इस बेहद शुभ योग में रखा जाएगा आमलकी एकादशी 2026 व्रत, जानें शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और कथा
आमलकी एकादशी 2026: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को बहुत शुभ माना जाता है जो हर माह आती है। बता दें कि एक वर्ष में कुल 24 एकादशी तिथियां पड़ती हैं क्योंकि हर महीने में दो एकादशी पड़ती है। हालांकि, प्रत्येक एकादशी का धार्मिक रूप से अपना महत्व होता है और इन्हीं में से एक है आमलकी एकादशी। इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु और आंवले के वृक्ष की पूजा का विधान है। मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त आमलकी एकादशी का व्रत सच्चे मन से करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
एस्ट्रोसेज एआई का यह विशेष ब्लॉग आपको “आमलकी एकादशी 2026” के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान करेगा। साथ ही, कब रखा जाएगा आमलकी एकादशी का व्रत? क्या है इस एकादशी का धार्मिक महत्व और इस दिन पर किन उपायों को अपनाकर आप भगवान विष्णु की कृपा पा सकते हैं, इसके बारे में भी हम बताएंगे। तो आइए बिना देर किए हम इस ब्लॉग की शुरुआत करते हैं और जानते हैं आमलकी एकादशी 2026 व्रत के बारे में।
आमलकी एकादशी 2026: तिथि व मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी के नाम से जाना जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार, यह एकादशी फरवरी से मार्च में आती है। सामान्य रूप से हर साल आमलकी एकादशी व्रत महाशिवरात्रि और होली के बीच में पड़ता है। इस एकादशी को रंगभरी एकादशी भी कहते हैं। बता दें कि आमलकी एकादशी व्रत इस साल 27 फरवरी 2026, शुक्रवार को रखा जाएगा। मान्यता है कि इस एकादशी पर भगवान विष्णु आंवला के पेड़ में निवास करते हैं इसलिए इनकी पूजा आंवले के रूप में पूजा की जाती है।
आमलकी एकादशी की तिथि: 27 फरवरी 2026, शुक्रवार
आमलकी एकादशी पारणा मुहूर्त: 28 फरवरी की सुबह 06 बजकर 47 से सुबह 09 बजकर 06 मिनट तक। अवधि: 02 घंटे 18 मिनट एकादशी तिथि का आरंभ: 27 फरवरी 2026 की रात 12 बजकर 36 मिनट से,
एकादशी तिथि समाप्त: 27 फरवरी 2026 की रात 10 बजकर 35 मिनट पर।
आइए अब जान लेते हैं आमलकी एकादशी पर बनने वाले शुभ योग के बारे में।
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आमलकी एकादशी 2026 पर बनेगा ये शुभ योग
आमलकी एकादशी पर आंवले के वृक्ष की पूजा शुभ होती है क्योंकि इस दिन आंवले के पेड़ में श्रीहरि विष्णु निवास करते हैं। यह तिथि मोक्ष प्राप्ति के लिए सर्वश्रेष्ठ होती है। बता दें कि साल 2026 की आमलकी एकादशी बहुत ख़ास होने वाली है क्योंकि इस दिन शुभ माने जाने वाला आयुष्मान योग बन रहा है। आयुष्मान योग के प्रभाव से किसी व्यक्ति के जीवन में आध्यात्मिकता में वृद्धि होती है। साथ ही, जातक को मानसिक शांति और संतुलन प्रदान करता है। आमलकी एकादशी पर व्रत एवं पूजन करने से शुभ फल में कई गुना वृद्धि होगी। साथ ही, भक्त की धार्मिक कार्यों और ध्यान में रुचि बढ़ती है।
आमलकी एकादशी का धार्मिक महत्व
आमलकी एकादशी का धार्मिक दृष्टि से अपना विशिष्ट महत्व है। बात करें इसके अर्थ की, तो आमलकी शब्द का अर्थ आंवला से होता है जिसे हिंदू धर्म और आयुर्वेद में महत्वपूर्ण माना गया है। पद्म पुराण के अनुसार, भगवान श्रीहरि विष्णु को आंवला अत्यंत प्रिय है। इसी कारण आमलकी एकादशी के दिन आंवले के वृक्ष की विधिपूर्वक पूजा करने और आंवले का दान करना बहुत शुभ माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आमलकी एकादशी का व्रत करने से भक्तों को सौ गोदान के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है इसलिए इस एकादशी को सनातन धर्म में अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ आंवले के वृक्ष की पूजा करने का विधान है। ऐसा माना जाता है कि आंवला के पेड़ की आराधना करने से भगवान विष्णु की कृपा आप पर सदैव बनी रहती है और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।
आमलकी एकादशी के अवसर पर काशी विश्वनाथ पर विशेष उत्सव भी आयोजित किए जाते हैं जहाँ भक्त हर्षोल्लास के साथ होली खेलते हैं। शास्त्रों के अनुसार, भगवान शिव पहली बार माता पार्वती के साथ काशी आए थे और उनके आने की खुशी में हर साल आमलकी एकादशी के दिन भव्य भगवान शिव और माता पार्वती की भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है।
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आमलकी एकादशी व्रत के लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आमलकी एकादशी का संबंध आंवले के पेड़ की उत्पत्ति से है। इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा विधि-विधान से करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। साथ ही, भक्त को पूर्व जन्म के पापों से मुक्ति मिल जाती है। आमलकी एकादशी के दिन आंवले का पौधा लगाना और उसका दान करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है जिससे व्यक्ति को सौभाग्य की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि इस तिथि पर उबटन लगाकर और आंवले के जल से स्नान करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है इसलिए इस दिन ऐसा करना कल्याणकारी होता है।
आमलकी एकादशी 2026 की पूजा विधि
आमलकी एकादशी पर आंवले की पूजा का विधान है इसलिए इस दिन पूजा से लेकर भोजन तक हर कार्य में आंवला इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में, हम आपको नीचे आमलकी एकादशी व्रत विधि बताने जा रहे हैं जो कि इस प्रकर है:
आमलकी एकादशी के दिन प्रातःकाल उठकर भगवान विष्णु का ध्यान करें और व्रत रखने का संकल्प लें।
व्रत का संकल्प लेने के बाद स्नान आदि कार्यों से निवृत होकर विधि-विधान से भगवान विष्णु का ध्यान करें और व्रत रखने का संकल्प लें।
अब भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
पूजा संपन्न होने के बाद आंवले के वृक्ष के नीचे नवरत्न युक्त कलश की स्थापना करें।
यदि आंवले का वृक्ष उपलब्ध नहीं हो, तो आंवले के फल को भगवान विष्णु को प्रसाद के रूप में अर्पित करें।
आंवले के वृक्ष का धूप, दीप, चंदन, रोली, पुष्प और अक्षत आदि से पूजन करें। इसके बाद किसी गरीब, जरूरतमंद या ब्राह्मण को भोजन कराएं।
अगले दिन अर्थात द्वादशी तिथि को स्नान करें और भगवान विष्णु की पुनः पूजा करें।
इसके बाद जरूरतमंद या ब्राह्मण को कलश, वस्त्र और आंवला आदि का दान करें। पूजन के पश्चात भोजन ग्रहण करके व्रत का पारण करें।
आइए अब हम आपको बताने जा रहे हैं कि आमलकी एकादशी पर कैसे करें आंवले के वृक्ष की पूजा।
आमलकी एकादशी के पावन अवसर पर आंवले के वृक्ष की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन सबसे पहले आंवले के पेड़ के चारों तरफ अच्छी तरह से साफ़-सफाई कर लें।
इसके बाद, वृक्ष के नीचे सफ़ेद रंग की सुंदर रंगोली बनाएं और उस पर जल से भरा हुआ कलश स्थापित करें।
अब कलश के कंठ पर श्रीखंड चंदन का लेप लगाएं, फिर आंखें बंद करके समस्त देवी-देवताओं, तीर्थों और सागर का आवाहन करें।
इसके बाद कलश में इत्र और पंचरत्न अर्पित करें, फिर कलश को मिट्टी के ढक्कन से ढककर उसके ऊपर घी का दीपक प्रज्वलित करें।
इसके बाद कलश को पीले रंग का वस्त्र अर्पित करें और विधि-विधान से पूजा संपन्न करें।
द्वादशी तिथि के दिन ब्राह्मणों को श्रद्धापूर्वक भोजन कराएं, उन्हें दक्षिणा प्रदान करें तथा कलश भी दे दें। ऐसा करने के बाद ही एकादशी व्रत का पारण करना चाहिए।
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आमलकी एकादशी व्रत की कथा
धर्मग्रंथों में आमलकी एकादशी से जुड़ी एक कथा का वर्णन मिलता है जिसके बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं।
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में वैदिक नाम का एक नगर था और उस नगर में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र रहा करते थे। इस नगर के सभी वासी भगवान विष्णु के परम भक्त थे और उनकी पूजा एवं भक्ति में सदैव लीन रहते थे। वैदिक नगर के राजा चैतरथ विद्वान और धर्मपरायण थे। इनके राज्य में कोई भी गरीब नहीं था और इस नगर में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति एक वर्ष में आने वाली सभी एकादशी तिथियों का व्रत किया करते थे।
प्रत्येक वर्ष की तरह जब फाल्गुन माह की आमलकी एकादशी आई, तो नगर के सभी वासियों और राजा ने इस एकादशी का व्रत किया। साथ ही, मंदिर जाकर आंवले के वृक्ष की पूजा-अर्चना की और वहां पर पूरी रात श्रद्धाभाव से जागरण किया। उसी रात एक बहेलिया मंदिर में जा पहुंचा जो बहुत ही पापी था और वह भूखा व प्यासा था। भोजन की तलाश में वह मंदिर आ पहुंचा था और मंदिर के एक कोने में शांति से बैठकर जागरण को देखने लगा। साथ ही, सबके साथ बैठकर सच्चे मन से विष्णु भगवान और एकादशी के महत्व की कथा सुनने लगा। इस तरह से पूरी रात बीत गई।
नगर के सभी वासियों के साथ-साथ बहेलिया भी पूरी रात जागा रहा। सुबह होने पर सभी नगरवासी अपने-अपने घर को चले गए और बहेलिया ने भी अपने घर जाकर भोजन किया। लेकिन, इसके कुछ समय के पश्चात बहेलिया मृत्यु को प्राप्त हो गया। बहेलिया के रूप में उसने न सिर्फ़ आमलकी एकादशी व्रत की कथा सुनी थी, बल्कि रात भर जागरण भी किया था। इसी वजह से राजा विदूरथ के घर उसका अगला जन्म हुआ और राजा ने उसका नाम वसुरथ रखा जो बड़ा होकर नगर का राजा बना।
एक दिन वह शिकार के लिए निकला, परंतु बीच में ही रास्ता भूल गया। थक हारकर एक वह एक पेड़ के नीचे सो गया, लेकिन कुछ समय के बाद वहां पर म्लेच्छ आ गए और राजा को अकेला पाकर उसे मारने की योजना बनाने लगे। वह कहने लगे कि इसी राजा के कारण उन्हें देश निकाला दिया गया है इसलिए हमें इसे मार देना चाहिए। म्लेच्छों के हमले से अनजान राजा सोता रहा और तभी उन्होंने राजा पर हथियार फेंकना शुरू कर दिया। लेकिन म्लेच्छों के शस्त्र राजा पर फूल बनकर बरसने लगे।
कुछ देर के बाद सभी म्लेच्छ जमीन पर मृत पाए गए थे। जब राजा अपनी नींद से उठा तो उन्होंने देखा कि जमीन पर कुछ लोग मृत पड़े हैं। यह सारा दृश्य देखकर राजा समझ गया कि यह म्लेच्छ उसको मारने के लिए आए थे, लेकिन किसी ने उन्हें ही मौत के घाट उतार दिया, फिर राजा सोचने लगा कि जंगल में आखिर कौन उसकी जान बचा सकता है, तभी आकाशवाणी हुई कि ‘हे राजन भगवान विष्णु ने तुम्हारी जान बचाई है। तुमने पिछले जन्म में आमलकी एकादशी व्रत कथा सुनी था और उसी का फल है कि आज तुम्हारे शत्रु तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ पाए। इस घटना के बाद से राजा ने भी एकादशी का व्रत विधि-विधान से करना शुरू कर दिया।
आमलकी एकादशी पर तुलसी के पत्ते भी शामिल करने चाहिए। धर्मग्रंथों में कहा गया है कि भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय होती है इसलिए आमलकी एकादशी व्रत की पूजा में तुलसी का इस्तेमाल करना शुभ माना जाता है। इस दिन तुलसी के पत्ते तोड़ने से बचें और एक दिन पूर्व ही तुलसी के पत्ते पूजा के लिए अलग रख लें।
अगर आप अविवाहित हैं और मनचाहा जीवनसाथी पाना चाहते हैं, तो आमलकी एकादशी पर भक्तजन भगवान विष्णु की पूजा विधि-विधान से करें। साथ ही, उन्हें आंवले का फल अवश्य अर्पित करना चाहिए।
अगर आप करियर में तरक्की और प्रगति प्राप्त करना चाहते हैं या कार्यक्षेत्र में परिस्थितियां आपके विपक्ष में हो गई हैं, तो आपको आमलकी एकादशी के दिन आंवले के पेड़ में जल अर्पित करें। साथ ही, आप अपने मस्तक पर आंवले की जड़ की थोड़ी-सी मिट्टी का तिलक करें।
आमलकी एकादशी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से आर्थिक स्थिति बेहतर होती है। भगवान विष्णु को पंचामृत से स्नान कराने के बाद पीले फूल, तुलसी दल और पीले वस्त्र अर्पित करें। वहीं, माँ लक्ष्मी को कमल का फूल चढ़ाएं और प्रसाद के रूप में खीर का भोग लगाएं।
आमलकी एकादशी के दिन विष्णु जी को आंवले से बनी मिठाई या खीर का भोग लगाएं। इस तिथि पर आंवले का सेवन करना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से स्वास्थ्य लाभ मिलता है और आध्यात्मिक लाभ की प्राप्ति होती है।
आमलकी एकादशी तिथि पर आंवले का वृक्ष लगाएं और पूरे एक महीने लगातार उसकी देखभाल करें। ऐसा करने से व्यापार में वृद्धि होती है और लाभ में भी बढ़ोतरी होती है।
इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. आमलकी एकादशी पर किसकी पूजा करें?
आमलकी एकादशी 2026 के दिन भगवान विष्णु और आंवले के पेड़ की पूजा करें।
2. एक साल में कितनी एकादशी आती है?
एक वर्ष में कुल 24 एकादशी तिथियां आती हैं।
3. आमलकी व्रत का लाभ क्या है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आमलकी एकादशी का व्रत करने से पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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टैरो मासिक राशिफल मार्च 2026: राशि अनुसार राशिफल
मेष राशि
प्रेम जीवन: थ्री ऑफ वैंड्स
आर्थिक जीवन: द स्टार
करियर: टू ऑफ वैंड्स
स्वास्थ्य: द चैरिएट
थ्री ऑफ वैंड्स कार्ड बताता है कि आपका पार्टनर आपको लेकर पूरी तरह से कॉन्फिडेंट है। वे आपको एक अच्छे लाइफ पार्टनर के रूप में देखते हैं और आपके साथ मिलकर कुछ बड़ा करना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि जीवन की इस यात्रा में आप उनके साथ रहें। उनके लिए आप सफल भी हैं और मंजिल भी। उन्हें भरोसा है कि आप दोनों मिलकर बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं। वे आपके साथ भविष्य को मजबूत बनाने की योजनाएं भी बना रहे हैं।
आर्थिक जीवन की बात करें तो, द स्टार अच्छा संकेत देता है। यह बताता है कि आने वाले समय में आर्थिक स्थिति बेहतर होगी। यह कार्ड उम्मीद, भरोसा और आत्मविश्वास लौटने का संकेत है। आपके लक्ष्य और इच्छाएं आपकी आर्थिक स्थिति से मेल खा रही हैं, जिससे तरक्की और समृद्धि का समय शुरू हो सकता है।
करियर की बात करें तो टू ऑफ वैंड्स एक अहम मोड़ की ओर इशारा करता है। यह बताता है कि अब आपको आगे दिशा तय करनी होगी। शुरुआती सफलता के बाद नए विकल्पों पर सोचने का समय है- जैसे बिज़नेस बढ़ाना, नई जगह काम करना या विदेश जाने का मौका। इसमें आगे बढ़ने की चाह और मौजूदा सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना ज़रूरी होगा। नए कदम के लिए हिम्मत और दूरदृष्टि की ज़रूरत पड़ेगी।
स्वास्थ्य के मामले में द चैरियट नई ऊर्जा का संकेत है। यह बीमारी से उबरने, फिटनेस पर ध्यान देने और मन व शरीर के बीच संतुलन बनाने की बात करता है। यह कार्ड बताता है कि आप अपनी इच्छाशक्ति और फोकस से अपनी सेहत को बेहतर बना सकते हैं। नई एक्सरसाइज़ शुरू करना या अपनी हेल्थ की कमान खुद संभालना फायदेमंद रहेगा।
शुभ रंग: लाल
वृषभ राशि
प्रेम जीवन: एट ऑफ पेंटाकल्स
आर्थिक जीवन: द सन (रिवर्सड)
करियर: नाइन ऑफ स्वॉर्ड्स
स्वास्थ्य: थ्री ऑफ कप्स
प्रेम जीवन के मामले में एट ऑफ पेंटाकल्स बताता है कि इस समय आपका पूरा ध्यान काम पर रहेगा। आप अपने परिवार और जीवनसाथी का साथ देंगे, जो अच्छी बात है। लेकिन इसके साथ-साथ यह भी जरूरी है कि आप भावनात्मक रूप से भी अपने पार्टनर के साथ जुड़े रहें। सिर्फ जिम्मेदारी निभाना ही काफी नहीं, अपने दिल की बातें खुलकर कहना भी जरूरी है। अपने जज्बात सही तरीके से जाहिर करें, ताकि कोई गलतफहमी न हो।
आर्थिक जीवन की बात करें तो द सन (रिवर्सड) कार्ड बताता है कि थोड़े समय के लिए आर्थिक परेशानी आ सकती है। यह गलत उम्मीदों या खुद की वजह से बने नुकसान की ओर इशारा करता है। यह समय हकीकत को समझने और पैसों से जुड़ी अंदरूनी समस्याओं को सुलझाने का है। सफलता खत्म नहीं हुई है, बस थोड़ी देरी से मिलेगी। सोच का नजरिया बदलना और मेहनत जारी रखना ज़रूरी है।
करियर में नाइन ऑफ स्वॉर्ड्स बहुत ज़्यादा तनाव, डर और चिंता को दिखाता है। काम को लेकर नींद न आना, ज़्यादा सोचते रहना या खुद को दोष देना इसकी वजह हो सकता है। कई बार डर दिमाग में ज़्यादा बड़ा लगता है, जबकि असलियत उतनी खराब नहीं होती। यह कार्ड चेतावनी देता है कि अगर समय रहते संभला नहीं तो थकावट या बर्नआउट हो सकता है। साथ ही यह आपको अपने डर का सामना करने, मदद लेने और सोच बदलने का संदेश भी देता है।
स्वास्थ्य के लिए थ्री ऑफ कप्स बताता है कि दोस्तों, परिवार और अपनों का साथ आपको भावनात्मक रूप से मजबूत बनाएगा। मिलना-जुलना, खुशियाँ बाँटना और साथ में समय बिताना हीलिंग में मदद करेगा। लेकिन यह कार्ड यह भी चेतावनी देता है कि ज़्यादा खाने-पीने या किसी भी चीज़ में अति से बचें। संतुलन और सीमाएं बनाए रखना सेहत के लिए ज़रूरी है।
शुभ रंग: पेस्टल पिंक
बृहत् कुंडलीमें छिपा है, आपके जीवन का सारा राज, जानें ग्रहों की चाल का पूरालेखा-जोखा
मिथुन राशि
प्रेम जीवन: सेवन ऑफ पेंटाकल्स
आर्थिक जीवन: टेन ऑफ वैंड्स
करियर: टू ऑफ कप्स
स्वास्थ्य: नाइट ऑफ वैंड्स
प्रेम जीवन में सेवन ऑफ पेंटाकल्स बताता है कि किसी भी लंबे रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए धैर्य, मेहनत और प्यार से उसे सींचना बहुत जरूरी होता है। अगर आप और आपका पार्टनर अपने रिश्ते पर मेहनत कर रहे हैं, तो अब उसके अच्छे नतीजे दिखने लगेंगे या बहुत जल्द दिखेंगे। यह कार्ड यह भी इशारा करता है कि आप दोनों किसी साझा लक्ष्य पर काम कर रहे हैं, जैसे घर खरीदना या शादी का खर्च उठाना, तो ऐसे मामलों में भी सफलता मिलने के योग हैं।
आर्थिक जीवन में टेन ऑफ वैंड्स दिखाता है कि इस समय पैसों को ले लेकर बोझ महसूस हो सकता है, जैसे कर्ज़, ज़्यादा खर्च या बड़ी ज़िम्मेदारियां। भले ही दबाव ज़्यादा हो, लेकिन आप हार नहीं मान रहे हैं। यह कार्ड बताता है कि आर्थिक सफलता के साथ काम और तनाव भी बढ़ सकता है, या परिवार, लोन, बच्चों की ज़िम्मेदारी जैसी बातें आपको थका सकती हैं। ऐसे में ज़रूरी है कि आप काम बांटना सीखें, चीज़ों को आसान करें या ज़रूरत पड़े तो किसी एक्सपर्ट की मदद लें, ताकि बहुत ज़्यादा थकान न हो।
