शुक्र का कुंभ राशि में गोचर: वैदिक ज्योतिष में शुक्र ग्रह को महत्वपूर्ण दर्जा प्राप्त है जो मनुष्य जीवन को प्रभावित करने का अपार सामर्थ्य रखते हैं। इन्हें प्रेम का देवता भी कहा जाता है जो प्रेम, सौंदर्य, ऐश्वर्य और विलासिता के कारक हैं इसलिए कुंडली में इनकी स्थिति पर विशेष रूप से ध्यान दिया जाता है।
अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में शुक्र देव मज़बूत स्थिति में होते हैं, तो जातक को प्रसिद्धि, समृद्धि, रचनात्मकता और प्रेमपूर्ण रिलेशनशिप का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। वहीं, इनकी अशुभ अवस्था आपके जीवन को कई तरह की समस्याओं से भरने का काम करती है। ऐसे में, अब शुक्र ग्रह जल्द ही अपनी राशि में परिवर्तन करते हुए कुंभ राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं।

एस्ट्रोसेज एआई का यह ब्लॉग आपको “शुक्र का कुंभ राशि में गोचर” से जुड़ी समस्त जानकारी प्रदान करेगा जैसे तिथि, समय और महत्व आदि। इसके अलावा, शुक्र के इस गोचर से किन योगों का निर्माण होगा? किन ग्रहों के साथ शुक्र युति करेंगे और शुक्र ग्रह के नकारात्मक प्रभावों से बचने के लिए आप किन उपायों को अपना सकते हैं? इससे भी हम आपको अवगत करवाएंगे। तो चलिए बिना देर किए शुरुआत करते हैं और जानते हैं शुक्र के इस गोचर के बारे में।
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शुक्र का कुंभ राशि में गोचर के बारे में बात करने से पहले जान लेते हैं शुक्र से जुड़ी कुछ रोचक बातें। नवग्रहों में शुक्र एकमात्र ऐसा ग्रह है जो मनुष्यों के भीतर भौतिक वस्तुओं के प्रति लगाव को नियंत्रित करता है। साथ ही, इनके प्रभाव की वजह से ही लोग आपके प्रति और आप दूसरों के प्रति आकर्षित महसूस करते हैं। ज्योतिष में शुक्र देव को स्त्री ऊर्जा का ग्रह माना जाता है और इनकी ऊर्जा हार्मोनिक प्रकृति की होती है, इसलिए विश्व के सभी शांतिदूतों की कुंडली में शुक्र देव मज़बूत स्थिति में होते हैं। आइए अब आपको अवगत करवाते हैं शुक्र गोचर की तिथि और समय से।
शुक्र का कुंभ राशि में गोचर: तिथि और समय
शुक्र देव सूर्य के बाद सबसे चमकीला ग्रह है जिसे आसमान में सुबह और शाम के समय आसानी से देखा जा सकता है। बता दें कि शुक्र देव तकरीबन हर 30 दिन में अपना राशि परिवर्तन करते हैं और इसके बाद एक राशि से दूसरी राशि में गोचर कर जाते हैं। इसी क्रम में, शुक्र महाराज 06 फरवरी 2026 की रात 12 बजकर 52 मिनट पर मकर राशि से निकलकर कुंभ राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। इस राशि में शुक्र देव 02 मार्च 2026 तक रहेंगे और ऐसे में, कई ग्रहों के साथ युति करेंगे और अनेक शुभ योगों का निर्माण करेंगे।
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कुंभ राशि में शुक्र करेंगे बड़े ग्रहों के साथ युति
