पौष पूर्णिमा व्रत 2026: पौष मास में आने वाली पूर्णिमा को पौष पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। प्रत्येक माह में आने वाली पूर्णिमा का अपना एक अलग महत्व होता है। चंद्र कैलेंडर के अनुसार पौष पूर्णिमा के अगले दिन से ही माघ के महीने का आरंभ हो जाता है।

माघ के महीने में श्रद्धालु प्रात:काल ब्रह्म मुहूर्त में गंगा या यमुना नदी में स्नान करते हैं। इस स्नान का आरंभ पौष पूर्णिमा से होता है और इसका समापन माघ पूर्णिमा पर होता है। इस प्रकार सनातन धर्म में पौष एवं माघ पूर्णिमा विशेष स्थान रखते हैं। मान्यता है कि जो भी व्यक्ति इस बीच दान करता है, उसे दोगुना पुण्य प्राप्त होता है।
आगे जानिए कि पौष पूर्णिमा व्रत 2026 कब है, इसका महत्व क्या है और पौष पूर्णिमा के दिन कौन-से ज्योतिषीय उपाय कर सकते हैं।
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कब है पौष पूर्णिमा व्रत 2025
02 जनवरी, 2026 को शाम 06 बजकर 55 मिनट पर पूर्णिमा तिथि आरंभ होगी और इसका समापन 03 जनवरी, 2026 को दोपहर 03 बजकर 34 मिनट पर होगा। इस प्रकार उदया तिथि के अनुसार पौष पूर्णिमा 03 जनवरी, 2026 को पड़ रही है।
पौष पूर्णिमा 2026 का महत्व
हिंदू धर्म में पौष पूर्णिमा पर व्रत रखने का बहुत महत्व है। यह व्रत पौष माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा पर रखा जाता है। इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान किया जाता है और भगवान विष्णु एवं मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है, सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और इस दिन दान-पुण्य करने का भी विशेष महत्व है।
पौष पूर्णिमा पर तिल, गुड़ और कंबल आदि का दान करना बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करना भी फलदायी होता है। सुख-समृद्धि और मनोकामना की पूर्ति के लिए इस व्रत को रख सकते हैं।
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पौष पूर्णिमा व्रत 2026 की पूजन विधि
पौष पूर्णिमा पर व्रत रखने पर आप आगे बताई गई विधि से पूजन कर सकते हैं:
- पौष पूर्णिमा व्रत के दिन सुबह स्नान करने के बाद आप गेहूं और अनाज की पांच ढेर बनाएं और उसके ऊपर भगवान विष्णु, सूर्य, रुद्र, ब्रह्मा जी और मां लक्ष्मी को स्थापित करें।
- अगर आपके पास इनमें से किसी आराध्य की तस्वीर नहीं है, तो आप उनका ध्यान करते हुए उनके नाम से एक फूल उस ढेर पर रख दें।
- फिर आप क्रम के अनुसार इनकी पूजा करें और घी का दीपक जलाकर देवी-देवताओं को तिल, गुड़ और फलों का प्रसाद चढ़ाएं।
- अब आरती करें और अगले दिन इस अनाज को किसी गरीब या ब्राह्मण को दान कर दें।
- पौष पूर्णिमा व्रत 2026 पर शाम के समय खीर बनाकर मां लक्ष्मी को भोग लगाएं और आरती करें। ऐसा करने से आपके घर से दुख और गरीबी खत्म होगी एवं परिवार में खुशियां आएंगी।
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शाकंभरी पूर्णिमा 2026 भी है
पौष पूर्णिमा पर भारत के कुछ राज्यों या हिस्सों में शाकंभरी पूर्णिमा भी मनाई जाती है। लोक मान्यता के अनुसार शाकंभरी देवी ने पृथ्वी को सूखे और अकाल की स्थिति से बचाया था एवं शाकंभरी देवी मां दुर्गा का अवतार थीं। मां शाकंभरी को फलों, हरी पत्तियों और सब्जियों की देवी के रूप में जाना जाता है और वे अपने भक्तों की राक्षसों से सुरक्षा करती हैं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार देवी शाकंभरी ने दुर्गमा नाम के राक्षस का वध किया था। पौष पूर्णिमा पर मां शाकंभरी का आशीर्वाद लेने के बाद दुर्गा चालीसा का पाठ किया जाता है। इस दिन भगवद् गीता और रामायण का पाठ करना भी शुभ माना गया है। कृष्ण मंदिरों में इस दिन पुष्यभिषेक यात्रा निकाली जाती है।
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पौष पूर्णिमा व्रत 2026 पर क्या करें
पौष पूर्णिमा व्रत 2026 पर निम्न कार्य करने चाहिए:
सत्यनारायण व्रत कथा: इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की उपासना करने का विधान है। इस दिन श्रद्धालु पूर्णिमा का व्रत रखते हैं एवं सत्यनारायण व्रत कथा पढ़ते हैं। ऐसा माना जाता है कि पौष पूर्णिमा पर इस कथा को पढ़ने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