करियर के मामले में टू ऑफ कप्स बहुत अच्छा संकेत है। यह अच्छे तालमेल, मजबूत पार्टनरशिप, टीमवर्क और आपसी फ़ायदे को दर्शाता है। ऑफिस में सहकर्मियों या बिज़नेस पार्टनर के साथ रिश्ते बेहतर होंगे। किसी सीनियर से मार्गदर्शन मिल सकता है या कोई नया जॉइंट प्रोजेक्ट सफल हो सकता है। कुल मिलाकर, काम में संतुलन और सही लोगों से जुड़ाव आपको आगे बढ़ाएगा।
सेहत के लिए नाइट ऑफ वैंड्स यह बताता है कि आपके अंदर ऊर्जा और जोश बढ़ेगा। अचानक एक्सरसाइज़ शुरू करने या हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने का मन बन सकता है। लेकिन यह कार्ड यह भी चेतावनी देता है कि जल्दबाज़ी, लापरवाही या ज़रूरत से ज़्यादा करने से बचें। ऊर्जा अच्छी है, बस संतुलन बनाए रखें, वरना थकान या चोट लग सकती है। योग, हल्की कसरत और सही रूटीन फायदेमंद रहेगा।
शुभ रंग: पेस्टल ग्रीन
कर्क राशि
प्रेम जीवन: फोर ऑफ पेंटाकल्स
आर्थिक जीवन: सिक्स ऑफ स्वॉर्ड्स
करियर: सिक्स ऑफ पेंटाकल्स
स्वास्थ्य: सेवन ऑफ कप्स
प्रेम जीवन में फोर ऑफ पेंटाकल्स के अनुसार, रिश्ते की शुरुआत में आप या आपका पार्टनर थोड़ा ज्यादा पज़ेसिव (अधिकार जताने वाला) हो सकता है। यह स्वाभाविक है, खासकर अगर आप दोनों में से कोई एक लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है या उसे ज्यादा ध्यान मिलता है। अगर आपका पार्टनर पहले कभी ऐसे व्यक्ति के साथ रिश्ते में नहीं रहा जिसे इतना अटेंशन मिलता हो, तो उसकी भावनाओं को समझने की कोशिश करें। लेकिन यदि आपका साथी बिना किसी ठोस वजह के बार-बार शक या जलन दिखा रहा है, तो यह एक चेतावनी का संकेत भी हो सकता है।
आर्थिक स्थिति में सिक्स ऑफ स्वोर्ड्स बताता है कि अब समय आ गया है कि आप अपनी आर्थिक स्थिति की जिम्मेदारी खुद लें और भविष्य की योजना बनाएं। यह कार्ड संकेत देता है कि आपको अस्थिर वित्तीय स्थिति से निकलकर स्थिरता की ओर बढ़ना चाहिए। बजट बनाएं, फिजूल खर्च कम करें और अतिरिक्त आय के साधन ढूंढने की कोशिश करें। निवेश सोच-समझकर करें और जल्दबाजी में कोई आर्थिक फैसला न लें।
सिक्स ऑफ पेंटाकल्स कार्ड कहता है कि आपके कार्यक्षेत्र में बहुत सकारात्मक माहौल बनने वाला है। आपको अपने सपनों जैसा कार्यस्थल मिल सकता है। आपके सहकर्मी आपका साथ देंगे, जिससे आपके करियर में उन्नति होगी। यदि आप अपनी वर्तमान नौकरी के बारे में सोच रहे हैं, तो यह कार्ड बताता है कि आप अभी एक अच्छी और संतुलित स्थिति में हैं।
सेवन ऑफ कप्स के अनुसार, आने वाले समय में कई सामाजिक कार्यक्रम या पार्टियां हो सकती हैं, जहां आप जरूरत से ज्यादा मौज-मस्ती या खान-पान कर सकते हैं। यह आपकी सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। आनंद लें, लेकिन संयम रखें और अपनी सेहत का ध्यान रखें।
प्रेम जीवन में सेवन ऑफ कप्स यह दिखाता है कि आप या आपका पार्टनर जरूरत से ज्यादा सोच रहे हैं या फिर आपके सामने बहुत ज्यादा विकल्प हो सकते हैं। हो सकता है कि आपके या आपके पार्टनर के चाहने वाले काफी हों। अगर आप दोनों में से किसी भी पजेसिवनेस, जलन या असुरक्षा की भावना है, तो इससे रिश्ते में दिक्कत आ सकती है। असुरक्षित महसूस करने पर कुछ लोग सोशल मीडिया या रिश्ते से बाहर के लोगों से तारीफ और ध्यान पाने लगते हैं, जो आगे चलकर परेशानी का कारण बन सकता है।
आर्थिक जीवन में किंग ऑफ वैंड्स बताता है कि अब समय है आत्मविश्वास के साथ कमान संभालने का। यह कार्ड दिखाता है कि आपके सामने जो आर्थिक फैसले है, उसमें लीडरशिप दिखाने और समझदारी से आगे बढ़ने का मौका है। यह आपको बिना डरे फैसले लेने और काबिलियत पर भरोसा रखने के लिए प्रेरित करता है, ताकि आप अपनी आर्थिक स्थिति को अच्छे से संभाल सकें।
करियर में क्वीन ऑफ कप्स इशारा करता है कि आपको ऐसे कामों में संतुष्टि मिलती है, जहां देखभाल क्रिएटिविटी और दूसरों की मदद शामिल हो, जैसे काउंसलिंग, नर्सिंग, आर्ट, हीलिंग या समाज सेवा। आप या तो किसी समझदार महिला से मार्गदर्शन पाते हैं या खुद दूसरों के लिए भावनात्मक सहारा बनते हैं। यह कार्ड कहता है कि पैसे से ज़्यादा अपने दिल और अंतर्ज्ञान की सुनें। इससे धीरे-धीरे आर्थिक स्थिरता भी मिल सकती है, लेकिन बहुत जटिल पैसों के लेन-देन से बचने की सलाह देता है। साथ ही, खुद की केयर और संतुलन बहुत ज़रूरी है।
सेहत के मामले में फाइव ऑफ पेंटाकल्स अक्सर मुश्किल समय, बीमारी, चोट या लंबे समय से चली आ रही परेशानी की ओर इशारा करता है। यह यह भी दिखाता है कि अकेलापन, सपोर्ट की कमी या पैसों का तनाव आपकी सेहत पर असर डाल सकता है। लेकिन यह कार्ड यह याद दिलाता है कि खुद का ध्यान रखना, मदद मांगना और यह समझना ज़रूरी है कि यह समय हमेशा नहीं रहेगा। सही सहयोग और सोच में बदलाव से सुधार संभव है। रिवर्सड ठीक होने, सहारा मिलने और मुश्किलों से बाहर आने का संकेत देता है, लेकिन यह भी बताता है कि तनाव और अकेलेपन से जुड़ी शारीरिक परेशानियां हो सकती हैं।
शुभ रंग: वर्मिलियन रेड (सिंदूरी लाल)
कन्या राशि
प्रेम जीवन: फोर ऑफ वैंड्स
आर्थिक जीवन: नाइट ऑफ स्वॉर्ड्स
करियर: नाइट ऑफ कप्स
स्वास्थ्य: एट ऑफ कप्स
प्रेम जीवन में फोर ऑफ वैंड्स यह बताता है कि आपका रिश्ता जश्न मनाने लायक है। यह कार्ड सगाई, शादी या किसी ऐसे खास मौके की ओर इशारा करता है, जहां आपके रिश्ते को सबके सामने सम्मान और खुशी के साथ मनाया जाएगा। इस दौर में आप अपने परिवार और करीबी लोगों को अपनी खुशियों में शामिल करते हैं। आपके साथ रहकर आपका पार्टनर “घर जैसा सुकून” महसूस करता है। यह रिश्ता लंबे समय तक चलने वाला है।
आर्थिक जीवन मेंनाइट ऑफ स्वॉर्ड्स आपकी तेज सोच, महत्वाकांक्षा और तुरंत एक्शन लेने की प्रवृत्ति को दर्शाता है। आप अपने आर्थिक लक्ष्यों को पाने के लिए तेजी और पूरे फोकस के साथ आगे बढ़ रहे हैं, हो सकता है आप ज्यादा सेविंग कर रहे हों या कुछ साहसिक लेकिन समझदारी भरे फैसले ले रहे हों। हालांकि, यह कार्ड जल्दबाजी और बिना सोचे-समझे फैसले लेने से सावधान भी करता है। आर्थिक सफलता के लिए बुद्धि, हिम्मत और दृढ़ निश्चय ज़रूरी है, लेकिन संतुलन बनाए रखना भी उतना ही ज़रूरी है।
करियर में नाइट ऑफ कप्स यह संकेत देता है कि इस महीने आपके सामने नए मौके आ सकते हैं, साथ ही नई ज़िम्मेदारियां भी मिल सकती हैं। मार्च का महीना काम के सिलसिले में छोटी-छोटी यात्राओं से भरा रह सकता है। इस दौरान मीटिंग्स, कॉर्पोरेट इवेंट्स और मेल-जोल बढ़ने से आपका प्रोफेशनल नेटवर्क भी काफ़ी मज़बूत होगा।
सेहत के लिए एट ऑफ कप्स बताता है कि ज़्यादा तनाव और बिगड़ा हुआ डेली रूटीन आपकी शारीरिक और मानसिक सेहत पर असर डाल सकता है। इस समय परिवार और दोस्तों के करीब रहना आपके लिए भावनात्मक और मानसिक रूप से सहारा देगा। खुद को थोड़ा समय देना और लाइफस्टाइल सुधारना बहुत ज़रूरी है।
प्रेम जीवन में किंग ऑफ पेंटाकल्स कोई ज्यादा रोमांटिक कार्ड नहीं माना जाता, लेकिन यह जरूर दिखाता है कि आपका पार्टनर या जीवनसाथी आपको एक सुरक्षित और आरामदायक जीवन देने में सक्षम है। भौतिक सुख-सुविधाओं की कमी नहीं होगी। हालांकि इस महीने भावनात्मक नजदीकियां थोड़ी कम महसूस हो सकती हैं, क्योंकि आपका पार्टनर अपने काम और दूसरी जिम्मेदारियों में व्यस्त रह सकता है। इस कारण कुछ समय के लिए पर्सनल लाइफ को थोड़ा पीछे रखना पड़ा सकता है।
आर्थिक जीवन में व्हील ऑफ फॉर्च्यून यह बताता है कि आर्थिक स्थिति हमेशा एक जैसी नहीं रहती। कभी अच्छा समय आता है, तो कभी चुनौतियां। यह कार्ड याद दिलाता है कि पैसे के मामले में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक है, इसलिए फाइनेंशियल प्लानिंग करते समय लचीलापन रखना बहुत जरूरी है। आज अच्छा है तो कल थोड़ा मुश्किल भी हो सकता है और मुश्किल के बाद फिर अच्छा समय भी आएगा।
करियर में एस ऑफ स्वॉर्ड्स नए मौके, नई सोच और साफ़ बातचीत का संकेत देता है। यह कार्ड नई शुरुआत, नई जॉब, प्रमोशन या किसी ऐसे प्रोजेक्ट की ओर इशारा करता है जिसमें दिमाग़ी मेहनत और क्रिएटिव सोच की ज़रूरत होगी। करियर में आगे बढ़ने के लिए यह सही समय है, सच बोलिए, मौके को पहचानिए और बिना झिझक आगे बढ़िए।
सेहत के मामले में टेन ऑफ कप्स बहुत शुभ संकेत है। यह मानसिक और भावनात्मक संतुलन, खुशी और संतुष्टि को दर्शाता है। अच्छी सेहत, बीमारी से उबरना, अच्छी एनर्जी और शरीर-मन का तालमेल दिखता है। जब मन खुश रहता है, तो शरीर भी स्वस्थ रहता है, यह कार्ड उसी की पुष्टि करता है।
शुभ रंग: ब्राइट पिंक
वृश्चिक राशि
प्रेम जीवन: थ्री ऑफ पेंटाकल्स
आर्थिक जीवन: जस्टिस
करियर: टू ऑफ कप्स
स्वास्थ्य: टेन ऑफ स्वॉर्ड्स
प्रेम जीवन थ्री ऑफ पेंटाकल्स कार्ड दिखाता है कि आपका रिश्ता आपसी सहयोग पर टिका है। आप और आपका पार्टनर एक-दूसरे की खूबियों से सीखते हैं, साथ मिलकर भविष्य की योजनाएं या कोई काम करते हैं, जिससे आपका रिश्ते और मजबूत होता है। यह कार्ड बताता है कि प्यार केवल भावनाओं से नहीं, बल्कि साथ मिलकर कुछ बनाने और निभाने से बढ़ता है।
आर्थिक जीवन में जस्टिस कार्ड ईमानदार, जिम्मेदारी और संतुलन का संकेत देता है। यह आपको सच्चे लेन-देन, सही निवेश और आमदनी-खर्च के बीच बैलेंस बनाए रखने की सलाह देता है। कई बार यह कार्ड तब आता है जब टैक्स, कानूनी या हिसाब-किताब से जुड़ी बातें सामने आती हैं। यह यह भी याद दिलाता है कि पहले किए गए आर्थिक फैसलों का फल अब मिल सकता है, अच्छा या बुरा इसलिए सोच-समझकर और जिम्मेदारी से कदम उठाएं।
करियर की बात करें तो टू ऑफ कप्स आता है, तो इसका मतलब है कि आपको कामकाज में अच्छे रिश्ते और साझेदारी से फायदा होगा। ऐसे लोगों से जुड़िए जो आपकी सोच से मेल खाते हों और आपके लक्ष्यों तक पहुँचने में मदद करें। ये लोग आपके मेंटर, बिज़नेस पार्टनर या सपोर्टिव सहकर्मी हो सकते हैं। यह कार्ड याद दिलाता है कि आपको सब कुछ अकेले करने की ज़रूरत नहीं है, टीमवर्क से ही सफलता मिलेगी।
सेहत के मामले में टेन ऑफ स्वॉर्ड्स यह इशारा करता है कि आप बहुत ज़्यादा थक चुके हैं, शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से। यह कार्ड साफ़ कहता है कि अब रुकना और पूरी तरह आराम करना ज़रूरी है, तभी हीलिंग शुरू होगी। अगर आप शरीर और दिमाग़ के संकेतों को नज़रअंदाज़ करेंगे, तो परेशानी बढ़ सकती है। इस समय भरपूर नींद और आराम सबसे ज़्यादा ज़रूरी है।
शुभ रंग: ब्लैक (काला)
धनु राशि
प्रेम जीवन: सेवन ऑफ स्वॉर्ड्स
आर्थिक जीवन: द हैंग्ड मैन
करियर: द वर्ल्ड
स्वास्थ्य: पेज ऑफ स्वॉर्ड्स
प्रेम जीवन में सेवन ऑफ स्वॉर्ड्स धोखे, छुपी हुई बातों, बेईमानी या खुद को ही नुकसान पहुंचाने वाले व्यवहार से सावधान करता है। इसका मतलब यह हो सकता है कि या तो आप दिल की बात खुलकर नहीं कर रहे हैं, गेम खेल रहे है या फिर सामने वाली पूरी सच्चाई नहीं बता रहा, यहां तक कि भावनाएं छुपाना या बेवफाई भी संकेत हो सकती है। यह कार्ड साफ-साफ बातचीत और आत्ममंथन की जरूरत बताता है। खुद से भी ईमानदार रहें और रिश्ते में चालाकी नहीं, सच्चाई को जगह दें।
आर्थिक जीवन की बात करें तो द हैंग्ड मैन दिखाता है कि फिलहाल आर्थिक स्थिति अटकी हुई या रुकी हुई महसूस हो सकती है। यह समय जल्दबाजी करने का नहीं, बल्कि धैर्य रखने और सोचने-समझने का है। जिस पैसों के मामले को लेकर आप सवाल कर रहे हैं, उसमें अभी इंतजार करना बेहतर रहेगा। जल्दी फायदा मिलने की उम्मीद कम है, इसलिए सही समय आने दें।
करियर में द वर्ल्ड बहुत ही शुभ कार्ड है। यह किसी बड़े काम, प्रोजेक्ट या करियर के एक अहम दौर के सफल समापन को दर्शाता है। आपने बहुत कुछ सीख लिया है और अब उपलब्धि, पहचान और संतुष्टि का समय है। यह कार्ड नए और बड़े मौकों की भी ओर इशारा करता है, जैसे विदेश से जुड़े काम, ट्रैवल या इंटरनेशनल अवसर। नए सफर की शुरुआत से पहले अपनी सफलता का आनंद लें।
सेहत के लिए पेज़ ऑफ स्वॉर्ड्स यह बताता है कि अब कन्फ्यूज़न से बाहर निकलकर चीज़ें साफ़ समझ में आने लगेंगी। यह अपने स्वास्थ्य के बारे में जानने, रिसर्च करने और नई हेल्दी आदतें शुरू करने का समय है। लेकिन साथ ही यह चेतावनी भी देता है कि ज़्यादा सोचने या ज़रूरत से ज़्यादा दिमाग़ लगाने से थकान हो सकती है। संतुलन बनाए रखें।
शुभ रंग: येलो (पीला)
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मकर राशि
प्रेम जीवन: द टॉवर
आर्थिक जीवन: किंग ऑफ स्वॉर्ड्स
करियर: थ्रीऑफ स्वॉर्ड्स
स्वास्थ्य: टू ऑफ स्वॉर्ड्स
प्रेम जीवन के मामले में द टॉवर बड़ा बदलाव दिखाता है। हो सकता है किसी नए इंसान की एंट्री हो या किसी पुराने रिश्ते का अंत। जो भी हो, इस बदलाव को स्वीकार करें। “टॉवर मोमेंट्स” तब आते हैं जब कुदरत समझती है कि आप इससे बेहतर के हक़दार हैं। पुराने ढांचे के गिरने के बाद आपके पास मौका होता है कि आप अपनी पसंद का नया रिश्ता, नई शुरुआत खड़ी करें। यहां उम्मीद और अपनी मर्ज़ी बहुत अहम भूमिका निभाती है।
आर्थिक जीवन के मामले में किंग ऑफ स्वॉर्ड्स समझदारी, साफ सोच और आत्म नियंत्रण से पैसे संभालना की सलाह देता है। यह कार्ड कहता है कि जल्दबाजी या जल्दी अमीर बनने वाली योजनाओं से दूर रहें। सही लक्ष्य तय करें, अच्छी रिसर्च करें, ईमानदारी रखें और लंबी प्लानिंग पर ध्यान दें। जरूरत पड़े तो एक्सपर्ट की सलाह लें और निवेश या बड़े फैसले साफ और नैतिक तरीके से करें।
करियर की बात करें तो काम से जुड़ा तनाव, टकराव, दिल टूटना या निराशा दिखाता है। हो सकता है नौकरी में परेशानी हो, अचानक काम छूट जाए, सहकर्मियों से अनबन हो, या बात-चीत ठीक से न हो पा रही हो। काम को लेकर मन खुश नहीं रहता और धोखे जैसा एहसास भी हो सकता है। लेकिन ये कार्ड ये भी कहता है कि इस मुश्किल समय से सीखने और आगे बढ़ने का मौका है। खुलकर बात करना, अपना ख्याल रखना और खुद को संभालना ज़रूरी है।
सेहत में टू ऑफ़ स्वॉर्ड्स कार्ड बताता है कि मन के अंदर भावनाएं दबाई हुई हैं, जैसे गुस्सा, चिंता या उलझन। इसका असर शरीर पर भी पड़ सकता है, जैसे घबराहट, बेचैनी, या दिल-फेफड़ों से जुड़ी दिक्कतें। कभी-कभी इसका मतलब ये भी होता है कि आप अपनी सेहत की समस्या को ठीक से समझ नहीं पा रहे हैं, या खुद का ख्याल रखने और दूसरों की मदद करने के बीच फंसे हुए हैं। संतुलन बनाने के लिए इलाज के साथ-साथ मन का बोझ हल्का करना भी ज़रूरी है।
शुभ रंग: मिडनाइट ब्लू
कुंभ राशि
प्रेम जीवन: एस ऑफ कप्स
आर्थिक जीवन: नाइन ऑफ स्वॉर्ड्स
करियर: नाइन ऑफ कप्स
स्वास्थ्य: द हाई प्रीस्टेस
प्रेम जीवन में एस ऑफ कप्स प्यार, खुशी और दिल से जुड़ी तृप्ति का संकेत है। इसका अर्थ है कि नई मोहब्बत की शुरुआत हो सकती है, पुराने रिश्ते में और गहराई आ सकती है या फिर खुद से प्यार करना सीख रहे हैं। ये किसी नए भावनात्मक दौर, गहरे जुड़ाव या आध्यात्मिक जागरूकता की ओर भी इशारा करता है। अगर ये कार्ड रिवर्सड आए तो दिल टूटना या भावनाओं का दब जाना दिखाता है। फिर भी ये कहता है कि अपने दिन को खोलें, अपनी भावना और अंतर्ज्ञान पर भरोसा करें। कई बार यह गर्भधारण या अंदर से नए सिरे से से जन्म लेने जैसा बदलाव भी दिखाता है।
आर्थिक जीवन में नाइन ऑफ़ स्वॉर्ड्स कार्ड बताता है कि पैसों को लेकर ज़्यादा चिंता या डर आपके फैसलों को प्रभावित कर रहा है। हो सकता है आप डर के कारण गलत या जल्दबाज़ी वाले निर्णय ले रहे हों। ये कार्ड सलाह देता है कि अपनी चिंता की जड़ को समझें और शांत दिमाग से सोचें, ताकि सही और समझदारी भरे फैसले ले सकें।
करियर में नाइन ऑफ़ कप्स बहुत अच्छा कार्ड है। इसका मतलब है काम में संतुष्टि, मेहनत का फल मिलना और मनचाही सफलता। आपने जो लक्ष्य तय किए थे, वो पूरे हो रहे हैं। लोग आपके काम की तारीफ करते हैं, और प्रमोशन या सैलरी बढ़ने की संभावना भी बनती है। हां, कभी-कभी ये ये भी दिखाता है कि बाहर से सब ठीक लग रहा है, लेकिन अंदर से खुशी अधूरी हो सकती है, तो अपने दिल की भी सुनें।
सेहत के मामले में हाई प्रीस्टेस ये कार्ड आपकी अंदरूनी समझ पर ध्यान देने को कहता है। शरीर जो छोटे-छोटे संकेत दे रहा है, उन्हें नज़रअंदाज़ न करें। खासतौर पर हार्मोनल बैलेंस, मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन पर ध्यान देना ज़रूरी है (महिलाओं के लिए ये कार्ड और भी अहम होता है)। ये आराम करने, खुद का ख्याल रखने और मन को शांत रखने की सलाह देता है। साथ ही ये प्रजनन शक्ति, अंदरूनी बुद्धि और आत्मिक इलाज का भी संकेत है।
शुभ रंग: नीला/बैंगनी
मीन राशि
प्रेम जीवन: सिक्स ऑफ कप्स
आर्थिक जीवन: डेथ
करियर: फाइव ऑफ स्वॉर्ड्स
स्वास्थ्य: द हर्मिट
प्रेम जीवन में यह कार्ड बताता है कि आपका रिश्ता दिल को सुकून देने वाला होगा। इसमें प्यार, अपनापन और सच्ची भावना होगी। इस इंसान से मिलते ही आपको अपनापन महसूस होगा और रिश्ता शुरू से ही आसान लगेगा। ऐसा लग सकता है जैसे आप इन्हें पहले से जानते हों, शायद पिछले जन्म का कोई रिश्ता हो। उम्र चाहे जो भी हो, यह इंसान आपके साथ फिर से अपनी जवानी जैसा एहसास जीना चाहता है और ज़िंदगी को हल्के दिल से देखना चाहता है।
आर्थिक जीवन के लिए यह कार्ड असली मौत नहीं, बल्कि बड़े बदलाव का संकेत देता है। पैसों के मामले में पुराने तरीकों को छोड़कर नए रास्ते अपनाने की ज़रूरत है। अगर बदलाव को अपनाया तो आगे बढ़त होगी। लेकिन अगर ज़िद में पुराने गलत तरीकों से चिपके रहे, तो नुकसान भी हो सकता है। रिवर्सड कार्ड यह बताता है कि आप किसी ऐसी योजना को पकड़े हुए हैं जो अब काम नहीं कर रही।
करियर के लिए यह कार्ड काम की जगह पर झगड़े, राजनीति और गलत तरीके से जीत पाने की ओर इशारा करता है। ऑफिस में बहस, टकराव या किसी के साथ गलत व्यवहार हो सकता है। यहां जीत भी हार जैसी लग सकती है। सलाह है कि बेवजह की लड़ाइयों से बचें, समझदारी से बात करें और ज़रूरत पड़े तो सीनियर या एचआर की मदद लें। उल्टा कार्ड सुलह और समाधान का संकेत देता है, या फिर यह सोचने को कहता है कि क्या इस माहौल में रहना सही है।
सेहत के लिहाज से यह कार्ड कहता है कि आपको थोड़ा अकेले समय की ज़रूरत है ताकि आप खुद को समझ सकें और ठीक कर सकें। जवाब बाहर नहीं, आपके अंदर हैं या किसी समझदार इंसान से मिल सकते हैं। लेकिन रिवर्सड कार्ड चेतावनी देता है कि ज़्यादा अकेलापन, थकान या लोगों से दूरी नुकसानदेह हो सकती है। ज़रूरत पड़े तो दोस्तों या डॉक्टर से संपर्क करें।
इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1 टैरो में एक सूट में कितने कार्ड होते हैं?
