दर्श अमावस्या 2026: हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार आध्यात्मिक विकास और पितरों का तर्पण आदि करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण अमावस्या तिथियों में से एक दर्श अमावस्या भी है। अमावस्या की रात को चंद्रमा अदृश्य रहता है। ऐसे में यह समय आत्म-चिंतन और ध्यान करने के लिए बहुत शक्तिशाली एवं उपयुक्त माना जाता है।

वैदिक परंपरा के अनुसार दर्श अमावस्या पर चंद्र देव की पूजा होती है। इस दिन पितरों का तर्पण एवं श्राद्ध अनुष्ठान करने का भी विधान है। मान्यता है कि दर्श अमावस्या पर पितरों का तर्पण या श्राद्ध करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है एवं पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है। इस दिन से नए चंद्र चक्र की शुरुआत भी होती है।
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दर्श अमावस्या 2026 कब है
इस बार 18 मार्च, 2026 को बुधवार के दिन चैत्र अमावस्या पर दर्श अमावस्या है। अमावस्या तिथि 18 मार्च, 2026 को सुबह 08 बजकर 28 मिनट पर शुरू होगी और 19 मार्च, 2026 को सुबह 06 बजकर 55 मिनट पर खत्म होगी। इस दिन शुभ योग बन रहा है।
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दर्श अमावस्या 2026 का महत्व
हिंदू परंपरा में अत्यंत खास माना गया है। हर महीने पड़ने वाली यह अमावस्या आत्मचिंतन, मानसिक शांति और पितरों की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ समय होती है। इस दिन चंद्रमा का प्रभाव न्यूनतम होता है, जिससे साधना, जप-तप और दान-पुण्य का फल कई गुना बढ़ जाता है।
दर्श अमावस्या पितृ तर्पण के लिए शुभ मानी जाती है, क्योंकि माना जाता है कि इस दिन किए गए तर्पण, श्राद्ध और दीपदान से पितरों की आत्मा संतुष्ट होती है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है। इसके अलावा यह दिन नकारात्मक ऊर्जा को शांत करने, नए संकल्प लेने और जीवन में सकारात्मकता बढ़ाने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। कुल मिलाकर, दर्श अमावस्या मन और जीवन दोनों को शुद्ध करने का एक आध्यात्मिक अवसर है।
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दर्श अमावस्या 2026 की व्रत कथा
कुछ लोग अमावस्या तिथि पर व्रत भी रखते हैं। दर्श अमावस्या की व्रत कथा के बारे में बात करें, तो दर्श अमावस्या व्रत कथा समुद्र मंथन की दिव्य घटना से जुड़ी हुई है। पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार ऋषि दुर्वासा ने देवताओं के राजा इंद्र को श्राप दे दिया था। इस श्राप के कारण राजा इंद्र की सारी शक्ति और संपन्नता खत्म हो गई थी।
इसका फायदा उठाकर असुरों ने स्वर्ग पर आक्रमण किया और देवताओं को परास्त कर स्वर्ग पर कब्ज़ा कर लिया। देवताओं को फिर से स्वर्ग दिलवाने के लिए भगवान विष्णु ने असुरों के साथ मिलकर समुद्र मंथन करने का सुझाव दिया। इससे समुद्र से अमृत निकलने पर उसका पान कर के देवता और असुर दोनों ही अमरता को प्राप्त करना चाहते थे।
