी आमदनी में भी वृद्धि देखने को मिलेगी। इससे आपकी आर्थिक स्थिति बेहतर होने वाली है।
बिज़नेस करने वाले लोगों को खूब धन कमाने का मौका मिलेगा। आप एक सफल उद्यमी के रूप में खुद को साबित कर पाएंगे। परिवार के सदस्यों के साथ आपके संबंध मज़बूत होंगे। संतान की प्रगति से आपका मन खुश रहेगा। आपका स्वास्थ्य भी अच्छा रहने वाला है। आपको इस समय किसी भी बात की चिंता नहीं रहेगा।
जब सूर्य और शुक्र की युति होती है, तब शुक्रादित्य राजयोग बनता है। सूर्य को आदित्य के नाम से भी जाना जाता है इसलिए सूर्य और शुक्र के एकसाथ आने पर बनने वाले योग का नाम शुक्रादित्य रखा गया है।
इस योग को बहुत ज्यादा शुभ माना गया है। इस योग के प्रभाव से व्यक्ति के जीवन की सभी समस्याएं दूर हो सकती हैं। सूर्य लगभग एक माह के अंतराल में राशि परिवर्तन करता है जबकि शुक्र हर 28 दिन में गोचर करता है।
बुधादित्य योग क्या होता है
ज्योतिष में सूर्य को आदित्य के नाम से भी जाता है इसलिए सूर्य और बुध की युति होने पर बनने वाले राजयोग को बुधादित्य योग के नाम से जाना जाता है। बुधादित्य योग जातक को सफलता, मान-सम्मान, प्रतिष्ठा और आर्थिक स्थिरता प्रदान करता है।
अब घर बैठे विशेषज्ञ पुरोहित से कराएं इच्छानुसार ऑनलाइन पूजा और पाएं उत्तम परिणाम!
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न. बुधादित्य योग क्या है?
उत्तर. बुध और सूर्य की युति बनने पर यह योग बनता है।
प्रश्न. शुक्रादित्य योग क्या है?
उत्तर. शुक्र और सूर्य की युति पर इस योग का निर्माण होता है।
हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारा यह ब्लॉग ज़रूर पसंद आया होगा। अगर ऐसा है तो आप इसे अपने अन्य शुभचिंतकों के साथ ज़रूर साझा करें। धन्यवाद!
चातुर्मास 2024: 118 दिनों के लिए वर्जित रहेंगे सभी शुभ कार्य- जान लें नियम और महत्व!
हिंदू पंचांग के अनुसार देवशयनी एकादशी से चातुर्मास की शुरुआत हो जाती है। चातुर्मास अर्थात 4 महीनों की ऐसी अवधि जब भगवान विष्णु अपनी योग निद्रा में चले जाते हैं। ऐसे में सनातन धर्म में इस दौरान कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किया जाता है। आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि से चातुर्मास या चौमासा की ये अवधि शुरू होती है और कार्तिक माह की एकादशी तिथि को इसका समापन हो जाता है।
लेकिन सवाल उठता है कि, आखिर चातुर्मास के दौरान मांगलिक कार्य वर्जित क्यों होते हैं? इस वर्ष चातुर्मास कब से प्रारंभ हो रहा है? चातुर्मास के दौरान क्या कुछ कार्य करने से व्यक्ति को शुभ फल की प्राप्ति होती है? आपके इन्ही सब सवालों का जवाब हम आपको अपने इस विशेष लेख के माध्यम से देने का प्रयत्न करेंगे। तो चलिए शुरू करते हैं यह खास ब्लॉग और सबसे पहले जान लेते हैं चातुर्मास इस वर्ष कब से शुरू हो रहा है।
चातुर्मास चार महीना की अवधि होती है जिसमें श्रावण महीना, भाद्रपद महीना, अश्विन माह और कार्तिक महीना शामिल होते हैं। इन महीनों में जहां एक तरफ मांगलिक और शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं वहीं चातुर्मास की अवधि में यदि कोई व्यक्ति सच्चे मन से पूजा, अर्चना, तप, दान, पुण्य करें तो इससे उसे शुभ फलों की प्राप्ति होती है। बात करें वर्ष 2024 में चातुर्मास कब से प्रारंभ हो रहा है तो इस साल चातुर्मास 17 जुलाई से प्रारंभ हो जाएगा और 12 नवंबर को इसका समापन होगा।
चातुर्मास 2024 में 5 महायोग
इस वर्ष का चातुर्मास 118 दोनों का होने वाला है और चातुर्मास की शुरुआत 17 जुलाई से हो रही है। इस दिन कई शुभ योग बन रहे हैं जैसे शुक्ल योग, सौम्या योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग। मान्यता है कि इन शुभ योगों में अगर भगवान शिव और विष्णु की पूजा की जाए तो इससे व्यक्ति को कई गुना शुभ परिणामों की प्राप्ति होती है।
चातुर्मास में क्यों नहीं किए जाते हैं शुभ काम?
