कब है सोमवती अमावस्या 2026 में? जानें

सोमवती अमावस्या 2026 पर करें ये अचूक उपाय, पाएं पितरों की कृपा और करें जीवन की हर समस्या का अंत!

सोमवती अमावस्या 2026: अमावस्या तिथि को सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है जो धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। बता दें कि एक वर्ष में कुल 12 अमावस्या आती हैं और इनमें से एक होती है सोमवती अमावस्या। जब अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है, तो इसे सोमवती अमावस्या के नाम से जाना जाता है और इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। मान्यता है कि इस दिन स्नान, दान और पूजा-पाठ करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से किसी पवित्र नदी या कुंड में स्नान करने से तन-मन की शुद्धि और जीवन से नकारात्मकता दूर होती है। 

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सोमवती अमावस्या पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु की कामना के लिए व्रत करती हैं। एस्ट्रोसेज एआई अपने पाठकों के लिए “सोमवती अमावस्या 2026” का यह विशेष ब्लॉग लेकर आया है जिसमें आपको इस पावन पर्व से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी विस्तारपूर्वक प्राप्त होगी जैसे कि तिथि, मुहूर्त और इसका धार्मिक महत्व। इसके अलावा, सोमवती अमावस्या 2026 पर कौन-से उपाय करने से आपको पितरों का आशीर्वाद मिलेगा, यह भी हम आपको बताएंगे।  तो आइए बिना देर किए इस ब्लॉग की शुरुआत करते हैं और जानते हैं सोमवती अमावस्या 2026 की। 

सोमवती अमावस्या 2026: तिथि और पूजा मुहूर्त 

सनातन धर्म में सोमवती अमावस्या को महत्वपूर्ण माना जाता है। जब कोई अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है, उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। एक वर्ष में एक या दो बार सोमवती अमावस्या आती है। धार्मिक ग्रंथों में सोमवती अमावस्या को बहुत शुभ कहा गया है और इस दिन शिव-पार्वती का पूजन और दान-स्नान करने से अपार पुण्य प्राप्त होता है। इस साल 15 जून 2026 को सोमवती अमावस्या पड़ रही है। आइए अब हम आगे बढ़ते हैं और नज़र डालते हैं इस अमावस्या के मुहूर्त पर। 

सोमवती अमावस्या 2026 तिथि: 15 जून 2026, सोमवार

अमावस्या तिथि आरंभ: दोपहर 12 बजकर 22 मिनट से (14 जून 2026 को)

अमावस्या तिथि समाप्त: सुबह 08 बजकर 26 मिनट तक (15 जून 2026 को)

नोट: हिंदू धर्म में प्रत्येक व्रत एवं पर्व को उदयातिथि के आधार पर मनाया जाता है। ऐसे में, सोमवती अमावस्या को उदया तिथि के अनुसार 15 जून 2026 को मनाया जाएगा।  

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बेहद ख़ास है ये सोमवती अमावस्या 

वर्ष 2026 के 15 जून 2026 को पड़ने वाली सोमवती अमावस्या बहुत ख़ास रहने वाली है क्योंकि यह अधिक मास में पड़ेगी। सरल शब्दों में कहें, तो इस साल अधिक मास लगने जा रहा है जो ज्येष्ठ माह में रहेगा। इस प्रकार, यह सोमवती अमावस्या अधिक ज्येष्ठ माह में पड़ने जा रही है और ऐसे में, यह अमावस्या 3 साल में एक बार पड़ने वाली अधिक मास में आएगी जिससे इस दिन का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। 

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सोमवती अमावस्या का धार्मिक महत्व 

