14 मार्च को है हिन्दू वर्ष की आखिरी संक्रांति, जानें महत्व, मुहूर्त और पूजन विधि

संक्रांति शब्द का अर्थ होता है सूर्य का राशि परिवर्तन। सूर्य 1 महीने में एक राशि से निकलकर दूसरी राशि में प्रवेश कर जाता है। ऐसे में 1 साल में कुल 12 संक्रांति पड़ती है। सूर्य जिस राशि में प्रवेश करता है संक्रांति को उसी नाम से जाना जाता है। ऐसे में हिंदू वर्ष की आखिरी संक्रांति मीन संक्रांति कही जाती है और इसलिए इसका महत्व भी काफी ज्यादा माना जाता है। इस वर्ष मीन संक्रांति (Meena Sankranti 2021) 14 मार्च 2021 रविवार के दिन पड़ रही है।

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मीन संक्रांति को दक्षिण भारत में कई जगहों पर मीन संक्रमण के भी नाम से जाना जाता है। संक्रमण का मतलब भी राशि परिवर्तन या गोचर ही होता है। किसी भी संक्रांति की ही तरह मीन संक्रांति पर स्नान, दान, पुण्य, पूजन आदि का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसे में मीन संक्रांति के दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं, सूर्यदेव की उपासना करते हैं और अपनी यथाशक्ति अनुसार ब्राह्मणों, जरूरतमंदों और गरीबों को दान दक्षिणा देते हैं।

मीन संक्रांति का यह दिन दक्षिण भारत में और विशेष तौर पर उड़ीसा में बेहद ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। तो आइए जानते हैं इस वर्ष मीन संक्रांति का शुभ मुहूर्त क्या है और पूजन विधि क्या है।

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मीन संक्रांति पुण्य काल

मीन संक्रांति 14 मार्च 2021- दिन रविवार

मीन संक्रांति महापुण्य काल शाम 06 बजकर 18 मिनट से लेकर 

शाम 06 बजकर 27 मिनट तक

पुण्य काल की कुल अवधि 11 मिनट 

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मीन संक्रांति का क्षण

14 मार्च 2021 दिन रविवार को शाम 06 बजकर 18 मिनट पर

अब बात करें मीन संक्रांति के महत्व की तो, हिंदू धर्म में संक्रांति का बेहद ही महत्व बताया जाता है। दान, पुण्य, पूजन, उपवास से अपने जीवन में सुख शांति लाने के साथ-साथ मीन संक्रांति प्रकृति की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन से सूर्य उत्तरायण होता है जिसके चलते दिन बड़ा होने लगता है और रात छोटी होने लगती है। 

संक्रांति पर भगवान सूर्य की पूजा का विधान बताया गया है। इस दिन सूर्य पूजा से व्यक्ति के जीवन से नकारात्मकता दूर होती है और सकारात्मक विचार आने शुरू हो जाते हैं। इसके अलावा सूर्य उपासना से व्यक्ति के अंदर नई ऊर्जा का प्रवाह होता है। 

हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि, जो कोई भी व्यक्ति मीन संक्रांति के दिन देश की पवित्र नदियों गंगा, यमुना, सरस्वती या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करता है उसके जन्म के साथ-साथ पिछले जन्म के पाप दूर होते हैं।

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मीन संक्रांति की पूजन विधि 

  • मीन संक्रांति के दिन जल्दी उठकर पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करें। यदि आप ऐसा नहीं कर सकते हैं या ऐसा करने में असमर्थ हैं तो घर के पानी में ही गंगाजल डालकर उससे स्नान करने के बाद सूर्य देव को प्रणाम करें और उन्हें अर्घ्य दें। 
  • मीन संक्रांति के दिन मंदिर अवश्य जायें। इस दिन घर में की जाने वाली पूजा पाठ में धूप, अगरबत्ती, फल, मिष्ठान, भगवान को चढ़ाएं। 
  • इस दिन की पूजा पूरी होने के बाद अपनी यथाशक्ति के अनुसार ब्राह्मणों, ज़रुरतमंदों और गरीबों को दान दे। 
  • मीन संक्रांति के दिन भूमि दान का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसे में यदि आप समर्थ हैं तो इस दिन जरूरत वाली जगह पर भूमि का दान करें। 
  • इस धन की पूजा में वैदिक मंत्रों का जाप बेहद फलदाई माना गया है। ऐसे में स्पष्ट उच्चारण पूर्वक इस दिन वैदिक मंत्रों का जाप भी अवश्य करें। 

हम आशा करते हैं कि, आपको यह लेख पसंद आया होगा। अब तक एस्ट्रोसेज के साथ बने रहने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

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