जानें वास्तु शास्त्र के अनुसार किस दिशा पर है किस देवता का अधिकार

वास्तु शास्त्र में दिशाओं का बड़ा महत्व है। वास्तु शास्त्र का मानना है कि प्रत्येक दिशा पर किसी न किसी देवता का अधिकार होता है और ऐसे में किसी भी दिशा में रखी गयी किसी भी वस्तु के आकार, रंग व उपयोग के हिसाब से उस जगह पर रहने वाले जातकों के जीवन पर नकारात्मक या फिर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। लेकिन कई लोगों को दिशाओं का ज्ञान नहीं होता है कि किस दिशा पर किस देवता का आधिपत्य है।

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ऐसे में आज हम आपको इस लेख में इस बात की जानकारी देने वाले हैं कि वास्तु शास्त्र के अनुसार किस दिशा पर किस देवता का आधिपत्य माना गया है।

पूर्व दिशा

चूंकि पूर्व दिशा से सूर्य उदय होता है इसलिए सूर्य को ही पूर्व दिशा का मालिक माना गया है लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार पूर्व दिशा पर स्वर्ग के अधिपति देवराज इंद्र का आधिपत्य है।

दक्षिण पूर्व दिशा

वास्तु शास्त्र के अनुसार किसी भी स्थान की दक्षिण-पूर्व दिशा पर अग्नि देवता का आधिपत्य होता है। अग्नि देवता पृथ्वी पर मौजूद हर अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस दिशा में राखी गयी सही या गलत वस्तु जातकों के पेट और स्वास्थ्य पर सकारात्मक या नकारात्मक असर डालती है।

दक्षिण दिशा

वास्तु शास्त्र के अनुसार दक्षिण दिशा पर मृत्यु के देवता यमराज का आधिपत्य है। यही वजह है कि घर के कई कार्य दक्षिण दिशा में करना वास्तु शास्त्र में वर्जित माना गया है जैसे कि दक्षिण दिशा में सिर रख कर सोना भी वास्तु शास्त्र में गलत माना गया है।

दक्षिण पश्चिम दिशा

वास्तु शास्त्र के अनुसार किसी भी जगह के दक्षिण पश्चिम दिशा पर निरती देवता का आधिपत्य है। निरती देवता असुरों के स्वामी माने जाते हैं। यही वजह है कि इस दिशा को नैऋत्य कोण भी कहा जाता है। इस दिशा में ही घर के स्वामी का कमरा होना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार इस दिशा में खिड़की या दरवाजे नहीं होने चाहिए।

पश्चिम दिशा

वास्तु शास्त्र के मुताबिक पश्चिम दिशा के स्वामी वरुण देव हैं जो कि विश्व के सभी द्रव्य के स्वामी हैं। इस दिशा पर शनि का भी प्रभाव होता है क्योंकि इस दिशा में सूर्य अस्त होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार पश्चिम दिशा में मुख कर के कोई कार्य करने से मन अशांत होता है। वहीं इस दिशा में मुख कर के भोजन करने पर किसी प्रकार की मनाही नहीं है। इस दिशा की पूजा करने से ऐश्वर्य और सौभाग्य में इजाफा होता है।

उत्तर पश्चिम दिशा

वास्तु शास्त्र के अनुसार उत्तर पश्चिम दिशा पर पवन देव का आधिपत्य है। इसलिए इस दिशा को वायव्य कोण भी कहा जाता है। उत्तर पश्चिम दिशा दीर्घायु, स्वास्थ्य और शक्ति प्रदान करता है। इस दिशा में यदि कोई वास्तु दोष हो तो मित्र और संबंधी भी जातकों के दुश्मन बन जाते हैं।

उत्तर दिशा

उत्तर दिशा धन के देवता कुबेर का अधिकार क्षेत्र माना गया है। घर में यदि कोई तिजोरी हो या फिर ऐसी कोई जगह जहां आप रुपये-पैसे रखते हैं तो उसे उत्तर दिशा में रखने से आर्थिक जीवन में सकारात्मक फल प्राप्त होता है।

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उत्तर पूर्व दिशा

किसी भी जगह की उत्तर पूर्व दिशा के स्वामी भगवान सूर्य माने गए हैं। इस दिशा को ईशान कोण भी कहा जाता है। उत्तर-पूर्व दिशा को हमेशा साफ रखना चाहिए अन्यथा आर्थिक जीवन के साथ-साथ सामाजिक मान सम्मान की भी हानि होती है।

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