क्‍या है बुध प्रदोष व्रत 2026 की पूजा विधि और तिथि?

बुध प्रदोष व्रत 2026: हर महीने त्रयो‍दशी तिथि पर प्रदोष व्रत आता है और जब यह व्रत बुधवार के दिन पड़ता है, तब इसे बुध प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा की जाती है। हम किस तरह से सोचते हैं, कैसे बोलते हैं, सीखते हैं और चीज़ों को किस तरहसे देखते हैं एवं खुद को किस तरह से व्‍यक्‍त करते हैं, इन सभी चीज़ों पर बुध ग्रह का प्रभाव होता है।

बुध के कमजोर होने पर व्‍यक्‍ति ज्‍यादा सोचने लगता है, उसे हमेशा चिंता बनी रहती है, बात करने में दिक्‍कत आती है, वह फैसले नहीं ले पाता है, उसे पढ़ाई या बिज़नेस में कंफ्यूज़न रहती है और वह भावनात्‍मक स्‍तर पर बेचैन रह सकता है। बुध प्रदोष व्रत रखने से व्‍यक्‍ति का मन शांत रहता है और इन सभी समस्‍याओं का समाधान होता है।

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बुध प्रदोष व्रत 2026 कब है

इस बार 15 अप्रैल, 2026 को बुधवार के दिन बुध प्रदोष व्रत पड़ रहा है। 14 अप्रैल की रात्रि को 12 बजकर 15 मिनट पर त्रयोदशी तिथि शुरू होगी और 15 अप्रैल, 2026 को रात्रि 10 बजकर 34 मिनट पर समाप्‍त होगी। इस बार बुध प्रदोष व्रत पर ब्रह्म योग बनने जा रहा है जिसे शास्‍त्रों में अत्‍यंत शुभ माना जाता है।

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बुध प्रदोष व्रत 2026 का महत्‍व

सनातन धर्म में प्रदोष व्रत को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है जो भगवान शिव की कृपा पाने और उन्हें प्रसन्न करने के लिए श्रेष्ठ होता है। इस व्रत को प्रत्येक चंद्र पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है। प्रदोष व्रत अलग-अलग तिथियों पर पड़ता है और हर विशेष दिन पर पड़ने वाले प्रदोष व्रत का अपना महत्व होता है जिन्हें अलग-अलग नामों से जाना जाता है।

इस व्रत से जुड़ी मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव का पूजन करने से व्यक्ति को जीवन में सुख-सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है और सभी तरह के दुख-कष्टों से भी छुटकारा मिलता है।

बुधवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को बुध प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है। बुधवार का दिन बुध ग्रह को समर्पित होता है और ऐसे में, बुध प्रदोष व्रत को छात्रों, नौकरी करने वाले जातकों और व्यापारियों के लिए बेहद शुभ माना जाता है। साथ ही, इस व्रत के प्रभाव से आपकी बुद्धि, ज्ञान, संचार कौशल और समृद्धि में वृद्धि होती है।

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बुध प्रदोष व्रत 2026 पर क्‍या होता है?

सनातन धर्म में प्रदोष व्रत को बहुत शुभ और कल्याणकारी माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह के शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। बता दें कि सामान्य रूप से सूर्यास्त के बाद और रात्रि के आरंभ से पहले के समय को प्रदोष काल कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना पूरे विधि-विधान से की जाती है।  

हिंदू धर्म में व्रत और पूजा-पाठ पुण्यदायक होता है। मान्यता है कि श्रद्धाभाव और सच्चे मन से व्रत करने पर भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती है। हालांकि, एक माह में अनेक व्रत किए जाते  हैं, लेकिन उनमें प्रदोष व्रत का स्थान सबसे पहले आता है।

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धार्मिक दृष्टि से प्रदोष व्रत का महत्व 

प्रदोष व्रत की गणना हिंदू धर्म के सबसे शुभ और पावन व्रतों में होती है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दिन जो भक्त पूरी श्रद्धा और निष्ठा से भगवान शिव की आराधना करता है, तो उसके जीवन से सभी कष्टों का निवारण हो जाता है। साथ ही, मृत्यु के बाद जातक को मोक्ष की भी प्राप्ति होती है। धार्मिक ग्रंथों में प्रदोष व्रत का वर्णन मिलता है और इस व्रत को करने से दो गायों के दान के समान पुण्य प्राप्त होता है। 