जब-जब ग्रह अपनी राशि में परिवर्तन या फिर गोचर करते हैं, तब अक्सर अनेक प्रकार की युतियों का निर्माण होता है। इसी प्रकार, जब शुक्र 06 फरवरी 2026 को कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे, उस समय वहाँ पहले से बुध ग्रह मौजूद होंगे। इसके कुछ समय बाद सूर्य और मंगल भी कुंभ राशि में आ जाएंगे जिससे चतुर्ग्रही योग, बुधादित्य योग और लक्ष्मीनारायण योग जैसे शुभ योगों का निर्माण होगा। यह चार शुभ योग कुंभ राशि में बनने जा रहे हैं जो शनि देव की राशि है। हालांकि, इन सब योगों का प्रभाव जातकों के जीवन पर अलग-अलग तरह से पड़ेगा। लेकिन ज्यादातर लोगों को इन योगों से शुभ परिणामों की प्राप्ति होगी। अब हम आपको रूबरू करवाते हैं कुंभ राशि में शुक्र के प्रभाव से।
कुंभ राशि में शुक्र ग्रह का प्रभाव
राशि चक्र की ग्यारहवीं राशि कुंभ है जिसके अधिपति देव शनि ग्रह हैं। जब शुक्र देव कुंभ राशि में मौजूद होते हैं, तब जातक को समृद्धि, वैभव और कलात्मकता प्रदान करते हैं जिसके प्रभाव से उसका दृष्टिकोण अधिक आशावादी बनता है। हालांकि, ऐसे जातकों के व्यक्तित्व में कभी-कभार आज्ञा न मानने की प्रवृत्ति और उग्रता जैसे अवगुण भी देखने को मिलते हैं। कुंभ राशि में बैठे शुक्र ग्रह के प्रभाव से जातक दिल के मामलों में हमेशा पारंपरिक रास्तों पर चलने के बजाय एक अलग रास्ता अपनाना पसंद करता है।
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शुक्र की कुंभ राशि में उपस्थिति स्त्री और पुरुष दोनों को विपरीत या अपरंपरागत संबंधों की ओर आकर्षित करती है। इस राशि में शुक्र महाराज का प्रभाव होने के कारण जातक अपने रिश्ते को लेकर नए नियमों और मान्यताओं का निर्माण कर सकता है। लेकिन, कई बार आप खुद इन नियमों का पालन करने में असफल रह सकते हैं। इसी क्रम में, इस गोचर के दौरान व्यक्ति सामने वाले की तीव्र बुद्धि की प्रशंसा करता है और उनके नए-नए विचारों से प्रेरणा प्राप्त करता है। साथ ही, भविष्य को लेकर आपकी सोच और कल्पनाशीलता खुद को भी हैरान कर सकती है।
ज्योतिषीय दृष्टि से शुक्र ग्रह
शुक्र देव को धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष स्थान प्राप्त है क्योंकि यह मनुष्य जीवन के महत्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे प्रेम, विवाह को नियंत्रित करते हैं। बता दें कि ज्योतिष शास्त्र में शुक्र महाराज को एक लाभकारी ग्रह माना गया है जो जन्म कुंडली में दूसरे और सातवें भाव के स्वामी हैं। शुक्र देव हर राशि में लगभग 30 दिनों तक भ्रमण करते हैं और इसके बाद वह दूसरी राशि में प्रवेश कर जाते हैं। इसी तरह 27 नक्षत्रों में शुक्र को पूर्वाषाढ़ा, भरणी और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्रों का स्वामित्व प्राप्त है। नवग्रहों में शनि और बुध ग्रह को शुक्र का मित्र माना गया है, जबकि सूर्य और चंद्रमा से यह शत्रुता का भाव रखते हैं।
मीन राशि में शुक्र ग्रह उच्च अवस्था में होते हैं और कन्या राशि इनकी नीच राशि मानी जाती है। साथ ही, विलासिता, ऐश्वर्य और भौतिक सुखों के कारक शुक्र ग्रह वैवाहिक जीवन का भी प्रतिनिधित्व करते हैं, जिनके प्रभाव से रिश्तों में प्रेम, आपसी समझ और सामंजस्य बढ़ता है। अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में शुक्र देव मज़बूत स्थिति में होते हैं, तो उसका वैवाहिक जीवन सुखद और शांतिपूर्ण रहता है।