पवित्र नदी में स्नान: इस शुभ दिन पर पवित्र नदी में डुबकी लगाने से पिछले जन्मों के सारे पाप धुल जाते हैं।
मां दुर्गा की पूजा: अगर कोई व्यक्ति पौष पूर्णिमा या पूर्णिमा के दिन चंद्रमा या मां दुर्गा की उपासना करता है, तो उसे चंद्र देव की कृपा प्राप्त होती है और उनके नकारात्मक प्रभावों में कमी आती है।
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पौष पूर्णिमा से कल्प वास शुरू होता है
सनातन धर्म में पौष पूर्णिमा से माघ स्नान की शुरुआत होती है। पौष पूर्णिमा पर व्रत रखने पर सूर्यादय से पहले माघ स्नान करने का बहुत महत्व है और पौष पूर्णिमा के बाद पूरे माघ के महीने में इस नियम का पालन किया जाता है।
माघ के महीने में सर्दी बहुत तेज होती है इसलिए जो भी व्यक्ति इस दौरान सूर्योदय से पहले गंगा में स्नान करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। यदि कोई व्यक्ति गंगा के तट पर माघ के महीने में रहकर कल्पवास करते हुए स्नान नहीं कर सकता है, तो वह घर पर ही नहाने के पानी में गंगा जल मिलाकर स्नान कर सकता है। इससे भी पुण्य की प्राप्ति होती है।
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पौष पूर्णिमा व्रत 2026 का धार्मिक महत्व
पौष मास में आने वाली पूर्णिमा पर काशी, प्रयागराज और हरिद्वार में शाही स्नान का आयोजन किया जाता है। इस दिन सूर्य को अर्घ्य देने का भी बहुत महत्व है। इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों की पूजा करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है।
पौष पूर्णिमा व्रत 2026 पर इस स्तोत्र का पाठ करें
अगर आप पौष पूर्णिमा का व्रत रख रहे हैं, तो इस दिन कनकधारा स्तोत्र का पाठ जरूर करें। ऐसा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और आपका घर धन-धान्य से संपन्न रहता है। यदि कोई व्यक्ति पैसों की तंगी से जूझ रहा है, तो उसे यह उपाय जरूर करना चाहिए।
पौष पूर्णिमा 2026 पर होने वाले आयोजन
पौष पूर्णिमा के दिन देश के विभिन्न तीर्थस्थानों पर पवित्र नदियों में स्नान करने की व्यवस्था और धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। इस दिन धार्मिक आयोजनों के दौरान स्नान करने का विशेष महत्व होता है। जो व्यक्ति माघ माह में स्नान का संकल्प लेना चाहता है, उसे यह संकल्प पौष पूर्णिमा पर ही लेना चाहिए।
पौष पूर्णिमा व्रत 2026 पर किन बातों का ध्यान रखें
पौष पूर्णिमा व्रत 2026 पर निम्न उपाय करने से पुण्य एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है:
- पौष पूर्णिमा के साथ अन्य सभी पूर्णिमा पर चावल का दान करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार चावल का संबंध चंद्रमा से होता है और पूर्णिमा के दिन चावल का दान करने से कुंंडली में चंद्रमा मज़बूत होता है।
- चूंकि, पूर्णिमा का संबंध चंद्रमा से होता है इसलिए इस दिन सफेद रंग की चीज़ों का दान करने से भी चंद्रमा को बल मिलता है।
- पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण भगवान की कथा सुनने का बहुत महत्व है।
- मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए पूर्णिमा के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करें। मान्यता है कि पीपल के पेड़ में मां लक्ष्मी का वास होता है इसलिए उसकी पूजा करने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
- पौष पूर्णिमा व्रत 2026 रखने पर शरीर पर सरसों का तेल लगाकर स्नान करें और अपने नहाने के पानी में थोड़ा-सा परफ्यूम डालकर उस पानी से स्नान करें।
- लड्डू गोपाल की मूर्ति पर घी चढ़ाएं। श्री विष्णु, देवराज और बृहस्पति देव के मंत्रों का जाप करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पौष मास में आने वाली पूर्णिमा के दिन।
पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण भगवान की कथा सुनने का बहुत महत्व है।
इस दिन कनकधारा स्तोत्र का पाठ जरूर करें।