बलराम जयंती आज: जानें महिलाओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है यह त्यौहार!

जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है बलराम जयंती के दिन विशेष रूप से श्री बलराम जी की पूजा की जाती है। बलराम जी श्री कृष्ण ने बड़े भाई थे, शेषनाग को भी उनका ही अवतार माना जाता है। जिस प्रकार से कृष्ण जन्म को जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है उसी प्रकार से बलराम जी का जिस दिन जन्म हुआ उसे बलराम जयंती के नाम से मनाया जाता है। इस त्यौहार को विशेष रूप से महिलाओं के लिए ख़ासा महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन महिलाएं विशेष रूप से अपने संतान की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं और बलराम देव की पूजा अर्चना करती हैं। इस दिन को हलछठ बलराम जयंती के नाम से भी जाना जाता है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं इस विशेष त्यौहार का महत्व और पूजा विधि के बारे में। 

बलराम जयंती का महत्व 

प्रत्येक साल बलराम जयंती का त्यौहार रक्षाबंधन के ठीक छह दिन के बाद मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि भादो मास के कृष्ण पक्ष की षष्टी तिथि को ही शेषनाग अवतार बलराम जी ने भगवान कृष्ण के बड़े भाई के रूप में जन्म लिया था। बलराम जयंती को भारत के विभिन्न राज्यों में हलछठ जयंती, चंदन छठ, रंधन छठ, बलदेव छठ, और ललही छठ के नाम से भी मनाया जाता है। इस दिन खासतौर से बलराम जी की पूजा अर्चना की जाती है। साथ ही आज के दिन हल की पूजा भी की जाती है, जिस प्रकार से सभी अन्य देवताओं के पास अपने अलग-अलग अस्त्र-शास्त्र थे उसी प्रकार से बलराम जी के पास हल था। इसलिए भी आज के दिन हल का पूजा पाठ किया जाना ख़ासा मायने रखता है। 

बलराम जयंती के दिन महिलाएं करती है विशेष पूजा 

बलराम जयंती के अवसर पर महिलाएं विशेष रूप से अपने संतान की लंबी उम्र के लिए व्रत रखकर विधि पूर्वक बलराम जी की पूजा आराधना करती हैं। ऐसी मान्यता है कि आज के दिन बलराम जी की पूजा करने और व्रत रखने से परिवार में सुख समृद्धि आती है। किसान वर्ग इस दिन खासतौर से हल की भी पूजा करते हैं और विशेष रूप से आज हल द्वारा बोये गए अनाज या सब्जियों को खाना महत्वपूर्ण माना जाता है। किसान आज के दिन हल के साथ ही साथ बैल की भी पूजा करते हैं और इस दिन भैंस के दूध का प्रयोग नहीं किया जाता है। 

बलराम जयंती पूजा विधि 

बता दें कि बलराम जयंती की पूजा विधि आज सुबह साढ़े पांच बजे से ही शुरू हो जायेगी और 22 अगस्त सुबह सात बजकर छह मिनट पर खत्म होगी। व्रती महिलाएं आज पूरा दिन व्रत रखती हैं और अगले दिन सुबह चावल से बना कोई भी पदार्थ खाकर व्रत खोलती हैं। आज व्रत रखने वाली  महिलाएं केवल फलों का ही सेवन करती हैं। व्रती महिलाओं के लिए दूध से बने किसी भी खाद्य पदार्थ का सेवन करना निरीह माना जाता है। आज बलराम जी की पूजा के लिए सबसे पहले उन्हें महुआ का पत्ता, घी में भुना हुआ चना, अक्षत, चंदन और भैंस के दूध से बना घी या दही चढ़ाया जाता है। इसके बाद मिट्टी का दीया जलाकर उनकी पूजा अर्चना की जाती है।

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