ज्येष्ठ माह में पड़ने वाली अमावस्या सोमवार के दिन पड़ेगी इसलिए इसे सोमवती अमावस्या के नाम से जाना जाएगा। यह अमावस्या ज्येष्ठ अमावस्या और सोमवती अमावस्या के नाम से भी जाना जाता हैं। बता दें कि सोमवती अमावस्या व्रत को शास्त्रों में ‘अश्वत्थ प्रदक्षिणा व्रत’ भी कहते हैं। यहाँ अश्वत्थ’ का अर्थ पीपल वृक्ष से है जिसमें भगवान विष्णु का वास माना गया है। इसी कारण सोमवती अमावस्या के दिन पीपल वृक्ष की पूजा के साथ-साथ भगवान विष्णु की आराधना भी विशेष रूप से की जाती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सोमवती अमावस्या पर स्नान और दान का अत्यधिक महत्व होता है और इसे सभी पर्वों में श्रेष्ठ माना गया है। ऋषि व्यास के अनुसार, सोमवती अमावस्या के दिन मौन व्रत, स्नान और ध्यान करने से सहस्र गोदान के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है। महाभारत के भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को इस तिथि का महत्व बताते हुए कहा था कि जो व्यक्ति इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करता है, वह सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य का आशीर्वाद और दुखों से मुक्ति मिलती है। साथ ही, ऐसा भी माना जाता है कि इस दिन स्नान करने से पितरों की आत्माओं को शांति मिलती है। 

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सोमवती अमावस्या 2026 पर पूजा का लाभ

सोमवती अमावस्या का व्रत विवाहित महिलाओं के लिए विशेष मायने रखता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए व्रत रखती हैं। मान्यता है कि सोमवती  अमावस्या पर श्रद्धा और नियम से व्रत करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। 

इस तिथि पर दान करना भी शुभ माना जाता है। जो महिलाएं हर अमावस्या का व्रत नहीं कर पाती हैं, वे कम से कम सोमवती अमावस्या का व्रत अवश्य करें। परंपरा के अनुसार, पीपल के वृक्ष के चारों ओर 108 बार धागा लपेटते हुए उसकी परिक्रमा की जाती है। इसके बाद, पीपल के वृक्ष की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। 

बता दें कि सोमवार चंद्र देव का  दिन माना जाता है जबकि अमावस्या पर सूर्य और चंद्रमा एक ही   रेखा में होते हैं। इसी कारण यह तिथि आध्यात्मिक रूप से अत्यंत फलदायी मानी जाती है और इसके परिणामस्वरूप, सोमवती अमावस्या के दिन किए गए व्रत, पूजन और दान का पुण्य फल कई गुना बढ़ जाता है।  

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सोमवती अमावस्या की पूजा विधि

सोमवती अमावस्या 2026 को शिव-पार्वती की पूजा के लिए श्रेष्ठ माना जाता है इसलिए इस दिन इनकी पूजा सही विधि से करनी चाहिए जिसके बारे में हम आपको नीचे बताने जा रहे हैं। 

  • सोमवती अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठें और स्नानादि से निवृत्त होने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और फिर व्रत का संकल्प लेना चाहिए।
  • स्नान करने के बाद भगवान शिव और माता पार्वती के मंदिर जाएं। 
  • मंदिर जाकर वहां शिवजी और माँ पार्वती की विधि-विधान से पूजा करें। 
  • माता पार्वती की प्रतिमा और शिवलिंग पर 7 या 11 बार विषम संख्या में कच्चे सूत को लपेटें। ऐसा करने से वैवाहिक जीवन में हमेशा सुख-शांति बनी रहती है।
  • इसके पश्चात, एक लकड़ी की चौकी पर वस्त्र बिछाएं और उस पर भगवान शिव और मां पार्वती की प्रतिमा या तस्वीर को स्थापित करें।
  • इसके बाद, माँ गौरी और भगवान शंकर की विधि-विधान से पूजा करें। 
  • फिर, शिव-पार्वती जी की आरती करें। 
  • इसके पश्चात, इस  तिथि पर पीपल के पेड़ की 108 बार परिक्रमा अवश्य करें। 
  • परिक्रमा करते समय 108 बार कच्चा धागा लपेटें और इसके बाद, पीपल के वृक्ष में भगवान शिव का वास मानते हुए जल, दूध, अक्षत चंदन, आदि सामग्री अर्पित करें।