धार्मिक मान्यता के अनुसार आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन से भगवान विष्णु के साथ सभी देवी देवता योग निद्रा में चले जाते हैं। इस दौरान पृथ्वी का सारा कार्य भार महादेव संभालते हैं और कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर भगवान निद्रा से जाते हैं और यही वजह है कि चातुर्मास की इस अवधि में सनातन धर्म में कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किया जाता है।
चातुर्मास 2024 में नहीं लगेगा खरमास- जानें प्रभाव
वर्ष 2024 के चातुर्मास के दौरान अधिक मास या खरमास नहीं लगने वाला है जिसके चलते सभी त्योहार समय से पूर्व अर्थात पिछले वर्ष की तुलना में 11 दिनों पहले ही मनाए जाएंगे।
चातुर्मास में क्या करें?
चातुर्मास के दौरान भगवान की भक्ति करने पूजा पाठ करने, भजन कीर्तन करने का विशेष महत्व बताया गया है। चातुर्मास के दौरान व्रत, साधना, सेवा, तप आदि किया जाए तो इससे व्यक्ति को अपने जीवन में शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। साथ ही भगवान का आशीर्वाद भी ऐसे व्यक्तियों के जीवन पर हमेशा के लिए बना रहता है। चातुर्मास की अवधि साधु संतों के लिए साधन और स्वाध्याय का महीना होता है। इस दौरान धर्म, व्रत और पुण्य के काम करने वाले लोगों को विशेष फल प्राप्त होते हैं। इसके अलावा इन महीनों में अगर ध्यान और तप आदि भी किया जाए तो इससे भी इंसान को शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
चातुर्मास का यह समय साधना का समय होता है। ऐसे में इस दौरान श्री हरि की उपासना करें, आप इसके लिए विशेष अनुष्ठान, मंत्र, जप, गीता आदि का पाठ भी कर सकते हैं। चातुर्मास के दौरान गरीब और जरूरतमंद लोगों को धन, वस्त्र, छाता, चप्पल और ज़रूरी चीजों का दान करें। चातुर्मास के दौरान संयमित जीवन जीएँ, सुबह जल्दी उठें, रात को जल्दी सोएँ और समय पर भोजन करें।
चातुर्मास में क्या काम भूल से भी ना करें?