14 कार्ड
टैरो डेक में कितने कार्ड होते हैं?
78 कार्ड
क्या भारत में टैरो का अभ्यास किया जाता है और इसे स्वीकार किया जाता है?
हाँ, भारत में टैरो को व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है और इसका अभ्यास किया जाता है
मंगल-राहु की युति से बना अंगारक योग, अगले 40 दिन ये लोग रहें बेहद सतर्क!
शास्त्र में ग्रहों का गोचर बेहद मायने रखता है। जब भी कोई ग्रह राशि बदलता है, तो वह सिर्फ अपनी जगह नहीं बदलता, वह समय की दिशा और परिस्थितियों का रंग भी बदल देता है। कई बार यही गोचर आपस में मिलकर ऐसे योग बना देते हैं, जो जीवन में खास हलचल पैदा करते हैं, कभी शुभ संकेतों के साथ, तो कभी सतर्क रहने की चेतावनी के रूप में। इसी कड़ी में 23 फरवरी को ग्रहों के सेनापति मंगल ने शनि कीराशि कुंभ में प्रवेश किया है। खास बात यह है कि मंगल अब करीब 40 दिनों तक, यानी 2 अप्रैल 2026 तक, इसी राशि में रहेंगे।
बता दें कुंभ में पहले से सूर्य, बुध, शुक्र और छाया ग्रहराहु विराजमान हैं। ऐसे में मंगल और राहु की युति से अंगारक योग का निर्माण हो रहा है, जिसे ज्योतिष में काफी प्रभावशाली माना जाता है। यह योग आने वाले दिनों में कई राशियों के लिए परिस्थितियों को थोड़ा संवेदनशील बना सकता है, इसलिए समझदारी और संयम सबसे बड़ा उपाय रहेगा। आइए अब आगे बढ़ते है और पहले जानेंगे कि मंगल के गोचर की तिथि व समय।
वैदिक ज्योतिष में मंगल देव को युद्ध के देवता कहा जाता है जो 23 फरवरी 2026 की सुबह 11 बजकर 33 मिनट पर कुंभ राशि में गोचर कर चुके हैं। जहां सूर्य, बुध, शुक्र और छाया ग्रह राहु पहले ही मौजूद हैं। आइए अब आगे बढ़ने से पहले जान लेते हैं कि अंगारक योग क्या होता है और कैसे इसका निर्माण होता है। फिर जानेंगे 4 राशियों इस योग के प्रभाव के बारे में।
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अंगारक योग
अंगारक योग तब बनता है, जब मंगल और राहु एक ही राशि या भाव में साथ आ जाते हैं। ज्योतिष में इसे उग्र और तीव्र प्रभावशाली योग माना जाता है, क्योंकि मंगल ऊर्जा, साहस और क्रोध का कारक है, जबकि राहु भ्रम, अचानक घटनाओं और असामन्य परिस्थितियों का प्रतीक है। जब ये दोनों ग्रह मिलते हैं तो व्यक्ति के स्वभाव में आवेश, अधीरता और जल्दबाजी बढ़ सकती है।
कई बार बिना सोचे- समझे फैसले लेने की प्रवृत्ति बनती है, जिससे बाद में पछताना पड़ सकता है। यह योग जीवन में अचानक उतार-चढ़ाव भी ला सकता है, कभी अप्रत्याशित लाभ तो कभी अचानक हानि। यदि यह योग कुंडली में अशुभ स्थिति में हो, तो झगड़े, विवाद, कानूनी उलझन या रिश्तों में तनाव की स्थिति बन सकती है।
वहीं यदि यह शुभ प्रभाव में हो, तो व्यक्ति बहुत साहसी, मेहनती और जोखिम उठाकर सफलता पाने वाला बन सकता है। इसलिए इसका प्रभाव पूरी कुंडली और अन्य ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करता है। अंगारक योग के दौरान व्यक्ति को विशेष रूप से अपने गुस्से और वाणी पर नियंत्रण रखना चाहिए। किसी भी बड़े निर्णय, निवेश या विवादित मामलों में जल्दबाजी से बचना ही समझदारी होती है। नियमित प्रार्थना, ध्यान और सकारात्मक कार्यों में ऊर्जा लगाना इस योग के नकारात्मक प्रभाव को कम करने में सहायक माना जाता है।
मंगल और राहु की युति से ‘अंगारक योग’ इन राशियों को रहना होगा संभलकर
मिथुन राशि
मिथुन राशि वाले, इस समय मंगल का गोचर आपके भाग्य स्थान यानी नौवें भाव में चल रहा है। नौवां भाव किस्मत, धर्म, लंबी यात्राओं और गुरु से जुड़े मामलों का प्रतिनिधित्व करता है। लेकिन यहां राहु के साथ मंगल की युति बन रही है, जिसके कारण परिस्थितियां थोड़ी उलझी हुई रह सकती हैं। बने बनाए कामों में अचानक रुकावट आना, योजनाओं का टल जाना या किसी भरोसेमंद व्यक्ति से मतभेद होने की संभावना बन सकती है। आने वाले लगभग 40 दिनों तक खास सावधानी रखने की जरूरत है।
किसी भी तरह का नया निवेश करने, प्रॉपर्टी से जुड़े कागजों पर साइन करने या कानूनी मामलों में जल्दबाजी दिखाने से बचें। बिना पूरी जांच-पड़ताल के लिया गया फैसला आगे चलकर परेशानी दे सकता है। अगर आप किसी काम को जल्दी निपटाने के लिए शॉर्टकट अपनाने की सोच रहे हैं, तो थोड़ा रुककर दोबारा विचार करें। इस समय धैर्य और समझदारी ही आपके लिए सबसे बड़ा सहारा होगी। सोच-समझकर, सलाह लेकर और पूरी जानकारी जुटाकर ही कोई बड़ा कदम उठाएं, तभी नुकसान से बचाव संभव होगा।
बृहत् कुंडलीमें छिपा है, आपके जीवन का सारा राज, जानें ग्रहों की चाल का पूरालेखा-जोखा
कर्क राशि
कर्क राशि के जातकों के लिए यह युति आठवें भाव में बन रही है। ज्योतिष में आठवां भाव अचानक घटनाओं, उतार-चढ़ाव, गुप्त बातों और अप्रत्याशित परिस्थितियों का संकेत देता है। ऐसे में आने वाले समय में कुछ चीजें बिना पूर्व सूचना के बदल सकती हैं, इसलिए सतर्क रहना बेहद ज़रूरी होगा। कार्यस्थल पर विशेष सावधानी रखें। हो सकता है कुछ लोग सामने से दोस्ताना व्यवहार करें, लेकिन पीछे से विरोध करने की कोशिश करें। गुप्त शत्रुओं से बचकर रहें और अपने काम से काम रखें।
खासतौर पर वरिष्ठ अधिकारियों या बॉस से बहस या टकराव से बचें, क्योंकि छोटी सी बात भी बड़ा रूप ले सकती है। आर्थिक मामलों में यह समय “नो रिस्क” वाला है। शेयर बाज़ार, सट्टा या किसी भी तरह के जोखिम भरे निवेश से दूरी बनाना ही समझदारी होगी। जल्द मुनाफ़े के लालच में लिया गया फैसला नुकसान दे सकता है। वाहन चलाते समय भी अतिरिक्त सावधानी बरतें। जल्दबाज़ी, लापरवाही या गुस्से में ड्राइविंग करने से बचें। मानसिक शांति बनाए रखने के लिए बेवजह के विवादों में न पड़ें और छोटी बातों को नज़रअंदाज़ करना सीखें। धैर्य और संयम ही इस समय आपकी सबसे बड़ी ताकत साबित होंगे।
AstroSage AI पॉडकास्ट सुनें – यहां आपको मिलेंगे ज्योतिष, जीवन के रहस्य, किस्मत के संकेत और AI द्वारा बताए गए सटीक ज्योतिषीय समाधान। अपनी ज़िंदगी के अहम सवालों के जवाब अब आवाज़ में, आसान भाषा में।
धनु राशि
धनु राशि वाले, इस समय आपके तीसरे भाव यानी पराक्रम, साहस, संचार और छोटे भाइयों-बहनों के स्थान में मंगल और राहु की युति बन रही है। तीसरा भाव हिम्मत, बोलचाल और प्रयासों का प्रतिनिधित्व करता है, लेकिन इस ग्रहयोग के कारण वाणी में तीखापन आ सकता है। अनजाने में कही गई कठोर बात रिश्तों में दूरी बढ़ सकती है। दोस्तों, पड़ोसियों या सहकर्मियों के साथ छोटी सी बहस भी बड़ा विवाद बन सकती है। इसलिए प्रतिक्रिया देने से पहले शब्दों को तौल लेना जरूरी होगा।
खासकर गुस्से या आवेश में कोई संदेश, कॉल या सोशल मीडिया पोस्ट करने से बचें, वरना बात बढ़ सकती है। आर्थिक मामलों में भी सावधानी रखें। पैसों का उधार देना या लेना इस समय ठीक नहीं रहेगा, क्योंकि धन फंसने या संबंध खराब होने की आशंका है। किसी पर आंख बंद करके भरोसा करने के बजाय लिखित और स्पष्ट समझौता ही करें।
आपकी ऊर्जा इस समय बहुत अधिक रहेगी, लेकिन उसे बेकार की भागदौड़ या अनावश्यक तकरार में खर्च करने के बजाय किसी रचनात्मक काम, नई स्किल सीखने या फिटनेस जैसी सकारात्मक दिशा में लगाना आपके लिए अधिक लाभकारी रहेगा। संयमित वाणी और सही दिशा में प्रयास आपको संभावित परेशानियों से बचा सकते हैं।
कुंभ राशि वाले, इस समय मंगल का गोचर आपकी अपनी ही राशि यानी लग्न भाव में हो रहा है। लग्न भाव व्यक्ति के स्वभाव, व्यक्तित्व, सेहत और जीवन की दिशा को दर्शाता है। ऐसे में यहां राहु के साथ मंगल की स्थिति आपके स्वभाव में अचानक बदलाव ला सकती है। गुस्सा, अधीरता और चिड़चिड़ापन बढ़ने की संभावना है, जिससे छोटी-छोटी बात भी बड़ी लग सकती है। वैवाहिक जीवन में विशेष सावधानी रखें। जीवनसाथी के साथ गलतफहमियां पैदा न होने दें।
किसी भी बात को दिल पर लेने के बजाय खुलकर और शांत तरीके से संवाद करना बेहतर रहेगा। अहंकार या जि़द रिश्ते में तनाव बढ़ा सकती है, इसलिए धैर्य और समझदारी से काम लें। स्वास्थ्य के मामले में भी लापरवाही न करें। खासकर ब्लड प्रेशर, सिरदर्द, माइग्रेन या तनाव से जुड़ी समस्याएं परेशान कर सकती हैं। पर्याप्त नींद लें, पानी अधिक पीएं और गुस्से पर नियंत्रण रखने की कोशिश करें।
योग, प्राणायाम या ध्यान आपके लिए लाभकारी साबित हो सकता है। आर्थिक मोर्चे पर भी सावधानी आवश्यक है। शेयर मार्केट या किसी भी बड़े जोखिम वाले निवेश से फिलहाल दूरी बनाए रखें। जल्द लाभ के लालच में लिया गया निर्णय नुकसान दे सकता है। इस समय संयम, संतुलन और सोच-समझकर उठाया गया कदम ही आपके लिए हितकारी रहेगा।
हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारा यह लेख ज़रूर पसंद आया होगा। अगर ऐसा है तो आप इसे अपने अन्य शुभचिंतकों के साथ ज़रूर साझा करें। धन्यवाद!
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. अंगारक योग क्या होता है1?
जब मंगल और राहु एक ही राशि या भाव में युति बनाते हैं, तो उसे अंगारक योग कहा जाता है। इसे उग्र और तीव्र प्रभाव वाला ग्रहयोग माना जाता है।
2. अंगारक योग कितने दिन तक प्रभाव डालता है?
यह योग तब तक प्रभावी रहता है जब तक मंगल और राहु साथ रहते हैं। आमतौर पर इसका असर लगभग 30–45 दिनों तक देखा जा सकता है।
3. क्या अंगारक योग हमेशा अशुभ होता है?
नहीं, यह पूरी तरह अशुभ नहीं होता। अगर कुंडली में शुभ स्थिति में हो, तो यह साहस, नेतृत्व क्षमता और जोखिम उठाकर सफलता दिला सकता है।
बुध कुंभ राशि में वक्री: इन राशियों पर टूट सकता है मुसीबतों का पहाड़!
बुध कुंभ राशि में वक्री: वैदिक ज्योतिष में बुध देव को एक महत्वपूर्ण ग्रह का दर्जा प्राप्त है जिनकी कुंडली में शुभ-अशुभ स्थिति जातक के जीवन को गहराई से प्रभावित करने का सामर्थ्य रखती है। नवग्रहों में बुध को “ग्रहों के युवराज” के नाम से जाना जाता है और कुंडली में इनकी मज़बूत स्थिति जातक को तेज़ बुद्धि और बेहतरीन संचार कौशल का आशीर्वाद देती है। वहीं, बुध ग्रह के अशुभ या दुर्बल अवस्था में होने पर जातक अपनी भावनाओं या बात को दूसरे के सामने नहीं रख पाता है। साथ ही, व्यक्ति को हकलाने की समस्या भी परेशान कर सकती है। अब जल्द ही बुध ग्रह कुंभ राशि में वक्री होने जा रहे हैं और ऐसे में, इनकी चाल में होने वाले बदलाव का असर संसार और समस्त राशियों पर दिखाई दे सकता है।
एस्ट्रोसेज एआई का यह विशेष ब्लॉग आपको “बुध कुंभ राशि में वक्री” के बारे में समस्त जानकारी प्रदान करेगा। जैसे कि हम जानते हैं कि बुध ग्रह का संबंध बुद्धि, तर्क से है और यह वाणी को भी नियंत्रित करते हैं। कुंडली में बुध की शुभ स्थिति जहाँ आपको कई तरह के शुभ फल प्रदान करती है, वहीं इनकी दुर्बल अवस्था आपके जीवन को समस्याओं से भर देती है। इसी क्रम में, हमारा इस ब्लॉग में आपको बुध की वक्री चाल का आप पर प्रभाव और उनसे बचने के उपाय भी बताए जाएंगे। तो आइए बिना देर किए इस ब्लॉग की शुरुआत करते हैं और सबसे पहले नज़र डालते हैं बुध वक्री के समय और तिथि पर।
बुध कुंभ राशि में वक्री: तिथि और समय
ज्योतिष शास्त्र में बुध देव युवराज के नाम से विख्यात हैं जिन्हें देवताओं का दूत कहा जाता है। सामान्य रूप से बुध महाराज एक राशि में लगभग 23 से 27 दिनों तक रहते हैं और उसके बाद यह दूसरी राशि में प्रवेश कर जाते हैं। इसी क्रम में, अब बुध ग्रह 26 फरवरी 2026 की सुबह 11 बजकर 50 मिनट पर कुंभ राशि में वक्री हो जाएंगे। बता दें कि कुंभ राशि के स्वामी शनि देव हैं और बुध इनके साथ तटस्थ संबंध रखते हैं। इसके अलावा, बुध देव कुंभ राशि में उदित, वक्री और अस्त भी होंगे। इसके परिणामस्वरूप, बुध का कुंभ राशि में वक्री होना संसार को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है।
आगे बढ़ने से पहले आपको अवगत करवाते हैं कि आख़िर किसे कहते हैं ग्रह का वक्री होना।
बृहत् कुंडली में छिपा है, आपके जीवन का सारा राज, जानें ग्रहों की चाल का पूरा लेखा-जोखा
बुध कुंभ राशि में वक्री: क्या होता है ग्रह का वक्री होना?