समुद्र मंथन के दौरान कई तरह की दिव्य वस्तुएं प्रकट हुईं और आखिरी में भगवान धनवंतरि अृमत कलश के साथ प्रकट हुए। असुरों से अमृत को बचाने के लिए राजा इंद्र के पुत्र जयंत अृमत कलश लेकर चले गए। उनका ऐसा करना दिव्य सुरक्षा और मुश्किल समय में ज्ञान एवं पवित्रता की जीत का प्रतीक माना गया। यह व्रत कथा भक्ति, अनुशासन और दिव्य हस्तक्षेप की शक्ति पर प्रकाश डालती है। ये ऐसे गुण हैं जिन्हें भक्त दर्श अमावस्या पर प्राप्त करना चाहते हैं।
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दर्श अमावस्या 2026 पर क्या करते हैं
चंद्र देव और पितरों से संबंधित अनुष्ठानों के लिए दर्श अमावस्या सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक है। इस दिन अनुष्ठान करने से मन शुद्ध हो जाता है, अड़चनें दूर होती हैं और पितरों के साथ आध्यात्मिक संबंध विकसित होता है।
चंद्र देव की पूजा करें: भावनात्मक संतुलन, मानसिक स्पष्टता और संपन्नता के लिए चंद्र देव की पूजा की जाती है। इस दिन चंद्र देव को सफेद रंग के फूल, चावल, चीनी और जल अर्पित करें। चंद्रमा के मंत्रों का जाप करने से मानसिक शांति मिलती है।
पितरों का तर्पण: विष्णु धर्म शास्त्र के अनुसार पितरों का तर्पण करने, तिल का दान और पिंड दान करने के लिए दर्श अमावस्या 2026 उपयुक्त तिथि है। इससे पितृ दोष कम होता है और परिवार में खुशियां आती हैं।
दान करना: अमावस्या तिथि पर गरीब एवं जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्रों, अनाज या तिल का दान करना बहुत शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि अमावस्या पर दान करने से सभी पाप कर्म नष्ट हो जाते हैं।
दोष निवारण पूजा: कालसर्प दोष पूजा, पितृ दोष उपाय और त्रिपिंडी श्राद्ध के लिए दर्श अमावस्या का दिन उपयुक्त रहता है। इन अनुष्ठानों को करने से कार्यों में आ रही देरी और अड़चन एवं जीवन की चुनौतियां दूर होती हैं।
मां काली की पूजा: कुछ भक्त नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा पाने और शक्ति एवं सपन्नता का आशीर्वाद पाने के लिए दर्श अमावस्या पर काली साधना करते हैं।
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दर्श अमावस्या पर व्रत रखने की विधि
शरीर को शुद्ध करने, मन को स्थिर करने और चंद्र देव एवं पूर्वजों का आर्शीवाद पाने के लिए दर्श अमावस्या 2026 पर व्रत रखा जाता है। अमावस्या तिथि पर सूर्योदय के साथ व्रत शुरू होता है और चंद्रमा के दिखने तक या शांत के अनुष्ठान पूर्ण होने तक व्रत चलता है।
- सबसे पहले अमावस्या तिथि पर सुबह जल्दी उठें और फिर स्नान आदि कर के साफ वस्त्र पहन लें।
- अपने मन और विचारों को शुद्ध रखें एवं नकारात्मक बातें न करें।
- व्रत शुरू करने से पहले अपने घर के पूजन स्थल में आकर व्रत का संकल्प लें।
- फिर भगवान शिव या विष्णु जी की पूजा करें और फिर चंद्र देव की उपासना करें।
- उन्हें सफेद रंग की चीज़ें जैसे कि चावल, दूध या पुष्प आदि अर्पित करें।
- अब अमावस्या व्रत कथा का पाठ करें और शांति एवं भावनात्मक संतुलन के लिए चंद्रमा के मंत्रों का जाप करें।
- इस दिन अनाज, नमक या भारी भोजन नहीं करना चाहिए।
- कुछ लोग इस दिन निर्जल व्रत भी रखते हैं जबकि कुछ फल या दूध लेते हैं।
- शाम को पूजा करने और चंद्रमा दर्शन के बाद ही व्रत खोला जाता है। श्रद्धालु व्रत खोलने से नहले चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं।
दर्श अमावस्या 2026 पर क्या दान करें