चातुर्मास के दौरान भूमि पूजन, मुंडन संस्कार, विवाह, तिलक समारोह, गृह प्रवेश, उपनयन संस्कार जैसे सभी मांगलिक कार्य वर्जित हो जाते हैं। इसके अलावा इस अवधि में किसी भी तरह का कोई नया काम नहीं शुरू किया जाना चाहिए। कहते हैं कि अगर चातुर्मास के दौरान कोई शुभ काम शुरू भी करें तो इससे व्यक्ति को शुभ परिणाम नहीं प्राप्त होते हैं।
चातुर्मास के दौरान दही, मूली, बैंगन और साग का सेवन भी वर्जित होता है। इस दौरान झूठ, छल, कपट, नशा जैसी आदतों से दूर रहें। इसके अलावा बहुत से लोग चातुर्मास के दौरान व्रत रखते हैं या विशेष साधना करते हैं। अगर आप भी ऐसा कर रहे हैं तो इस दौरान यात्रा न करें।
चातुर्मास का यह समय काफी महत्वपूर्ण भी होता है। ऐसे में इस अवधि से संबंधित कुछ विशेष नियम और उनके महत्व बताए गए हैं जैसे कि,
चातुर्मास के दौरान सात्विक भोजन का ही सेवन करना चाहिए।
इस दौरान अंडा, मछली, मांस, प्याज़, लहसुन जैसी तामसिक वस्तुओं का भोजन वर्जित माना जाता है। खान-पान के इन नियमों का पालन किया जाए तो धार्मिक दृष्टि के साथ-साथ यह सेहत के लिए भी अनुकूल रहता है।
इसके अलावा चातुर्मास के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करना भी शुभ फलदाई रहता है क्योंकि इन महीनों में तामसिक प्रवृत्तियां बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं जो व्यक्ति को गलत रास्ते पर ले जाने का प्रयत्न करती हैं।
इसके अलावा अगर आप चातुर्मास में विशेष तौर पर 10 नियमों का पालन करते हैं तो इससे आपको लाभ भी मिलेगा। चलिए जान लेते हैं क्या कुछ हैं ये नियम और उनके लाभ।
चातुर्मास के दौरान व्रत अवश्य करें।
इस दौरान भूमि पर सोएँ।
सूर्योदय से पहले उठ जाएँ।
अच्छे से स्नान करें।
जितना हो सके मौन रहें।
इन चार महीनों के दौरान दिन में केवल एक बार ही उत्तम भोजन करें। रात्रि में फलाहार कर लें।
ब्रह्मचर्य का पालन करें।
ध्यान योग और सत्संग में हिस्सा लें।
भगवान विष्णु और शिव की उपासना करें और अपने पितरों का तर्पण करें और जितना हो सके गरीब और ज़रूरतमन्द लोगों को दान करें।
अब बात करेंगे नियमों से मिलने वाले लाभ की तो,
इससे सेहत में सुधार आता है।
ऐश्वर्या की प्राप्ति होती है।
मानसिक दुख दूर होते हैं।
मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
पापों का नाश होता है।
मानसिक विकार दूर होते हैं और मानसिक दृढ़ता प्राप्त होती है।
पितरों का आशीर्वाद मिलता है।
महादेव और श्री हरि की कृपा प्राप्त होती है।
सुख समृद्धि बढ़ती है।
धन धान्य में वृद्धि होती है।
भाई बांधों का सुख प्राप्त होता है।
आत्मविश्वास, त्याग समर्पण की भावना विकसित होती है।
चातुर्मास में कर लिए ये काम तो बदल जाएगा भाग्य
चातुर्मास के दौरान कुछ विशेष कार्य करने से व्यक्ति को जीवन में तमाम तरह के शुभ परिणाम भी प्राप्त हो सकते हैं। जैसे,
अगर आप अपने मान सम्मान में वृद्धि करवाना चाहते हैं तो चातुर्मास के दौरान ब्रह्म मुहूर्त में उठें, जमीन पर सोएँ। ऐसा करने से समाज में आपका मान सम्मान बढ़ेगा और बल और बुद्धि का आशीर्वाद मिलेगा।