एस्ट्रोसेज एआई समय-समय पर अपने पाठकों को ग्रहों की दशा और उनके अर्थ से अवगत करवाता रहा है। अब जब बुध ग्रह कुंभ राशि में वक्री होने जा रहे हैं, तो हम यहाँ आपको बताने जा रहे हैं कि किसे कहते हैं ग्रह का वक्री होना। बता दें कि ज्योतिष में किसी ग्रह का वक्री होना उस घटना को कहा जाता है जब कोई ग्रह अपने परिक्रमा पथ पर आगे बढ़ने के बजाय उल्टी चाल यानी कि पीछे की तरफ चलना शुरू कर देता है और इसी अवस्था को ग्रह का वक्री होना कहा जाता है।
शायद ही आप जानते होंगे कि वास्तव में ग्रह कभी भी वक्री नहीं होते हैं, परंतु उन्हें दूर से देखने पर उल्टा चलता हुआ प्रतीत होता है। ज्योतिष में ग्रह की वक्री अवस्था को अशुभ माना जाता है और इस दौरान किसी विशेष ग्रह से मिलने वाले परिणाम भी प्रभावित हो सकते हैं।
बुध कुंभ राशि में वक्री: बुध वक्री का महत्व और प्रभाव
अगर हम बात करें वक्री शब्द की, तो इस शब्द को लेकर कई तरह के मिथक हैं। अधिकतर लोग यह मान लेते हैं कि ग्रहों की वक्री अवस्था अशुभ होती है, जबकि वास्तव में ऐसा नहीं है। किसी भी ग्रह की वक्री चाल जातक को सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह के परिणाम दे सकती है। हालाँकि, कोई ग्रह अपनी वक्री अवस्था में आपको किस तरह के परिणाम देगा, यह पूरी तरह से कुंडली में उस ग्रह की शुभ-अशुभ स्थिति पर निर्भर करता है।
जब बुध ग्रह वक्री होते हैं, तो व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता पर अपना असर डाल सकते हैं। साथ ही, आपकी वाणी में कठोरता या रूखापन आ सकता है। बुध की वक्री अवस्था के दौरान मोबाइल, लैपटॉप, स्पीकर और कैमरा जैसे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स में खराबी आने की संभावना बढ़ जाती है। इसके साथ ही जीवन के अन्य क्षेत्रों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। कागजी कामकाज और दस्तावेज़ों में गलतियाँ होने का योग बनता है, वहीं काम से जुड़ी यात्राएँ भी सफल न हो पाने की आशंका रहती हैं।
आइए अब आपको रूबरू करवाते हैं बुध ग्रह के ज्योतिषीय महत्व से।
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बुध कुंभ राशि में वक्री: ज्योतिषीय दृष्टि से बुध ग्रह
नवग्रहों में बुध को राजकुमार का पद प्राप्त है इसलिए इनकी स्थिति कुंडली में अहम हो जाती है। सौर मंडल में यह सूर्य के सबसे निकट स्थित हैं।
बता दें कि बुध देव की गिनती शुभ ग्रहों में होती है। यह न तो स्त्री हैं और न ही पुरुष, बल्कि इन्हें द्विस्वभाव ग्रह माना जाता है।
सरल शब्दों में कहें, तो कुंडली में बुध महाराज जिस ग्रह के साथ बैठे होते है, उसी ग्रह के अनुसार जातक को परिणाम प्रदान करते हैं।
यदि आपकी कुंडली में बुध देव शुभ ग्रहों जैसे गुरु, शुक्र और चंद्रमा के साथ मौजूद होते हैं, तो आपको कार्यों में शुभ फल प्राप्त होंगे।
लेकिन, इनकी स्थिति कुंडली में अशुभ या पापी ग्रह के साथ जैसे राहु-केतु के साथ होने पर आपको नकारात्मक परिणामों की प्राप्ति होगी।
अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में बुध महाराज की स्थिति बलवान होती है, तो आपको तेज दिमाग, बेहतरीन संचार कौशल और व्यापार में सफलता का आशीर्वाद मिलता है।
साथ ही, यह जातक किसी भी नई जानकारी को जल्द ग्रहण करते हैं और इनकी दूसरों को प्रभावित करने की क्षमता मज़बूत होती है।
वहीं, जिन जातकों की कुंडली में बुध देव कमजोर, दुर्बल या पापी ग्रहों से पीड़ित होता है, तो व्यक्ति को भ्रम, असमंजस, मानसिक अस्थिरता या संचार में गलती जैसे समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
दुर्बल बुध आपकी निर्णय लेने की क्षमता को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है। व्यक्ति को दूसरों से बात करने और लेखन में भी कठिनाइ का अनुभव हो सकता है।
धार्मिक दृष्टि से बुध ग्रह का महत्व
बुध ग्रह को सिर्फ ज्योतिष में ही महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त नहीं है, बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी बुध को विशेष माना जाता है। बुध देव के पिता चंद्र और माता तारा देवी हैं। सनातन धर्म में बुध महाराज को सुख-शांति और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। बुद्धि के दाता भगवान गणेश और श्रीहरि के अवतार श्रीकृष्ण को इनका इष्ट देव माना जाता है इसलिए इनकी पूजा-अर्चना करने से बुध देव प्रसन्न होते हैं और आपको उनकी कृपा प्राप्त होती है। बात करें बुध ग्रह के स्वभाव की, तो धार्मिक ग्रंथों में बुध को कोमल और शांत स्वभाव का बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि इनकी वाणी को कोमल और मधुर कहा गया है इसलिए इनके शब्दों से दूसरे आसानी से मोहित हो जाते हैं।
अब हम आपको बताने जा रहे हैं कुंडली में बुध ग्रह कैसे आपको जीवन में प्रभावित करते हैं।
कुंडली में बुध ग्रह का शुभ और अशुभ प्रभाव व्यक्ति के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों को प्रभावित करत हैं जिनके बारे में हम नीचे बात करेंगे।
बुध का आर्थिक जीवन पर प्रभाव: आर्थिक जीवन के लिए बुध महाराज की स्थिति बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि बुध देव कागज़ी कार्यों और धन से जुड़े मामलों को नियंत्रित करते हैं। हालांकि, अगर बुध किसी राशि में वक्री होते हैं, तब जातकों को धन से जुड़े फैसले लेने और बिना सोचे-समझे खरीदारी करने से बचना चाहिए। वक्री बुध के दौरान व्यक्ति को धन से जुड़े मामलों में सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि आप छलकपट और धोखे के शिकार हो सकते है।
बुध का करियर पर प्रभाव: जैसे कि हम जानते हैं कि बुध महाराज नवग्रहों के युवराज कहे जाते हैं और ऐसे में, इनकी स्थिति व प्रभाव कुंडली में विशेष हो जाता है। इसी क्रम में, जिस व्यक्ति की जन्म कुंडली में बुध शुभ होते हैं, उसे व्यापार में सफलता हासिल करने की अपार क्षमता, सोच-विचार करने और सही फैसले लेने दर्शाती है। बुध ग्रह का मज़बूत होना जातक को डाटा, लेखन और नेटवर्किंग के क्षेत्र में कामयाबी दिलाने का काम करती है जबकि इनका नकारात्मक प्रभाव दूसरों के सामने अपनी बात रखने या अपने काम को समय पर पूरा करने की क्षमता को प्रभावित करता है।
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वैवाहिक जीवन पर बुध का प्रभाव: सामान्य रूप से वक्री अवस्था शुभ नहीं मानी जाती है। इसी क्रम में, बुध की वक्री अवस्था विवाह योग्य जातकों के लिए कई तरह की समस्याएं उत्पन्न कर सकती है, विशेषकर उन लोगों के लिए जो विवाह करना चाहते हैं। वहीं, जब आप विवाह के बंधन में बंध जाते हैं, तो बुध देव की कृपा से जीवनसाथी के साथ आपसी तालमेल और संवाद कौशल मजबूत होता है। इसके परिणामस्वरूप आप दोनों एक-दूसरे का सम्मान करते हैं और अपनी-अपनी जिम्मेदारियों को भली-भांति निभाते हैं।
प्रेम जीवन पर बुध का प्रभाव: जब बुध देव मार्गी अवस्था में होते हैं, तब जातक का संचार कौशल या दूसरों से बात करने की क्षमता अत्यंत प्रभावशाली रहती है। ऐसे लोगों का प्रेम जीवन अपने पार्टनर के साथ हँसी-खुशी और सौहार्द से भरा रहता है और वह एक-दूसरे से खुलकर बात करते हुए नज़र आते हैं। हालांकि, बुध देव की वक्री अवस्था के दौरान रिश्तों में जीवनसाथी के साथ बहस और गलतफहमियां उत्पन्न हो सकती हैं। इसके अलावा, इस समय आप दोनों अनावश्यक वाद-विवाद में भी उलझ सकते हैं।
चलिए अब आपको अवगत करवाते हैं कुंडली में कमज़ोर बुध के संकेतों से।
कमज़ोर बुध कैसे करता है आपको परेशान
बुध की कमज़ोर अवस्था आपको बालों का झड़ना और नाख़ूनों का टूटना जैसी समस्याएं देती हैं।
परिवार की महिला रिश्तेदारों जैसे बुआ, बहन, साली और मौसी के साथ रिश्ते बिगड़ने लगते हैं जिसकी वजह अशुभ बुध का प्रभाव होता है।
व्यक्ति पर बुध का नकारात्मक प्रभाव होने से जातक हकलाने लगता है और अपनी बात को सही तरीके से दूसरों के सामने नहीं रख पाता है।
बुध की अशुभता की वजह से दोस्तों के साथ मतभेद और वाद-विवाद भी जन्म लेने लगते हैं जिससे आपके संबंध ख़राब होने लगते हैं।
करियर और व्यापार को भी बुध देव की दुर्बल अवस्था प्रभावित करती है। ऐसे में, आपको करियर में असफलता प्राप्त होती है जबकि व्यापार में आपको हानि का सामना करना पड़ता है।
आइए अब जान लेते हैं बुध को प्रसन्न करने के उपायों से।
बुध को कुंडली में मज़बूत करने के लिए बुधवार के दिन हरे रंग की वस्तुओं का दान करें और गाय को हरा चारा खिलाएं।
बुध देव का आशीर्वाद पाने के लिए बुध ग्रह की नियमित रूप से पूजा करें और इसके बाद बुध स्तोत्र का पाठ करें।
बुध ग्रह को प्रसन्न करने के लिए बुधवार के दिन व्रत करें और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करें। साथ ही, गणेश जी को मूंग के लड्डू प्रसाद के रूप में भोग लगाएं।
कुंडली में बुध देव को बलवान बनाने के लिए आप बुध का पन्ना रत्न अंगूठी में जड़वाकर धारण करें। हालांकि, ऐसा करने से पूर्व किसी अनुभवी ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।
कार्यों में सकारात्मक परिणाम पाने के लिए बुधवार के दिन बुध ग्रह की पूजा करें और इस दौरान “ॐ बुं बुधाय नमः” मंत्र का जाप करें।
इसी आशा के साथ कि, आपको यह लेख भी पसंद आया होगा एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए हम आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
बुध कुंभ राशि में वक्री कब होंगे?
बुध देव 26 फरवरी 2026 को कुंभ राशि में वक्री हो जाएंगे।
कुंभ राशि का स्वामी कौन है?
राशि चक्र में कुंभ राशि के अधिपति देव शनि ग्रह हैं।
बुध ग्रह किसके कारक हैं?
ज्योतिष में बुध ग्रह को बुद्धि, वाणी, व्यापार और संचार कौशल का कारक ग्रह माना जाता है।
मार्च 2026 में है होली का त्योहार, देख लें विवाह मुहूर्त और बैंक अवकाश की पूरी लिस्ट!
मार्च 2026: मौसम और ज्योतिष की दृष्टि से मार्च का महीना बहुत खास होता है। इस समय ठंड जाने लगती है और हल्की गर्मी शुरू हो जाती है। इस महीने पेड़ों पर नई पत्तियां और फूल आने लगते हैं और वसंत ऋतु का प्रभाव दिखाई देता है।
ज्योतिषीय और धार्मिक दृष्टि से मार्च इसलिए भी खास होता है क्योंकि इस दौरान फाल्गुन का अंत होता है और चैत्र के महीने की शुरुआत होती है। इस महीने में होलिका दहन और होली जैसे प्रमुख त्योहार आते हैं। धार्मिक दृष्टि से यह महीना नए आरंभ का प्रतीक माना जाता है। यह रबी की फसल के पकने का सयम होता है। मार्च साल का तीसरा महीना है।
मार्च केवल मौसम में बदलाव का समय नहीं है बल्कि यह माह सांस्कृतिक महत्व भी रखता है और इस दौरान कई महत्वपूर्ण त्योहार और उत्सव मनाए जाते हैं। इस ब्लॉग में मार्च के व्रत एवं त्योहारों के साथ-साथ बैंक अवकाश और मुंडन मुहूर्त आदि के बारे में भी बताया गया है।
मार्च बदलाव का समय है, जब सर्दियों की ठंडक धीरे-धीरे वसंत की गर्माहट में बदलने लगती है। इस महीने के हर दिन की शुरुआत के साथ हमारा मन अपने भविष्य को लेकर कई तरह के सवालों और उम्मीदों से घिर जाता है। बात चाहे करियर की हो या प्रेम जीवन की, जिंदगी के हर पहलू को लेकर लोगों के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है। नए माह की शुरुआत पर हम सभी के मन में इस तरह के सवाल उठते हैं और एस्ट्रोसेज एआई के इस खास ब्लॉग में हम आपको इन्हीं सवालों के स्पष्ट उत्तर देने जा रहे हैं।
मार्च 2026 का ज्योतिषीय तथ्य और हिंदू पंचांग की गणना
हिंदू पंचांग के अनुसार मार्च 2026 की शुरुआत 01 मार्च, 2026 को पुष्य नक्षत्र में शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को होगी। वहीं मार्च 2026 का समापन 31 मार्च को उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को होगा।
आगे जानिए मार्च माह के प्रमुख त्योहारों और व्रतों के बारे में।
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मार्च 2026 में पड़ने वाले महत्वपूर्ण व्रत एवं त्योहार
मार्च के महीने में कई व्रत एवं त्योहार आते हैं लेकिन इनमें से कुछ प्रमुख हैं जिनके बारे में आगे विस्तार से बताया गया है:
प्रदोष व्रत: हर महीने की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत किया जाता है। इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा की जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर महीने की शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को यह व्रत किया जाता है।
होलिका दहन: हिंदू धर्म में होली एक बहुत बड़ा त्योहार और होली से ठीक एक रात पहले होलिका दहन किया जाता है। इस दिन लोग अलाव जलाकर प्रार्थना करते हैं कि उनके जीवन से नकारात्मकता और बुराई का नाश हो। होलिका दहन विश्वास और सकारात्मकता का प्रतीक है।
होली: हिंदू धर्म में होली के त्योहार को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि पर होली का त्योहार मनाया जाता है। होली को रंगों को त्योहार भी कहा जाता है।
मीन संक्रांति: सूर्य के मीन राशि में गोचर करने को मीन संक्रांति के नाम से जाना जाता है। यह संक्रांति सर्दियों के खत्म होने और वसंत की शुरुआत का प्रतीक है। इस दिन दान-पुण्य करने, पवित्र नदियों में स्नान करने और भगवान सूर्य की उपासना करने का बहुत महत्व है।
फाल्गुन पूर्णिमा व्रत: फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि पर यह व्रत किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा एंव व्रत करने का विधान है।
संकष्टी चतुर्थी: संकष्टी चतुर्थी विघ्नहर्ता भगवान गणेश को समर्पित है। इस व्रत को रखने से भक्तों के जीवन के सारे कष्ट और अड़चनें दूर हो जाती हैं।
पापमोचिनी एकादशी: चैत्र माह में कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को पापमोचिनी एकादशी व्रत किया जाता है। मान्यता है कि पापमोचिनी एकादशी पर भगवान विष्णु का व्रत एवं पूजन करने से पिछले जन्म के सारे पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
मासिक शिवरात्रि: हर माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने और पाप कर्मों से छुटकारा पाने के लिए व्रत एवं पूजन किया जाता है।
चैत्र नवरात्रि:चैत्र नवरात्रि का पहला दिन हिंदू नव वर्ष की शुरुआत को दर्शाता है। चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि में छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर पूजा जाता है।
उगादी: यह हिंदू नव वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है। यह पर्व खासतौर पर आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और महराष्ट्र में मनाया जाता है। चैत्र माह के पहले दिन को इन राज्यों में उगादी के रूप में मनाया जाता है।
गुड़ी पड़वा: यह महाराष्ट्र का प्रमुख त्योहार है। चैत्र माह के पहले दिन गुड़ी पड़वा पड़ती है। यह पर्व भगवान राम के लंकापति रावण को हराकर अयोध्या लौटने की खुशी में मनाया जाता है।
चेटी चंड: सिंधी चंद्र कैलेंडर के अनुसार इस दिन से सिंधी हिंदुओं के नव वर्ष की शुरुआत होती है। सिंधी हिंदू चेटी चंड को नए साल की शुरुआत के रूप में मनाते हैं। चैत्र महीने के पहले दिन को चेटी चंड के रूप में मनाया जाता है। इस पर्व को सम्मानित संत भगवान झूलेलाल के जन्मदिवस की स्मृति के रूप में मनाया जाता है।
मार्च 2026 की शुरुआत रविवार के दिन से हो रही है। वैदिक ज्योतिष में रविवार के दिन को अत्यंत शुभ माना जाता है एवं इस दिन के स्वामी सूर्य देव हैं। यदि आप मार्च 2026 के पहले दिन यानी रविवार को कुछ विशेष उपाय करते हैं, तो आपको सूर्य देव का आशीर्वाद प्राप्त हो सकता है और आपकी सभी मनोकामनाओं की पूर्ति हो सकती है।
सूर्य देव को प्रसन्न करने का सबसे सरल उपाय है रोज़ सूर्य को अर्घ्य देना।
इसके अलावा सूर्य के मंत्र ‘ॐ सूर्याय नम:’ का जाप भी कर सकते हैं।
राष्ट्रीय अवकाश (केरल, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मणिपुर, पुडुचेरी, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल आदि राज्यों को छोड़कर)
03 मार्च 2026 (मंगलवार)
याओसांग
मणिपुर
03 मार्च 2026 (मंगलवार)
डोलजात्रा
पश्चिम बंगाल
04 मार्च 2026 (बुधवार)
याओसांग दिन 2
मणिपुर
05 मार्च 2026 (गुरुवार)
पंचायती राज दिवस
उड़ीसा
06 मार्च 2026 (शुक्रवार)
चपचार कुट
मिजोरम
17 मार्च 2026 (मंगलवार)
शब-ए-कद्र
जम्मू-कश्मीर
20 मार्च 2026 (शुक्रवार)
उगादी
आंध्र प्रदेश, दमन और दीव, दादरा और नगर हवेली, गोवा, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, राजस्थान और तेलंगाना
20 मार्च 2026 (शुक्रवार)
तेलुगु नव वर्ष
तमिलनाडु
20 मार्च 2026 (शुक्रवार)
जुमात-उल-विदा
जम्मू-कश्मीर
20 मार्च 2026 (शुक्रवार)
गुड़ी पड़वा
महाराष्ट्र
21 मार्च 2026 (शनिवार)
ईद उल-फितर
राष्ट्रीय अवकाश
21 मार्च 2026 (शनिवार)
सरहुली
झारखंड
22 मार्च 2026 (रविवार)
बिहार दिवस
बिहार
22 मार्च 2026 (रविवार)
ईद उल-फितर अवकाश
तेलंगाना
23 मार्च 2026 (सोमवार)
सरदार भगत सिंह शहादत दिवस
हरियाणा
27 मार्च 2026 (शुक्रवार)
रामनवमी
अंडमान-निकोबार, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, दमन और दिव, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, उड़ीसा, पंजाब, राजस्थान, उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश
31 मार्च 2026 (मंगलवार)
महावीर जयंती
चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, दमन और दीव, दिल्ली, दादरा और नगर हवेली, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, लक्षद्वीप मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मिजोरम, पंजाब , राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश
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मार्च 2026: विवाह मुहूर्त
दिनांक
नक्षत्र
तिथि
मुहूर्त का समय
07 मार्च 2026
उत्तराफाल्गुनी
द्वादशी
शाम 10 बजकर 52 मिनट से अगली सुबह 07 बजकर 12 मिनट तक
08 मार्च 2026
हस्त
द्वादशी, त्रयोदशी
सुबह 07 बजकर 12 मिनट से शाम 08 बजकर 48 मिनट तक
10 मार्च 2026
स्वाती
चतुर्दशी
सुबह 07 बजकर 10 मिनट से सुबह 10 बजकर 43 मिनट तक
12 मार्च 2026
अनुराधा
प्रतिपदा द्वितीया
सुबह 08 बजकर 26 मिनट से दोपहर 03 बजकर 48 मिनट तक
14 मार्च 2026
मूल
चतुर्थी
शाम 06 बजकर 36 मिनट से 15 मार्च की सुबह 07 बजकर 06 मिनट तक
15 मार्च 2026
मूल
चतुर्थी
सुबह 07 बजकर 06 मिनट से दोपहर 02 बजकर 31 मिनट तक
16 मार्च 2026
उत्तराषाढ़ा
षष्ठी
शाम 05 बजकर 26 मिनट से 17 मार्च की सुबह 07 बजकर 04 मिनट तक
17 मार्च 2026
उत्तराषाढ़ा
षष्ठी
सुबह 07 बजकर 04 मिनट से शाम 08 बजे तक
22 मार्च 2026
उत्तराभाद्रपद
एकादशी, द्वादशी
शाम 98 बजे से23 मार्च की सुबह 06 बजकर 58 मिनट तक
23 मार्च 2026
रेवती
द्वादशी
सुबह 06 बजकर 58 मिनट से 24 मार्च की मध्यरात्रि 12 बजकर 50 मिनट तक
27 मार्च 2026
रोहिणी, मृगशिरा
प्रतिपदा, द्वितीया
सुबह 08 बजकर 31 मिनट से 28 मार्च की सुबह 06 बजकर 53 मिनट तक
चैत्र नवरात्रि हिंदुओं का एक बहुत बड़ा पर्व है। इससे हिंदू नववर्ष की शुरुआत होती है। चैत्र नवरात्रि का अर्थ है चैत्र के माह में आने वाली नौ रात्रियां। इन नव रात्रियों में मां दुर्गा के अलग-अलग नौ रूपों की पूजा की जाती है। इसके साथ ही कुछ भक्त पूरे नौ दिन तक व्रत भी रखते हैं। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ रहती है। आखिरी नवरात्रि यानी नवमी तिथि पर 9 छोटी कन्याओं का पूजन किया जाता है एवं मां को हलवा पूरी का भोग लगाने के बाद कन्याओं को भी भोजन करवाया जाता है। इन 9 कन्याओं को मां दुर्गा के नौ स्वरूपों का प्रतीक माना जाता है।
मार्च 2026 में आने वाले चैत्र मास का महत्व
मार्च में चैत्र का महीना पड़ता है और भारत के कई हिस्सों में चैत्र मास से चंद्र वर्ष की शुरुआत होती है। हिंदू चंद्र कैलेंडर का पहला महीना चैत्र ही है और ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार चैत्र का महीना मार्च और अप्रैल के बीच में आता है। यह मास नई शुरुआत, आध्यात्मिक रूप से जीवंत होने और रंगों से भरे उत्सव का प्रतीक है।
चैत्र अमावस्या से इस महीने की शुरुआत होती है और उसके बाद चैत्र नवरात्रि का पर्व आता है। चैत्र के महीने में उगादी, गुड़ी पड़वा और चेटी चंड जैसे बड़े त्योहार आते हैं। भारत के विभिन्न समुदायों में इन त्योहारों से नववर्ष की शुरुआत होती है।
चैत्र मास के दौरान रोज़ सूर्य देव को अर्घ्य दें। इस माह में मां दुर्गा के अलावा भगवान विष्णु की उपासना करने का भी विशेष महत्व है। इस दौरान पक्षियों और जानवरों के लिए भोजन, दाना और पानी रखें।
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कैसे होते हैं मार्च में जन्मे लोग
जिन लोगों का जन्म मार्च के महीने में होता है, उनके अंदर अपने आप ही बॉस बनने की खूबी होती है। इस महीने में पैदा होने वाले सबसे मशहूर लोगों में अल्बर्ट आइंस्टीन, एंजेलो का नाम शामिल है। ये लोग निडर और साहसी स्वभाव के होते हैं। इनके अंदर आत्मविश्वास की कोई कमी नहीं होती है। ये दूसरों को प्रभावित भी कर सकते हैं और दूसरों के लिए उदाहरण भी बन सकते हैं। ये खुशमिजाज़ स्वभाव के होते हैं और इनके अंदर आशावादी रवैया छिपा होता है। ये अपनी पॉजिटिविटी से दूसरों को प्रेरित करने की क्षमता रखते हैं।
इनके अंदर उदारता की भी कोई कमी नहीं होती है। ये जहां भी जाते हैं, लोग इन्हें पसंद करते हैं। इन्हें अपने तरीके से काम करना पसंद होता है। ये आत्मनिर्भर होते हैं और इनकी सोच काफी मजबूत होती है। ये अविश्वसनीय रूप से एक्टिव और जिंदादिल होते हैं। ये भविष्य की चिंता करने के बजाय वर्तमान में जीना पसंद करते हैं।
मार्च 2026 का इतिहास
मार्च महीने का नाम युद्ध के देवता मंगल ग्रह के नाम पर पड़ा है। चूंकि, यह महीना सैन्य अभियानों के लिए शुभ माना जाता था इसलिए इसका नाम युद्ध के देवता पर रखा गया। रोमन कैलेंडर में पहले यह साल का पहना महीना हुआ करता था और जनवरी-फरवरी के आने के बाद यह तीसरा महीना बन गया। इस महीने में रोम के वास युद्ध के अभियान शुरू करते थे। बता दें कि मार्च नाम लैटिन शब्द के मार्टियस से जुड़ा है।
मार्च में पड़ने वाले ग्रहण और गोचर
मार्च के महीने में होने वाले अधिकतर गोचर मीन राशि में हो रहे हैं। आगे बताया गया है कि मार्च में किस तिथि पर किस ग्रह का गोचर होने जा रहा है।
शुक्र का मीन राशि में गोचर: शुक्र ग्रह 02 मार्च 2026 की रात 12 बजकर 38 मिनट पर मीन राशि में गोचर करने जा रहे हैं।
बृहस्पति मिथुन राशि में मार्गी : बृहस्पति देव 11 मार्च 2026 की सुबह 06 बजकर 17 मिनट पर मिथुन राशि में मार्गी होने जा रहे हैं।
बुध कुंभ राशि में उदय: 13 मार्च, 2026 को रात 10 बजकर 14 मिनट पर कुंभ राशि में बुध उदित होंगे।
सूर्य का मीन राशि में गोचर: सूर्य 14 मार्च 2026 की रात 12 बजकर 41 मिनट पर मीन राशि में गोचर करेंगे।
बुध कुंभ राशि में मार्गी: बुध ग्रह 21 मार्च 2026 की रात 12 बजकर 42 मिनट कुंभ राशि में मार्गी होंगे।
मंगल का कुंभ राशि में उदय: मंगल ग्रह 26 मार्च 2026 की दोपहर 12 बजकर 53 मिनट पर कुंभ राशि में उदित होने जा रहे हैं।
मार्च 2026 में फाल्गुन मास का महत्व
हिंदू पंचांग का आखिरी और बारहवां महीना फाल्गुन का है। इस महीने में कई बड़े व्रत और त्योहार आते हैं इसलिए इस मास का अत्यधिक महत्व है। मार्च में होलिका दहन, होली औररामनवमी जैसे बड़े पर्व पड़ रहे हैं।
फाल्गुन माह का संबंध भगवान कृष्ण और चंद्र देव की उपासना से भी संबंधित है। हिंदू पौराणिक कथा के अनुसार इसी महीने में चंद्र देव का जन्म हुआ था और इसलिए इस महीने को चंद्र देव की उपासना और उनसे संबंधित अनुष्ठान करने के लिए खास माना जाता है।
मार्च 2026 12 राशियों का राशिफल
मेष राशि
आर्थिक तौर पर यह महीना उतार-चढ़ाव से भरा रहेगा। जहां महीने की शुरुआत में……(विस्तार से पढ़ें)
वृषभ राशि
यह महीना आपके लिए कई मायनों में बहुत अनुकूल रह सकता है। महीने की शुरुआत से ही बृहस्पति आपके दूसरे भाव में विराजमान रहेंगे जो……(विस्तार से पढ़ें)
मिथुन राशि
नौकरीपेशा लोगों की नौकरी में स्थानांतरण के योग बन सकते हैं। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत बढ़ेगी। व्यवसाय में आपको सफलता मिलेगी और आपके……(विस्तार से पढ़ें)
कर्क राशि
खर्चों में बहुत तेजी आएगी और आपकी आर्थिक स्थिति में उतार-चढ़ाव आने के प्रबल योग बनेंगे। हालांकि, 2 तारीख को शुक्र आपके……(विस्तार से पढ़ें)
सिंह राशि
ग्रहों की स्थिति स्वास्थ्य समस्याओं की ओर इशारा करती है। आपको अपनी स्वास्थ्य समस्याओं के प्रति सचेत रहना होगा नहीं तो……(विस्तार से पढ़ें)
कन्या राशि
कन्या राशि में जन्मे जातकों को अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देना होगा। स्वास्थ्य समस्याएं चुनौती बन सकती हैं। इसके अतिरिक्त कार्यस्थल पर और आपके निजी जीवन में……(विस्तार से पढ़ें)
तुला राशि
तुला राशि में जन्मे जातकों के लिए यह महीना मध्यम रहने की संभावना है। आपको अपने जीवन में चल रही समस्याओं के प्रति सावधानी के साथ-साथ……(विस्तार से पढ़ें)
वृश्चिक राशि
आपको उत्तम सफलता प्राप्त हो सकती है। विद्यार्थी वर्ग के लिए मेहनत से सफलता प्राप्त करने का अच्छा……(विस्तार से पढ़ें)
धनु राशि
यह महीना धनु राशि के जातकों के लिए कई मामलों में अनुकूल रहने की संभावना है। आपकी राशि से चतुर्थ स्थान में शनि, सप्तम स्थान में बृहस्पति, नवम स्थान में……(विस्तार से पढ़ें)
मकर राशि
कुछ लोगों से आपके संबंध इसके कारण मधुर बनेंगे तो कुछ के कारण समस्याएं बढ़ेंगी। किसी से लड़ाई झगड़े की स्थिति……(विस्तार से पढ़ें)
कुंभ राशि
कुंभ राशि में जन्मे जातकों के लिए यह महीना उतार-चढ़ाव से भरा रहने की संभावना है। महीने की शुरुआत में ही सूर्य, मंगल, बुध, शुक्र और राहु, ये पांच ग्रह आपकी……(विस्तार से पढ़ें)
मीन राशि
स्वास्थ्य समस्याओं में बढ़ोतरी होने का स्पष्ट संकेत मिलता है। आपके खर्चों में भी बढ़ोतरी होगी और खर्च परेशान करेंगे जो……(विस्तार से पढ़ें)
हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारा यह लेख ज़रूर पसंद आया होगा। अगर ऐसा है तो आप इसे अपने अन्य शुभचिंतकों के साथ ज़रूर साझा करें। धन्यवाद!