विशेष रूप से महिलाओं की कुंडली में शुक्र ग्रह की स्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि यह प्रेम, सौंदर्य और स्त्री जीवन से जुड़े भौतिक पहलुओं को भी नियंत्रित करते हैं। शुक्र की कृपा से ही जातक को रचनात्मक, कला और संगीत जैसे क्षेत्रों में सफलता प्राप्त होती है। साथ ही, वह जीवन में अनेक प्रकार के सुखों का आनंद लेता है। इसके अलावा, शुक्र के मज़बूत अवस्था में होने से जातक डिजाइन, इंटीरियर डिज़ाइन और फैशन के क्षेत्र में कामयाबी हासिल करता है। आइए अब आपको अवगत करवाते हैं शुक्र ग्रह के धार्मिक महत्व से।
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धार्मिक दृष्टि से शुक्र ग्रह का महत्व
धार्मिक दृष्टि से भी शुक्र ग्रह को विशिष्ट स्थान दिया गया है। शास्त्रों में इन्हें असुरों का गुरु माना जाता है इसलिए शुक्र ग्रह को दैत्य गुरु और शुक्राचार्य भी कहा जाता है। बात करें अगर धर्म ग्रंथों में वर्णन की, तो शुक्राचार्य ने असुरों को ज्ञान, विज्ञान और जीवन से जुड़े गूढ़ रहस्यों की शिक्षा प्रदान की थी। उन्हें अनेक मंत्रों और औषधियों का आविष्कारक माना जाता है जिनकी सहायता से असुरों ने देवताओं के साथ हुए युद्धों में विजय प्राप्त की थी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शुक्राचार्य को संजीवनी विद्या का अद्वितीय ज्ञान प्राप्त था। यह विद्या इतनी शक्तिशाली मानी जाती है कि इसके प्रयोग से मृत व्यक्ति को भी पुनर्जीवित किया जा सकता था।
वैज्ञानिक दृष्टि से शुक्र ग्रह का महत्व
शुक्र ग्रह का महत्व धर्म और ज्योतिष तक सीमित नहीं है, बल्कि इन्हें विज्ञान के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। विज्ञान में शुक्र ग्रह और पृथ्वी को जुड़वां बहन कहा जाता है क्योंकि इन दोनों ग्रहों का आकार और संरचना काफी हद तक एक समान है और इनमें कई भौतिक समानताएं देखने को मिलती हैं। शुक्र ग्रह की सतह भी पृथ्वी के समान मज़बूत और चट्टान से बनी हुई है।
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अगर हम बात करें शुक्र ग्रह के वायुमंडल की, तो इसमें मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड और सल्फ्यूरिक एसिड पाया जाता है जो इसे अत्यंत घना और विषैला बनाता है। अत्यधिक तापमान के कारण शुक्र ग्रह को सबसे गर्म ग्रहों में गिना जाता है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि शुक्र ग्रह पर बड़ी संख्या में जवालामुखी बने हुए हैं जिसकी वजह से इसका तापमान सदैव गर्म रहता है।
शुक्र की स्थिति कुंडली में शुभ-अशुभ किस तरह के परिणाम देती है? आइए जानते हैं।
कुंडली में शुक्र ग्रह का शुभ प्रभाव
- ऐसे जातक जिनकी कुंडली में शुक्र ग्रह की स्थिति बहुत शुभ होती है, उनका प्रेम जीवन और वैवाहिक जीवन दोनों सुखी और प्रेमपूर्ण रहता है। साथ ही, वह खुशहाली से अपना जीवन व्यतीत करते हैं।
- यदि कुंडली में शुक्र की स्थिति अत्यंत बलवान होती है, तो वह जातक को मज़बूत आर्थिक स्थिति का आशीर्वाद देती है। इसके अलावा, उन्हें कभी भी अपने जीवन में धन से संबंधित समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता है।