वेदों के महाज्ञानी सूतजी द्वारा प्रदोष व्रत का महत्व शौनकादि ऋषियों को बताया गया था। उन्होंने बताया कि कलियुग में जब अधर्म का प्रभाव बढ़ेगा और लोग धर्म के मार्ग से भटककर अन्याय की तरफ अग्रसर होंगे, उस समय प्रदोष व्रत एक ऐसा जरिया बनेगा जिसकी सहायता से आप भगवान शिव की सच्चे मन से उपासना करके पापों से मुक्ति पा सकेंगे और जीवन से कष्टों का भी अंत हो सकेगा।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्रदोष व्रत का महत्व सबसे पहले भगवान शिव ने स्वयं माता पार्वती को बताया था। इसके पश्चात, महर्षि वेदव्यास जी ने सूत जी को इसकी महिमा से अवगत करवाया था और आगे चलकर सूत जी ने शौनकादि ऋषियों को प्रदोष व्रत के बारे में बताया।

बुध प्रदोष व्रत 2026 की पूजा विधि 

  • प्रदोष व्रत करने के लिए भक्त सर्वप्रथम त्रयोदशी तिथि पर सूर्योदय से पूर्व उठें और स्नान करके साफ़ वस्त्र धारण करें। 
  • इसके पश्चात आप भगवान शिव की पूजा करें और उन्हें बेलपत्र, दीप, अक्षत, गंगाजल एवं धूप आदि सामग्री अर्पित करें।
    व्रत का पालन पूरे दिन करें और सूर्यास्त होने से कुछ देर पहले पुनः स्नान करके सफ़ेद रंग के वस्त्र पहन लें। 
  • अब गंगा जल के छिड़काव से पूजा स्थल को शुद्ध करें। 
  • फिर गाय के गोबर से मंडप निर्मित करें और पांच अलग-अलग रंगों से रंगोली बनाएं। 
  • पूजा की तैयारी के पश्चात अब आप उतर-पूर्व दिशा की तरफ मुंह करके कुशा के आसन पर बैठें। 
  • भगवान शिव के “ऊँ नम: शिवाय” मंत्र का जाप करें और शिवजी को जल चढ़ाएं।

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बुध प्रदोष व्रत कैसे रखें

इस व्रत को करना बहुत सरल है। इसके लिए आप निम्‍न बातों का ख्‍याल रख सकते हैं:

  • आप ज्‍यादा कठिन व्रत न रखें या फिर आप एक समय पर शाम को पूजा करने के बाद भोजन ग्रहण कर सकते हैं।
  • सूर्यास्‍त से पहले स्‍नान कर लें और साफ-सफाई का ध्‍यान रखें।
  • प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करें।
  • शिवलिंग पर दूध या जल चढ़ाएं।
  • शांत मन से बेल पत्र शिवलिंग पर अर्पित करें।
  • आप ‘ऊं नम: शिवाय’ मंत्र का जाप करें।

बुध प्रदोष व्रत 2026 की कथा

बुध प्रदोष व्रत को लेकर पौराणिक मान्‍यता के अनुसार एक गांव में एक आदमी रहता था जिसकी हाल ही में शादी हुई थी। विवाह के कुछ दिनों उपरांत वह अपनी पत्‍नी को अपने घर लाने के लिए अपने ससुराल गया। ससुराल से वापस आने के लिए उसने बुधवार का दिन चुना। घर के बड़े-बुजुर्गों ने उसे बुधवार को यात्रा करने के लिए मना किया और कहा कि इस तरह की यात्रा के लिए बुधवार का दिन अच्‍छा नहीं होता है।

लेकिन उस आदमी ने किसी की बात नहीं मानी और बुधवार को ही अपनी पत्‍नी को लेकर घर से निकल पड़ा। आधे रास्‍ते में उसकी पत्‍नी को प्‍यास लगी, तब वह आदमी पानी की तलाश में एक तरफ चला गया। जब वह वापस आया, तब उसने देखा कि उसकी पत्‍नी के पास उसके जैसा ही दिखने वाला एक आदमी खड़ा है। यह देखकर वह चौंक गया।

तब वहां पर भीड़ जमा हो गई। लोगों ने उस महिला से अपने पति को पहचानने के लिए कहा, तो वह इस काम में विफल हो गई। उस समय उस व्‍यक्‍ति को अपनी गलती समझ आ गई कि उसके परिवार के बुजुर्गों ने उसे बुधवार के दिन यात्रा करने से मना किया था लेकिन वह नहीं माना। उसने सच्‍चे मन से भगवान शिव से मांफी मांगी और उनसे सही मार्ग दिखाने की प्रार्थना की। उसकी प्रार्थना सुनकर भोलेनाथ ने तुरंत उस दूसरे हमशक्‍ल को गायब कर दिया। अब दोनों पति-पत्‍नी सकुशल घर लौट आए। उस दिन दोनों ने पूरी श्रद्धा से बुध प्रदोष व्रत 2026 रखा।

इस कथा से हमें सीख मिलती है कि घमंड, जिद और लापरवाही से केवल नुकसान होता है। मनुष्‍य को समझदारी, धैर्य और विनम्रता से काम लेना चाहिए।