नौकरी में तरक्की प्राप्त करना चाहते हैं तो आप चातुर्मास के दौरान चप्पल, छाता, कपड़ों का दान करें। ऐसा करने से महादेव की प्रसन्नता हासिल होती है और आपके सभी कार्य पूरे होने लगते हैं।
शत्रुओं से मुक्ति प्राप्त करनी है तो चातुर्मास के दौरान धार्मिक ग्रंथो या फिर मंत्रों का जाप करें। ऐसा करने से आपके जीवन की परेशानियां भी दूर होने लगेगी और आपको शत्रुओं से भी छुटकारा मिलेगा।
अगर आपके जीवन में कर्ज का बोझ बढ़ गया है तो चातुर्मास के दौरान अन्न और गोदान अवश्य करें।
जीवन में सकारात्मकता और सुख शांति के लिए चातुर्मास के दौरान श्रीमद् भागवत का पाठ अवश्य करें।
वर्ष 2024 का चातुर्मास पूरे 118 दिनों तक चलने वाला है। हालांकि पिछले साल के चातुर्मास की बात करें तो यह 148 दिनों का था। इसमें एक अधिक मास या खरमास था। हालांकि वर्ष 2024 में अधिक मास या खरमास नहीं लगने वाला है और यही वजह है कि सभी व्रत और त्योहार 11 दिन पहले ही मनाए जाएंगे।
दरअसल जब वैदिक आधार पर मास की गणना की जाती है तो यह चंद्रमा के आधार पर होती है। इसके आधार पर साल में 354 दिन होते हैं जबकि सूर्य के अनुसार साल में 365 दिन होते हैं। सौर वर्ष और चंद्र वर्ष में 11 दोनों का अंतर होता है। किसी मास में अधिक होने पर इन दिनों की गणना उसमें कर दी जाती है।
बात करें वर्ष 2024 में चातुर्मास के दौरान पड़ने वाले महत्वपूर्ण व्रत और त्योहारों की तो इसकी सूची हम आपको नीचे प्रदान कर रहे हैं।
कृष्ण जन्माष्टमी अगस्त के महीने में मनाई जाएगी, हरतालिका तीज 6 सितंबर को है, जलझूलनी एकादशी 14 सितंबर को है, अनंत चतुर्दशी 17 सितंबर को है, पितृपक्ष की शुरुआत 18 सितंबर से हो जाएगी और शारदीय नवरात्रि 3 अक्टूबर से शुरू हो जाएंगे, दशहरा 12 अक्टूबर को मनाया जाएगा और दीपावली 1 नवंबर को होगी।
4 अगस्त 2024 दिन रविवार को श्रावण अमावस्या और हरियाली अमावस्या
7 अगस्त 2024 दिन बुधवार को हरियाली तीज
9 अगस्त 2024 दिन शुक्रवार को नाग पंचमी
19 अगस्त 2024 दिन सोमवार को रक्षा बंधन, श्रावण पूर्णिमा व्रत
22 अगस्त 2024 दिन गुरुवार को संकष्टी चतुर्थी, कजरी तीज, बहुला चौथ
26 अगस्त 2024 दिन सोमवार को जन्माष्टमी
27 अगस्त 2024 दिन मंगलवार को दही हांडी
6 सितंबर 2024 दिन शुक्रवार को हरतालिका तीज और वराह जयंती
7 सितंबर 2024 दिन शनिवार को गणेश चतुर्थी और गणेश उत्सव शुरू
8 सितंबर 2024 दिन रविवार को ऋषि पंचमी
16 सितंबर 2024 दिन सोमवार को कन्या संक्रांति और विश्वकर्मा जयंती
17 सितंबर 2024 दिन मंगलवार को अनंत चतुर्दशी और गणेश विसर्जन
18 सितंबर 2024 दिन बुधवार को भाद्रपद पूर्णिमा व्रत, पितृ पक्ष शुरू और चंद्र ग्रहण
25 सितंबर 2024 दिन बुधवार को जीवित्पुत्रिका व्रत
3 अक्टूबर 2024 दिन गुरुवार को शरद नवरात्रि और घटस्थापना
11 अक्टूबर 2024 दिन शुक्रवार को दुर्गा महा नवमी पूजा और दुर्गा महा अष्टमी पूजा
12 अक्टूबर 2024 दिन शनिवार को दशहरा और शरद नवरात्रि पारण
13 अक्टूबर 2024 दिन रविवार को दुर्गा विसर्जन
20 अक्टूबर 2024 दिन रविवार को संकष्टी चतुर्थी और करवा चौथ
29 अक्टूबर 2024 दिन मंगलवार को धनतेरस और प्रदोष व्रत