- शुक्र देव की कृपा और आशीर्वाद से ही व्यक्ति का वैवाहिक और पारिवारिक जीवन शांति और सुखमय रहता है। साथ ही, वह प्रेम संबंधों का आनंद लेने में सफल होता है।
- शुक्र ग्रह का कुंडली में शुभ प्रभाव होने से जातक सौंदर्य, आकर्षण, संगीत, प्रेम और वैवाहिक जीवन में शुभ परिणाम प्राप्त करने में सक्षम होता है क्योंकि इनका संबंध शुक्र ग्रह से होता है।
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शुक्र ग्रह का मनुष्य जीवन पर अशुभ प्रभाव
- कुंडली में शुक्र ग्रह का नकारात्मक प्रभाव होने के कारण जातक को विवाह में देरी या विवाह के मार्ग में समस्याओं का सामना करना पड़ता है। साथ ही, ऐसा इंसान अपने वैवाहिक जीवन में अप्रसन्न रह सकता है।
- शुक्र देव के दुर्बल अवस्था में होने पर जातक के व्यक्तित्व में आकर्षण की कमी होने लगती है और चेहरे से चमक भी धीरे-धीरे कम होने लगती है।
- कमज़ोर शुक्र का प्रभाव आपको जीवन में त्वचा और आंखों से जुड़ी समस्याएं दे सकता है।
- शुक्र देव की नकारात्मकता की वजह से व्यक्ति के जीवन में भौतिक सुखों का अभाव रहता है और उसे जीवन में वाहन या घर का सुख पाने में काफ़ी संघर्ष करना पड़ता है।
- प्रेम जीवन के रिश्तों का सफल होना भी शुक्र की स्थिति पर निर्भर करता है। यदि शुक्र कमज़ोर है, तो आपका प्रेम जीवन असफल या फिर रिश्ता टूटने की नौबत बन सकती है।
- ऐसे लोग जो कलात्मक क्षेत्रों या फिर संगीत में रुचि रखता है, उन्हें बार-बार असफलता का सामना करना पड़ता है जिसकी वजह शुक्र की दुर्बलता होती है।
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शुक्र ग्रह को इन उपायों से करें कुंडली में मज़बूत
- शुक्र ग्रह को कुंडली में मज़बूत करने के लिए हर रोज़ या शुक्रवार के दिन “ॐ शुं शुक्राय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।
- शुक्रवार का संबंध सफ़ेद रंग से माना जाता है इसलिए शुक्र देव से शुभ फल पाने के लिए सफ़ेद चीज़ों जैसे चावल, दूध, दही, सफेद वस्त्र आदि का दान करने फायदेमंद होता है। ऐसा करने से शुक्र देव मज़बूत होते हैं।
- गरीब कन्याओं को शुक्रवार के दिन सफ़ेद चीज़ों का दान करें।
- शुक्र महाराज की कृपा प्राप्ति के लिए शुक्रवार का नियमित रूप से व्रत करें और संभव हो, तो इस दिन सफेद वस्त्र धारण करें।
- मान्यता है शुक्र को हीरा रत्न बहुत प्रिय होता है इसलिए कुंडली में शुक्र की मज़बूती के लिए हीरा धारण करें। लेकिन, ऐसा किसी अनुभवी ज्योतिषी से परामर्श लेने के बाद ही करें।
- धन की देवी माता लक्ष्मी से भी शुक्र का संबंध माना गया है। ऐसे में, शुक्र देव को प्रसन्न करने के लिए देवी लक्ष्मी को शुक्रवार के दिन 5 लाल रंग के फूल अर्पित करें।
कालसर्प दोष रिपोर्ट – काल सर्प योग कैलकुलेटर
शुक्र का कुंभ राशि में गोचर: राशि अनुसार प्रभाव और उपाय
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शुक्र महाराज 06 फरवरी 2026 की रात 12 बजकर 52 मिनट पर कुंभ राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं।
ज्योतिष में कुंभ राशि के स्वामी शनि देव को माना गया है।
ज्योतिष के अनुसार, शुक्र देव एक राशि में लगभग 27 दिन रहते हैं, फिर दूसरी राशि में चले जाते हैं।