चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन की पूजा विधि!

चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन: मां दुर्गा के इस रूप की होगी पूजा!

चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन: चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा होती है। इस दिन को महासप्तमी भी कहा जाता है। मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की उपासना को समर्पित होता है। मां कालरात्रि को संहारक शक्ति और भय का नाश करने वाली देवी माना गया है।

ऐसा माना जाता है कि मां कालरात्रि की उपासना करने से साधक के जीवन से हर प्रकार के भय, संकट और शत्रु का अंत होता है। ख़ास बात यह है कि महासप्तमी के दिन मां कालरात्रि की पूजा करने से ग्रह दोष भी शांत होते हैं और शनि देव की कुप्रभावित दशा से राहत मिलती है।

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चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन: किसकी होती है पूजा

नवरात्रि 2026 की सप्‍तमी तिथि पर मां कालरात्रि की पूजा का विधान है। देवी कालरात्रि को “कालों की काल” माना गया है। जो भक्त देवी शक्ति का सानिध्य पाना चाहता है, उन्हें देवी की पूजा में उनकी प्रिय वस्तु का भोग लगाना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से माता प्रसन्न होकर आपके जीवन से हर संकट दूर कर देंगी।

एस्‍ट्रोसेज एआई के इस विशेष ब्‍लॉग में चैत्र नवरात्रि 2026 के सातवें दिन की तिथि के बारे में बताया गया है। साथ ही पूजन विधि, महत्‍व आदि की जानकारी भी दी गई है। तो चलिए आगे बढ़ते हैं और जानते हैं चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन के बारे में।

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चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन: ति‍थि

इस बार 25 मार्च, 2026 को सातवां नवरात्र पड़ रहा है। सप्‍तमी ति‍थि मृगशिरा नक्षत्र में सौभाग्‍य योग में पड़ रही है। सप्‍तमी तिथि पर मां कालरात्रि की पूजा करने का विधान है। सप्‍तमी तिथि 24 मार्च, 2026 को शाम 04 बजकर 10 मिनट पर शुरू होगी और 25 मार्च, 2026 को दोपहर 01 बजकर 52 मिनट पर खत्‍म होगी। उदया तिथि के अनुसार 25 मार्च, 2026 को सप्‍तमी मानी जाएगी।

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चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन: पूजन विधि

आप चैत्र नवरात्रि 2026 के सातवें दिन निम्‍न विधि से मां कालरात्रि का पूजन किया जाता है:

  • सप्तमी तिथि पर सुबह स्नान आदि करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • अब आप घर के पूजा स्थल या किसी पवित्र स्थल पर मां कालरात्रि की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • पूजा शुरू करने से पहले पूजा स्थल को गंगाजल या शुद्ध जल से पवित्र करें।
  • अब मां कालरात्रि का स्मरण कर दीप प्रज्वलित करें। फिर धूप, फूल, अक्षत, रोली, चंदन और सुगंधित पुष्प अर्पित करें।
  • मां को लाल या गहरे नीले फूल चढ़ाना विशेष शुभ माना जाता है।
  • गुड़, हल्दी, तेल और काले तिल भी अर्पित करना चाहिए, क्योंकि ये मां कालरात्रि और शनि दोनों को प्रसन्न करते हैं।
  • पूजन के दौरान मां कालरात्रि का ध्यान करते हुए मंत्र का जाप करें “ॐ देवी कालरात्र्यै नमः”।
  • पूजा के बाद आरती करें और अंत में शनि दोष निवारण हेतु विशेष प्रार्थना करें कि मां आपके जीवन से कष्ट, भय और शनि की बाधाओं को दूर करें।

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चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन: मां कालरात्रि का स्वरूप

मां कालरात्रि को संहार और शक्ति की देवी माना जाता है। इनका स्वरूप अत्यंत भयानक और उग्र है, लेकिन यह रूप केवल दुष्टों और राक्षसों के लिए है, अपने भक्तों के लिए मां कालरात्रि सदैव मंगल दायिनी और कल्याणकारी रहती हैं।

देवी का पूरा शरीर गहरे काले रंग का है, जिस कारण इन्हें कालरात्रि कहा जाता है। इनके घने और बिखरे हुए बाल इनकी प्रचंड शक्ति का प्रतीक हैं। मां के तीन नेत्र हैं, जो भूत, वर्तमान और भविष्य को प्रकाशित करते हैं। इनके गले से निकली गर्जना सुनकर दुष्ट भय से कांप उठते हैं। मां कालरात्रि के चार हाथ हैं। इनके एक हाथ में वज्र यानी गदा और दूसरे में लोहे का कांटा या तलवार होती है।

शेष दो हाथों में से एक वरमुद्रा में रहता है, जिससे मां अपने भक्तों को वरदान देती हैं, जबकि दूसरा हाथ अभयमुद्रा में रहता है, जो भक्तों को निर्भय बनाता है और हर प्रकार का भय दूर करता है। मां का वाहन गदा है, जो सादगी और सहनशीलता का प्रतीक है। यद्यपि मां का स्वरूप देखने में भयानक है, परंतु वे सदैव अपने भक्तों की रक्षा करती हैं। मान्यता है कि मां कालरात्रि की उपासना करने से शनि दोष, नकारात्मक ऊर्जा और हर प्रकार का भय समाप्त हो जाता है।