1 नवंबर 2024 दिन शुक्रवार को दिवाली और कार्तिक अमावस्या
2 नवंबर 2024 दिन शनिवार को गोवर्धन पूजा
3 नवंबर 2024 दिन रविवार को भाई दूज
7 नवंबर 2024 दिन गुरुवार को छठ पूजा
चातुर्मास उपाय
चातुर्मास की यह अवधि ध्यान साधना पूजा तप के साथ-साथ अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लेकर आने के लिए भी बेहद उपयुक्त बताई गई है। अगर आप भी अपने जीवन में कुछ सकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं तो नीचे हम आपको कुछ बेहद ही सरल ज्योतिषीय उपायों की जानकारी दे रहे हैं।
चातुर्मास के दौरान अगर आप दूध, दही, घी, शहद, मिश्री और पंचामृत से भगवान विष्णु का अभिषेक करते हैं तो आपको अक्षय सुख की प्राप्ति होती है।
चातुर्मास के दौरान चांदी के बर्तन में अगर आप हल्दी भरकर दान करेंगे तो इससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं, आपके जीवन में धन-धान्य की वृद्धि होती है, साथ ही आपकी तिजोरी हमेशा भरी रहती है।
चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु के समक्ष दीप और गुग्गल जलाने से व्यक्ति के जीवन में धन की कभी भी कोई कमी नहीं रहती है।
इसके अलावा चातुर्मास में अगर आप अन्न, वस्त्र, कपूर, छाता, चप्पल का दान करते हैं तो भगवान भोलेनाथ की कृपा से आपको नौकरी, व्यवसाय और करियर में उन्नति मिलती है।
चातुर्मास में अन्न और गाय का दान करने से कर्ज से मुक्ति मिलती है, आय के नए स्रोत मिलते हैं और धन लाभ के योग बनने लगते हैं।
चातुर्मास के दौरान अगर आप अपने ईष्ट देवता की पूजा करते हैं, उनसे संबंधित मंत्रों का जाप करते हैं तो आपके जीवन से रोग, दोष और ग्रह दोष दूर होते हैं और आपकी मनोकामनाएं पूरी होती है।
चातुर्मास के दौरान पीपल के पेड़ की सेवा अवश्य करें। ऐसा करने से और प्रतिदिन पीपल पर जल चढ़ाने और दीपक जलाने से कभी ना खत्म होने वाले पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख शांति बनी रहती है।
इसके अलावा अगर आप मनोकामना पूर्ति चाहते हैं तो चातुर्मास के दौरान मां लक्ष्मी, मां पार्वती, भगवान गणेश, अपने पितृ देवों की पूजा अवश्य करें। ऐसा करने से आपके घर में खुशहाली आएगी और संतान सुख भी बनता है।
हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारा यह ब्लॉग ज़रूर पसंद आया होगा। अगर ऐसा है तो आप इसे अपने अन्य शुभचिंतकों के साथ ज़रूर साझा करें। धन्यवाद!
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1: वर्ष 2024 में चातुर्मास कब से है?
उत्तर: इस साल चातुर्मास 17 जुलाई से प्रारंभ हो जाएगा और 12 नवंबर को इसका समापन होगा।
प्रश्न 2: चातुर्मास का क्या अर्थ होता है?
उत्तर: चातुर्मास 4 महीनों की अवधि को कहा जाता है जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और सभी शुभ और मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है।
प्रश्न 3: चातुर्मास के दौरान क्या करें?
उत्तर: चातुर्मास के दौरान भगवान की भक्ति करने पूजा पाठ करने, भजन कीर्तन करने का विशेष महत्व बताया गया है।
प्रश्न 4: चातुर्मास के दौरान किस देवता की पूजा की जाती है?