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों
1. मार्च 2026 में सकट चौथ कब है?
06 मार्च को संकष्टी चतुर्थी का व्रत है।
2. इस बार मार्च 2026 की शुरुआत किस नक्षत्र में हो रही है?
मार्च 2026 की शुरुआत 01 मार्च को पुष्य नक्षत्र में शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को होगी।
3. चैत्र नवरात्रि कब हैं?
19 मार्च से चैत्र नवरात्रि आरंभ हैं।
बुध कुंभ राशि में अस्त: इन राशियों पर होगी किस्मत मेहरबान, कुछ को रखना होगा खास ध्यान!
एस्ट्रोसेज एआई के इस विशेष ब्लॉग में हम आपकोबुध कुंभ राशि में अस्तके बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान करेंगे। साथ ही, यह भी बताएंगे कि बुध अस्त का प्रभाव सभी 12 राशियों पर किस प्रकार से पड़ेगा।
बता दें कुछ राशियों को बुध ग्रहके अस्त से बहुत अधिक लाभ होगा तो, वहीं कुछ राशि वालों को इस अवधि बहुत ही सावधानी से आगे बढ़ने की आवश्यकता होगी क्योंकि उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, इस ब्लॉग में बुध ग्रह को मजबूत करने के कुछ शानदार व आसान उपायों के बारे में भी बताएंगे और देश-दुनिया वशेयर मार्केटपर भी इसके प्रभाव के बारे में चर्चा करेंगे।
ज्योतिष में बुध का अस्त होना तब माना जाता है, जब बुध ग्रह सूर्य के बहुत पास आ जाता है। आम तौर पर यह दूरी लगभग 14 डिग्री के अंदर होती है, हालांकि कुछ और बातों पर भी यह निर्भर करता है। जब कोई ग्रह अस्त होता है, तो माना जाता है कि सूर्य की तेज रोशनी के कारण उसकी शक्ति थोड़ी दब जाती है। बुध ग्रह बोलचाल, सोनचे-समझने की शक्ति, तर्क, यात्रा, व्यापार और विश्लेषण से जुड़ा होता है। इसलिए इसके अस्त होने पर इन क्षेत्रों में परेशानियां आ सकती हैं।
इस दौरान लोगों को बेचैनी महसूस हो सकती है, गलतफहमियां बढ़ सकती हैं, सोच में उलझन रह सकती है या जल्दबाजी में फैसले लेने की आदत बढ़ सकती है। हालांकि इस समय एक अच्छा पहलू भी है। दबाव में दिमाग तेजी से काम करना सीखता है और अगर धैर्य समझदारी रखी जाए, तो नए और अच्छे विचार भी आ सकते हैं। जन्म कुंडली में बुध अस्त होने से व्यक्ति तेज दिमाग वाला होता है, लेकिन कभी-कभी ज़्यादा सोचने या बिना सोचे बोलने की आदत हो सकती है। वहीं, गोचर के समय यह सलाह दी जाती है कि धीरे चलें, सोच-समझकर बात करें और किसी भी तरह की जल्दबाज़ी या गलत समझौते से बचें।
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बुध कुंभ राशि में अस्त: तिथि व समय
कुंभ राशि में बुध ग्रह 28 फरवरी 2026 की रात 10 बजकर 9 मिनट पर अस्त होंगे। आइए अब जानते हैं, कि इसका असर सभी राशियों, दुनिया भर की घटनाओं और भारतीय शेयर बाजार पर किस तरह पड़ेगा।
बुध कुंभ राशि में अस्त: विशेषताएं
जब बुध कुंभ राशि में अस्त होता है, तब इंसान ज़्यादा सोचता है लेकिन कम बोलता है। उसकी बातें बाहर कम निकलती हैं और दिमाग में ही चलती रहती हैं। ऐसे समय में व्यक्ति के अंदर समझने की गहराई, छुपी हुई बातों को पकड़ने की क्षमता और मनोवैज्ञानिक समझ बढ़ जाती है।
लेकिन साथ ही ज्यादा सोचने की आदत, शक करना और भावनाओं में आकर गलत फैसला लेने की संभावना भी रहती है। क्योंकि सूर्य की तेज ऊर्जा बुध की साफ सोच को दबा देती है, इसलिए बात करते समय इंसान थोड़ा गुप्त, तीखा या बचाव वाला रवैया अपना सकता है। मन बार-बार पुरानी बातों या छुपे हुए कारणों में उलझ सकता है।
यह समय अपने अंदर झांकने और खुद को समझने का होता है। अगर शांति से सोच जाए, तो सच सामने आ सकता है और मन में नया बदलाव आ सकता है। लेकिन जल्दबाजी में कही गई बातें, जरूरत से ज्यादा चुप्पी या भावनाओं से किसी को काबू में करने की कोशिश नुकसानदेह हो सकती है। आध्यात्मिक रूप से यह समय सिखाता है कि अपने विचारों को साफ करें, सच बोलें और अपने अंदर की आवाज पर भरोसा रखें न कि डर या गुस्से को दिमाग पर हावी होने दें।
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बुध कुंभ राशि में अस्त: इन राशियों पर नकारात्मक प्रभाव
मेष राशि
मेष राशि वालों के लिए बुध तीसरे और छठे भाव के स्वामी है और इस समय वह आपके ग्यारहवें भाव में अस्त होंगे। इस दौरान करियर में आगे बढ़ने के मौके मिलेंगे। नौकरी करने वालों को नया जॉब ऑफर भी मिल सकता है या काम में तरक्की के योग बन सकते हैं। लेकिन बुध अस्त होने की वजह से जितना फायदा आप सोच रहे हैं उतना मिलना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। हो सकता है नतीजे आपकी उम्मीदों के मुताबिक न हों।
ऑफिस का माहौल वैसे तो ठीक रहेगा, लेकिन काम का बोझ ज़्यादा महसूस हो सकता है। आपको लग सकता है कि आप जितना काम कर रहे हैं, उसके मुकाबले आपको कम पहचान या फायदा मिल रहा है। इससे कार्यस्थल पर थोड़ी परेशानी या मनमुटाव हो सकता है। बड़े फैसले लेने में देरी हो सकती है। खासकर बिज़नेस करने वालों के लिए बुध का अस्त होना कभी-कभी दिक्कतें खड़ी कर सकता है, इसलिए इस समय सोच-समझकर कदम उठाना बेहतर रहेगा।
वृषभ राशि वालों के लिए बुध दूसरे और पांचवें भाव के स्वामी हैं और इस समय वह आपके दसवें भाव में अस्त होंगे। इस दौरान कामकाज में आपको किसी योद्धा की तरह मज़बूती से डटे रहना पड़ेगा, क्योंकि काम का बोझ ज़्यादा रह सकता है। किसी भी समय कोई परेशानी आ सकती है, इसलिए करियर पर पूरा ध्यान देना ज़रूरी है और साथ-साथ अपनी सेहत का भी ख्याल रखें। ऑफिस में सहकर्मी कभी-कभी आपके लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं, इसलिए सतर्क और फोकस रहना जरूरी है।
बिना ज़रूरत की यात्राएं आपके खर्चे और तनाव दोनों बढ़ा सकती हैं। बिज़नेस करने वालों को खासकर विदेशी कंपनियों से जुड़े काम में मनचाहा मुनाफ़ा पाने के लिए इंतज़ार करना पड़ेगा और कड़ी मेहनत करनी होगी। रिश्तों में भी सावधानी ज़रूरी है। छोटी-मोटी बातों पर बहस हो सकती है, लेकिन आपसी समझदारी दिखाकर इन्हें आसानी से सुलझाया जा सकता है। आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी। शेयर बाज़ार से जुड़े लोगों को थोड़ा-बहुत मुनाफ़ा मिल सकता है।
मिथुन राशि
मिथुन राशि के जातकों के लिए केवल बुध ग्रह उनके स्वामी ग्रह हैं इसलिए बुध आपके पहले और चोथे भाव के स्वामी होकर अब आपके नौवें भाव में अस्त होंगे। बुध अस्त होने के कारण कुछ कुछ परेशानियां सामने आ सकती है। इस समय काम में सफलता पाने के लिए आपको पहले से ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी। अगर आप नौकरी करते हैं, तो कार्यक्षेत्र में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
संभव है कि आपका ट्रांसफर किसी ऐसी जगह हो जाए जहां आप जाना नहीं चाहते हैं और काम का दबाव भी काफी ज्यादा रहे। सहकर्मियों के साथ या उनकी वजह से तनावपूर्ण परिस्थितियां बन सकती हैं। हालांकि इस दौरान आपको नई नौकरी का ऑफर भी मिल सकता है। यह बात आपको खुशी देगी। जो लोग व्यवसाय करते हैं, उनके लिए यह समय और कमाई सामान्य बनी रहेगी न बहुत ज़्यादा, न बहुत कम। विदेश से जुड़े कामों से लाभ मिलने की संभावना है, लेकिन अच्छे मुनाफ़े के लिए आपको लंबा इंतज़ार करना पड़ सकता है।
अगर आप अपने बिज़नेस को आगे बढ़ाने या विस्तार करने की सोच रहे हैं, तो अभी यह सही समय नहीं है। इसके लिए आपको थोड़ा रुकना होगा। आने वाले समय में अवसर ज़रूर मिलेगा, लेकिन फिलहाल आपको किस्मत के भरोसे बैठने के बजाय मेहनत पर ज़्यादा ध्यान देना चाहिए। मेहनत ही आगे चलकर आपको अच्छे परिणाम दिलाएगी।
सिंह राशि के जातकों के लिए बुध ग्रह दूसरे और ग्यारहवें भाव के स्वामी हैं और अब यह आपके सातवें भाव में अस्त हो रहे हैं। कुंभ राशि में बुध के इस परिवर्तन के कारण आपके करियर में कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं। जो लोग पार्टनरशिप में बिज़नेस करते हैं, उन्हें इस समय मतभेद और तनावपूर्ण स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। साझेदारी में काम करते समय दिक्कतें आ सकती हैं और कुछ मामलों में बहस हो सकती है। लेकिन अगर आप अकेले अपना काम या बिजनेस करते हैं,तो आपकी स्थिति काफी हद तक ठीक और संतोषजनक रहेगी। अगर आप नौकरीपेशा हैं, तो किसी विदेशी कंपनी या विदेश संपर्क वाले काम से आपको फायदा हो सकता है।
आपके सहकर्मी आपके करियर में आपके सपोर्ट और हौसला देंगे, जो इस समय आपके लिए बहुत जरूरी रहेगा। बस ध्यान रखें कि ऑफिस में अपने सीनियर्स से बहस न करें, वरना परेशानी बढ़ सकती है। आर्थिक रूप से आपको कमाई तो होगी, लेकिन आपको पैसे बचाने की आदत डालनी होगी। अगर आपने बचत पर ध्यान नहीं दिया, तो आगे चलकर बड़ी आर्थिक परेशानियां सामने आ सकती हैं और पैसों की तंगी महसूस हो सकती है।
कन्या राशि
कन्या राशिके जातकों के लिए बुध ग्रह के स्वामी हैं और यह आपके पहले और दसवें भाव स्वामी हैं। इस समय बुध आपके छठे भाव में अस्त हो रहा है। कुंभ राशि में बुध के अस्त होने के कारण आपके करियर में अचानक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। संभव है कि जब आप अपने कार्यस्थल पर जाएं तो वहां ट्रांसफर या कम से जुड़ी नई व्यवस्थाएं देखने को मिले काम की जिम्मेदारियां बढ़ेंगी और आप काफी व्यस्त रहेंगे।
कार्य में सफलता पाने के लिए आपको बहुत ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी। अगर आप किसी कंपटीटिव एग्जाम की तैयारी रहे हैं, तो आपको पहले से कई गुना ज्यादा मेहनत करनी होगी बिजनेस के नजरिए से देखें तो कुंभ राशि में बुध का यह अस्त होना कुछ परेशानियां पैदा कर सकता है। हो सकता है आपको उतना मुनाफा न मिले जितनी उम्मीद थी, या लाभ मिलने में ज्यादा समय लग जाए। यह भी संभव है कि आपका काम या बिज़नेस मार्केट में वैसा असर न दिखा पाए जैसा आप चाहते हैं।
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मीन राशि
मीन राशि के जातकों के लिए बुध ग्रह चौथे और सातवें भाव के स्वामी हैं और इस समय यह आपके बारहवें भाव में अस्त होंगे। कुंभ राशि में बुध के इस परिवर्तन के कारण आपके जीवन में कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं। जो लोग नोकरीपेशा है, उन्हें इस समय काम का माहौल काफी भागदौड़ भरा लग सकता है। एक ही जगह टिककर काम करना मुश्किल हो सकता है, इसलिए आप लगातार व्यस्त रहेंगे। काम की जिम्मेदारियां पहले से ज्यादा रहेंगी और संभव है कि अचानक विभाग बदल दिया जाए, जिससे तनाव बढ़ सकता है। मनचाहे परिणाम पाने के लिए आपको काफी मेहनत करनी पड़ेगी। अगर पूरी कोशिश के बाद भी आपको उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिलती, तो आप थोड़ा निराश या हताश महसूस कर सकते हैं।
व्यक्तिगत जीवन में बात करें तो परिवार में कुछ समस्याएं सामने आ सकती हैं। घर के सदस्यों के बीच आपसी तालमेल की कमी रह सकती है, जिससे छोटी-छोटी बातें बढ़ सकती हैं और कोई भी अपनी बात ठीक से समझा नहीं पाएगा। जीवनसाथी के साथ रिश्ते में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं, लेकिन राहत की बात यह है कि ये परेशानियाँ स्थायी नहीं होंगी और समय के साथ धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा।
बुध कुंभ राशि में अस्त: उपाय
पक्षियों और गायों को खाना खिलाएं
मुंह की सफाई बनाए रखें और अपनी कम्युनिकेशन स्किल्स को बेहतर बनाएं।
किन्नरों का सम्मान करें और उनकी सेवा करें
गरीबों को हरी मूंग दाल और हरी सब्जियां दान करें
भगवान गणेश और भगवान विष्णु की पूजा करें
बुध के बीज मंत्र ‘ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः’ का जाप करें
सोशल बातचीत और डिजिटल कम्युनिकेशन इस समय तेज़ और काफ़ी तीव्र महसूस हो सकता है, लेकिन बातों को गलत समझे जाने की संभावना भी ज़्यादा रहेगी।
बहस और सार्वजनिक चर्चाएं जल्दी बढ़ सकती हैं या फिर उनमें बात की गहराई और संतुलन खो सकता है।
इस दौर में रचनात्मक या बौद्धिक स्तर पर नए विचार और ब्रेकथ्रू सामने आ सकते हैं, लेकिन शुरुआत में उन्हें साफ़ शब्दों में समझा पाना मुश्किल हो सकता है।
साथ ही, नए विचारों को लेकर ज़रूरत से ज़्यादा आत्मविश्वास आ सकता है, बिना उन्हें पूरी तरह परखे या जांचे-समझे।
मीडिया और सूचना तकनीक
न्यूज और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस समय तेज बहसें, एक-दूसरे से टकराती बातें और ट्रेंड्स में अचानक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
गलत जानकारी या अधूरी खबरें बहुत तेजी से फैल सकती हैं इसलिए हर बात पर समझदारी और परख जरूरी होगी।
इस दौरान नए और क्रांतिकारी आइडियाज सामने आ सकते हैं, लेकिन कम्युनिकेशन की कमी या गलतफहमी के कारण लोग उन्हें अपनाने में देर कर सकते हैं या कन्फ्यूज हो सकते हैं।
टेक्नोलॉजी से जुड़ी चर्चाएं, जैसे एआई, डेटा और नेटवर्क्स, अपने समय से थोड़ी आगे लग सकती हैं, यानी रोमांचक तो होंगी, लेकिन पूरी तरह साफ़ और व्यवस्थित नहीं होंगी।
राजनीति और समाज
इस समय सार्वजनिक बहसें और राजनीतिक बातचीत ज़्यादा बंटी हुई और जल्दबाज़ी भरी महसूस हो सकती हैं। बातों की बारीकियों और संतुलन को समझने का धैर्य कम रह सकता है।
समूह स्तर पर आज़ादी, समानता और नवाचार जैसे आदर्शों पर ज़ोर तो रहेगा, लेकिन उन्हें पूरी तरह समझे बिना या गलत तरीके से समझे जाने की संभावना भी ज़्यादा रहेगी।
28 फरवरी 2026 को कुंभ राशि में बुध ग्रह अस्त होगा। बुध को ट्रेडिंग, कम्युनिकेशन और गणना का ग्रह माना जाता है, इसलिए इसका अस्त होना शेयर बाज़ार के कुछ क्षेत्रों पर नकारात्मक असर डाल सकता है। शेयर मार्केट से जुड़ी विस्तृत भविष्यवाणियां आप एस्ट्रोसेज एआई से देख सकते हैं।
बुध के अस्त होने से बाज़ार में स्पष्टता की कमी रह सकती है, जिससे तेज़ उतार-चढ़ाव (हाई वोलैटिलिटी) देखने को मिल सकता है।
इस दौरान बाज़ार अफवाहों, अधूरी जानकारी और भावनात्मक फैसलों पर ज़्यादा चलेगा, न कि मज़बूत फंडामेंटल पर।
इस समय निम्न स्थितियां बन सकती हैं, जैसे- बाज़ार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव, फ़ेक न्यूज़, हैकिंग से जुड़ा डर या सरकारी नियमों की अफवाहें, निवेशकों द्वारा भावनाओं में आकर खरीदारी, घबराहट में पैनिक सेलिंग आदि।
हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारा यह ब्लॉग ज़रूर पसंद आया होगा। अगर ऐसा है तो आप इसे अपने अन्य शुभचिंतकों के साथ ज़रूर साझा करें। धन्यवाद!
