एस्ट्रोसेज एआई हर नए ब्लॉग के जरिए आपको ज्योतिष जगत की ताजा और सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं की जानकारी देने की कोशिश करता है, ताकि पाठक रहस्यमय ज्योषित संसार की नई गतिविधियों से हमेशा अपडेट रहें। इसी क्रम में आज हम इस ब्लॉग में विश्व कैंसर दिवस के बारे में जानेंगे।

बता दें कि विश्व कैंसर दिवस 2026 हर साल 04 फरवरी को मनाया जाता है। कैंसर एक जटिल और गंभीर बीमारी है, जिसमें शरीर की असामान्य कोशिकाएं बिना नियंत्रण के बढ़ने और फैलने लगती हैं। ये कोशिकाएं ट्यूमर बना सकती हैं, आसपास के ऊतकों को नुकसान पहुंचा सकती हैं और कई मामलों में खून या लिम्फ सिस्टम के ज़रिए शरीर के दूसरे हिस्सों तक भी फैल सकती हैं।
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कैंसर शरीर के लगभग किसी भी अंग को प्रभावित कर सकता है और इसके कई प्रकार होते हैं, जिनके कारण, लक्षण और इलाज अलग-अलग होते हैं। हालांकि अनुवांशिक कारण भी इसमें भूमिका निभा सकते हैं, लेकिन जीवनशैली, पर्यावरण, रोग प्रतिरोधक क्षमता और मानसिक व भावनात्मक स्थिति भी कैंसर के होने और बढ़ने में अहम भूमिका निभाती है। समय पर पहचान, सही जांच और उचित इलाज से इसके परिणाम काफी बेहतर हो सकते हैं, इसलिए जागरूकता और नियमित स्वास्थ्य जांच बहुत ज़रूरी है।
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2022 के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में लगभग 2 करोड़ नए कैंसर के मामले सामने आए और करीब 97 लाख लोगों की मौत कैंसर के कारण हुई। सबसे ज़्यादा पाए जाने वाले कैंसर फेफड़ों का कैंसर, महिलाओं में स्तन कैंसर और कोलोरेक्टल (आंत) कैंसर हैं। फेफड़ों का कैंसर आज भी कैंसर से होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण बना हुआ है, जो इस बीमारी के बढ़ते वैश्विक खतरे को दर्शाता है और रोकथाम, समय पर पहचान और बेहतर इलाज की ज़रूरत को उजागर करता है। अनुमान है कि वर्ष 2050 तक कैंसर के नए मामलों की संख्या बढ़कर 3.5 करोड़ तक पहुंच सकती है।
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विश्व कैंसर दिवस 2026: ज्योतिषीय दृष्टिकोण
विश्व कैंसर दिवस हमें यह याद दिलाता है कि उपचार केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि भावनात्मक, मानसिक और आध्यात्मिक यात्रा भी होता है। ज्योतिष के नजरिए से देखा जाए तो ब्रह्मांड और मानव जीवन के बीच गहरा संबंध है। यह संबंध उपचार की प्रक्रिया में संतुलन, जागरूकता और करुणा को दर्शाता है। इस दिन ज्योतिष हमें सकारात्मक ग्रह ऊर्जाओं से जुड़ने, स्वयं की देखभाल करने और आशा बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
साथ ही, यह भी समझाता है कि जागरूकता, संवेदना और सामूहिक सकारात्मक सोच, कैंसर से प्रभावित लोगों को सहारा देने और सभी के समग्र कल्याण में अहम भूमिका निभा सकती है। विश्व कैंसर दिवस पर ज्योतिष हमें अपनी जीवनशैली, भावनात्मक आदतों और ऊर्जा संतुलन के प्रति अधिक सचेत होने के लिए प्रेरित करता है। ग्रहों की ऊर्जा हमें रोकथाम, समय पर पहचान और शरीर के सूक्ष्म संकेतों को समझने के महत्व का संदेश देती है। अंततः ज्योतिष यह सिखाता है कि उपचार एक समग्र प्रक्रिया है, जहां जागरूकता, करुणा और आंतरिक संतुलन मिलकर जीवन, स्वस्थ होने की प्रक्रिया और नए उद्देश्य को सहारा देते हैं।
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विश्व कैंसर दिवस: कुंडली में कैंसर से जुड़े ग्रह योग (ज्योतिषीय दृष्टि से)
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, कुछ विशेष ग्रह स्थितियां गंभीर या लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों, जैसे कैंसर की ओर संकेत कर सकती हैं। हालांकि यह पूरी तरह प्रतीकात्मक है और इसका उपयोग कभी भी मेडिकल जांच या निदान के रूप में नहीं किया जाता। इन संकेतों को हमेशा दशा, गोचर और पूरी कुंडली की मजबूती के साथ मिलाकर देखा जाता है।
