धनतेरस 2026: धनतेरस के पर्व को धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है जो पांच दिनों तक चलने वाले दिवाली पर्व की शुरुआत होती है। यह त्योहार हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है जिसे धन-समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य का प्रतीक माना जाता है। इस दिन धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है। साथ ही, अकाल मृत्यु से सुरक्षा के लिए यम दीपक जलाया जाता है। एस्ट्रोसेज एआई के के इस विशेष ब्लॉग में आपको “धनतेरस 2026” से जुड़ी समस्त जानकारी प्राप्त होगी जैसे तिथि एवं मुहूर्त।

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धनतेरस 2026: तिथि एवं मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष धनतेरस 06 नवंबर 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। बता दें कि शाम के प्रदोष काल में वृषभ लग्न और त्रयोदशी तिथि का संयोग धन और खुशहाली के लिए शुभ माना जाता है।
धनतेरस तिथि: 6 नवंबर, 2026 (शुक्रवार)
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 6 नवंबर 2026 की सुबह 10 बजकर 32 मिनट से
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 7 नवंबर 2026 की सुबह 10 बजकर 49 मिनट तक
धनतेरस पूजा मुहूर्त: शाम 06 बजकर 03 मिनट से शाम 07 बजकर 59 मिनट तक
अवधि: 1 घंटा 55 मिनट
प्रदोष काल: शाम 05 बजकर 32 मिनट से शाम 08 बजकर 09 मिनट तक
वृषभ काल: शाम 06 बजकर 03 मिनट से शाम 07 बजकर 59 मिनट तक
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धनतेरस 2026: धार्मिक महत्व
धनतेरस के पर्व को का हिंदू धर्म में विशेष स्थान दिया गया है। इस त्योहार का संबंध धन-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र से होता है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए यह त्योहार धन-वैभव के साथ-साथ जीवन में अच्छे स्वास्थ्य के महत्व को भी दर्शाता है।
धनतेरस के त्योहार का संबंध धन की देवी मां लक्ष्मी तथा देवताओं के कोषाध्यक्ष भगवान कुबेर से भी होता है। इस दिन सोना, चांदी और बर्तन आदि खरीदने की परंपरा है। धंनतेरस पर साल भर आर्थिक स्थिरता और सौभाग्य की कामना की जाती है। धनतेरस से दिवाली पर की शुरुआत होती है और भगवान धन्वंतरि और माँ लक्ष्मी से सुख, समृद्धि और जीवन में स्वास्थ्य की प्रार्थना की जाती है।
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धनतेरस 2026: पूजा विधि और परंपराएं
- संध्या की पूजा से पहले घर और कार्यक्षेत्र की साफ-सफाई करें। ऐसा माना जाता है जहाँ सफाई होती है वहां देवी लक्ष्मी का वास रहता है।
- धनतेरस पर व्यक्ति सोना, चांदी, बर्तन या अपने व्यापार से जुड़ी वस्तुओं को खरीदना शुभ माना जाता है। इसे समृद्धि और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।
- संध्या के समय शुभ मुहूर्त में भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा करें, फिर उन्हें फूल, धूप, दीपक और मिठाई का भोग लगाएं।
- घर के बाहर, मुख्य द्वार के पास दक्षिण दिशा की तरफ मुख करके सरसों के तेल का मिट्टी का दीपक जलाएं। यह दीपक यमराज को समर्पित होता है और इससे परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु से सुरक्षा मिलती है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
धनतेरस 06 नवंबर 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा।
धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 06 बजकर 03 मिनट से शाम 07 बजकर 59 मिनट तक रहेगा।
धनतेरस का त्योहार भगवान धन्वंतरि, धन की देवी मां लक्ष्मी और देवताओं के कोषाध्यक्ष भगवान कुबेर की पूजा की जाती है।