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
बुध कितने डिग्री पर अस्त होता है?
8 डिग्री पर
बुध की मूलत्रिकोण राशि कौन सी है?
कन्या
शनि किस राशि का स्वामी है?
मकर और कुंभ
मार्च मासिक राशिफल 2026 में जानें कब पड़ रही है होली, देखें सार्वजनिक अवकाशों की सूची!
मार्च मासिक राशिफल 2026: ज्योतिषीय दृष्टि से मार्च का महीना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। यह परिवर्तन और नई शुरुआत का प्रतीक है। इस समय सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में गोचर करते हैं और चैत्र नवरात्रि, नव संवत्सर एवं नवीन ज्योतिषीय वर्ष की शुरुआत होती है। यही वजह है कि मार्च को दिशा तय करने वाला महीना कहा जाता है।
आध्यात्मिक दृष्टि से मार्च का महीना बहुत शुभ रहता है। इस महीने में उपवास, दान, ध्यान और आत्मा की शुद्धि करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है।
मार्च का महीना ज्योतिषीय दृष्टि से इसलिए भी खास है क्योंकि यहां से फाल्गुन मास समाप्त होता है और चैत्र मास की शुरुआत होती है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नए माह की शुरुआत होने पर हर किसी के मन में यह सवाल उठता है कि ये महीना उनके लिए कैसे रहेगा या उनके लिए क्या खास लेकर आया है। क्या इस महीने करियर में तरक्की मिलेगी? व्यापार में किस प्रकार कीप्रतिपदा से हिंदू नववर्ष की शुरुआत होती है।
नए माह की शुरुआत होने पर हर किसी के मन में यह सवाल उठता है कि ये महीना उनके लिए कैसे रहेगा या उनके लिए क्या खास लेकर आया है। क्या इस महीने करियर में तरक्की मिलेगी? व्यापार में किस प्रकार की समस्या झेलनी होगी? पारिवारिक जीवन में मिठास रहेगी या चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा? आदि कई तरह के सवाल हमारे मन-मस्तिष्क में घूमते रहते हैं। अब आपको एस्ट्रोसेज एआई के इस खास ब्लॉग मार्च 2026 में इन सभी सवालों का जवाब मिलने जा रहा है।
इसके साथ ही इस विशेष ब्लॉग में हम आपको मार्च 2026 में पड़ने वाले महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, तिथियों आदि से भी अवगत करवाएंगे। साथ ही, इस माह में पड़ने वाले ग्रहण-गोचर के साथ-साथ विवाह मुहूर्त के बारे में भी विस्तृत जानकारी प्रदान करेंगे।
मार्च मासिक राशिफल 2026: ज्योतिषीय तथ्य और हिंदू पंचांग की गणना
मार्च 2026 की शुरुआत पुष्य नक्षत्रके अंतर्गत शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को होगी। वहीं, मार्च 2026 माह का समापन उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में शुक्ल पक्ष की चर्तुदशी तिथि पर होगा।
AstroSage AI पॉडकास्ट सुनें – यहां आपको मिलेंगे ज्योतिष, जीवन के रहस्य, किस्मत के संकेत और AI द्वारा बताए गए सटीक ज्योतिषीय समाधान। अपनी ज़िंदगी के अहम सवालों के जवाब अब आवाज़ में, आसान भाषा में।
राष्ट्रीय अवकाश (केरल, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मणिपुर, पुडुचेरी, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल आदि राज्यों को छोड़कर)
03 मार्च 2026
मंगलवार
याओसांग
मणिपुर
03 मार्च 2026
मंगलवार
डोलजात्रा
पश्चिम बंगाल
04 मार्च 2026
बुधवार
याओसांग दिन 2
मणिपुर
05 मार्च 2026
गुरुवार
पंचायती राज दिवस
उड़ीसा
06 मार्च 2026
शुक्रवार
चपचार कुट
मिजोरम
17 मार्च 2026
मंगलवार
शब-ए-कद्र
जम्मू-कश्मीर
20 मार्च 2026
शुक्रवार
उगादी
आंध्र प्रदेश, दमन और दीव, दादरा और नगर हवेली, गोवा, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, राजस्थान और तेलंगाना
20 मार्च 2026
शुक्रवार
तेलुगु नव वर्ष
तमिलनाडु
20 मार्च 2026
शुक्रवार
जुमात-उल-विदा
जम्मू-कश्मीर
20 मार्च 2026
शुक्रवार
गुड़ी पड़वा
महाराष्ट्र
21 मार्च 2026
शनिवार
ईद उल-फितर
राष्ट्रीय अवकाश
21 मार्च 2026
शनिवार
सरहुली
झारखंड
22 मार्च 2026
रविवार
बिहार दिवस
बिहार
22 मार्च 2026
रविवार
ईद उल-फितर अवकाश
तेलंगाना
23 मार्च 2026
सोमवार
सरदार भगत सिंह शहादत दिवस
हरियाणा
27 मार्च 2026
शुक्रवार
रामनवमी
अंडमान-निकोबार, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, दमन और दिव, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, उड़ीसा, पंजाब, राजस्थान, उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश
31 मार्च 2026
मंगलवार
महावीर जयंती
चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, दमन और दीव, दिल्ली, दादरा और नगर हवेली, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, लक्षद्वीप मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मिजोरम, पंजाब , राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश
3 मार्च, 2026 को फाल्गुन मास शुक्ल पक्ष पूर्णिमा पर मंगलवार के दिन दोपहर 15:20 बजे से सायं काल 18:47 बजे तक चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। यह ग्रहण पश्चिम एशिया के देश पाकिस्तान, अफगानिस्तान, इराक, ईरान, आदि के अतिरिक्त लगभग संपूर्ण एशिया में, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका, दक्षिणी एवं उत्तरी अमेरिका और रूस में दृश्यमान होगा।
भारत में यह खग्रास चंद्र ग्रहण ग्रस्तोदय के रूप में दिखेगा क्योंकि भारत के किसी भी क्षेत्र में जब चंद्रोदय होगा, उससे काफी पहले ही यह खग्रास चंद्र ग्रहण प्रारंभ हो चुका होगा इसलिए भारत के किसी भी क्षेत्र में इस खग्रास चंद्र ग्रहण का प्रारंभ का ग्रास प्रारंभ तथा ग्रहण मध्य परमग्रास देखा नहीं जा सकेगा।
भारत के केवल पूर्वी सुदूर राज्यों जैसे बंगाल के उत्तरी पूर्वी क्षेत्र, मिजोरम, नागालैंड, मणिपुर, असम, अरुणाचल प्रदेश, आदि में इस ग्रहण की खग्रास समाप्ति तथा ग्रहण समाप्ति देखी जा सकती है। इसके अतिरिक्त शेष भारत में जब चंद्रोदय होगा तब तक खग्रास समाप्त हो चुका होगा तथा केवल ग्रहण समाप्ति ही दृष्टिगोचर होगी।
मार्च मासिक राशिफल 2026: सभी 12 राशियों का भविष्यफल
मेष राशि
मार्च मासिक राशिफल 2026 के अनुसार का यह महीना आपके लिए उतार-चढ़ाव से भरा रहने वाला है। हल्के खर्चों के साथ आमदनी में बढ़ोतरी होगी। काम के सिलसिले में काफी भागदौड़ करनी पड़ेगी।
करियर: आपके ऊपर काम का दबाव बना रह सकता है। नौकरी में पदोन्नति के अवसर मिल सकते हैं। व्यापार में आशातीत लाभ मिल सकता है।
शिक्षा: आपकी पढ़ाई में बाधाएं आने का डर है। विदेश जाकर पढ़ाई करने में कामयाबी मिलने के योग बन सकते हैं।
पारिवारिक जीवन:पारिवारिक सदस्यों में आपसी तनाव में कमी आएगी और आपसी सामंजस्य भी बढ़ेगा। आपकी मां के स्वास्थ्य को लेकर थोड़ी सी परेशानियां सामने आ सकती हैं।
प्रेम और वैवाहिक जीवन: अपने पार्टनर के साथ घूमने जाना, फिल्में देखना या लंबी दूरी की यात्रा पर जाना आपको बहुत पसंद आएगा। जीवनसाथी से आपको भरपूर प्रेम और आर्थिक लाभ मिल सकता है।
आर्थिक जीवन: आपके लिए लगातार आमदनी बढ़ने के योग बन रहे हैं। एक से ज्यादा माध्यमों से आपके पास धन आएगा। नौकरी में पदोन्नति से भी धन वृद्धि हो सकती है।
स्वास्थ्य: आपको पेट से जुड़ी समस्याएं, पाचन तंत्र के रोग और गैस की समस्या, आंखों में जलन, आंखों से पानी बहना, पैरों में दर्द और कमर तथा कंधों में दर्द की समस्या होने की आशंका है।
उपाय: मंगलवार के दिन किसी पार्क में अनार के नौ पौधे लगाएं।
महीने के अंत में खर्च बढ़ सकते हैं। नौकरी में एकसाथ कई काम करने पड़ सकते हैं। प्रेम संबंधी मामलों में अच्छे समय की शुरुआत होगी। पारिवारिक मामलों में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी रह सकती है।
करियर: मार्च मासिक राशिफल 2026 के अनुसार कार्यक्षेत्र में अच्छी सफलता देखने को मिलेगी। नौकरी के सिलसिले में विदेश यात्रा और दूसरे राज्यों की यात्रा करने का मौका मिल सकता है। व्यापार में विस्तार करने में सफलता मिल सकती है।
शिक्षा: विद्यार्थियों को बार-बार चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। शिक्षा में सफलता मिलने के बड़े योग बनेंगे। प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो महीने का पूर्वार्ध उसके लिए अनुकूल रह सकता है।
पारिवारिक जीवन:परिवार में तनाव, टकराव और उथल-पुथल रह सकती है। परिवार से कुछ समय के लिए दूरी आ सकती है। माता-पिता को स्वास्थ्य समस्याएं जकड़ सकती हैं।
प्रेम और वैवाहिक जीवन: आपको प्रेम और रोमांस से भरे पलों का आनंद लेने का मौका मिलेगा। एक-दूसरे के साथ लंबी यात्राओं पर जा सकते हैं।
आर्थिक जीवन: आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और आमदनी भी बढ़ेगी। आपकी धन संचित करने की प्रवृत्ति बढ़ेगी। शेयर बाजार में निवेश करते हैं तो उससे भी आपको मुनाफा होने के योग हैं।
स्वास्थ्य: लापरवाही करने पर छोटी-छोटी समस्याएं बड़ी समस्या का रूप धारण कर सकती हैं। आंखों और पेट से जुड़ी समस्याएं परेशान कर सकती हैं।
मार्च मासिक राशिफल 2026 के अनुसार मिथुन राशि के लिए नौकरी में स्थानांतरण के योग बन सकते हैं। प्रेम संबंधी मामलों के लिए महीना अनुकूल है। पारिवारिक जीवन मध्यम रहने की संभावना है।पारिवारिक जीवन मध्यम रहने की संभावना है।
करियर: आप पर काम का दबाव रहेगा और मेहनत ज्यादा करनी पड़ेगी। कार्यों में कुछ विलंब हो सकता है लेकिन मनचाहा परिवर्तन आपको खुशी दे सकता है।
शिक्षा: आपको पढ़ाई में अच्छी सफलता मिलने के योग हैं। शिक्षा में आपकी पकड़ मजबूत होगी। प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को उत्तम सफलता मिल सकती है।
पारिवारिक जीवन:परिवार में खुशियां बनी रहेंगी और सदस्यों के बीच आपसी प्रेम बढ़ेगा। परिवार के साथ तीर्थाटन करने के योग भी बन रहे हैं। माता-पिता को स्वास्थ्य समस्याओं से राहत मिलेगी।परिवार के साथ तीर्थाटन करने के योग भी बन रहे हैं। माता-पिता को स्वास्थ्य समस्याओं से राहत मिलेगी।
प्रेम और वैवाहिक जीवन: आपके रिश्ते में प्रेम बढ़ेगा। आप और आपके प्रियतम के बीच की दूरियां कम होंगी। पति-पत्नी को इस दौरान एक-दूसरे के प्रति सम्मान का अभाव महसूस हो सकता है।
आर्थिक जीवन: व्यापार में अच्छी उन्नति मिलेगी जिससे आपकी आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा। शेयर बाजार में सक्रिय रूप से धन निवेश कर रहे हैं तो आपको उसमें उत्तम सफलता प्राप्त हो सकती है।
स्वास्थ्य: आपको कार्यक्षेत्र में अत्यधिक दबाव झेलना पड़ सकता है। आपको मानसिक तनाव तथा थकान का अनुभव हो सकता है। आपको अपने खानपान में वसा की मात्रा पर नियंत्रण रखने की जरूरत है।
उपाय: बुधवार के दिन भूरे रंग की गाय को हरी सब्जियां खिलाएं।
मार्च मासिक राशिफल 2026 बताता है कि कर्क राशि वाले जातकों के खर्चों में बहुत तेजी आएगी और आपकी आर्थिक स्थिति में उतार-चढ़ाव आने की प्रबल संभावना है। इस दौरान लंबी यात्राओं के योग भी बन रहे हैं। विवाहित जातकों के लिए समय अच्छा रहने की संभावना है।
करियर: नौकरी में काम का दबाव और चुनौतियां बनी रह सकती हैं। आपको पदोन्नति भी मिल सकती है। व्यवसाय से संबंधित लंबी यात्राएं आपको लाभ देंगी।
शिक्षा: यह समय विद्यार्थियों के लिए चुनौतीपूर्ण रह सकता है। आपको रणनीति बनाकर पढ़ाई करनी होगी।
प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को अच्छी सफलता मिलने के योग बन सकते हैं।
पारिवारिक जीवन: परिवार में आपसी सामंजस्य दिखाई देगा। मां के स्वास्थ्य में आ रही समस्याएं अब दूर होने लगेंगी। भाई-बहनों से संबंध बनते बिगड़ते रहेंगे।
प्रेम और वैवाहिक जीवन: आप अपने प्रियतम से छोटी-छोटी बातों पर नाराज हो सकते हैं। आप दोनों को ही मानसिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है। जीवनसाथी के साथ लंबी यात्राओं के योग बन रहे हैं।
आर्थिक जीवन: आपको आर्थिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है। आपके खर्चों में बढ़ोतरी होने के संकेत हैं। धन का निवेश करने के लिए इस समय को किसी भी तरह से ठीक नहीं कहा जा सकता है।
स्वास्थ्य: आपकी स्वास्थ्य समस्याओं में बढ़ोतरी होने की आशंका है। आपके पिताजी को स्वास्थ्य समस्याएं परेशान कर सकती हैं।
मार्च मासिक राशिफल 2026 के अनुसार आपको अपनी स्वास्थ्य समस्याओं के प्रति सचेत रहना होगा। लंबी यात्राएं आपको खुशी देंगी और लंबी यात्राओं से आपको लाभ होगा।
करियर: कार्यक्षेत्र में महीने का पूर्वार्ध कुछ कमजोर रह सकता है। मनचाहे परिणाम न मिलने से आपको निराशा हो सकती है। नौकरी में स्थिति मजबूत होगी।
शिक्षा: पढ़ाई में आपको मनचाहे परिणाम की प्राप्ति होगी। पारिवारिक माहौल जरूर कुछ परेशानियां खड़ी कर सकता है। प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए यही समय है कुछ कर दिखाने का।
पारिवारिक जीवन:अपने भाई-बहनों की मदद से परिवार के माहौल को बेहतर बनाने का प्रयास करेंगे। ससुराल और परिवार के बीच कुछ कहासुनी होने की नौबत आ सकती है।
प्रेम और वैवाहिक जीवन: आप स्वयं पर शक करेंगे कि आप सही कर रहे हैं या गलत कर रहे हैं। आप अपने प्रियतम से अपने दिल की बात कहने में सफल रहेंगे।
आर्थिक जीवन: दीर्घकालीन निवेश करने से अच्छा धन लाभ प्राप्त कर सकते हैं। आपके खर्चों में यकायक बढ़ोतरी हो जाएगी। आपकी आर्थिक स्थिति पर दबाव पड़ सकता है।
स्वास्थ्य: यदि आप लापरवाही करते हैं और छोटी-छोटी समस्याओं को नजरअंदाज करते हैं तो उनमें से ही कोई समस्या बड़ी गंभीर समस्या का रूप ले सकती है।
उपाय: आपको प्रतिदिन सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए।
कन्या राशि के जातकों के लिए यह महीना चुनौतियों से भरा रहने वाला है। आपको अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देना होगा। निजी जीवन में आपके विरोधी सिर उठाने का प्रयास करेंगे।
करियर: मार्च मासिक राशिफल 2026 के अनुसार नौकरी में आपको कुछ विरोधी परेशान कर सकते हैं। आपको आपके वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा।
शिक्षा: चुनौतियों का सामना करने के बावजूद अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर पाएंगे। आप जितनी ज्यादा मेहनत करेंगे उतनी ही अच्छी पढ़ाई आपकी होगी।
पारिवारिक जीवन:परिवार के सदस्यों में प्रेम बढ़ेगा। परिवार में एकरूपता बनी रहेगी और परिवार के लोग हर चुनौती का अच्छे से सामना कर पाएंगे। परिवार का माहौल हल्का बना रहेगा।
प्रेम और वैवाहिक जीवन: आपका प्रेम परवान चढ़ेगा। आपके प्रेम विवाह के प्रबल योग बन सकते हैं। विवाहित जातकों के लिए भी यह महीना ठीक रहेगा।
आर्थिक जीवन: अचानक से खर्च आएंगे और आपको उन्हें हर हाल में संभालना होगा। आप निवेश करते हैं तो उसके लिए समय अच्छा है।
स्वास्थ्य: आपको शारीरिक समस्याएं और मानसिक तनाव दे सकती हैं। आपको अपने स्वास्थ्य से संबंधित सभी पहलुओं पर विचार करना चाहिए।
उपाय: प्रतिदिन श्री विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र का पाठ करें।
मार्च मासिक राशिफल 2026 बताता है कि तुला राशि के लोगों को अपने जीवन में चल रही समस्याओं के प्रति सावधानी बरतनी चाहिए। विवाहित जातकों के लिए महीना अनुकूल रहने की संभावना है।
करियर: आपको नौकरी में बदलाव करने का मौका मिलेगा। यदि आप अपना मनचाहा स्थानांतरण प्राप्त करना चाहते हैं। आप अपने व्यापार में भरपूर उन्नति करेंगे।
शिक्षा: आप बहुत प्रयास करेंगे लेकिन पढ़ाई के प्रति एकाग्रता आपके अंदर नहीं आएगी। शिक्षा में उत्तम सफलता मिलने की संभावना है। आपके कार्यों में आ रही अड़चनें दूर होंगी।
पारिवारिक जीवन:इससे पारिवारिक जीवन में उतार-चढ़ाव रहेगा लेकिन आपसी सामंजस्य बना रहेगा। परिवार के प्रति कुछ उदासीनता महसूस हो सकती है।
प्रेम और वैवाहिक जीवन: यदि आप एक विवाहित जातक हैं तो आपके लिए यह महीना वैसे ठीक-ठाक रह सकता है। आप और आपके जीवनसाथी के बीच प्रेम बढ़ेगा।
आर्थिक जीवन: आमदनी के एक से ज्यादा स्रोत आपको प्राप्त होंगे। आपकी आर्थिक स्थिति बेहतर रहेगी। शेयर बाजार में निवेश करेंगे तो इससे आपको उत्तम सफलता प्राप्त हो सकती है।
स्वास्थ्य: इस महीने आपको पेट से जुड़ी समस्याएं, पाचन तंत्र से जुड़े रोग, खानपान से जुड़ी विसंगतियां बीमार बना सकती हैं। आपकी मां के स्वास्थ्य में भी इस महीने कुछ गिरावट आ सकती है।
उपाय: शनिवार के दिन श्री बजरंग बाण का पाठ अवश्य करें।
मार्च मासिक राशिफल 2026 के अनुसार यह महीना वृश्चिक राशि के जातकों के लिए अनुकूल रहने की संभावना है। परिस्थितियों से तालमेल बिठाकर ही आप अच्छी सफलता प्राप्त कर पाएंगे।
करियर: काम में अनेक चुनौतियां आएंगी। आपको कई कामों में विरोधाभास दिखेगा। परिस्थितियों से तालमेल बिठाकर ही आप अच्छी सफलता प्राप्त कर पाएंगे।
शिक्षा: आपको कठिन परिश्रम के बाद अच्छी सफलता प्राप्त होगी। यदि आप किसी प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो आपके लिए यह महीना अनुकूल है।
पारिवारिक जीवन:परिवार में प्रेम, अपनापन और सामंजस्य बढ़ेगा। पारिवारिक सामंजस्य मजबूत होगा। आपस में प्रेम बढ़ेगा और चुनौतियों में कमी आएगी।
प्रेम और वैवाहिक जीवन: प्यार में मजबूती आने के साथ-साथ एक दूसरे के प्रति विश्वास बढ़ेगा। प्यार में धैर्य बढ़ेगा। चुनौतियों को सहन करने की क्षमता बढ़ेगी।
आर्थिक जीवन: आपकी धन संचय करने की प्रवृत्ति बढ़ेगी। धन को निवेश करने का आप प्रयास करेंगे जिससे आपको धन लाभ होगा।
स्वास्थ्य: छाती में जलन, जकड़न और किसी तरह का संक्रमण होने की आशंका है। पेट से जुड़ी समस्याएं और वसा जनित रोग आपको परेशान कर सकती हैं।