- रोग से जुड़े भाव (छठा, आठवां और बारहवें भाव) पर शनि, राहु या केतु जैसे पाप ग्रहों का ज्यादा प्रभाव होने लंबे समय की बीमारियों का संकेत माना जाता है।
- यदि राहु या केतु छठे, आठवें या बारहवें भाव में हों या इन भावों पर दृष्टि डाल रहे हों, तो इसे रहस्यमयी, अचानक होने वाली या पहचान में कठिन बीमारियों से जोड़ा जाता है।
- चंद्रमा रोग प्रतिरोधक क्षमता, भावनात्मक स्वास्थ्य और शरीर के तरल तत्वों का प्रतिनिधित्व करता है। जब चंद्रमा शनि, राहु या केतु से बहुत अधिक पीड़ित होता है, तो इससे इम्यूनिटी कमज़ोर होने की संभावना मानी जाती है।
- सूर्य जीवन शक्ति और कोशिकाओं की ऊर्जा का कारक है। यदि सूर्य का पाप ग्रहों के साथ मेल या दृष्टि हो, विशेषकर रोग भावों में, तो इसे कोशिकाओं के असंतुलन या क्षय से जोड़ा जाता है।
- कुछ ग्रह योग शरीर में सूजन, रुकावट या विनाशकारी प्रवृत्तियों का संकेत देते हैं, खासकर जब उनका संबंध स्वास्थ्य से जुड़े भावों से हो।
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- राहु–चंद्र या केतु–चंद्र का योग, जिसे ग्रहण योग कहा जाता है, यदि स्वास्थ्य भावों से जुड़ा हो तो इसे शरीर में विषाक्त तत्वों का जमाव, कमज़ोर इम्यून सिस्टम या छुपी हुई बीमारियों से जोड़ा जाता है।
- लग्न भाव शरीर का प्रतिनिधित्व करता है। यदि लग्न या उसके स्वामी पर गंभीर ग्रह दोष हों, तो इससे शरीर की ताकत और रोगों से लड़ने की क्षमता कम हो सकती है।
- शुक्र (प्रजनन तंत्र का कारक) और गुरु (वृद्धि और विस्तार के कारक) जब पीड़ित हों, तो प्रतीकात्मक रूप से असामान्य वृद्धि या हार्मोनल असंतुलन की ओर संकेत कर सकते हैं।
- बुध कोशिकाओं और नसों का प्रतिनिधित्व करता है। जब बुध पर राहु या शनि का प्रभाव होता है, तो ज्योतिष में इसे कोशिकाओं के असामान्य व्यवहार से जोड़ा जाता है।
- आमतौर पर ये ग्रह योग तभी प्रभाव दिखाते हैं जब संबंधित ग्रहों की दशा या अशुभ गोचर चल रहा हो।
अब हम ऊपर बताए गए इन बिंदुओं को कुछ प्रसिद्ध व्यक्तियों की कुंडलियों के माध्यम से समझेंगे, ताकि यह देखा जा सके कि कैसे इन ग्रह योगों ने उनके जीवन में गंभीर समस्याएं पैदा कीं।
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विश्व कैंसर दिवस: सेलेब्रिटी कुंडलियों के माध्यम से कैंसर का विश्लेषण

संजय दत्त की कुंडली में वृश्चिक लग्न है। उनकी कुंडली में मंगल दसवें भाव में स्थित है और उसी भाव में शुक्र भी है। शुक्र उनके लिए सातवें और बारहवें भाव के स्वामी हैं, जो लग्न के लिए मारक ग्रह माना जाता है और मंगल जैसे पाप ग्रह से पीड़ित है। शनि तीसरे और चौथे भाव के स्वामी होकर दूसरे भाव में स्थित है और आठवें भाव पर दृष्टि डाल रहा है। आठवां भाव अचानक होने वाली घटनाओं और लंबे समय की बीमारियों का भाव माना जाता है। शनि केतु के नक्षत्र मूल में स्थित है। मूल नक्षत्र को ड़ से जोड़ा जाता है और इसे कैंसर से भी प्रतीकात्मक रूप से जोड़ा जाता है, क्योंकि जैसे मूल नक्षत्र की जड़ें फैलती हैं, वैसे ही कैंसर भी शरीर के अलग-अलग हिस्सों में फैल सकता है। गुरु आठवें भाव के स्वामी होकर बाहरवें भाव में स्थित है, जो राहु के नक्षत्र में और अस्पताल के भाव में आता है।
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जब शनि की दशा शुरू हुई और अंतर्दशा में केतु सक्रिय हुआ, तब कैंसर की स्थिति बनी। शनि चौथे भाव का भी स्वामी है, और चौथा भाव फेफड़ों और हृदय से संबंधित माना जाता है। इसी कारण उन्हें फेफड़ों के कैंसर (लंग कैंसर) का पता चला। लेकिन गुरु की दृष्टि चौथे, छठे और आठवें भाव पर होने के कारण उन्हें सुरक्षा मिली और वे इस गंभीर बीमारी से उबरने में सफल रहे, जो हर साल लाखों लोगों की जान ले लेती है।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पहला भाव
छठा और आठवां भाव का स्वामी
फेफड़ों का कैंसर