आप इस दर्श अमावस्या पर निम्न चीज़ों का दान कर सकते हैं:
- जरूरतमंद लोगों को कपड़े, खासकर गर्म कपड़े देने से पितृदोष कम होता है।
- दर्श अमावस्या अक्सर सर्दियों में आती है, इसलिए कंबल दान विशेष पुण्यदायक माना जाता है।
- पितृ शांति, नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति और स्वास्थ्य लाभ के लिए तिलदान श्रेष्ठ माना जाता है।
- गरीबों को भोजन कराना, अन्न दान करना या गौ-सेवा करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।
- जरूरतमंदों या ब्राह्मणों को फल-मिठाई दान करने से घर में शुभता आती है।
- पापों के क्षय और ग्रहों की शांति के लिए धातुओं का दान भी उत्तम होता है।
- गुड़, घी, और भोजन की मिठास से संबंधित वस्तुएं दान करने से सुख-समृद्धि बढ़ती है।
- पितरों और देवताओं को शांत करने के लिए दीपदान बहुत शुभ माना जाता है।
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दर्श अमावस्या 2026 पर पितरों का तर्पण कैसे करें
पितरों का तर्पण एवं श्राद्ध करने के लिए दर्श अमावस्या का दिन अत्यंत उपयुक्त माना जाता है। इस दिन पितरों का तर्पण करने की निम्न विधि है:
- सुबह जल्दी उठकर पवित्र जल से स्नान करें और पवित्र स्थान (घर के मंदिर या आंगन) में शांत वातावरण बनाएं। मन में पितरों के प्रति श्रद्धा रखें।
- यदि नदी, सरोवर या कुएं का जल उपलब्ध हो तो वहाँ तर्पण करना श्रेष्ठ माना जाता है। घर में भी तर्पण किया जा सकता है।
- अगर परिवार में परंपरा हो तो आटे या चावल के पिंडे बनाकर कौओं और गाय को खिलाना शुभ माना जाता है।
- दर्श अमावस्या पर दक्षिण दिशा में एक दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह पितरों को प्रकाश पहुंचाने का प्रतीक है।
- घर में पका सादा भोजन, खीर, रोटी, सब्ज़ी, एक थाली में निकालकर पितरों को समर्पित करें और बाद में गाय या गरीबों को दे दें।
दर्श अमावस्या 2026 के लिए ज्योतिषीय उपाय
दर्श अमावस्या पर आप निम्न ज्योतिषीय उपाय कर सकते हैं:
- एक लोटे में जल लें और उसमें तिल मिलाकर दक्षिण दिशा की ओर अर्पित करें। इससे घर में रुके काम तेज़ी से पूरे होने लगते हैं।
- दर्श अमावस्या 2026 पर दक्षिण दिशा में तेल का दीप जलाना पितृदोष को शांत करता है और पारिवारिक परेशानियों को दूर करता है।
- गुड़ और चावल को मिलाकर जरूरतमंदों को देना अचानक आ रही आर्थिक बाधाओं को शांत करता है।
- दर्श अमावस्या की सुबह हल्दी के पानी का छिड़काव करें। इससे घर की नकारात्मकता दूर होती है।
- कौए पितरों के प्रतीक माने जाते हैं। अमावस्या पर उन्हें घी लगी रोटी खिलाने से पितरों की आत्मा प्रसन्न होती है और घर-परिवार पर से संकट दूर होने लगते हैं।
- दर्श अमावस्या की रात कपूर का एक छोटा टुकड़ा तकिए के नीचे रखने से नींद में आने वाली डर, बुरे सपने और मानसिक बेचैनी दूर होती है। यह टोटका मन को शांत और सकारातमक बनाता है।
- अमावस्या तिथि पर कच्चे दूध से तुलसी को अर्घ्य देने से घर में शुभता, स्वास्थ और समृद्धि बढ़ती है। यह ग्रहों की शांति के लिए भी बेहद प्रभावी माना गया है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस दिन पितरों का तर्पण किया जा सकता है।
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