परमा एकादशी 2026 अधिकमास (मलमास) के कृष्ण पक्ष में आने वाली एक अत्यंत पवित्र और दुर्लभ एकादशी है। यह व्रत विशेष रूप से भगवान विष्णु के पुरुषोत्तम स्वरूप को समर्पित माना जाता है और इसे अत्यधिक पुण्यदायी बताया गया है। शास्त्रों में इसकी महिमा का वर्णन करते हुए कहा गया है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत-पूजन करने से विशेष आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है।

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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार परमा एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति के जीवन से दरिद्रता और कष्ट दूर होते हैं, पापों का नाश होता है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। यह व्रत भक्ति, संयम और आत्मशुद्धि का प्रतीक है, जो साधक को मोक्ष की ओर अग्रसर करता है। कहा जाता है कि इस एकादशी के प्रभाव से अंततः बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है और व्यक्ति को दिव्य शांति का अनुभव होता है। आइए इसी क्रम में आगे बढ़ते हैं और जानते हैं परमा एकादशी के बारे में।
परमा एकादशी 2026: तिथि व मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2026 में परमा एकादशी का व्रत 11 जून गुरुवार के दिन रखा जाएगा।
एकादशी तिथि प्रारम्भ : जून 11, 2026 की मध्यरात्रि 01 बजे से
एकादशी तिथि समाप्त : जून 11, 2026 की रात 10 बजकर 39 मिनट तक।
परमा एकादशी पारण मुहूर्त : 05:41:12 से 08:19:03 तक 12, जून को
अवधि : 2 घंटे 37 मिनट
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परमा एकादशी का महत्व
परमा एकादशी को अधिक मास के कृष्ण पक्ष में आने वाला एक अत्यंत प्रभावशाली और विरले अवसर का व्रत माना जाता है। यह दिन भगवान विष्णु के पुरुषोत्तम रूप की आराधना के लिए समर्पित होता है, इसलिए इसका महत्व सामान्य एकादशियों से कहीं अधिक माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह एकादशी आत्मशुद्धि और आंतरिक परिवर्तन का विशेष अवसर प्रदान करती है।
इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखने से मनुष्य अपने कर्मों के बोझ को हल्का कर सकता है और जीवन में नई सकारात्मक दिशा प्राप्त करता है। यह केवल बाहरी सुख-संपत्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यक्ति के भीतर शांति, संतुलन और भक्ति भाव को भी मजबूत बनाती है। कहा जाता है कि परमा एकादशी का पालन करने से व्यक्ति के जीवन में स्थिरता आती है, नकारात्मकता दूर होती है और मानसिक संतुलन बेहतर होता है।
इसे मोक्ष प्रदान करने वाली तिथि भी माना गया है, क्योंकि इस दिन की गई साधना व्यक्ति को जन्म-मरण के बंधनों से मुक्ति की ओर अग्रसर करती है और अंततः दिव्य धाम की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करती है।
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परमा एकादशी की पूजा विधि
- सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर या पूजा स्थान को साफ करके व्रत का संकल्प लें।
- हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर भगवान विष्णु के समक्ष व्रत रखने का संकल्प करें और पूरे दिन नियमपूर्वक व्रत का पालन करने का निश्चय करें।
- भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। उन्हें जल, पंचामृत, पुष्प, तुलसी दल, धूप, दीप आदि अर्पित करें। विशेष रूप से तुलसी अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- इस दिन “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें। साथ ही विष्णु सहस्रनाम या एकादशी व्रत कथा का पाठ करना भी लाभकारी होता है।
- दिनभर फलाहार या निर्जल व्रत रखा जा सकता है (अपनी क्षमता अनुसार)। मन, वचन और कर्म से शुद्धता बनाए रखें।
- रात में भजन-कीर्तन करते हुए भगवान विष्णु का स्मरण करें। जागरण करना विशेष पुण्यदायी माना गया है।