उपाय: मंगलवार के दिन 9 अनार के पौधे किसी उद्यान या बगीचे में लगाएं।
मार्च मासिक राशिफल 2026 के अनुसार यह महीना धनु राशि के जातकों के लिए अनुकूल रहने वाला है। आपका साहस बढ़ेगा जिससे आपके काम बेहतर हो पाएंगे।
करियर: कार्यक्षेत्र में आपका काम अच्छे से चलेगा। सहकर्मियों से अच्छा व्यवहार रखना पड़ेगा। व्यापार करने वाले जातकों के लिए महीना उत्पादक रहेगा।
शिक्षा: आपको अपनी मेहनत का फल मिलेगा। आपका साहस और पराक्रम अधिक रहेगा। यदि आप किसी प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो उसके लिए महीने की शुरुआत बहुत अच्छी रहने वाली है।
पारिवारिक जीवन:इस महीने पारिवारिक जीवन में उथल-पुथल बनी रह सकती है। आपके भाई-बहनों को कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
प्रेम और वैवाहिक जीवन: बीच-बीच में कुछ मतभेद होंगे। आप अपने प्रियतम के साथ यात्राओं पर जाएंगे। आपको परिवार के बुजुर्गों का सहयोग मिलेगा।
आर्थिक जीवन: आपकी आमदनी बहुत ज्यादा तो नहीं होगी लेकिन कम भी नहीं होगी। आपकी आर्थिक स्थिति डांवाडोल रहती है। आपकी आमदनी में बढ़ोतरी करने की कोशिश करेंगे।
स्वास्थ्य: आपके कंधों और जोड़ों में दर्द तथा मांसपेशियों में ऐंठन की समस्या हो सकती है। आपकी ऊर्जा अधिक रहेगी जिससे आप हर काम को बेहतर तरीके से कर पाएंगे।
उपाय: रविवार के दिन सूर्य देव को अर्घ्य अवश्य दें।
मार्च मासिक राशिफल 2026 कहता है कि कुछ लोगों से आपके संबंध इसके कारण मधुर बनेंगे तो कुछ के कारण समस्याएं बढ़ेंगी। धन संचित होने में सफलता मिलेगी।
करियर: आपको अपने सहकर्मियों का सहयोग प्राप्त होगा। नौकरी में आपकी स्थिति मजबूत होगी। व्यवसाय करने वाले जातकों के लिए यह महीना उतार-चढ़ाव से भरा रहेगा।
शिक्षा: छात्रों के अंदर आलस भी बढ़ेगा। आपको पढ़ना होगा और आप आलस दिखाएंगे। आप खुद को बेहतर बनाएंगे और मेहनत करेंगे। आपके परिवार का माहौल सकारात्मक रहेगा।
पारिवारिक जीवन:कुछ लोग आपके परम हितैषी और कुछ लोग आपके विरोधी बन सकते हैं। पारिवारिक आमदनी में बढ़ोतरी होगी। आपको अपने भाई-बहनों से मधुर संबंध बनाए रखने के लिए बहुत प्रयास करने होंगे।
प्रेम और वैवाहिक जीवन: आपको अपने प्रेम को संभालना होगा। आप अपने मित्रों की सहायता से भी अपने रिश्ते को बेहतर बना पाने में कामयाब रहेंगे। आपके जीवनसाथी को स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
आर्थिक जीवन: धन का सदुपयोग करें ताकि आर्थिक स्थिति ठीक रहे। निवेशित योजनाओं से धन प्राप्त होगा। शेयर बाजार में निवेश करते हैं तो उसके लिए महीना अच्छा है।
स्वास्थ्य: स्वास्थ्य समस्याएं पकड़ सकती हैं। आपको मुख संबंधी समस्या, मुंह के छाले, दांतों में दर्द, आंखों की समस्या, जोड़ों में दर्द और पेट से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
उपाय: शुक्रवार के दिन मां महालक्ष्मी जी की उपासना करें।
इस महीने सबसे ज्यादा स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। प्रेम संबंधी मामलों के लिए यह महीना अच्छा रह सकता है। व्यापार करने वाले जातकों के लिए कुछ चुनौतियां तैयार रहेंगी।
करियर: कार्यक्षेत्र में किसी से भी कहासुनी या झगड़ा करने से बचें। व्यापार करने वाले जातकों को परिस्थितियों से तालमेल बिठाने का प्रयास करना होगा।
शिक्षा: आपने जितनी मेहनत की है, उसके अनुपात में आपको अच्छा फल मिलना शुरू हो जाएगा। आपको अपने गुरुजनों का मार्गदर्शन प्राप्त होगा।
पारिवारिक जीवन:परिवार में एक-दूसरे से विरोधाभास हो सकता है। परिवार में शुभ कार्यक्रम आयोजित होंगे जिससे परिवार में प्रेम बढ़ेगा।
प्रेम और वैवाहिक जीवन: मुंह से कई बार ऐसी बातें निकल सकती हैं जो आपके प्रियतम को परेशान करेंगी। किसी अन्य के कहने में आकर रिश्ते के टूटने की स्थिति भी बन सकती है।
आर्थिक जीवन: एक से ज्यादा माध्यमों से धन प्राप्ति के योग बनेंगे। शेयर बाजार से भी आपको लाभ मिलेगा। आर्थिक चुनौतियां कम रहेंगी।
स्वास्थ्य: आपको मानसिक तनाव, सिर में दर्द, तेज बुखार, जुकाम, आंखों से संबंधित समस्याएं और पेट से जुड़े रोग, अपच, एसिडिटी, जैसी समस्याएं परेशान कर सकती हैं।
उपाय: बुधवार के दिन छोटी कन्याओं के चरण छूकर उनका आशीर्वाद लें।
आपके खर्चों में बढ़ोतरी होगी। पारिवारिक जीवन खुशियों से भरा रहेगा। आपको कुछ बातों पर बहुत ध्यान देना होगा ताकि आपका रिश्ता अच्छे से चलता रहे।
करियर: कार्यक्षेत्र में आपकी स्थिति मजबूत होगी। आपको अपने वरिष्ठ सहयोगियों का विशेष मार्गदर्शन मिलेगा। कुछ चुनौतियां और स्वास्थ्य समस्याएं आपके काम पर प्रभाव डाल सकती हैं।
शिक्षा: आपकी शिक्षा प्राप्त करने की गति तेज होगी। परिवार के किसी वरिष्ठ सदस्य से आपको अच्छा मार्गदर्शन मिलेगा। छात्रों की एकाग्रता बढ़ेगी।
पारिवारिक जीवन:परिवार में अच्छा सामंजस्य और प्रेम भावना देखने को मिलेगा। परिवार के वरिष्ठ सदस्यों को भरपूर सम्मान और आदर की दृष्टि से देखा जाएगा।
प्रेम और वैवाहिक जीवन: आपके प्रियतम को स्वास्थ्य समस्याएं परेशान कर सकती हैं। आप अपने रिश्ते को कोई दिशा देने में कामयाब हो सकते हैं।
आर्थिक जीवन: आपके खर्च अप्रत्याशित गति से बढ़ेंगे और आमदनी उस लिहाज़ से कमजोर रहेगी। आपकी आर्थिक स्थिति डांवाडोल हो सकती है।
स्वास्थ्य: आपको अपने स्वास्थ्य पर इस महीने विशेष रूप से ध्यान देने की आवश्यकता है। मार्च मासिक राशिफल 2026 के अनुसार आपको जोड़ों में दर्द, आंखों से संबंधित समस्याएं परेशान कर सकती हैं।
उपाय: मंगलवार के दिन श्री हनुमान जी की उपासना करें।
हम आशा करते हैं कि आपको ये आर्टिकल पसंद आया होगा। एस्ट्रोसेज के साथ जुड़े रहने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद!
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1. मार्च साल का कौन सा महीना है?
उत्तर. यह तीसरा महीना होता है।
प्रश्न 2. मार्च के महीने में क्या आता है?
उत्तर. इसमें होली आती है।
प्रश्न 3. क्या मार्च में नवरात्रि भी हैं?
उत्तर. हां, मार्च में चैत्र नवरात्रि भी आते हैं।
बुध कुंभ राशि में वक्री: भाग्य का ताला खुलेगा इन राशियों के लिए, बाकी रहें सतर्क!
एस्ट्रोसेज एआई के इस विशेष ब्लॉग में हम आपको बुध कुंभ राशि वक्री के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान करेंगे। साथ ही, यह भी बताएंगे कि बुध वक्री का प्रभाव सभी 12 राशियों पर किस प्रकार से पड़ेगा।
बता दें कुछ राशियों को बुध ग्रहवक्री से बहुत अधिक लाभ होगा तो, वहीं कुछ राशि वालों को इस अवधि बहुत ही सावधानी से आगे बढ़ने की आवश्यकता होगी क्योंकि उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, इस ब्लॉग में बुध ग्रह को मजबूत करने के कुछ शानदार व आसान उपायों के बारे में भी बताएंगे और देश-दुनिया वशेयर मार्केटपर भी इसके प्रभाव के बारे में चर्चा करेंगे।
बता दें कि ग्रहों के राजकुमार के नाम से जाने वाले बुध ग्रह 26 फरवरी 2026 की सुबह 11 बजकर 50 मिनट पर बुध ग्रह शनि की राशि कुंभ में वक्री होने जा रहे हैं।
बुध कुंभ राशि में वक्री: ज्योतिष में बुध वक्री का महत्व
ज्योतिष में बुध वक्री एक जाना-पहचाना समय होता है। इस दौरान अक्सर बातचीत में गलतफहमी, मोबाइल या तकनीकी दिक्कतें, यात्रा में देरी और बातों का उलझना देखने को मिलता है। लोग आमतौर पर इसे अशुभ मानते हैं, लेकिन इसका एक सकारात्मक पहलू भी होता है। यह समय रुककर सोचने, पुराने कामों की समीक्षा करने और खुद को बेहतर समझने का मौका देता है। इस दौरान अधूरे काम पूरे करने रुके हुए मामलों को सुलझाने और चीज़ों को साफ तरीके से समझने में मदद मिलती है।
कई लोग इस समय पुरानी रचनात्मक सोच को फिर से अपनाते हैं, बीते समय से जुड़ते हैं और बिगड़े रिश्तों को सुधारने की कोशिश करते हैं। जब बुध कुंभ राशि में वक्री होता है, तो यह कुछ चुनौतियों के साथ गहरे आत्म-मंथन का समय बन जाता है। इस दौरान अंतर्ज्ञान और भावनाएं ज्यादा सक्रिय हो जाती हैं, जिससे कभी-कभी भ्रम या ज़्यादा सोचने की स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसे समय में सोच-समझकर बात करना, धैर्य रखना और अपनी भावनात्मक व मानसिक स्थिति पर ध्यान देना ज़रूरी होता है।
कुंभ राशि भले ही बाहर से तर्कसंगत दिखती हो, लेकिन इसके भीतर गहरी भावनाएं भी होती हैं। इस समय पुराने भावनात्मक घाव फिर उभर सकते हैं या आप पुराने रिश्तों और अनुभवों को नए नज़रिए से समझने लगते हैं। यह दौर मन की उलझनों को सुलझाने और दबाई हुई भावनाओं को बाहर निकालने में सहायक होता है।
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बुध कुंभ राशि में वक्री: दुनिया भर पर प्रभाव
बुध ग्रह व्यक्ति की समझ और तर्क शक्ति का प्रतीक माना जाता है, जबकि शनि गणना और रणनीति से जुड़ा होता है। ऐसे में जब कुंभ राशि में बुध वक्री होता है, तो इसका असर देश और दुनिया की घटनाओं पर साफ दिखाई देता है। अब सवाल यह है कि यह असर अच्छा होगा या मुश्किलें बढ़ाएगा? आइए जानते हैं।
राजनीति और सरकार
भारत सरकार के प्रवक्ता और बड़े नेता विवादों में घिर सकते है और मीडिया की नजर उन पर बनी रह सकती है, क्योंकि उनसे कुछ गलत बयान निकल सकते हैं या उनकी बातों को गलत तरीके से समझा जा सकता है।
सरकार की कार्यशैली और नीतियां चाहे कितनी भी अच्छी क्यों न हों, फिर भी उनकी आलोचना हो सकती है या लोग उन्हें नकारात्मक रूप ले सकते हैं।
नौवें भाव विदेश और दूर की यात्राओं से जुड़ा होता है, इसलिए इस दौरान सरकार को विदेशी देशों की तरफ से दबाव या धमकियों का सामना करना पड़ सकता है, हालांकि हालात काबू में रहेंगे।
इस समय नेता कड़े और आक्रामक फैसले लेते हुए नजर आ सकते हैं, लेकिन कुछ मामलों में सोच-विचार की कमी भी दिखाई दे सकती है।
कुंभ राशि में बुध के वक्री होने के दौरान खबरों को गलत समझा जा सकता है या बातों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा सकता है। किसी नेता, सरकार या संस्था के बयान लोगों में भ्रम पैदा कर सकते हैं, जिससे बहस या विरोध की स्थिति बन सकती है।
पुराने इंटरव्यू, सोशल मीडिया पोस्ट या अधूरी रह गई खबरें फिर से सामने आ सकती हैं और लोगों का ध्यान दोबारा उन पर जा सकता है।
इस समय खबरों से जुड़ी वेबसाइट्स, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और प्रसारण सिस्टम में तकनीकी दिक्कतें भी आ सकती हैं, जिससे जानकारी पहुंचने में देरी, गलतियां या रुकावटें देखने को मिल सकती हैं।
AstroSage AI पॉडकास्ट सुनें – यहां आपको मिलेंगे ज्योतिष, जीवन के रहस्य, किस्मत के संकेत और AI द्वारा बताए गए सटीक ज्योतिषीय समाधान। अपनी ज़िंदगी के अहम सवालों के जवाब अब आवाज़ में, आसान भाषा में।
रचनात्मक क्षेत्र और पेशे
बुध कुंभ राशि में वक्री आम तौर पर कठिन माना जाता है, क्योंकि बुध बोलने और गायन का कारक ग्रह है। ऐसे में आवाज़, अभिव्यक्ति और रचनात्मक कामों में रुकावटें आ सकती हैं।
बुध वक्री के कारण संगीत उद्योग पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इस समय कुछ बड़े और महंगे म्यूज़िक प्रोजेक्ट असफल हो सकते हैं, जिससे संगीत जगत को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है।
फिल्म इंडस्ट्री को भी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि इस दौरान रिलीज़ होने वाली फिल्में उम्मीद के मुताबिक अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाएंगी।
बुध कुंभ राशि में वक्री: शेयर बाज़ार पर प्रभाव
बुध कुंभ राशि में वक्री होने से 26 फरवरी 2026 के बाद शेयर बाजार पर भी कुछ हद तक नकारात्मक असर पड़ सकता है। इस समय शेयर मार्केट में निवेश करते समय थोड़ी सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
बुध के कुंभ राशि में वक्री होने के कारण केमिकल फर्टिलाइजर इंडस्ट्री, चाय उद्योग, कॉफी उद्योग, स्टील इंडस्ट्री, हिंदाल्को, ऊनी मिल्स आदि क्षेत्रों में सुस्ती देखने को मिल सकती है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज़, परफ्यूम और कॉस्मेटिक इंडस्ट्री, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और अन्य सेक्टर भी महीने के अंत तक धीमी गति से काम कर सकते हैं। हालांकि, इनमें आगे चलकर काम जारी रहने की संभावना बनी रहेगी।
वेब डिज़ाइनिंग कंपनियों और पब्लिशिंग फर्म्स की प्रगति रुक सकती है और इनके ग्राफ़ में गिरावट देखने को मिल सकती है।
मार्च के पहले हफ्ते में कुछ नई विदेशी कंपनियां भारतीय बाज़ार में प्रवेश कर सकती हैं, जिससे पेट्रोल, डीज़ल और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी होने की संभावना है।
बुध कुंभ राशि में वक्री: इन राशियों पर पड़ेगा नकारात्मक प्रभाव
मेष राशि
मेष राशि के जातकों के लिए बुध तीसरे और छठे भाव के स्वामी हैं और अब वक्री होकर ग्यारहवें भाव में आ रहा है। इस दौरान करियर से जुड़ी स्थिति थोड़ी परेशान करने वाली हो सकती है। नौकरी के सिलसिले में अचानक और अनचाही यात्राएं करनी पड़ सकती हैं, जिससे मानसिक तनाव बढ़ सकता है। अगर आप बिजनेस से जुड़े हैं, तो इस समय सही योजना की कमी महसूस हो सकती है और इसके कारण आर्थिक नुकसान होने की आशंका है।
इसलिए बुध वक्री के इस दौर में सोच-समझकर और सही रणनीति बनाकर ही कोई कदम उठाएं। इस अवधि में किसी को भी पैसा उधार देने से बचें, क्योंकि धन हानि के योग बन रहे हैं। यदि आप काफी समय से वेतन बढ़ोतरी का इंतज़ार कर रहे थे, तो उसमें भी देरी हो सकती है, जिससे निराशा और झुंझलाहट महसूस हो सकती है।
कर्क राशि
कर्क राशि के जातकों के लिए बुध तीसरे और बारहवें भाव के स्वामी हैं और वक्री होकर आठवें भाव में स्थित हो रहे हैं। इस दौरान आपकी छवि या प्रतिष्ठा पर थोड़ा असर पड़ सकता है और किस्मत भी कुछ मामलों में आपका साथ कम देती हुई दिख सकती है।
करियर के लिहाज से आप बेहतर अवसरों की तलाश में नौकरी बदलने का विचार कर सकते हैं, क्योंकि वर्तमान नौकरी आपको संतुष्टि नहीं दे पाएगी या आपके उद्देश्यों को पूरा नहीं करेगी। व्यवसाय से जुड़े लोगों के इस समय लेन-देन में सावधानी रखनी होगी। कंपनी से जुड़े सौदों में अपेक्षित लाभ न मिलने के कारण आमदनी में कमी आ सकती है।
हालांकि इस दौरान कुछ धन हानि के योग बन सकते हैं, फिर भी लंबे समय के हिसाब से आप आर्थिक रूप से अच्छी प्रगति कर सकते हैं और आगे चलकर मजबूत स्थिति बना सकते हैं।
कन्या राशि के जातकों के लिए बुध पहले और दसवें भाव के स्वामी हैं और वक्री होकर छठे भाव में जा रहा है। इस कारण बुध वक्री के दौरान दोस्तों और सहयोगियों के साथ रिश्तों में तनाव या गलतफहमियां हो सकती हैं। कामकाज के दौरान आपको अधिक सतर्क रहने की जरूरत होगी। करियर के क्षेत्र में सीनियर्स और सहकर्मियों के साथ मतभेद हो सकते हैं। आपकी मेहनत के बावजूद बॉस पूरी तरह संतुष्ट नज़र नहीं आ सकते।
व्यवसाय करने वालों को भी सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि इस समय कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है। आर्थिक रूप से इस दौरान खर्चे बढ़ सकते हैं और उन्हें संभालना थोड़ा मुश्किल हो सकता है, इसलिए बजट पर विशेष ध्यान देना ज़रूरी रहेगा।
तुला राशि
तुला राशिके जातकों के लिए बुध नौवें और द्वादश भाव के स्वामी हैं और वक्री होकर पांचवें भाव में स्थित हो रहा है। इस कारण बुध वक्री के दौरान भाग्य का साथ थोड़ा कम मिल सकता है और आपके प्रयास अटके हुए महसूस हो सकते हैं। पेशेवर जीवन में यदि आप अपनी वर्तमान नौकरी से संतुष्ट नहीं हैं, तो नौकरी बदलने का विचार मन में आ सकती है। इस समय काम का दबाव भी पहले से अधिक रह सकता है।
व्यवसाय के क्षेत्र में प्रतिद्वंद्वियां से कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण आप अपने पार्टनर्स को कम समय दे पाएंगे, जिससे तालमेल पर असर पड़ सकता है। आर्थिक रूप से खर्च काफी बढ़ सकते हैं और उन्हें संभालना कठिन हो सकता है। इसलिए पहले से बेहतर योजना बनाकर चलना इस समय बहुत जरूरी रहेगा।
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बुध कुंभ राशि वक्री: इन राशियों पर पड़ेगा सकारात्मक प्रभाव
मकर राशि
मकर राशि के जातकों के लिए बुध छठे और नौवें भाव के स्वामी हैं और वक्री होकर दूसरे भाव में स्थित होगा। इसके कारण इस समय आपके द्वारा किए जा रहे प्रयासों में अच्छा विकास देखने को मिल सकता है। भाई-बहनों के साथ आपके संबंध बेहतर रहेंगे और आपसी तालमेल बढ़ेगा। करियर के क्षेत्र में कामकाज में प्रगति होगी और इस दौरान विदेश से जुड़े नए अवसर भी मिल सकते हैं। व्यवसाय करने वालों के लिए यह समय अच्छा रह सकता है।
कारोबार में अच्छा टर्नओवर होने के साथ-साथ ठीक-ठाक मुनाफा भी मिलने के योग बन रहे हैं। आर्थिक रूप से आपकी लगातार की जा रही मेहनत का फल आपको मिलेगा और आय में बढ़ोतरी हो सकती है। साथ ही, इस दौरान बचत करने के अच्छे अवसर भी मिलेंगे।
हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारा यह ब्लॉग ज़रूर पसंद आया होगा। अगर ऐसा है तो आप इसे अपने अन्य शुभचिंतकों के साथ ज़रूर साझा करें। धन्यवाद!
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. बुध ग्रह को किस राशि में कमजोर माना जाता है?
मीन राशि
2. क्या बुध कुंभ राशि में सहज महसूस करता है?
हाँ, कुंभ राशि बुध के लिए एक अनुकूल राशि है
3. कौन सा ग्रह जब वक्री होता है, तो गलतफहमी पैदा करता है?
बुध राशि
चंद्र ग्रहण 2026 पर राशि अनुसार करें ये चमत्कारी उपाय, दूर होगी हर परेशानी!
