चैत्र पूर्णिमा व्रत 2026: सनातन धर्म में चैत्र मास को वर्ष का अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक दृष्टि से जाग्रत करने वाला महीना माना जाता है। यह वही समय होता है जब प्रकृति भी नव ऊर्जा के साथ खिल उठती है और वातावरण में सकारात्मकता का संचार होने लगता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह महीना पूर्ण रूप से आदि शक्ति मां दुर्गा को समर्पित होता है। इस दौरान भक्तजन प्रतिदिन जगत जननी मां दुर्गा की आराधना करते हैं और विशेष रूप से चैत्र नवरात्र के नौ दिनों में विधि-विधान से व्रत एवं पूजन करते हैं।

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माना जाता है कि सच्ची श्रद्धा और भक्ति से की गई आराधना साधक को अमोघ, अक्षय और दिव्य फल प्रदान करती है। चैत्र मास केवल नवरात्र तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आने वाली भूतड़ी अमावस्या और चैत्र पूर्णिमा का भी विशेष महत्व है। इन पावन तिथियों पर गंगा स्नान, दान-पुण्य और जप-तप करने से व्यक्ति के पाप क्षीण होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
इसी चैत्र पूर्णिमा के शुभ अवसर पर पवन पुत्र हनुमान जयंती भी मनाई जाती है, जो भक्तों के लिए अत्यंत उत्साह और भक्ति का पर्व होता है। इस प्रकार चैत्र मास आध्यात्मिक उन्नति, आत्मशुद्धि और ईश्वरीय कृपा प्राप्त करने का स्वर्णिम अवसर माना जाता है। आइए जानते हैं, इस साल कब रखा जाएगा चैत्र पूर्णिमा का व्रत।
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चैत्र पूर्णिमा व्रत 2026: तिथि व मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल चैत्र पूर्णिमा का व्रत 02 अप्रैल, 2026 गुरुवार के दिन रखा जाएगा।
पूर्णिमा आरम्भ: अप्रैल 1, 2026 की सुबह 07 बजकर 08 मिनट से
पूर्णिमा समाप्त: अप्रैल 2, 2026 की सुबह 07 बजकर 44 मिनट तक
चैत्र पूर्णिमा व्रत 2026 का महत्व
चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है। यह दिन आध्यात्मिक साधना, स्नान-दान और व्रत के लिए विशेष फलदायी होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों, विशेषकर गंगा में स्नान करने से पापों का क्षय होता है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमपूर्वक चैत्र पूर्णिमा का व्रत रखता है, उसे मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आत्मबल की प्राप्ति होती है।
चैत्र पूर्णिमा का संबंध दान-पुण्य और तपस्या से भी जुड़ा है। इस दिन जरूरतमंदों को अन्न वस्त्र और जल का दान करना अत्यंत शुभ माना गया है। साथ ही जप-तप, भगवान विष्णु और चंद्रदेव की पूजा तथा कथा श्रवण करने से विशेष पुण्य फल मिलता है। इसी दिन कई स्थानों पर हनुमान जयंती भी श्रद्धा से मनाई जाती है, जिससे इस तिथि का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। कुल मिलाकर, चैत्र पूर्णिमा व्रत आत्मशुद्धि, सौभाग्य वृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का उत्तम अवसर माना जाता है।
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चैत्र पूर्णिमा व्रत 2026 की पूजा विधि
- सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी या घर में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्नान के बाद स्वच्छ या हल्के रंग के वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
- घर के मंदिर या साफ स्थान पर चौकी बिछाकर भगवान विष्णु, लक्ष्मी जी तथा चंद्रदेव का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें। कुछ स्थानों पर इस दिन हनुमान जयंती भी मनाई जाती है, इसलिए हनुमान जी की पूजा भी की जाती है।
- भगवान को रोली, अक्षत, पीले या सफेद फूल, धूप, दीप और नैवेद्य (खीर, फल या मिष्ठान) अर्पित करें। चंद्रदेव को कच्चा दूध, जल और शक्कर अर्पित करना शुभ माना जाता है।
- विष्णु सहस्रनाम, सत्यनारायण कथा या पूर्णिमा व्रत कथा का पाठ करें। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 108 बार जप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
- दिनभर श्रद्धा अनुसार व्रत रखें। सायंकाल चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य दें और व्रत खोलें। इस दिन अन्न, जल, वस्त्र या धन का दान करना बहुत शुभ माना जाता है।
- पूजा के अंत में दीप जलाकर आरती करें और परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य एवं समृद्धि की प्रार्थना करें।
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चैत्र पूर्णिमा व्रत 2026 पर क्या करें क्या न करें
क्या करें
- ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। संभव हो तो गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
- दिनभर श्रद्धा अनुसार व्रत रखें और भगवान विष्णु का ध्यान करें।
- भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्रदेव की विधि-विधान से पूजा करें। कुछ स्थानों पर इस दिन हनुमान जयंती भी मनाई जाती है, इसलिए हनुमान जी की पूजा भी की जाती है।
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें तथा सत्यनारायण कथा या पूर्णिमा व्रत कथा सुनें।
- अन्न, वस्त्र, जल, फल या धन का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- शाम को चंद्र दर्शन कर दूध मिश्रित जल से अर्घ्य दें।
- पूरे दिन संयम, शांति और सेवा भाव बनाए रखें।
क्या न करें
- तामसिक भोजन (मांस, मदिरा, लहसुन-प्याज) का सेवन न करें।
- क्रोध, विवाद और अपशब्दों से दूर रहें।
- किसी का अपमान या छल-कपट न करें।
- पूजा के समय मन में नकारात्मक विचार न लाएं।
- व्रत के नियमों का अनादर न करें।
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चैत्र पूर्णिमा व्रत 2026 के दिन करें अचूक उपाय
गंगा स्नान या पवित्र स्नान
यदि संभव हो तो पवित्र नदी में स्नान करें। अन्यथा घर में स्नान के जल में गंगाजल मिलाएं। स्नान के बाद सूर्य अर्घ्य दें। इससे नकारात्मकता दूर होती है और पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
चंद्रमा को अर्घ्य
शाम को चंद्रमा के दर्शन कर कच्चे दूध, जल और शक्कर मिलाकर अर्घ्य दें। इससे मानसिक शांति और चंद्र दोष में कमी आती है।
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108 मंत्र का जाप
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 108 बार जप करें। यह मंत्र भगवान विष्णु की कृपा पाने और जीवन की बाधाएं दूर करने में सहायक माना जाता है।
अन्न और जल का दान
इस दिन अन्न, चावल, खीर, वस्त्र या जल का दान करना अत्यंत शुभ माना गया है। इससे घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है।
पीपल वृक्ष की पूजा
पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं और भगवान विष्णु का स्मरण करें। यह उपाय सुख-समृद्धि और पितृ दोष शांति के लिए लाभकारी माना जाता है।
विशेष हनुमान पूजन
कई स्थानों पर चैत्र पूर्णिमा के दिन हनुमान जयंती भी मनाई जाती है। इस अवसर पर हनुमान चालीसा का 7 या 11 बार पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
घर की शांति के लिए
घर में शाम को घी का दीपक जलाएं और पूरे परिवार के साथ आरती करें। इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र पूर्णिमा व्रत 02 अप्रैल 2026, गुरुवार को रखा जाएगा।
यह व्रत आत्मशुद्धि, मानसिक शांति और पुण्य प्राप्ति के लिए रखा जाता है।
इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्रदेव की पूजा की जाती है। कई स्थानों पर इसी दिन हनुमान जयंती भी मनाई जाती है, इसलिए हनुमान जी की आराधना भी की जाती है।