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सोमवती अमावस्या से जुड़ी पौराणिक कथा 

धर्मग्रंथों में सोमवती अमावस्या से जुड़ी अनेक कथाओं का वर्णन मिलता हैं और इन्हीं में से एक  कथा के अनुसार, एक राज्य में गरीब ब्राह्मण अपने परिवार के साथ रहता था जिसमे पति, पत्नी और एक पुत्री भी थी। समय के साथ पुत्री धीरे-धीरे बड़ी होने लगी और वह बहुत गुणवान, सुंदर और संस्कारी थी। लेकिन, गरीबी के कारण उसका विवाह नहीं हो पा रहा था।

एक दिन एक साधु उनके घर आए और कन्या के सेवा भाव से प्रसन्न होकर आशीर्वाद दिया, परंतु उन्होंने बताया कि उसके हाथ में विवाह योग नहीं है। इस बात से चिंतित माता-पिता ने उपाय पूछा, तब साधु ने बताया कि पास के गाँव में सोना नाम की एक धोबिन रहती है जो बहुत पतिव्रता हैं। यदि यह कन्या उसकी सेवा करें और वह अपनी मांग का सिंदूर इस कन्या को दे दे, तो उसका विवाह योग बन सकता है। कन्या रोज़ सुबह जल्दी उठकर चुपचाप धोबिन के घर जाकर सारे काम कर आती थी। 

कई दिनों बाद धोबिन को इसका पता चला और उसने कारण पूछा। कन्या ने पूरी बात बताई, तब धोबिन उसकी सहायता करने के लिए मान गई। सोमवती अमावस्या के दिन धोबिन ने अपनी मांग का सिंदूर कन्या को दे दिया जिससे उसका विवाह योग बन गया। कन्या ने 108 बार पीपल वृक्ष की परिक्रमा की और व्रत का पालन किया। कहा जाता है कि ऐसा करने से उसके सारे कष्ट दूर हो गए और उसे सुख-समृद्धि की प्राप्ति हुई। 

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सोमवती अमावस्या 2026 के दिन जरूर करें ये प्रभावी उपाय 

पवित्र नदी में स्नान: सोमवती अमावस्या 2026 के दिन गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करें और जल में तिल और पुष्प अर्पित करें। ऐसा करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

पितरों का तर्पण: इस अमावस्या तिथि पर सुबह स्नान करने के पश्चात पूर्वजों के नाम पर जल, तिल और खीर चढ़ाएं। इससे पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है। 

पीपल के पेड़ की पूजा: सोमवती अमावस्या के अवसर पर पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं और सात बार परिक्रमा करते हुए भक्तिभाव से जल अर्पित करें।

पितृ गायत्री मंत्र: सोमवती अमावस्या 2026 की तिथि पर “ॐ पितृभ्य: स्वधायिभ्यो नम:” मंत्र का 108 बार जाप करने की सलाह दी जाती है क्योंकि इस उपाय को करने से आपको मानसिक शांति और पूर्वजों की कृपा प्राप्त होती है। 

तिल और कुश का उपयोग: इस अमावस्या के दिन पूजा या तर्पण में कुशा घास के साथ-साथ काले तिल का भी इस्तेमाल करें। ऐसा करना बहुत फलदायी माना जाता है। 

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. सोमवती अमावस्या 2026 में कब है?

इस साल 15 जून 2026 को सोमवती अमावस्या मनाई जाएगी। 

2. एक साल में कितनी बार सोमवती अमावस्या आती है?

हिंदू पंचांग के अनुसार, सोमवती अमावस्या वर्ष में एक या दो बार आती है। 

3. सोमवती अमावस्या पर किसकी पूजा करें?

सोमवती अमावस्या पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है।