ज्येष्ठ पूर्णिमा 2021 : जानें इस विशेष दिन की तिथि, महत्व, मुहूर्त और पूजा विधि

सनातन धर्म में पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस दिन को बहुत ही शुभ माना जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में पूर्णिमा को अलग-अलग नामों से भी जाना जाता है। कहीं इसे पौर्णिमी कहते हैं तो कहीं इस दिन को पूर्णमासी के नाम से जाना जाता है। हिन्दू पंचांग में 12 महीने होते हैं और प्रत्येक महीने के शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि को पूर्णिमा की तिथि पड़ती है। ऐसे में हिन्दू पंचांग के अनुसार एक साल में 12 पूर्णिमा तिथि पड़ती है। पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की पूजा की जाती है और चंद्रमा सभी ग्रहों के बीच मनुष्य के मन और जीवन में माँ का कारक माना गया है। ऐसे में पूर्णिमा का महत्व काफी बढ़ जाता है।

जीवन की दुविधा दूर करने के लिए विद्वान ज्योतिषियों से करें फोन पर बात और चैट

ऐसे में आज हम आपको इस लेख में ज्येष्ठ पूर्णिमा की तिथि, महत्व, मुहूर्त और पूजा विधि बताने वाले हैं।

साल 2021 में कब है ज्येष्ठ पूर्णिमा?

इस साल यानी कि साल 2021 में ज्येष्ठ पूर्णिमा 24 जून यानी कि आज ही के दिन पड़ रही है। 24 जून 2021 को गुरुवार के दिन 03 बजकर 34 मिनट और 39 सेकेंड से पूर्णिमा प्रारम्भ हो जाएगी और 25 जून 2021 को 00 बजकर 11 मिनट 28 सेकेंड पर इसका समापन हो जाएगा।

आइये अब हम आपको ज्येष्ठ पूर्णिमा का महत्व बता देते हैं।

ज्येष्ठ पूर्णिमा का महत्व

हिन्दू पंचांग में ज्येष्ठ का महीना तीसरा महीना है। इस दौरान भारतीय उपमहाद्वीप के इलाके में भीषण गर्मी पड़ती है। नदी-नाले सूखने लगते हैं। ऐसे में हमारे महान दूरद्र्ष्टा ऋषि और मुनियों ने इस महीने में जल का महत्व समझाने के लिए ही गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी जैसे व्रतों के माध्यम से हमें संदेश देने की कोशिश की है। इसी महीने से श्रद्धालु बाबा अमरनाथ के अभिषेक के लिए गंगाजल लेकर यात्रा पर निकलते हैं। 

सनातन धर्म के हर व्रत और शुभ तिथि की ही तरह ज्येष्ठ अमावस्या में भी दान, पूजा आदि का विशेष महत्व माना गया है। खास कर के वैसे जातक जिनका विवाह नहीं हो पा रहा है या फिर विवाह में विघ्न आ रहा हो, उन्हें ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन सफ़ेद वस्त्र धारण कर भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजा करना चाहिए। इससे उनके जीवन में आ रही विवाह संबंधी समस्याएँ दूर हो जाएंगी। इस दिन पवित्र नदी में स्नान करना विशेष फलदायी माना गया है।

ज्येष्ठ पूर्णिमा पूजा विधि

ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन पवित्र नदी में स्नान करने का काफी महत्व है लेकिन महामारी के इस दौर में ऐसा करना सभी के लिए खतरनाक है। ऐसे में आप घर में ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। इससे भी आपको गंगा स्नान जितना ही फल प्राप्त होगा। स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लें। नमक और अन्न का सेवन न करें। ज्यादा समस्या होने पर आप सेंधा नमक खा सकते हैं। फलाहार पर रहें। व्रत के संकल्प के बाद पूरे विधि-विधान से भगवान हनुमान की पूजा करें। इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा करें। भगवान विष्णु की पूजा से इस दिन विशेष लाभ प्राप्त होता है। इसके बाद रात में चंद्रमा देवता की पूजा करें। 

सभी ज्योतिषीय समाधानों के लिए क्लिक करें: एस्ट्रोसेज ऑनलाइन शॉपिंग स्टोर

हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारा यह लेख जरूर पसंद आया होगा। ऐसे ही और भी लेखों के लिए बने रहिए एस्ट्रोसेज के साथ। धन्यवाद !

Dharma

बजरंग बाण: पाठ करने के नियम, महत्वपूर्ण तथ्य और लाभ

बजरंग बाण की हिन्दू धर्म में बहुत मान्यता है। हनुमान जी को एक ऐसे देवता के रूप में ...

51 शक्तिपीठ जो माँ सती के शरीर के भिन्न-भिन्न अंगों के हैं प्रतीक

भारतीय उप महाद्वीप में माँ सती के 51 शक्तिपीठ हैं। ये शक्तिपीठ माँ के भिन्न-भिन्न अंगों और उनके ...

सिद्ध कुंजिका स्तोत्र (Kunjika Stotram) से पाएँ दुर्गा जी की कृपा

सिद्ध कुंजिका स्तोत्र एक ऐसा दुर्लभ उपाय है जिसके पाठ के द्वारा कोई भी व्यक्ति पराम्बा देवी भगवती ...

12 ज्योतिर्लिंग: शिव को समर्पित हिन्दू आस्था के प्रमुख धार्मिक केन्द्र

12 ज्योतिर्लिंग, हिन्दू आस्था के बड़े केन्द्र हैं, जो समूचे भारत में फैले हुए हैं। जहाँ उत्तर में ...

दुर्गा देवी की स्तुति से मिटते हैं सारे कष्ट और मिलता है माँ भगवती का आशीर्वाद

दुर्गा स्तुति, माँ दुर्गा की आराधना के लिए की जाती है। हिन्दू धर्म में दुर्गा जी की पूजा ...

Leave a Reply

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.