उत्तर; भगवान विष्णु, महादेव, माँ लक्ष्मी, ईष्ट देव
सूर्य पर पड़ेगी शनि की टेढ़ी नज़र, चार राशियों का होगा बुरा हाल, बन रहा है षडाष्टक योग
16 जुलाई को सूर्य देव कर्क राशि में प्रवेश करने वाले हैं। इस राशि में सूर्य 16 अगस्त तक रहने वाले हैं और इसके बाद वे सिंह राशि में गोचर कर जाएंगे। वहीं दूसरी ओर, इस समय शनि देव कुंभ राशि में बैठे हैं। इस प्रकार सूर्य और शनि एक-दूसरे से छठे और आठवे भाव में उपस्थित रहेंगे। ज्योतिष की दृष्टि से देखें तो सूर्य और शनि के इस स्थिति में होने से षडाष्टक राजयोग बन रहा है।
इस राजयोग से कुछ राशियों के जातकों को नुकसान होने की आशंका है। इन लोगों को अपने निजी जीवन के साथ-साथ कार्यक्षेत्र में भी अशुभ परिणाम देखने को मिल सकते हैं। तो चलिए जानते हैं कि षडाष्टक राजयोग किन राशियों को प्रतिकूल परिणाम देने वाला है।
आपके लग्न भाव में सूर्य का यह गोचर होने जा रहा है। इस समय आपके आत्मविश्वास में कमी आ सकती है। आप सही निर्णय नहीं ले पाएंगे। वहीं नौकरीपेशा जातकों को भी उच्च अधिकारियों के साथ कोई समस्या हो सकती है। आपकी अपने सहकर्मियों के साथ भी अनबन होने की आशंका है। इस वजह से आपके मन में नौकरी बदलने का विचार आ सकता है।
पिता के साथ भी आपके संबंध खराब हो सकते हैं। वहीं आपका स्वास्थ्य भी इस समय ज्यादा अच्छा नहीं रहने वाला है। काम का बोझ बढ़ने की वजह से आपको मानसिक तनाव हो सकता है।
बृहत् कुंडली में छिपा है, आपके जीवन का सारा राज, जानें ग्रहों की चाल का पूरा लेखा-जोखा
कन्या राशि
कन्या राशि के ग्यारहवें भाव में सूर्य का गोचर होने जा रहा है। आपके निजी जीवन में कुछ परेशानियां खड़ी हो सकती हैं। इसके साथ ही आपके करियर के लिए भी यह समय ज्यादा अनुकूल नहीं है। इस दौरान आप चिंता में आ सकते हैं। आपको सावधानी से काम करने की सलाह दी जाती है। ऑफिस के लोगों से गॉसिप आदि न करें। आवेग में आकर कुछ न कहें।
व्यापारियों के लिए नुकसान के योग बन रहे हैं। इस वजह से आप थोड़ा तनाव में भी आ सकते हैं। निवेश करने के लिए यह समय ठीक नहीं है।
अब घर बैठे विशेषज्ञ पुरोहित से कराएं इच्छानुसार ऑनलाइन पूजा और पाएं उत्तम परिणाम!
धनु राशि
धनु राशि के आठवें भाव में सूर्य का गोचर होगा। यह समय आपके प्रेम जीवन के लिए थोड़ा मुश्किल साबित हो सकता है। आपके खर्चों में वृद्धि होगी जिससे आप पैसों की बचत करने में असक्षम हो सकते हैं। बेहतर होगा कि आप इस समय पैसों का कोई लेन-देन न करें वरना आपका पैसा फंस सकता है।
नौकरी बदलने के बारे में सोच रहे हैं, तो अभी आपको अपने इस फैसले को टाल देना चाहिए। आप अपने दोस्तों को भी अपना कोई रहस्य न बताएं।
आपके छठे भाव में सूर्य का गोचर होगा। इस समय आपके सामने कुछ अड़चनें आ सकती हैं। भाई-बहनों के साथ गलतफहमी की वजह से अनबन होने की आशंका है। आपको इस दौरान किसी भी तरह के वाद-विवाद से दूर रहने की सलाह दी जाती है।
परिवार में किसी सदस्य की सेहत बिगड़ने से आपको चिंता हो सकती है। आपको उनके लिए भागदौड़ भी करनी पड़ सकती है। यात्रा के दौरान अपने सामान का ध्यान रखें वरना वह चोरी हो सकता है।