चंद्र ग्रहण 2026 को ज्योतिष शास्त्र में केवल एक खगोलीय घटना नहीं माना गया है, बल्कि इसे मानव जीवन, मन और भावनाओं से गहराई से जुड़ा हुआ समय माना जाता है। चंद्रमा मन का कारक ग्रह है और जब ग्रहण के दौरान उस पर पृथ्वी की छाया पड़ती है, तो इसका प्रभाव हमारी सोच, भावनात्मक संतुलन और निर्णय क्षमता पर भी देखने को मिलता है। यही कारण है कि चंद्र ग्रहण का समय विशेष सावधानी और आत्मचिंतन का माना जाता है।
शास्त्रों में बताया गया है कि ग्रहण काल में की गई साधना, मंत्र जप और उपाय सामान्य दिनों की तुलना में अधिक प्रभावशाली होते हैं। खास बात यह है कि हर राशि पर चंद्र ग्रहण का असर अलग-अलग रूप में पड़ता है। ऐसे में यदि व्यक्ति अपनी राशि के अनुसार सही उपाय करता है, तो ग्रहण से उत्पन्न नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं और जीवन में सकारात्मक बदलाव आने लगते हैं। आइए जानते हैं चंद्र ग्रहण के दिन राशि अनुसार कौन-से उपाय करना आपके लिए लाभकारी रहेगा।
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चंद्र ग्रहण 2026 : समय व तिथि
मार्च 2026 में भारत में साल का पहला चंद्र ग्रहण देखने को मिलेगा, जो कई मायनों में खास रहेगा। 03 मार्च, 2026 मंगलवार के दिन यह चंद्र ग्रहण घटित होगा। इस दौरान चंद्रमा का रंग लालिमा लिए दिखाई देगा, जिसे आम भाषा में “ब्लड मून” कहा जाता है। यह चंद्र ग्रहण फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को लगेगा। ग्रहण की शुरुआत दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर होगी और इसका समापन शाम 6 बजकर 47 मिनट पर होगा।
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पहला चन्द्र ग्रहण 2026 – खग्रास चंद्रग्रहण
तिथि
दिन व दिनांक
चंद्र ग्रहण प्रारंभ समय
चंद्र ग्रहण समाप्त
दृश्यता का क्षेत्र
फाल्गुन मास शुक्ल पक्ष पूर्णिमा
मंगलवार, 3 मार्च 2026
दोपहर 15:20 बजे से
सायंकाल 18:47 बजे तक
पश्चिम एशिया के देश पाकिस्तान, अफगानिस्तान, इराक, ईरान, आदि के अतिरिक्त लगभग संपूर्ण एशिया में, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका, दक्षिणी एवं उत्तरी अमेरिका और रूस में दृश्यमान होगा। भारत में यह खग्रास चंद्र ग्रहण ग्रस्तोदय के रूप में दिखेगा क्योंकि भारत के किसी भी क्षेत्र में जब चंद्रोदय होगा, उससे काफी पहले ही यह खग्रास चंद्र ग्रहण प्रारंभ हो चुका होगा इसलिए भारत के किसी भी क्षेत्र में इस खग्रास चंद्र ग्रहण का प्रारंभ देखा नहीं जा सकेगा । भारत के केवल पूर्वी सुदूर राज्यों जैसे बंगाल के उत्तरी पूर्वी क्षेत्र, मिजोरम, नागालैंड, मणिपुर, असम, अरुणाचल प्रदेश, आदि में इस ग्रहण की खग्रास समाप्ति तथा ग्रहण समाप्ति देखी जा सकती है। इसके अतिरिक्त शेष भारत में जब चंद्रोदय होगा तब तक खग्रास समाप्त हो चुका होगा तथा केवल ग्रहण समाप्ति ही दृष्टिगोचर होगी।
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सूतक काल
मार्च 2026 में वर्ष का पहला चंद्र ग्रहण पड़ रहा है, जो भारत में स्पष्ट रूप से देखा जाएगा। इसी कारण इस ग्रहण के साथ सूतक काल का प्रभाव भी माना जाएगा। शास्त्रों के अनुसार, चंद्र ग्रहण से लगभग 09 घंटे पहले सूतक आरंभ हो जाता है।
चंद्र ग्रहण के दिन करें राशि अनुसार उपाय
चंद्र ग्रहण का प्रभाव हर राशि पर अलग-अलग रूप में पड़ता है, क्योंकि चंद्रमा क्योंकि चंद्रमा हमारे मन, भावनाओं और मानसिक स्थिति से जुड़ा गिरह है। ऐसे में ग्रहण के समय यदि राशि के अनुसार सही उपाय किए जाएं, तो नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
मेष राशि
मेष राशि वाले ग्रहण काल में मन को शांत रखते हुए शिव जी का ध्यान करें और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें। ग्रहण समाप्त होने के बाद लाल फल, गुड़ या तांबे का दान करने से मानसिक और गुस्सा शांत होता है।
वृषभ राशि वाले जातकों को दूध, चावल और सफेद फूल अर्पित करना चाहिए। ग्रहण के बाद सफेद वस्तुओं का दान करने से धन संबंधी परेशानियों में राहत मिलती है।
मिथुन राशि
गायत्री मंत्र या “ॐ बुधाय नमः” का जप करें। हरी मूंग, हरी सब्ज़ियां या हरे वस्त्र दान करने से विचारों में स्पष्टता आती है और निर्णय क्षमता मजबूत होती है।
कर्क राशि चंद्रमा की अपनी राशि है, इसलिए विशेष सावधानी जरूरी है। चांदी के पात्र में जल भरकर दान करें और चंद्र देव से मानसिक शांति की प्रार्थना करें।
सिंह राशि
सूर्य देव का स्मरण करें और “ॐ सूर्याय नमः मंत्र का जाप करें। ग्रहण के बाद गेहूं,गुड़ या लाल वस्तुओं का दान आत्मविश्वास बढ़ाता है।
कन्या राशि
कन्या राशि वाले बुध ग्रह की कृपा के लिए कृपा के लिए “ॐ बुधाय नमः” का जप करें। हरे फल या वस्त्र दान करने से कामकाज और स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं में सुधार होता है।
तुला राशि
तुला राशि वाले मां लक्ष्मी की आराधना करें और सफेद मिठाई, चावल या दूध का दान करें। इससे पारिवारिक जीवन में संतुलन और सुख-शांति बनी रहेगी।
वृश्चिक राशि
हनुमान जी का ध्यान करें और हनुमान चालीसा का पाठ करें। मसूर दाल या लाल वस्तुओं का दान भय और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है।
धनु राशि वाले गुरु मंत्र “ॐ बृहस्पतये नमः” का जप करें। पीली दाल, हल्दी या केले का दान भाग्य को मजबूत करता है।
मकर राशि
मकर राशि वाले शनिदेव का स्मरण करें और ॐ शनैश्चराय नमः का जाप करें। काले तिल, कंबल या जूते का दान बाधाओं को कम करता है।
कुंभ राशि
शनिदेव की उपासना करें और जरूरतमंद को काले वस्त्र या लोहे की वस्तु दान करें। इससे मानसिक दबाव कम होता है।
मीन राशि
मीन राशि वाले भगवान विष्णु का स्मरण करें और पीले फल या मिठाई का दान करें। इससे मन को शांति और जीवन में सकारात्मक मिलती है।
गर्भवती महिलाएं बरतें ये सावधानी
चंद्र ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी रखने की परंपरा और सलाह दी जाती है। माना जाता है कि इस समय वातावरण में होने वाले बदलावों का असर मां और शिशु दोनों पर पड़ सकता है, इसलिए सतर्क रहना जरूरी होता है।
ग्रहण काल में गर्भवती महिलाओं को घर के अंदर ही रहना चाहिए और बाहर निकलने से बचना चाहिए।
इस दौरान तेज धार वाले औजारों जैसे चाकू, कैंची या सुई का उपोग नहीं करना चाहिए।
भारी काम, झुकना या अधिक शारीरिक मेहनत करना भी उचित नहीं माना जाता है।
ग्रहण के समय आराम करना सबसे बेहतर माना गया है। मन को शांत रखने के लिए ईश्वर स्मरण हल्का मंत्र जप या सकारात्मक सोच अपनानी चाहिए।
नकारात्मक बातों, डर या तनाव से दूरी बनाकर रखना जरूरी है।
भोजन के मामले में भी सावधानी रखें। ग्रहण के दौरान खाना बनाने या खाने से बचें। पहले से बने भोजन में तुलसी के पत्ते डालकर ही उपयोग करें।
ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें।
इसके अलावा, ग्रहण खत्म होने के बाद घर की साफ-सफाई करना और पूजा स्थल को शुद्ध करना शुभ माना जाता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी तरह का डर या घबराहट न रखें और डॉक्टर द्वारा दी गई सामान्य मेडिकल सलाह का पालन करते रहें।
हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारा यह लेख ज़रूर पसंद आया होगा। अगर ऐसा है तो आप इसे अपने अन्य शुभचिंतकों के साथ ज़रूर साझा करें। धन्यवाद!
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. क्या गर्भवती महिलाओं को चंद्र ग्रहण 2026 के समय बाहर निकलना चाहिए?
नहीं, परंपरागत मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को घर के अंदर ही रहना चाहिए।
2. ग्रहण के समय चाकू, कैंची या सुई क्यों नहीं इस्तेमाल करनी चाहिए?
मान्यता है कि तेज़ धार वाली वस्तुओं का प्रयोग करना इस समय शुभ नहीं माना जाता, इसलिए इससे बचने की सलाह दी जाती है।
3. क्या गर्भवती महिला ग्रहण के दौरान सो सकती है?
इस समय आराम करना बेहतर माना जाता है, लेकिन बहुत गहरी नींद या आलस्य से बचते हुए शांत अवस्था में रहना उचित होता है।
मंगल का कुंभ राशि में गोचर: इन 4 राशियों को फूंक-फूंककर रखने होंंगे कदम!
मंगल का कुंभ राशि में गोचर: एस्ट्रोसेज एआई आपके पाठकों के लिए “मंगल का कुंभ राशि में गोचर” का यह विशेष ब्लॉग लेकर आया है जिसके माध्यम से आपको मंगल गोचर से जुड़ी समस्त जानकारी प्राप्त होगी जैसे कि तिथि और समय आदि। वैदिक ज्योतिष में मंगल देव को अहम स्थान दिया है जिन्हें ग्रहों के सेनापति, युद्ध के देवता और लाल ग्रह के नाम से जाना जाता है।
इसी क्रम में, अब यह जल्द ही अपनी राशि में परिवर्तन करते हुए कुंभ राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। हालांकि, हम सभी इस बात को भली-भांति जानते हैं कि मंगल ग्रह की चाल, दशा, स्थिति या राशि में होने वाला हर बदलाव संसार के साथ-साथ राशियों को प्रभावित करने में सक्षम होता है। ऐसे में, हमारा यह ब्लॉग आपको “मंगल का कुंभ राशि में गोचर” के बारे में विस्तार से बताने जा रहा है।
एस्ट्रोसेज एआई के इस ब्लॉग में आप मंगल गोचर का मनुष्य जीवन समेत सभी राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में जान सकेंगे। अगर आपकी कुंडली में मंगल दुर्बल हैं, तो आप कैसे इस गोचर के नकारात्मक प्रभाव से स्वयं को बचा सकते हैं? कुंडली में मंगल की शुभ-अशुभ स्थिति आपके जीवन को कैसे प्रभावित करती है? जीवन के विभिन्न क्षेत्रों पर इनका प्रभाव आदि के बारे में आपको जानकारी प्रदान करेंगे। बता दें कि मंगल का कुंभ राशि में गोचर का यह ब्लॉग ख़ासतौर पर हमारे अनुभवी एवं विद्वान ज्योतिषियों द्वारा मंगल ग्रह और अन्य ग्रहों की स्थिति के आधार पर तैयार किया गया है ताकि आप मंगल गोचर के दौरान मंगल ग्रह से शुभ परिणाम प्राप्त कर सकें। तो चलिए बिना देर किए शुरुआत करते हैं इस ब्लॉग की और जानते हैं सबसे पहले मंगल गोचर का समय।
मंगल का कुंभ राशि में गोचर: तिथि और समय
बात करें मंगल ग्रह की, तो ज्योतिष की दुनिया में मंगल देव साहस और सेना के कारक माने गए हैं जो अपना राशि परिवर्तन लगभग हर 45 दिनों में करते हैं। सरल शब्दों में कहें, तो मंगल ग्रह एक राशि में करीब 45 दिन तक विराजमान होते हैं और फिर अगली राशि में प्रवेश कर जाते हैं। इसी क्रम में, मंगल देव अब 23 फरवरी 2026 की सुबह 11 बजकर 33 मिनट पर कुंभ राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। बता दें कि कुंभ राशि के स्वामी शनि देव हैं और इनके साथ मंगल ग्रह तटस्थ संबंध रखते हैं। ऐसे में, मंगल के कुंभ राशि में प्रवेश से परिणाम मिलेजुले रह सकते हैं। हालांकि, इस राशि परिवर्तनं का आप पर कैसा असर होगा, यह पूरी तरह से कुंडली में मंगल की स्थिति पर निर्भर करता है।
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कुंभ राशि में मंगल का प्रभाव
कुंभ राशि में मंगल देव की मौजूदगी से जातक को अपने काम करने के तरीके से प्रगति मिलती है और उसकी सोच सबसे अलग होती है।
यह लोग अपने फायदे के लिए नहीं बल्कि समाज के हित से जुड़े विचारों, नए प्रयोगों और उद्देश्यों से प्रेरित होते हैं।
ऐसे जातक अपनी ऊर्जा का उपयोग नए आइडियाज, सामाजिक सुधार और मानवता से जुड़े कार्यों में लगाते हैं।
मंगल की उपस्थिति कुंभ राशि में होने से जातक भावनाओं से ऊपर तर्क और समझदारी को महत्व देता है। साथ ही, अपने लक्ष्य हासिल करने के लिए ज्यादातर साहसी और नए रास्ते अपनाते हैं।
मंगल के प्रभाव से ऐसे जातकों की सोच स्वतंत्र, विद्रोही और पुरानी परंपराओं या मान्यताओं को चुनौती देने वाली होती है।
दूसरी तरफ, मंगल कुंभ राशि में बैठकर व्यक्ति को कभी-कभी अनिश्चितता, भावनात्मक रूप से दूरी बनाए रखने वाला या अपनी बात पर अडिग रहने वाला बना सकते हैं।
कुंभ राशि में मंगल के तहत जन्मे जातकों में किसी के साथ विवाद होने की स्थिति में भावनाओं की कमी, अचानक गुस्सा या फिर जल्दबाज़ी में फैसले लेने की प्रवृत्ति भी देखने को मिल सकती है। षत
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ज्योतिषीय दृष्टि से मंगल ग्रह
वैदिक ज्योतिष में मंगल देव को साहस, व्यक्ति की ऊर्जा, कार्य शुरू करने की क्षमता, साहस और महत्वाकांक्षा का प्रतीक माना गया है।
इन्हें ज्योतिष की दुनिया में कुंज या लाल ग्रह के नाम से जाना जाता है। यह इस बात को दर्शाते हैं है कि हम अपने आत्मविश्वास को कैसे व्यक्त करते हैं, जीवन की समस्याओं का सामना किस तरह करते हैं और अपने लक्ष्यों को पाने के लिए कितनी मजबूती से आगे बढ़ते हैं।
शायद ही आप जानते होंगे कि मंगल दृढ़ निश्चय, शारीरिक शक्ति, सही समय पर ठोस निर्णय लेने और अनुशासन का भी प्रतिनिधित्व करता है।
अगर किसी जातक की जन्म कुंडली में मंगल देव शुभ स्थिति में होते हैं, तो वह व्यक्ति को मज़बूत नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास, सफलता प्राप्त करने की प्रबल इच्छा और प्रतिस्पर्धी सोच का आशीर्वाद देते हैं।
मंगल के शुभ प्रभाव से ऐसे लोग अक्सर रक्षा क्षेत्र, खेल, इंजीनियरिंग, सर्जरी, रियल एस्टेट या अन्य व्यवसाय से जुड़े क्षेत्रों में शानदार प्रदर्शन करते हैं।
इसके विपरीत, अगर मंगल महाराज कमज़ोर या दुर्बल अवस्था में होता है, तो व्यक्ति के स्वभाव में क्रोध, अधीरता और आक्रामकता बढ़ सकती है।
साथ ही, व्यक्ति को दुर्बल मंगल के कारण जल्दबाज़ी में निर्णय लेना, दुर्घटनाएँ, झगड़े और कानूनी परेशानियाँ आदि का सामना करना पड़ सकता है।
मंगल ग्रह की नकारात्मक स्थिति की वजह से कुंडली में मांगलिक दोष भी जन्म लेता है।
कुंडली में मंगल दोष जैसा अशुभ दोष जातक के विवाह, दांपत्य जीवन, रिश्तों और वैवाहिक स्थिरता को प्रभावित करता है।
बात करें मंगल के महत्व की, तो राशि चक्र में यह मेष और वृश्चिक राशि के स्वामी हैं।
किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल महाराज की की स्थिति, उनकी दृष्टि और अन्य ग्रहों के साथ युति दर्शाती है कि व्यक्ति अपनी भावनाओं, कामुक ऊर्जा, सहनशक्ति और आंतरिक शक्ति का उपयोग किस प्रकार करता है।
आध्यात्मिक दृष्टि से मंगल देव अच्छे कर्म, आत्म-अनुशासन, रचनात्मकता और आक्रामक प्रवृत्तियों को छोड़ने की क्षमता का प्रतिनिधित्व करते हैं।
मंगल ग्रह को धार्मिक दृष्टि से भी विशेष माना गया है। बता दें कि सप्ताह में मंगलवार का दिन मंगल देव को समर्पित होता है। इस दिन को नए कार्यों की शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। बहुत से लोग यह नहीं जानते होंगे कि मंगलवार का नाम ही ‘मंगल’ ग्रह के नाम पर रखा गया है और इस दिन हनुमान जी की उपासना से भी मंगल देव शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मंगल ग्रह को पृथ्वी का पुत्र कहा गया है, इसलिए इन्हें भौम पुत्र के नाम से भी जाना जाता है। शिव पुराण में वर्णन मिलता है कि भगवान शिव के पसीने की बूंद से मंगल देव की उत्पत्ति हुई थी जिसके पश्चात उन्हें आकाश में देवता के रूप में स्थापित किया गया।
चलिए अब हम आगे बढ़ते हैं कुंडली के भिन्न-भिन्न भावों पर मंगल ग्रह का प्रभाव जानते हैं।
मंगल ग्रह का अलग-अलग भावों पर प्रभाव
मंगल की स्थिति जातकों के जीवन को कैसे प्रभावित करती है, इसके बारे में जानने के बाद आपको अवगत करवाते हैं केंद्र भावों यानी कि पहले, चौथे, सातवें और दसवें भाव पर मंगल ग्रह का प्रभाव।
प्रथम भाव
जिन जातकों के लग्न भाव में मंगल ग्रह विराजमान होते हैं, उन्हें अपने जीवन में पारिवारिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि मंगल की प्रबल ऊर्जा व्यक्ति को आक्रामक और चिड़चिड़ा बनाने का काम करती है।
चौथा भाव
ऐसे जातक जिनकी कुंडली के चौथे भाव पर मंगल ग्रह का प्रभाव होता है, उन्हें अपने जीवन में पर्याप्त मात्रा में धन-धान्य की प्राप्ति होती है।साथ ही, समाज में लोकप्रियता और मान-सम्मान भी मिलता है।
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सातवां भाव:
यदि मंगल देव आपके सातवें भाव में उपस्थित होते हैं, तो जातकों को रिश्तों में समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इस स्थिति में व्यक्ति अपने अतीत से बाहर नहीं निकल पाता है या फिर उसे जीवनसाथी की तलाश में कठिनाइयों से दो-चार होना पड़ता है।
दसवां भाव
कुंडली के दसवें भाव में मंगल महाराज के बैठे होने से जातक अपने कार्य के प्रति अत्यधिक समर्पित और जुनूनी हो सकता है। साथ ही, यह स्थिति सेना, राजनीति और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में भी सफलता दिलाने में सहायक होती है।
अब हम आपको बताने जा रहे हैं कि कुंडली में कमज़ोर मंगल होने पर कैसे संकेत देता है।
कुंडली में मंगल ग्रह के कमज़ोर स्थिति में होने की वजह से जातक की भावनाओं में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। ऐसे में, जातक तनाव का शिकार हो सकता है।
यदि आपका मंगल कुंडली में पीड़ित होता है या ख़राब होता है, तो यह जातक को आंखों से जुड़े रोग, ब्लड प्रेशर, फोड़े-फुंसी और पथरी जैसे रोग देने का काम कर सकते हैं।
जिन जातकों का मंगल अशुभ या दुर्बल अवस्था में होता है, उनके जीवन में धीरे-धीरे धन से जुड़ी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। इसके अलावा, जातक ज़मीन-जायदाद से जुड़े विवादों में भी फंस सकता है।
मंगल महाराज के कुंडली में नकारात्मक स्थिति में होने के कारण जातक अपने जीवन में स्वास्थ्य समस्याओं से परेशान रहने लगता है जैसे कि उस पर थकान हावी होने लगती है। साथ ही, उसका मन किसी भी काम में नहीं लगता है और पाचन से जुड़े रोग भी घेरने लगते हैं।
मंगल ग्रह कुंडली में अशुभ या दुर्बल स्थिति में होने की वजह से जातक के विवाह में देरी का कारण बन सकते हैं। ऐसे में, शादी की बात पक्की होते-होते अचानक से बिगड़ जाती है या फिर शादी-विवाह के मार्ग में अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
मंगल का कुंभ राशि में गोचर: सरल एवं प्रभावी उपाय
मंगल ग्रह के लिए मंत्र जाप: कुंडली में मंगल देव को मज़बूत करने के लिए मंगल ग्रह के मंत्रों का जाप करना शुभ होता है। आप मंगलवार के दिन “ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः” मंत्र का चंदन की माला से 108 बार जाप करें। इस उपाय को करने से मंगल ग्रह की ऊर्जा संतुलित रहती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।
मंगलवार व्रत करें: मंगल महाराज से शुभ परिणाम पाने के लिए मंगलवार का व्रत करें। संभव हो, तो इस दौरान नमक का सेवन करने से बचें और फलाहार करें। इसके अलावा, नियमित रूप से हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें, फिर सूर्यास्त के बाद भोजन का सेवन करें।
लाल रंग वस्तुओं का दान: मंगल ग्रह से शुभ परिणामों की प्राप्ति के लिए मंगलवार के दिन लाल रंग की वस्तुओं जैसे लाल वस्त्र, मसूर की दाल, लाल चंदन, गुड़ और तांबे के बर्तन आदि का दान करें। इन उपायों को करने से मंगल देव प्रसन्न होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।