शारदीय नवरात्रि 2026 सातवां दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि को समर्पित होता है और इस दिन इनकी पूजा की जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि का संबंध साहस, सुरक्षा, आध्यात्मिक शक्ति और नकारात्मकता के नाश से है। कुछ स्थानों पर सप्तमी तिथि पर सरस्वती आवाहन भी किया जाता है, जो ज्ञान और विद्या की देवी मां सरस्वती को समर्पित है।

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मां दुर्गा का उग्र स्वरूप मां कालरात्रि को माना जाता है जो भय, अज्ञान और नकारात्मक शक्तियों का नाश करती हैं। ‘कालरात्रि’ नाम का अर्थ समय या मृत्यु से जुड़ी रात है। यह अंधकार को दूर करने वाली देवी है। देवी का स्वरूप उग्र होने के बावजूद इन्हें शुभंकरी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी का पूजन साहस, सुरक्षा, शांति और आध्यात्मिक प्रगति प्रदान करता है। एस्ट्रोसेज एआई का यह ब्लॉग आपको शारदीय नवरात्रि 2026 सप्तमी तिथि की समस्त जानकारी प्रदान करेगा जैसे पूजा विधि, सरस्वती आवाहन, शुभ मुहूर्त और उपाय आदि।
शारदीय नवरात्रि 2026 सातवां दिन: तिथि एवं शुभ मुहूर्त
वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि का सातवां दिन 17 अक्टूबर 2026, शनिवार को होगा। इस तिथि पर भक्तजन माँ कालरात्रि की पूजा करते हैं जो माँ दुर्गा की सातवीं शक्ति है। इनकी कृपा से जातक को सुरक्षा, साहस, ज्ञान और आध्यात्मिक प्रगति की प्राप्ति होती है।
शारदीय नवरात्रि सातवां दिन: 17 अक्टूबर 2026, शनिवार
सप्तमी तिथि प्रारंभ: 17 अक्टूबर 2026 को सुबह 05 बजकर 55 मिनट से,
सप्तमी तिथि समाप्त: 17 अक्टूबर 2026 की पूर्ण रात्रि
अभिजीत मुहूर्त : सुबह 11 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 29 मिनट तक
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शारदीय नवरात्रि 2026: माँ कालरात्रि एवं सरस्वती पूजा का महत्व
सनातन धर्म में मां कालरात्रि को मां दुर्गा का उग्र स्वरूप माना गया है, जो असुरों और नकारात्मक शक्तियों का नाश करती हैं और अपने भक्तों की रक्षा करती हैं। धार्मिक ग्रंथों में माँ कालरात्रि को काले वर्ण, खुले बाल, चार भुजाओं और तीन नेत्रों वाली शक्ति के रूप में दर्शाया गया है।
महासप्तमी पर माँ कालरात्रि पूजन के साथ-साथ सरस्वती आवाहन भी करने का विधान है। इसके अंतर्गत ज्ञान, विद्या, कला और वाणी की देवी सरस्वती का आह्वान किया जाता है। ज्योतिष में मां कालरात्रि का संबंध शनि ग्रह से माना गया है। इनकी पूजा से शनि देव के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं, शनि साढ़े साती और ढैय्या से राहत मिलती है, नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा और मुश्किल समय में साहस प्रदान करती हैं।
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शारदीय नवरात्रि 2026 सातवां दिन: पूजा विधि
- भक्त सप्तमी तिथि पर ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और पूजा स्थान की सफ़ाई करें। इसके बाद नीले, लाल या ग्रे रंग के वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थान पर कलश और उसके पास मां कालरात्रि की प्रतिमा या चित्र की स्थापना करें। मां सरस्वती का आवाहन करते समय किताबें, कॉपियां या वाद्य यंत्र को देवी के पास रखें।
- मां को रातरानी, लाल फूल, अक्षत, कुमकुम और चंदन आदि सामग्रीं अर्पित करें।
- देवी के सामने घी या सरसों के तेल का दीपक जलाएं, फिर दुर्गा सप्तशती या फिर सातवें अध्याय का पाठ करें।
- इसके बाद, मां की आरती करें और सबको प्रसाद दें।
- इसके बाद, देवी कालरात्रि को गुड़ या गुड़ से बनी मिठाई का प्रसाद के रूप में भोग लगाएं।
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शारदीय नवरात्रि 2026 सातवां दिन: शुभ रंग और उपाय
शारदीय नवरात्रि सप्तमी तिथि का शुभ रंग: शारदीय नवरात्रि की सप्तमी तिथि पर ग्रे या रॉयल ब्लू रंग के कपड़े पहनें, जो दृढ़ता, सुरक्षा, शक्ति और नकारात्मकता के अंत का प्रतीक मानी जाती है।
गुड़ का भोग लगाएं: मां कालरात्रि को गुड़ का भोग लगाएं। मान्यता है कि इससे बाधाएं दूर करने, नकारात्मक प्रभावों से सुरक्षा और परिवार में समृद्धि बनी रहती है।
मंत्र जाप: सप्तमी तिथि पर माँ कालरात्रि पूजा के दौरान “ॐ देवी कालरात्र्यै नमः” या “एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता, लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी” मंत्र का 108 बार जाप करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस साल सातवां नवरात्रि 17 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा।
शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन माँ कालरात्रि की पूजा की जाती है।
माँ कालरात्रि को सप्तमी तिथि पर गुड़ या गुड़ से बनी मिठाई का भोग लगाना चाहिए।