मां का यह स्वरूप साधक को शक्ति, साहस और आत्मविश्वास प्रदान करता है। यही कारण है कि शारदीय नवरात्रि की महासप्तमी पर मां कालरात्रि की पूजा का विशेष महत्व माना गया है।

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चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन: कैसे पड़ा मां कालरात्रि का नाम

मां कालरात्रि को बहुत ही विकराल स्‍वरूप वाला माना जाता है। मां का रंग उनके नाम की ही तरह घने अंधकार समान है। मां के तीन नेत्र होते हैं और मां के बाल खुले और बिखरे हुए हैं। गले में कड़कती बिजली की माला है। गधे की सवारी करने वाली मां कालरात्रि को शुभंकरी भी कहते हैं।

शनि देव को कैसे करें प्रसन्‍न

मां कालरात्रि का संबंध शनि देव से है जिन्‍हें न्‍याय के देवता के रूप में जाना जाता है। जो जातक अपने जीवन में शनि दोष या शनि ग्रह के नकारात्मक प्रभाव से जूझ रहा है, उन्हें नवरात्रि की सप्तमी तिथि पर मां कालरात्रि की विधि-विधान से पूजा-अर्चना अवश्य करनी चाहिए। इसके अलावा, मां कालरात्रि की उपासना करने से भानु चक्र जागृत होता है और यह जातक के भीतर से हर तरह के भय का नाश कर देता है। ऐसे में, आपको जीवन की हर समस्या को समाधान करने का सामर्थ्य मिलता है। 

चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन: पौराणिक कथा

मां कालरात्रि से जुड़ी पौराणिक कथा के अनुसार एक बार रक्तबीज नाम के दैत्य ने चारों तरफ हाहाकार और आतंक मचा रखा था। उसके आतंक से मानव से लेकर देवी-देवता सभी परेशान होने लगे थे। रक्तबीज को ऐसा वरदान मिला था कि अगर उसके रक्त की एक भी बूंद धरती पर गिरेगी तो उसी के समान एक और शक्तिशाली दैत्य तैयार हो जाएगा। ऐसे में रक्तबीज के सामान्य बलशाली दैत्य तैयार होता गया और उसका आतंक भी बढ़ता गया।

तब रक्तबीज से परेशान होकर सभी देवगण भगवान शिव के पास पहुंचे। भगवान शिव को पता था कि रक्तबीज का अंत केवल मां पार्वती ही कर सकती हैं। तब उन्होंने मां पार्वती से अनुरोध किया और इसके बाद मां पार्वती ने अपनी शक्ति और तेज से माँ कालरात्रि को उत्पन्न किया। इसके बाद रक्त बीज के साथ मां का युद्ध हुआ। इस युद्ध में रक्तबीज के शरीर से जितनी भी रक्त की बूंदे निकली उसे मां कालरात्रि ने अपने मुख में ले लिया। ऐसा करते-करते अंत में जब रक्तबीज का रक्त क्षीण हो गया  तब इस तरह से रक्तबीज का अंत हुआ।

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चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन: प्रिय भोग  

मां कालरात्रि को प्रसन्न करने के लिए गुड़ का भोग लगा सकते हैं। कहा जाता है गुड़ के भोग से देवी कालरात्रि की प्रसन्नता बेहद ही शीघ्र हासिल की जा सकती है। आप अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए चैत्र नवरात्रि 2026 के सातवें दिन मां कालरात्रि को गुड़ का भोग लगा सकते हैं।

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चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन: शुभ रंग, मंत्र और स्‍तोत्र

कालरात्रि पूजन के लिए मंत्र

देवी कालरात्रि की पूजा करते समय सप्तमी तिथि पर निम्न मंत्रों से करें।

॥ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥

मां कालरात्रि का स्तुति मंत्र

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

देवी स्त्रोत 

हीं कालरात्रि श्रीं कराली च क्लीं कल्याणी कलावती।
कालमाता कलिदर्पध्नी कमदीश कुपान्विता॥
कामबीजजपान्दा कमबीजस्वरूपिणी।
कुमतिघ्नी कुलीनर्तिनाशिनी कुल कामिनी॥
क्लीं ह्रीं श्रीं मन्त्र्वर्णेन कालकण्टकघातिनी।
कृपामयी कृपाधारा कृपापारा कृपागमा॥

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. 2026 में चैत्र नवरात्रि की सप्तमी तिथि कब है?

इस बार 25 मार्च, 2026 को सातवां नवरात्र पड़ रहा है।

2. सप्तमी तिथि पर किस स्वरूप की पूजा की जाती है?

मां कालरात्रि की पूजा सप्तमी तिथि पर की जाती है। 

3. मां कालरात्रि कौन सी शक्ति है?

देवी दुर्गा की सातवीं शक्ति मां कालरात्रि हैं।