अजा एकादशी 2026 पर पाएं श्रीहरि की कृपा

अजा एकादशी 2026: जानें तिथि, मुहूर्त, व्रत कथा और नियम!

अजा एकादशी 2026: सनातन धर्म में वर्ष भर में आने वाली सभी एकादशी तिथियों का विशेष महत्व होता है, और इनमे से एक है अजा एकादशी। यह एकादशी जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित होती है इसलिए यह दिन श्रीहरि की कृपा पाने के लिए श्रेष्ठ होता है। इसी क्रम में, एस्ट्रोसेज एआई का यह विशेष ब्लॉग आपको “अजा एकादशी 2026” से जुड़ी समस्त जानकारी प्रदान करेगा जैसे तिथि, मुहूर्त, महत्व, कथा और इस दिन किए जाने वाले उपाय। तो चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं और जान लेते हैं अजा एकादशी 2026 के बारे में सब कुछ। 

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अजा एकादशी 2026: तिथि एवं पूजा मुहूर्त 

हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल अजा एकादशी व्रत 07 सितंबर 2026 को रखा जाएगा। इस दिन एकादशी तिथि का आरंभ 06 सितंबर 2026 की शाम 07 बजकर 31 मिनट से 07 सितंबर शाम 05 बजकर 06 मिनट तक रहेगा। इस दिन पुनर्वसु नक्षत्र शाम 6 बजकर 14 बजे तक रहेगा और इसके बाद पुष्य नक्षत्र शुरू होगा। व्रत का पारण 8 सितंबर 2026, द्वादशी तिथि की सुबह 6 बजकर 02 मिनट से सुबह 10 बजकर 13 मिनट तक पारण मुहूर्त रहेगा। 

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अजा एकादशी का धार्मिक महत्व 

अजा एकादशी को धार्मिक एवं ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष स्थान प्राप्त है जिसे अनंदा एकादशी भी कहते हैं। वैदिक ज्योतिष में गुरु ग्रह का संबंध ज्ञान, धर्म और आध्यात्मिकता से माना गया है, जबकि भगवान विष्णु को जगत के पालनहार कहा जाता है। प्रत्येक एकादशी श्रीहरि को समर्पित होती है इसलिए एकादशी व्रत श्रद्धापूर्वक करने से भक्त को धैर्य, ज्ञान, धर्म और दया जैसे गुणों का आशीर्वाद मिलता है। 

अजा एकादशी का जुड़ाव राजा हरिश्चंद्र की कथा से भी माना जाता है जो मानव जाति को सत्य, धैर्य और मुश्किल दौर में दृढ़ रहने की सीख देती है। अजा एकादशी पर भक्तों द्वारा भौतिक इच्छाओं पर नियंत्रण, दया और धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प भी लिया जाता है।

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अजा एकादशी 2026: पौराणिक कथा

धर्मग्रंथों में अजा एकादशी से संबंधित एक कथा का वर्णन मिलता है और इस कथा के अनुसार, राजा हरिश्चंद्र अपनी सत्यनिष्ठा और धर्म के लिए प्रसिद्ध थे। लेकिन पूर्वजन्म के कर्मों के प्रभाव से उन्होंने अपना राजपाट खो दिया और इसके बाद, राजा हरिश्चंद्र को जीवन में अनेक विकट परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। उन्हें अपनी पत्नी और पुत्र से भी अलग होना पड़ा और अंत में राजा को श्मशान घाट में काम करना पड़ा।

जीवन के इस कठिन दौर में राजा हरिश्चंद्र की मुलाकात महर्षि गौतम से हुई और इन्होने राजा को अजा एकादशी के महत्व के बारे में बताया। साथ ही, भगवान विष्णु की पूजा और व्रत श्रद्धापूर्वक रखने के लिए कहा। राजा ने ऋषि की बात मानकर पूरे नियम और भक्ति के साथ अजा एकादशी का व्रत किया।

ऐसी मान्यता है कि व्रत और भगवान विष्णु की भक्ति के प्रभाव से राजा हरिश्चंद्र के जीवन के सभी कष्ट और परेशानियां धीरे-धीरे दूर हो गईं। उन्हें अपनी पत्नी और पुत्र वापस मिले और उनका खोया हुआ राज्य, सम्मान और समृद्धि भी प्राप्त हुई। राजा हरिश्चंद्र की यह कथा आज भी भक्तों को सत्य, धैर्य, भक्ति और कठिन समय में दृढ़ रहने की प्रेरणा देती है।

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अजा एकादशी 2026: पूजा विधि

  • सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु का स्मरण करें। 
  • पूजा स्थान की सफ़ाई करके पूजा की तैयारी करें और व्रत का संकल्प लें। 
  • भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करके पूजा शुरू करें। 
  • घी का दीपक जलाएं और फूल व फल अर्पित करें।
  • पूजा के बाद विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  • इसके पश्चात, अजा एकादशी व्रत की कथा पढ़ें या सुनें। इस दिन आप धर्म-कर्म के कार्यों में समय व्यतीत करें। 
  • पारंपरिक रूप से, अजा एकादशी व्रत को निर्जला किया जाता है। जो लोग बिना अन्न या जल के व्रत नहीं कर सकते हैं, वह फलाहार कर सकते हैं। 
  • अजा एकादशी की रात्रि जागरण करें और भगवान विष्णु का स्मरण करें। 
  • अगले दिन यानी द्वादशी तिथि पर व्रत पारण शुभ मुहूर्त में करें। इसके बाद, सर्वप्रथम ब्राह्मण को भोजन कराएं और दक्षिणा देने के बाद व्रत पारण करें।  

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श्रीहरि की कृपा के लिए अजा एकादशी 2026 पर करें ये उपाय 

  • भगवान विष्णु को उनके नामों का जाप करते हुए तुलसी की माला अर्पित करें। 
  • सुबह और शाम विष्णु जी के सामने घी का दीपक जलाएं। 
  • प्रतिदिन “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें। 
  • गरीब एवं जरूरतमंदों को अन्न, फल, कपड़े और जरूरी वस्तुओं का दान करें। 
  • गाय और जीवन-जंतुओं को भोजन खिलाएं। 
  • अजा एकादशी व्रत कथा पढ़ें या सुनें। 

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. अजा एकादशी 2026 में कब है?

इस वर्ष अजा एकादशी 07 सितंबर 2026 को पड़ेगी।

2. अजा एकादशी पर पारण का मुहूर्त क्या है?

अजा एकादशी पर व्रत का पारण 8 सितंबर की सुबह 6 बजकर 02 बजे से कर सकते हैं।

3. अजा एकादशी पर किसकी पूजा की जाती है?

अजा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।