आज है मार्च महीने की सबसे शुभ दिन फुलेरा दूज, जानें इस दिन की कथा

आज फुलेरा दूज का त्यौहार मनाया जा रहा है। फुलेरा दूज हिंदू धर्म में अबूझ मुहूर्त माना जाता है। अबूझ मुहूर्त का अर्थ है कि, इस दिन कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य करने के लिए आपको शुभ मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती है। इस दिन का हर एक क्षण शुभ होता है। प्रत्येक वर्ष फुलेरा दूज का यह शुभ त्यौहार  फाल्गुन माह में बसंत पंचमी और होली के बीच मनाया जाता है। 

फुलेरा दूज के दिन राधा कृष्ण की पूजा किए जाने का विधान है। मान्यता है जिन व्यक्तियों की कुंडली में प्रेम का अभाव हो या जीवन में जीवन साथी से काफी लड़ाई या फिर विवाद चल रहा हो उन्हें फुलेरा दूज के दिन पूजा अवश्य करनी चाहिए। सिर्फ इतना ही नहीं किसी भी नए या मांगलिक कार्य को करने के लिए भी फुलेरा दूज का यह दिन बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन रिकॉर्ड तोड़ शादियां होती हैं। 

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कैसे हुई फुलेरा दूज की परंपरा की शुरुआत 

माना जाता है कि, फुलेरा दूज के दिन ही ब्रज में राधा कृष्ण और गोपियों ने एक दूसरे पर फूल बरसाए थे। जिसके बाद इस परंपरा की शुरुआत हुई। यही वजह है कि, फुलेरा दूज का यह पर्व होली के आगमन का प्रतीक भी माना जाता है क्योंकि इस दिन फूलों से होली खेली जाती है। 

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फुलेरा दूज से जुड़ी पौराणिक कथा 

फुलेरा दूज से जुड़ी पौराणिक कथा के अनुसार बताया जाता है कि, जब ब्रज में काम की वजह से भगवान श्री कृष्ण वृंदावन राधा जी से मिलने नहीं आ पा रहे थे तो इससे राधा जी काफी दुखी हुई क्योंकि, उन्होंने काफी दिनों से भगवान कृष्ण को देखा नहीं था और ना ही उनसे मुलाकात की थी। ऐसे में राधा रानी को परेशान देखकर उनकी गोपियां भी परेशान हो गई। राधा जी के उदास होने से ब्रज के जंगल सूखने लग गए और वहां उगे हुए फूल भी मुरझाने लगे। 

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ऐसे में जब प्रभु श्री कृष्ण को राधा रानी की हालत और वनों की स्थिति के बारे में पता चला तो वह तुरंत ही उनसे मिलने वृंदावन पहुंच गए। इतने दिनों बाद कृष्ण जी को अपने सामने देखकर राधा रानी बेहद खुश हुई और उनकी खुशी के चलते चारों तरफ हरियाली छा गयी। राधा रानी जब खुश हुई तो वन और फूल दोबारा खिल उठे, पक्षी चहचहाने लगे और हर तरफ खुशियां छा गई। 

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इसी दौरान राधा रानी को छेड़ने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने पास में ही उगे फूलों को तोड़कर राधा जी पर फेंकना शुरू कर दिया। इसके बाद राधा रानी ने भी फूल तोड़ कर कृष्ण जी पर डालना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे वहां मौजूद गोपियां और ग्वालों ने भी फूलों से होली खेली शुरू कर दी। माना जाता है कि, तभी से हर साल मथुरा में फुलेरा दूज के दिन फूलों की होली खेले जाने की परंपरा की शुरुआत हो गई।

फुलेरा दूज सावधानियां

  • इस  दिन की पूजा शाम के समय करना सबसे ज़्यादा उत्तम, शुभ और फलदायी होता है।
  • इस दिन की पूजा में वस्त्रों का विशेष ध्यान दें। प्यार के लिए पूजा कर रहे हैं तो गुलाबी रंग के वस्त्र पहनकर इस दिन की पूजा करें।
  • वैवाहिक जीवन की समस्याओं को दूर करने के लिए पूजा कर रहे हैं तो पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
  • इस दिन सात्विक भोजन ही ग्रहण करें।

हम आशा करते हैं कि, आपको यह लेख पसंद आया होगा। अब तक एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

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