- अगले दिन द्वादशी तिथि में विधि अनुसार व्रत का पारण करें। ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन और दान देना शुभ माना जाता है।
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परमा एकादशी की कथा
परमा एकादशी हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी और मोक्ष प्रदान करने वाली एकादशी मानी जाती है, जो अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) के कृष्ण पक्ष में आती है। इसकी कथा के अनुसार, प्राचीन समय में एक ब्राह्मण दंपति रहते थे, जो अत्यंत गरीब थे, लेकिन धर्म और भक्ति में गहरा विश्वास रखते थे।
ब्राह्मण भिक्षा से जीवन यापन करता था, परंतु कई बार उन्हें भोजन भी नसीब नहीं होता था। एक दिन उनके घर एक महात्मा आए, जिनका उन्होंने यथासंभव आदर-सत्कार किया। उनकी सेवा से प्रसन्न होकर महात्मा ने उन्हें परमा एकादशी का व्रत करने का विधि-विधान बताया और कहा कि यह व्रत उनके सारे कष्ट दूर कर देगा।
ब्राह्मण दंपति ने श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत को किया। व्रत के प्रभाव से उनके जीवन में सुख-समृद्धि आने लगी, उनकी दरिद्रता समाप्त हो गई और अंततः उन्हें बैकुंठ धाम की प्राप्ति हुई। इस कथा से यह शिक्षा मिलती है कि सच्ची श्रद्धा, भक्ति और नियमपूर्वक किए गए व्रत से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
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परमा एकादशी के दिन क्या करें क्या न करें
क्या करें
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- घर के मंदिर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें।
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें।
- एकादशी व्रत रखें – फलाहार या निर्जल व्रत अपनी क्षमता अनुसार करें।
- भगवद गीता या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
- जरूरतमंदों को दान करें – जैसे अन्न, वस्त्र या धन।
- मन, वाणी और कर्म से पवित्र रहने की कोशिश करें।
क्या न करें
- चावल और अनाज का सेवन न करें (एकादशी में वर्जित माना जाता है)।
- लहसुन, प्याज और तामसिक भोजन से दूर रहें।
- क्रोध, झूठ, चुगली या किसी का अपमान न करें।
- ज्यादा सोना या आलस्य करना भी इस दिन उचित नहीं माना जाता।
- व्रत के दिन नकारात्मक विचारों से बचें और मन को शांत रखें।
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परमा एकादशी 2026 के दिन करें ये अचूक उपाय
तुलसी के पास दीपक और परिक्रमा
शाम के समय तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाकर 11 या 21 बार परिक्रमा करें। इससे घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा आती है।
केले के पेड़ की पूजा
केले के पेड़ में जल चढ़ाकर हल्दी और चावल अर्पित करें, क्योंकि इसे भगवान विष्णु का प्रतीक माना जाता है। इससे आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं।
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एक रुपये का उपाय
एक सिक्का (1 या 5 रुपए) लेकर भगवान विष्णु के सामने रखें, पूजा के बाद उसे अपने पर्स में रख लें। यह धन वृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
पीली वस्तु का दान
पीली दाल, हल्दी या पीले कपड़े का दान करें। यह टोटका विशेष रूप से धन और भाग्य वृद्धि के लिया किया जाता है।
नारियल का उपाय
एक नारियल लेकर अपने ऊपर से सात बार घुमाकर किसी बहते जल में प्रवाहित कर दें। इससे नकारात्मकता दूर होने की मान्यता है।
दीपदान जल में
शाम को नदी या जल स्रोत में दीपदान करें (यदि संभव हो)। इससे पितृ दोष और बाधाएं कम होने की मान्यता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
परमा एकादशी 2026 में 11 जून (गुरुवार) को मनाई जाएगी।
प्रारम्भ: 11 जून 2026, रात 01:00 बजे, समाप्त: 11 जून 2026, रात 10:39 बजे
यह एकादशी लगभग हर 3 साल में एक बार अधिक मास (मलमास) में आती है, इसलिए इसे दुर्लभ माना जाता है।