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कौन रख सकता है बुध प्रदोष व्रत 2026

इस व्रत को कोई भी रख सकता है। मानसिक रूप से तनावग्रस्‍त या कंफ्यूजन में रहने वाले लोग, रिश्‍तों में बार-बार गलतफहमियां आने पर, पढ़ाई में संघर्ष, करियर या बिज़नेस से संबंधित निर्णय लेने में दिक्‍कत, बोलने में परेशानी या भावनात्‍मक असंतुलन और कुंडली में कमजोर बुध के कारण परेशानियों का सामना करने वाले व्‍यक्‍ति को बुध प्रदोष व्रत रखना चाहिए।

इस व्रत को कभी-कभी रखने से भी मा‍नसिक शांति और स्‍पष्‍टता मिलती है।

प्रदोष व्रत के प्रकार 

जैसे कि हमने आपको ऊपर बताया कि प्रदोष व्रत को हर माह में दो बार किया जाता है। लेकिन, जब यह प्रदोष व्रत सप्ताह के अलग-अलग दिनों पर पड़ता है, तो इसके महत्व में कई गुना वृद्धि हो जाती है और इन्हें भिन्न-भिन्न नामों से जाना जाता है जिनके बारे में हम विस्तार से नीचे बात करेंगे। 

सोम प्रदोष व्रत: सोमवान को पड़ने वाला प्रदोष व्रत सोम प्रदोष व्रत होता है जो चंद्रमा से संबंधित होता है। इस व्रत को करने से मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन और इच्छाओं की पूर्ति होती है। संतान सुख और पारिवारिक सुख की कामना करने वाले दंपतियों को विशेष रूप से यह व्रत करना चाहिए। 

भौम प्रदोष व्रत: जो प्रदोष व्रत मंगलवार को पड़ता है, उसे भौम प्रदोष व्रत कहते हैं। यह दिन मंगल ग्रह से जुड़ा है इसलिए इस दिन व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को कर्ज़, विवाद, रोग और शत्रुओं से मुक्ति मिलती है। साथ ही, आपके साहस और आत्मबल में भी वृद्धि होती है।

बुध प्रदोष: बुधवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को बुध प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है। बुधवार का दिन बुध ग्रह को समर्पित होता है और ऐसे में, बुध प्रदोष व्रत को छात्रों, नौकरी करने वाले जातकों और व्यापारियों के लिए बेहद शुभ माना जाता है। साथ ही, इस व्रत के प्रभाव से आपकी बुद्धि, ज्ञान, संचार कौशल और समृद्धि में वृद्धि होती है।

गुरु प्रदोष व्रत: गुरुवार का दिन गुरु ग्रह से संबंध रखता है इसलिए इस दिन पड़ने वाला प्रदोष व्रत, गुरु प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है। ऐसे में, गुरु प्रदोष व्रत को करने से जातक को आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति होती है, गुरुओं का आशीर्वाद मिलता है और शिक्षा के मार्ग में आने वाली समस्याएं दूर होती हैं।

शुक्र प्रदोष: शुक्रवार का दिन शुक्र ग्रह द्वारा शासित है इसलिए इस दिन प्रदोष व्रत को शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस व्रत के शुभ प्रभाव से जातक को वैवाहिक जीवन, प्रेम, और गृहस्थ जीवन के लिए बहुत शुभ माना जाता है। साथ ही, यह आपके जीवन में धन, वैभव और सौभाग्य को बढ़ाता है।

शनि प्रदोष व्रत: जो प्रदोष व्रत शनिवार के दिन पड़ता है, उसे शनि प्रदोष व्रत कहते हैं। इस दिन के स्वामी शनि ग्रह हैं इसलिए इस व्रत को सबसे शक्तिशाली माना जाता है। ऐसे में, यह व्रत शनि साढ़े साती और अशुभ शनि के प्रभावों से राहत मिलती है। साथ ही, करेर में तरक्की प्राप्त होती है। 

रवि प्रदोष व्रत: रविवार के दिन आने वाला प्रदोष व्रत, रवि प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है। इस दिन के स्वामी सूर्य हैं इसलिए इस व्रत के प्रभाव से स्वास्थ्य, ऊर्जा, यश और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है। साथ ही,सूर्य ग्रह के नकारात्मक प्रभाव भी शांत होते हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. बुध प्रदोष व्रत 2026 कब रखा जाएगा?

इस बार 15 अप्रैल, 2026 को बुधवार के दिन बुध प्रदोष व्रत पड़ रहा है।

2. प्रदोष व्रत में किसकी पूजा की जाती है?

प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा का विधान है।

3. बुध प्रदोष व्रत का क्या लाभ है?

बुध प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव की कृपा और बुध देव के अशुभ प्रभाव से राहत मिलती है।